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आईएसआई से जुड़े जासूसी नेटवर्क का बड़ा भंडाफोड़, 53 खातों में पहुंचा विदेशी पैसा, एनआईए करेगी गहन जांच

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के कौशांबी क्षेत्र से उजागर हुए जासूसी नेटवर्क ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। आईएसआई से जुड़े इस मामले में अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच की कमान संभालने जा रही है। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच पत्राचार शुरू हो चुका है।

विदेशी फंडिंग का बड़ा नेटवर्क सामने आया
एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोगों के 53 बैंक खातों में करीब 1.27 करोड़ रुपये विदेश से भेजे गए। ये खाते पंजाब, पश्चिम बंगाल और बिहार में संचालित हो रहे थे। इनमें सबसे अधिक रकम बिहार के भागलपुर से जुड़े खाते में ट्रांसफर की गई।

रेलवे गतिविधियों की रिकॉर्डिंग भेजी गई विदेश
जांच एजेंसियों को पता चला है कि सोनीपत रेलवे स्टेशन पर लगे कैमरे के जरिए ट्रेनों की आवाजाही की करीब आठ घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग तैयार कर पाकिस्तान भेजी गई। तकनीकी जांच में इस बात की पुष्टि होने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

कई देशों तक फैला नेटवर्क
इस जासूसी गिरोह के तार सिर्फ पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यूके, मलेशिया और सऊदी अरब तक जुड़े पाए गए हैं। शुरुआती जांच कौशांबी थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें एसआईटी, खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा संगठनों ने मिलकर काम किया।

अब तक 29 संदिग्ध हिरासत में
गाजियाबाद और हापुड़ से अब तक 29 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें छह नाबालिग भी शामिल हैं। इस नेटवर्क का खुलासा 14 मार्च को सुहैल मलिक और साने इरम समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हुआ। इसके बाद 20 और 21 मार्च को अन्य संदिग्ध पकड़े गए, जबकि 24 मार्च को दिल्ली, शामली और कौशांबी से तीन और लोगों को गिरफ्तार किया गया।

सोशल मीडिया से हुई भर्ती और संपर्क
जांच में सामने आया है कि गिरोह का मुख्य सदस्य समीर उर्फ शूटर ने 2023 में हथियारों के साथ अपने फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए थे। इन्हीं पोस्ट को देखकर सुहैल मलिक और नौशाद अली ने उससे संपर्क किया। बाद में उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर पाकिस्तान में बैठे सरफराज के निर्देश पर अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

दो साल से सक्रिय था नेटवर्क, बड़ी साजिश की थी तैयारी
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह जासूसी नेटवर्क करीब दो साल से सक्रिय था। पाकिस्तान में बैठा सरफराज भारत में एक मजबूत जासूसी तंत्र तैयार कर रहा था, जिसका मकसद संवेदनशील जानकारियां जुटाकर भविष्य में बड़ी साजिश को अंजाम देना था। आरोपियों के मोबाइल फोन से कई संदिग्ध चैट, फोटो और वीडियो बरामद हुए हैं, जिनकी जांच जारी है।

एनआईए करेगी आगे की विस्तृत जांच
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल के मुताबिक, जासूसी से जुड़े सबूतों के साथ-साथ मनी ट्रेल की भी गहन जांच की जा रही है। विदेशी फंडिंग के कई अहम सुराग मिलने के बाद अब इस पूरे मामले की जांच एनआईए को सौंपने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

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