प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विमान ने उड़ान के दौरान अपनी नेविगेशन प्रणाली में तकनीकी खराबी की सूचना दी थी। इसके बाद कराची एरिया कंट्रोल सेंटर ने विमान को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का प्रयास किया। हालांकि कुछ ही मिनटों के भीतर विमान की उड़ान में असामान्य बदलाव दर्ज किया गया और वह तेजी से ऊंचाई खोते हुए दिशा बदलता दिखाई दिया। इसके तुरंत बाद विमान से संपर्क पूरी तरह टूट गया और वह रडार की पहुंच से बाहर हो गया।
घटना के बाद पाकिस्तान विमानपत्तन प्राधिकरण ने बचाव समन्वय केंद्र को सक्रिय करते हुए समुद्र में खोज अभियान शुरू कराया। अधिकारियों ने बताया कि विमान के संभावित मार्ग और अंतिम दर्ज स्थान के आधार पर खोज क्षेत्र को लगातार विस्तारित किया जा रहा है। समुद्री और हवाई दोनों माध्यमों से विमान का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं ताकि चालक दल के सदस्यों के बारे में जल्द जानकारी मिल सके।
खोज अभियान को मजबूत बनाने के लिए पाकिस्तान नौसेना ने अपने युद्धपोत और गश्ती संसाधनों को प्रभावित क्षेत्र में भेजा है। साथ ही वायुसेना का निगरानी विमान भी समुद्री क्षेत्र की लगातार निगरानी कर रहा है। नौसेना के अतिरिक्त विमान और अन्य समुद्री संसाधनों को भी अभियान में शामिल किया गया है ताकि बड़े क्षेत्र में व्यवस्थित तरीके से तलाश की जा सके।
अधिकारियों के अनुसार खोज अभियान में केवल सैन्य संसाधनों का ही नहीं बल्कि नागरिक एजेंसियों का भी सहयोग लिया जा रहा है। राष्ट्रीय शिपिंग नेटवर्क से जुड़े व्यावसायिक जहाजों को भी संभावित क्षेत्र में निगरानी और तलाश के लिए लगाया गया है। समुद्र में मौजूद सभी उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से विमान के किसी भी संभावित संकेत की खोज की जा रही है।
बताया गया है कि विमान ने पाकिस्तान के समयानुसार रात करीब 9 बजकर 18 मिनट पर तकनीकी खराबी की सूचना दी थी। इसके लगभग तीन मिनट बाद विमान की उड़ान संबंधी गतिविधियों में अचानक बदलाव देखा गया और कराची से लगभग 155 नॉटिकल मील पश्चिम में उसका रडार तथा संचार संपर्क पूरी तरह समाप्त हो गया। इसके बाद से विमान का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में शुरुआती घंटों का खोज अभियान सबसे महत्वपूर्ण होता है, इसलिए समुद्र और हवाई क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। फिलहाल विमान के लापता होने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। तकनीकी खराबी, मौसम और अन्य संभावित कारणों की जांच भी समानांतर रूप से जारी है। जब तक विमान या उसके किसी हिस्से का पता नहीं चल जाता, तब तक खोज एवं बचाव अभियान पूरी क्षमता के साथ जारी रहने की संभावना है।