स्पेस नेटवर्क: कैसे काम करता है अंतरिक्ष का ‘सेल टावर’ और डेटा पहुंचाता है पृथ्वी तक

नई दिल्ली। अंतरिक्ष में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स और पृथ्वी पर मिशन कंट्रोल टीम के बीच लगातार संपर्क बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए वैज्ञानिक ‘स्पेस नेटवर्क’ नामक एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग करते हैं। यह नेटवर्क अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) और पृथ्वी से जुड़े रहने में मदद करता है, ताकि डेटा, वीडियो और आवाज तुरंत ट्रांसमिट हो सके। स्पेस नेटवर्क क्या है?स्पेस नेटवर्क में ट्रैकिंग और डेटा रिले सैटेलाइट्स (TDRS) का समूह शामिल है। ये सैटेलाइट्स पृथ्वी से लगभग 35,000 किलोमीटर ऊपर जियोसिंक्रोनस कक्षा में घूमते हैं और अंतरिक्ष में ‘सेल टावर’ की तरह काम करते हैं। इसका मतलब है कि स्पेस स्टेशन अपनी कक्षा में कहीं भी हो, टीडीआरएस सैटेलाइट से संपर्क बनाए रख सकता है। डेटा कैसे ट्रांसमिट होता है?जब स्पेस स्टेशन पर कोई अंतरिक्ष यात्री मिशन कंट्रोल को डेटा, वीडियो या आवाज भेजता है, तो स्टेशन का कंप्यूटर इसे रेडियो सिग्नल में बदल देता है। यह सिग्नल स्टेशन के एंटीना के जरिए टीडीआरएस सैटेलाइट तक पहुंचता है। फिर टीडीआरएस इसे न्यू मैक्सिको के व्हाइट सैंड्स कॉम्प्लेक्स तक रिले करता है, जहां से लैंडलाइन के जरिए ह्यूस्टन में मिशन कंट्रोल तक सिग्नल जाता है। पूरी प्रक्रिया मिलीसेकंड में पूरी होती है, इसलिए बातचीत में कोई noticeable देरी नहीं होती। वैज्ञानिक डेटा का पृथ्वी पर ट्रांसमिशनस्पेस स्टेशन पर एस्ट्रोनॉट्स भौतिकी, जीव विज्ञान, खगोल विज्ञान और मौसम विज्ञान जैसे कई प्रयोग करते हैं। इन प्रयोगों से मिलने वाला डेटा भी उसी स्पेस नेटवर्क के जरिए पृथ्वी पर भेजा जाता है। डेटा रेडियो सिग्नल में बदलकर टीडीआरएस सैटेलाइट तक भेजा जाता है, फिर व्हाइट सैंड्स और ह्यूस्टन होते हुए वैज्ञानिकों तक पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया के कारण वैज्ञानिक लगभग रीयल टाइम में डेटा प्राप्त कर पाते हैं। शिक्षा और संपर्क में सुधारनासा इस नेटवर्क का इस्तेमाल शिक्षा कार्यक्रमों के लिए भी करता है। अंतरिक्ष यात्री वीडियो और वॉइस कॉल के जरिए स्कूलों के बच्चों के सवालों का जवाब देते हैं। पहले, जब यह नेटवर्क नहीं था, तो संपर्क सिर्फ 15 मिनट तक सीमित था। अब लगभग हर समय अंतरिक्ष यात्री और पृथ्वी की टीम के बीच सतत संपर्क रहता है। प्रबंधन और निगरानीस्पेस नेटवर्क का प्रबंधन नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर (मैरीलैंड) द्वारा किया जाता है। इसके रणनीतिक संचालन की देखरेख स्कैन प्रोग्राम ऑफिस करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच डेटा और आवाज का आदान-प्रदान लगातार और सुरक्षित रहे।
जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा

नई दिल्ली। सकल जीएसटी संग्रह मार्च 2026 में 2,00,064 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जो पिछले साल इसी महीने के 1,83,845 करोड़ रुपए के मुकाबले 8.8 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और आयात पर लगने वाले जीएसटी में तेज इजाफे के कारण हुई है। घरेलू सामान पर जीएसटी संग्रह में सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत और आयात पर जीएसटी में 17.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिफंड को हटाने पर शुद्ध संग्रहयदि 22,074 करोड़ रुपए के रिफंड को हटा दिया जाए, तो मार्च में शुद्ध जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 1,77,990 करोड़ रुपए हो गया। इससे पता चलता है कि कर राजस्व में निरंतर सुधार और बेहतर अनुपालन की स्थिति बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपए रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 20.55 लाख करोड़ रुपए से 8.3 प्रतिशत अधिक है। शुद्ध जीएसटी संग्रह (रिफंड हटाकर) 19.34 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक है। उपकर संग्रह में गिरावटहालांकि, उपकर संग्रह में मार्च में नकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई और यह -177 करोड़ रुपए पर रहा। इसका मुख्य कारण अधिक रिफंड और समायोजन थे। विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी संग्रह की यह वृद्धि भारत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि (लगभग 7 प्रतिशत) के अनुरूप है, जो बढ़ती खपत, आयात और बेहतर कर अनुपालन का संकेत देती है। पिछले महीने का प्रदर्शनफरवरी 2026 में भी जीएसटी संग्रह में 9.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई थी। फरवरी में सकल संग्रह बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा। इसमें घरेलू जीएसटी राजस्व में 10.2 प्रतिशत और आयात से जीएसटी राजस्व में 5.4 प्रतिशत का योगदान रहा। यह प्रवृत्ति बताती है कि भारत में कर प्रणाली मजबूत होती जा रही है और कर अनुपालन में सुधार हो रहा है। विशेषज्ञों की राय और अर्थव्यवस्था पर प्रभावविशेषज्ञों का मानना है कि मार्च और फरवरी में जीएसटी संग्रह की लगातार वृद्धि यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है। घरेलू खपत में बढ़ोतरी, आयात में विस्तार और बेहतर अनुपालन ने कर संग्रह को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यह संकेत है कि सरकारी राजस्व आधार मजबूत है और देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल रही है।।
डिजिटल इंडिया की रफ्तार तेज 5G यूजर्स में भारत बना नंबर 2 हर महीने रिकॉर्ड डेटा खपत

नई दिल्ली । भारत में डिजिटल क्रांति अब एक नए स्तर पर पहुंच चुकी है जहां मोबाइल डेटा का इस्तेमाल लगातार रिकॉर्ड बना रहा है। Nokia की हालिया रिपोर्ट Nokia Mobile Broadband Index 2026 के मुताबिक देश में हर मोबाइल यूजर एक महीने में औसतन 31GB से ज्यादा डेटा खर्च कर रहा है। यह आंकड़ा न सिर्फ भारत में इंटरनेट की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि लोग अब डिजिटल सेवाओं पर कितने ज्यादा निर्भर हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 5G टेक्नोलॉजी का विस्तार बेहद तेजी से हो रहा है। साल दर साल 5G ट्रैफिक में 70 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इतना ही नहीं अब देश के कुल मोबाइल ब्रॉडबैंड ट्रैफिक का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा 5G से आ रहा है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि यूजर्स तेजी से नई और तेज नेटवर्क तकनीक को अपना रहे हैं। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G सब्सक्राइबर बेस बन चुका है। इसका मतलब है कि केवल एक देश ही भारत से आगे है जबकि बाकी दुनिया भारत से पीछे है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ साल पहले तक 4G ही मुख्य नेटवर्क था और अब 5G तेजी से उसकी जगह ले रहा है। डेटा खपत में इस बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े कारण हैं। आजकल लोग 4K वीडियो स्ट्रीमिंग का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे डेटा की खपत तेजी से बढ़ती है। इसके अलावा AI आधारित एप्लिकेशन और क्लाउड गेमिंग जैसे नए ट्रेंड भी डेटा उपयोग को बढ़ा रहे हैं। मनोरंजन से लेकर कामकाज तक लगभग हर चीज अब इंटरनेट पर निर्भर हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मेट्रो शहर 5G उपयोग में सबसे आगे हैं जहां कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक का 58 प्रतिशत हिस्सा 5G का है। इसका मतलब है कि बड़े शहरों में लोग तेजी से हाई स्पीड इंटरनेट अपना रहे हैं और उसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। अगर डिवाइस की बात करें तो 2025 तक देश में 892 मिलियन से ज्यादा 4G डिवाइस एक्टिव थे जिनमें से 383 मिलियन डिवाइस 5G सपोर्ट के साथ आ चुके हैं। खास बात यह है कि हाल ही में लॉन्च हुए 90 प्रतिशत से ज्यादा स्मार्टफोन 5G सपोर्ट के साथ आ रहे हैं जो इस टेक्नोलॉजी के भविष्य को और मजबूत बनाता है। आने वाले समय में यह आंकड़े और भी तेजी से बढ़ने वाले हैं। अनुमान है कि 2031 तक भारत में 5G यूजर्स की संख्या 1 अरब के पार पहुंच सकती है। इसका सीधा मतलब है कि देश की डिजिटल इकोनॉमी और भी मजबूत होगी और इंटरनेट का उपयोग जीवन के हर क्षेत्र में और गहराई से जुड़ जाएगा। यह पूरा परिदृश्य दिखाता है कि भारत अब सिर्फ इंटरनेट यूजर वाला देश नहीं रहा बल्कि वह एक डिजिटल पावरहाउस बनता जा रहा है जहां डेटा ही नई ताकत है और 5G उसकी सबसे बड़ी गति बनकर उभर रहा है
आठवें वेतन आयोग के सदस्य सरकारी कर्मचारियों से करेंगे अहम मुद्दों पर चर्चा

नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग प्रस्तावित वेतन वृद्धि और भत्तों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से बातचीत करने के लिए तैयार है। आयोग के सदस्य 24 अप्रैल को देहरादून में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करेंगे, जिसमें कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य पक्षकारों के प्रतिनिधि वेतन संरचना, भत्ते और पेंशन से जुड़े सुझाव साझा करेंगे। आयोग ने कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह की बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की समस्याओं और अपेक्षाओं को व्यापक रूप से समझा जा सके। इन बैठकों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर आयोग यह तय करेगा कि वेतन, पेंशन और अन्य लाभों में कितना संशोधन किया जाना चाहिए। इच्छुक समूहों और व्यक्तियों को बैठक में भाग लेने के लिए 10 अप्रैल तक समय का अनुरोध करना अनिवार्य होगा। आयोग चयनित प्रतिभागियों को बैठक के सटीक स्थान और समय के बारे में सूचित करेगा। बयान में कहा गया है कि स्थान और कार्यक्रम की जानकारी बाद में दी जाएगी। कर्मचारी संघ, पेंशनभोगी संघ, संगठन और व्यक्तिगत कर्मचारी भी वेतन, भत्ते और पेंशन संबंधी मुद्दों पर अपने विचार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 30 अप्रैल तक ज्ञापन के रूप में भेज सकते हैं। आयोग इन सभी प्रस्तुतियों और बैठकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। वर्तमान में लगभग 1.1 करोड़ केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग की त्वरित सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है।
भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बड़ी खबर: डेटा सेंटर क्षमता में 2026 तक 30% बढ़ोतरी

नई दिल्ली। भारत की डेटा सेंटर इंडस्ट्री अगले सालों में तेजी से बढ़ने की ओर बढ़ रही है। नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में देश की डेटा सेंटर क्षमता सालाना आधार पर लगभग 30 प्रतिशत बढ़ सकती है। इसके पीछे मजबूत मांग और निवेशकों की लगातार रुचि मुख्य कारण माने जा रहे हैं। सीबीआरई के विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष लगभग 500 मेगावाट की नई डेटा सेंटर क्षमता जोड़ी जाएगी, जो 2025 में जोड़ी गई रिकॉर्ड 440 मेगावाट से अधिक है। 2025 के अंत तक घरेलू डेटा सेंटर की कुल क्षमता लगभग 1,700 मेगावाट तक पहुँच चुकी थी। निवेश में तेजी और विदेशी पूंजी का योगदानडेटा सेंटर सेक्टर में नई पूंजी निवेश भी लगातार आकर्षित हो रही है। 2025 में इस क्षेत्र में 56.4 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धताएँ हुईं, जिससे कुल निवेश प्रतिबद्धताएँ 126 अरब डॉलर तक पहुँच गईं। इस वर्ष निवेश में लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे यह राशि संभावित रूप से 180 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। सीबीआरई के अध्यक्ष और सीईओ Anshuman Magazine ने कहा, “भारत में डेटा सेंटर की कहानी अब संभावनाओं के बारे में नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन के बारे में है।” उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी इस विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है। राज्यों और शहरों की भूमिकारिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य डेटा सेंटर निवेश में आगे रहेंगे। वहीं, कम लेटेंसी, 5G रोलआउट और डेटा स्थानीयकरण की बढ़ती मांग के कारण टियर-II शहर जैसे अहमदाबाद, विशाखापत्तनम, पटना और भोपाल में भी तेजी से विकास हो रहा है। मुंबई का दबदबा, एआई और क्लाउड की बढ़ती मांगभारत में वर्तमान में कुल डेटा सेंटर क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक मुंबई में स्थित है। मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु मिलकर कुल क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत योगदान देते हैं। एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग से बढ़ती मांग बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा रही है, जिससे ऑपरेटर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान दे रहे हैं। भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी। सरकारी नीतियों का समर्थनरिपोर्ट के अनुसार कर प्रोत्साहन, हरित पूंजीगत व्यय समर्थन और नियामकीय सरलीकरण जैसी सरकारी नीतियां निवेश में और तेजी लाने और भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख डेटा सेंटर केंद्र बनाने में मदद करेंगी।
बड़े पद पर सादगी की मिसाल बिहार के अफसरों की संपत्ति ने सबको किया हैरान

नई दिल्ली । बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में उठाए गए एक कदम ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य के कई वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों द्वारा अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने के बाद जो तस्वीर सामने आई है वह चौंकाने वाली भी है और कहीं न कहीं सादगी की मिसाल भी पेश करती है। ऊंचे पदों पर बैठे इन अधिकारियों के पास न तो भारी भरकम संपत्ति है और न ही आलीशान जीवनशैली के संकेत हर जगह नजर आते हैं। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के मामले में यह सामने आया कि उनकी पत्नी के पास उनसे अधिक संपत्ति है। उनके पास नकद राशि मात्र 15400 रुपये है जबकि बैंक खातों में सीमित जमा और थोड़े से निवेश हैं। उनके पास एक पुरानी कार और बहुत कम मात्रा में सोना है। इससे यह साफ होता है कि उच्च पद पर होने के बावजूद उनकी जीवनशैली बेहद साधारण है। वहीं बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार का मामला भी चर्चा में है क्योंकि उनके पास नकद राशि बिल्कुल नहीं है। हालांकि उनके बैंक खातों में अच्छी खासी रकम जमा है और आभूषण के रूप में भी निवेश है। यह दर्शाता है कि आज के दौर में कई अधिकारी नकद रखने की बजाय डिजिटल और सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई अधिकारियों की संपत्ति में और भी दिलचस्प पहलू सामने आए हैं। जैसे अरविंद कुमार चौधरी के पास खुद की कोई कार नहीं है जबकि नर्मदेश्वर लाल के पास न तो जमीन है और न ही वाहन। यह ऐसे उदाहरण हैं जो आम धारणा को चुनौती देते हैं कि बड़े पदों पर बैठे लोगों के पास अपार संपत्ति होती ही है। इसी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव कुमार अनुपम के पास मात्र 5000 रुपये नकद हैं जबकि उनकी कुल बचत बैंक और अन्य योजनाओं में जमा है। यह भी एक संकेत है कि अब वित्तीय प्रबंधन का तरीका बदल रहा है और लोग नकद की बजाय निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुछ अधिकारियों ने निवेश के अलग अलग तरीके अपनाए हैं। धर्मेंद्र सिंह के पास जहां बैंक बैलेंस और बॉन्ड निवेश है वहीं उनके पास दो गाय और दो बछड़े भी हैं जो पारंपरिक और ग्रामीण निवेश का उदाहरण पेश करते हैं। वहीं कुंदन कृष्णन ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर आधुनिक वित्तीय योजना को अपनाया है। इस पूरी सूची में एक बात साफ तौर पर उभरकर सामने आती है कि बिहार के कई अधिकारी सादगी भरा जीवन जी रहे हैं और अपनी आय को सोच समझकर अलग अलग क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। कहीं परंपरागत साधन हैं तो कहीं आधुनिक वित्तीय उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह खुलासा न सिर्फ पारदर्शिता को बढ़ावा देता है बल्कि आम लोगों के बीच यह संदेश भी देता है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी सादगी और संतुलित जीवनशैली को अपनाते हैं। यह तस्वीर उस सोच को बदलने का काम करती है जिसमें अक्सर यह मान लिया जाता है कि ऊंचे पद का मतलब अत्यधिक संपत्ति और विलासिता ही होता है।
बॉक्स ऑफिस से आगे बढ़ा क्रेज हांगकांग में धुरंधर मैराथन ने रचा नया इतिहास

नई दिल्ली । धुरंधर 2 का जलवा अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा बल्कि दुनियाभर में इस फिल्म ने अपनी धाक जमा दी है। खासकर हांगकांग में इस फिल्म को लेकर जो दीवानगी देखने को मिल रही है वह अपने आप में एक नया रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही है। रणवीर सिंह की इस स्पाई थ्रिलर ने विदेशी बाजारों में भी ऐसा असर छोड़ा है कि दर्शक इसे बार बार देखने के लिए तैयार हैं। हांगकांग में फिल्म के इसी जबरदस्त क्रेज को देखते हुए एक अनोखा इवेंट आयोजित किया जा रहा है जिसे धुरंधर मैराथन नाम दिया गया है। इस खास आयोजन में धुरंधर और धुरंधर 2 को बैक टू बैक दिखाया जाएगा। दोनों फिल्मों का कुल रनटाइम करीब 8 घंटे का है जो किसी भी दर्शक के लिए एक लंबा लेकिन रोमांचक सिनेमाई अनुभव साबित होने वाला है। दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस मैराथन स्क्रीनिंग के दौरान तीन ब्रेक भी रखे गए हैं ताकि लोग आराम से इस सफर का आनंद ले सकें। इस मैराथन को हांगकांग में फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा प्लान किया गया है। सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए बताया गया कि यह फैसला वहां मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स के कारण लिया गया है। यह साफ दिखाता है कि फिल्म ने दर्शकों के दिलों में कितनी गहरी जगह बना ली है। अगर बॉक्स ऑफिस की बात करें तो धुरंधर 2 ने हांगकांग में भी शानदार प्रदर्शन किया है। खास बात यह है कि बिना चीनी सबटाइटल्स के ही इस फिल्म ने वहां 1 मिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यह पहली भारतीय फिल्म बन गई है जिसने इस तरह का रिकॉर्ड बनाया। इतना ही नहीं महज 12 दिनों के अंदर फिल्म 2 मिलियन डॉलर के करीब पहुंच गई है और यह पूरी कमाई सिर्फ दो थिएटर्स से हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि दर्शकों में फिल्म को लेकर कितना उत्साह है। अब जब फिल्म के लिए चीनी सबटाइटल्स भी उपलब्ध हो गए हैं तो उम्मीद की जा रही है कि इसका कलेक्शन और तेजी से बढ़ेगा। वैश्विक स्तर पर भी धुरंधर 2 का प्रदर्शन शानदार रहा है। ओवरसीज मार्केट में फिल्म 37 मिलियन डॉलर यानी करीब 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। यह इसे दुनिया की सबसे सफल भारतीय फिल्मों में शामिल करता है। इस पूरी सफलता से यह साफ हो जाता है कि अब भारतीय सिनेमा की पहुंच और प्रभाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है। धुरंधर 2 जैसी फिल्में न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। हांगकांग में आयोजित हो रही यह 8 घंटे की मैराथन स्क्रीनिंग सिर्फ एक इवेंट नहीं बल्कि इस बात का प्रमाण है कि जब कंटेंट दमदार हो तो भाषा और देश की सीमाएं मायने नहीं रखतीं। रणवीर सिंह की यह फिल्म अब एक ग्लोबल फेनोमेनन बन चुकी है और आने वाले समय में इसके और भी बड़े रिकॉर्ड देखने को मिल सकते हैं
“महिंद्रा की मार्च में धमाकेदार बिक्री: 99,969 गाड़ियों के साथ 21% उछाल!”

नई दिल्ली। देश की प्रमुख ऑटो कंपनी Mahindra & Mahindra ने मार्च 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए बिक्री के नए आंकड़े छू लिए हैं। कंपनी ने कुल 99,969 वाहनों की बिक्री दर्ज की, जो सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्शाती है। यह आंकड़ा घरेलू और निर्यात दोनों को मिलाकर है, जो कंपनी की मजबूत बाजार पकड़ और बढ़ती मांग का संकेत देता है। SUV सेगमेंट बना ग्रोथ का इंजनमहिंद्रा की इस तेज रफ्तार का सबसे बड़ा कारण उसका यूटिलिटी व्हीकल (SUV) सेगमेंट रहा। मार्च में घरेलू बाजार में कंपनी ने 60,272 यूनिट SUV बेचीं, जो 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। वहीं निर्यात को मिलाकर कुल SUV बिक्री 62,109 यूनिट तक पहुंच गई। पूरे वित्त वर्ष में कंपनी ने SUV सेगमेंट में 6,60,276 यूनिट की बिक्री की, जो 20 प्रतिशत की सालाना वृद्धि को दर्शाती है। कमर्शियल व्हीकल में भी दमदार प्रदर्शनकमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में भी कंपनी ने संतुलित और मजबूत प्रदर्शन किया। मार्च में घरेलू CV बिक्री 24,928 यूनिट रही, जो 11 प्रतिशत की बढ़त है। खासतौर पर 2 से 3.5 टन वाले लाइट कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 21,402 यूनिट की बिक्री हुई। वहीं 3.5 टन से कम वाले वाहनों की सालाना बिक्री 2,89,597 यूनिट रही, जो 13 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाती है। थ्री-व्हीलर सेगमेंट में जबरदस्त उछालकंपनी के थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी तेज रफ्तार देखने को मिली। मार्च में 39 प्रतिशत की बढ़त के साथ 10,801 यूनिट की बिक्री हुई। इस सेगमेंट में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की बढ़ती मांग भी एक बड़ा कारण रही। पूरे वित्त वर्ष में इस श्रेणी में 1,12,003 यूनिट की बिक्री हुई, जो 30 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि है। निर्यात में सालाना बढ़त, लेकिन मार्च में हल्की गिरावट निर्यात के मोर्चे पर कंपनी ने वित्त वर्ष के दौरान 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 40,990 यूनिट का आंकड़ा पार किया। हालांकि मार्च महीने में निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 3,968 यूनिट रहा, जो वैश्विक बाजार की चुनौतियों की ओर इशारा करता है। सीईओ का बयान: मांग बनी हुई मजबूतकंपनी के ऑटोमोटिव डिवीजन के सीईओ Nalinikanth Gollagunta ने कहा कि मार्च में SUV की 60,272 यूनिट बिक्री और LCV सेगमेंट में 24,928 यूनिट की बिक्री कंपनी की मजबूत मांग को दर्शाती है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भी यह ग्रोथ जारी रहेगी। शेयर बाजार में भी दिखा असरकंपनी के इस शानदार प्रदर्शन का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। NSE पर महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर करीब 3 प्रतिशत चढ़कर 3,051 रुपये के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। लगातार बेहतर प्रदर्शन का सिलसिलागौरतलब है कि कंपनी ने फरवरी 2026 में भी 18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97,177 यूनिट की बिक्री दर्ज की थी। लगातार दूसरे महीने मजबूत प्रदर्शन से साफ है कि महिंद्रा की रणनीति और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बाजार में अच्छी पकड़ बनाए हुए है।
इलीगल बैट पर सख्त नजर आईपीएल में तेवतिया को मैदान पर ही बदलना पड़ा बल्ला

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के एक मुकाबले में उस समय दिलचस्प और थोड़ा विवादित माहौल बन गया जब राहुल तेवतिया बल्लेबाजी करने उतरे और मैदानी अंपायर की नजर उनके बल्ले पर टिक गई। गुजरात टाइटन्स के इस फिनिशर को पंजाब किंग्स के खिलाफ खेलते हुए अंपायर ने रोक लिया और उनके बैट की जांच की गई। जांच में पाया गया कि उनका बल्ला तय मानकों के अनुरूप नहीं है जिसे क्रिकेट की भाषा में इलीगल बैट कहा जाता है। मैदान पर मौजूद अंपायर ने तुरंत बैट गेज की मदद से बल्ले को परखा। यह एक खास उपकरण होता है जिससे यह जांचा जाता है कि बल्ला निर्धारित मोटाई और चौड़ाई के नियमों में फिट बैठता है या नहीं। जब बल्ला इस गेज से पास नहीं हो पाया तो अंपायर ने बिना देर किए राहुल तेवतिया को बल्ला बदलने का निर्देश दिया। तेवतिया ने भी इस फैसले का सम्मान करते हुए तुरंत नया बल्ला मंगवाया और खेल जारी रखा। हालांकि इस दौरान तेवतिया ने यह समझाने की कोशिश की कि उनके बल्ले पर लगे स्टीकर की वजह से वह गेज से पार नहीं हो पा रहा है लेकिन अंपायरों ने नियमों के तहत कोई ढील नहीं दी। आईपीएल में अब तकनीकी जांच काफी सख्त हो गई है और किसी भी तरह की अनियमितता को तुरंत रोका जाता है। दरअसल आईपीएल 2025 से ही बल्लों की जांच को और कड़ा कर दिया गया है। अब बल्लेबाज के मैदान पर उतरने से पहले और यहां तक कि मैच के बीच में भी बल्ला चेक किया जा सकता है। फोर्थ अंपायर या ऑन फील्ड अंपायर कभी भी यह जांच कर सकते हैं जिससे खेल में निष्पक्षता बनी रहे। अगर नियमों की बात करें तो मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब यानी एमसीसी के अनुसार बल्ले की मोटाई 67 मिलीमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और किनारों की मोटाई 40 मिलीमीटर के अंदर रहनी जरूरी है। यही मानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट्स में लागू होते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इलीगल बैट इस्तेमाल करने पर कोई सजा मिलती है। इसका जवाब थोड़ा दिलचस्प है। पहली बार अगर किसी खिलाड़ी का बल्ला नियमों के खिलाफ पाया जाता है तो उसे सिर्फ बदलने के लिए कहा जाता है और खेल जारी रहता है। इसमें न तो रन की पेनल्टी दी जाती है और न ही खिलाड़ी को तुरंत बैन किया जाता है। लेकिन अगर कोई खिलाड़ी बार बार ऐसे नियमों का उल्लंघन करता है तो आईपीएल के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत उस पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें खिलाड़ी की मैच फीस का 50 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यानी पहली गलती पर चेतावनी और सुधार का मौका मिलता है लेकिन बार बार गलती करने पर आर्थिक दंड झेलना पड़ सकता है। इस घटना के बाद एक बार फिर यह साफ हो गया है कि आधुनिक क्रिकेट में तकनीक और नियमों की भूमिका कितनी अहम हो गई है। अब खिलाड़ियों को न सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना होता है बल्कि उपकरणों के नियमों का भी पूरी तरह पालन करना पड़ता है ताकि खेल की निष्पक्षता बनी रहे और किसी भी तरह का अनुचित लाभ न लिया जा सके
मुंबई एयरपोर्ट पर शुरू हुई इन-टर्मिनल क्विक कॉमर्स सर्विस, अदाणी एयरपोर्ट और Blinkit की पहल

नई दिल्ली हवाई यात्रा को आसान और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (एएएचएल) ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट के साथ साझेदारी कर देश की पहली “इन-टर्मिनल क्विक बिजनेस सर्विस” शुरू की है। इस नई सुविधा की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल -2 से की गई है, जहां घरेलू विमान यात्रियों को अब हवाई अड्डे के भीतर ही कुछ मिनटों में आवश्यक सामान मिल जाएगा। एक मिनट में यात्रा: यात्रा के दौरान नई सुविधाइस सेवा के लिए यात्री अब ब्लिंकिट ऐप पर ऑर्डर करके चार्जर, दुकान, किताबें, पर्सनल केयर उत्पाद जैसी जरूरी चीजें तुरंत मंगा सकते हैं। खास बात यह है कि यह बोर्डिंग गेट, टॉक, फूड कोर्ट और आईसीआईसीआई बैंक के अंदर ही है। ऐसे यात्रियों को आखरी की तलाश में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। सुरक्षा के साथ स्मार्ट सेवाएयरपोर्ट जैसे संकेतक स्थान पर इस सेवा को पूरी सुरक्षा के साथ संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण ऑन-बोर्ड स्टाफ यह सुनिश्चित कर रहा है कि हवाई अड्डे के संचालन या यात्रियों के समय पर कोई असर न पड़े। सुरक्षा मानकों के तहत पैक्ड पानी, साबुत और ठंडे पेय पदार्थ जैसे तरल पदार्थ भी टर्मिनल के गैसोलीन स्टॉक के माध्यम से उपलब्ध हैं। यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने का प्रयासएचएएल के प्रवक्ता का कहना है, इसका पहला उद्देश्य टर्मिनल के साथ-साथ डिजिटल सुविधा में यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है। ऐप-आधारित इस सेवा यात्रियों को अपने समय का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलता है और एयरपोर्ट पर अधिक “यात्री-दर्शक” बनाना एक महत्वपूर्ण कदम है। नए अवसर के लिए ब्लिंकिट, नई कमाई के लिए एयरपोर्टब्लिंक के लिए इसने एक नए और हाई-डिमांड सेक्टर में शामिल होने का मौका दिया है, जहां समय की कमी के साथ त्वरित सेवा की जरूरत सबसे ज्यादा है। वहीं एचएएल के लिए यह पहले केवल यात्रियों की सुविधा को बढ़ावा देता है, बल्कि डिजिटल पैमाने के माध्यम से गैर-विमान राजस्व को भी बढ़ावा देता है। यात्रियों की आम समस्या का समाधानअक्सर देखा जाता है कि यात्री जरूरी सामान भूल जाते हैं या बोर्डिंग से पहले खरीदारी के लिए उनके पास नहीं जाते। टर्मिनल-2 जैसे संयुक्त हवाई अड्डे पर यह सेवा इस समस्या का प्रभावी समाधान साबित हो सकती है। अब बिना समय गंवाए, यात्री अपनी जरूरत की चीजें तुरंत हासिल कर सकता है। प्रौद्योगिकी से परिवर्तन यात्रा अनुभवसबसे पहले इस बात का संकेत है कि कैसे तकनीक और डिजिटल हवाई यात्रा के अनुभव को तेजी से बदला जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह के अन्य हवाई अड्डों पर भी दर्शन मिल सकते हैं, जिससे यात्रियों को अधिक सुविधा और विकल्प मिलेंगे।