विशेषज्ञों के मुताबिक, असली जनगणना कर्मचारी केवल सामान्य घरेलू और जनसांख्यिकीय जानकारी ही पूछते हैं, जैसे परिवार के सदस्यों की संख्या, उम्र, लिंग, पेशा या घर से जुड़ी बेसिक जानकारी। लेकिन अगर कोई व्यक्ति आपसे बैंक अकाउंट डिटेल, आधार नंबर, पैन नंबर या OTP जैसी जानकारी मांगता है, तो यह साफ संकेत है कि सामने वाला फर्जी है और आपको ठगने की कोशिश कर रहा है।
साइबर अपराधी अब सिर्फ सीधे सवाल नहीं पूछते, बल्कि डिजिटल जाल भी बिछाते हैं। कई मामलों में लोगों को लिंक भेजकर ‘डिटेल कंफर्म’ करने के लिए कहा जाता है, या कोई ऐप डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया जाता है। कुछ मामलों में QR कोड स्कैन करवाकर भी डेटा चुराने की कोशिश की जा रही है। ऐसे किसी भी लिंक, ऐप या QR कोड से तुरंत दूरी बनाना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
सरकार से जुड़े प्लेटफॉर्म Sanchar Saathi के तहत मौजूद Chakshu portal पर ऐसे संदिग्ध मामलों की शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह ठगी का शिकार हो चुका है, तो उसे तुरंत अपने बैंक से संपर्क करना चाहिए और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। साथ ही 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके भी तुरंत मदद ली जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। जनगणना के नाम पर हो रहे इस नए फ्रॉड से बचने के लिए जरूरी है कि लोग सही जानकारी पहचानें, अनजान लोगों पर भरोसा न करें और अपनी निजी व वित्तीय जानकारी को हर हाल में सुरक्षित रखें।