क्लीनमैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस का 3100 करोड़ का IPO खुला, 25 फरवरी तक मौका, न्यूनतम निवेश 14742 रुपये

नई दिल्ली। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Clean Max Enviro Energy Solutions का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम आज से निवेशकों के लिए खुल गया है। निवेशक 25 फरवरी तक इस आईपीओ में बोली लगा सकते हैं। कंपनी इस इश्यू के जरिए लगभग 3100 करोड़ रुपये जुटाने की योजना के साथ बाजार में उतरी है। कंपनी ने आईपीओ के लिए 1000 से 1053 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। एक लॉट में 14 शेयर शामिल हैं और ऊपरी प्राइस बैंड के अनुसार न्यूनतम निवेश 14742 रुपये होगा। यह इश्यू फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल दोनों का मिश्रण है। कंपनी के मुताबिक फ्रेश इश्यू से प्राप्त लगभग 1122.6 करोड़ रुपये का उपयोग कंपनी और उसकी सहायक इकाइयों के कर्ज के आंशिक या पूर्ण भुगतान में किया जाएगा। शेष राशि सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों और विस्तार योजनाओं में खर्च की जाएगी। आईपीओ में रिटेल निवेशकों के लिए 35 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित है, जबकि 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स और 15 प्रतिशत नॉन इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए निर्धारित किया गया है। इश्यू के बुक रनिंग लीड मैनेजर के रूप में Axis Capital, JPMorgan और SBI Capital Markets को नियुक्त किया गया है। कंपनी के शेयर Bombay Stock Exchange और National Stock Exchange of India पर सूचीबद्ध होंगे। आईपीओ से पहले कंपनी प्री आईपीओ प्लेसमेंट के जरिए 1500 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। इस चरण में Temasek और Bain Capital जैसे बड़े निवेशकों की भागीदारी रही, जिससे बाजार में इस इश्यू को लेकर उत्सुकता बढ़ी है। उद्योग आकलनों के अनुसार कंपनी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए रिन्यूएबल एनर्जी समाधान और नेट जीरो पहलों पर फोकस कर रही है। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक 31 अक्टूबर 2025 तक कंपनी की परिचालन क्षमता 2.80 गीगावाट रही, जबकि 3.17 गीगावाट की अतिरिक्त परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। कार्बन क्रेडिट और स्वच्छ ऊर्जा अनुबंधों पर कॉर्पोरेट सेक्टर का बढ़ता जोर कंपनी के लिए दीर्घकालिक मांग का आधार तैयार कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर हरित ऊर्जा में निवेश की प्रवृत्ति और भारत में ऊर्जा संक्रमण की नीतियां इस तरह के आईपीओ को समर्थन दे रही हैं। हालांकि निवेशकों को मूल्यांकन, ब्याज दरों की दिशा और सेक्टर से जुड़े जोखिमों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
शेयर बाजार में मजबूती, IPO बाजार में हलचल, विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों का सहारा

नई दिल्ली।/मुंबई से शेयर बाजार के लिए आज का दिन उत्साह भरा रहा। Bombay Stock Exchange का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 500 अंकों की मजबूती के साथ 83300 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि National Stock Exchange of India का निफ्टी 150 अंक की बढ़त लेकर 25700 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में मजबूत खरीदारी के कारण देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत से ही सरकारी बैंकों और प्रमुख ऑटो कंपनियों के शेयरों में सकारात्मक रुख दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों की आक्रामक खरीद और वैश्विक बाजारों से मिले स्थिर संकेतों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया। घरेलू निवेशकों का लगातार समर्थन इस समय बाजार के लिए संबल बना हुआ है। हालांकि बाजार की इस तेजी के बीच एक बड़ा झटका भी देखने को मिला। IDFC First Bank के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। चंडीगढ़ स्थित एक शाखा में करीब 590 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद बैंक का शेयर लगभग 20 प्रतिशत टूटकर 67 रुपये तक पहुंच गया। सरकारी विभाग की ओर से संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट मिलने के बाद मामला उजागर हुआ। बैंक प्रबंधन ने चार कर्मचारियों को निलंबित कर आंतरिक जांच शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम ने निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेत मिश्रित रहे। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में तेजी दर्ज की गई, जबकि जापान का बाजार अवकाश के कारण बंद रहा। अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में सकारात्मक बंदी ने एशियाई बाजारों को सीमित समर्थन दिया। निवेश प्रवाह के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीद जारी रखी है। फरवरी माह में विदेशी निवेशकों की शुद्ध बिकवाली और घरेलू निवेशकों की मजबूती बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है। प्राथमिक बाजार में भी हलचल तेज रही। Clean Max Enviro Energy Solutions का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम निवेश के लिए खुल गया है। कंपनी इस आईपीओ के माध्यम से पूंजी जुटाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की योजना बना रही है। इससे निवेशकों को नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अवसर मिल सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अल्पकाल में बाजार की चाल बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन, वैश्विक संकेतों और निवेश प्रवाह पर निर्भर रहेगी। यदि घरेलू निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल निवेशक सतर्क आशावाद के साथ बाजार की अगली दिशा पर नजर बनाए हुए हैं।
निवेशकों के लिए सुनहरा मौका या चेतावनी, सोना और चांदी के दाम नई ऊंचाई पर

नई दिल्ली।आज सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों और आम खरीदारों का ध्यान खींच लिया है। कीमती धातुओं में तेज उछाल दर्ज किया गया है। India Bullion and Jewellers Association के अनुसार 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 3362 रुपये बढ़कर 1 लाख 58 हजार 428 रुपये पर पहुंच गई है। वहीं एक किलो चांदी 15236 रुपये की बढ़त के साथ 2 लाख 65 हजार 550 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। साल 2026 की शुरुआत से ही सोना और चांदी लगातार मजबूती दिखा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष अब तक सोने की कीमत में लगभग 25 हजार रुपये और चांदी में करीब 35 हजार रुपये की वृद्धि हो चुकी है। जनवरी महीने में सोने ने 1 लाख 76 हजार रुपये और चांदी ने 3 लाख 86 हजार रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई भी छुआ था। पिछले वर्ष भी कीमती धातुओं ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76 हजार रुपये के स्तर पर था जो वर्ष 2025 के अंत तक 1 लाख 33 हजार रुपये तक पहुंच गया। इसी तरह चांदी 86 हजार रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2 लाख 30 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंची, जो करीब 167 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। वैश्विक निवेश बैंक UBS के अनुसार 2025 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था और 2026 में यह आंकड़ा 950 टन तक पहुंच सकता है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश भी बढ़कर 825 टन तक जाने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में अनुमान है कि 2026 के मध्य तक सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत 6200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। भारतीय मुद्रा में इसका अर्थ है कि 10 ग्राम सोने का भाव 1 लाख 80 हजार रुपये तक जा सकता है। बढ़ती कीमतों के बीच विशेषज्ञ निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। सोना खरीदते समय हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही लेना चाहिए। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की पुष्टि होती है। साथ ही खरीदारी से पहले दिन की कीमत विश्वसनीय स्रोतों से जरूर जांच लें क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के भाव अलग होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी निवेशकों के लिए अवसर भी है और जोखिम भी। लंबी अवधि के निवेशक गोल्ड ईटीएफ या फिजिकल गोल्ड में रणनीतिक निवेश कर सकते हैं। वहीं ज्वेलर्स के लिए भी यह दौर मांग और कारोबार दोनों के लिहाज से अहम साबित हो सकता है।
Gold-Silver Rate: टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोने-चांदी के दामों में जबरदस्त उछाल….

Gold-Silver Rate: नई दिल्ली। सोने और चांदी के भाव (Gold-Silver Rate) में आज सोमवार को जबरदस्त उछाल (Tremendous Surge) देखने को मिला। सोने की कीमतों में 1.61% और चांदी की कीमतों में 5% तक की तेजी दर्ज की गई। यह तेजी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) के एक फैसले के बाद आई है, जिसमें अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को खारिज कर दिया। निवेशक अब इसके बाद अमेरिका की ओर से संभावित नए कदमों का आकलन कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में आज स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.61% बढ़कर 5,160 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 5% उछलकर 86 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। क्यों बढ़ रहे हैं सोना-चांदी के दाम? अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर पर “पारस्परिक” टैरिफ लगाने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का उल्लंघन किया था। इस फैसले के साथ ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लगाए गए कई महत्वपूर्ण टैरिफ अब समाप्त हो गए हैं। इस फैसले के जवाब में ट्रंप ने कहा है कि रद्द किए गए टैरिफ को बदलने के लिए वैकल्पिक तंत्र लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह मौजूदा शुल्कों के अलावा, कानून की धारा 122 के तहत 10% का वैश्विक टैरिफ लागू करेंगे। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य मामलों से जुड़े मौजूदा टैरिफ पूरी तरह से लागू रहेंगे। वहीं, जियो-पॉलिटिकल मोर्चे पर भी तनाव बना हुआ है। अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। ट्रंप ने ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर चेतावनी दी है, जिससे क्षेत्र में टकराव की आशंका और बढ़ गई है। ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले से वहां पहले से मौजूद आंतरिक अस्थिरता और गहरी हो सकती है और यह अमेरिका के लिए एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है। क्या सोना-चांडी के भाव में और तेजी आ सकती है? जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी के अनुसार, हालांकि मजबूत डॉलर और बदलती ब्याज दर की उम्मीदें कीमतों में तेज उछाल को फिलहाल रोक सकती हैं, लेकिन लगातार बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर ले जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हरीश ने कहा, “निवेशक आमतौर पर भू-राजनीतिक संकटों के दौरान सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं, क्योंकि ये धातुएं मूल्य संरक्षण करती हैं, बाजार में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करती हैं और मुद्राओं व वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता के समय एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में काम करती हैं।” नई ऊंचाई छूने की संभावना एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने सोने की कीमतों के तकनीकी परिदृश्य पर कहा कि कीमतों में हालिया गिरावट मुनाफावसूली का हिस्सा है और व्यापक रुझान तेजी वाला ही बना हुआ है। उन्होंने कहा कि 4,500-4,700 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी देखी जा रही है और अगर कीमतें 5,100-5,200 डॉलर के स्तर को पार कर जाती हैं, तो नई ऊंचाई छूने की संभावना बन सकती है। वहीं, चांदी के भाव पर पोनमुडी ने कहा कि हालिया गिरावट के बावजूद, बड़े समय के फ्रेम में तेजी वाली संरचना बरकरार है। 65-70 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी का समर्थन स्तर है। अगर यह आधार बना रहता है और कीमतें 85-92 डॉलर के स्तर को पार करके वापसी करती हैं, तो तेजी का रुख फिर से मजबूत हो सकता है। मिड टू लॉन्ग टर्म नजरिए से चांदी के लिए संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।
INDIA US TRADE DEAL: टैरिफ पर ट्रंप को SC के बड़े झटके के बाद अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील…. अब नए सिरे से होगी चर्चा

INDIA US TRADE DEAL: वाशिंगटन। अमेरिका (America) की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से टैरिफ (Tariff) को लेकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को करारा झटका लगने के बाद भारत (India) के साथ व्यापार समझौते (Trade Agreements) को अंतिम रूप देने के लिए प्रस्तावित बैठक को भी नए सिरे से तय करने का फैसला किया गया है। भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए वाशिंगटन में अपने मुख्य वार्ताकारों की प्रस्तावित बैठक को नए सिरे से तय करने का फैसला किया है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। फिर से तय की जाएगी तारीख भारतीय दल 23 फरवरी से तीन दिन की बैठक शुरू करने वाला था। वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव दर्पण जैन इस समझौते के लिए भारत के लिए मुख्य वार्ताकार हैं। एक सूत्र ने कहा, ”भारत-अमेरिका व्यापार करार के लिए भारतीय वार्ताकारों की अमेरिका यात्रा के संदर्भ में दोनों पक्षों का मानना है कि अब यह बैठक तब होनी चाहिए जबकि दोनों पक्ष ताजा घटनाक्रमों और उसके प्रभाव का आकलन कर लें। इसके लिए दोनों पक्षों को समय चाहिए। अब इस बैठक की तारीख दोनों पक्षों की सुविधा के हिसाब से नए सिरे से तय की जाएगी।’ डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के पहले के बड़े शुल्क के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण हो जाता है। ट्रंप ने शुक्रवार को भारत समेत सभी देशों पर 24 फरवरी से 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लगाया था। हालांकि, शनिवार को उन्होंने शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उनके आर्थिक एजेंडा को एक बड़ा झटका देते हुए अमेरिकी शीर्ष अदालत ने उनके द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों पर लगाए गए शुल्कों को गैरकानूनी करार दिया है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक अधिकार कानून (आईईईपीए) का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है। अमेरिका ने अगस्त, 2025 में भारत पर 25 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाया था। बाद में, रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया। इससे भारत पर कुल शुल्क दर 50 प्रतिशत हो गई थी। 15 फीसदी किया टैरिफ भारत और अमेरिका इस महीने की शुरुआत में एक अंतरिम व्यापार करार को अंतिम रूप देने के लिए रूपरेखा पर सहमत हुए। इसके तहत अमेरिका शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। साथ ही रूस से तेल खरीद के लिए लगाए गए 25 प्रतिशत के अतिरिक्त शुल्क को भी हटाएगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने फिर से इन शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का ऐलान किया है। अगर यह शुल्क अधिसूचित होता है, तो यह अमेरिका में मौजूदा एमएफएन या आयात शुल्क के अलावा होगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी उत्पाद पर पांच प्रतिशत एमएफएन शुल्क लगता है, तो 15 प्रतिशत और जोड़कर यह 20 प्रतिशत हो जाएगा। हालांकि, इस बारे में कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है कि 150 दिन के समय के बाद भारत जैसे देशों पर अमेरिकी शुल्क क्या होगा। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत और आयात में 6.22 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2024-25 में, दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर था।
शेयर बाजार का सकारात्मक सप्ताह: टॉप कंपनियों में 63 हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी

नई दिल्ली/ मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह सकारात्मक रुख देखने को मिला, जिसके चलते देश की टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से छह के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में 63,478.46 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग सेक्टर की कंपनियां सबसे ज्यादा फायदे में रहीं। सप्ताह के दौरान व्यापक बाजार भी मजबूती के साथ बंद हुआ। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 187.95 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। सबसे ज्यादा लाभ लार्सन एंड टुब्रो को हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 28,523.31 करोड़ रुपए बढ़कर 6,02,552.24 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोजेक्ट ऑर्डर्स में मजबूती ने कंपनी के शेयरों को सहारा दिया। इसके बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। बैंक का बाजार पूंजीकरण 16,015.12 करोड़ रुपए बढ़कर 11,22,581.56 करोड़ रुपए हो गया। बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से एसबीआई को खास लाभ मिला। एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 9,617.56 करोड़ रुपए बढ़कर 14,03,239.48 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। वहीं भारतीय जीवन बीमा निगम का मूल्यांकन 5,977.12 करोड़ रुपए बढ़कर 5,52,203.92 करोड़ रुपए हो गया। वित्तीय सेवा क्षेत्र की कंपनी बजाज फाइनेंस का बाजार पूंजीकरण भी 3,142.36 करोड़ रुपए बढ़कर 6,40,387 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। हालांकि सभी कंपनियों के लिए सप्ताह सकारात्मक नहीं रहा। टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल का मार्केट कैप 15,338.66 करोड़ रुपए घटकर 11,27,705.37 करोड़ रुपए रह गया। इसी तरह आईसीआईसीआई बैंक का मूल्यांकन 14,632.10 करोड़ रुपए घटकर 9,97,346.67 करोड़ रुपए पर आ गया। आईटी सेक्टर की कंपनियों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। इंफोसिस का मार्केट कैप 6,791.58 करोड़ रुपए घटकर 5,48,496.14 करोड़ रुपए रह गया, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का बाजार पूंजीकरण 1,989.95 करोड़ रुपए घटकर 9,72,053.48 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, भारतीय जीवन बीमा निगम और इंफोसिस शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 25,800 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस है। इसके बाद 26,000 और 26,200 के स्तर अहम माने जा रहे हैं। वहीं नीचे की ओर 25,300 और 25,100 प्रमुख सपोर्ट स्तर हैं। यदि सूचकांक 25,000 के नीचे मजबूती से टूटता है तो बाजार में गिरावट का दबाव बढ़ सकता है।
लॉन्ग टर्म SIP कैलकुलेशन; 1000 से 3000 रुपये तक निवेश पर संभावित रिटर्न का पूरा हिसाब, जानें डिटेल

नई दिल्ली । महीने का SIP इन्वेस्टमेंट रिटर्न 1000 2000 3000 कॉर्पस कैलकुलेशन 20 साल भारत में डिटेल्स जानें लॉन्ग टर्म SIP कैलकुलेशन; 1000 से 3000 रुपये तक निवेश पर संभावित रिटर्न का पूरा हिसाब, जानें डिटेल छोटे निवेश से बनेगा बड़ा फंड SIP इन्वेस्टमेंट रिटर्न कैलकुलेशन बदलते परिवेश में पैसे कमाने के साथ-साथ पैसा बचाना और सही जगह निवेश करना सबसे जरूरी हो गया है. निवेश के कई विकल्प बाजार में उपलब्ध है. जहां निवेशक अपनी सहूलियत के अनुसार निवेश करते हैं. भारतीय निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड में एसआईपी बहुत फेमस है. इसकी वजह यह है कि, निवेशक लंबी अवधि तक छोटी-छोटी राशि में निवेश करने एक बड़ा फंड बना पाते हैं. अगर बाजार की चाल पॉजिटिव रहती है तो, एसआईपी में बेहतर रिटर्न मिलता है. यहीं कारण है कि, बहुत से लोग एसआईपी में निवेश का रास्ता चुन रहे हैं. ऐसे में छोटे निवेशक जो हर महीने हजार- दो हजार रुपये निवेश करते हैं, उनके मन में यह सवाल आता है कि, लंबी अवधि में उन्हें कितना रिटर्न मिलेगा. आइए इस सवाल का जवाब खोजते है…. 1000 के निवेश पर इतना बनेगा फंड नियमित निवेश की आदत लंबे समय में मजबूत फंड बनाने में मदद करती है. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति हर महीने 1000 रुपये की SIP म्यूचुअल फंड में लगाता है और यह निवेश लगातार 20 वर्षों तक जारी रखता है. इस अवधि में 12 प्रतिशत के अनुमानित रिटर्न के आधार पर उसके पास लगभग 9.19 लाख रुपये का कॉर्पस तैयार हो सकता है. इस अवधि में निवेशक की कुल जमा राशि 2.40 लाख रुपये होगी. जबकि कमाई के रूप में करीब 6.79 लाख रुपये का लाभ मिल सकता है. जो चक्रवृद्धि की ताकत को साफ दिखाता है. 2000 रुपये की मासिक SIP से 20 साल में बन सकता है इतना कॉर्पस अगर कोई निवेशक हर महीने 2000 रुपये की SIP म्यूचुअल फंड में करता है और इस निवेश को लगातार 20 वर्षों तक बनाए रखता है, तो 12 प्रतिशत के अनुमानित रिटर्न के हिसाब से उसके पास करीब 18.39 लाख रुपये की रकम तैयार हो सकती है. इस दौरान कुल निवेश 4.80 लाख रुपये का होगा. जबकि संभावित लाभ लगभग 13.59 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. जो लंबे समय तक अनुशासित निवेश के फायदे को दिखाता है. 3000 रुपये की SIP से 20 वर्षों में इतना बनेगा फंड हर महीने 3000 रुपये की SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने और इसे लगातार 20 साल तक जारी रखने पर अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है. 12 प्रतिशत के अनुमानित रिटर्न के आधार पर इस अवधि के अंत में कुल कॉर्पस लगभग 27.59 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. इस दौरान निवेशक की जेब से कुल 7.20 लाख रुपये का निवेश होगा. जबकि संभावित कमाई करीब 20.39 लाख रुपये की हो सकती है. डिस्क्लेमर यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.
अकाउंट फ्रीज होने के बाद नहीं निकाल पाएंगे एक भी रुपया; समझिए उन 5 वजहों को जो आपके बैंक खाते को कर सकती हैं ब्लॉक

नई दिल्ली ।बैंकिंग सेवाओं के इस दौर में हमारा बैंक अकाउंट हमारी जीवनरेखा की तरह है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके खाते पर ताला लगवा सकती है? बैंक अकाउंट के ‘फ्रीज’ होने का सीधा मतलब है कि आप अपने ही जमा पैसों को न तो निकाल सकते हैं और न ही कहीं ट्रांसफर कर सकते हैं। बैंक यह सख्त कदम ग्राहकों की सुरक्षा और कानूनी नियमों के पालन के लिए उठाते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई हमेशा सुरक्षित रहे और लेनदेन में कोई बाधा न आए, तो आपको उन 5 प्रमुख वजहों को जान लेना चाहिए जिनकी वजह से बैंक आपके अकाउंट को फ्रीज कर सकता है। इन 5 कारणों से आपके खाते पर लग सकती है रोकबैंक बिना वजह किसी का खाता बंद नहीं करते, लेकिन निम्नलिखित परिस्थितियों में वे तुरंत कार्रवाई करने के लिए बाध्य होते हैं: संदिग्ध धोखाधड़ी या फर्जी लेन-देन: बैंकों के पास अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम होते हैं। अगर आपके खाते में अचानक कोई ऐसा ट्रांजैक्शन होता है जो आपकी पहचान की चोरी या वित्तीय धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है, तो बैंक सुरक्षा के लिहाज से तुरंत एक्सेस ब्लॉक कर देता है। कोर्ट आदेश या सरकारी जांच: यदि किसी व्यक्ति का कोई कानूनी विवाद चल रहा है या आयकर विभाग Income Tax और अन्य जांच एजेंसियों को किसी अनियमितता का शक होता है, तो वे बैंक को ‘गार्निशमेंट ऑर्डर’ जारी कर सकते हैं। ऐसे सरकारी आदेशों के बाद बैंक को खाता फ्रीज करना ही पड़ता है। मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका: ‘एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग’ नियमों के तहत बैंक हर उस ट्रांजैक्शन पर पैनी नजर रखते हैं जिसका स्रोत स्पष्ट नहीं होता। यदि खाते का उपयोग अवैध धन के लेन-देन या संदिग्ध गतिविधियों के लिए होता पाया जाता है, तो जांच पूरी होने तक उसे फ्रीज कर दिया जाता है। KYC या दस्तावेजों में कमी: अक्सर ग्राहक अपने बैंक अकाउंट की ‘KYC’ Know Your Customer अपडेट करने में ढिलाई बरतते हैं। अगर आप समय पर जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करते या आपका बैलेंस लगातार ‘नेगेटिव’ रहता है, तो बैंक रखरखाव नियमों के तहत लेनदेन रोक सकता है। असामान्य या हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन: अगर आपके खाते का पैटर्न अचानक बदल जाता है—जैसे अचानक बहुत बड़ी रकम का आना या बार-बार हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन होना—तो बैंक इसे सुरक्षा जोखिम मानकर अस्थायी रोक लगा सकता है ताकि पुष्टि की जा सके कि यह लेन-देन आप ही कर रहे हैं।
NBFC या बैंक: पर्सनल लोन लेने से पहले जानें सही विकल्प

नई दिल्ली । पैसे की जरूरत पड़ने पर सबसे पहले दिमाग में बैंक आता है। लेकिन बैंक के अलावा भारत में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी NBFC भी लाखों लोगों को लोन देती हैं। दोनों ही पर्सनल लोन की सुविधा देती हैं, लेकिन इनके बीच का फर्क समझना जरूरी है। लाइसेंसिंग, नियामक ढांचा और जमा स्वीकारने की क्षमता में अंतर होने के कारण सही विकल्प चुनना आपके भविष्य की आर्थिक परेशानियों से बचा सकता है।NBFC क्या है? NBFC वे कंपनियां हैं जो कंपनी अधिनियम 1956/2013 के तहत पंजीकृत होती हैं और RBI अधिनियम 1934 के अध्याय III-B के तहत विनियमित होती हैं। इनके पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता, बल्कि उन्हें विशेष वित्तीय गतिविधियों के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलता है। NBFC विभिन्न प्रकार के लोन देती हैं, फिक्स्ड डिपॉजिट सुविधा, बीमा और अन्य वित्तीय उत्पाद भी प्रदान करती हैं। बैंक क्या है? बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के तहत नियंत्रित होते हैं। ये बचत और चालू खाते के रूप में डिमांड डिपॉजिट स्वीकारते हैं और ऋण प्रदान करते हैं। NBFC और बैंक का सबसे बड़ा अंतर यह है कि बैंक भुगतान और निपटान प्रणाली का हिस्सा होते हैं और चेक/क्लीयरिंग सुविधा देते हैं, जबकि NBFC ऐसा नहीं कर सकती। NBFC से पर्सनल लोन क्यों लें? तेज प्रोसेसिंग: अधिकांश NBFC 24–48 घंटे में लोन राशि डिस्बर्स कर देती हैं। लचीले क्रेडिट मानदंड: मध्यम CIBIL स्कोर वाले या नए उधारकर्ता भी पात्र हो सकते हैं। कम दस्तावेज़ और डिजिटल प्रक्रिया: KYC और बैंक स्टेटमेंट ऑनलाइन अपलोड कर लोन प्रक्रिया पूरी होती है। कस्टमाइज्ड लोन: ट्रैवल, वेडिंग या छोटे ब्रिज लोन जैसी विशेष जरूरतों के लिए प्रोडक्ट डिजाइन किए जाते हैं। प्रतिस्पर्धी दरें: स्थिर आय और अच्छे रिकॉर्ड वाले ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दर मिल सकती है। बैंक से पर्सनल लोन क्यों लें? कम ब्याज दर: बैंक की ब्याज दर NBFC से 2–5% कम हो सकती है।पारदर्शी शुल्क: RBI दिशा-निर्देशों से छिपे चार्ज कम होते हैं।बड़ी लोन राशि: ₹20–40 लाख तक बड़े लोन के लिए बैंक उपयुक्त हैं। मौजूदा संबंध का लाभ: सैलरी अकाउंट या FD से प्री-अप्रूव्ड लोन और विशेष ब्याज दर मिल सकती है। शाखा नेटवर्क और ग्राहक सहायता: समस्या का समाधान सीधे शाखा में मिल सकता है। NBFC vs बैंक: कौन बेहतर? यदि आपको तेजी और सुविधा चाहिए तो NBFC बेहतर हैं। वहीं, यदि आपकी प्राथमिकता कम ब्याज दर, बड़ी राशि और दीर्घकालिक विश्वसनीयता है तो बैंक अधिक उपयुक्त हैं। दोनों RBI द्वारा विनियमित हैं, लेकिन बैंक में बचत खाते पर DICGC बीमा का अतिरिक्त सुरक्षा लाभ मिलता है।
सोना-चांदी की कीमतों में 'यू-टर्न': रिकवरी के बाद भी हाई लेवल से ₹1.67 लाख सस्ती है चांदी, जानें निवेश का सही मौका!

नई दिल्ली ।भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बीते एक सप्ताह के दौरान हलचल तेज रही है। लंबे समय की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों ने एक बार फिर ‘यू-टर्न’ लिया है और निवेशकों के चेहरों पर चमक लौट आई है। बीते हफ्ते दोनों कीमती धातुओं में जोरदार उछाल देखने को मिला, लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस हालिया तेजी के बावजूद सोना और चांदी अपने ऑल-टाइम हाई लेवल से अब भी काफी रियायती दरों पर उपलब्ध हैं। खास तौर पर चांदी की बात करें तो यह अपने जीवनकाल के उच्चतम स्तर से अभी भी 1.67 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती मिल रही है, जो खरीदारों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। बाजार के आंकड़ों पर गौर करें तो चांदी की कीमतों में बीते सप्ताह जबरदस्त रिकवरी दर्ज की गई है। हफ्ते भर के भीतर चांदी 8,584 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हुई है। 13 फरवरी को जहां चांदी 2,44,360 रुपये पर बंद हुई थी, वहीं शुक्रवार तक यह उछलकर 2,52,944 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, यदि हम इसकी तुलना 29 जनवरी के उस ऐतिहासिक दिन से करें जब चांदी ने पहली बार 4 लाख का आंकड़ा पार करते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलो का “लाइफ टाइम हाई” छुआ था, तो मौजूदा भाव अब भी 1,67,104 रुपये प्रति किलोग्राम कम है। चांदी की कीमतों में आया यह “क्रैश” उन लोगों के लिए मुफीद है जो लंबी अवधि के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं। चांदी की ही राह पर चलते हुए सोने ने भी बीते सप्ताह अपनी चमक बिखेरी है। एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना हफ्ते भर में 981 रुपये महंगा होकर 1,56,876 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। सोने की कहानी भी चांदी जैसी ही है; बीते महीने 29 जनवरी को सोना भागते हुए 1,93,096 रुपये के शिखर पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद आई भारी गिरावट की वजह से यह अब भी अपने हाई लेवल से लगभग 36,220 रुपये सस्ता बना हुआ है। घरेलू बाजार की बात करें तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट के अनुसार, शुद्धता के आधार पर सोने की कीमतों में भी बदलाव आया है। वर्तमान में 24 कैरेट गोल्ड का रेट 1,55,066 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है। वहीं, आभूषणों के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,51,340 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। इसके अलावा, 20 कैरेट सोने का रेट 1,38,010 रुपये और 18 कैरेट का भाव 1,25,600 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह हालिया रिकवरी वैश्विक अनिश्चितताओं का परिणाम हो सकती है, लेकिन हाई लेवल से भारी गिरावट के कारण अभी भी बाजार में खरीदारी का माहौल बना हुआ है।