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भारत ने रक्षा निर्यात में बनाया नया रिकॉर्ड, 80 से अधिक देश खरीद रहे हथियार

नई दिल्ली। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। रक्षा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में देश का रक्षा निर्यात अब तक के उच्चतम स्तर 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले 62 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है, जब निर्यात 23,622 करोड़ रुपये था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा निर्यातकों और अन्य सभी सहयोगियों की सराहना की। उन्होंने कहा, “यह बड़ी छलांग भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। देश रक्षा निर्यात में सफलता की एक शानदार कहानी लिख रहा है।” 2025–26 में भारत के रक्षा निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। आज भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर ₹38,424 करोड़ तक पहुँच गया है। pic.twitter.com/D6j9uCDS8V — Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 2, 2026 निजी और सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान रक्षा निर्यात में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) का योगदान 54.84 प्रतिशत और निजी उद्योग का योगदान 45.16 प्रतिशत रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ ने इसे सहयोगात्मक और आत्मनिर्भर रक्षा तंत्र की ताकत बताया।वैश्विक विस्तार रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारत वित्त वर्ष 2025-26 तक 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। साथ ही, निर्यातकों की संख्या भी बढ़कर 145 हो गई है, जो पिछले वर्ष के 128 से 13.3 प्रतिशत अधिक है। मंत्रालय के अनुसार यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को विश्व के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल करने के लक्ष्य के अनुरूप है।

महाकाल के दर्शन करने उज्‍जैन पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, सपत्नीक भस्म आरती में हुए शामिल

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी पत्नी के साथ पहुंचे। उन्होंने बाबा महाकाल के गर्भगृह में प्रवेश कर विधिपूर्वक पूजन-अर्चन किया और भस्म आरती में शामिल होकर दिव्य दर्शन किए। तड़के होने वाली भस्म आरती में भाग लेने के बाद धर्मेंद्र प्रधान करीब दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर ध्यान में लीन रहे। इस दौरान मंदिर परिसर में गूंजते वैदिक मंत्र, ढोल-नगाड़ों की ध्वनि और भक्तिमय वातावरण ने पूरे अनुभव को आध्यात्मिक बना दिया। आरती के बाद केंद्रीय मंत्री ने गर्भगृह में भगवान महाकाल का अभिषेक कर देश की उन्नति, समाज की समृद्धि और विश्व शांति की कामना की। उन्होंने कहा कि भस्म आरती का अनुभव आत्मिक संतोष देने वाला होता है और यह आंतरिक शांति व ऊर्जा का स्रोत है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में शांति और सद्भाव की आवश्यकता पहले से अधिक है। ऐसे समय में भगवान महाकाल के चरणों में उन्होंने देश की प्रगति, सनातन संस्कृति के विस्तार और विश्व कल्याण की प्रार्थना की। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उज्जैन में श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर में उन्हें गौसेवा का अवसर मिला, जिसे उन्होंने भारतीय संस्कृति की करुणा और लोकमंगल की भावना का प्रतीक बताया।

LPG की कमी पर पार्टी लाइन से हटकर कमलनाथ का बयान, बोले- ऐसा कुछ नहीं, बस माहौल बनाया जा रहा

छिंदवाड़ा। कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने देश में LPG की कमी को लेकर पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता में कोई कमी नहीं है बल्कि सिर्फ एक माहौल बनाया जा रहा है जिससे आम लोगों के बीच संकट का भ्रम फैल रहा है। उन्होंने इसे कमी नहीं बल्कि अव्यवस्था बताया। कमलनाथ का बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लगातार देश में LPG की किल्लत और लंबी लाइनों की शिकायत कर रही है। गुरुवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच एलपीजी और ईंधन की उपलब्धता को लेकर बहस भी हुई। भाजपा ने कहा कि सरकार स्थिति को सक्रिय रूप से प्रबंधित कर रही है जबकि कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर ईंधन की उपलब्धता पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा अगर संकट नहीं है तो इसका असर जमीन पर दिखना चाहिए। उपभोक्ता को भरोसा होना चाहिए कि उन्हें मांग पर LPG पेट्रोल और डीजल मिलेंगे। अगर दबाव है तो प्रधानमंत्री के दावे सही नहीं हैं। सांसद मनीष तिवारी ने सवाल उठाया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार कब तक अस्थायी समाधान अपनाएगी। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति से निपटने के लिए उत्पाद शुल्क कम करना और सीमा शुल्क हटाना जरूरी है। उधर कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा कि अप्रैल के बाद से हर चीज की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और चुनाव खत्म होने के बाद उर्वरक पेट्रोल और डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

‘CBI अफसर’ बनकर 2.52 करोड़ की ठगी, साइबर गैंग के 3 और आरोपी दिल्ली से गिरफ्तार

ग्वालियर । 2.52 करोड़ रुपये की हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी के मामले में ग्वालियर क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है। एयरफोर्स के रिटायर्ड रेडियोलॉजिस्ट को सीबीआई अधिकारी बनकर ठगने वाले गिरोह के तीन और आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। इस केस में अब तक कुल 7 आरोपी पकड़े जा चुके हैं। गिरफ्तार आरोपियों को ग्वालियर लाया गया है, जहां उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को पहले कुछ चुनिंदा खातों में डाला गया और फिर 15 राज्यों के 300 से ज्यादा बैंक खातों में ट्रांसफर कर ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई। दिल्ली से पकड़े गए आरोपी, बैंक नेटवर्क का खुलासाजांच में पता चला कि करीब 28 लाख रुपये इंडसइंड बैंक के एक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम दिल्ली पहुंची और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उन्हें “म्यूल अकाउंट” के रूप में साइबर ठगों को बेचते थे। पूरा नेटवर्क टेलीग्राम के जरिए संचालित होता था। कौन क्या करता थाहरीश गढ़वाल (27) – छिंदवाड़ा निवासी, दिल्ली में रहकर बैंक खाते खुलवाता और ऑपरेट करता था।सौरव यादव (23) – इसके खाते में 28 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे।शरद डेहरिया (20) – सौरव के साथ जॉइंट अकाउंट संचालित करता था। 300 से ज्यादा खातों में पहुंचाई गई रकमठगी की राशि सबसे पहले दिल्ली, नोएडा, आंध्र प्रदेश के गुंटूर और वाराणसी के पांच खातों में भेजी गई। इनमें आंध्र प्रदेश के दो खातों में करीब 1.5 करोड़ और दिल्ली-यूपी के खातों में लगभग 1 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके बाद यह रकम देश के 15 राज्यों के 300 से अधिक खातों में फैलाई गई। फर्जी फर्म के जरिए लेनदेनजांच के दौरान दिल्ली की एक फर्म “जिंग्गा क्रंच एंड स्नैक्स” के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर होने का खुलासा हुआ। पुलिस ने संबंधित लोगों से पूछताछ की, जिन्होंने बताया कि यह फर्म दूसरों के कहने पर खोली गई थी और बदले में उन्हें 2.5 लाख रुपये कमीशन मिला था। ऐसे रचा गया ठगी का जालग्वालियर के विंडसर हिल्स निवासी 90 वर्षीय रिटायर्ड डॉक्टर को आरोपियों ने व्हाट्सऐप कॉल कर खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। आधार और पैन कार्ड के दुरुपयोग का डर दिखाकर उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया। आरोपियों ने 27 दिनों तक उन्हें वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और इस दौरान अलग-अलग खातों में 2.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

उज्जैन में गुरकीरत सिंह मनोचा का अंतिम संस्कार, 21 दिन बाद पहुंचा पार्थिव शरीर, CM समेत जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी छात्र गुरकीरत सिंह मनोचा का शुक्रवार को चक्रतीर्थ शमशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों को सांत्वना दी। गौरतलब है कि गुरकीरत सिंह की 14 मार्च को कनाडा में हत्या कर दी गई थी। घटना के 21 दिन बाद शुक्रवार सुबह उनका पार्थिव शरीर उज्जैन स्थित घर लाया गया। जैसे ही शव घर पहुंचा, परिजन भावुक हो उठे और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। मां ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से शव लाने वाले एंबुलेंस चालक का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। सुबह करीब पौने 10 बजे अंतिम यात्रा घर से शुरू हुई। सबसे पहले गुरुद्वारे में अंतिम अरदास की गई, जिसके बाद चक्रतीर्थ स्थित विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग, रिश्तेदार और परिचित मौजूद रहे। पार्थिव शरीर गुरुवार शाम अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचा था, जहां आवश्यक कस्टम और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद रात करीब 9 बजे एंबुलेंस के जरिए उज्जैन के लिए रवाना किया गया। हमले में गई थी जानजानकारी के अनुसार, कनाडा के फोर्ट सेंट जॉन शहर में 14 मार्च को गुरकीरत सिंह पर पहले 10-12 युवकों ने हमला किया और फिर उस पर वाहन चढ़ा दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद से परिवार बेटे के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहा था, जो अब 21 दिन बाद पूरा हो सका।

MP Board Result: 15 अप्रैल से पहले आएंगे 10वीं-12वीं के नतीजे, 16 लाख छात्रों ने दी थी परीक्षा

भोपाल। मध्यप्रदेश में 10वीं और 12वीं के छात्रों का इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है। माध्यमिक शिक्षा मंडल रिजल्ट जारी करने की तैयारियों के अंतिम चरण में है और संभावना है कि परिणाम 15 अप्रैल से पहले, यानी 7 से 12 अप्रैल के बीच घोषित किए जा सकते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, सभी जरूरी प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं और रिजल्ट को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इस वर्ष करीब 16 लाख छात्र बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुए थे, इसलिए समय पर परिणाम जारी करना विभाग की प्राथमिकता है। 16 लाख से ज्यादा छात्रों ने दी परीक्षाप्रदेशभर में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इनमें लगभग 9.07 लाख छात्र 10वीं और करीब 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा संचालन के लिए राज्य में 3856 केंद्र बनाए गए थे। नकल रोकने के लिए कड़े इंतजामपरीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के लिए इस बार फ्लाइंग स्क्वॉड, सीसीटीवी निगरानी और प्रश्नपत्र वितरण की वीडियोग्राफी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। इसके बावजूद प्रदेशभर में करीब 100 नकल प्रकरण सामने आए। इनमें मुरैना में सबसे ज्यादा 41 और भोपाल में 20 मामले दर्ज किए गए। रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण मेंस्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि कॉपियों की जांच के बाद अब क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिजल्ट पूरी तरह “फुलप्रूफ” होना चाहिए, ताकि छात्रों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। विशेषज्ञों की सलाहडॉक्टरों और काउंसलर्स ने छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी है कि रिजल्ट के दौरान तनाव से बचें। बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उन्हें मानसिक सहयोग दें। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और सकारात्मक माहौल बेहतर परिणाम में मदद करते हैं। समय पर रिजल्ट से मिलेगी राहतशिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि परिणाम समय पर घोषित किए जाएं, ताकि छात्र बिना देरी के अगली कक्षा या कोर्स में प्रवेश ले सकें। तय समयसीमा में रिजल्ट जारी होने पर यह लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

ईरान-US युद्ध का असर, आम उपभोक्ताओं को राहत, लेकिन तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान

नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिख रहा है, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम डबल हो गए हैं। इसके बावजूद भारत में रिटेल कीमतें स्थिर हैं, जिससे तेल कंपनियों की सेहत पर दबाव बढ़ गया है। 3 अप्रैल सुबह 6 बजे के रेट के अनुसार दिल्ली में इंडियन ऑयल के पंप पर साधारण पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर बिक रहा है। XP95 पेट्रोल ₹101.89 और XG डीजल ₹91.49 प्रति लीटर की दर पर उपलब्ध हैं। कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, फिलहाल पेट्रोल पर कंपनियों को प्रति लीटर लगभग ₹24 और डीजल पर करीब ₹104 का नुकसान हो रहा है। इस अंतर को “अंडर-रिकवरी” कहा जाता है, जिसे कंपनियां अपने मुनाफे से पूरा कर रही हैं।सरकार ने क्यों नहीं बढ़ाए दाम? उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की और तेल कंपनियों को भी कीमतें स्थिर रखने का भार दिया। युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर के पार जा चुकी हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित देशभर में फ्यूल सप्लाई सामान्य है। सरकार ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर दी है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल और अन्य उपोत्पादों की कमी नहीं है। वैश्विक पेट्रोल-डीजल दामों में भारी उछाल पेट्रोल – म्यांमार 100%, फिलीपींस 71.6%, मलेशिया 52.4%, ऑस्ट्रेलिया 46.5%, UAE 40.8%डीजल – म्यांमार 119.9%, लाओस 117.5%, फिलीपींस 111%, कंबोडिया 92%, वियतनाम 91.3%, UAE 86.1%

किताबों के नाम पर कमीशन- शिक्षा या व्यापार?

– डॉ. सत्यवान सौरभशिक्षा को सदैव समाज की आत्मा, विकास का आधार और समान अवसरों का सेतु माना गया है। यह केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक के निर्माण की प्रक्रिया भी है। परंतु जब यही शिक्षा लाभ कमाने का साधन बन जाए, तो यह चिंता का विषय ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के लिए एक गंभीर चेतावनी बन जाती है। हाल ही में सामने आई खबर कि कुछ निजी विद्यालय 50 प्रतिशत तक कमीशन लेकर किताबें बेच रहे हैं, इस चिंता को और अधिक गहरा करती है। यह केवल एक प्रशासनिक अनियमितता नहीं, बल्कि शिक्षा के मूल स्वरूप पर सीधा आघात है। आज शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी है, प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, और साथ ही बढ़ा है शिक्षा का खर्च। लेकिन इस बढ़ते खर्च के पीछे यदि गुणवत्ता, बेहतर सुविधाएं और आधुनिक संसाधन हों, तो इसे एक हद तक उचित ठहराया जा सकता है। समस्या तब उत्पन्न होती है, जब शिक्षा के नाम पर अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ के नीचे दबाया जाने लगे। किताबों के नाम पर लिया जा रहा भारी कमीशन इसी प्रवृत्ति का एक उदाहरण है। कई निजी विद्यालय अभिभावकों को यह निर्देश देते हैं कि वे केवल स्कूल द्वारा निर्धारित दुकानों से ही किताबें खरीदें या सीधे स्कूल परिसर से किताबें लें। यह स्थिति एक प्रकार का एकाधिकार (मोनोपॉली) पैदा करती है, जहां अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं बचता। खुले बाजार में उपलब्ध सस्ती या वैकल्पिक पुस्तकों को खरीदने की स्वतंत्रता उनसे छीन ली जाती है। परिणामस्वरूप, उन्हें मजबूरी में अधिक कीमत चुकानी पड़ती है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में शामिल होता है। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का भी घोर अभाव है। अभिभावकों को यह नहीं बताया जाता कि किन आधारों पर इन पुस्तकों का चयन किया गया है, उनकी वास्तविक कीमत क्या है, और उन पर कितना अतिरिक्त लाभ जोड़ा गया है। कई बार तो यह भी देखा गया है कि एक ही विषय की पुस्तक हर वर्ष बदल दी जाती है, ताकि पुरानी किताबें किसी काम की न रहें और नई किताबें खरीदने के लिए अभिभावक बाध्य हों। यह प्रवृत्ति न केवल आर्थिक शोषण को बढ़ावा देती है, बल्कि संसाधनों की अनावश्यक बर्बादी भी करती है। यह स्थिति केवल आर्थिक दृष्टि से ही चिंताजनक नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के मूल उद्देश्य को भी कमजोर करती है। जब विद्यालय ज्ञान के केंद्र के बजाय लाभ कमाने के साधन बन जाते हैं, तो शिक्षा का मूल्य स्वतः ही गिरने लगता है। शिक्षक और विद्यार्थी के बीच का संबंध, जो कभी विश्वास और मार्गदर्शन पर आधारित होता था, धीरे-धीरे एक औपचारिक लेन-देन में बदलने लगता है। बच्चों के समग्र विकास की जगह संस्थान का आर्थिक लाभ प्राथमिकता बन जाता है। अभिभावकों की स्थिति इस पूरे परिदृश्य में सबसे अधिक दयनीय हो जाती है। वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए सर्वोत्तम शिक्षा चाहते हैं, लेकिन उन्हें बार-बार आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवारों के लिए यह बोझ और भी अधिक भारी हो जाता है। कई बार वे अपनी अन्य आवश्यकताओं में कटौती करके इन खर्चों को पूरा करते हैं। यह स्थिति सामाजिक असमानता को भी बढ़ावा देती है, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल उन लोगों तक सीमित होती जा रही है, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं। इस पूरे मुद्दे का एक और महत्वपूर्ण पहलू है—सिलेबस में बार-बार होने वाला बदलाव। हर वर्ष या दो वर्ष में पाठ्यक्रम में छोटे-मोटे बदलाव कर दिए जाते हैं, जिससे पुरानी किताबें अप्रासंगिक हो जाती हैं। यह बदलाव अक्सर शैक्षणिक आवश्यकता से अधिक व्यावसायिक हितों से प्रेरित प्रतीत होता है। यदि पाठ्यक्रम में वास्तव में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, तो केवल किताबों के संस्करण बदलना और नई किताबें अनिवार्य करना कहीं न कहीं संदेह पैदा करता है। सबसे चिंताजनक पहलू है—शिक्षा विभाग की निष्क्रियता। नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। इसके बावजूद, यह प्रथा खुलेआम जारी है। इसका अर्थ यह है कि या तो नियमों का पालन नहीं हो रहा, या फिर उनके पालन को सुनिश्चित करने की इच्छाशक्ति का अभाव है। यह खामोशी कहीं न कहीं इस व्यवस्था को मौन स्वीकृति देती प्रतीत होती है। यह भी आवश्यक है कि हम इस समस्या को केवल आलोचना तक सीमित न रखें, बल्कि इसके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की बात करें। सबसे पहले, शिक्षा विभाग को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। केवल चेतावनी या औपचारिक नोटिस पर्याप्त नहीं होंगे; आवश्यक है कि ऐसे मामलों में दंडात्मक कार्रवाई भी हो, ताकि एक स्पष्ट संदेश जाए। दूसरे, किताबों की बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। स्कूलों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे कौन-सी किताबें क्यों निर्धारित कर रहे हैं और उनकी कीमत क्या है। यदि संभव हो, तो सभी किताबों की सूची ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाए, ताकि अभिभावक कहीं से भी उन्हें खरीद सकें। इससे एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी बनी रहेगी और कीमतों में अनावश्यक वृद्धि पर रोक लगेगी। तीसरे, सिलेबस में बार-बार होने वाले अनावश्यक बदलावों पर भी नियंत्रण होना चाहिए। यदि पाठ्यक्रम में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं है, तो किताबों को बार-बार बदलने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। इससे न केवल अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। चौथे, अभिभावकों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा। वे यदि संगठित होकर अपनी बात रखते हैं, तो इस प्रकार की प्रथाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। समाज के अन्य वर्गों, जैसे सामाजिक संगठनों और मीडिया को भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाना चाहिए। अंततः, हमें यह समझना होगा कि शिक्षा कोई वस्तु नहीं है, जिसे मुनाफे के लिए बेचा जाए। यह एक सामाजिक दायित्व है, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को निर्धारित करता है। यदि इस क्षेत्र में अनियंत्रित व्यावसायीकरण को बढ़ावा दिया गया, तो इसका दुष्प्रभाव केवल वर्तमान पर ही नहीं, बल्कि आने वाले समय पर भी पड़ेगा। आज आवश्यकता इस बात की है

ईरान की ट्रंप-हेगसेथ के 'स्टोन एज' बयान पर तीखी प्रतिक्रिया, कहा- 'सभ्यताएं बमबारी से नष्ट नहीं होतीं'

तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के स्टोन एज वाले बयान पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने कहा कि अमेरिका की धमकी उनकी ताकत नहीं बल्कि अज्ञानता को दर्शाती है। ईरान के स्थायी मिशन ने X पर बयान में लिखा ईरान की सभ्यता 7 000 वर्षों से अधिक पुरानी है जबकि अमेरिका का इतिहास मुश्किल से 250 साल का है। सभ्यताओं की पहचान उनके इतिहास संस्कृति और मानवता के योगदान से होती है। दुनिया आज भी उन ज्ञान और योगदान की ऋणी है जो ईरानी विद्वानों ने हजारों वर्षों में मानवता को दिए हैं। ऐसी सभ्यता को बमबारी से नष्ट नहीं किया जा सकता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मिडिल ईस्ट में ईरान को स्टोन एज में वापस भेजने की धमकी दी थी। इसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने करारा तंज किया। ईरानी दूतावास ने कहा स्टोन एज? जब आप गुफाओं में आग की तलाश कर रहे थे तब हम साइरस सिलेंडर पर मानवाधिकारों के बारे में लिख रहे थे। हमने सिकंदर और मंगोलों के आक्रमणों को झेला और फिर भी कायम रहे क्योंकि ईरान सिर्फ एक देश नहीं बल्कि एक सभ्यता है। इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर सैयद माजिद मूसावी ने भी अमेरिका को आड़े हाथों लिया। उन्होंने X पर लिखा अमेरिका अपने सैनिकों को मौत की ओर धकेल रहा है और वॉशिंगटन की बयानबाजी हॉलीवुड की काल्पनिक फिल्मों जैसी है। आप अपनी 250 साल पुरानी इतिहास के दम पर 6 000 साल पुरानी सभ्यता को धमका रहे हैं। यह आपकी कमजोर सोच को दर्शाता है। ज्ञात हो कि डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि अमेरिका आने वाले 2-3 हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़े हमले करेगा। उन्होंने कहा था कि अमेरिका जल्द ही अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर देगा और ईरान को ‘स्टोन एज’ में वापस भेजेगा।

ग्रहों का शुभ संयोग: शुक्र-वरुण-बुध के खास योग से इन राशियों के खुलेंगे तरक्की के रास्ते

नई दिल्ली। द्रिक पंचांग के अनुसार 1 अप्रैल 2026 को ग्रहों की चाल में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला। इस दिन शुक्र, वरुण और बुध ग्रहों की विशेष स्थिति से शुभ योगों का निर्माण हुआ, जिसे ज्योतिष शास्त्र में काफी सकारात्मक माना जाता है। दोपहर करीब 4 बजकर 47 मिनट पर शुक्र और वरुण के बीच 30 डिग्री का अंतर बनते ही द्विद्वादश योग बना। इसके बाद शाम के समय वरुण और बुध के बीच 18 डिग्री की दूरी से अष्टादश योग का निर्माण हुआ। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ऐसे योग जीवन में अचानक अच्छे अवसर, प्रगति और सकारात्मक बदलाव लेकर आते हैं। आइए जानते हैं किन राशियों पर इसका खास प्रभाव पड़ सकता है। वृषभ राशि वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है। जमीन, मकान या वाहन से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा और रुके हुए काम तेजी से पूरे हो सकते हैं। पुराने विवाद सुलझाने के लिए भी यह समय अनुकूल है। छोटी यात्राएं भी लाभ दिला सकती हैं। सिंह राशि सिंह राशि वालों के लिए यह समय नई संभावनाओं और सफलता का संकेत दे रहा है। नौकरी और व्यवसाय में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। धन लाभ के योग बन रहे हैं और पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा। नए लोगों से मुलाकात भविष्य में फायदेमंद साबित हो सकती है। रिश्तों में भी मिठास बढ़ेगी। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के लोगों में इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ेगा। नए कार्यों की शुरुआत के लिए समय अनुकूल है। आर्थिक मामलों में समझदारी से लिए गए निर्णय लाभ देंगे। पढ़ाई और ज्ञान से जुड़े क्षेत्रों में सफलता मिलने के संकेत हैं। परिवार में सामंजस्य बना रहेगा। तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए यह समय अप्रत्याशित लाभ लेकर आ सकता है। करियर और व्यापार में नए मौके मिलेंगे। निवेश से लाभ होने की संभावना है और परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। नए संपर्क और दोस्त जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।