IPL 2026: पारी की शुरुआत रणनीति का हिस्सा – LSG-DC मैच के बाद ऋषभ पंत का बड़ा बयान

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खेले गए मुकाबले में एक बड़ा सरप्राइज देखने को मिला, जब कप्तान ऋषभ पंत खुद पारी की शुरुआत करने उतरे। आमतौर पर मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करने वाले पंत का यह फैसला चर्चा का विषय बन गया। रणनीति के तहत लिया गया फैसलामैच के बाद ऋषभ पंत ने साफ किया कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि टीम की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। उन्होंने बताया कि टीम चाहती थी कि निकोलस पूरन को मिडिल ओवर में उतारा जाए, ताकि वह आक्रामक भूमिका निभा सकें। लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन का था प्लानपंत ने कहा कि ओपनिंग में लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन बनाकर विपक्षी टीम को अपने लेफ्ट-आर्म स्पिनर, खासकर अक्षर पटेल, का असरदार इस्तेमाल करने से रोका जा सकता था। हालांकि, उनके जल्दी आउट हो जाने से यह रणनीति पूरी तरह सफल नहीं हो। ओपनिंग जारी रख सकते हैं पंतभविष्य में भी ओपनिंग करने के सवाल पर ऋषभ पंत ने संकेत दिए कि वह टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी जारी रख सकते हैं, अगर टीम की ज़रूरत रही। पहले मैच में फ्लॉप रही रणनीतिहालांकि, इस मुकाबले में पंत का यह प्रयोग सफल नहीं रहा। वह 9 गेंद पर सिर्फ 7 रन बनाकर आउट हो गए। उनके जल्दी विकेट गिरने से टीम दबाव में आ गई। आंकड़ों में पंत की ओपनिंगकरीब एक दशक लंबे टी20 करियर में ऋषभ पंत ने सिर्फ 23 बार पारी की शुरुआत की है, जबकि आईपीएल में वे सिर्फ 7 बार ओपनिंग की है। यह खुलता है कि यह भूमिका उनके लिए नई नहीं, लेकिन रेगुलर भी नहीं है। मैच का हाललखनऊ सुपर जायंट्स की टीम 18.4 ओवर में 141 रन पर सिमट गई। जवाब में दिल्ली कैपिटल्स ने 17.1 ओवर में 145 रन बनाकर 6 विकेट से मुकाबला जीत लिया। अगली चुनौतीअब लखनऊ सुपर जायंट्स का अगला मुकाबला सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में 5 अप्रैल को खेला जाएगा।
ईरान पर अमेरिकी रणनीति पर मीडिया परेशान, ट्रंप ने नहीं बताई जमीनी कार्रवाई की योजना

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को लेकर हाल ही में दिए गए भाषण ने अमेरिकी मीडिया में सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने ईरान पर अपने पुराने दावों को दोहराया और कहा कि लड़ाई जल्दी खत्म होने वाली है लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि जमीनी स्तर पर अमेरिकी सैनिक तैनात किए जाएंगे या नहीं। इसके अलावा उन्होंने लड़ाई को बढ़ाने की रणनीति और युद्ध के बाद के दिशा-निर्देशों पर कोई नई जानकारी साझा नहीं की। द न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप ने किसी भी डिप्लोमैटिक रास्ते बाहर निकलने की योजना या क्षेत्रीय गठबंधन सहयोग पर विस्तार से बात नहीं की। उन्होंने केवल होर्मुज स्ट्रेट का छोटा सा जिक्र किया और दूसरे देशों से तेल शिपिंग रूट को फिर से खोलने की अपील की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने इजरायल सऊदी अरब कतर यूएई कुवैत और बहरीन जैसे क्षेत्रीय साझेदारों का उल्लेख किया लेकिन उनके रणनीतिक योगदान और नाटो सहयोग पर कोई विस्तार नहीं दिया गया। ईरान की नई नेतृत्व संरचना या वरिष्ठ अधिकारियों की मौत के बाद उभरते नेताओं का कोई विवरण भी ट्रंप ने साझा नहीं किया। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी मीडिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर मैटीरियल को सुरक्षित करने के लिए जमीन पर ऑपरेशन करेगा। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जमीन के नीचे दबे संवर्धित यूरेनियम को निकालने के लिए जोखिम भरे ग्राउंड ऑपरेशन की जरूरत होगी। हालांकि ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है लेकिन रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि तेहरान अब भी इलाके में मिसाइल और ड्रोन हमलों की क्षमता बनाए हुए है। अमेरिकी मीडिया ने इस बात पर निराशा जताई कि ट्रंप के भाषण में सैन्य या डिप्लोमैटिक मोर्चों पर कोई नई घोषणा नहीं की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि जमीनी कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा और युद्ध के बाद शासन-प्रबंधन पर पर्याप्त जानकारी न होने से अगले चरण की लड़ाई की दिशा अस्पष्ट बनी हुई है। युद्ध अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और बढ़ते खतरों के बीच मध्य पूर्व में स्थिरता और अमेरिका की लंबी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। सैन्य और डिप्लोमैटिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप की चुप्पी से अमेरिकी नीति में अनिश्चितता बनी है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी संकेत दिया गया कि स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से न केवल अमेरिका बल्कि उसके क्षेत्रीय साझेदारों के लिए भी योजना बनाना कठिन हो गया है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में यह देखा जाएगा कि अमेरिकी प्रशासन किस रणनीति के साथ आगे बढ़ता है और क्या जमीनी स्तर पर सेना तैनात की जाएगी या नहीं।
IPL 2026: SRH के सामने कड़ी चुनौती, KKR को उसके घर में हराना आसान नहीं

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का छठा मुकाबला गुरुवार को ईडन गार्डन्स में कोलकाता नाइट राइडर्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेला जाएगा। दोनों टीमों को अपने-अपने पहले मैच में हार मिली थी, ऐसे में इस मुकाबले के सीजन की पहली जीत का दावा बेहद अहम हो गया है। होम ग्राउंड पर केकेआर का पलड़ा भारीकोलकाता नाइट राइडर्स अपने घरेलू मैदान पर हमेशा मजबूत टीम बनी हुई है। आंकड़ों में यह भी लिखा है कि सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ केकेआर का रिकॉर्ड बेहतर रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक खेले गए 30 मुकाबलों में केकेआर ने 19 जीत दर्ज की हैं, जबकि एसआरएच को 10 मैचों में सफलता मिली है। कैप्टन पैट कमिंस की गैरमौजूदगी बड़ी चिंताSRH की सबसे बड़ी समस्या उनके नियमित कप्तान पैट कमिंस की शिकायत है। उनकी गैरमौजूदगी टीम की सदस्यता और लीडरशिप दोनों को प्रभावित कर रही है, जिससे टीम का बैलेंस बैलेंस देखने को मिल रहा है। शीर्ष क्रम की ख़राब फॉर्म से बेहतर मुश्किलSRH के लिए ट्रैविस हेड और अभिषेक शर्मा की फॉर्म चिंता का विषय है। दोनों ओपनर्स के हाल के मैचों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया जा सका। यदि ये दोनों बैटरियां जल्दी आउट होती हैं, तो टीम बड़े स्कोर तक पहुंच कर संघर्ष कर सकती है। मध्य क्रम भी नहीं दे पा रहा साथहेनरिक क्लासेन जैसे पॉकेटमार बल्लेबाज भी हाल के दिनों में अपनी लय में नजर नहीं आए हैं। मिडिल ऑर्डर की यही कमज़ोरी SRH के लिए परेशानी का कारण बन रही है। ईशान किशन पर टिकी विवरणSRH के लिए राहत की बात यह है कि ईशान किशन शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने पिछले मैच में 80 रन की तूफानी पारी खेली थी। केकेआर की टीम के खिलाफ भी बड़ी पारी की उम्मीद है। ऑनलाइन खेलना आश्चर्यजनक होगाSRH के नामांकन में जयदेव उनादकट, हर्षल पटेल और ईशान मलिंगा को जिम्मेदारी लेनी होगी। केकेआर मजबूत टीम के खिलाफ सिर्फ बल्लेबाजी नहीं, बल्कि बल्लेबाजी और फील्डिंग में भी बेहतरीन प्रदर्शन जरूरी है। प्लांट का कोम्पोट क्या है?केकेआर को घरेलू फ्लोरिडा लाभ का लाभ मिलेगा, जबकि एसआरएच को अपने विभाग में सुधार करना होगा। अगर हैदराबाद ने यह मैच जीता है, तो उन्हें ऑलराउंड प्रदर्शन करना होगा।
IPL 2026 अपडेट: शुरुआती मुकाबलों के बाद टॉप-4 में जगह बनाने वाली टीमें

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के 19वें सीजन में सभी 10 टीमों ने अपने-अपने पहले मुकाबले खेले हैं। शुरुआती मैचों के बाद अंक तालिका ने दिलचस्प रूप ले लिया है, जहां कुछ टीमें दमदार शुरुआत के साथ टॉप-4 में जगह बनाने में सफल रही हैं, जबकि कुछ को अभी लंबा सफर तय करना है। टॉप पर राजस्थान, शानदार जीत का मिला फायदाराजस्थान रॉयल्स ने अपने पहले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से हराकर अंक तालिका में पहला स्थान हासिल किया है। टीम का नेट रन रेट भी मजबूत है, जो उन्हें अन्य टीमों से आगे रखता है। RCB दूसरे नंबर पर, जीत से आत्मविश्वास बढ़ारॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने सनराइजर्स हैदराबाद को 6 विकेट से हराकर दूसरे स्थान पर कब्जा जमाया है। टीम की बैलेंस्ड रैंकिंग उन्हें शुरुआती बढ़त दिला रही है। दिल्ली कैपिटल्स तीसरे स्थान परदिल्ली कैपिटल्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 6 विकेट से हराते हुए तीसरे स्थान पर जगह बनाई है। इस जीत में टीम के मिडिल ऑर्डर ने शानदार भूमिका निभाई। मुंबई इंडियंस चौथे स्थान परमुंबई इंडियंस ने कोलकाता नाइट राइडर्स को हराकर चौथा स्थान हासिल किया है। टीम की बल्लेबाजी ने अच्छा प्रदर्शन किया और जीत सुनिश्चित की। मिड टेबल में पंजाब, बाकी टीमों को झटकापंजाब किंग्स पांचवें स्थान पर है, जिसने गुजरात टाइटन्स को करीबी मुकाबले में हराया। वहीं हारने वाली टीमों में गुजरात टाइटन्स छठे, कोलकाता नाइट राइडर्स सातवें, लखनऊ सुपर जायंट्स आठवें, सनराइजर्स हैदराबाद नौवें और चेन्नई सुपर किंग्स दसवें स्थान पर हैं। सभी के 2-2 अंक, रन रेट से तय रैंकिंगअब तक खेले गए 5 मुकाबलों में जीत दर्ज करने वाली सभी टीमों के 2-2 अंक हैं। ऐसे में अंक तालिका में स्थान का नेट रन रेट के आधार पर किया गया है, जिससे शुरुआती चरण में ही प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी नजर आ रही है। अभी लंबा है टूर्नामेंटसीजन अभी शुरुआती दौर में है और सभी टीमों के पास वापसी का पूरा मौका है। जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ेगा, अंक तालिका में लगातार बदलाव देखने को मिलेंगे।
ट्रंप का तीखा संदेश: ईरान की सैन्य ताकत खत्म, समझौता न हुआ तो और बढ़ेगा तनाव

वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर से तीखी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना कुछ ही हफ्तों में ईरान को पाषाण युग में वापस भेज सकती है। ट्रंप ने बुधवार को टीवी पर अपने भाषण में कहा कि अमेरिकी अभियान एपिक फ्यूरी ने केवल एक महीने में ईरान की सैन्य क्षमताओं को बुरी तरह से कमजोर कर दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नेवी अब खत्म हो चुकी है उनकी एयरफोर्स बर्बाद हो गई है और ईरान के नेताओं की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी हद तक कम कर दी गई है और महत्वपूर्ण हथियार फैसिलिटी ध्वस्त कर दी गई हैं। उन्होंने इस अभियान को ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने के लिए जरूरी बताया। उन्होंने जोर देते हुए कहा मैंने कसम खाई है कि मैं ईरान को कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं रखने दूंगा। इसके अलावा ट्रंप ने ईरान की मौजूदा सरकार को धरती की सबसे हिंसक सरकार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं है लेकिन कई वास्तविक नेताओं की मौत के कारण शासन में बदलाव पहले ही हो चुका है। ट्रंप ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर और पहले के अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि हमने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। ईरान कहीं और अपना प्रोग्राम बनाने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसे रोक दिया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना की प्राथमिकता ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और अपनी सीमाओं के बाहर ताकत दिखाने की उसकी काबिलियत को खत्म करना है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत में असफलता हुई तो तनाव और बढ़ेगा। उन्होंने कहा अगले दो से तीन हफ्तों में हम उन्हें स्टोन एज में वापस ले जाएंगे। अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बना सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनियाभर में तेल की बढ़ती कीमतों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि कमर्शियल तेल टैंकरों पर हुए आतंकी हमलों से यह समस्या पैदा हुई। उन्होंने मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर देशों से शिपिंग रूट सुरक्षित करने और क्षेत्र पर निर्भरता कम करने की अपील भी की। ट्रंप ने इजरायल सऊदी अरब कतर यूएई कुवैत और बहरीन जैसे क्षेत्रीय साथियों की सराहना करते हुए कहा कि ये अभियान में अच्छे साझेदार साबित हुए। उन्होंने अमेरिका की आर्थिक मजबूती पर भी जोर दिया और कहा कि देश दुनिया में तेल और गैस का सबसे बड़ा उत्पादक है और किसी भी लड़ाई से उत्पन्न रुकावटों को झेलने में सक्षम है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने 13 सैनिकों की हताहत होने की बात स्वीकार की और कहा कि उनके परिवारों ने उनसे काम पूरा करने की अपील की थी। ट्रंप ने अपने भाषण में इसे ऐतिहासिक रूप से तेज अभियान बताते हुए कहा कि सिर्फ एक महीने में एक बड़े खतरे को खत्म किया जा चुका है और अमेरिका और दुनिया के लिए ईरान के खतरनाक खतरे को पूरी तरह समाप्त करने की कगार पर है।
“जर्सी पहनते ही लक्ष्य सिर्फ देश की जीत” – एश्ले गार्डनर का जुनून भरा बयान

नई दिल्ली। एशले गार्डनर ने साफ कहा है कि राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनने के बाद उनका एकमात्र लक्ष्य अपने देश के लिए ज्यादा से ज्यादा मैच जीतना होता है। ऑस्ट्रेलिया महिला टीम इस समय वेस्टइंडीज महिला के दौरे पर है और शानदार प्रदर्शन करते हुए टी20 सीरीज के बाद वनडे सीरीज में भी 2-0 की अजेय बढ़त बना चुकी है। क्लीन स्वीप पर ऑस्ट्रेलिया की नजरतीसरे और अंतिम वनडे से पहले एशले गार्डनर ने कहा कि टीम का पूरा फोकस आखिरी मैच यूएई सीरीज को क्लीन स्वीप करने पर है। उन्होंने साफ किया कि खिलाड़ी आराम करने के बजाय अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने पर ध्यान दे रहे हैं। ‘जर्सी पहनना ही जिम्मेदारी बढ़ जाती है’गार्डनर ने कहा, “जब भी हम देश की जर्सी पहनते हैं, तो हमारा लक्ष्य सिर्फ जीतना होता है। हम चाहते हैं कि सीजन का अंत शानदार तरीकों से हो और हम अपनी सफलता का जश्न मनाएं।” उन्होंने यह भी बताया कि सीजन के बाद टीम को लंबा ब्रेक मिलने वाला है, जिससे खिलाड़ी तरोताजा होकर वापसी करेंगे। नई कप्तान के साथ शानदार तालमेलऑस्ट्रेलिया की उपकप्तान एशले गार्डनर ने टीम की कप्तान सोफी मोलिनक्स की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सोफी के नेतृत्व में टीम का माहौल बेहद पॉजिटिव और ऊर्जावान है। गार्डनर के अनुसार, सोफी मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह टीम में एनर्जी भरती हैं और खिलाड़ियों का खास ख्याल रखती हैं, जिससे टीम का प्रदर्शन बेहतर होता है। टीमवर्क और लीडरशिप पर फोकसउन्होंने कहा कि टीम और सपोर्ट स्टाफ के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। कई समन्वय के बावजूद टीम एकजुट होकर आगे बढ़ रही है और लीडरशिप ग्रुप यह तय करने में सक्षम है कि कैसे पूरी स्क्वॉड पर पॉजिटिव प्रभाव डाला जाए। सीजन का शानदार अंत करने की तैयारीऑस्ट्रेलिया महिला टीम का लक्ष्य अब इस दौरे का समापन यादगार तरीके से करना है। टीम चाहती है कि आखिरी मैच में भी क्लिनिकल प्रदर्शन कर जीत हासिल की जाए और पूरे दौरे को सफल बनाया जाए।
हनुमान जन्मोत्सव: आज की पूजा में इन गलतियों से रहें दूर, जीवन में बढ़ेगी सकारात्मकता

नई दिल्ली । आज 2 अप्रैल 2026 को पूरे भारत में हनुमान जयंती का भव्य पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन हर साल चैत्र महीने की पूर्णिमा के दिन आता है और इसे भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान राम के अनन्य भक्त, संकटमोचन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस पावन अवसर पर भक्तजन बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मंदिरों में हनुमान जी की पूजा करते हैं और प्रसाद चढ़ाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। हनुमान जयंती का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत बड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन में डर, बाधाएं और परेशानियां कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। लेकिन ज्योतिषियों और धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन कुछ सामान्य गलतियों से बचना बेहद जरूरी है। इन गलतियों से बजरंगबली रुष्ट हो सकते हैं और पूजा का फल प्रभावित हो सकता है। तामसिक चीजों का सेवन न करें हनुमान जयंती के दिन खान-पान में शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन जैसी तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें। केवल सात्विक भोजन ही पूजा और व्रत के लिए उचित माना जाता है। काले कपड़े न पहनें हिन्दू लोक मान्यता और शास्त्रों के अनुसार पूजा के दौरान काले कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। खासकर हनुमान जयंती के दिन भूलकर भी काले कपड़े पहनने से बचें। सफेद रंग के कपड़े भी कुछ ग्रंथों में अनुकूल नहीं बताए गए हैं। हमेशा लाल, पीला या नारंगी जैसे शुभ रंगों का चयन करें। महिलाओं को हनुमान जी की प्रतिमा नहीं छूनी चाहिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं। इसलिए महिलाओं को इस दिन हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर को छूने से परहेज करना चाहिए। केवल श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा में भाग लें। अगर आप हनुमान जयंती के दिन व्रत रख रहे हैं तो भूलकर भी नमक का सेवन न करें। इस दिन व्रत तोड़ने के लिए मीठे व्यंजन का सेवन करना शुभ माना गया है। किसी को परेशान न करें हनुमान जयंती के दिन किसी भी जानवर या वानर को परेशान करना वर्जित है। ऐसा करने से हनुमान जी की नाराजगी होती है और घर में अशांति आ सकती है। भगवान राम का अपमान न करें हनुमान जी के अनन्य भक्त होने के कारण, हनुमान जयंती पर भगवान राम का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। अगर इस दिन श्रीराम का अपमान या अनदेखी की जाती है, तो माना जाता है कि हनुमान जी रुष्ट हो सकते हैं। इस हनुमान जयंती पर श्रद्धा, भक्ति और सावधानी के साथ पूजा-अर्चना करने से न केवल हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है बल्कि जीवन में सकारात्मकता, भय और संकटों से मुक्ति भी मिलती है। इसलिए आज के दिन उपरोक्त गलतियों से बचें और सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करें।
एलएसजी की सबसे बड़ी कमजोरी आई सामने, अभिनव मुकुंद बोले- निरंतरता की कमी

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में लखनऊ सुपर जाइंट्स ने सबसे पहले दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 6 विकेट से हार झेलनी पड़ी। इस हार के बाद टीम के प्रदर्शन पर सवाल उठे हैं। पूर्व भारतीय क्रिकेटर अभिनव मुकुंद ने एलएसजी की सबसे बड़ी समस्या ‘निरंतरता की कमी’ बताई है। टीम की पहचान अभी भी साफ नहींअभिनव मुकुंद ने ईएसपीएनक्रिकइंफो से बातचीत में कहा कि एलएसजी अभी भी अपनी स्पष्ट पहचान बना रही है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि गुजरात टाइटंस का उदाहरण दिया गया है, जो 2022 में ही बनी टीम है, लेकिन अब उसकी रणनीति और खेल शैली के लिए जाना जाता है। मुकुंद के अनुसार, गुजरात अपनी गेंदबाजी और अनुभवी स्पिनरों पर भरोसा करता है, जबकि लखनऊ में ऐसी स्पष्ट रणनीति पर नजर नहीं पड़ती। शीर्ष क्रम मजबूत, लेकिन मध्य क्रम क्रमिकउन्होंने कहा कि मिचेल मार्श और एडेन मार्कराम जैसे खिलाड़ी टॉप नंबर में मजबूत हैं, लेकिन इसके बाद टीम में विश्वसनीयता की कमी नजर आ रही है। खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार एक जैसा नहीं रहता, जो टीम के लिए चिंता का विषय है। ऑनलाइन भी स्थिरता का अभावमार्क वुड जैसे खिलाड़ी कभी-कभी मैच जिताने वाले प्रदर्शन करते हैं, लेकिन वह लगातार नहीं होते हैं। मुकुंद का मानना है कि येही सुपरमार्केट टीम को पीछे छोड़ रही है। टीम कॉम्बिनेशन पर भी उठे सवालदिल्ली के लॉज में एलएसजी का संतुलन भी बना हुआ है। टीम में सात बल्लेबाज और सिर्फ चार कलाकार शामिल हुए। मुकुंद ने इस फैसले को लॉटरी में शामिल किया था, खासकर तब जब दिगवेश राठी को टीम में शामिल नहीं किया गया था। मैच का हाल: 141 पर सेमी एलएसजीलखनऊ सुपर जाइंट्स की पूरी तरह से फ्लॉप रही और टीम 18.4 ओवर में 141 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। जवाब में दिल्ली कैपिटल्स ने 17.1 ओवर में 145 रन बनाकर मुकाबला आसानी से जीत लिया। आगे की राह आसान नहींएलएसजी का अगला मुकाबला सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 5 अप्रैल को राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में होगा। टीम को इस मैच में वापसी के लिए रणनीति और प्रदर्शन दोनों में सुधार करना होगा। अब तक का रिकॉर्ड2022 लीग में शामिल हुई लखनऊ सुपर जाइंट्स ने अब तक 58 मैचों में 30 जीत और 28 हार दर्ज की है। टीम दो बार प्लेऑफ़ में पहुंची है, लेकिन पिछले सीज़न में वह जगह पर रही थी।
हनुमान जन्मोत्सव और चैत्र पूर्णिमा: घर में आएगी समृद्धि, अपनाएं ये सरल उपाय

नई दिल्ली । आज यानी 2 अप्रैल 2026 को पूरे देश में चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जन्मोत्सव का पावन पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जन्मोत्सव का महासंयोग बन रहा है जिससे पूजा-अर्चना और उपायों का महत्व और बढ़ गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। इसलिए इसे हनुमान जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। साथ ही भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने अन्न-धन और अन्य वस्तुओं का दान करने का विशेष विधान है। ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि और धन-धान्य की कमी नहीं होती। इस पावन अवसर पर कुछ आसान और असरदार उपाय किए जा सकते हैं जो धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के साथ-साथ आर्थिक तंगी से मुक्ति दिलाते हैं। घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं ज्योतिषियों का मानना है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। दीपक की ज्योति सकारात्मकता का संचार करती है और घर में समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है। रसोई घर में दीपक जलाना सिर्फ मुख्य द्वार पर ही नहीं बल्कि घर की रसोई में भी दीपक जलाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रसोई घर में मां अन्नपूर्णा का वास होता है। चैत्र पूर्णिमा के दिन रसोई में दीपक जलाने से अन्नपूर्णा की असीम कृपा बनी रहती है जिससे घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती और परिवार में समृद्धि बनी रहती है। तुलसी की पूजा करें शास्त्रों के अनुसार चैत्र पूर्णिमा की शाम को तुलसी का पूजन करना अत्यंत शुभ होता है। तुलसी के पौधे में श्री हरि और मां लक्ष्मी का वास माना गया है। तुलसी की पूजा करने से घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है धन-धान्य की कमी नहीं होती और आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलता है। यह उपाय सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन उपायों को श्रद्धा और भक्ति भाव से करने से घर में सुख शांति समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इस चैत्र पूर्णिमा पर इन उपायों को अपनाकर न केवल माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं बल्कि परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और आनंद भी बढ़ता है। तो इस पावन दिन दीपक जलाएं तुलसी की पूजा करें और दान-पुण्य में भाग लें। यह न केवल धार्मिक नियमों का पालन है बल्कि आपके घर में आर्थिक और मानसिक समृद्धि भी सुनिश्चित करता है।
एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में आदित्य की धमाकेदार जीत, मूसा अलहौसौ को 5-0 से हराया

नई दिल्ली। एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 में भारतीय मुक्केबाजों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। चौथे दिन भारत के उभरते सितारे आदित्य ने दमदार खेल दिखाया, सऊदी अरब के मौसा अलहौसौ को 5-0 से हराकर अगले राउंड में जगह बना ली। आदित्य का दमदार प्रदर्शन, मुकाबला पर रखा पूरा कंट्रोलपुरुषों के 65 kg वर्ग में खेले गए इस मुकाबले में आदित्य पूरी तरह हावी नजर आए। उन्होंने शानदार तकनीक और आक्रामक रणनीति के दम पर विरोधी को कोई मौका नहीं दिया। दावेदारों ने रक्षात्मक से 5-0 का फैसला सुनाते हुए भारतीय खिलाड़ी को विजेता घोषित किया। अब अगले राउंड में उनका मुकाबला उज्बेकिस्तान के अब्दुल्ला मदामिनोव से होगा, जो एक कड़ी चुनौती मानी जा रही है। पहले दिन से ही भारत की मजबूत शुरुआतइस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारत ने शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा है। महिला 54 kg वर्ग में प्रीति पवार ने कजाकिस्तान की एलिना बजरोवा को 5-0 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। वहीं पुरुषों के 70 kg वर्ग में दीपक ने उजबेकिस्तान के खवासबेक असदुल्लाव को 3-2 से हराते हुए अपने आत्मविश्वास का परिचय दिया। दूसरे दिन भी लगातार जीत का सिलसिलामहिलाओं के 60 kg वर्ग में प्रिया ने कजाकिस्तान की रिम्मा वोलोसेंको को 5-0 से हराया। हालांकि पुरुषों के 55 kg वर्ग में जदुमणि सिंह को जापान के रुई यामागुची के खिलाफ 2-3 से करीबी हार झेलनी पड़ी। तीसरे दिन भी जारी रहा भारतीय मुक्केबाजों का जलवा पुरुषों के 50 kg वर्ग में विश्वनाथ सुरेश ने किर्गिस्तान के बेकज़त एर्गेशोव को 5-0 से हराया। वहीं 60 kg वर्ग में सचिन ने मंगोलिया के बुयांदलाई बयारखू को 4-1 से हराकर अगले राउंड में जगह बनाई। मेडल की उम्मीदें बढ़ाएंभारतीय खिलाड़ियों के लगातार बेहतरीन प्रदर्शन से साफ है कि इस बार एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 में भारत मजबूत दावेदार बनकर अकेला है। हर मुकाबले के साथ भारतीय बॉक्सर्स का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और मेडल की उम्मीदें भी मजबूत हो रही हैं।