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कैलिफोर्निया मस्जिद हमला: कट्टरपंथी युवकों ने बरसाईं गोलियां, 3 की मौत; 140 बच्चों की जान बची



नई दिल्ली। अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में स्थित एक मस्जिद पर हुए भीषण हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि दो किशोर हमलावरों ने बाद में खुद को भी गोली मार ली। जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों हमलावर ऑनलाइन कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और श्वेत वर्चस्ववादी सोच का समर्थन करते थे। अधिकारियों का कहना है कि यह हमला अमेरिका में बढ़ती धार्मिक घृणा और चरमपंथी हिंसा का गंभीर उदाहरण है।

पुलिस ने हमलावरों की पहचान 17 वर्षीय केन क्लार्क और 18 वर्षीय कैलेब वाजक्वेज के रूप में की है। जांच में सामने आया कि दोनों पहली बार इंटरनेट के जरिए मिले थे और बाद में एक-दूसरे के संपर्क में आए। एफबीआई के सैन डिएगो प्रमुख एजेंट मार्क रेमिली ने बताया कि दोनों युवकों ने ऑनलाइन मंचों पर कट्टरपंथी विचार अपनाए थे। उनके दस्तावेजों और लेखों में मुसलमानों, यहूदियों, अश्वेत समुदाय, महिलाओं और एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के खिलाफ घृणित टिप्पणियां मिली हैं। दोनों ने श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा का समर्थन करते हुए यह दावा किया था कि श्वेत लोगों का अस्तित्व खतरे में है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक हमलावरों ने खुद को न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च मस्जिद हमले के आरोपी ब्रेंटन टैरेंट का “बेटा” बताया था। 2019 में क्राइस्टचर्च की मस्जिदों पर हुए हमले में 51 लोगों की मौत हुई थी। अधिकारियों को हमलावरों के पास से नाजी प्रतीक, चरमपंथी साहित्य और कई ऑनलाइन घोषणापत्र भी मिले हैं। एक हमलावर ने अपने लेखों में मानसिक तनाव और महिलाओं द्वारा अस्वीकार किए जाने की बातें भी लिखी थीं।

हमले के दौरान मस्जिद के सुरक्षा गार्ड अमीन अब्दुल्ला ने बहादुरी दिखाते हुए हमलावरों का सामना किया। अधिकारियों के अनुसार अब्दुल्ला ने हमलावरों को मस्जिद के अंदर मौजूद बच्चों तक पहुंचने से रोकने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। मस्जिद परिसर में मौजूद करीब 140 स्कूली बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया। इमाम ताहा हस्सान ने बताया कि अमीन अब्दुल्ला ने गोलीबारी के बीच रेडियो पर लॉकडाउन की घोषणा की और हमलावरों को रोकने की कोशिश करते रहे। घायल होने के बावजूद उन्होंने जवाबी फायरिंग जारी रखी, जिससे हमलावरों को पीछे हटना पड़ा। बाद में हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी।

पुलिस प्रमुख स्कॉट वाहल ने बताया कि हमलावर मस्जिद के अंदर घुसने में सफल हो गए थे और उन्होंने खाली कमरों की तलाशी भी ली। इसके बाद पार्किंग क्षेत्र में उन्होंने मंसूर काजिहा और नादिर अवाद को गोली मार दी। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों ने भी हमलावरों का ध्यान अपनी ओर खींचकर अन्य लोगों की जान बचाने में मदद की।

घटना के बाद जांच एजेंसियों ने दोनों हमलावरों के घरों की तलाशी ली, जहां से कम से कम 30 बंदूकें, भारी मात्रा में गोला-बारूद और एक क्रॉसबो बरामद किया गया। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हमलावर किसी बड़े हमले की योजना बना रहे थे।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका में मुस्लिम और यहूदी समुदायों के खिलाफ घृणा अपराधों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बाद धार्मिक तनाव और अधिक बढ़ गया है। सैन डिएगो के इस्लामिक सेंटर के इमाम ताहा हस्सान ने कहा कि मस्जिद को पहले भी धमकियां और नफरत भरे संदेश मिलते रहे हैं, लेकिन इस तरह के हिंसक हमले की कभी कल्पना नहीं की गई थी।

अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले को घरेलू आतंकवाद और ऑनलाइन कट्टरपंथ से जोड़कर जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर फैल रही नफरत और चरमपंथी प्रचार सामग्री युवाओं को तेजी से प्रभावित कर रही है, जो समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

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