मेट्रो प्रबंधन ने अब कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को अंतिम निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया है। बताया जा रहा है कि टीम अगले सप्ताह भोपाल पहुंच सकती है। इससे पहले असिस्टेंट कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम प्रारंभिक निरीक्षण कर चुकी है। CMRS की मंजूरी मिलने के बाद नए सिस्टम के साथ मेट्रो संचालन शुरू किया जाएगा।
वर्तमान में भोपाल मेट्रो केवल एक ही ट्रैक पर संचालित हो रही है। सुभाष नगर से एम्स तक डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में चलाई जा रही है। यानी जिस ट्रैक से ट्रेन जाती है, उसी ट्रैक से वापस लौटती है। सिग्नलिंग सिस्टम के अभाव में अप ट्रैक का उपयोग नहीं हो पा रहा था। यही वजह है कि ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी करीब 75 मिनट रखनी पड़ रही है, जिससे यात्रियों को काफी इंतजार करना पड़ता है।
कम यात्रियों की संख्या और सीमित संचालन व्यवस्था के कारण फिलहाल मेट्रो दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ही चलाई जा रही है। लेकिन नए सिग्नलिंग सिस्टम के लागू होते ही यह स्थिति बदल जाएगी। दोनों ट्रैक सक्रिय होने से ट्रेनें एक साथ दोनों दिशाओं में चल सकेंगी और ट्रेनों के बीच का अंतर भी कम हो जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यही सिस्टम ट्रेनों की गति नियंत्रित करता है, सुरक्षित दूरी बनाए रखता है, ट्रेनों की आवाजाही को मॉनिटर करता है और किसी भी आपात स्थिति में नियंत्रण सुनिश्चित करता है। आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक के बिना किसी भी मेट्रो नेटवर्क की पूरी क्षमता का उपयोग संभव नहीं होता।
भोपाल मेट्रो में वही उन्नत तकनीक लागू की जा रही है, जिसका उपयोग दिल्ली मेट्रो जैसे बड़े नेटवर्क में किया जाता है। इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित, तेज और व्यवस्थित हो जाएगा। इसके साथ ही यात्रियों को अधिक फेरे, कम इंतजार और बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा।
नए सिस्टम के लागू होने के बाद सुबह और शाम के व्यस्त समय में भी मेट्रो सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और दैनिक यात्रियों को विशेष लाभ मिलेगा। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरेगी।