FASTag: वार्षिक पास की कीमत बढ़ी….एक अप्रैल से चुकाने होंगे ज्यादा पैसे…

नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highway Authority of India- NHAI) (एनएचएआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए FASTag Annual Pass (फास्टैग वार्षिक पास) की कीमत में बदलाव किया है। नए आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से गैर-व्यावसायिक वाहनों (कार, जीप और वैन) के लिए वार्षिक पास की कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। फास्टैग वार्षिक पास पिछले साल 15 अगस्त को शुरू किया गया था। ताकि टोल शुल्क के बोझ को कम किया जा सके और हाईवे पर यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सके। FASTag वार्षिक पास क्या है और कौन ले सकता है?फास्टैग वार्षिक पास उन वाहन मालिकों के लिए है जिनके पास गैर-व्यावसायिक वाहन और सक्रिय फास्टैग है। इस पास के तहत:– यह 1 साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक मान्य रहता है– किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा पर लागू होता है– 200 बार टोल पार करने या 1 साल पूरा होने के बाद पास स्वतः समाप्त हो जाता है– इस पास को Rajmargyatra (राजमार्गयात्रा) मोबाइल एप या एनएचएआई की वेबसाइट के जरिए खरीदा जा सकता है। पास की कीमत हर साल क्यों बढ़ती है?सरकार ने नेशनल हाईवे फीस (डिटरमिनेशन ऑफ रेट्स एंड कलेक्शन) संशोधन नियम 2025 के तहत यह प्रावधान किया है कि फास्टैग वार्षिक पास की कीमत हर साल संशोधित की जाएगी। इसी नियम के अनुसार 2026-27 के लिए पास की कीमत में यह मामूली बढ़ोतरी की गई है। अभी कितने लोग FASTag वार्षिक पास का इस्तेमाल कर रहे हैं?सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अनुसार: देश में 50 लाख से अधिक लोग फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग कर रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले कुल कार टोल लेन-देन का लगभग 28 प्रतिशत अब इसी पास के जरिए होता है। इसके अलावा 2016 से अब तक 11.86 करोड़ फास्टैग जारी किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 5.9 करोड़ फास्टैग सक्रिय हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 98 प्रतिशत से अधिक टोल वसूली फास्टैग के माध्यम से होती है। किन टोल प्लाजा पर वार्षिक पास का उपयोग सबसे ज्यादा है?कुछ टोल प्लाजा पर फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग काफी अधिक है। दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर बिजवासन टोल प्लाजा – लगभग 57 प्रतिशत कारें फास्टैग वार्षिक पास से गुजरती हैं। दिल्ली के मुंडका टोल प्लाजा (UER-II) – लगभग 53 प्रतिशत उपयोग। झिंझोली टोल प्लाजा (NH-334P) – करीब 53 प्रतिशत गैर-व्यावसायिक वाहन फास्टैग वार्षिक पास का इस्तेमाल करते हैं। क्षेत्रीय स्तर पर:– चंडीगढ़ – 14 प्रतिशत– तमिलनाडु – 12.3 प्रतिशत– दिल्ली – 11.5 प्रतिशत– 15 अगस्त 2025 से जनवरी 2026 तक फास्टैग वार्षिक पास से 26.55 करोड़ से अधिक टोल लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं। क्या यह पास सभी टोल प्लाजा पर मान्य है?– नहीं। यह पास केवल राष्ट्रीय राजमार्ग और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे के लगभग 1150 टोल प्लाजा पर ही मान्य है। राज्य सरकार या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित एक्सप्रेसवे या स्टेट हाईवे के टोल प्लाजा पर फास्टैग वार्षिक पास सामान्य फास्टैग की तरह काम करेगा और सामान्य टोल शुल्क लागू होगा। क्या FASTag Annual Pass लेना अनिवार्य है?– नहीं। फास्टैग वार्षिक पास पूरी तरह वैकल्पिक है।– जो उपयोगकर्ता फास्टैग वार्षिक पास नहीं लेते हैं, उनके लिए मौजूदा फास्टैग सिस्टम पहले की तरह ही चलता रहेगा और वे प्रति टोल क्रॉसिंग के हिसाब से शुल्क देते रहेंगे। पास खत्म होने पर क्या होगा?यदि: 200 ट्रिप पूरी हो जाती हैं, या 1 साल की वैधता समाप्त हो जाती है तो फास्टैग वार्षिक पास अपने आप सामान्य फास्टैग में बदल जाएगा।हालांकि, अगर 200 ट्रिप पहले ही पूरी हो जाएं तो उपयोगकर्ता चाहें तो उसी साल के भीतर फिर से नया फास्टैग वार्षिक पास खरीद सकते हैं। खर्च और समय दोनों की बचतफास्टैग वार्षिक पास की कीमत में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद यह योजना हाईवे उपयोगकर्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह व्यवस्था टोल भुगतान को आसान बनाने के साथ-साथ नियमित यात्रियों के लिए खर्च और समय दोनों की बचत में मदद कर रही है।
भारत आ रहे एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा को लेकर भारत सतर्क, फारस की खाड़ी के पास नौसेना के युद्धपोत तैनात

तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए कदम तेज कर दिए हैं। भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी के आसपास अपने कई युद्धपोत तैनात कर दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर भारत की ओर आने वाले व्यापारिक जहाजों को सहायता और सुरक्षा दी जा सके। सूत्रों के मुताबिक इन युद्धपोतों की तैनाती का उद्देश्य भारतीय व्यापारिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, क्योंकि क्षेत्र में हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। दो भारतीय एलपीजी जहाजों को मिली अनुमतिइस बीच शनिवार को ईरान ने भारत की ओर जा रहे दो भारतीय झंडे वाले एलपीजी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी। इनमें एक जहाज शिवालिक है, जो जहाज ट्रैकिंग वेबसाइट के अनुसार फिलहाल ओमान के पास देखा गया है और इसके 21 मार्च तक अपने गंतव्य तक पहुंचने की संभावना है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर नजरबंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को फारस की खाड़ी की समुद्री स्थिति और भारतीय जहाजों व नाविकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मंत्रालय के मुताबिक फारस की खाड़ी में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर 668 भारतीय नाविक तैनात हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में तीन जहाजों पर 76 भारतीय नाविक मौजूद हैं। 24 घंटे निगरानी कर रही सरकारमंत्रालय ने बताया कि डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। सभी जहाजों और चालक दल की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। 24 घंटे के नियंत्रण कक्ष के सक्रिय होने के बाद से अब तक 2,425 से अधिक कॉल और 4,441 ईमेल प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही 223 से ज्यादा फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित की गई है। ईरान ने सुरक्षित रास्ता देने का भरोसा दियाभारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद ईरान भारत की ओर जाने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। उन्होंने भारत और ईरान को पुराने मित्र बताते हुए कहा कि दोनों देशों के हित और भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद पर ईरान का बयानवहीं भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान कभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना नहीं चाहता था। उन्होंने मौजूदा हालात के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वैश्विक नेताओं को युद्ध रोकने के लिए उन पर दबाव बनाना चाहिए, क्योंकि बढ़ती तेल कीमतों का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
करदाताओं को भेजे गए अग्रिम टैक्स रिमाइंडर ईमेल में गड़बड़ी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने शनिवार को करदाताओं से आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025–26) के लिए अग्रिम कर ई-अभियान के तहत भेजे गए ईमेल संदेशों के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने करदाताओं से त्रुटिपूर्ण ईमेल को नजरअंदाज करने की अपील की है। आयकर विभाग ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में कहा कि उसे करदाताओं से गलत जानकारी वाले ईमेल मिलने की शिकायतें प्राप्त हुई है। विभाग ने इस मुद्दे को ध्यान में लाने के लिए करदाताओं का धन्यवाद किया और असुविधा के लिए माफी मांगी है। आयकर ने बताया कि संचार प्रणाली के लिए जिम्मेदार सेवा प्रदाता के समन्वय से इस मामले को सुलझाया जा रहा है। आयकर विभाग ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी करते हुए करदाताओं से इन ईमेल को फिलहाल नजरअंदाज करने की अपील की है। विभाग ने स्वीकार किया है कि अग्रिम कर ई-अभियान के तहत भेजे गए कुछ ईमेल में महत्वपूर्ण लेन-देन से संबंधित गलत विवरण थे। दरअसल यह समस्या आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025-26) के लिए भेजे गए ईमेल में सामने आई है। विभाग ने करदाताओं को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है। विभाग ने करदाताओं से अनुरोध किया है कि वे पहले भेजे गए त्रुटिपूर्ण ईमेल को अनदेखा करें। विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे अपनी लेन-देन की जानकारी की पुष्टि आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध अनुपालन पोर्टल के ‘ई-अभियान’ टैब के जरिए करें। ये संचार केवल करदाताओं को उनकी वित्तीय जानकारी की समीक्षा करने और अग्रिम कर का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करते हैं। विभाग ने इस प्रक्रिया में करदाताओं से सहयोग की अपेक्षा की है। उल्लेखनीय है कि पिछले एक-दो दिनों से कई करदाताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) को आयकर विभाग की ओर से ‘नज’ ईमेल भेजे जा रहे थे। विभाग के इन ईमेल में यह कहा गया था कि करदाता द्वारा किया गया एडवांस टैक्स भुगतान उनके वित्तीय लेन-देन से मेल नहीं खाता है। इसके साथ ही ईमेल में उस साल के दौरान किए गए कुछ ‘महत्वपूर्ण ट्रांजैक्शन’ का भी जिक्र किया गया था। इसके बाद आयकर विभाग ने स्पष्टीकरण जारी किया है।
मध्य प्रदेश में LPG संकट: सिलेंडर 30% महंगे, होटल और घरों में हाहाकार

भोपाल। मध्य प्रदेश में रसोई गैस (LPG) की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 6 दिनों से प्रदेश के कई शहरों में कॉमर्शियल और घरेलू सिलेंडर की सप्लाई बाधित है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि होटल, रेस्टोरेंट और घरों में रसोई गैस की गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें:भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों में लोग सुबह-सुबह सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े हो रहे हैं। बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग भी सिलेंडर लेने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। कई बार बुकिंग पूरी नहीं हो पा रही है, जबकि कभी-कभी 6 से 8 घंटे इंतजार के बाद सिलेंडर मिल पा रहा है। होटल और रेस्टोरेंट्स पर असर:प्रदेश में करीब 50 हजार होटल और रेस्टोरेंट्स इस संकट से प्रभावित हैं। इन व्यवसायों को अपने संचालन के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे, जिससे खाना पकाने में बाधा और ग्राहकों की सेवा प्रभावित हो रही है। विकल्प और बढ़ा खर्च:गैस की कमी के कारण इंडक्शन और डीजल भट्ठियों का उपयोग बढ़ गया है। हालांकि, इनके संचालन की लागत 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। भोपाल में कुछ रेहड़ियां और छोटे स्ट्रीट फूड स्टॉल्स अस्थायी रूप से बंद भी हो गए हैं। राज्यव्यापी स्थिति:LPG संकट केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। राजधानी से लेकर छिंदवाड़ा और अन्य शहरों में रसोई गैस की कमी ने आम जनता और व्यवसायों में हाहाकार मचा दिया है। विशेषज्ञों की चेतावनी:विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो इससे खाद्य सेवा उद्योग और घरेलू रसोई दोनों प्रभावित होंगे। लंबे समय तक गैस की कमी के कारण लोग सस्ता और असुरक्षित विकल्प, जैसे खुले भट्ठी या कोयला, इस्तेमाल करने पर मजबूर हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। सरकारी कदम:इस समय सरकारी एजेंसियां और वितरक प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सिलेंडर की सप्लाई बहाल हो। हालाँकि, अभी तक कोई ठोस समयरेखा नहीं दी गई है। मध्य प्रदेश में LPG संकट से गृहस्थी और व्यापार दोनों प्रभावित हैं। होटल और रेस्टोरेंट्स संचालन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, घरों में रसोई गैस की कमी आमजन की दिनचर्या पर असर डाल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की सुविधा दोनों पर लंबी अवधि में असर डाल सकता है।
शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में संयम जरूरी, रिटेल निवेशकों को सेबी प्रमुख की सलाह

नई दिल्ली। भारतीय पूंजी बाजार वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद लगातार मजबूत और व्यापक होते जा रहे हैं। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के अधिकारियों तुहिन कांता पांडे ने रिटेल इंजीनियरों से अपील की है कि वे बाजार की स्थानीय गिरावट या तेजी से घबराकर जल्दबाजी में फैसला न लें। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पूंजी बाजार आकार, विविधता और बढ़ोतरी के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि जैसे-जैसे बाजार का विस्तार और संकुचन बढ़ता है, वैसे-वैसे वैश्विक घटनाओं का प्रभाव भी अधिक देखने को मिलता है। पांडे ने मवेशियों को सलाह दी कि बाजार के छोटे समय के उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय दीर्घकालिक नजरिया अपनाना अधिक फायदेमंद साबित होता है। धैर्य ही रिटेल इंजीनियरों की सबसे बड़ी रणनीतिसेबी प्रमुख ने कहा कि रिटेल इंजीनियरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीति धैर्य बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि इतिहास गवाह है कि बड़े वैश्विक संकटों के बाद भी शेयर बाजारों ने समय के साथ वापसी की है और भारतीयों को अच्छा रिटर्न दिया है। उनका कहना था कि बाजार में अस्थिरता के दौर अक्सर अस्थायी होते हैं और लंबे समय में मजबूत आर्थिक आधार वाले देशों के बाजार फिर से स्थिर हो जाते हैं। इसलिए भारतीयों को घबराकर अपने निवेश से बाहर निकलने के बजाय समझदारी और संयम के साथ फैसला लेना चाहिए। भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट का असरपांडे ने स्वीकार किया कि मौजूदा समय में वैश्विक बाजार कई तरह की जबड़े का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी बदलाव और ऊर्जा संकट जैसे कारक वैश्विक आर्थिक अस्थिरताओं को बढ़ा रहे हैं। विशेष रूप से मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आज के वित्तीय बाजारों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि उनमें अस्थिरता पहले की तुलना में अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सूचना और खबरें बेहद तेजी से फैलती हैं। तकनीक से तेजी से बदल रहा बाजारसेबी प्रमुख के अनुसार आधुनिक वित्तीय बाजार तकनीक के कारण पहले से कहीं ज्यादा तेज और जटिल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि संस्थागत ट्रेडिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों के कारण बाजार की गतिविधियां बहुत तेजी से होती हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज के दौर में खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं और बेटियों की राय उससे भी तेज बनती है। यही कारण है कि कई बार बाजार वास्तविक आर्थिक आयामों के बजाय खबरों या धारणाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं। स्थिरता बनाए रखना नीति निर्माताओं की जिम्मेदारीसेबी प्रमुख ने कहा कि बाजार की तेजी के साथ उनकी स्थिरता बनाए रखना भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि नियामक संस्थाओं और नीति निर्माताओं का दायित्व है कि वे बेटियों के हितों की रक्षा करते हुए बाजार में भरोसा और भरोसा बनाए रखें। उन्होंने बताया कि भारत के आर्थिक विकास के अगले चरण के लिए मजबूत बॉन्ड बाजार, बेटियों की बढ़ती भागीदारी और तकनीकी नवाचार बहुत अहम होंगे। बेटियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदमनिवेशकों की सुरक्षा को लेकर सेबी कई महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इसमें सोशल मीडिया पर फैलाने वाली बातचीत या फर्जी निवेश सलाह की निगरानी को मजबूत करना भी शामिल है। इसके अलावा नियामक संस्था अपनी निगरानी तंत्र को भी लगातार उन्नत कर रही है, ताकि बाजार में संभावित हेरफेर, अंदरूनी ट्रेडिंग या गलत जानकारी के प्रसार को समय पर रोका जा सके। विशेष रूप से सेबी अपनी उन्नत निगरानी प्रणाली PARRVA निगरानी प्रणाली को मजबूत कर रहा है, जिससे बाजार में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों का जल्दी पता लगाया जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे पैदल चलने वालों से इंजीनियरों का भरोसा बढ़ेगा और भारतीय पूंजी बाजार भविष्य में और अधिक मजबूत बन सकेगा।
दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत, घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मजबूती

नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत लगातार मजबूत आर्थिक प्रदर्शन कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। International Monetary Fund के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। जब कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं नीतिगत अनिश्चितताओं और वैश्विक चुनौतियों के कारण अपने विकास अनुमान घटा रही हैं, तब भारत की आर्थिक रफ्तार अपेक्षाकृत अधिक मजबूत बनी हुई है। आईएमएफ के अनुमान के अनुसार पूरे वर्ष के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रह सकती है, भले ही वैश्विक व्यापार में चुनौतियां बनी रहें। वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का सबसे बड़ा योगदानआईएमएफ का अनुमान है कि वर्ष 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का योगदान लगभग 17 प्रतिशत हो सकता है। यह आंकड़ा भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बनाए रखता है। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक वृद्धि में योगदान के मामले में अमेरिका दूसरे स्थान पर रह सकता है, जहां से लगभग 9.9 प्रतिशत योगदान की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा अन्य देशों में Indonesia से 3.8 प्रतिशत Turkey से 2.2 प्रतिशत Saudi Arabia से 1.7 प्रतिशत Vietnam से 1.6 प्रतिशत योगदान का अनुमान लगाया गया है। वहीं Nigeria और Brazil से करीब 1.5 प्रतिशत योगदान की संभावना जताई गई है। तुलनात्मक रूप से देखें तो China की विकास दर लगभग 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो भारत की तुलना में कम है। घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मिल रही मजबूतीभारत की मजबूत आर्थिक स्थिति का असर देश के पूंजी बाजार में भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में घरेलू निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है, जिससे शेयर बाजार को स्थिरता और मजबूती मिल रही है। घरेलू म्यूचुअल फंड उद्योग ने वर्ष 2025 में अपने एसेट बेस में लगभग 14 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की। इसके साथ कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर करीब 81 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारतीय निवेशक अब लंबे समय के लिए पूंजी बाजार में निवेश करने के प्रति अधिक भरोसा दिखा रहे हैं। एसआईपी निवेश में रिकॉर्ड वृद्धिसाल 2025 में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी Systematic Investment Plan के जरिए निवेश भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान एसआईपी के माध्यम से कुल 3.34 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ। तुलना करें तो 2024 में यह आंकड़ा 2.68 लाख करोड़ रुपये था जबकि 2023 में यह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तेजी से बढ़ते निवेश से साफ है कि छोटे और मध्यम निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड योजनाओं में लगातार बढ़ रहा है। विदेशी निवेश पर निर्भरता कम हो रहीपहले भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव काफी हद तक विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर रहता था। लेकिन अब घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी के कारण बाजार की संरचना धीरे-धीरे बदल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की बढ़ती संख्या बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है और लंबे समय में यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। निवेश के क्षेत्र में अभी भी बड़ी संभावनाएंहालांकि भारत में निवेश की संभावनाएं अभी भी काफी व्यापक हैं। आंकड़ों के अनुसार देश में अभी केवल 15 से 20 प्रतिशत परिवार ही शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। इसके मुकाबले United States में लगभग 50 से 60 प्रतिशत परिवार पूंजी बाजार से जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय साक्षरता और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में भारत में घरेलू निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजार दोनों को मजबूती मिलेगी।
आईपीओ को बढ़ावा: सरकार ने पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों में किया बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। देश में बड़ी कंपनियों के लिए पूंजी बाजार तक पहुंच को आसान बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सरकार का मानना है कि इससे बड़ी कंपनियों के लिए आईपीओ लाना आसान होगा और पूंजी बाजार में निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे। नए नियमों के तहत कंपनियां अब आईपीओ के समय पहले की तुलना में कम हिस्सेदारी जनता को ऑफर कर सकेंगी। इसके बाद तय समय सीमा के भीतर धीरे-धीरे अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक करनी होगी। यह व्यवस्था खास तौर पर बड़ी वैल्यूएशन वाली कंपनियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिन्हें पहले आईपीओ के समय बड़ी हिस्सेदारी बेचने की अनिवार्यता के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। यह संशोधन Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 के तहत जारी Securities Contracts (Regulation) Amendment Rules, 2026 के माध्यम से किया गया है, जिसे Ministry of Finance ने अधिसूचित किया है। कंपनियों के आकार के अनुसार तय होगा पब्लिक ऑफरसरकार ने नई व्यवस्था में कंपनियों की पोस्ट-इश्यू पूंजी के आधार पर न्यूनतम पब्लिक ऑफर तय किया है। जिन कंपनियों की पोस्ट-इश्यू पूंजी 1,600 करोड़ से 4,000 करोड़ रुपये के बीच होगी, उन्हें कम से कम 400 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे। 4,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनियों को लिस्टिंग के समय कम से कम 10 प्रतिशत शेयर जनता को देने होंगे और तीन साल के भीतर इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत करना होगा। सरकार ने कहा है कि इस हिस्सेदारी को बढ़ाने की समयसीमा और प्रक्रिया बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India द्वारा तय की जाएगी। बड़ी कंपनियों के लिए अलग व्यवस्थानई नीति में अत्यधिक बड़ी कंपनियों के लिए भी विशेष प्रावधान बनाए गए हैं। 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनियों को कम से कम 1,000 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे और प्रत्येक श्रेणी के शेयरों में कम से कम 8 प्रतिशत पब्लिक हिस्सेदारी होनी चाहिए। 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनियों को कम से कम 6,250 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे और लिस्टिंग के समय कम से कम 2.75 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग बनाए रखना होगा। वहीं 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक पूंजी वाली कंपनियों को लिस्टिंग के समय कम से कम 15,000 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे और कम से कम 1 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग रखना अनिवार्य होगा। छोटी कंपनियों के लिए पुराना नियम ही लागूसरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों की पोस्ट-इश्यू पूंजी 1,600 करोड़ रुपये तक है, उनके लिए पहले से लागू नियम ही जारी रहेंगे। ऐसे मामलों में कंपनियों को आईपीओ के समय कम से कम 25 प्रतिशत शेयर जनता को देना अनिवार्य रहेगा। न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी के लिए नई शर्तनई व्यवस्था के तहत कंपनी के आकार की परवाह किए बिना किसी भी कंपनी को कम से कम 2.5 प्रतिशत इक्विटी या कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज जनता को ऑफर करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा यदि किसी कंपनी की लिस्टिंग के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15 प्रतिशत से कम होती है, तो उसे पांच वर्षों के भीतर इसे 15 प्रतिशत और दस वर्षों के भीतर 25 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा। पूंजी बाजार को मिलेगा बढ़ावाविशेषज्ञों का मानना है कि इन नए नियमों से भारत के पूंजी बाजार में बड़ी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। कई बड़ी कंपनियां, जो पहले बड़ी हिस्सेदारी बेचने की शर्त के कारण आईपीओ लाने से हिचकिचाती थीं, अब आसानी से बाजार में लिस्ट हो सकेंगी। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से न केवल निवेशकों को नए अवसर मिलेंगे, बल्कि भारतीय शेयर बाजार की गहराई और मजबूती भी बढ़ेगी।
ऊर्जा आपूर्ति को राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गया एलपीजी लेकर आ रहा ‘नंदा देवी’ जहाज

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई हैभारत आने वाला जहाज ‘नंदा देवी’ भी दुनिया का सबसे पवित्र समुद्री जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकल गया है। इससे पहले क्रूज़ लेकर आने वाला जहाज ‘शिवालिक’ भी इसी जलडमरूमध्य को मजबूती से पार कर चुका है। सरकारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में जारी संघर्ष और सुरक्षा के बावजूद दोनों पार्टिसिपेंट्स के सीक्वल पर नजर रखी जा रही थी। ईरान की ओर से प्रामाणिक बैठक के बाद इन साथियों को सुरक्षित मार्ग दिया गया, ताकि वे इस नामित समुद्री मार्ग को पार कर सकें। 46 हजार टन से अधिक वजन लेकर आ रही हैं ‘नंदा देवी’आधिकारिक तौर पर जहाज ‘नंदा देवी’ भारत के लिए 46,000 मक्के टन से अधिक कोयला लेकर आ रहा है। यह घरेलू गैस और औद्योगिक इंजीनियरों के लिए बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है, इस जहाज का सुरक्षित नेतृत्व भारत की ऊर्जा सुरक्षा के महत्व से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर भारतीय नौसेना की सुरक्षा में जहाज ‘शिवालिक’ को भारत लाया जा रहा है। फर्जी का कहना है कि अगले दो दिन में आप किसी भी भारतीय पोर्ट पर पहुंच सकते हैं। संभावना है कि यह जहाज मुंबई या कांडला पोर्ट पर स्थित होगा। समुद्री जहाज खुले समुद्र में पहुंच चुका है और नौसेना की दिशा में सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ रहा है। मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच हुई अहम बातचीतइन खिलाड़ियों की सुरक्षित छुट्टियों के पीछे उच्च सरकारी छात्रवृत्ति का प्रयास भी अहम रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के बीच माल और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अहम बातचीत हुई। इसके बाद बच्चों को सुरक्षित मार्ग मिलने का रास्ता साफ हो गया। ईरान ने भारतीय खिलाड़ियों को संकेत के संकेत दिए थे सुरक्षित मार्गइस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भी संकेत दिया कि बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय छात्रों को जल्द ही होर्मुज जल्दरूमध्य से सुरक्षित मार्ग मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के इस क्षेत्र में साझा हित हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत ने युद्ध के बाद की स्थिति में विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मदद की है, इसलिए दोनों देशों के संबंध मजबूत बने हैं। इससे एक दिन पहले ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रावंची ने भी कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के सहयोगियों को इस समुद्री मार्ग से यात्रा की अनुमति दे दी है। दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा समुद्री मार्गहोर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन परिवहन में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 फीसदी तेल और गैस के सहयोगियों का इसी रास्ते से दबदबा है। यही कारण है कि यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार को प्रभावित कर सकता है। फारस की खाड़ी में 28 भारतीय खिलाड़ियों की निगरानीइस बीच बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में इस समय भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज मौजूद हैं। इन कर्मचारियों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। जानकारी के अनुसार इन खिलाड़ियों में से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं 4 जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्सों में हैं, जिनमें 101 भारतीय नाविक इंजीनियर शामिल हैं। विशेषज्ञ का मानना है कि भारत की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिर स्थिति में भारत की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति शामिल है। ऐसे में ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ का सुरक्षित बाहर जाना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
तेल संकट का असर एयरलाइन किराए पर: ग्वालियर-बेंगलुरु फ्लाइट में एयर इंडिया ने जोड़ा 300 रुपए सरचार्ज, 20% छूट का दावा

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव का असर अब हवाई यात्रा पर भी दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में Air India ने ग्वालियर से Bengaluru जाने वाली अपनी फ्लाइट के टिकट पर 300 रुपए का नया सरचार्ज जोड़ दिया है। हालांकि एयरलाइन की ओर से इस अतिरिक्त शुल्क की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। दिलचस्प बात यह है कि सरचार्ज जोड़ने के साथ ही एयरलाइन टिकटों पर 20 प्रतिशत तक छूट देने का दावा भी कर रही है। इस वजह से यात्रियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई यात्रियों का कहना है कि पहले टिकट की मूल कीमत बढ़ाई जाती है और फिर उस पर छूट का प्रचार करके वास्तविक बढ़ोतरी को कम दिखाने की कोशिश की जाती है। एयरलाइन के स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक यह सरचार्ज पिछले दो दिनों से लागू किया गया है और फिलहाल 31 मार्च तक प्रभावी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ईंधन लागत में बढ़ोतरी के कारण एयरलाइंस को अपने संचालन खर्च को संतुलित करने के लिए ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। दरअसल, वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में अस्थिरता के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की लागत भी बढ़ रही है। विमानन उद्योग में ईंधन खर्च संचालन लागत का बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए कीमतों में बदलाव का असर सीधे टिकट किराए पर पड़ता है। ग्वालियर से फिलहाल IndiGo की नियमित उड़ानें Delhi और Mumbai के लिए संचालित हो रही हैं, जबकि बेंगलुरु रूट पर एयर इंडिया की सेवा उपलब्ध है। ऐसे में इस रूट पर लगाए गए नए सरचार्ज ने यात्रियों का ध्यान खींचा है और टिकट कीमतों में बदलाव चर्चा का विषय बन गया है। यात्रियों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले समय में अन्य रूट्स पर भी एयरलाइंस इसी तरह के अतिरिक्त शुल्क या किराया संशोधन कर सकती हैं।
रिपोर्ट का दावा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस बढ़ाने के लिए मेटा में छंटनी संभव
नई दिल्ली। दुनिया की बड़ी टेक कंपनी में शामिल मेटा प्लेटफॉर्म एक बार फिर बड़े स्तर के कर्मचारियों के ड्रॉ पर विचार कर रही है। कंपनी का फोकस अब तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल टेक्निकल टेक्नोलॉजी (मैटोलिट) सेक्टर पर है और इसी वजह से वह अपने प्लांट को नई कंपनी से सलाह देने की योजना बना रही है। मीडिया विद्वान का कहना है कि मेटा अपने आर्किटेक्चर और डेटा सेंटर की मजबूती को मजबूत करने के लिए भारी निवेश करने की तैयारी में है। इसके साथ ही कंपनी की लागत कम करने और कार्यकुशल बनाने की दिशा में भी अधिक कदम उठाए जा सकते हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के अंदर चल रही चर्चाओं में कर्मचारियों की बड़ी कटौती पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटा के कुल कर्मचारियों में से लगभग 20 प्रतिशत या उससे अधिक की निकासी की संभावना बनी हुई है। करीब 16 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर संकटदिसंबर के अंत तक मेटा में करीब 79,000 कर्मचारी कर्मचारी थे। यदि प्रस्तावित अधिसूचना लागू होती है तो लगभग 16,000 कर्मचारियों की नौकरियाँ प्रभावित हो सकती हैं। हालाँकि कंपनी ने इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने इस रिपोर्ट में केवल विशाल पर आधारित रेटिंग के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि अभी तक बड़े पैमाने पर खींचने या समय लेने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग तरह के आंकड़ों से यह आकलन किया है कि किस तरह के ऑपरेशन को और अधिक कुशल बनाया जा सकता है और किस तरह के ढांचे का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। मेटा में पहले भी हो चुका है बड़ा ड्रॉयदि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को खींचा जाता है तो यह मेटा के इतिहास की सबसे बड़ी पुनर्स्थापना प्रक्रिया हो सकती है। इससे पहले भी कंपनी की लागत के लिए कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है। 2022 और 2023 के दौरान मेटा ने दो चरणों में 21,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था। उस समय कंपनी ने इसे “ईयर ऑफ फिशिएंसी” यानि कि प्रशिक्षण की रणनीति का हिस्सा बताया था। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग कंपनी को जनरेटिव फिल्म के क्षेत्र में मजबूत स्थिति के लिए तैयार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि नीतिगत रणनीति के तहत आर्किटेक्चरल टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर और बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बनाई जा रही है। मस्जिद से लेकर सभी प्रकार के प्रभावशालीइस बीच इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टैनली की टॉयलेट रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटल के गोदाम पर सिक्किम के प्रभाव से कोई गंभीर नुकसान नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कई मशीनों को ऑटोमेट किया जा सकता है, लेकिन इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पूरी तरह से ऑर्डर होने की संभावना कम है। इसके बजाय कई कर्मचारी नए प्रकार के कर्मचारियों में स्थानांतरण हो सकते हैं और भविष्य में ऐसे रोजगार भी पैदा हो सकते हैं जो अभी मौजूद नहीं हैं। हालांकि टेक इंस्टीट्यूट के कुछ दिग्गजों का मानना है कि अगले 12 से 18 महीनों में कंप्यूटर आधारित कई व्हाइट-कॉलर की हिस्सेदारी काफी हद तक ऑटोमेटेड हो सकती है। टेक इंडस्ट्री में ड्रॉ का जबरदस्त ट्रेंडमेटा इको कंपनी नहीं है जो निवेश के लिए काम में बदलाव पर विचार कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक ओरेकल ने भी अपने स्मार्टफोन डेटा सेंटर की क्षमता बढ़ाने के लिए 20,000 से 30,000 बेरोजगारी खत्म करने की योजना बनाई है। वहीं ई-कॉमर्स और क्लाउड दिग्गज अमेज़न ने भी हाल ही में लगभग 16,000 कर्मचारियों के लिए प्लॉट आधारित रिवाइवल योजना की घोषणा की है। विशेषज्ञ का मानना है कि आने वाले वर्षों में टेक सोसायटी की रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इंटरमीडिएट पारंपरिक प्रयोगशालाओं से अधिकांश ध्यान स्टूडियो, क्लाउड स्टूडियो और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र पर केंद्रित कर रहे हैं।