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भू-राजनीतिक तनाव का असर, Air India ने डीजीसीए से फ़्लाइट ड्यूटी लिमिटेशन में छूट मांगी

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, एयर इंडिया ने विमानन नियामक डीजीसीए से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों में अस्थायी ढील देने की मांग की है। गुरुवार को एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई। एयरलाइन का कहना है कि क्षेत्रीय हवाई प्रतिबंध और लंबा रास्ता अपनाने के कारण पायलटों पर ड्यूटी का दबाव बढ़ गया है। लंबी दूरी की उड़ानों के लिए दो पायलट पर्याप्त?रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने डीजीसीए से अनुरोध किया है कि कुछ लंबी दूरी की उड़ानों को तीन पायलट की बजाय दो पायलट के साथ संचालित करने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही एयरलाइन ने अधिकतम उड़ान समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया ने उड़ान के अनुमत समय में 1 घंटा 3 मिनट की वृद्धि की मांग की है, जिससे अधिकतम उड़ान समय 10 घंटे से बढ़कर 11–11.5 घंटे तक पहुंच जाएगा। फ्लाइट ड्यूटी पीरियड में वृद्धि की मांगइसके अलावा एयर इंडिया ने अधिकतम फ्लाइट ड्यूटी पीरियड (एफडीपी) को भी बढ़ाने का अनुरोध किया है। प्रस्ताव के अनुसार ड्यूटी समय को 13 घंटे से बढ़ाकर 14 घंटे 45 मिनट करने की मांग की गई है, यानी पायलटों के लिए करीब 1 घंटा 45 मिनट अतिरिक्त ड्यूटी अवधि। लंबा मार्ग और ईंधन की बढ़ती खपतरिपोर्ट में बताया गया है कि मिडिल ईस्ट में कई हिस्सों का हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित है और पाकिस्तान का एयरस्पेस भारतीय एयरलाइंस के लिए बंद रहने के कारण उड़ानों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। इस वजह से एयरलाइंस को अरब सागर, मध्य एशिया और अफ्रीका के ऊपर से उड़ान भरनी पड़ रही है। इससे न केवल उड़ान का समय बढ़ गया है, बल्कि ईंधन की खपत और क्रू की थकान पर दबाव भी बढ़ गया है। डीजीसीए की सुरक्षा सलाहअधिकारियों ने बताया कि डीजीसीए ने हाल ही में भारतीय एयरलाइंस को मिडिल ईस्ट के 11 देशों के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी है, जिन्हें उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। एयर इंडिया के लिए ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र से बचने की वजह से कई लंबी दूरी की उड़ानों का समय काफी बढ़ गया है, जिससे इस सप्ताह कुछ उड़ानें रद्द भी करनी पड़ीं। प्रस्ताव पर डीजीसीए विचार कर रहीरिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया का यह प्रस्ताव फिलहाल डीजीसीए के पास विचाराधीन है और नियामक इसकी जांच कर रहा है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि विमानन उद्योग की अन्य कंपनियां भी रूट संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं, लेकिन फिलहाल इंडिगो जैसी एयरलाइंस ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया है। पायलटों की थकान पर सवालहालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एयर इंडिया ने इस मामले में क्रू की थकान और सुरक्षा जोखिम से जुड़े सवालों पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी उड़ान और ड्यूटी समय में वृद्धि के बावजूद सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

केंद्र का बयान: भारत के पास तेल की कोई कमी नहीं, पर्याप्त भंडार सुरक्षित

नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत के पास तेल की कोई कमी नहीं है और देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट जैसी परिस्थितियों का सामना करना संभव है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत का रणनीतिक तेल भंडार और 40 प्रमुख तेल निर्यातक देशों से विविध आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की लगातार आपूर्ति बनी रहे। आर्थिक मजबूती और विदेशी मुद्रा भंडारसरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत का आर्थिक आधार व्यापक और मजबूत है। देश के पास 11-12 महीने तक आवश्यक वस्तुओं और ऊर्जा आयात करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। यह भंडार आने वाले पांच वर्षों में देश के तेल आयात बिल को भी कवर करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे मजबूत वित्तीय भंडार के चलते भारत वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संकटों के लिए तैयार है। बाजार की मांग के लिए पर्याप्त स्टॉकअधिकारी ने बताया कि देश के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का इतना भंडार है कि यह बाजार की 70 दिनों से अधिक की मांग को पूरा कर सकता है। इसके साथ ही, भारत ने मध्य पूर्व पर अपनी निर्भरता भी घटाई है। इससे किसी भी संभावित आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में देश सुरक्षित रहेगा। बहुसंबद्ध नीति और आर्थिक कूटनीतिसरकार की बहुसंबद्ध नीति ने देश को संकट से निपटने में सक्षम बनाया है। इसमें रूसी कच्चे तेल की खरीद, आवश्यक वस्तु अधिनियम का प्रयोग और विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है। अधिकारी ने कहा कि यह रणनीति न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे देश की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होता। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और विकासइस संकट का प्रभाव मुद्रास्फीति की तुलना में विकास पर अधिक पड़ता है। वर्तमान में भारत की मुद्रास्फीति दर लगभग 2.75 प्रतिशत है, जो विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम है। रूसी तेल आयात, ईंधन कर में लचीलापन और एलपीजी की नियंत्रित कीमतों की वजह से घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर हैं। ऊर्जा आयात में विविधता और होर्मुज पर निर्भरता में कमीजापान जैसे देशों में मुद्रास्फीति दर 5 प्रतिशत है और उनका कच्चे तेल पर निर्भरता लगभग 75-90 प्रतिशत है। इसके विपरीत, भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली आपूर्ति पर अपनी निर्भरता घटाकर 20 प्रतिशत कर दी है। इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे अन्य देशों से आयात कर, भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है। पड़ोसी देशों की तुलना में सुरक्षित स्थितिअधिकारी ने बताया कि भारत के पास दो महीने से अधिक का भंडार है, जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के पास केवल 30 दिन या उससे कम का स्टॉक है। पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है, वहीं श्रीलंका और बांग्लादेश में भी ईंधन की आपूर्ति संकट और भाव वृद्धि देखी जा रही है।  ऊर्जा सुरक्षा और विकास की राहकेंद्र सरकार की रणनीति ने भारत को न केवल ऊर्जा संकट के लिए तैयार किया है, बल्कि व्यापक आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित की है। बहुसंबद्ध नीति, विविध आपूर्ति स्रोत और मजबूत आर्थिक भंडार देश की ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत आधार हैं। इससे भारत वैश्विक तेल संकट और पड़ोसी देशों की तुलना में सुरक्षित स्थिति में है।

शेयर मार्केट अपडेट: InterGlobe Aviation में ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस घटाने से आई 4% गिरावट

नई दिल्ली। इंडिगो एयरलाइन की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation Limited के शेयर गुरुवार को 4 प्रतिशत तक गिर गए। यह गिरावट तब हुई जब वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सिटी ने स्टॉक का टारगेट प्राइस घटाकर 5,100 रुपए प्रति शेयर कर दिया, जो पहले 5,700 रुपए था। ब्रोकरेज का दृष्टिकोणटारगेट प्राइस में कटौती: करीब 10.5% की कमी।रेटिंग: ‘बाय’ बरकरार है।संभावित तेजी: नया टारगेट प्राइस अभी भी स्टॉक के पिछले बंद भाव से लगभग 17% की संभावना दिखाता है। कारण और पृष्ठभूमिसिटी ब्रोकरेज ने बताया कि पिछले एक साल में इंडिगो ने कई नकारात्मक परिस्थितियों का सामना किया:पहली तिमाही में भू-राजनीतिक तनाव से संचालन प्रभावित।फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों के कारण कई उड़ानों को रद्द करना पड़ा।ईरान, इजरायल और अमेरिका से जुड़े नए भू-राजनीतिक तनाव ने अनिश्चितता बढ़ाई।ईंधन की बढ़ती कीमतें और कमजोर भारतीय रुपया एयरलाइन की लाभप्रदता पर दबाव डाल सकते हैं। सकारात्मक संकेतजनवरी में इंडिगो ने घरेलू बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाकर 59.6% से 63.6% कर दी।एयरलाइन की लागत संरचना प्रतिस्पर्धियों की तुलना में मजबूत है। शेयर प्रदर्शनरिपोर्ट आने के बाद दिन में शेयर 3.6% गिरकर 4,194.10 रुपए के इंट्रा-डे लो पर।दोपहर करीब 2:55 बजे शेयर 2.51% गिरकर 4,243.50 रुपए पर।पिछले एक महीने में स्टॉक लगभग 14.8% गिर चुका है।52 हफ्ते का उच्चतम स्तर: 6,232.50 रुपए; निम्नतम: 4,035 रुपए।मार्केट कैप: 1.64 लाख करोड़ रुपए। हालांकि टारगेट प्राइस घटने के बाद शेयरों में गिरावट आई, लेकिन इंडिगो की मजबूत घरेलू हिस्सेदारी और लागत संरचना इसे निवेशकों के लिए अभी भी आकर्षक बना रही है।

दूध सुरक्षा पर सख्ती, उत्पादक और विक्रेता लाइसेंस के बिना नहीं कर सकेंगे व्यापार: FSSAI

नई दिल्ली। देश में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने गुरुवार को नया नियम लागू किया। इसके तहत सभी दूध उत्पादक और दूध विक्रेता, डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर, अपने व्यवसाय को चलाने से पहले एफएसएसएआई के साथ अनिवार्य पंजीकरण या लाइसेंस प्राप्त करेंगे। उद्देश्य और लाभएफएसएसएआई ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य दूध में मिलावट की घटनाओं को रोकना, खाद्य सुरक्षा अनुपालन को मजबूत करना और सुरक्षित भंडारण तथा स्वच्छ आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इससे आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा होगी और उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित दूध उपलब्ध होगा। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देशएफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे विशेष पंजीकरण अभियान चलाएं और दूध उत्पादकों एवं विक्रेताओं के लाइसेंस और पंजीकरण का कड़ाई से सत्यापन करें। राज्य स्तर पर अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि सभी व्यवसायियों के पास एफएसएसएआई का प्रमाणपत्र उपलब्ध हो। संसद में उठे थे मिलावट के मामलेइससे पहले बीते महीने दूध और खाद्य उत्पादों में मिलावट का मुद्दा संसद में उठ चुका था। Raghav Chadha ने कंपनियों पर आरोप लगाया कि वे सेहतमंद और ऊर्जा बढ़ाने वाले झूठे दावों के तहत हानिकारक पदार्थों वाले उत्पाद बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि दूध में यूरिया, पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन, आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर, फलों के जूस में सिंथेटिक फ्लेवर और आर्टिफिशियल रंग, खाने के तेल में मशीन का तेल, मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा, चाय में सिंथेटिक रंग और पोल्ट्री उत्पादों में एनाबॉलिक स्टेरॉयड मिलाए जाते हैं। यहां तक कि देशी घी की मिठाइयों में वनस्पति तेल और डालडा का इस्तेमाल किया जाता है। एफएसएसएआई की सलाह और अभियानएफएसएसएआई ने सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों से अपील की है कि वे स्थानीय अधिकारियों, डेयरी सहकारी समितियों, स्कूलों, और समुदायों के साथ मिलकर व्यापक अभियान चलाएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के पास वैध लाइसेंस हो और किसी भी प्रकार की मिलावट को रोका जा सके। भविष्य के लिए प्रभावइस पहल से न केवल दूध की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यह उपभोक्ताओं में विश्वास बढ़ाने और डेयरी उद्योग में जवाबदेही स्थापित करने में भी मदद करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसका प्रभावी कार्यान्वयन हुआ, तो दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट की घटनाओं में काफी कमी आएगी। एफएसएसएआई का यह कदम दूध और डेयरी उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद देने के लिए एक महत्वपूर्ण और समयोचित पहल है।

खाड़ी संकट का असर: GAIL ने Yelahanka Power Plant को गैस सप्लाई रोकी, बिजली उत्पादन पर असर संभव

नई दिल्ली। सरकारी महारत्न कंपनी GAIL (India) Limited (गेल) ने गुरुवार सुबह 6 बजे से बेंगलुरु स्थित Yelahanka Gas-based Power Plant को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी है। इस फैसले की पुष्टि ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने की है। गैस सप्लाई बंद होने से इस गैस आधारित बिजली संयंत्र के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कर्नाटक का एकमात्र गैस आधारित प्लांटयह 370 मेगावाट क्षमता वाला बिजली संयंत्र Karnataka Power Corporation Limited (केपीसीएल) द्वारा स्थापित किया गया है। यह कर्नाटक का एकमात्र गैस आधारित पावर प्लांट है और मुख्य रूप से Bengaluru शहर को बिजली आपूर्ति के लिए बनाया गया था। यह संयंत्र पिछले साल दिसंबर से लगातार संचालन में था, लेकिन गैस आपूर्ति रुकने के बाद बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पश्चिम एशिया संकट से गैस की कमीअधिकारियों के अनुसार West Asia में जारी भू-राजनीतिक तनाव और विशेष रूप से Israel–Iran conflict के कारण प्राकृतिक गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते भारत में भी गैस की उपलब्धता कम हो गई है और सरकार को विभिन्न क्षेत्रों के लिए गैस आवंटन की प्राथमिकता तय करनी पड़ी है। बिजली क्षेत्र को मिली सबसे कम प्राथमिकताकेंद्र सरकार ने गैस आवंटन के लिए हाल ही में एक गजट अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत घरेलू खपत को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। इसके बाद परिवहन और उर्वरक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है, जबकि बिजली उत्पादन को सबसे निचली श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि गैस की कमी रहने तक बिजली संयंत्रों को सीमित सप्लाई ही मिल पाएगी। कर्नाटक में बिजली की मांगफिलहाल कर्नाटक में प्रतिदिन लगभग 35.5 करोड़ यूनिट बिजली की मांग है। इस मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट के अलावा सौर और पवन ऊर्जा स्रोतों का भी इस्तेमाल कर रही है। इसके साथ ही केंद्रीय ग्रिड से मिलने वाली बिजली और पावर एक्सचेंज व्यवस्था के माध्यम से भी अतिरिक्त बिजली ली जा रही है। अन्य राज्यों से भी मिल रही बिजलीराज्य सरकार बिजली आपूर्ति को बनाए रखने के लिए अन्य राज्यों के साथ पावर एक्सचेंज व्यवस्था का भी सहारा ले रही है। इसके तहत Punjab, Uttar Pradesh और Haryana जैसे राज्यों से भी कुछ मात्रा में बिजली प्राप्त की जा रही है। गैस संकट जारी रहने पर असर संभवअधिकारियों का कहना है कि अगर Yelahanka Gas-based Power Plant को गैस सप्लाई और कम हुई या लंबे समय तक बंद रही, तो बिजली आपूर्ति पर हल्का असर पड़ सकता है। हालांकि राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अन्य स्रोतों से उत्पादन बढ़ाकर बिजली आपूर्ति को स्थिर रखने की कोशिश की जाएगी। गैस आवंटन के नए नियमNatural Gas (Supply Regulation) Order, 2026 के तहत सरकार ने गैस आवंटन के लिए विभिन्न क्षेत्रों को प्राथमिकता श्रेणियों में रखा है। इसमें घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस, एलपीजी उत्पादन, परिवहन के लिए सीएनजी और पाइपलाइन संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत का लगभग 100 प्रतिशत गैस आवंटन मिलेगा। अन्य क्षेत्रों को सीमित आपूर्तिउर्वरक संयंत्रों को दूसरी प्राथमिकता में रखा गया है और उन्हें औसत खपत का लगभग 70 प्रतिशत गैस मिलेगा। औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को तीसरी प्राथमिकता में रखा गया है। वहीं बिजली उत्पादन क्षेत्र को सबसे निचली प्राथमिकता दी गई है, जिसके कारण गैस की कमी के दौरान इस क्षेत्र को सीमित आपूर्ति ही मिलने की संभावना है।

पश्चिम एशिया तनाव का असर: Silver में 5,000 रुपये से ज्यादा की तेजी, कीमती धातुओं में उछाल

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर शुरुआती कारोबार में सोने में हल्की गिरावट दिखी, लेकिन बाद में इसमें मजबूती लौट आई। वहीं चांदी ने शुरुआती कमजोरी से उबरते हुए तेज उछाल दर्ज किया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निचले स्तर पर मजबूत खरीदारी के कारण चांदी में यह तेजी देखने को मिली। सोने की कीमतों में हल्की बढ़तखबर लिखे जाने तक दोपहर करीब 1:36 बजे एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 361 रुपये यानी 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,62,150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। सोने ने दिन की शुरुआत 1,62,799 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से की थी, जो पिछले बंद भाव 1,61,789 रुपये से ज्यादा था। हालांकि बाद में वैश्विक बाजार से कमजोर संकेत मिलने के कारण इसकी कीमतों में कुछ गिरावट भी देखी गई। मांग क्षेत्र बना 1.56–1.57 लाख का स्तरविशेषज्ञों का मानना है कि 1,56,000 से 1,57,000 रुपये का स्तर सोने के लिए मजबूत मांग क्षेत्र बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार यदि कीमतें इस स्तर से ऊपर बनी रहती हैं, तो मध्यम अवधि में सोने का तेजी वाला रुझान बरकरार रह सकता है। अगर सोना 1,65,000 रुपये के स्तर से ऊपर मजबूती से निकलता है, तो आगे चलकर 1,75,000 से 1,80,000 रुपये तक नई तेजी देखने को मिल सकती है। चांदी में 5,900 रुपये से ज्यादा का उछालदूसरी ओर चांदी की कीमतों में सत्र के दौरान मजबूत तेजी दर्ज की गई। एमसीएक्स पर मई डिलीवरी वाली चांदी 5,911 रुपये यानी 2.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,74,402 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। चांदी ने 2,69,212 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की थी, जो इसके पिछले बंद भाव 2,68,491 रुपये से थोड़ा ज्यादा था। दिन के दौरान मजबूत खरीदारी के कारण इसकी कीमतों में तेजी और बढ़ गई। वैश्विक बाजार में मिला-जुला रुखवैश्विक बाजार में हालांकि सोने की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड लगभग 0.2 प्रतिशत गिरकर 5,165.73 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी करीब 0.2 प्रतिशत गिरकर 5,171.40 डॉलर प्रति औंस पर रहे। वहीं स्पॉट सिल्वर लगभग स्थिर रहकर 85.82 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा। पश्चिम एशिया तनाव का असरबाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। ऐसे समय में निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग बढ़ जाती है। पिछले कुछ दिनों में इसी वजह से इन धातुओं की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। तेल और डॉलर के कारण कमजोर हुआ रुपयाइसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय मुद्रा Indian Rupee भी दबाव में आ गई। गुरुवार को रुपया अमेरिकी मुद्रा United States Dollar के मुकाबले करीब 0.3 प्रतिशत गिरकर 92.3575 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इससे पहले इसी सप्ताह रुपया 92.3475 के स्तर तक गिरा था, जिसे गुरुवार को पार कर दिया गया।

सोने-चांदी के दामों में गिरावट, महंगाई और युद्ध ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने भारत में सोना और चांदी के बाजार को प्रभावित किया है। आज सुबह 9:15 बजे के आसपास एमसीएक्स पर अप्रैल वायदा सोना 0.10% गिरकर ₹1,61,660 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी मई वायदा 0.57% की गिरावट के साथ ₹2,66,969 प्रति किलोग्राम पर थी। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और सोने पर दबाव बढ़ गया। ब्लूमबर्ग के अनुसार सिंगापुर में सुबह 8:05 बजे सोने की कीमत 0.9% गिरकर $5,132.76 प्रति औंस और चांदी 1.5% गिरकर $84.44 प्रति औंस पर आ गई। इसी दौरान प्लैटिनम में 1% और पैलेडियम में 0.8% की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञ हेबे चेन के मुताबिक, सोने की गिरावट को “हार मानने” की तरह नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि यह एक “अस्थायी ठहराव” है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और मजबूत डॉलर ने फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को टाल दिया है, जिसके चलते निवेशक फिलहाल सोने से किनारा कर रहे हैं। सोने का यह गिरना निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह अभी भी सुरक्षित निवेश के रूप में लोकप्रिय है। हालांकि, ब्याज दरों की बढ़ोतरी और वैश्विक तनाव के कारण सोने में तत्काल लाभ की संभावना कम हो गई है। एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में भी युद्ध के बाद सोने की मात्रा में गिरावट आई है, हालांकि पिछले सप्ताह इसमें कुछ निवेश दर्ज किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने का सुरक्षित निवेश का दौर खत्म नहीं हुआ है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में लगभग 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के समय यह निवेशकों को भरोसा देता रहा है। चेन का कहना है कि फिलहाल सोने की रफ्तार थमी हुई है, लेकिन यह सिर्फ एक “सांस लेने” का दौर है, और लंबी अवधि में इसका महत्व बरकरार रहेगा। कीवर्ड्स: सोना, चांदी, महंगाई, डॉलर मजबूती, युद्ध

1 अप्रैल से महंगी होंगी Audi की गाड़ियां, कंपनी ने 2% तक बढ़ाई कीमतें

नई दिल्ली। भारत के लग्जरी कार बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। जर्मन लग्जरी कार निर्माता Audi की भारतीय इकाई Audi India ने गुरुवार को अपनी गाड़ियों की कीमतों में 2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की घोषणा की। कंपनी के अनुसार नई कीमतें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी और यह वृद्धि भारत में बिकने वाले सभी मॉडलों के एक्स-शोरूम दामों पर लागू होगी। कंपनी का कहना है कि हाल के महीनों में बढ़ती इनपुट लागत और मुद्रा दरों में उतार-चढ़ाव के कारण उत्पादन और संचालन की लागत बढ़ गई है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है। कंपनी ने ग्राहकों पर असर कम रखने की कोशिश कीऑडी इंडिया के ब्रांड निदेशक Balbir Singh Dhillon ने कहा कि कंपनी ने कीमतों में बढ़ोतरी का निर्णय काफी सोच-समझकर लिया है और कोशिश की गई है कि ग्राहकों पर इसका असर न्यूनतम रहे। उन्होंने कहा कि हाल ही में कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता के कारण कंपनी की लागत बढ़ी है। ऐसे में कीमतों में सीमित बढ़ोतरी करना आवश्यक हो गया था। ढिल्लों ने भरोसा दिलाया कि कंपनी अपने ग्राहकों को बेहतर प्रोडक्ट और प्रीमियम अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कई लोकप्रिय सेडान और एसयूवी मॉडल भारत में उपलब्धभारत में ऑडी की कई लग्जरी सेडान और एसयूवी मॉडल काफी लोकप्रिय हैं। कंपनी देश में प्रीमियम सेडान और एसयूवी सेगमेंट में कई विकल्प उपलब्ध कराती है। इनमें Audi A4, Audi A6 जैसी सेडान और Audi Q3, Audi Q5, Audi Q7 और Audi Q8 जैसी एसयूवी शामिल हैं। कीमतों में बढ़ोतरी इन सभी मॉडलों के एक्स-शोरूम दामों पर लागू होगी। हालांकि कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अलग-अलग मॉडल के हिसाब से कीमतों में कितनी वृद्धि होगी, लेकिन अधिकतम बढ़ोतरी 2 प्रतिशत तक हो सकती है। अन्य लग्जरी कार कंपनियां भी बढ़ा सकती हैं कीमतेंऑडी इंडिया के इस फैसले के बाद ऑटो सेक्टर में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में अन्य लग्जरी कार निर्माता कंपनियां भी कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। आमतौर पर जब किसी बड़े ब्रांड की ओर से कीमतों में संशोधन किया जाता है, तो अन्य कंपनियां भी लागत बढ़ने का हवाला देकर इसी तरह के कदम उठा सकती हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले महीनों में लग्जरी कार सेगमेंट में कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। बिक्री और प्री-ओन्ड कार कारोबार में भी मजबूतीऑडी इंडिया के प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले साल जनवरी से जून की अवधि में भारत में 2,128 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की थी। इसके अलावा कंपनी का प्री-ओन्ड कार कारोबार भी लगातार मजबूत हो रहा है। ऑडी के ‘ऑडी अप्रूव्ड: प्लस’ कार्यक्रम के तहत बेची जाने वाली प्रमाणित प्री-ओन्ड कारों की मांग में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है। कंपनी के अनुसार इस सेगमेंट में जनवरी-जून अवधि के दौरान करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। देश में प्री-ओन्ड कार नेटवर्क का विस्तारऑडी इंडिया अपने प्री-ओन्ड कार कारोबार को भी लगातार विस्तार दे रही है। फिलहाल देशभर में कंपनी के 26 प्री-ओन्ड कार शोरूम मौजूद हैं। कंपनी की योजना इस नेटवर्क को और मजबूत करने की है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक प्रमाणित प्री-ओन्ड लग्जरी कारों की सुविधा पहुंचाई जा सके। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में लग्जरी कारों का बाजार धीरे-धीरे विस्तार कर रहा है और प्री-ओन्ड कार सेगमेंट भी इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद ऑडी जैसे प्रीमियम ब्रांड के लिए भारतीय बाजार में मांग बनी रहने की संभावना है।

वैश्विक संकट के बीच भी भारत की तेज रफ्तार, FY27 में 7% विकास दर की उम्मीद

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रह सकती है। जापान के दिग्गज निवेश बैंक Nomura ने अपने ताजा आकलन में कहा है कि वित्त वर्ष 2027 में भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। हालांकि बैंक ने यह भी कहा कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा खिंचता है तो यह भारत के आर्थिक संतुलन की परीक्षा ले सकता है। इसके बावजूद मजबूत घरेलू मांग और संरचनात्मक सुधारों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी रहने की संभावना जताई गई है। भारत के ‘गोल्डीलॉक्स पीरियड’ की हो सकती है परीक्षानोमुरा के मुताबिक वर्तमान समय भारत के लिए तथाकथित “गोल्डीलॉक्स पीरियड” जैसा है। अर्थशास्त्र में Goldilocks Economy उस स्थिति को कहा जाता है जब आर्थिक वृद्धि दर मजबूत होती है और महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रहती है। अगर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आता है, तो यह संतुलन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में भारत की आर्थिक नीतियों और घरेलू मांग की मजबूती की असली परीक्षा होगी। जीडीपी, महंगाई और चालू खाते के अनुमान में बदलावनोमुरा की भारत और एशिया (जापान को छोड़कर) की मुख्य अर्थशास्त्री Sonal Varma ने अर्थशास्त्री Aurodeep Nandi के साथ मिलकर जारी रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2027 के लिए कुछ प्रमुख आर्थिक संकेतकों के अनुमान में बदलाव किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार चालू खाते के घाटे यानी Current Account Deficit (सीएडी) के अनुमान को 0.4 प्रतिशत बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का 1.6 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी Consumer Price Index आधारित महंगाई का अनुमान 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को मामूली रूप से 0.1 प्रतिशत घटाकर 7 प्रतिशत किया गया है। घरेलू खपत और उद्योग में बनी रह सकती है रफ्तारनोमुरा के अनुसार 2026 की पहली तिमाही के शुरुआती संकेत बताते हैं कि भारत में उपभोग और औद्योगिक गतिविधियों में गति बनी रह सकती है। हालांकि निर्यात और सरकारी खर्च में कुछ कमजोरी देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम बना हुआ है, खासकर प्राकृतिक गैस की संभावित कमी घरेलू उद्योग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। नीतिगत सुधार और वेतन वृद्धि से मिलेगा सहारारिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत की अर्थव्यवस्था को कई सकारात्मक कारकों से समर्थन मिल रहा है। इनमें पिछली नीतिगत ढील, संरचनात्मक सुधार, वेतन वृद्धि और वैश्विक व्यापार संबंधों में सुधार शामिल हैं। खास तौर पर अमेरिका के साथ व्यापार तनाव में कमी से भारत के लिए नए अवसर बन सकते हैं। इन कारकों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में चक्रीय सुधार देखने को मिल सकता है और विकास की रफ्तार बरकरार रह सकती है। ऊर्जा कीमतों से बढ़ सकता है महंगाई का दबावनोमुरा ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं। फिलहाल कई एशियाई देशों में महंगाई अपेक्षाकृत कम स्तर पर है, लेकिन कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी से स्थिति बदल सकती है। ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है असररिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक मौद्रिक नीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे हालात में कई केंद्रीय बैंक फिलहाल अपनी नीति दरों को स्थिर रख सकते हैं, लेकिन अगर महंगाई का दबाव बढ़ता है तो भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना भी बन सकती है। ऐसे में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में आने वाले महीनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

मिडिल ईस्ट संकट गहराया, Crude Oil की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पार

नई दिल्ली।मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया और कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई में तेज उछालअंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 9 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 100.76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी मानक कच्चे तेल WTI Crude का भाव भी करीब 9 प्रतिशत की तेजी के साथ लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। तेल बाजार में इस तेज उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। आईईए ने इमरजेंसी रिजर्व से तेल जारी करने का फैसलाकच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए International Energy Agency (आईईए) ने बड़ा कदम उठाया है। 32 सदस्य देशों वाले इस संगठन ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने की घोषणा की है। यह आईईए के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा इमरजेंसी रिलीज माना जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों में तेजी को कुछ हद तक नियंत्रित करना है। अमेरिका ने भी रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने की घोषणा कीआईईए के फैसले के अलावा United States Department of Energy ने भी अलग से बड़ा ऐलान किया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने अपने Strategic Petroleum Reserve से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright के अनुसार इस तेल की आपूर्ति अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है और इसे पूरा होने में लगभग 120 दिन का समय लग सकता है। पहले भी 119 डॉलर तक पहुंच चुका है कच्चा तेलविशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतें पहले भी तेजी से बढ़ी थीं और एक समय यह 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में बाजार में कुछ स्थिरता आने के बाद कीमतें गिरकर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गई थीं। लेकिन मौजूदा हालात ने फिर से बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्रतेल बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह Strait of Hormuz में बढ़ता तनाव भी है। यह मध्य पूर्व का एक संकरा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया में उत्पादित होने वाले करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार होता है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। तेल टैंकरों पर हमलों से बढ़ी चिंतामध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। यही कारण है कि निवेशकों और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेज उछाल देखने को मिल रहा है।