साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह कोई सामान्य मेल नहीं, बल्कि एक खतरनाक फिशिंग स्कैम है। इसका मकसद यूजर्स को डराकर उनके ईमेल अकाउंट, पासवर्ड और निजी जानकारी तक पहुंच बनाना है।
माइक्रोसॉफ्ट अकाउंट नहीं है, फिर भी खतरा क्यों?
कई लोग सोचते हैं कि जब वे Gmail या किसी दूसरे ईमेल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं। लेकिन असली खतरा यहीं छिपा है।
दरअसल, दुनिया की हजारों कंपनियां और बिजनेस अपने ऑफिस ईमेल के लिए Microsoft Outlook और माइक्रोसॉफ्ट सर्वर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में भले ही आपका ईमेल एड्रेस कंपनी के नाम पर हो, लेकिन बैकएंड माइक्रोसॉफ्ट का हो सकता है। यानी आप भी साइबर ठगों के निशाने पर हो सकते हैं।
कैसे काम करता है यह स्कैम?
साइबर अपराधी फर्जी रिकवरी कोड वाले ईमेल भेजते हैं। इनमें ऐसे लिंक या अटैचमेंट होते हैं, जिन पर क्लिक करते ही यूजर नकली लॉगिन पेज पर पहुंच जाता है। यहां पासवर्ड डालते ही सारी जानकारी सीधे हैकर्स तक पहुंच जाती है।
कई मामलों में ये लिंक डिवाइस में मैलवेयर भी इंस्टॉल कर सकते हैं, जिससे बैंकिंग डिटेल्स, निजी डेटा और ऑफिस की संवेदनशील जानकारी तक चोरी हो सकती है।
अगर ऐसा मेल आए तो क्या करें?
मेल का जवाब बिल्कुल न दें।
किसी भी लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक न करें।
मेल को तुरंत डिलीट कर दें।
अगर गलती से लिंक खुल गया है, तो तुरंत पासवर्ड बदलें।
अपने अकाउंट में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ऑन रखें।
केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही लॉगिन करें।
असली रिकवरी कोड कैसे मिलता है?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार माइक्रोसॉफ्ट या कोई भी बड़ी कंपनी बिना रिक्वेस्ट के अचानक रिकवरी कोड नहीं भेजती। असली रिकवरी कोड तभी जनरेट होता है जब यूजर खुद अकाउंट सेटिंग्स में जाकर रिक्वेस्ट करता है या ऑथेंटिकेटर ऐप के जरिए प्रक्रिया पूरी करता है।
इसलिए अगली बार अगर आपके इनबॉक्स में “Microsoft Recovery Code” जैसा कोई संदिग्ध मेल आए, तो घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें। आपकी एक छोटी सी गलती साइबर ठगों को आपके पूरे डिजिटल अकाउंट तक पहुंच दे सकती है।