Mahakal The Master of Time : उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ पर वैश्विक मंथन शुरू, विज्ञान और सनातन का अनोखा संगम

Mahakal The Master of Time : भोपाल। मध्य प्रदेश के आध्यात्मिक शहर उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन ने उज्जैन को एक बार फिर वैश्विक बौद्धिक विमर्श के केंद्र में स्थापित कर दिया है, जहां ‘समय’ की अवधारणा पर विज्ञान और सनातन दृष्टिकोण के समन्वय पर चर्चा हो रही है। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ वसंत विहार स्थित अत्याधुनिक तारामंडल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और वरिष्ठ विचारक सुरेश सोनी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यह आयोजन शासन, विज्ञान और संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर उभरा। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, सांसद अनिल फिरोजिया सहित देश-विदेश के वैज्ञानिक, खगोलविद और शिक्षाविद भी उपस्थित रहे। साइंस सेंटर से उज्जैन को नई पहचान करीब 15.20 करोड़ रुपये की लागत से बने इस आधुनिक साइंस सेंटर ने उज्जैन को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दी है। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से तैयार यह केंद्र विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। विज्ञान और सनातन के बीच सेतु सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच सेतु निर्माण करना है। ‘महाकाल’ यानी समय की अवधारणा को वैज्ञानिक नजरिए से समझने का प्रयास किया जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों के साथ जापान सहित कई देशों के विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं। युवाओं के लिए खास आकर्षण इस आयोजन में युवाओं और विद्यार्थियों के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सैटेलाइट मेकिंग वर्कशॉप, यूएवी और आरसी प्लेन ट्रेनिंग, टेलीस्कोप से आकाश अवलोकन और सनस्पॉट स्टडी जैसी गतिविधियां उन्हें विज्ञान से जोड़ रही हैं। डोंगला में डीप स्काई ऑब्जर्वेशन भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। विकास परियोजनाओं की भी शुरुआत सम्मेलन के साथ ही विकास कार्यों का भी शुभारंभ हुआ। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 701 करोड़ रुपये की लागत से 19 किलोमीटर लंबे फोर-लेन बायपास का भूमिपूजन किया गया। इसके अलावा 22 करोड़ रुपये की लागत से विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के विस्तार की घोषणा की गई। आस्था और विज्ञान का अनोखा संगम वक्ताओं ने कहा कि उज्जैन में महाकाल की नगरी में ‘समय’ पर हो रहा यह मंथन आस्था और आधुनिक विज्ञान के संगम का प्रतीक है। यह आयोजन न केवल नई सोच को जन्म देगा, बल्कि युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
abhishek sharma controversy : अभिषेक शर्मा IPL कोड ऑफ कंडक्ट उल्लंघन के कारण फंसे, जुर्माना और डिमेरिट पॉइंट से मुसीबत में

abhishek sharma controversy : नई दिल्ली । IPL 2026 के अपने पहले मैच में सनराइजर्स हैदराबाद के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन मैच खत्म होने के बाद उन्हें नई मुसीबत का सामना करना पड़ा। 21 गेंदों में 4 चौकों और 4 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 48 रन बनाने के बावजूद वह अर्धशतक से चूक गए। उनकी यह पारी काफी धुआंधार थी, लेकिन ब्लेसिंग मुजरबानी की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में डीप मिड विकेट पर खड़े वरुण चक्रवर्ती के कैच में फंस गए। कैच क्लियर नहीं था, लेकिन थर्ड अंपायर ने कई एंगल से जाँच करने के बाद उन्हें आउट करार दिया। मैच खत्म होने के बाद अभिषेक शर्मा पर IPL कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करने का आरोप लगा। इसके तहत उन्हें मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना और एक डिमेरिट पॉइंट दिया गया। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने गलती किस कारण से की, लेकिन इसे वरुण चक्रवर्ती के कैच से जोड़कर देखा जा रहा है। अभिषेक ने आर्टिकल 2.3 के तहत लेवल 1 का उल्लंघन मानते हुए मैच रेफरी द्वारा लगाई गई सजा को स्वीकार कर लिया। IPL नियमों के अनुसार, लेवल 1 का उल्लंघन अंतिम माना जाता है और खिलाड़ी को मानना पड़ता है। KKR vs SRH मैच में सनराइजर्स हैदराबाद ने टॉस हारने के बावजूद दमखम दिखाया। पहले बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 226 रन बनाए। ट्रैविस हेड ने 21 गेंदों में 46 रन बनाए और अभिषेक शर्मा ने 21 गेंदों में 48 रन। दोनों ने पहले विकेट के लिए 5.4 ओवर में 82 रन जोड़कर तूफानी शुरुआत की। हालांकि दोनों बल्लेबाज अर्धशतक से चूक गए। इसके बाद हेनरिक क्लासेन ने नंबर-4 पर आकर 52 रनों की शानदार पारी खेली। उनका साथ नीतिश कुमार रेड्डी ने 39 रन बनाकर दिया। दोनों के बीच 5वें विकेट के लिए 82 रन की साझेदारी हुई। केकेआर की टीम को लक्ष्य का पीछा करते हुए पूरी तरह दबाव में देखा गया। उन्होंने पूरे 20 ओवर भी नहीं टिकते हुए 161 रन पर अपनी पारी समाप्त की। जयदेव उनादकट ने 3 और नीतिश कुमार रेड्डी ने 2 विकेट चटकाए। नीतिश कुमार रेड्डी को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड भी मिला। इस तरह, मैच के नतीजे में सनराइजर्स हैदराबाद की जीत हुई, लेकिन अभिषेक शर्मा के लिए यह दिन केवल प्रदर्शन का नहीं बल्कि आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट उल्लंघन के कारण विवादों का भी दिन बन गया।
राजेश खन्ना की शादी का अनसुना किस्सा, एक्स गर्लफ्रेंड के घर से गुजर गई बारात

नई दिल्ली । बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार और लाखों दिलों पर राज करने वाले राजेश खन्ना की जिंदगी से जुड़े कई किस्से मशहूर हैं लेकिन उनकी शादी का यह किस्सा सच में काफी दिलचस्प है। 27 मार्च 1973 को डिंपल कपाड़िया से शादी करने वाले राजेश खन्ना ने अपनी बारात का रास्ता अचानक बदल दिया था और अपनी एक्स गर्लफ्रेंड अंजू महेंद्रू के घर के सामने से बारात को निकाला। राजेश खन्ना की जिंदगी पर लिखी किताब कुछ तो लोग कहेंगे में इस अनोखे किस्से का जिक्र मिलता है। किताब के मुताबिक शादी वाले दिन राजेश खन्ना के घर से डिंपल कपाड़िया के घर तक का रास्ता बिल्कुल सीधा तय था। बारात उसी सीधे मार्ग से गुजरने वाली थी लेकिन सुपरस्टार ने अचानक अपनी बारात का रास्ता बदल दिया। उनका मकसद था कि वह अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड अंजू महेंद्रू के घर के सामने से अपनी बारात गुजारे। इस फैसले से बारात में मौजूद कुछ लोग हैरान रह गए लेकिन जो लोग राजेश खन्ना को अच्छे से जानते थे वे इस कदम से चौंके नहीं। किताब में यह भी बताया गया है कि अंजू महेंद्रू और राजेश खन्ना का रिश्ता शादी से कुछ दिन पहले ही खत्म हो चुका था। राजेश खन्ना की फीमेल फैन फॉलोइंग उस समय बेहद जबरदस्त थी। किताब में वर्णन है कि जिस दिन उनकी शादी थी मुंबई के सी-फेस इलाके में पूरे दिन पुलिस का कड़ा बंदोबस्त था। डर यह था कि उनकी दीवानी फैंस शादी की खबर सुनकर खुद को नुकसान पहुंचा सकती थीं। यह बात राजेश खन्ना के स्टारडम और फैन फॉलोइंग को बखूबी दर्शाती है। सात साल लंबा रिलेशनशिप अंजू महेंद्रू और राजेश खन्ना के बीच था और उस रिश्ते का अचानक टूटना उनकी शादी के दिन और भी ड्रामेटिक बन गया। राजेश खन्ना ने अपनी बारात को जानबूझकर इस घर के सामने से निकालकर यह संदेश दिया कि उनका अतीत उनके वर्तमान और भविष्य को प्रभावित नहीं कर सकता। यह घटना न केवल उनके निजी जीवन की जटिलताओं को उजागर करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे एक सुपरस्टार अपनी जिंदगी के बड़े फैसलों में भी अपनी अनोखी शैली और व्यक्तित्व को बनाए रखता है। आज भी इस किस्से को बॉलीवुड की अनकही कहानियों में से एक माना जाता है। राजेश खन्ना की शादी उनकी एक्स-लव अंजू महेंद्रू और बारात का यह अनोखा मोड़ उनके फैन फॉलोइंग और स्टारडम की मिसाल है। यह कहानी सिर्फ बॉलीवुड रोमांस की नहीं बल्कि उस समय की सामाजिक परिस्थितियों और सुपरस्टार के प्रभाव की भी झलक देती है।
रामानंद सागर की सीता भी हुईं फैन रणबीर कपूर की रामायण का टीजर देख बदला मन

नई दिल्ली । रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण को लेकर लंबे समय से दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह बना हुआ है और जैसे ही इसका टीजर सामने आया वैसे ही इसकी तुलना रामायण से शुरू हो गई जिसने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी थी। इसी बीच उस कालजयी सीरियल में सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया का रिएक्शन सामने आया है जिसने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। दिलचस्प बात यह है कि दीपिका चिखलिया शुरुआत में इस फिल्म को लेकर खास उत्साहित नहीं थीं बल्कि उन्होंने पहले कई बार यह कहा था कि रामायण जैसे पवित्र और भावनात्मक ग्रंथ को बार बार नए रूप में पेश करना सही नहीं है क्योंकि हर बार उसमें कुछ नया जोड़ने की कोशिश मूल भाव को प्रभावित कर सकती है। उनके अनुसार बार बार रीमेक बनाने से कहानी की आत्मा कमजोर होने का खतरा रहता है और यही कारण था कि वह नई रामायण फिल्मों को लेकर थोड़ी निराश भी थीं। लेकिन अब जब नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म का टीजर रिलीज हुआ तो उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि टीजर बेहद भव्य और समृद्ध नजर आता है और इसे बहुत खूबसूरती से बनाया गया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब वह इस फिल्म का इंतजार कर रही हैं और उन्हें यकीन है कि यह दर्शकों के लिए एक शानदार अनुभव साबित हो सकती है। दीपिका चिखलिया का यह बदलाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने रामानंद सागर की रामायण में सीता का किरदार निभाकर घर घर में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उस समय यह सीरियल दूरदर्शन पर प्रसारित होता था और इसकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि लोग इसे सिर्फ एक शो नहीं बल्कि आस्था से जुड़ा अनुभव मानते थे। इस शो में अरुण गोविल ने भगवान राम का किरदार निभाया था और उनकी जोड़ी दीपिका के साथ दर्शकों के दिलों में बस गई थी। अब वही अरुण गोविल इस नई फिल्म में एक अलग भूमिका में नजर आएंगे जहां वह दशरथ का किरदार निभा रहे हैं जबकि रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में दिखाई देंगे। फिल्म में सीता का किरदार साई पल्लवी निभा रही हैं और रावण के रूप में यश नजर आएंगे। इसके अलावा सनी देओल, लारा दत्ता, रवि दुबे, राघव जुयाल, कुणाल कपूर और फैसल मलिक जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। यह फिल्म दो भागों में रिलीज की जाएगी जिसमें पहला पार्ट दिवाली के मौके पर दर्शकों के सामने आएगा जबकि दूसरा भाग अगले साल रिलीज होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म का बजट बेहद बड़ा है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में गिना जा रहा है जिससे इसकी भव्यता का अंदाजा लगाया जा सकता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो जहां पहले इस फिल्म को लेकर संदेह और तुलना का माहौल था वहीं अब टीजर के बाद धीरे धीरे सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आ रही है और दीपिका चिखलिया जैसे प्रतिष्ठित चेहरे का समर्थन मिलना इस फिल्म के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि यह सिर्फ एक रीमेक नहीं बल्कि एक नए स्तर का सिनेमाई अनुभव देने की तैयारी में है।
सलमान खान के साथ दूरी की असली वजह सामने अनुशासन और माहौल पर विवेक वासवानी का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली । सलमान खान के करियर की शुरुआती फिल्मों में शामिल पत्थर के फूल को बनाने वाले प्रोड्यूसर विवेक वासवानी ने सालों बाद उस फैसले पर खुलकर बात की है जिसके कारण उन्होंने इस फिल्म के बाद कभी सलमान के साथ दोबारा काम नहीं किया। यह फिल्म सलीम खान द्वारा लिखी गई थी और उस समय सलमान के करियर की एक अहम शुरुआत मानी जाती है लेकिन इसके बावजूद यह सहयोग आगे नहीं बढ़ सका। एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान विवेक वासवानी ने साफ कहा कि वह ऐसे माहौल में काम नहीं कर सकते जहां अनुशासन की कमी हो और लोग शराब पीकर काम करें। उनके मुताबिक फिल्म सेट एक पेशेवर जगह होती है जहां समय और काम दोनों की गंभीरता जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता एक व्यवस्थित और सम्मानजनक कार्य वातावरण है और अगर यह नहीं मिलता तो वह किसी भी बड़े स्टार के साथ काम करने से पीछे हट सकते हैं। विवेक ने सलमान खान के काम करने के तरीके पर भी टिप्पणी की और कहा कि वह कुछ खास निर्देशकों और निर्माताओं के साथ पूरी तरह प्रोफेशनल और अनुशासित रहते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए संजय लीला भंसाली और सूरज बड़जात्या का नाम लिया। उनके अनुसार इन निर्देशकों के साथ सलमान अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं और पूरी तरह नियंत्रण में रहते हैं। इसी तरह उन्होंने आदित्य चोपड़ा का भी जिक्र किया और कहा कि बड़े बैनर और मजबूत निर्देशन के कारण वहां स्टारडम से ज्यादा अभिनय को महत्व दिया जाता है। विवेक वासवानी का मानना है कि ऐसे फिल्ममेकर सलमान खान को एक स्टार नहीं बल्कि एक अभिनेता के रूप में देखते हैं और उनसे उसी स्तर की प्रतिबद्धता की उम्मीद करते हैं। यही वजह है कि सलमान उनके साथ अधिक अनुशासित रहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी के क्रिएटिव इनपुट से समस्या नहीं है लेकिन अनुशासनहीनता बिल्कुल स्वीकार नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर शूटिंग सुबह नौ बजे शुरू होनी है तो किसी का देर से आना पूरी टीम के काम को प्रभावित करता है। उनके अनुसार अगर किसी कलाकार को डायलॉग या कॉस्ट्यूम में बदलाव करना है तो उसे समय से पहले निर्देशक के साथ बैठकर चर्चा करनी चाहिए न कि सेट पर आकर अचानक बदलाव करने चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या पत्थर के फूल के दौरान सलमान ने ऐसा कुछ किया था तो उन्होंने इशारों में कहा कि उस समय ऐसा संभव नहीं था क्योंकि सेट पर उनके पिता सलीम खान मौजूद रहते थे जिससे अनुशासन बना रहता था। इस पूरे बयान से साफ है कि विवेक वासवानी के लिए काम का माहौल और अनुशासन किसी भी बड़े नाम से ज्यादा महत्वपूर्ण है और यही कारण है कि एक सफल शुरुआत के बावजूद यह जोड़ी आगे नहीं बढ़ सकी।
प्यार समय की बर्बादी एकता कपूर के बयान ने छेड़ी नई बहस

नई दिल्ली । टीवी इंडस्ट्री की मशहूर प्रोड्यूसर एकता कपूर एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं इस बार उन्होंने अपनी पर्सनल लाइफ खासकर शादी और प्यार को लेकर खुलकर बात की है एकता कपूर ने साफ कहा कि उन्होंने अब तक शादी नहीं की है लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह भविष्य में शादी नहीं करेंगी हालांकि इसके पीछे की सच्चाई काफी दिलचस्प है हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान एकता कपूर ने बताया कि उनके दोस्त ही उन्हें शादी न करने की सलाह देते हैं और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह उनका काम है दरअसल एकता कपूर अपने काम के प्रति इतनी ज्यादा समर्पित हैं कि उनके करीबी लोगों को लगता है कि वह शादी के लिए जरूरी समय और संतुलन नहीं बना पाएंगी एकता कपूर ने कहा कि आज के समय में शादी करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है उन्होंने माना कि एक उम्र के बाद किसी के साथ एडजस्ट करना काफी मुश्किल हो जाता है खासकर तब जब आप अपने करियर में पूरी तरह डूबे हों उन्होंने यह भी बताया कि वह अपने काम अपने माता पिता और अपने बेटे के साथ इतनी व्यस्त रहती हैं कि किसी और रिश्ते को पर्याप्त समय देना उनके लिए संभव नहीं है एकता कपूर का मानना है कि शादी केवल एक रिश्ता नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी और कमिटमेंट है और अगर आप उस कमिटमेंट को निभा नहीं सकते तो शादी करना ही नहीं चाहिए उन्होंने साफ कहा कि अधूरी जिम्मेदारी के साथ किसी रिश्ते में जाना सही नहीं है इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने दोस्तों की सलाह का जिक्र करते हुए बताया कि उनके दोस्त अक्सर मजाक में लेकिन गंभीरता के साथ कहते हैं कि वह पहले से ही Balaji Telefilms के साथ शादी में हैं क्योंकि वह अपने काम को कभी नहीं छोड़तीं और हर स्थिति में उसे प्राथमिकता देती हैं उनके दोस्तों का कहना है कि वह ऑफिस से कभी दूर नहीं रह सकतीं और अगर किसी शो में समस्या आ जाए तो वह पूरी रात जागकर उसे ठीक करने में लग जाती हैं ऐसे में किसी वैवाहिक रिश्ते को निभाना बेहद कठिन हो सकता है एकता कपूर ने भी इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि वह पिछले कई सालों से अपने काम के साथ एक सफल रिश्ते में हैं और उन्हें इस रिश्ते में किसी तरह का तलाक नहीं चाहिए उनके लिए उनका काम ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है और वह इससे पूरी तरह जुड़ी हुई हैं प्यार को लेकर भी एकता कपूर का नजरिया काफी अलग है उन्होंने इसे समय की बर्बादी तक कह दिया उनके अनुसार आज की दुनिया में लोग अक्सर भावनाओं का सही मूल्य नहीं समझते और कई बार रिश्तों में स्वार्थ भी देखने को मिलता है उन्होंने कहा कि लोग आपका समय और भावनाएं लेकर आपको इस्तेमाल कर सकते हैं इसलिए सावधान रहना जरूरी है हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को एक अच्छा जीवनसाथी मिल जाए तो उस रिश्ते को समय देना और उसे निभाना बेहद जरूरी है इसके साथ ही उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अपने बच्चों और अपने काम से प्यार करना सीखें क्योंकि यही रिश्ते सबसे ज्यादा सच्चे और स्थायी होते हैं एकता कपूर के इस बयान ने एक बार फिर समाज में शादी और रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है जहां एक तरफ लोग उनके विचारों से सहमत नजर आते हैं वहीं कुछ लोग इसे अलग नजरिए से भी देख रहे हैं
बिना एक्ट्रेस के बनी फिल्में फिर भी दर्शकों के दिलों पर किया राज

नई दिल्ली । बॉलीवुड में आमतौर पर फिल्मों की कल्पना हीरो और हीरोइन के बिना अधूरी मानी जाती है लेकिन समय समय पर कुछ ऐसी फिल्में भी सामने आई हैं जिन्होंने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया इन फिल्मों में कोई भी प्रमुख एक्ट्रेस नहीं थी फिर भी इनकी कहानी अभिनय और निर्देशन ने इन्हें बड़ी सफलता दिलाई दर्शकों ने इन फिल्मों को दिल से अपनाया और बॉक्स ऑफिस पर भी इन्होंने शानदार प्रदर्शन किया इन फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इन्होंने यह साबित किया कि एक मजबूत स्क्रिप्ट और दमदार परफॉर्मेंस किसी भी फिल्म को सफल बनाने के लिए काफी होती है चाहे उसमें पारंपरिक हीरोइन की मौजूदगी हो या न हो सबसे पहले बात करते हैं ओएमजी की यह फिल्म अपनी अनोखी कहानी और सामाजिक संदेश के कारण दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई फिल्म में अक्षय कुमार और परेश रावल की जोड़ी ने शानदार अभिनय किया और पूरी फिल्म को अपने कंधों पर उठाया बिना किसी लीड एक्ट्रेस के यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसने कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए इसके बाद अ वेडनेसडे का नाम आता है यह एक सस्पेंस थ्रिलर फिल्म थी जिसे नीरज पांडे ने निर्देशित किया था फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर ने ऐसी जबरदस्त अदाकारी की कि दर्शक अंत तक अपनी सीट से बंधे रहे एक आम आदमी की कहानी को जिस सादगी और ताकत के साथ पेश किया गया उसने इस फिल्म को यादगार बना दिया तारे जमीन पर भी इस सूची में एक बेहद खास फिल्म है हालांकि इसमें भावनात्मक गहराई और बच्चों की दुनिया को दिखाया गया फिल्म में आमिर खान और दर्शील सफारी की केमिस्ट्री ने लोगों का दिल जीत लिया डिस्लेक्सिया जैसे विषय को इतनी संवेदनशीलता के साथ दिखाना आसान नहीं था लेकिन इस फिल्म ने इसे संभव कर दिखाया यही कारण है कि इसे तीन राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले धमाल एक ऐसी फिल्म थी जिसने कॉमेडी के जरिए दर्शकों को खूब हंसाया संजय दत्त अरशद वारसी रितेश देशमुख जावेद जाफरी और आशीष चौधरी जैसे कलाकारों ने मिलकर फिल्म को पूरी तरह एंटरटेनिंग बना दिया बिना किसी लीड एक्ट्रेस के यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और आज भी लोगों की पसंदीदा कॉमेडी फिल्मों में गिनी जाती है फरारी की सवारी एक भावनात्मक कहानी है जो एक पिता और बेटे के रिश्ते के इर्द गिर्द घूमती है शरमन जोशी और बोमन ईरानी ने इसमें बेहद सादगी भरा लेकिन प्रभावशाली अभिनय किया फिल्म यह दिखाती है कि एक पिता अपने बच्चे के सपनों को पूरा करने के लिए किस हद तक जा सकता है यह फिल्म भले ही बहुत बड़ी हिट न रही हो लेकिन दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने में जरूर सफल रही इन सभी फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि सिनेमा केवल ग्लैमर पर निर्भर नहीं है बल्कि एक अच्छी कहानी सशक्त अभिनय और सच्ची भावनाएं ही किसी फिल्म को असली सफलता दिलाती हैं यही वजह है कि बिना हीरोइन के बनी ये फिल्में आज भी याद की जाती हैं
आसमान से इतिहास तक पुष्पक विमान की कहानी और रामायणम् का अनोखा विजन

नई दिल्ली । हनुमान जयंती के अवसर पर रिलीज हुए रामायणम् के पहले टीजर ने दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर दी है। फिल्म में रणबीर कपूर श्रीराम की भूमिका में नजर आ रहे हैं और टीजर में उनकी झलक के साथ साथ जिस एक तत्व ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा वह है पुष्पक विमान। यह वही दिव्य विमान है जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है और जिसे लेकर सदियों से जिज्ञासा बनी हुई है। टीजर में दिखाया गया पुष्पक विमान पारंपरिक चित्रण से अलग है। इसे फूल की आकृति से प्रेरित एक जीवंत संरचना की तरह प्रस्तुत किया गया है जो इसके नाम के अर्थ से मेल खाता है। अब तक रामलीलाओं और फिल्मों में इसे सामान्य उड़ने वाले रथ या पालकी के रूप में दिखाया जाता रहा है लेकिन इस बार इसकी डिजाइन अधिक कल्पनाशील और आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स से भरपूर नजर आती है। यही कारण है कि दर्शकों के बीच इसकी चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। पौराणिक कथाओं में पुष्पक विमान को एक अद्भुत आकाशीय वाहन बताया गया है। रावण इसका उपयोग करता था और इसी के माध्यम से वह आकाश मार्ग से यात्रा करता था। सीता हरण की कथा में भी इसका उल्लेख मिलता है। युद्ध के बाद श्रीराम इसी विमान से सीता और लक्ष्मण के साथ लंका से अयोध्या लौटे थे। कहा जाता है कि यह विमान मूल रूप से कुबेर का था जिसे रावण ने बलपूर्वक छीन लिया था। प्राचीन ग्रंथों में इसकी विशेषताओं का वर्णन बेहद रोचक है। इसे मन की गति से चलने वाला बताया गया है जो आवश्यकता अनुसार आकार बदल सकता था। कुछ कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि देव शिल्पी विश्वकर्मा ने इसे बनाया था जबकि इसकी संरचना ऋषियों के ज्ञान पर आधारित थी। महर्षि भारद्वाज को विमान विद्या का ज्ञाता माना जाता है और उनके नाम से जुड़े ग्रंथों में भी विमानों के उल्लेख मिलते हैं। हालांकि इन सभी विवरणों को लेकर आज भी बहस जारी है कि यह वास्तविक विज्ञान था या महज कल्पना। कुछ लोग इसे प्राचीन भारत की उन्नत तकनीक का संकेत मानते हैं तो कुछ इसे काव्यात्मक अभिव्यक्ति बताते हैं। आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो ऐसे विमानों के अस्तित्व का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है लेकिन इन कथाओं ने कल्पना और नवाचार की सोच को जरूर प्रेरित किया है। रामायणम् के टीजर ने इसी रहस्य को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी ने तकनीक और परंपरा का मेल करते हुए पुष्पक विमान को एक नए रूप में दिखाने की कोशिश की है। यही वजह है कि यह सिर्फ एक पौराणिक वस्तु नहीं बल्कि एक सिनेमाई आकर्षण बन गया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म में इस दिव्य विमान को किस तरह विस्तार से दिखाया जाता है। क्या यह दर्शकों को प्राचीन विज्ञान की झलक देगा या फिर एक भव्य कल्पना के रूप में सामने आएगा। फिलहाल इतना तय है कि पुष्पक विमान ने एक बार फिर लोगों की कल्पना को पंख दे दिए हैं और इतिहास तथा मिथक के बीच की रेखा को और भी धुंधला कर दिया है।
सदीभर का सिनेमाई सफर कैसे रामायण ने हर दौर में जीता दर्शकों का दिल

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में रामायण केवल एक कहानी नहीं बल्कि भावनाओं आस्था और सांस्कृतिक पहचान का आधार रही है यही कारण है कि सिनेमा की शुरुआत से लेकर आज के आधुनिक दौर तक यह महाकाव्य लगातार नए रूपों में दर्शकों के सामने आता रहा है और हर बार उतनी ही गहराई से लोगों के दिलों को छूता है इस सफर की शुरुआत साल 1917 में हुई जब दादासाहेब फाल्के ने मूक फिल्म लंका दहन बनाई उस दौर में तकनीक सीमित थी लेकिन आस्था असीम थी इस फिल्म में अण्णा सालुंके ने राम और सीता दोनों की भूमिका निभाई जो अपने आप में अनोखा प्रयोग था यह फिल्म भारतीय सिनेमा की शुरुआती सफलताओं में शामिल हुई और इसने पौराणिक कथाओं को परदे पर लाने की परंपरा शुरू की इसके बाद दशकों तक इस महागाथा पर फिल्में बनती रहीं राम राज्य जैसी फिल्में अपने समय की बड़ी हिट साबित हुईं जबकि संपूर्ण रामायण ने पूरी कथा को विस्तार से दिखाने की कोशिश की आगे चलकर रामायण द लीजेंड ऑफ प्रिंस रामा जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की एनीमेशन फिल्म ने इस कहानी को वैश्विक पहचान दिलाई वहीं हनुमान बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई अगर कुल आंकड़ों की बात करें तो मुख्य कथा पर लगभग पचास फिल्में बन चुकी हैं जबकि अलग अलग पात्रों और घटनाओं को जोड़कर यह संख्या साठ से ज्यादा हो जाती है एनीमेशन और लघु फिल्मों को मिलाकर यह आंकड़ा करीब दो सौ तक पहुंचता है जो इस बात का प्रमाण है कि हर दौर इस कथा को अपने तरीके से जीना चाहता है टीवी की दुनिया में रामानंद सागर की रामायण ने इतिहास रच दिया अरुण गोविल दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी द्वारा निभाए गए किरदार इतने लोकप्रिय हुए कि दर्शकों ने उन्हें पूजनीय मान लिया 1987 से 1988 के बीच प्रसारित इस शो के दौरान सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था और 2020 में दोबारा प्रसारण के समय भी इसने रिकॉर्ड तोड़ दिए इसके बाद भी कई टीवी शोज आए जैसे सीता के राम और श्रीमद रामायण कुल मिलाकर हिंदी में कई बड़े और छोटे संस्करण बनाए जा चुके हैं जो इस कथा की निरंतर लोकप्रियता को दर्शाते हैं अब एक बार फिर यह महाकाव्य बड़े स्तर पर लौट रहा है निर्देशक नितेश तिवारी की नई फिल्म रामायण में रणबीर कपूर साई पल्लवी यश सनी देओल जैसे बड़े कलाकार नजर आएंगे इसे वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी है और इसका पहला भाग दिवाली 2026 में रिलीज होगा असल में रामायण की शक्ति इसकी कालातीतता में है इसमें त्याग कर्तव्य प्रेम और धर्म जैसे जीवन के मूल मूल्य समाहित हैं यही वजह है कि तकनीक बदलती है माध्यम बदलते हैं लेकिन यह कथा हर पीढ़ी के लिए नई बनी रहती है और आगे भी यूं ही प्रेरणा देती रहेगी
दतिया सीट खाली, 3 साल की सजा के बाद कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त

भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त कर दी गई है। विधानसभा सचिवालय ने शुक्रवार को आदेश जारी करते हुए निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 22-दतिया को रिक्त घोषित कर दिया। यह कार्रवाई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा 2 अप्रैल 2026 को सुनाए गए फैसले के बाद हुई, जिसमें राजेंद्र भारती को एफडी फर्जीवाड़े के मामले में तीन साल की सजा और एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया था। संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। इसी आधार पर 2 अप्रैल 2026 से उनकी सदस्यता निरस्त मानी गई और सीट खाली घोषित कर दी गई। क्या है मामलाराजेंद्र भारती पर जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष रहते हुए एफडी दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप था। जांच में सामने आया कि अवधि और ब्याज दर में बदलाव कर अवैध लाभ लिया गया। अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। हालांकि कोर्ट ने उन्हें जमानत भी दे दी है, जिससे उन्हें तत्काल जेल नहीं जाना पड़ा। राजनीतिक विवाद तेजइस फैसले के बाद प्रदेश में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई भाजपा के दबाव में की गई है और नियमों के खिलाफ है। पार्टी ने कहा है कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि विधायक को अपील का समय दिए जाने के बावजूद सदस्यता खत्म करना गलत है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ वकीलों की टीम इस मामले को लेकर कानूनी तैयारी कर रही है। वहीं, राज्य सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई कानून के तहत हुई है और इसका किसी राजनीतिक मकसद से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो साल से अधिक की सजा मिलने पर सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। आगे क्या होगाअदालत ने राजेंद्र भारती को अपील के लिए 60 दिन का समय दिया है। यदि इस दौरान उन्हें उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलती है, तो दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय है। नियमों के अनुसार, सीट खाली होने के छह महीने के भीतर चुनाव कराना आवश्यक होता है। विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त होने की जानकारी चुनाव आयोग को भेज दी है, अब आगे की प्रक्रिया आयोग तय करेगा।