मिडिल ईस्ट तनाव का भारतीय बाजार पर असर, BSE Sensex में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ खुले। सुबह करीब 9:19 बजे BSE Sensex 963 अंक यानी लगभग 1.25 प्रतिशत गिरकर 75,899 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 303 अंक यानी करीब 1.27 प्रतिशत फिसलकर 23,563 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला। कई सेक्टरों में दिखा भारी दबावशुरुआती कारोबार में बाजार के लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट देखी गई। ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, रियल्टी, मेटल, पीएसयू बैंक, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा। निवेशकों ने जोखिम से बचने की रणनीति अपनाते हुए कई सेक्टरों में मुनाफावसूली की। इस वजह से बाजार का मूड नकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बने रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव मेंकेवल लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट का असर देखा गया। Nifty Midcap 100 इंडेक्स करीब 1,070 अंक यानी 1.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,390 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty Smallcap 100 इंडेक्स लगभग 286 अंक यानी 1.75 प्रतिशत गिरकर 16,127 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक स्तर पर देखने को मिला। सेंसेक्स के कई बड़े शेयरों में गिरावटसेंसेक्स पैक के कई बड़े शेयर शुरुआती कारोबार में नुकसान में दिखाई दिए। इनमें प्रमुख रूप से Mahindra & Mahindra, Tata Steel, ICICI Bank, Titan Company, Larsen & Toubro, Maruti Suzuki, Bajaj Finance, State Bank of India, Axis Bank, Infosys और HDFC Bank जैसे शेयर शामिल रहे। दूसरी ओर आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जहां Tech Mahindra और HCLTech हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। एशियाई और अमेरिकी बाजारों से भी मिला कमजोर संकेतवैश्विक बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले हैं। एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजार जैसे Nikkei 225, Shanghai Composite, Hang Seng Index और KOSPI भी गिरावट के साथ खुले। वहीं अमेरिका में भी पिछला कारोबारी सत्र कमजोर रहा, जहां Dow Jones Industrial Average लाल निशान में बंद हुआ था। इन वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछालबाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी भी है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। खबर लिखे जाने तक Brent Crude लगभग 9.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 100.54 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था, जबकि WTI Crude भी करीब 9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 95.14 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। एफआईआई की बिकवाली से बढ़ा दबावबाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव भी बना हुआ है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 6,267.31 करोड़ रुपये की निकासी की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को कुछ सहारा देते हुए लगभग 4,965.53 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों की सतर्कता के कारण बाजार में गिरावट का रुख बना रहा।
बढ़ती डिमांड से मार्केट में कमी, Induction Cooktop क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर हुए आउट ऑफ स्टॉक

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के घरेलू बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। संभावित एलपीजी आपूर्ति बाधा की आशंका के बीच देशभर में इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक तेजी से बढ़ गई है। उपभोक्ता भविष्य में गैस सिलेंडर की कमी या कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के चलते वैकल्पिक कुकिंग विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कारण कई शहरों में इंडक्शन चूल्हों की खरीदारी तेजी से बढ़ गई है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इनकी उपलब्धता कम हो गई है। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खत्म हुआ स्टॉकतेजी से बढ़ती मांग का असर क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर साफ देखा जा रहा है। कई शहरों में Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket जैसे प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन चूल्हे “आउट ऑफ स्टॉक” हो गए हैं। आमतौर पर ये प्लेटफॉर्म कुछ ही मिनटों में डिलीवरी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण इनके पास उपलब्ध स्टॉक तेजी से खत्म हो गया। इससे साफ है कि उपभोक्ता गैस के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों को तेजी से अपना रहे हैं। ई-कॉमर्स साइट्स पर भी ऑर्डर में भारी उछालसिर्फ क्विक-कॉमर्स ही नहीं बल्कि बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ी है। Amazon और Flipkart जैसी कंपनियों ने भी बिक्री में भारी बढ़ोतरी की पुष्टि की है। अमेजन इंडिया के एक प्रवक्ता के अनुसार पिछले दो दिनों में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में 30 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा राइस कुकर और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर जैसे उपकरणों की मांग भी सामान्य से लगभग चार गुना ज्यादा हो गई है, जबकि एयर फ्रायर और मल्टी-यूज इलेक्ट्रिक केतली की बिक्री लगभग दोगुनी हो गई है। कई राज्यों में अचानक बढ़ी मांगफ्लिपकार्ट के मुताबिक पिछले चार से पांच दिनों में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। कंपनी ने बताया कि दिल्ली, कोलकाता और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मांग विशेष रूप से तेज रही है। इन इलाकों में उपभोक्ता भविष्य में गैस की कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में कमी की आशंका के चलते वैकल्पिक कुकिंग विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। गैस आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंतामांग में आया यह उछाल इस बात का संकेत है कि घरों और छोटे व्यवसायों में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि कई लोग पहले से ही इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरण खरीदकर खुद को संभावित संकट के लिए तैयार करना चाहते हैं। जरूरी संस्थानों को प्राथमिकता देने की तैयारीरिपोर्ट के अनुसार तेल विपणन कंपनियों ने एलपीजी वितरकों से अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक संस्थानों को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार और ऊर्जा कंपनियां आपूर्ति की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और आवश्यक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए पहले से कदम उठा रही हैं। सरकार ने बढ़ाया एलपीजी उत्पादनइस बीच Ministry of Petroleum and Natural Gas ने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। मंत्रालय के अनुसार सरकार ने देश में एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि की है और इसे घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए निर्देशित किया गया है। इसके अलावा 8 मार्च को जारी आदेश में रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संभावित आपूर्ति संकट की स्थिति में भी उपभोक्ताओं को कुकिंग गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
रसोई से कारोबार तक असर: एमपी में LPG की भारी कमी, सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं को सप्लाई

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस की कमी अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगी है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई लगभग ठप पड़ी है, जबकि घरेलू सिलेंडर के लिए भी लोगों को 5 से 7 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऑयल कंपनियों के अनुसार फिलहाल प्रदेश में सिर्फ करीब 15 प्रतिशत एलपीजी ही उपलब्ध है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर इमरजेंसी सेवाओं और घरेलू उपयोग के लिए रखा गया है। ऐसे में गुरुवार से प्रदेश में गैस संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है। कमर्शियल गैस की सीमित सप्लाई के कारण अब सिलेंडर केवल अस्पतालों, सेना और पुलिस की कैंटीन, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड की कैंटीन जैसे जरूरी स्थानों को ही दिए जाएंगे। इसके लिए खाद्य विभाग को जरूरत के हिसाब से ऑयल कंपनियों को सूची भेजनी होगी। दूसरी ओर होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और छोटे कारोबारियों को फिलहाल कमर्शियल गैस नहीं मिल सकेगी। इससे खानपान और अन्य व्यवसायों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है। राजधानी भोपाल में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की चिंता बढ़ गई है। भोपाल होटल एसोसिएशन के अनुसार शहर में करीब डेढ़ हजार होटल और रेस्टोरेंट हैं, जहां रोजाना दो से ढाई हजार कमर्शियल सिलेंडर की खपत होती है। जिन संस्थानों के पास कुछ स्टॉक बचा है, वे अधिकतम 48 घंटे तक ही काम चला पाएंगे। इसके बाद गैस सप्लाई नहीं मिलने पर कई होटल और रेस्टोरेंट बंद करने की नौबत आ सकती है। होटल संचालकों ने सरकार से कमर्शियल गैस की आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। सरकारी स्तर पर घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। राजधानी के कई इलाकों में लोगों को सिलेंडर बुकिंग के बाद कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर लोगों के बीच सिलेंडर को लेकर भाग-दौड़ की स्थिति भी बनी है। इस बीच अधिकारियों का कहना है कि अब एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद अगली बुकिंग करीब 25 दिन बाद ही की जा सकेगी। साथ ही सर्वर की तकनीकी समस्या और कुछ लोगों द्वारा अतिरिक्त सिलेंडर जमा करने की वजह से भी एजेंसियों के बाहर भीड़ बढ़ रही है। गैस संकट का असर शादी समारोहों पर भी पड़ सकता है। मार्च महीने में प्रदेश में करीब 20 हजार से ज्यादा शादियां होने वाली हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। पिछले तीन दिनों से सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कैटरिंग और भोजन व्यवस्था करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उधर अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भोपाल के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। व्यापारियों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कई खाद्य वस्तुओं और ड्राई फ्रूट्स के दाम बढ़ गए हैं। दालों की कीमतों में तेजी आई है, जबकि मिर्च और धनिया जैसे मसाले भी महंगे हुए हैं। पिस्ता, अंजीर और केसर जैसे ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है क्योंकि इनका आयात बड़े पैमाने पर ईरान के रास्ते होता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पैकेजिंग उद्योग पर भी पड़ा है। प्लास्टिक और पैकेजिंग से जुड़े सामानों के दामों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई जा रही है। वहीं खाद्य तेल के बाजार में भी तेजी देखी जा रही है। सोयाबीन तेल की कीमतों में पिछले पंद्रह दिनों में लगभग 14 रुपए प्रति किलो तक वृद्धि हुई है, जबकि मूंगफली तेल के 15 लीटर जार की कीमत भी तेजी से बढ़ी है। इधर गैस और जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को लागू कर दिया है। इसके तहत गैस की सप्लाई को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर वितरण की व्यवस्था की जा रही है, ताकि जरूरी सेवाओं और घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। प्रदेश सरकार ने लोगों से घबराने की बजाय अधिकृत जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
Agricultural loans India: देश में 7.72 करोड़ से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड सक्रिय, बकाया लोन 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक

Agricultural loans India: नई दिल्ली। देश में 7.72 करोड़ से ज्यादा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सक्रिय हैं और इनमें बकाया लोन 10.2 लाख करोड़ रुपए के करीब है। यह जानकारी बुधवार को आधिकारिक फैक्टशीट में दी गई। सरकारी बयान में कहा गया कि केसीसी प्लेटफॉर्म से 457 बैंक जुड़े हुए हैं और इस पर 1,998.7 लाख से ज्यादा क्रेडिट एप्लीकेशन प्रोसेस की गई हैं, जिसमें से 631.5 लाख कमर्शियल बैंकों, 337.2 लाख रीजनल बैंकों और 1,030 लाख एप्लीकेशन कॉरपोरेटिव बैंकों द्वारा प्रोसेस की गई हैं। ये आंकड़े केसीसी के कार्यान्वयन में व्यापक संस्थागत भागीदारी को दर्शाते हैं और कृषि ऋण प्रदान करने में सहकारी बैंकों की केंद्रीय भूमिका को उजागर करते हैं। हालिया सुधारों, जिनमें ऋण सीमा में वृद्धि, संबद्ध क्षेत्रों तक विस्तारित कवरेज और किसान ऋण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल एकीकरण शामिल हैं, ने केसीसी की पहुंच और पारदर्शिता में मजबूत सुधार किया है। आंकड़ों पर आधारित निगरानी को सक्षम बनाकर, ऋण प्रक्रिया को तेज करके और पारदर्शी दावा निपटान सुनिश्चित करके, इन उपायों ने कृषि ऋण वितरण की परिचालन दक्षता को मजबूत किया है। सरकार ने संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत फसल ऋण सीमा को 3 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है और मत्स्य पालन और संबद्ध गतिविधियों के लिए ऋण सीमा को 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत, सीमांत और गैर-सीमांत किसानों के लिए उनकी भूमि जोत के आकार, निवेश क्षमता और आजीविका आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, सावधि ऋण और समग्र ऋण सीमाएं अलग-अलग निर्धारित की गई हैं। भूमि जोत के आकार और फसल पैटर्न जैसे कारकों के आधार पर 10,000 रुपए से 50,000 रुपए तक की लचीली सीमा स्वीकृत की जा सकती है। समग्र केसीसी सीमा पांच साल की अवधि के लिए निर्धारित की जाएगी। किसानों को संस्थागत ऋण से जोड़ने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और उनकी पहुंच में सुधार लाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के तहत कई सुगम उपाय लागू किए गए हैं।
भारत का डिजिटल पेमेंट मॉडल दुनिया के विकासशील देशों के लिए बना मिसाल: रिपोर्ट

नई दिल्ली। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने आधुनिक इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी फिनटेक (फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी) परिवर्तन में से एक को अंजाम दिया है, जिसकी बदौलत देश आज दुनिया के सबसे उन्नत डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में से एक बन गया है। यह मॉडल अब अन्य विकासशील देशों के लिए भी एक उदाहरण बन रहा है।अजरबैजान स्थित न्यूज डॉट एजेड की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का मॉडल दिखाता है कि सरकारी नीतियां, तकनीकी नवाचार और व्यापक मोबाइल कनेक्टिविटी मिलकर किस तरह एक प्रभावी भुगतान ढांचा तैयार कर सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति ने वैश्विक स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया है। अर्थशास्त्री और तकनीकी विशेषज्ञ इसे अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक सफल मॉडल के रूप में अध्ययन कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल पहचान प्रणाली, तेजी से बढ़ती मोबाइल कनेक्टिविटी, आधुनिक पेमेंट प्लेटफॉर्म और सरकार की सहायक नीतियों के संयोजन ने दुनिया के सबसे बड़े और कुशल डिजिटल इकोसिस्टम में से एक को जन्म दिया है। रिपोर्ट में सरकार की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा गया कि वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और लाखों लोगों को डिजिटल पहचान उपलब्ध कराने वाले सरकारी कार्यक्रमों ने इस व्यवस्था की मजबूत नींव तैयार की। साथ ही सस्ते स्मार्टफोन और तेजी से बढ़ती मोबाइल इंटरनेट सेवाओं ने डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर अपनाने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (पीएम-वानी) कार्यक्रम के जरिए सार्वजनिक इंटरनेट सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है। फरवरी 2026 तक इस पहल के तहत 4,09,111 वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हें 207 PDO एग्रीगेटर और 113 ऐप प्रदाता सपोर्ट कर रहे हैं। इसका उद्देश्य खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सस्ती और तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इन सभी विकासों ने बड़े स्तर पर डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के लिए जरूरी माहौल तैयार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल पहचान को बैंकिंग और मोबाइल सेवाओं से जोड़ने से वित्तीय संस्थान उपयोगकर्ताओं की पहचान सुरक्षित तरीके से सत्यापित कर सकते हैं और लेनदेन को तेजी से प्रोसेस कर सकते हैं। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने नकदी पर निर्भरता कम करने में भी मदद की है, जिससे वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और आर्थिक लेनदेन अधिक कुशल हुए हैं। सरकार ने हाल ही में एक बयान में कहा कि जनवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, यूपीआई के जरिए हर महीने लगभग 28.33 लाख करोड़ रुपए के लेनदेन होते हैं। इस दौरान 21.7 अरब डिजिटल ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जो मोबाइल फोन के माध्यम से शून्य लागत पर रियल-टाइम भुगतान की सुविधा देते हैं और शहरों से लेकर गांवों तक तथा हर आय वर्ग में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।
Share Market: शेयर बाजार के लड़खड़ाए कदम, 435 अंक गिरा Sensex; Nifty भी 110 अंक नीचे

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह के कारोबार में हल्की बढ़त के बाद बाजार में अचानक गिरावट आ गई। BSE Sensex करीब 435 अंक गिरकर 77,770.74 पर कारोबार करता नजर आया। यह अपने पिछले बंद 78,205.98 के मुकाबले लगभग 0.56% नीचे है। वहीं Nifty 50 भी करीब 110 अंक गिरकर 24,150 के आसपास ट्रेड करता दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में दिखी तेजीजहां भारतीय बाजार में गिरावट देखी गई, वहीं एशियाई बाजारों में तेजी का रुख नजर आया। Nikkei 225 में 1.36% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि TOPIX इंडेक्स 1.22% ऊपर रहा। दक्षिण कोरिया का KOSPI 2.52% चढ़ा, जबकि स्मॉल-कैप इंडेक्स KOSDAQ में 1.39% की बढ़त देखी गई। वहीं Hang Seng Index फ्यूचर्स 25,936 के स्तर पर कारोबार करते नजर आए। वॉल स्ट्रीट लाल निशान में बंदमंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट देखी गई। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों और मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति पर बनी हुई है। S&P 500 0.21% गिरकर 6781.48 पर बंद हुआ। वहीं Dow Jones Industrial Average 34.29 अंक गिरकर 47,706.51 पर बंद हुआ। हालांकि Nasdaq Composite में हल्की बढ़त देखने को मिली और यह 0.01% बढ़कर 22,697.10 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावटबुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। WTI Crude की कीमत 0.03% गिरकर 83.43 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। वहीं Brent Crude पिछले सत्र के हाई लेवल 119.50 डॉलर से गिरकर अब 87 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार International Energy Agency ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। एजेंसी ने अपने इतिहास के सबसे बड़े Emergency Oil Reserve को जारी करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत 182 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल बाजार में जारी किया जा सकता है ताकि कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके।
सेल ने वित्त वर्ष 26 में अप्रैल-फरवरी तक की अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की

नई दिल्ली सरकारी स्टील कंपनी Steel Authority of India Limited (सेल) ने वित्त वर्ष 26 के अप्रैल-फरवरी अवधि में 18.24 मिलियन टन स्टील बेचकर अब तक की सबसे अधिक बिक्री का रिकॉर्ड बनाया। यह सालाना आधार पर 14 प्रतिशत अधिक है। स्टील मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी साझा की और बताया कि इस अवधि में कैश कलेक्शन 1.11 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। फरवरी में विशेष प्रदर्शनमंत्रालय ने बताया कि अकेले फरवरी 2026 में सेल ने 1.58 मिलियन टन की कुल बिक्री की। इसके साथ ही कंपनी ने जनवरी की तुलना में स्टॉक में 1.05 लाख टन की कमी की और अपने ऋण को 1,000 करोड़ रुपए घटाया। ये आंकड़े वित्तीय अनुशासन और कुशल संचालन का संकेत देते हैं। रिटेल बिक्री और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोणसेल ने रिटेल बिक्री के क्षेत्र में भी सुधार दिखाया। स्टॉकयार्ड बिक्री और घर-घर डिलीवरी दोनों में मजबूत सुधार हुआ, जो कंपनी के ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण को उजागर करता है। चेकर प्लेट उत्पादन की शुरुआतबाजार की बदलती मांग के अनुसार, सेल ने झारखंड के Bokaro Steel Plant में चेकर प्लेट का उत्पादन फिर से शुरू किया है। यह उत्पाद पहली बार बोकारो में बनाया जा रहा है और प्रमुख क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादक क्षमता बढ़ाने का कदम है। वित्तीय अनुशासन और बाजार तालमेलकंपनी के निदेशक (वाणिज्यिक) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे A.K. Panda ने कहा कि कंपनी बाजार की जरूरतों को पूरा करते हुए वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने बताया, “हम इन्वेंट्री और कार्यशील पूंजी का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करके वित्तीय अनुशासन प्रदर्शित कर रहे हैं, जो कंपनी की नींव को मजबूत करता है।” रिकॉर्ड बिक्री और ग्राहक भरोसापांडा ने आगे कहा कि रिकॉर्ड बिक्री और नकद संग्रह हमारे ग्राहकों के हम पर भरोसे का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी बाजार के साथ तालमेल बिठाने और आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। सेल का यह प्रदर्शन न केवल वित्तीय मजबूती को दर्शाता है बल्कि यह संकेत भी देता है कि कंपनी अपने ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और कुशल प्रबंधन के साथ भविष्य में भी स्थिर और सतत विकास की राह पर आगे बढ़ रही है।
रियल एस्टेट निवेश में भारत की चमक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बना प्रमुख केंद्र

नई दिल्ली। कॉलियर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नौ प्रमुख बाजारों में रियल एस्टेट निवेश के मामले में 2025 में सबसे तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की है। इस दौरान कुल निवेश 162 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 8 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया कि साल के दूसरे हिस्से में निवेश गतिविधियों में तेजी आई, क्योंकि खरीदार और विक्रेता कीमतों को लेकर एक-दूसरे के करीब आए। भारत और सिंगापुर में निवेश में सबसे अधिक बढ़ोतरीरिपोर्ट में उल्लेख है कि सिंगापुर और भारत में सालाना आधार पर सबसे ज्यादा निवेश वृद्धि हुई। सिंगापुर में 35 प्रतिशत और भारत में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाजार की बेहतर स्थिति और निवेश के आकर्षक अवसरों को दर्शाती है। विदेशी निवेशकों की मजबूत भागीदारीकॉलियर्स इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर Badal Yagnik ने कहा कि भारत में विदेशी निवेशकों की भागीदारी भी काफी मजबूत रही। 8.5 अरब डॉलर के निवेश में से करीब 43 प्रतिशत हिस्सा विदेशी निवेशकों का था। उन्होंने कहा कि घरेलू और विदेशी निवेश दोनों ने मिलकर भारत को रियल एस्टेट निवेश का आकर्षक केंद्र बना दिया है। ऑफिस प्रॉपर्टी में सबसे अधिक निवेशरिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में भारत में सबसे ज्यादा निवेश ऑफिस प्रॉपर्टी में हुआ। इसकी वजह उच्च गुणवत्ता वाले ऑफिस स्पेस की लगातार मांग और प्रमुख केंद्रीय व्यापार क्षेत्र (सीबीडी) में सीमित नई आपूर्ति रही। भारत में 2025 में ऑफिस प्रॉपर्टी में करीब 4.5 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो कुल संस्थागत निवेश का आधे से अधिक हिस्सा है। रिटेल और वैकल्पिक एसेट्स में भी निवेश बढ़ारिटेल सेक्टर में निवेश सालाना आधार पर 15 प्रतिशत बढ़ा। बेहतर एसेट प्रदर्शन और उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। इसके अलावा, वैकल्पिक एसेट क्लास सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेक्टर बना, जहां संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग देखने को मिली। 2026 में निवेश की संभावनाएंरिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 में भी भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश मजबूत रहने की संभावना है। इसकी वजह देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं और उच्च गुणवत्ता वाली संपत्तियों की लगातार मांग है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताएं निवेश पर असर डाल सकती हैं। विशेषज्ञों की रायकॉलियर्स इंडिया के रिसर्च नेशनल डायरेक्टर Vimal Nadar ने कहा कि भारत में संस्थागत निवेशकों की पहली पसंद ऑफिस सेक्टर ही बना हुआ है। उन्होंने बताया कि 2025 में नौ प्रमुख एशिया-प्रशांत बाजारों में से पांच में रियल एस्टेट निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा ऑफिस सेक्टर का रहा। रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, भारत न केवल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बल्कि वैश्विक स्तर पर रियल एस्टेट निवेश के लिए आकर्षक और स्थिर केंद्र बनता जा रहा है। देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि, निवेशकों के भरोसे और उच्च गुणवत्ता वाली संपत्तियों की मांग इस स्थिति को और मजबूत करती है।
भारत अमेरिका का अहम साथी, तेल की कीमतें स्थिर रखने में भी निभा रहा भूमिका: राजदूत सर्जियो गोर

नई दिल्ली। भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने कहा है कि भारत दुनिया में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में एक अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (formerly Twitter) पर लिखा कि भारत की रूस से निरंतर तेल खरीद ऊर्जा बाजार को स्थिर करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। राजदूत ने इसे अमेरिका और भारत के बीच वैश्विक तेल मार्केट में स्थिरता लाने वाले सहयोग का उदाहरण बताया। भारत: तेल का बड़ा उपभोक्ता और रिफाइनरSergio Gor ने आगे कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता और रिफाइनर है, इसलिए भारत की नीतियां वैश्विक तेल बाजार पर सीधे असर डालती हैं। उन्होंने कहा, “अमेरिका और भारत को मिलकर मार्केट में स्थिरता लाने के लिए काम करना जरूरी है।” इस बयान के साथ उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रूस से भारत की लगातार तेल खरीद इस वैश्विक स्थिरता प्रयास का हिस्सा है। ईरान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिकायह बयान ऐसे समय आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में खतरा पैदा हुआ है। इसके चलते तेल कीमतों में उथल-पुथल होने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका ने इस स्थिति में भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए विशेष छूट दी थी, ताकि तेल की आपूर्ति को बनाए रखा जा सके और बाजार में स्थिरता बनी रहे। व्हाइट हाउस की पुष्टिव्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Caroline Leavitt ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रपति, ट्रेजरी विभाग और नेशनल सिक्योरिटी टीम की बैठक के बाद लिया गया। उनका कहना था कि भारत अमेरिका के लिए भरोसेमंद सहयोगी रहा है और इस फैसले से वैश्विक तेल सप्लाई में ईरान संकट से पैदा हुए अंतर को कम करने में मदद मिली। रूस को आर्थिक लाभ का कोई खास असर नहींलेविट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस छूट से मास्को को आर्थिक रूप से कोई खास फायदा नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति और स्थिरता बनाए रखना था। उन्होंने बताया कि छूट मिलने से पहले ही भारत के लिए शिपमेंट भेज दिए गए थे, जिससे तेल आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं आई। राजदूत Sergio Gor के बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत न केवल खुद के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करने में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। रूस से भारत की तेल खरीद को भी इसी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट में संतुलन बनाए रखने में मदद मिल रही है।
Gas Supply Crisis: कहीं गैस बुकिंग ठप तो कहीं लंबी लाइनें, कई शहरों में LPG को लेकर बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव और गैस सप्लाई प्रभावित होने का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। देश के कई शहरों में एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं ऑनलाइन गैस बुकिंग नहीं हो पा रही है तो कहीं गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। दिल्ली में गैस बुकिंग में आ रही दिक्कतराजधानी दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में लोग गैस सिलेंडर बुक नहीं कर पा रहे हैं। सरकार की ओर से जारी टोल-फ्री नंबर भी कई बार ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर गैस बुकिंग के लिए जारी नंबर 7718955555 पर कॉल करने पर कभी कॉल नहीं लगती, कभी नंबर स्विच ऑफ बताता है तो कभी ‘नॉट इन यूज’ की जानकारी मिलती है। ऐसे में लोग ऑनलाइन बुकिंग की बजाय सीधे गैस एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं, जहां लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं। मुंबई में लोगों ने ढूंढे वैकल्पिक साधनमुंबई में भी गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई जगहों पर ग्राहकों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोग खाना बनाने के लिए बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने लगे हैं। बाजार में इलेक्ट्रिक कुकर, माइक्रोवेव ओवन, इलेक्ट्रिक तवा, एयर फ्रायर, मल्टी कुकर और हॉट प्लेट जैसे उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है। होटल और रेस्टोरेंट को गैस सप्लाई में कटौतीमुंबई के एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर और गैस एजेंसियां फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही हैं। बताया जा रहा है कि 6 मार्च से होटल और रेस्टोरेंट को मिलने वाली एलपीजी सप्लाई में भारी कटौती की गई है और करीब 80 फीसदी तक सप्लाई कम हो चुकी है। इसका असर मुंबई के कई पुराने और मशहूर होटलों पर भी देखने को मिल रहा है। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के पास स्थित करीब 178 साल पुराने ‘पंचम पुरीवाला’ होटल को भी गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। मशहूर होटल में मेन्यू हुआ सीमित1848 में शुरू हुए इस ऐतिहासिक होटल में पहले करीब 79 तरह के मेन्यू आइटम मिलते थे और खास तौर पर यहां पांच तरह की पूरियां परोसी जाती थीं। लेकिन एलपीजी की कमी के कारण अब होटल में सिर्फ दो आइटम पूरी-भाजी और आमरस-पूरी ही उपलब्ध हैं। होटल प्रबंधन के अनुसार उनके पास गैस का बहुत सीमित स्टॉक बचा है और उन्हें कई जगहों से उधार सिलेंडर लेकर काम चलाना पड़ रहा है। पेट्रोल पंपों पर भी दिख रही भीड़सिर्फ एलपीजी ही नहीं, बल्कि पेट्रोल-डीजल को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ती दिख रही है। कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ गई है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कई पेट्रोल पंपों पर भी लंबी कतारें देखी जा रही हैं। हालांकि महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने कहा है कि फिलहाल गैस की उपलब्धता में कोई कमी नहीं है। कंपनी के अनुसार सीएनजी और पाइप के जरिए घरों में जाने वाली पीएनजी गैस की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है। हालांकि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण एलएनजी आयात प्रभावित होने पर औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए गैस सप्लाई पर कुछ असर पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में स्थिति सामान्य नहीं हुई तो ईंधन की कमी की आशंका बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए आने वाले समय में गैस और ईंधन की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।