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‘वायरल गर्ल’ की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई टली, जन्म प्रमाण पत्र को लेकर उठी आपत्तियां; 23 जून को होगी अगली सुनवाई

मध्‍य प्रदेश । इंदौर स्थित Madhya Pradesh High Court में शुक्रवार को सोशल मीडिया पर चर्चित ‘वायरल गर्ल’ की याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके जन्म और पहचान संबंधी दस्तावेजों में कथित रूप से हेरफेर कर उन्हें नाबालिग साबित करने की कोशिश की गई, जिससे उनकी वैध शादी को विवादित बनाया जा सके। हालांकि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से याचिका में मौजूद कमियों और जन्म प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि को लेकर आपत्तियां दर्ज की गईं। इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आवश्यक सुधार करने के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 जून को निर्धारित कर दी। याचिका में दावा किया गया है कि उनके जन्म रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनके पिता द्वारा जन्म संबंधी अभिलेखों में छेड़छाड़ कर उन्हें वास्तविक उम्र से कम दिखाने का प्रयास किया गया। याचिका के अनुसार छोटे भाई के दस्तावेजों को उनके दस्तावेज बताकर प्रस्तुत किया गया, जिससे उनकी आयु को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह बालिग हैं और उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में कथित हस्तक्षेप की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। मामले ने उस समय अधिक तूल पकड़ा जब मार्च 2026 में विवाह के बाद उनकी उम्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया। याचिका में कहा गया है कि फिल्म शूटिंग के सिलसिले में केरल प्रवास के दौरान उनकी मुलाकात एक युवक से हुई थी, जिसके बाद दोनों ने विवाह कर लिया। विवाह के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इस संबंध को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। इसी बीच National Commission for Scheduled Tribes की ओर से विवाह के समय याचिकाकर्ता की उम्र को लेकर आशंका व्यक्त की गई थी। इसके बाद मामले में पुलिस जांच शुरू हुई और उपलब्ध शिकायतों एवं दस्तावेजों के आधार पर युवक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। हालांकि उम्र संबंधी विवाद और दस्तावेजों की सत्यता का मुद्दा अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाह को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई। याचिकाकर्ता और उनके पति ने अदालत से अनुरोध किया है कि मूल जन्म प्रमाण पत्र को बहाल किया जाए तथा रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता P. V. Dinesh वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष ने याचिका में तकनीकी खामियों और जन्म प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि की स्पष्टता को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद अदालत के समक्ष जन्म प्रमाण पत्र की मूल प्रति प्रस्तुत की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकीलों को निर्देश दिया कि वे याचिका में मौजूद त्रुटियों को दूर करें और दस्तावेजों की स्पष्ट एवं प्रमाणित प्रतियां रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें। अदालत ने इसके लिए 10 दिन का समय प्रदान किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी, जहां संशोधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे विचार किया जाएगा।

MP में मानसून की दस्तक से पहले मौसम का बदला मिजाज, 5 जिलों में तेज आंधी का अलर्ट; 15 से 18 जून के बीच प्रदेश में प्रवेश की संभावना

मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन की आहट के साथ मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के कई हिस्सों में अपनी रफ्तार बढ़ा दी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 से 18 जून के बीच मानसून प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। इससे पहले पूरे प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं, जिसके चलते कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी देखने को मिल रही है। शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली। श्योपुर, सागर, डिंडौरी, जबलपुर, नरसिंहपुर और सिवनी सहित कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश का असर दिखाई दिया। सबसे ज्यादा नुकसान श्योपुर जिले में हुआ, जहां आंधी और बारिश से जुड़े अलग-अलग हादसों में चार लोगों की जान चली गई। जिले में करीब एक इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि सागर में आधा इंच पानी बरसा। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को भिंड, दतिया, छतरपुर, पन्ना और सागर जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज आंधी चलने के साथ बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर समेत 33 जिलों में गरज-चमक और बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, बड़वानी, देवास, शाजापुर और आगर-मालवा सहित पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में मौसम साफ रहने और तेज धूप खिलने के आसार हैं। श्योपुर जिले के रजपुरा गांव में तेज हवाओं के कारण एक कच्ची दीवार गिर गई, जिससे एक ही परिवार के चार सदस्य मलबे में दब गए। इस हादसे में भीमा आदिवासी, उनकी पत्नी सीमा और बहू राजवती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए राजस्थान रेफर किया गया है। वहीं जिले में ही तेज आंधी के दौरान एक ऑटो पलटने से एक महिला की भी मौत हो गई। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। जबलपुर और सीहोर में हवा की रफ्तार सबसे अधिक 74 किलोमीटर प्रतिघंटा रिकॉर्ड की गई। भोपाल में 56, ग्वालियर में 57 और अशोकनगर में 59 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। कई स्थानों पर धूलभरी आंधी ने भी जनजीवन को प्रभावित किया। हालांकि, जून माह में अब तक प्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक औसत से 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में सामान्य से 55 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसतन 2 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहेंगी। इसके बाद मानसून की औपचारिक एंट्री होने पर बारिश का दायरा और व्यापक हो सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने के साथ किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

फ्लाइट के बाथरूम में रची गई सोना तस्करी की हाईटेक साजिश नाकाम, स्पीकर बॉक्स से निकला 2.8 किलो विदेशी सोना

नई दिल्ली । देश में सोना तस्करी के नए-नए तरीकों के बीच अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया। कस्टम विभाग ने दुबई से अहमदाबाद पहुंची एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के टॉयलेट में छिपाकर रखा गया बड़ी मात्रा में विदेशी सोना बरामद किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि तस्करों ने विमान के बाथरूम में लगे साउंड सिस्टम का इस्तेमाल सोने को छिपाने के लिए किया था। कस्टम अधिकारियों को विमान में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद विस्तृत तलाशी अभियान चलाया गया। जांच के दौरान विमान के केबिन और विभिन्न तकनीकी हिस्सों की बारीकी से पड़ताल की गई। जब टीम विमान के टॉयलेट तक पहुंची तो वहां एक असामान्य स्थिति दिखाई दी। अधिकारियों ने तकनीकी विशेषज्ञों और विमान इंजीनियरों की सहायता से टॉयलेट में लगे जनरल अनाउंसमेंट सिस्टम के स्पीकर बॉक्स की जांच की। स्पीकर यूनिट को खोलने पर उसके भीतर दो विशेष पैकेट मिले, जिन्हें काले रंग की इलेक्ट्रिकल टेप से मजबूती से लपेटा गया था। पैकेटों को बाहर निकालकर खोला गया तो उनके अंदर 24 विदेशी सोने के बिस्किट बरामद हुए। बरामद सोने का कुल वजन लगभग 2.8 किलोग्राम बताया गया है, जबकि इसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 4.26 करोड़ रुपये आंकी गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि तस्करों ने सोने को विमान के टॉयलेट में छिपाकर रखने की सुनियोजित रणनीति अपनाई थी। आशंका है कि विमान के अहमदाबाद पहुंचने के बाद कोई स्थानीय संपर्क, ग्राउंड स्टाफ का सदस्य अथवा कोई अन्य व्यक्ति इसे निकालकर आगे पहुंचाने वाला था। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण यह पूरी योजना सफल नहीं हो सकी और सोना बरामद कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार तलाशी के दौरान विमान में मौजूद किसी भी यात्री या कर्मचारी ने बरामद सोने पर अपना दावा नहीं किया। इससे यह संकेत मिलता है कि तस्करी में शामिल व्यक्ति ने पकड़े जाने के डर से सोने को वहीं छोड़ दिया होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। कस्टम विभाग अब उड़ान से जुड़े दस्तावेजों, यात्री विवरण, क्रू रिकॉर्ड और विमान की गतिविधियों की जांच कर रहा है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सोना विमान के भीतर किसने रखा और इसके पीछे कौन-सा तस्करी नेटवर्क सक्रिय था। जांच एजेंसियां संभावित सहयोगियों और संपर्क सूत्रों की भी पहचान करने में जुटी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तस्करी गिरोह लगातार नए और तकनीकी रूप से जटिल तरीके अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। विमान के टॉयलेट में लगे स्पीकर सिस्टम का उपयोग कर सोना छिपाने की यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी मानी जा रही है। फिलहाल बरामद सोने को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया गया है और संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत आगे की कार्रवाई जारी है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े नए खुलासे सामने आ सकते हैं।

‘सप्लीमेंट्री की कभी गुंजाइश नहीं रही’: राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल बोले- संगठन ने जो जिम्मेदारी दी, उसे परिणाम देकर साबित किया

मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की निर्विरोध जीत के बाद राजधानी भोपाल में भाजपा प्रदेश कार्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर मुख्यमंत्री Mohan Yadav, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Hemant Khandelwal सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान राज्यसभा सदस्य चुने गए Rajneesh Agrawal ने अपने राजनीतिक सफर, संगठन के भरोसे और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात की। राजनीतिक जीवन और राज्यसभा में अपनी भूमिका को लेकर रजनीश अग्रवाल ने कहा कि देश के सामने प्रधानमंत्री Narendra Modi ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का जो लक्ष्य रखा है, वही उनका भी विजन है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण में जो भी जिम्मेदारी उन्हें मिलेगी, उसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। अपने छात्र जीवन से लेकर वर्तमान तक के सफर पर उन्होंने कहा कि जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने पूरी निष्ठा और आनंद के साथ निभाया। उनके अनुसार व्यक्ति को नियति द्वारा सौंपे गए कार्य को पूरी प्रतिबद्धता से करना चाहिए और परिणाम देने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक के जीवन में उन्हें जो अवसर मिले, उनमें उन्होंने अपनी पूरी क्षमता से काम किया। राज्यसभा और लोकसभा के पिछले चुनावों में नाम चर्चा में आने के बावजूद अवसर नहीं मिलने के सवाल पर अग्रवाल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व का निर्णय सर्वोपरि होता है। उनके मुताबिक नेतृत्व परिस्थितियों और संगठन की जरूरतों के आधार पर निर्णय लेता है और एक कार्यकर्ता के रूप में उनका दायित्व उन निर्णयों का सम्मान करना है। बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़े होने के कारण क्षेत्रीय अपेक्षाओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी मातृभूमि, गांव और क्षेत्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी हमेशा बनी रहेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल आश्वासन देने के बजाय परिणामों के आधार पर काम को परखा जाना चाहिए। जहां भी उनकी भूमिका होगी, वे अपनी जिम्मेदारी निभाने का पूरा प्रयास करेंगे। अपने जीवन की चुनौतियों और दिव्यांगता से जुड़े प्रश्न पर रजनीश अग्रवाल ने कहा कि संगठन और नेतृत्व ने उन पर हमेशा भरोसा जताया और कठिन से कठिन जिम्मेदारियां सौंपीं। उन्होंने कहा कि उन जिम्मेदारियों में असफलता की कोई गुंजाइश नहीं थी और उन्होंने हर बार परिणाम देकर उस भरोसे को साबित किया। उन्होंने कहा, “एक कार्यकर्ता से संगठन सौ प्रतिशत योगदान की अपेक्षा करता है। मेरा प्रयास हमेशा रहेगा कि मैं सौ प्रतिशत से भी अधिक देने की कोशिश करूं।” उनके अनुसार राज्यसभा सदस्य के रूप में मिली नई जिम्मेदारी भी संगठन के विश्वास का प्रतीक है और वे इस भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। राज्यसभा में प्रवेश के साथ अब रजनीश अग्रवाल की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठनात्मक अनुभव और लंबे सार्वजनिक जीवन का लाभ उन्हें संसद में प्रभावी भूमिका निभाने में मदद करेगा।

धर्मेंद्र प्रधान के भोपाल दौरे से पहले युकां-एनएसयूआई नेताओं को हिरासत में लिया गया, NEET मुद्दे पर प्रदर्शन की थी तैयारी

मध्‍य प्रदेश । राजधानी भोपाल में केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के दौरे से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उन्हें विरोध प्रदर्शन करने से रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई, जबकि पुलिस इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बता रही है। जानकारी के अनुसार युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता NEET परीक्षा और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच पुलिस ने कई नेताओं को उनके घरों से तथा कुछ को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के आसपास से हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में युवक कांग्रेस के शहर अध्यक्ष अमित खत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार शामिल हैं। संगठन के अनुसार दोनों को उनके निवास स्थान से पुलिस अपने साथ ले गई। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया और अन्य कार्यकर्ताओं को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने से हिरासत में लिया गया। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे को भी कांग्रेस कार्यालय के बाहर से पुलिस ने हिरासत में लिया। युवक कांग्रेस और एनएसयूआई लंबे समय से NEET परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। संगठन के नेताओं का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों से छात्रों का विश्वास प्रभावित हुआ है और इसी कारण वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इस बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने भी केंद्रीय मंत्री के दौरे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही समस्याओं के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपेक्षा है। सिंघार ने मऊगंज की छात्रा आकांक्षा के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। उन्होंने दावा किया कि सरकार को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उधर भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और गड़बड़ियों पर कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भोपाल में प्रधानमंत्री Narendra Modi के कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे हैं। फिलहाल हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई और संभावित विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।

अदिति यादव पर अभद्र टिप्पणी मामले में सख्त हुए सीएम योगी, बोले- बेटी का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पुत्री अदिति यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि किसी भी बेटी के सम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता और ऐसी टिप्पणियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, उन्होंने पुलिस अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेटियों के प्रति सम्मान भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा किसी भी परिस्थिति में अपमानजनक भाषा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में बेटियों और महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपनी भाषा और व्यवहार में विशेष संयम बरतना चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों को भी मर्यादित भाषा के उपयोग की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति, परिवार, महिला, बुजुर्ग या सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक शिष्टाचार के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत हमलों में बदलने की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत जीवन और परिवार के सदस्यों को विवादों में घसीटना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने सभी दलों से अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जिम्मेदार आचरण के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिली। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों ने महिलाओं के सम्मान और सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्र भाषा के उपयोग को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई लोगों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों और व्यक्तिगत हमलों के मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई ऐसे मामलों पर नियंत्रण स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को महिलाओं के सम्मान, सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग से जुड़े व्यापक मुद्दों के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी रहेगी।

BU के नाम बदलने पर छात्रों की दो टूक: ‘नाम नहीं, सुविधाएं बदलें’; बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

मध्‍य प्रदेश । भोपाल स्थित Barkatullah University का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ किए जाने के प्रस्ताव ने छात्रों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। राज्य सरकार की ओर से सामने आए इस प्रस्ताव पर विश्वविद्यालय परिसर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अधिकांश छात्रों का मानना है कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके नाम से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाली शिक्षा, शोध कार्य और सुविधाओं से बनती है। छात्रों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर हो, समय पर परीक्षाएं हों, परिणाम घोषित किए जाएं और शोध के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो इससे विद्यार्थियों को अधिक लाभ मिलेगा। कई छात्रों ने यह भी कहा कि नाम परिवर्तन की बजाय प्रशासन को कैंपस की बुनियादी व्यवस्थाओं, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं और प्लेसमेंट सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि कुछ छात्रों ने प्रस्तावित नाम परिवर्तन का समर्थन भी किया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम स्थानीय इतिहास, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा होना चाहिए। ऐसे छात्रों का मानना है कि ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ नाम भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दे सकता है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विश्वविद्यालय के नाम में बदलाव की चर्चा हो रही है। स्थापना के समय इसका नाम ‘भोपाल यूनिवर्सिटी’ था। बाद में प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी Maulana Barkatullah के सम्मान में इसका नाम बदलकर बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी रखा गया था। अब एक बार फिर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव सामने आने से बहस तेज हो गई है। शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का भी मानना है कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा उसके अकादमिक प्रदर्शन, शोध उपलब्धियों और छात्रों की सफलता से तय होती है। ऐसे में नाम परिवर्तन के साथ-साथ संस्थान की गुणवत्ता और संसाधनों को बेहतर बनाने पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। फिलहाल प्रस्ताव को लेकर छात्रों और आम लोगों के बीच चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में सरकार इस विषय पर क्या निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। लेकिन छात्रों का एक बड़ा वर्ग यही संदेश दे रहा है कि विश्वविद्यालय की असली पहचान उसके नाम से नहीं, बल्कि उसके काम और उपलब्धियों से बनती है।

एम्स भोपाल में दर्दनाक लापरवाही: कैंसर पीड़ित 3 साल के मासूम को दवा की जगह लगा दिया फॉर्मेलिन, मौत के बाद दो नर्सों पर FIR

मध्‍य प्रदेश । राजधानी भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। अस्पताल में भर्ती तीन वर्षीय कैंसर पीड़ित बच्चे की मौत के मामले में आंतरिक जांच में गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार बच्चे को इलाज के दौरान दवा के स्थान पर गलती से फॉर्मेलिन इंजेक्ट कर दिया गया, जिसके बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ी और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने दो नर्सिंग अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस और जांच रिपोर्ट के अनुसार सागर जिले की बीना तहसील के ग्राम कौरजा निवासी तीन वर्षीय सार्थक यादव ब्लड कैंसर से पीड़ित था। उसका इलाज एम्स भोपाल में चल रहा था और गंभीर स्थिति के चलते उसे पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कराया गया था। 17 दिसंबर 2025 की सुबह इलाज के दौरान यह दुखद घटना हुई। जांच में सामने आया है कि बायोप्सी और अन्य मेडिकल नमूनों को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला रसायन फॉर्मेलिन एक सिरिंज में भरकर वार्ड में रखा गया था। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग ऑफिसर ने इस खतरनाक रसायन को निर्धारित सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय मरीजों के बेड के आसपास छोड़ दिया, जो अस्पताल के सुरक्षा नियमों के विपरीत था। रिपोर्ट के अनुसार जब बच्चे की आईवी लाइन में समस्या आई तो ड्यूटी पर मौजूद दूसरी नर्स ने बिना सिरिंज की पहचान और लेबल की जांच किए उसे उठा लिया और बच्चे की नस में इंजेक्ट कर दिया। परिजनों का दावा है कि इंजेक्शन लगाने के दौरान बच्चे के पिता ने तीन बार नर्स को चेताया था कि सिरिंज में दवा नहीं है, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। बताया गया है कि इंजेक्शन लगते ही बच्चे की हालत अचानक बिगड़ने लगी। वह अचेत हो गया और उसे तत्काल पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने के लिए सीपीआर समेत सभी जरूरी चिकित्सकीय प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी और उसकी मौत हो गई। एम्स द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बच्चे की मौत का प्रमुख कारण फॉर्मेलिन का नस के जरिए शरीर में पहुंचना था। रिपोर्ट में नर्सिंग स्टाफ की गंभीर लापरवाही को घटना के लिए जिम्मेदार बताया गया है। इसी आधार पर बागसेवनिया थाना पुलिस ने दोनों नर्सिंग अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार एक नर्स पर लापरवाही से मौत कारित करने और दूसरी पर खतरनाक रसायन को असुरक्षित तरीके से रखने से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की जांच अभी जारी है। गौरतलब है कि सार्थक बी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया नामक ब्लड कैंसर से जूझ रहा था। यह बीमारी बच्चों में होने वाले गंभीर कैंसरों में शामिल मानी जाती है। परिवार इलाज की उम्मीद लेकर एम्स पहुंचा था, लेकिन कथित लापरवाही ने उनके इकलौते सहारे को छीन लिया। विशेषज्ञों के अनुसार फॉर्मेलिन एक अत्यंत विषैला रसायन है, जिसका उपयोग मेडिकल संस्थानों में ऊतकों और बायोप्सी नमूनों को संरक्षित रखने के लिए किया जाता है। यदि यह शरीर में, विशेषकर रक्त प्रवाह के जरिए पहुंच जाए, तो यह गंभीर अंग क्षति, शॉक और मृत्यु का कारण बन सकता है। यही वजह है कि अस्पतालों में इसके उपयोग और भंडारण के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाए जाते हैं।

21 जून से इंदौर में नए ट्रैक पर दौड़ेगी मेट्रो, एयरपोर्ट और आईटी हब तक मिलेगा सीधा कनेक्शन; 10 लाख लोगों को होगा फायदा

मध्‍य प्रदेश । हिंदू धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता और कर्मफलदाता भगवान शनि की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक शनि देव की पूजा करने से व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार शुभ फल प्राप्त होते हैं तथा जीवन में आने वाली बाधाओं और परेशानियों से राहत मिलती है। ज्योतिष शास्त्र में भी शनिवार के दिन किए गए कुछ विशेष उपायों और पूजा-विधि का उल्लेख मिलता है, जिन्हें अपनाने से शनि की कृपा प्राप्त हो सकती है। शनिवार की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर भगवान गणेश, भगवान शिव और शनि देव का स्मरण करें। शनि देव की पूजा में काले तिल, सरसों का तेल, नीले या काले रंग के फूल तथा उड़द की दाल का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान शनि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद काले तिल अर्पित करें और शनि मंत्रों का जाप करें। “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो शनि चालीसा और शनि स्तोत्र का पाठ भी करें। इससे मानसिक शांति मिलने के साथ-साथ नकारात्मक प्रभावों में कमी आने की मान्यता है। शनिवार के दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। शिवलिंग पर जल और काले तिल अर्पित करने से शनि दोष का प्रभाव कम होने की मान्यता है। इसके अलावा पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और वृक्ष की परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार को जरूरतमंद लोगों को दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। काले तिल, कंबल, काली उड़द, लोहे के पात्र या भोजन का दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। साथ ही गरीबों और असहाय लोगों की सहायता करना भी विशेष पुण्यदायी माना जाता है। शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि हनुमान जी की आराधना से शनि देव के कष्टकारी प्रभावों से राहत मिलती है। इसलिए इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना और मंदिर में जाकर दर्शन करना लाभकारी माना जाता है। धार्मिक विश्वासों के अनुसार नियमित रूप से शनिवार की पूजा और सद्कर्म करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। हालांकि पूजा के साथ-साथ अच्छे कर्म, अनुशासित जीवनशैली और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है।

आरबीआई नियमों के तहत आज बैंक अवकाश, जून में अलग-अलग राज्यों में कई दिनों तक रहेगी छुट्टी

नई दिल्ली । बैंकिंग सेवाओं से जुड़े कार्यों की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए 13 जून का दिन महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि महीने के दूसरे शनिवार के चलते देशभर के सरकारी और निजी बैंक बंद रहे। भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित नियमों के अनुसार प्रत्येक माह के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक शाखाओं में सार्वजनिक लेनदेन नहीं होता, जबकि पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को बैंक सामान्य रूप से कार्य करते हैं। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के बावजूद आज भी अनेक ऐसे कार्य हैं, जिनके लिए ग्राहकों को बैंक शाखा में जाना आवश्यक होता है। नया खाता खोलना, पासबुक अपडेट कराना, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना, लॉकर संबंधी औपचारिकताएं पूरी करना या ऋण से जुड़े मामलों में बैंक अधिकारियों से मुलाकात करना जैसे कार्य शाखा स्तर पर ही संपन्न होते हैं। ऐसे में बैंक अवकाश की जानकारी पहले से होना ग्राहकों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। 13 जून को दूसरा शनिवार होने के कारण बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह बंद रहा। इसके बाद रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के कारण लगातार दो दिनों तक शाखा सेवाएं उपलब्ध नहीं रहीं। हालांकि एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और अन्य डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं, जिससे ग्राहकों को दैनिक लेनदेन में किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। जून माह के दौरान विभिन्न राज्यों और शहरों में स्थानीय पर्व, धार्मिक अवसरों और क्षेत्रीय आयोजनों के कारण भी अलग-अलग दिनों में बैंक अवकाश घोषित किए गए हैं। कुछ राज्यों में विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक अवसरों के चलते बैंक शाखाएं बंद रहेंगी, जबकि अन्य क्षेत्रों में सामान्य कार्य दिवस रहेगा। इस वजह से बैंक ग्राहकों को अपने शहर और राज्य के अवकाश कैलेंडर की जानकारी रखना आवश्यक है। बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि अवकाश वाले दिनों में शाखा आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए महत्वपूर्ण वित्तीय कार्यों को पहले से पूरा कर लेना बेहतर होता है। विशेष रूप से व्यवसायियों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और बड़े वित्तीय लेनदेन करने वाले ग्राहकों को बैंक अवकाश की तिथियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जून माह में निर्धारित शनिवार अवकाश के अलावा कुछ क्षेत्रीय और धार्मिक अवसरों पर भी बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे बैंक शाखा जाने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक अवकाश सूची की पुष्टि कर लें। इससे अनावश्यक यात्रा और समय की बर्बादी से बचा जा सकता है। डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं ने बैंक अवकाश के प्रभाव को काफी हद तक कम किया है, लेकिन शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता आज भी बनी हुई है। इसलिए बैंकिंग कार्यों की बेहतर योजना बनाने के लिए अवकाश कैलेंडर की जानकारी रखना ग्राहकों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।