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“मुझे अपने कप्तान और टीम पर पूरा भरोसा” -संजीव गोयनका का बड़ा बयान

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के अपने पहले ग्रुप में लखनऊ सुपर जाइंट्स के घरेलू मैदान एकाना क्रिकेट स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। हालाँकि इस निराशाजनक और अंतिम शुरुआत के टीम के मालिक संजीव गोयनका ने खिलाड़ियों को कैप्टन पर पूरा भरोसा दिलाया है। हार के बाद भी टीम के साथ शेयर किए गए गोयनकामैच के बाद संजीव गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह जोरदार सीजन है ऐसे रिलीज- उनका हिस्सा हैं। उन्होंने लिखा कि उन्हें अपने कप्तान और पूरी टीम पर पूरा विश्वास है कि वे शानदार वापसी करेंगे। साथ ही उन्होंने इकाना स्टेडियम में मौजूद पर्यटकों के समर्थन के लिए भी धन्यवाद दिया। विरोधाभासी रूप से फ्लॉप रही लखनऊमैच में लखनऊ सुपर जाइंट्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही। पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम 18.4 ओवर में 141 रन बनाकर डेमोक्रेट बनी। मिचेल मार्श ने 35 रन और अब्दुल समद ने 36 रन की पारी खेली, लेकिन बाकी के अलावा कोई भी बल्लेबाज क्रीज पर टिक नहीं पाया। दिल्ली के इतिहास का शानदार प्रदर्शनदिल्ली कैपिटल्स के खिलाड़ियों ने किया बेहतरीन प्रदर्शन। टी नटराजन और लुंगी एनगिडी ने 3-3 विकेट लेकर नॉचल को तहस-नहस कर दिया। वहीं कुलदीप यादव और कप्तान अक्षर पटेल ने भी अहम योगदान दिया। 26 रन पर 4 विकेट के बाद भी दिल्ली ने पलटा मैच142 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत भी खराब रही। केएल राहुल पहली गेंद पर ही आउट हो गए और टीम ने 26 रन पर 4 विकेट गंवा दिए। लेकिन इसके बाद समीर रिज़वी और ट्रिस्टन स्टब्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मैच को पूरी तरह पलट दिया। दोनों ने मिलकर 119 रनों की साझेदारी की और टीम को 6 विकेट से जीत हासिल की। समीर रज़वी बने मैच के हीरोसमीर रिज़वी ने 47 बॉल में 70 रन (4 सिक्स, 5 सेल्स) की शानदार पारियां और प्लेयर ऑफ द मैच बनाए। वहीं ट्रिस्टन स्टब्स ने 32 गेंदों में 39 रन बनाकर अपना बेहतरीन साथ दिया। सीज़न अभी लंबा, वापसी की उम्मीदखैर ही लखनऊ सुपर जाइंट्स को पहले मैच में हार मिली हो, लेकिन टीम का दबदबा कायम है। आईपीएल जैसे लंबे टूर्नामेंट में वापसी के कई मौके हैं और एलएसजी से अगले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद बनी हुई है।

सोना और चांदी महंगा होने की राह पर? सरकार ने गोल्ड सिल्वर ज्वैलरी आयात पर पाबंदी लगाई

नई दिल्ली । भारत में सोने और चांदी की ज्वैलरी खरीदने वाले लोगों के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है अब गोल्ड-सिल्वर और प्लैटिनम से तैयार की गई ज्वैलरी का आयात बिना मंजूरी के नहीं किया जा सकेगा। केंद्रीय सरकार ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के म‍िसयूज को रोकने के मकसद से DGFT डायरेक्टरेट जर्नल ऑफ फॉरेन ट्रेड के माध्यम से नई पाबंदियां लागू की हैं। पिछले एक साल के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी। 29 जनवरी 2026 को सोने ने 1.92 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई छुआ जबकि चांदी 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। इस बढ़ती कीमत और FTA के गलत इस्तेमाल को देखते हुए सरकार ने आयात नियमों को कड़ा कर दिया है। DGFT की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अब कस्टम्स टैरिफ हेडिंग 7113 के अंतर्गत आने वाले सभी सोने चांदी और प्लैटिनम से तैयार ज्वैलरी को रिस्ट्रीक्टेड कर दिया गया है। इसका मतलब है कि किसी भी तरह के आयात के लिए पहले DGFT से लाइसेंस या मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। यह नियम पुराने कॉन्ट्रैक्ट एडवांस पेमेंट या शिपमेंट की स्थिति को देखते हुए भी लागू होगा। हालांकि पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। एक्सपोर्ट स्पेशल इकोनॉमिक जोन और फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्लान के तहत होने वाला आयात इस पाबंदी से बाहर रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि कुछ आयातक भारत-आसियान FTA का गलत इस्तेमाल कर रहे थे और इसी कारण नई नियमावली बनाई गई। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि सही कारोबारियों को कोई नुकसान नहीं होगा। DGFT के लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जाएगी ताकि व्यवसायिक गतिविधियां बाधित न हों। यह कदम पिछले साल की रोकथामों का विस्तार है सितंबर 2025 में चांदी ज्वैलरी और नवंबर 2025 में कुछ प्रकार की प्लैटिनम ज्वैलरी के आयात पर रोक लागू की गई थी। इस नए नियम के बाद देश में ज्वैलरी के दामों में असर पड़ सकता है। बिना लाइसेंस के आयात पर रोक लगने से कारोबारी महंगी ज्वैलरी को सीमित मात्रा में ही ला पाएंगे जिससे कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है। आम ग्राहकों के लिए यह समय सोने और चांदी की खरीद में सोच-समझकर कदम रखने का होगा। सरकार का यह कदम FTA के म‍िसयूज को रोकने और आयात प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। DGFT लाइसेंस अनिवार्य करने से कारोबारियों को नियमों का पालन करना होगा और अवैध तरीके से ज्वैलरी लाने की छूट नहीं रहेगी। इस फैसले का असर न केवल कारोबारी बल्कि आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात पर पाबंदी से कुछ समय के लिए कीमतों में स्थिरता आएगी लेकिन मांग और आपूर्ति के हिसाब से बाजार में हलचल बनी रहेगी।

रासी वैन डर डुसेन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा, 146 मैचों का शानदार करियर खत्म

नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका के भरोसेमंद टॉप ऑर्डर बल्लेबाज Rassie van der Dussen ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी। 37 वर्षीय बल्लेबाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने करियर को अलविदा कहा। उनके इस फैसले से क्रिकेट जगत में एक युग का अंत माना जा रहा है। भावुक संदेश के साथ किया संन्यास का ऐलानRassie van der Dussen ने अपने पोस्ट में लिखा कि देश के लिए खेलना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा। उन्होंने अपने करियर को त्याग, मेहनत और समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने अपने साथियों, कोच और मेंटर्स का आभार जताते हुए कहा कि इस सफर ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। युवा खिलाड़ियों को दी खास सीखडुसेन ने अपने संदेश में युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि बड़े सपने देखना और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी ताकत झोंक देना ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद को कभी दूसरों से ज्यादा प्रतिभाशाली नहीं माना, लेकिन मेहनत और विश्वास के दम पर अपने सपनों को साकार किया। फैंस और परिवार को कहा धन्यवाददक्षिण अफ्रीकी फैंस के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि भरे स्टेडियम में खेलना और दर्शकों की आवाज सुनना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा। उन्होंने अपनी पत्नी लारा का विशेष रूप से धन्यवाद किया, जिन्होंने हर मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया और उनका हौसला बढ़ाया। डोमेस्टिक क्रिकेट में जारी रहेगा सफरहालांकि Rassie van der Dussen ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि उनका क्रिकेट करियर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वह आगे भी घरेलू टीम ‘लायंस’ के लिए खेलते रहेंगे और युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देंगे। शानदार रहा इंटरनेशनल करियरअक्टूबर 2018 में टी20 फॉर्मेट से इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले डुसेन ने कुल 146 मैचों में दक्षिण अफ्रीका का प्रतिनिधित्व किया। टेस्ट: 18 मैच, 905 रन (6 अर्धशतक)वनडे: 71 मैच, 2657 रन (6 शतक, 17 अर्धशतक)टी20: 57 मैच, 1406 रन (10 अर्धशतक) उन्होंने अपने शांत स्वभाव और लगातार प्रदर्शन से टीम में अहम भूमिका निभाई। क्यों याद किए जाएंगे डुसेनडुसेन को उनकी स्थिरता, दबाव में शानदार बल्लेबाजी और टीम के लिए जिम्मेदारी निभाने की क्षमता के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने कई मौकों पर टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला।

अपने भीतर के हनुमान को जगाने का पर्व

– ललित गर्ग हनुमान जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव जीवन के चरित्र-निर्माण, आत्मबल, संयम, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देने वाला महान दिवस है। यह दिन हमें मंदिरों में दीप जलाने से अधिक अपने भीतर के अंधकार को दूर करने का संदेश देता है। हनुमान केवल शक्ति के प्रतीक नहीं हैं, वे शक्ति के सदुपयोग, ज्ञान की विनम्रता, भक्ति की पराकाष्ठा और सेवा की परंपरा के प्रतीक हैं। इसलिए हनुमान जयंती मनाने का वास्तविक अर्थ है-अपने भीतर के हनुमान को जगाना। हनुमान जी को मंगलकर्ता और विघ्नहर्ता कहा गया है। लेकिन वे विघ्न केवल बाहरी नहीं हटाते, वे मनुष्य के भीतर के विघ्न-अहंकार, भय, आलस्य, क्रोध, लोभ, मोह, इन सबका भी नाश करते हैं। आज का मनुष्य बाहरी समस्याओं से कम और आंतरिक कमजोरियों से अधिक परेशान है। इसलिए आज हनुमान की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक है। हनुमान शक्ति के प्रतीक हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने कभी अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं किया। उन्होंने अपनी शक्ति को सेवा में लगाया। आज का युग शक्ति प्रदर्शन का युग बन गया है-धन का प्रदर्शन, पद का प्रदर्शन, ज्ञान का प्रदर्शन, शक्ति का प्रदर्शन। लेकिन हनुमान हमें सिखाते हैं कि शक्ति और ज्ञान का प्रदर्शन नहीं, उसका संरक्षण और सदुपयोग ही महानता है। सर्वशक्तिमान होकर भी उन्होंने स्वयं को “राम का दास” कहा। इससे बड़ी विनम्रता और क्या हो सकती है? हनुमान हमें यह भी सिखाते हैं कि शक्ति और ज्ञान का अहंकार नहीं होना चाहिए। ज्ञान यदि विनम्रता नहीं देता, तो वह अज्ञान है। शक्ति यदि सेवा में नहीं लगती, तो वह विनाश का कारण बनती है। इसलिए हनुमान शक्ति और ज्ञान के साथ-साथ विनम्रता और सेवा के भी प्रतीक हैं। हनुमान को ज्ञानियों में अग्रगण्य कहा गया है-“ज्ञानिनामग्रगण्यम”। वे केवल बलवान नहीं थे, वे महान विद्वान, व्याकरणाचार्य, तर्कशास्त्री, संगीतज्ञ और नीतिज्ञ भी थे। लेकिन इतनी विद्या होने पर भी उनमें अहंकार नहीं था। वे सरलता, सादगी और सेवा के प्रतीक बने रहे। आज शिक्षा बढ़ रही है, लेकिन विनम्रता घट रही है। डिग्रियाँ बढ़ रही हैं, लेकिन चरित्र घट रहा है। ऐसे समय में हनुमान का चरित्र हमें ज्ञान के साथ विनम्रता का संतुलन सिखाता है। हनुमानजी को हिन्दू देवताआंे में सबसे शक्तिशाली माना गया है, वे रामायण जैसे महाग्रंथ के सह पात्र थे। वे भगवान शिव के ग्यारवंे रूद्र अवतार थे जो श्रीराम की सेवा करने और उनका साथ देने त्रेता युग में अवतरित हुए थे। उनको बजरंग बलि, मारुतिनंदन, पवनपुत्र, केशरीनंदन आदि अनेकों नामों से पुकारा जाता है। उनका एक नाम वायुपुत्र भी है, उन्हें वातात्मज भी कहा गया है अर्थात् वायु से उत्पन्न होने वाला। इन्हें सात चिरंजीवियो में से एक माना जाता है। वे सभी कलाओं में सिद्धहस्त एवं माहिर थे। वीरो में वीर, बुद्धिजीवियांे में सबसे विद्वान। इन्होंने अपने पराक्रम और विद्या से अनेकों कार्य चुटकीभर समय में पूर्ण कर दिए है। वे शौर्य, साहस और नेतृत्व के भी प्रतीक हैं। समर्पण एवं भक्ति उनका सर्वाधिक लोकप्रिय गुण है। रामभक्त हनुमान बल, बुद्धि और विद्या के सागर तो थे ही, अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता और ज्योतिष के भी प्रकांड विद्वान थे। हनुमान के जीवन में तीन महान तत्व दिखाई देते हैं-ज्ञान, भक्ति और कर्म। ज्ञान उन्हें दिशा देता है, भक्ति उन्हें प्रेरणा देती है और कर्म उन्हें महान बनाता है। यदि किसी व्यक्ति के जीवन में ज्ञान है पर कर्म नहीं, तो वह अधूरा है। यदि कर्म है पर भक्ति नहीं, तो उसमें संवेदना नहीं होगी। यदि भक्ति है पर ज्ञान नहीं, तो वह अंधविश्वास बन सकती है। इन तीनों का समन्वय यदि किसी चरित्र में दिखाई देता है, तो वह हनुमान का चरित्र है। हनुमान का जीवन संयम का जीवन था। वे बलशाली थे, पर ब्रह्मचारी थे। वे विद्वान थे, पर विनम्र थे। वे वीर थे, पर शांत थे। वे शक्तिशाली थे, पर सेवक थे। यह संतुलन ही उन्हें महान बनाता है। आज मनुष्य के पास साधन हैं, पर संयम नहीं। ज्ञान है, पर दिशा नहीं। शक्ति है, पर सेवा नहीं। इसलिए समाज में अशांति बढ़ रही है। हनुमान का जीवन हमें संयम और संतुलन का संदेश देता है। हनुमान के बाल स्वरूप की कथा भी अत्यंत प्रेरणादायक है। बालक हनुमान ने सूर्य को फल समझकर पकड़ने का प्रयास किया। यह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि एक महान संदेश है। यह बालकों की असीम जिज्ञासा, उत्साह और ऊर्जा का प्रतीक है। यह कथा समाज को संदेश देती है कि बच्चों की जिज्ञासा को दबाया नहीं जाना चाहिए, उसे सही दिशा देनी चाहिए। यदि बालकों को सही मार्गदर्शन मिले, तो उनमें से हर बालक हनुमान बन सकता है-ऊर्जावान, जिज्ञासु, साहसी और रचनात्मक। आज के माता-पिता और समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों में हनुमान जैसे गुण विकसित करें-साहस, जिज्ञासा, अनुशासन, सेवा, विनम्रता और भक्ति। यदि बचपन में ही यह संस्कार मिल जाएं, तो समाज का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है। हनुमान भक्ति का वास्तविक अर्थ भी समझना जरूरी है। हनुमान भक्ति केवल चालीसा पढ़ना नहीं है, बल्कि हनुमान के गुणों को जीवन में उतारना है। हनुमान भक्ति का अर्थ है- अहंकार छोड़ना, सेवा करना, सत्य का साथ देना, संयम रखना, कर्तव्य निभाना और अपने जीवन को किसी महान उद्देश्य से जोड़ना। जब तक भक्ति केवल मंदिर तक सीमित रहेगी, तब तक भगवान अलग रहेंगे और भक्त अलग रहेगा। जब भक्ति जीवन बन जाती है, तब भगवान और भक्त अलग नहीं रहते। हनुमान की भक्ति प्रदर्शन नहीं, आत्मपरिवर्तन की प्रक्रिया है। यह भक्ति व्यक्ति को भीतर से बदल देती है-अहंकार की जगह विनम्रता, क्रोध की जगह क्षमा, भय की जगह साहस और निराशा की जगह आशा भर देती है। आज समाज में सबसे बड़ी समस्या शक्ति की नहीं, चरित्र की है; ज्ञान की नहीं, दिशा की है; साधनों की नहीं, संयम की है। इसलिए आज समाज को हनुमान की जरूरत है-मंदिरों में नहीं, जीवन में; मूर्तियों में नहीं, व्यक्तित्व में। हर व्यक्ति के भीतर एक हनुमान सोया हुआ है- किसी में साहस का हनुमान, किसी में सेवा का हनुमान, किसी में ज्ञान का हनुमान, किसी में भक्ति का हनुमान। जरूरत केवल उसे जगाने की है। अपने भीतर के हनुमान को जगाने का अर्थ है- अपने भीतर के भय को हराना,

काम के दौरान काल बन गई लकड़ी मंडला में मजदूर की दर्दनाक मौत

मंडला । मध्यप्रदेश के मंडला जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है जिसने एक बार फिर कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जिले के मोहगांव प्रोजेक्ट अंतर्गत देवरी दादर डिपो में बुधवार दोपहर एक श्रमिक की जान उस समय चली गई जब वह लकड़ी लोडिंग का काम कर रहा था जानकारी के अनुसार डिपो में भारी लकड़ियों को वाहन में लोड किया जा रहा था इसी दौरान अचानक लकड़ी का एक बड़ा छठ्ठा असंतुलित होकर एक मजदूर के ऊपर गिर गया हादसा इतना भयावह था कि श्रमिक गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों ने तुरंत उसे उठाकर इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया घायल श्रमिक को Anjaniya Primary Health Centre लाया गया जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत को गंभीर देखते हुए इलाज शुरू किया लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी और उसे मृत घोषित कर दिया गया इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है मृतक की पहचान मोहगांव रैयत निवासी 55 वर्षीय छत्तर सिंह तेकाम के रूप में हुई है जो लंबे समय से डिपो में श्रमिक के रूप में कार्यरत थे घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर सक्रिय हुई और मामले की जांच शुरू कर दी गई है वहीं अस्पताल में जैसे ही यह खबर पहुंची मृतक के परिजन भी वहां पहुंचे जहां उनका रो रोकर बुरा हाल हो गया इस हादसे के बाद परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं उनका कहना है कि उन्हें शुरुआत में फोन पर केवल हल्की चोट लगने की जानकारी दी गई थी जबकि वास्तविक स्थिति बेहद गंभीर थी परिजनों का आरोप है कि हादसा मोहगांव प्रोजेक्ट के रसईया दोन डिपो में हुआ था लेकिन घायल को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाने के बजाय स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र लाया गया जिससे समय पर उचित उपचार नहीं मिल सका परिजनों ने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो शायद मजदूर की जान बचाई जा सकती थी यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन कितना जरूरी है खासकर ऐसे स्थानों पर जहां भारी मशीनरी और वजनदार सामग्री के साथ काम किया जाता है थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह इस मामले की गंभीरता को समझते हुए न केवल जांच को निष्पक्ष रूप से पूरा करे बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम भी उठाए ताकि किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अजिंक्य नाइक ने की मुलाकात, 1 लाख दर्शक क्षमता वाले स्टेडियम के निर्माण पर चर्चा

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में खेल अभिलेखागार को नई ऊंचाई तक की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजिंक्य नाइक ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में एक विश्वस्तरीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से मुलाकात की। इस बैठक में राज्य के खेलों के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा हुई। 1 लाख दर्शकों की क्षमता वाला मेगा स्टेडियम होगाप्रस्तावित स्टेडियम को 1,00,000 दर्शकों की क्षमता के साथ तैयार करने की योजना है, जिसमें इसमें दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम शामिल होंगे। यह प्रोजेक्ट सिर्फ मुंबई नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए एक शानदार स्पोर्ट्स पिक्चर के रूप में उभर सकता है। खेल इकोसिस्टम को जल्द ही बड़ा बढ़ावा मिलेगाअजिंक्य नाइक ने स्पोर्टिंग इकोसिस्टम के लिए यह पहला कदम ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह स्टेडियम के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय स्तर से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक क्रिकेट के विकास को स्थापित करेगा। उनका कहना है, यह प्रोजेक्ट युवा प्रतिभाओं को निखारने, प्रशिक्षण सुविधाओं को बेहतर बनाने और महाराष्ट्र को वैश्विक क्रिकेट नतीजों में मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। खेल पर्यटन और अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं पर नजरइस स्टेडियम के निर्माण से खेल पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बड़े अंतर्राष्ट्रीय खेलों और खेलों की टीमों से न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि मुंबई की वैश्विक खेल की पहचान भी और मजबूत होगी। सिडको के साथ तैयार हो रहा रोडमैप इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अजिंक्य नाइक ने विजय सिंघल (सीआईडीसीओ के प्रबंध निदेशक) के साथ विस्तृत चर्चा की। इसमें स्टेडियम के निर्माण, बुनियादी ढांचे और आर्किटेक्चर से जुड़े विभिन्न मानकों पर काम किया गया। 2025 में हुआ था बड़ा लॉन्चमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने 2025 में वानखेड़े स्टेडियम में एक कार्यक्रम के आयोजन के दौरान इस मेगा प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने एमसीए को स्टेडियम निर्माण के लिए उपलब्ध जमीन का वादा किया था। प्रेमी को नया अनुभवस्टेट-ऑफ-द-आर्ट सुविधाओं से लैस यह स्टेडियम के कमरों को आधुनिक और बेहतर अनुभव प्रदान करता है। इसमें सीटिंग, डिजिटल उपकरण, बेहतर सुविधाएँ और अंतर्राष्ट्रीय मानक की व्यवस्थाएँ शामिल हैं। यह प्रोजेक्ट इतना खास क्यों है?यह प्रोजेक्ट केवल एक स्टेडियम नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया गया है, जो भविष्य के खिलाड़ियों को वैश्विक मंच पर पहुंचने का मौका देगा और भारत को क्रिकेट के क्षेत्र में और मजबूत बनाएगा।

सिंगरौली ने रचा इतिहास खनिज राजस्व में 4681 करोड़ की रिकॉर्ड वसूली

सिंगरौली । मध्यप्रदेश का सिंगरौली जिला एक बार फिर अपनी पहचान को मजबूत करते हुए सुर्खियों में आ गया है इस बार वजह है खनिज राजस्व वसूली में बनाया गया ऐतिहासिक रिकॉर्ड वित्तीय वर्ष 2025 26 में जिले ने 4681.05 करोड़ रुपये की शानदार वसूली कर न केवल अपने तय लक्ष्य का 96.86 प्रतिशत हासिल किया बल्कि पूरे प्रदेश में पहला स्थान भी कायम रखा है सिंगरौली को देश के प्रमुख खनन क्षेत्रों में गिना जाता है यहां कोयला और अन्य खनिज संसाधनों की प्रचुरता है यही कारण है कि जिले की अर्थव्यवस्था में खनन का अहम योगदान रहता है इस बार प्रशासन ने योजनाबद्ध रणनीति और कड़ी निगरानी के साथ राजस्व वसूली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है केवल खनिज राजस्व ही नहीं बल्कि कर वसूली के क्षेत्र में भी जिले ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है प्रशासन ने निर्धारित लक्ष्य का 97.61 प्रतिशत हासिल करते हुए 946.80 करोड़ रुपये की वसूली की है यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि जिले में वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था बेहद मजबूत हुई है इस उपलब्धि के पीछे प्रशासन की सख्ती और पारदर्शी कार्यप्रणाली को मुख्य कारण माना जा रहा है खासतौर पर अवैध खनन के खिलाफ अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति ने बड़ा असर दिखाया है पूरे साल में 289 मामलों में कार्रवाई करते हुए 2.20 करोड़ रुपये की वसूली की गई है इससे न केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा है बल्कि सरकारी राजस्व में भी वृद्धि हुई है जिला प्रशासन का कहना है कि यह सफलता किसी एक विभाग की नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों का परिणाम है खनिज विभाग अधिकारियों और मैदानी अमले की लगातार निगरानी और समन्वय के कारण यह संभव हो सका है साथ ही तकनीक के उपयोग और पारदर्शी व्यवस्था ने भी इस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है सिंगरौली का यह प्रदर्शन पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बन गया है यह दिखाता है कि यदि सही रणनीति और कड़ाई से नियमों का पालन किया जाए तो राजस्व वसूली में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है आने वाले समय में भी प्रशासन इस गति को बनाए रखने और नए कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में काम करता रहेगा इस उपलब्धि ने न केवल जिले की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है बल्कि प्रदेश स्तर पर उसकी पहचान को भी और सशक्त किया है सिंगरौली का यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है जहां खनन और राजस्व प्रबंधन को लेकर सुधार की आवश्यकता है

एक गलती और जिंदगी दांव पर ओवरटेक के चक्कर में खौफनाक सड़क हादसा

खरगोन । मध्यप्रदेश के खरगोन शहर से एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है जिसने एक बार फिर सड़क पर लापरवाही के खतरनाक अंजाम को उजागर कर दिया है आनंद नगर इलाके में सुबह के समय एक ऐसा हादसा हुआ जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं जानकारी के मुताबिक सींट्रिंग का काम करने वाला युवक सद्दाम अहमद अपनी बाइक से लोहे का सरिया लेकर जा रहा था सुबह का वक्त था और सड़क पर सामान्य ट्रैफिक चल रहा था इसी दौरान उसने एक स्कूल बस को ओवरटेक करने की कोशिश की लेकिन यह कोशिश उसकी जिंदगी पर भारी पड़ गई जैसे ही उसने बस को पार करने की कोशिश की बाइक पर रखा सरिया बस से टकरा गया और जोरदार झटके के साथ सीधे उसके गले में जा धंसा हादसा इतना खतरनाक था कि लोहे का सरिया युवक के गले में करीब चार इंच तक अंदर घुस गया और मौके पर ही खून बहने लगा यह दृश्य इतना भयावह था कि आसपास मौजूद लोग भी घबरा गए लेकिन इसी बीच इंसानियत की एक मिसाल भी देखने को मिली एक ऑटो चालक ने बिना समय गंवाए घायल युवक को अपनी गाड़ी में बैठाया और तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज किया लेकिन युवक की हालत को गंभीर देखते हुए उसे तुरंत Indore रेफर कर दिया गया जहां उसका इलाज जारी है बताया जा रहा है कि फिलहाल उसकी हालत नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर उसे बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है बताया गया कि 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े एक चालक ने घायल को तुरंत शिफ्ट करने में संवेदनशीलता नहीं दिखाई और वीडियो बनने के डर से ही कार्रवाई की इस तरह का व्यवहार गंभीर सवाल खड़े करता है क्योंकि आपात स्थिति में हर पल कीमती होता है और ऐसी लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती है यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही किस तरह जानलेवा बन सकती है खासकर ओवरटेक करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी है अक्सर लोग जल्दबाजी या जोखिम लेकर आगे निकलने की कोशिश करते हैं लेकिन एक छोटी सी चूक जिंदगी और मौत के बीच की दूरी को खत्म कर सकती है सड़क सुरक्षा के नियम सिर्फ औपचारिकता नहीं हैं बल्कि हमारी जिंदगी की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं ऐसे में हर वाहन चालक की जिम्मेदारी है कि वह नियमों का पालन करे और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखे यह हादसा एक चेतावनी है कि कुछ सेकंड की जल्दबाजी पूरे जीवन पर भारी पड़ सकती है

वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, TMC की आपत्तियों पर कहा—‘ऐसा हर बार होता है’

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 जमा होना कोई नई बात नहीं है, यह प्रक्रिया पहले भी होती रही है। अदालत ने साथ ही कहा कि अगर किसी नाम को लेकर आपत्ति है तो चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। फॉर्म-6 को लेकर TMC ने जताई थी आपत्ति तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म-6 जमा किए हैं। फॉर्म-6 का उपयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संसदीय क्षेत्र बदलने के लिए किया जाता है। उनका कहना था कि पूरक सूची आने के बाद भी नए फॉर्म स्वीकार किए जा रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा—पहली बार नहीं सुनवाई के दौरान बेंच ने टिप्पणी की कि “ऐसा हर बार होता है, इसमें कुछ असामान्य नहीं है।” अदालत ने कहा कि किसी भी नए नाम पर आपत्ति दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध है और संबंधित पक्ष चुनाव आयोग से संपर्क कर सकता है। चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्ष भारत निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि नियमों के अनुसार उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि तक मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति हाल ही में 18 वर्ष का हुआ है तो उसे मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार है। अदालत ने प्रक्रिया समझने की दी नसीहत सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव उसी सूची के आधार पर होते हैं, जो तय तिथि तक अपडेट होती है। अदालत ने संकेत दिया कि सभी आपत्तियों पर निर्णय 7 अप्रैल तक लिया जाएगा।

मैसेजिंग ऐप्स यूजर्स को बड़ी राहत…. SIM Binding नियम लागू होने की तारीख 31 दिसंबर तक बढ़ी

नई दिल्ली। डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार लगातार नए नियम लागू कर रही है। इसी कड़ी में सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram और Signal के लिए SIM Binding नियम बनाया है। पहले सरकार का इस नियम को 1 मार्च से लागू करने का प्लान था लेकिन दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को बड़ी राहत दी है। सरकार ने SIM Binding नियम को लागू करने की आखिरी तारीख को अब साल के अंत तक 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। दरअसल, इन प्लेटफॉर्म्स ने सरकार को बताया कि इस नियम को लागू करने में उन्हें कई तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए उन्होंने ज्यादा समय मांगा था। इस पर सरकार ने उनकी बात मानते हुए डेडलाइन आगे बढ़ा दी है। मनीकंट्रोल के सूत्रों के मुताबिक, DoT ने 30 मार्च से कंपनियों को अलग-अलग इस फैसले की जानकारी देना शुरू कर दिया था। सिर्फ मैसेजिंग ऐप्स ही नहीं, बल्कि मोबाइल बनाने वाली कंपनियां और ऑपरेटिंग सिस्टम देने वाली कंपनियां जैसे Google और Apple ने भी इस नियम को लागू करने के लिए ज्यादा समय मांगा था। खासतौर पर Apple ने कहा कि उसके iOS सिस्टम में कुछ तकनीकी सीमाएं हैं, जिनकी वजह से इस नियम को तुरंत लागू करना मुश्किल है। हालांकि, कंपनी इस पर काम कर रही है और समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। इस नियम के तहत अब इन ऐप्स को इस तरह डिजाइन करना होगा कि वे तभी काम करें जब यूजर का रजिस्टर्ड SIM उसी फोन में मौजूद हो। यानी अगर SIM निकाल दिया गया या बदल दिया गया, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है। ऐसे काम करता है यह नियमSIM Binding नियम को इस तरह तैयार किया गया है कि मैसेजिंग ऐप्स जैसे WhatsApp, Telegram और Signal यूजर के मोबाइल में मौजूद SIM कार्ड से जुड़े रहें। आसानी से समझें तो अगर आपने जिस नंबर से WhatsApp अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में होना चाहिए। अगर SIM हटा दिया गया, बदल दिया गया या बंद हो गया, तो ऐप का एक्सेस सीमित हो सकता है या अकाउंट काम करना बंद कर सकता है। इस नियम का मकसद यह कन्फर्म करना है कि हर अकाउंट किसी असली और एक्टिव मोबाइल नंबर से जुड़ा रहे, जिससे फर्जी अकाउंट्स और साइबर फ्रॉड को रोका जा सके। जरूरी है यह नियमदरअसल, इस नियम की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि हाल के समय में ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी WhatsApp अकाउंट और साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई लोग बिना एक्टिव SIM के भी मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे उनकी पहचान ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में SIM Binding नियम से हर अकाउंट को एक असली मोबाइल नंबर से जोड़ना आसान होगा, जिससे सुरक्षा बढ़ेगी और गलत इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकेगी।