महंगे होते स्मार्टफोन से बाजार में सुस्ती, मई में बिक्री 35 प्रतिशत तक घटी; लगातार बढ़ती कीमतों ने घटाई ग्राहकों की खरीदारी

नई दिल्ली । देश के स्मार्टफोन बाजार में मांग में नरमी के संकेत लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। मोबाइल फोन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब बिक्री के आंकड़ों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मई महीने में मोबाइल फोन की बिक्री में सालाना आधार पर 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिसे उद्योग जगत हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मान रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन लागत बढ़ने और उसके बोझ को उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित किए जाने के कारण खरीदारी की रफ्तार प्रभावित हुई है। मोबाइल उद्योग से जुड़े कारोबारियों के अनुसार पिछले कई महीनों से स्मार्टफोन कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में लगातार वृद्धि कर रही हैं। विशेष रूप से मेमरी चिप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की लागत बढ़ने के बाद कंपनियों ने नवंबर 2025 से कीमतों में नियमित संशोधन शुरू किया था। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता और खरीदारी के निर्णयों पर पड़ा है। बाजार में फिलहाल ऑफलाइन बिक्री की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत बनी हुई है, जबकि शेष बिक्री ऑनलाइन माध्यमों से होती है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में दोनों ही चैनलों पर मांग कमजोर हुई है। खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि ग्राहक अब नए स्मार्टफोन खरीदने के फैसले को टाल रहे हैं या कम कीमत वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे प्रीमियम और मिड-रेंज दोनों श्रेणियों की बिक्री प्रभावित हुई है। उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि मई महीने के दौरान स्मार्टफोन शिपमेंट में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट केवल बिक्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि कंपनियों की सप्लाई चेन और वितरण रणनीतियों पर भी असर डाल रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून महीने में भी इसी प्रकार का दबाव बना रह सकता है, क्योंकि कई कंपनियों ने इस अवधि में भी कीमतों में वृद्धि जारी रखी है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही थी, लेकिन दूसरी तिमाही में बाजार की स्थिति तेजी से बदली है। अब उद्योग को उम्मीद है कि दूसरी तिमाही के दौरान शिपमेंट में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हो सकती है। यह संकेत देता है कि मूल्य वृद्धि का असर अब व्यापक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी से मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में लगभग 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। यदि पिछले वर्ष की बढ़ोतरी को भी शामिल किया जाए तो कुछ मॉडलों में कुल मूल्य वृद्धि 40 से 45 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए नया स्मार्टफोन खरीदना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। दूसरी ओर खुदरा विक्रेता भी दबाव महसूस कर रहे हैं। कई कंपनियां कीमतें बढ़ाने के साथ-साथ रिटेल मार्जिन में भी कटौती कर रही हैं। इससे कारोबारियों की लाभप्रदता प्रभावित हो रही है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले महीनों में मांग और कमजोर हो सकती है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार आगामी त्योहारी सीजन स्मार्टफोन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। यदि कंपनियां आकर्षक ऑफर, वित्तीय योजनाएं और प्रतिस्पर्धी मूल्य रणनीति अपनाती हैं तो मांग में कुछ सुधार संभव है। फिलहाल बढ़ती लागत और कमजोर उपभोक्ता मांग के बीच स्मार्टफोन उद्योग चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है।
महंगी होंगी टाटा की पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक गाड़ियां, बढ़ती लागत के बीच कंपनी ने किया बड़ा ऐलान

नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी का दौर देखने को मिलने वाला है। प्रमुख वाहन निर्माता टाटा मोटर्स ने अपने यात्री वाहनों की कीमतों में वृद्धि करने का निर्णय लिया है, जो आगामी 1 जुलाई से प्रभावी होगी। कंपनी के इस फैसले का असर उसके पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों की पूरी रेंज पर पड़ने की संभावना है। बढ़ती उत्पादन लागत और कच्चे माल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को इस कदम का प्रमुख कारण माना जा रहा है। कंपनी द्वारा घोषित नई मूल्य वृद्धि के तहत विभिन्न मॉडलों और वैरिएंट्स की कीमतों में अधिकतम 1.5 प्रतिशत तक का इजाफा किया जाएगा। मौजूदा कीमतों को देखते हुए यह बढ़ोतरी लगभग 10 हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक हो सकती है। हालांकि अंतिम प्रभाव वाहन के मॉडल, वैरिएंट और कीमत के आधार पर अलग-अलग होगा। ऑटोमोबाइल उद्योग पिछले कुछ समय से लागत संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। स्टील, एल्युमिनियम, प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और अन्य कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण वाहन निर्माताओं पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही ऊर्जा लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च और विनिर्माण प्रक्रियाओं पर बढ़ते खर्च ने भी कंपनियों की लागत संरचना को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले वाहन निर्माता आमतौर पर वर्ष की शुरुआत में एकमुश्त कीमतों में संशोधन करते थे, लेकिन अब कंपनियां चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं। इससे ग्राहकों पर अचानक बड़ा बोझ नहीं पड़ता और कंपनियों को भी लागत वृद्धि की भरपाई करने में सुविधा मिलती है। इसी रणनीति के तहत कई वाहन निर्माता इस वर्ष अलग-अलग समय पर कीमतों में संशोधन कर चुके हैं। टाटा मोटर्स ने इससे पहले भी वर्ष के शुरुआती महीनों में अपने कुछ वाहनों की कीमतों में वृद्धि की थी। अब तीन महीने के भीतर दूसरी बार मूल्य संशोधन का फैसला यह संकेत देता है कि उद्योग पर लागत संबंधी दबाव अभी भी बना हुआ है। कंपनी का मानना है कि बढ़ते खर्चों के बीच व्यवसाय की स्थिरता बनाए रखने के लिए मूल्य वृद्धि आवश्यक हो गई है। सिर्फ टाटा मोटर्स ही नहीं, बल्कि देश की अन्य प्रमुख वाहन कंपनियां भी इसी राह पर आगे बढ़ रही हैं। विभिन्न निर्माता उत्पादन लागत और बाजार परिस्थितियों के अनुरूप अपने वाहनों की कीमतों में समय-समय पर बदलाव कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि ऑटो उद्योग वर्तमान समय में लागत प्रबंधन और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में भी लागत दबाव महसूस किया जा रहा है। बैटरी, सेमीकंडक्टर और अन्य तकनीकी उपकरणों की कीमतों में बदलाव का असर वाहन निर्माताओं की लागत पर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियां मूल्य निर्धारण की रणनीति को लगातार अपडेट कर रही हैं ताकि लाभप्रदता और बाजार हिस्सेदारी दोनों को बनाए रखा जा सके। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी महीनों में यदि कच्चे माल और ऊर्जा लागत में स्थिरता नहीं आती है तो वाहन कंपनियां आगे भी सीमित स्तर पर कीमतों में संशोधन कर सकती हैं। ऐसे में वाहन खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए वर्तमान कीमतों पर खरीदारी का अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फीफा का नया मॉडल: खेल, दर्शक और बढ़ता व्यावसायीकरण..

फीफा द्वारा आयोजित 23वें फुटबॉल विश्व कप की शुरुआत हो गई है। इस बार 39 दिन चलने वाले इस टूर्नामेंट की सबसे गौर करने वाली बात यही है कि यह अपने सर्जक जूल्स रिमेट द्वारा प्रतिपादित मूल मूल्यों से कितना भटक गया है। पहला विश्व कप 1930 में उरुग्वे में खेला गया था। उस समय फीफा अध्यक्ष ने विश्व कप को श्रमिक वर्ग के खिलाड़ियों के लिए एक पेशेवर मंच बनाकर इसे सार्वभौमिक एकजुटता और शांति को बढ़ावा देने के साधन के रूप में देखा था। हालांकि 18 कैरट सोने की ट्रॉफी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे 1,248 फुटबॉलर अभी भी साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन यह कहना उचित होगा कि खेल संस्था के नियंत्रण से बाहर के कारणों से वैश्विक शांति हासिल करना असंभव हो गया है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि फीफा द्वारा इस टूर्नामेंट से अधिकतम राजस्व प्राप्त करने के लिए आक्रामक रूप से किए जा रहे प्रयासों से सार्वभौमिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, जो अब उसका सबसे बड़ा आय का स्रोत बन गया है। वर्ष 2010 से यही चलन रहा है। उस साल फीफा ने मेजबान देश के साथ प्रसारण अधिकार, प्रायोजन, टिकट और व्यापारिक वस्तुओं से होने वाली आय साझा करना बंद कर दिया था। इस कदम से खेल संस्था उन देशों से मेजबानी के प्रस्ताव स्वीकार करने लगी जो स्टेडियम और संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण का भारी खर्च उठा सकते थे, न कि उन देशों से जिनकी फुटबॉल में मजबूत साख थी। व्लादीमिर पुतिन द्वारा क्राइमिया पर आक्रमण के चार साल बाद 2018 के टूर्नामेंट का आयोजन रूस को दिया जाना फीफा की अनैतिकता का पहला संकेत था। वर्ष 2022 में कतर का चयन व्यापक रूप से वोट खरीदने और धांधली का परिणाम था। वह एक ऐसा देश है जिसकी फुटबॉल में कोई साख नहीं है और लोकतांत्रिक साख तो उससे भी कम है। हालांकि नवीनतम त्रिपक्षीय आयोजन तीन लोकतांत्रिक देशों-अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको-में आयोजित किया जा रहा है लेकिन यह रिमेट की उम्मीदों से बिल्कुल परे है। सबसे पहले, जिस देश में सबसे अधिक मैच (कुल 104 में से 78) आयोजित होंगे, वह ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़े हुए है, ग्रीनहाउस गैसों का दूसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है, और एक हानिकारक आप्रवासन-विरोधी नीति का पालन करता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को एक विशेष शांति पुरस्कार से सम्मानित करने के बाद, फीफा ने मेजबान देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अमेरिका में होने वाले विश्व कप मैचों के लिए ईरानी प्रशंसकों के टिकट आवंटन रद्द कर दिए हैं। ईरानी टीम को अपने प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्यों, जिनमें फुटबॉल महासंघ के प्रमुख भी शामिल थे, को वीजा नहीं मिलने के बाद अमेरिका से मेक्सिको में अपना ठिकाना बदलना पड़ा। एक सोमाली रेफरी को 11 घंटे की पूछताछ के बाद मियामी से वापस भेज दिया गया। कई गैर-श्वेत देशों के प्रशंसकों को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश से इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद है। अन्य लोग आईसीई एजेंटों द्वारा मनमानी गिरफ्तारी के डर से दूर रह रहे हैं। टिकटों की कीमतें भी कम चौंकाने वाली नहीं हैं। ग्रुप स्टेज के टिकट न केवल चार साल पहले कतर में टिकटों की कीमतों से दोगुने महंगे हैं, बल्कि फीफा वेबसाइट पर गतिशील दाम वाले टिकट और द्वितीयक मूल्य निर्धारण सुविधाओं की शुरुआत ने टिकटों की कीमतों को आसमान छूने लायक बना दिया है, जिससे आम प्रशंसक के लिए टिकट खरीदना लगभग नामुमकिन हो गया है। फाइनल के टिकट की कीमत 7,500 डॉलर से अधिक है, जो 2022 के फाइनल की कीमत से चार गुना से भी अधिक है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो बहुचर्चित इंगलिश प्रीमियर लीग (19 मैच) के एक सीजन टिकट की कीमत 900 डॉलर है और लोकप्रिय यूएफा चैंपियंस लीग के द्वितीयक बिक्री पर एक टिकट की कीमत 348 डॉलर है। अंततः, फीफा दशकों से खेल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले वास्तविक मेहनतकश प्रशंसकों को नाराज करके खुद ही अपना नुकसान करने का जोखिम उठा रहा है।
भारत और केन्या ने मजबूत आर्थिक सहयोग का खाका तैयार किया, व्यापार, कृषि और ऊर्जा क्षेत्र पर विशेष फोकस

नई दिल्ली । भारत और केन्या के बीच आर्थिक, व्यापारिक और विकास सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हालिया बैठकों में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, ऊर्जा और निवेश जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की गई। इस दौरान भविष्य में सहयोग के नए अवसरों की पहचान करने और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। भारत और केन्या के बीच लंबे समय से मजबूत राजनयिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। हाल के संवादों में दोनों देशों ने इस संबंध को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेष रूप से कृषि और कृषि-प्रसंस्करण क्षेत्र को सहयोग का प्रमुख आधार माना गया, जहां भारतीय तकनीक, विशेषज्ञता और निवेश के माध्यम से स्थानीय उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र भी चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। दोनों पक्षों ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, चिकित्सा अवसंरचना के विकास और स्वास्थ्य तकनीकों के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर विचार किया। भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र की विशेषज्ञता और दवा उद्योग की वैश्विक पहचान को देखते हुए इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं काफी व्यापक मानी जा रही हैं। शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने साझेदारी को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। आधुनिक शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। दोनों देशों का मानना है कि मानव संसाधन विकास भविष्य की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। खेल क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। खेल प्रशिक्षण, खेल अवसंरचना और प्रतिभा विकास कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के बीच अनुभवों और संसाधनों के आदान-प्रदान की संभावनाएं तलाशने पर सहमति बनी। इससे युवाओं के लिए नए अवसर तैयार हो सकते हैं और खेल संबंधों को भी मजबूती मिल सकती है। इस बीच, दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के प्रयास भी जारी हैं। व्यापारिक बैठकों के दौरान बाजार पहुंच को बेहतर बनाने, व्यापारिक बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक संबंधों को अधिक संतुलित, विविधतापूर्ण और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए। ऊर्जा क्षेत्र, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहा। स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं, तकनीकी सहयोग और निवेश के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके अलावा डिजिटल अवसंरचना, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और बुनियादी ढांचा विकास जैसे क्षेत्रों को भी भविष्य की साझेदारी के महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों ने व्यापार को सुगम बनाने और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी सकारात्मक कदम उठाए हैं। सीमा शुल्क और व्यापारिक सूचनाओं के आदान-प्रदान से जुड़े समझौतों को द्विपक्षीय व्यापार की पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और केन्या के बीच बढ़ता सहयोग न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगा, बल्कि अफ्रीका और एशिया के बीच आर्थिक संपर्क को भी नई मजबूती देगा। आने वाले वर्षों में निवेश, व्यापार और विकास साझेदारी के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंध और अधिक गहरे होने की संभावना है।
रीवा में तेज रफ्तार कार का कहर, गाय को कुचलने के बाद बाइक सवार छात्रों को मारी टक्कर; मकान में घुसी कार

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Rewa जिले में शनिवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे ने इलाके में सनसनी फैला दी। रीवा-सीधी मार्ग पर महसांव रेडियो स्टेशन के पास तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पहले एक गाय को कुचलते हुए आगे बढ़ी, फिर सामने से आ रही बाइक को टक्कर मार दी। इसके बाद भी कार नहीं रुकी और सड़क किनारे स्थित एक मकान की दीवार तोड़ते हुए अंदर जा घुसी। हादसे में गाय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक सवार दो छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। जानकारी के अनुसार घटना शनिवार सुबह करीब तीन बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार अत्यधिक गति से चल रही थी और चालक अचानक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। सड़क किनारे खड़ी गाय को टक्कर मारने के बाद कार सीधे सामने से आ रही बाइक से जा भिड़ी। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उस पर सवार दोनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे। स्थानीय लोगों के अनुसार घायल दोनों छात्र सीधी की ओर जा रहे थे। दुर्घटना के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। दोनों छात्रों को उपचार के लिए Sanjay Gandhi Memorial Hospital में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे का सबसे भयावह पहलू यह रहा कि बाइक को टक्कर मारने के बाद भी कार नहीं रुकी। अनियंत्रित वाहन सड़क किनारे बने दिनेश केवट के मकान में जा घुसा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मकान की एक दीवार पूरी तरह ढह गई। दीवार गिरने से घर में खड़ा ई-रिक्शा भी क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय मकान के भीतर परिवार के सदस्य सो रहे थे। अचानक हुए जोरदार धमाके से सभी की नींद खुल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार कुछ और अंदर तक घुस जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। सौभाग्य से परिवार के किसी सदस्य को शारीरिक चोट नहीं आई और सभी सुरक्षित बच गए। तड़के हुए हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और राहत कार्य में मदद की। लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने और सड़क पर यातायात सामान्य कराने में भी सहयोग किया। सूचना मिलने पर Gudh Police Station और डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को जब्त कर लिया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर चालक के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। वाहन की गति, चालक की स्थिति और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घायल छात्रों के उपचार और मामले की जांच पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
ओमान तट पर भारतीय नाविकों की मौत की अफवाह निकली झूठी, विदेश मंत्रालय ने बताया सुरक्षित है पूरा क्रू

नई दिल्ली । ओमान के तट के निकट संचालित एक व्यापारी जहाज पर कथित हमले और भारतीय नाविकों के हताहत होने की खबरों को लेकर फैली आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर चल रही अफवाहों पर विराम लग गया है। हाल के दिनों में समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक जहाज को लेकर कई तरह के दावे सामने आए थे। कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि ओमान के तट के पास जहाज पर हमला हुआ है और उसमें सवार भारतीय नाविकों को नुकसान पहुंचा है। इन खबरों के प्रसारित होने के बाद नाविकों के परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों ने तत्काल तथ्यों की पुष्टि की प्रक्रिया शुरू की। जांच और प्रत्यक्ष संपर्क के बाद यह स्पष्ट हुआ कि जहाज पर किसी प्रकार का हमला नहीं हुआ है और चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। अधिकारियों ने बताया कि जहाज के संचालन और क्रू की स्थिति सामान्य है तथा किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। जानकारी के अनुसार, भ्रम की स्थिति तब पैदा हुई जब जहाज से संपर्क स्थापित करने में अस्थायी तकनीकी कठिनाई सामने आई। संचार व्यवस्था में आई रुकावट के कारण कुछ समय तक जहाज से नियमित संपर्क नहीं हो सका। इसी दौरान विभिन्न माध्यमों पर कई अपुष्ट दावे सामने आने लगे, जिन्हें बाद में तथ्यों के आधार पर गलत पाया गया। समुद्री क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी तक संचालित होने वाले जहाजों में संचार संबंधी तकनीकी समस्याएं असामान्य नहीं हैं। कई बार रेडियो या अन्य संचार उपकरणों में अस्थायी बाधा आने से संपर्क प्रभावित हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ किसी दुर्घटना या सुरक्षा संकट से नहीं होता। ऐसे मामलों में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना आवश्यक माना जाता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहाज की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई और उपलब्ध सभी माध्यमों से उसकी गतिविधियों की निगरानी की गई। संबंधित अधिकारियों ने जहाज के जिम्मेदार कर्मियों से संपर्क कर वास्तविक स्थिति की पुष्टि की, जिसके बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि जहाज और उस पर मौजूद सभी लोग सुरक्षित हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और सुरक्षा संबंधी मामलों में अपुष्ट सूचनाओं का प्रसार कितनी तेजी से भ्रम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है, विशेषकर तब जब मामला मानव जीवन और राष्ट्रीय हितों से जुड़ा हो। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और भारतीय नागरिकों से संबंधित किसी भी संवेदनशील सूचना पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करें। साथ ही भ्रामक और अप्रमाणित खबरों को आगे बढ़ाने से बचें ताकि अनावश्यक डर और भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
देवास में अतिक्रमण हटाने पहुंची फॉरेस्ट टीम पर हमला, पथराव में 6 कर्मचारी घायल; ड्रोन और वाहनों में भी तोड़फोड़

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Dewas जिले में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम पर कथित रूप से ग्रामीणों द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना जिनवाणी वन परिक्षेत्र के कमलापुर बीट क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां वन विभाग की कार्रवाई के दौरान जमकर पथराव हुआ। इस घटना में छह वनकर्मी घायल हो गए, जबकि विभागीय वाहनों और ड्रोन को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है। घटना का एक ड्रोन वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वनकर्मी और पुलिसकर्मी खेतों की ओर भागते दिखाई दे रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए विभिन्न वन परिक्षेत्रों का स्टाफ और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा था। कार्रवाई का उद्देश्य कथित रूप से सरकारी वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाना था। इसी दौरान क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो बाद में पथराव में बदल गया। घटना में घायल होने वालों में वनरक्षक मोहन पंचोनिया, ज्योति जाट, कमल राणा, देवकरण मालवीय, सूरज तथा परिक्षेत्र सहायक K K Parmar शामिल हैं। घायलों को पहले कमलापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में चापड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार दो कर्मचारियों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें आगे उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। घायल वनकर्मी ज्योति जाट ने बताया कि कार्रवाई के दौरान अचानक चारों ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। उनके अनुसार कर्मचारियों को संभलने का अवसर तक नहीं मिला और लगातार पत्थर बरसाए जाते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कर्मचारियों के सिर में गंभीर चोटें आईं और उन्हें किसी तरह मौके से सुरक्षित बाहर निकलना पड़ा। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पथराव करीब आधे घंटे तक चलता रहा। विभागीय टीम के अनुसार ग्रामीणों की संख्या काफी अधिक थी और उन्होंने कार्रवाई का विरोध करते हुए वाहनों तथा उपकरणों को भी निशाना बनाया। विभाग का दावा है कि ड्रोन को भी क्षति पहुंचाई गई है। Vikas Mahore ने बताया कि भीलआमला क्षेत्र में वन भूमि पर खेती किए जाने की शिकायतें थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है और उस पर अवैध कब्जे की जांच लंबे समय से चल रही थी। वन विभाग के मुताबिक कार्रवाई का नेतृत्व Ankit Jamod कर रहे थे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति बिगड़ने के बाद टीम को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी पड़ी। वहीं स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा है कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उपलब्ध वीडियो फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर ग्रामीणों की ओर से भी मामले में अपना पक्ष रखे जाने की संभावना है। फिलहाल पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं।
लॉ कॉलेज के नाम पर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, नगर निगम ने 10 करोड़ की भूमि कराई मुक्त

मध्य प्रदेश । जबलपुर में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नगर निगम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए मूल्य की सरकारी भूमि को अपने कब्जे में ले लिया है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के पॉश इलाके राइट टाउन में स्थित इस भूमि पर लॉ कॉलेज संचालित होने का दावा किया जा रहा था, लेकिन जांच में कई तथ्य संदिग्ध पाए जाने के बाद निगम ने कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार, Jabalpur Municipal Corporation के आयुक्त Ramprakash Ahirwar को शिकायत प्राप्त हुई थी कि सरकारी स्वामित्व वाली बहुमूल्य जमीन पर कब्जा किया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि परिसर में लॉ कॉलेज संचालित होने की बात कही जाती है, लेकिन वहां नियमित रूप से न तो छात्र दिखाई देते हैं और न ही शिक्षकों की उपस्थिति नजर आती है। शिकायत मिलने के बाद निगम प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कराई। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि संबंधित परिसर अधिकांश समय बंद रहता है और वहां शैक्षणिक गतिविधियां भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर निगम आयुक्त ने कार्रवाई के निर्देश जारी किए। शुक्रवार को नगर निगम की संपदा शाखा, अतिक्रमण विरोधी दस्ता और क्षेत्रीय अधिकारियों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान परिसर को निगम के कब्जे में लिया गया और मुख्य प्रवेश द्वारों पर ताले लगा दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि मुक्त कराई गई भूमि की अनुमानित बाजार कीमत 10 करोड़ रुपए से अधिक है। संभाग क्रमांक-13 के संभागीय अधिकारी Sagar Borkar ने बताया कि नगर निगम की ओर से शासकीय और निगम स्वामित्व वाली जमीनों की लगातार जांच की जा रही है। इसी क्रम में राइट टाउन स्थित चंचलाबाई स्कूल क्षेत्र की भूमि की पड़ताल की गई थी। जांच में सामने आया कि चंचलाबाई स्कूल के पास स्थित डायवर्सन प्लॉट नंबर-440 और डायवर्सन शीट नंबर-152-सी का एक बड़ा हिस्सा नगर निगम के स्वामित्व में दर्ज है। अधिकारियों के अनुसार इस क्षेत्र में पहले कस्तूरबा स्कूल संचालित होता था। बाद में इस भूमि के एक हिस्से पर कथित रूप से लॉ कॉलेज के नाम पर कब्जा कर लिया गया। नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि जिस परिसर में कॉलेज संचालित होने की बात कही जा रही थी, वहां पर्याप्त शैक्षणिक गतिविधियां नहीं मिलीं। निरीक्षण के दौरान कमरे तो बने मिले, लेकिन नियमित रूप से छात्र और शिक्षक मौजूद नहीं पाए गए। इसी आधार पर प्रशासन ने भूमि की स्थिति और उपयोग को लेकर गंभीरता से कार्रवाई की। नगर निगम का कहना है कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर तत्काल कदम उठाए गए। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि कब्जा मुक्त कराई गई इस बहुमूल्य भूमि का उपयोग भविष्य में सार्वजनिक हित और नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए किया जा सकता है। हालांकि संबंधित पक्ष की ओर से यदि कोई दावा या दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं, तो उनका परीक्षण नियमानुसार किया जाएगा। फिलहाल नगर निगम ने परिसर को अपने नियंत्रण में लेकर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
छोटे स्टार्टअप को बनाया टेक दिग्गज, भारतीय मूल की जयश्री अमेरिका की शीर्ष सेल्फ-मेड महिलाओं में शामिल

नई दिल्ली । भारतीय मूल की कारोबारी नेता जयश्री उल्लाल ने वैश्विक तकनीकी जगत में एक ऐसी सफलता की कहानी लिखी है, जो दूरदर्शिता, नेतृत्व क्षमता और निरंतर मेहनत का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है। एक समय बेहद छोटे स्तर पर काम करने वाली कंपनी की कमान संभालने वाली जयश्री आज अमेरिका की सबसे सफल सेल्फ-मेड महिलाओं में शामिल हैं। उनकी उपलब्धि न केवल भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि दुनिया भर की महिला उद्यमियों और पेशेवरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। जयश्री उल्लाल का शुरुआती जीवन भारत से गहराई से जुड़ा रहा। तकनीक और इंजीनियरिंग के प्रति उनकी रुचि ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका पहुंचाया, जहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इंजीनियरिंग मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की। तकनीकी क्षेत्र में मजबूत शैक्षणिक आधार ने उनके करियर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत उन्होंने सेमीकंडक्टर और तकनीकी कंपनियों में विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ की। इसके बाद नेटवर्किंग उद्योग की अग्रणी कंपनियों में काम करते हुए उन्होंने तकनीकी नवाचार, उत्पाद विकास और वैश्विक व्यवसाय संचालन की गहरी समझ विकसित की। यही अनुभव आगे चलकर उनके लिए नेतृत्व की मजबूत नींव साबित हुआ। करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने एक उभरती हुई नेटवर्किंग कंपनी की कमान संभाली। उस समय कंपनी सीमित संसाधनों और बेहद कम बाजार हिस्सेदारी के साथ संघर्ष कर रही थी। अधिकांश विशेषज्ञों को उसके भविष्य पर संदेह था, लेकिन जयश्री ने बदलती तकनीकी दुनिया में नए अवसरों को समय रहते पहचान लिया। उन्होंने अनुमान लगाया कि क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े डेटा सेंटर आने वाले वर्षों में पूरी डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा बदल देंगे। इस सोच के आधार पर कंपनी ने अपने उत्पादों और सेवाओं को आधुनिक क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना शुरू किया। जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल प्लेटफॉर्म, क्लाउड सेवाओं और बाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ी, कंपनी के समाधान तेजी से लोकप्रिय होते गए। परिणामस्वरूप कंपनी ने वैश्विक तकनीकी बाजार में मजबूत पहचान बनाई और निवेशकों का भरोसा भी हासिल किया। जयश्री के नेतृत्व में कंपनी ने न केवल कारोबार का विस्तार किया बल्कि नवाचार और गुणवत्ता के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान स्थापित की। आज उसके उत्पाद दुनिया भर के बड़े डेटा सेंटरों, क्लाउड सेवा प्रदाताओं और तकनीकी संस्थानों में उपयोग किए जाते हैं। कंपनी की यह सफलता सीधे तौर पर जयश्री की रणनीतिक सोच और नेतृत्व क्षमता से जुड़ी मानी जाती है। जयश्री उल्लाल की उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उन्होंने यह मुकाम किसी पारिवारिक कारोबारी विरासत के सहारे नहीं बल्कि अपनी योग्यता, तकनीकी समझ और पेशेवर अनुभव के दम पर हासिल किया है। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही दृष्टिकोण, जोखिम उठाने का साहस और लगातार सीखते रहने की क्षमता किसी भी व्यक्ति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिला सकती है। वैश्विक मंच पर भारतीय मूल की कई महिलाएं आज तकनीक, वित्त, स्वास्थ्य सेवा, मनोरंजन और कॉरपोरेट नेतृत्व के क्षेत्र में प्रभावशाली भूमिका निभा रही हैं। जयश्री उल्लाल की कहानी इसी नई पीढ़ी की सफलता का प्रतीक है, जिसने अपनी प्रतिभा और नेतृत्व के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है।
फर्जी मार्कशीट के सहारे आंगनबाड़ी नौकरी पाने की कोशिश नाकाम, हाईकोर्ट ने दो महिलाओं की याचिकाएं खारिज कीं

मध्य प्रदेश । टीकमगढ़ जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भर्ती प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से फर्जी मार्कशीट प्रस्तुत करने का मामला अब न्यायालय तक पहुंच गया, जहां Madhya Pradesh High Court ने दो महिलाओं की याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि भर्ती प्रक्रियाओं में दस्तावेजों की सत्यता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब जांच और सत्यापन में मार्कशीट फर्जी पाई गई है, तब याचिकाकर्ताओं को अतिरिक्त सुनवाई का अवसर देने का कोई औचित्य नहीं बनता। मामले की सुनवाई शुक्रवार को हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में हुई। Justice Vishal Mishra की एकल पीठ ने ममता यादव और नीतू राजपूत द्वारा दायर याचिकाओं पर विचार करने के बाद उन्हें निरस्त कर दिया। दोनों महिलाओं ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा भर्ती प्रक्रिया से बाहर किए जाने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देशों को चुनौती दी थी। जानकारी के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग ने 20 जून 2025 को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया के तहत दोनों आवेदिकाओं ने आवेदन प्रस्तुत किए और अपने शैक्षणिक दस्तावेजों के रूप में महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान, भोपाल से जारी 12वीं कक्षा की मार्कशीट संलग्न की। प्रारंभिक दस्तावेज सत्यापन के बाद 18 अगस्त 2025 को जारी अंतरिम मेरिट सूची में दोनों महिलाओं के नाम शीर्ष स्थानों पर शामिल थे। इस कारण उनका चयन लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि भर्ती प्रक्रिया के दौरान 29 अक्टूबर 2025 को जिला चयन समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई कि दोनों आवेदिकाओं द्वारा जमा की गई 12वीं की मार्कशीटें संदिग्ध हैं। शिकायत मिलने के बाद जिला स्तरीय विवाद निवारण समिति ने मामले की जांच शुरू की और संबंधित शिक्षण संस्थान से दस्तावेजों का सत्यापन कराया। जांच के दौरान संस्थान की ओर से 8 जनवरी 2026 को भेजी गई रिपोर्ट में दोनों मार्कशीटों को फर्जी बताया गया। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी ने 26 मई 2026 को आदेश जारी कर दोनों महिलाओं को भर्ती प्रक्रिया के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सात दिन के भीतर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए राहत की मांग की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह बघेल ने पक्ष रखा। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों, जांच रिपोर्ट और संबंधित तथ्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि दस्तावेज सत्यापन में गंभीर अनियमितता सामने आई है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब संबंधित संस्थान स्वयं मार्कशीट को फर्जी घोषित कर चुका है, तब मामले में और सुनवाई करना उचित नहीं है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में अनावश्यक सुनवाई न्यायिक समय की बर्बादी के समान होगी। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाती है, तो दोनों महिलाओं को कानून के तहत उपलब्ध अधिकारों का उपयोग करने की स्वतंत्रता रहेगी। वे आवश्यकता पड़ने पर अग्रिम जमानत या अन्य वैधानिक राहत के लिए सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती हैं।