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निवेशकों के लिए सुनहरा सप्ताह: 23 फरवरी से 9 IPO की बहार, 4 कंपनियों की होगी लिस्टिंग

नई दिल्ली। प्राइमरी मार्केट में अगले सप्ताह जबरदस्त हलचल देखने को मिलेगी। 23 फरवरी से शुरू हो रहे कारोबारी सप्ताह में कुल नौ नए आईपीओ निवेश के लिए खुलने जा रहे हैं। इनमें चार मेनबोर्ड सेगमेंट के बड़े इश्यू शामिल हैं, जबकि शेष SME प्लेटफॉर्म से हैं। इसके साथ ही दो पहले से खुले आईपीओ में भी निवेश का मौका रहेगा। इतना ही नहीं, 24 से 27 फरवरी के बीच चार कंपनियां शेयर बाजार में डेब्यू करने वाली हैं, जिससे बाजार में उत्साह और बढ़ेगा।मेनबोर्ड में बड़े दांव, निवेशकों की नजरें टिकीं 23 फरवरी को ₹3100 करोड़ का बड़ा इश्यू लेकर Clean Max Enviro Energy Solutions बाजार में उतरेगी। इसका प्राइस बैंड ₹1000-₹1053 प्रति शेयर तय है और 14 शेयरों के लॉट में आवेदन किया जा सकेगा। इसी दिन Shree Ram Twistex का ₹110.24 करोड़ का आईपीओ खुलेगा, जिसका प्राइस बैंड ₹95-₹104 है। 24 फरवरी को ज्वेलरी सेक्टर की कंपनी PNGS Reva Diamond Jewellery ₹380 करोड़ का इश्यू लेकर आएगी। इसका प्राइस बैंड ₹367-₹386 प्रति शेयर है। वहीं 25 फरवरी से Omnitech Engineering का ₹583 करोड़ का आईपीओ खुलेगा, जो 27 फरवरी तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा। इन कंपनियों की संभावित लिस्टिंग क्रमशः 2, 4 और 5 मार्च को बीएसई और एनएसई पर हो सकती है। SME सेगमेंट में भी रौनक SME प्लेटफॉर्म पर भी गतिविधियां तेज रहेंगी। Kiaasa Retail 23 से 25 फरवरी के बीच ₹69.72 करोड़ जुटाने की योजना के साथ आएगी। इसी अवधि में Mobilise App और Accord Transformer & Switchgear के इश्यू खुलेंगे। 25 फरवरी से Yaap Digital और 26 फरवरी से Striders Impex का पब्लिक इश्यू निवेशकों के लिए उपलब्ध रहेगा। इन सभी कंपनियों की लिस्टिंग मार्च के पहले सप्ताह में BSE SME या NSE SME प्लेटफॉर्म पर संभावित है।पहले से खुले इश्यू और लिस्टिंग पर नजर 20 फरवरी से खुले Gaudium IVF के ₹165 करोड़ के आईपीओ को अब तक लगभग 90 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन मिल चुका है। वहीं Manilam Industries का ₹39.95 करोड़ का इश्यू अपेक्षाकृत धीमा रहा है। दोनों की संभावित लिस्टिंग 27 फरवरी को हो सकती है। 24 फरवरी को Fractal Industries और 25 फरवरी को Yashhtej Industries (India) की बाजार में एंट्री संभावित है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कर्ज की स्थिति और वैल्यूएशन का आकलन जरूर करें, क्योंकि शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। 23 फरवरी से शुरू हो रहे सप्ताह में नौ नए आईपीओ और चार लिस्टिंग के साथ प्राइमरी मार्केट में जबरदस्त हलचल रहेगी। निवेशकों के लिए अवसर तो भरपूर हैं, लेकिन समझदारी से निर्णय लेना जरूरी होगा।

कीमती धातुओं में आग, 2026 में अब तक सोना 22 हजार और चांदी 20 हजार महंगी

नई दिल्ली।देश के सर्राफा बाजार में इस सप्ताह कीमती धातुओं में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है ताजा आंकड़ों के अनुसार सोना 2300 रुपये उछलकर 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है जो पिछले सप्ताह 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था वहीं चांदी 2.42 लाख रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.50 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है यानी केवल एक सप्ताह में 8000 रुपये की मजबूती दर्ज की गई 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में लगभग 22000 रुपये और चांदी में करीब 20000 रुपये की वृद्धि हो चुकी है वर्ष के दौरान कीमतों में उतार चढ़ाव जरूर रहा लेकिन समग्र रुझान तेजी का बना हुआ है 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था हालांकि उसके बाद कुछ मुनाफावसूली देखी गई विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता मुद्रा विनिमय दरों में उतार चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने सोने और चांदी को सहारा दिया है अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल और भू राजनीतिक तनाव भी कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित कर रहे हैं निवेशक अस्थिर बाजार परिस्थितियों में सोने को सुरक्षित विकल्प के रूप में देख रहे हैं अगर पिछले वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो 2025 में सोने की कीमत में 57000 रुपये यानी लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोना 76000 रुपये प्रति 10 ग्राम था जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 1.33 लाख रुपये पर पहुंच गया इसी अवधि में चांदी 86000 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.30 लाख रुपये प्रति किलो हो गई जो लगभग 167 प्रतिशत की तेजी दर्शाती है बाजार जानकारों का कहना है कि खुदरा खरीदारों को ऊंची कीमतों के इस दौर में सतर्कता बरतनी चाहिए खरीदारी से पहले शुद्धता और पारदर्शिता की जांच बेहद जरूरी है उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे केवल Bureau of Indian Standards द्वारा प्रमाणित हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें जिससे शुद्धता सुनिश्चित हो सके इसके अलावा दैनिक दरों की पुष्टि के लिए India Bullion and Jewellers Association जैसे विश्वसनीय स्रोतों से मिलान करना बेहतर माना जाता है विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आगे के महीनों में अंतरराष्ट्रीय संकेतकों के आधार पर कीमतों में और उतार चढ़ाव संभव है ऐसे में निवेशकों को लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए और केवल अफवाहों के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए

1 अप्रैल 2026 से हाईवे टोल पर कैश पूरी तरह बंद, केवल FASTag और UPI से होगा भुगतान

नई दिल्ली।देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए 1 अप्रैल 2026 से बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है National Highways Authority of India ने सभी राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी शुरू कर दी है नई व्यवस्था लागू होने के बाद टोल शुल्क केवल FASTag या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ही स्वीकार किया जाएगा अधिकारियों के अनुसार देशभर में 1150 से अधिक टोल प्लाजा पर पहले से इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली लागू है जिसे अब पूर्ण रूप से अनिवार्य किया जाएगा इस फैसले का उद्देश्य टोल संचालन को अधिक पारदर्शी बनाना और ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करना है NHAI का कहना है कि नकद भुगतान के कारण टोल प्लाजा पर पीक ऑवर्स में लंबी कतारें लग जाती हैं छुट्टे पैसों को लेकर होने वाले विवाद और मैन्युअल एंट्री की प्रक्रिया यातायात की रफ्तार को धीमा कर देती है डिजिटल भुगतान अनिवार्य होने से वाहनों की आवाजाही तेज होगी और यात्रा समय में कमी आएगी आंकड़ों के मुताबिक देश में 98 प्रतिशत से अधिक वाहनों में FASTag पहले से लगा हुआ है वर्तमान नियमों के तहत यदि कोई वाहन बिना सक्रिय FASTag के टोल लेन में प्रवेश करता है तो उससे दोगुना शुल्क वसूला जाता है डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पहले से ही कई प्रावधान लागू हैं अब इसे पूरी तरह अनिवार्य बनाकर नकद लेनदेन को समाप्त किया जाएगा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है पूरी तरह डिजिटल टोल प्रणाली से डेटा प्रबंधन अधिक सटीक होगा राजस्व लीकेज पर नियंत्रण लगेगा और राजमार्ग संचालन की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी इससे परिवहन क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ेंगी हालांकि कुछ वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट संगठनों ने ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल भुगतान साक्षरता को लेकर चिंता जताई है उनका कहना है कि दूरदराज इलाकों में नेटवर्क की समस्या के कारण भुगतान में दिक्कत आ सकती है इस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संक्रमण काल में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और उपयोगकर्ताओं को नई प्रणाली के अनुकूल बनाया जाएगा सरकार का मानना है कि हाईवे नेटवर्क को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने के लिए यह आवश्यक कदम है आने वाले समय में टोल संग्रह की प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड और डेटा आधारित होगी जिससे यात्रा अनुभव बेहतर और सुगम बनेगा

टैरिफ वॉर और कमजोर अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने सोने को बनाया सुरक्षित निवेश, दिल्ली-मुंबई-इंदौर में रिकॉर्ड रेट्स

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने की कीमतों ने निवेशकों को चौका दिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने वैश्विक सर्राफा बाजार में भूचाल ला दिया शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दिया और रद्द कर दिया इसके जवाब में ट्रंप ने पूरी दुनिया पर 10% का नया ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की इस राजनीतिक उठापटक के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने की ओर बढ़ गए अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में 1.5% से अधिक तेजी देखी गई स्पॉट गोल्ड $5071.48 प्रति औंस पर पहुंच गया जबकि गोल्ड फ्यूचर्स अप्रैल डिलीवरी 1.7% की बढ़त के साथ $5080.90 पर बंद हुआ इस तेजी को अमेरिकी चौथी तिमाही जीडीपी 1.4% में गिरने के आंकड़े से भी समर्थन मिला जो अनुमानित 3% से काफी कम था सरकारी शटडाउन और कम उपभोक्ता खर्च ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गति धीमी कर दी भारत में भी सोने के दाम मजबूती दिखा रहे हैं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज MCX पर अप्रैल का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट ₹156993 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन IBJA के अनुसार 24 कैरेट सोना ₹155066, 23 कैरेट ₹154445, 22 कैरेट ₹142040, 18 कैरेट ₹116300 और 14 कैरेट ₹90714 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है शहरवार सोने के भाव भी उभरे दिल्ली में 24 कैरेट ₹157520 और 22 कैरेट ₹144400 मुंबई में 24 कैरेट ₹157370 और 22 कैरेट ₹144250 इंदौर में 24 कैरेट ₹157420 और 22 कैरेट ₹144300 रिकॉर्ड किए गए निवेशकों का रुझान सुरक्षित धातु की ओर बढ़ गया है स्वतंत्र धातु व्यापारी ताई वोंग का मानना है कि ट्रंप हार मानने वालों में से नहीं हैं वे टैरिफ फिर से लगाने के अन्य कानूनी रास्तों की तलाश करेंगे इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद वॉल स्ट्रीट के प्रमुख स्टॉक इंडेक्स में उछाल देखा गया लेकिन सोने की चमक आर्थिक अनिश्चितता के कारण बरकरार है विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक टैरिफ विवाद, अमेरिकी आर्थिक धीमी गति और सुरक्षित निवेश की मांग ने सोने की कीमतों को मजबूती दी निवेशक इस समय किसी भी जोखिम से बचने के लिए सोने और अन्य कीमती धातुओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं यह प्रवृत्ति आने वाले हफ्तों में भी जारी रहने की संभावना है अंतरराष्ट्रीय भूचाल और अमेरिकी कोर्ट फैसले के बाद सोने की कीमतों में तेजी न सिर्फ निवेशकों बल्कि घरेलू खरीदारों के लिए भी संकेत है इस दौर में सोने का बाजार लगातार अपडेट हो रहा है और शहरवार रेट्स निवेशकों के लिए मार्गदर्शन का काम कर रहे हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति ने धारा 122 के तहत टैरिफ लगाया, 150 दिनों के लिए आयात शुल्क लागू

नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आयातित वस्तुओं के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लगाने का आदेश दिया है यह आदेश 24 फरवरी से प्रभावी होगा और 150 दिनों तक लागू रहेगा इस टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार घाटे और अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं को संबोधित करना है धारा 122 क्या है और इसे क्यों लागू किया गयाट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 राष्ट्रपति को अधिकार देती है कि वे सरचार्ज और विशेष आयात प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय भुगतान संकटों का समाधान कर सकें इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति औपचारिक जांच की आवश्यकता के बिना त्वरित कार्रवाई कर सकते हैं कौन-कौन सी वस्तुएं टैरिफ से मुक्त रहेंगीव्हाइट हाउस की फैक्टशीट के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण वस्तुएं टैरिफ से मुक्त रहेंगी इनमें खनिज, मुद्रा और बुलियन धातुएं, ऊर्जा और ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक, कुछ कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और उनका कच्चा माल, इलेक्ट्रॉनिक्स, यात्री वाहन और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को दिए गए निर्देशराष्ट्रपति ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को धारा 301 के तहत निर्देश दिया है कि वे उन देशों की जांच करें जिनकी नीतियां और कानून अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा रही हैं या भेदभाव कर रहे हैं इस कदम का मकसद अनुचित व्यापार प्रथाओं का विरोध करना और अमेरिकी कंपनियों को सुरक्षित रखना है अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और आगे की संभावनाएँराष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार अमेरिका को व्यापार घाटे और घरेलू उत्पादन में कमी के कारण अपनी अधिकांश वस्तुएं आयात करनी पड़ती हैं जिससे अमेरिकी डॉलर विदेशों में चले जाते हैं टैरिफ 150 दिनों के बाद अपने आप समाप्त हो जाएगा लेकिन यदि आवश्यक हुआ तो राष्ट्रपति नई भुगतान संतुलन आपातकाल की घोषणा कर इसे फिर से लागू कर सकते हैं विशेषज्ञों की रायव्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि धारा 122 के तहत टैरिफ लगाना अन्य व्यापार कानूनों की तुलना में तेज और अधिक प्रभावी है क्योंकि इसके लिए लंबी औपचारिक जांच की आवश्यकता नहीं होती यह अमेरिकी व्यापार हितों की रक्षा के लिए तात्कालिक कदम उठाने की अनुमति देता हैट्रंप प्रशासन का यह कदम अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति को मजबूत करने और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है हालांकि इसके प्रभाव और प्रतिक्रिया दुनिया भर में निगरानी के दायरे में रहेंगे

RBI का बड़ा ऐलान… साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को मिलेगा 25000 रुपये तक मुआवजा

नई दिल्ली। साइबर फ्रॉड (Cyber ​​fraud) के शिकार लोगों को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की ओर से थोड़ी राहत मिलने वाली है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने डिजिटल फ्रॉड में हो रही बढ़ोतरी के बीच ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के लिए 25,000 रुपये तक की मुआवजा देने की घोषणा की। आइए जानते हैं कि ये मुआवजा किसे और कैसे मिलेगा। किस तरह के पीड़ित को मिलेगा मुआवजा?साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को 25,000 रुपये का मुआवजा उन मामलों में भी दिया जाएगा जहां ग्राहक गलती से अपना वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) धोखेबाजों के साथ साझा कर देते हैं। मतलब ये कि अगर आपने गलती से स्कैमर को ओटीपी शेयर कर दिया है और आपके बैंक से पैसे कट गए हैं तो आप इस स्कीम का लाभ लेने के लिए योग्य हैं। सिर्फ एक बार ही लाभरिजर्व बैंक के गवर्नर ने स्पष्ट किया था कि पीड़ित को जीवन में केवल एक बार ही मुआवजा मिलेगा। कहने का मतलब है कि अगर आपके साथ बार-बार साइबर फ्रॉड होता है तो इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा। आरबीआई अधिकारियों के मुताबिक डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में दो-तिहाई मामले 50,000 रुपये से कम के हैं। धोखाधड़ी से प्रभावित लोगों में से ज्यादातर को इस सुविधा से लाभ होगा। कैल्कुलेशन पर गौर करें तो धोखाधड़ी की राशि में से 15 प्रतिशत का नुकसान ग्राहक को उठाना होगा और 15 प्रतिशत का नुकसान संबंधित बैंक उठाएगा। शेष 70 प्रतिशत राशि केंद्रीय रिजर्व बैंक देगा। हालांकि किसी भी स्थिति में ग्राहक को 25,000 रुपये से अधिक का हर्जाना नहीं मिलेगा। आरबीआई 70 प्रतिशत नुकसान की भरपाई के लिए अपनी सरप्लस आय का इस्तेमाल करेगा। गर्वनर के मुताबिक इसके लिए केंद्रीय बैंक के पास पर्याप्त पैसा है। हालांकि, इस योजना का फ्रेमवर्क अभी तैयार नहीं है। साइबर फ्रॉड से कैचे बचेसाइबर फ्रॉड से बचाव के लिए जरूरी है कि OTP, पासवर्ड, PIN, CVV कभी किसी को न बताएं। अनजान लिंक / QR कोड पर क्लिक / स्कैन न करें । मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखें और 2FA (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) जरूर चालू करें। UPI और बैंकिंग में सावधानी पेमेंट से पहले हमेशा रिसीवर का नाम चेक करें। बैंक ऐप से ही ट्रांजेक्शन करें। अनजान नंबर से बैंक कॉल आए तो काट दें और खुद बैंक के ऑफिशियल नंबर पर कॉल करें। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें। इसके अलावा, cybercrime.gov.in पर कंप्लेंट दर्ज करें। वहीं, बैंक को तुरंत बताएं और अकाउंट फ्रीज/ब्लॉक करवाएं। साइबर फ्रॉड के मामले में अपने नजदीकी साइबर थाना जाकर भी आपको शिकायत दर्ज करानी होती है।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार उच्चतम स्तर पर पहुंचा… खजाने में पहली बार आए 725 अरब डॉलर

नई दिल्ली। इकोनॉमी के मोर्चे पर एक अच्छी खबर है। दरअसल, देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Country’s Foreign Exchange Reserves) 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 8.66 अरब डॉलर बढ़कर 725.72 अरब डॉलर के अपने उच्चतम स्तर (Highest Level) पर पहुंच गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का ऑल टाइम हाई है। इससे पहले का सर्वोच्च स्तर जनवरी में 723.774 अरब डॉलर का रहा था। छह फरवरी को समाप्त सप्ताह में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 6.71 अरब डॉलर घटकर 717.06 अरब डॉलर रह गया था। क्या कहते हैं आंकड़े?भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा माने जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 3.55 अरब डॉलर बढ़कर 573.60 अरब डॉलर हो गईं। डॉलर के रूप में व्यक्त की जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में घट-बढ़ के प्रभाव शामिल होते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान स्वर्ण भंडार यानी गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.99 अरब डॉलर बढ़कर 128.46 अरब डॉलर हो गया। केंद्रीय बैंक ने बताया कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 10.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.92 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 1.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.734 अरब डॉलर हो गया। रुपया हुआ कमजोरविदेशी मुद्रा भंडार के ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब रुपया एक बार फिर कमजोर होता नजर आ रहा है। अमेरिका-ईरान के परस्पर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी मुद्रा के मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से शुक्रवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 26 पैसे टूटकर 90.94 पर बंद हुआ। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजार में तेजी का रुख भी रुपये को समर्थन देने में विफल रहा। इस पर अमेरिका और ईरान के बीच आने वाले दिनों में जंग छिड़ने की बनती स्थिति का विशेष प्रभाव रहा। बता दें कि बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया चार पैसे बढ़कर 90.68 पर बंद हुआ था। वहीं, गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के कारण विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार बंद था। इस बीच, विश्व की छह प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.01 प्रतिशत बढ़कर 97.86 पर कारोबार कर रहा था। क्या कहते हैं एक्सपर्ट?मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर के कारण रुपये में गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी घरेलू मुद्रा पर दबाव डाला। हालांकि, घरेलू बाजारों की तेजी ने गिरावट को कम किया। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के मजबूत होने के कारण रुपया थोड़े नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करेगा।

MP ECONOMY: एआई से आर्थिक विकास और सुशासन को सशक्त करेगा मध्यप्रदेश

MP ECONOMY: भोपाल! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार 20 फरवरी को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में शामिल होंगे। समिट में वे उच्च-स्तरीय पैनल से चर्चा करेंगे। इसमें राज्य स्तर पर एआई के उपयोग से आर्थिक विकास को गति देने, डिजिटल सुशासन को सशक्त बनाने और मजबूत अवसंरचना विकसित करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। BHIND HARSH FIRING CASE: भिंड में हर्ष फायरिंग पड़ी महंगी: मासूम को लगी गोली, आरोपी को 5 साल की सजा मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआई कंप्यूटिंग, सायबर सुरक्षा संरचना, क्लाउड इको सिस्टम, जनरेटिव एआई एकीकरण और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी प्रमुख वैश्विक तकनीकी कंपनियों के साथ वन टू वन बैठक भी करेंगे। बैठक में एडवांस्ड सेमीकंडक्टर ऐक्सीलरेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और सॉवरेन एआई मॉडलिंग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव टियर-2 शहरों से उभर रहे स्टार्ट-अप और नव प्रवर्तकों से भी मुलाकात कर उनके एआई आधारित कार्यों की जानकारी लेंगे। थायरॉइड और एंटीबायोटिक दवाओं पर सख्त अलर्ट, Central Drugs Standard Control Organization और Drug Controller General of India ने जारी किए नए निर्देश समिट में मध्यप्रदेश पेवेलियन हॉल 4, प्रथम तल,बूथ संख्या 4F-32 और 4F-34 में “एआई इनेबल्ड गवर्नेंस फॉर ऐन एम्पावर्ड भारत” थीम पर लगाया गया है। इसमें 14 एआई स्टार्ट-अप, आईआईटी इंदौर और आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन जैसे शैक्षणिक संस्थान और 4 प्रमुख शासकीय विभाग शामिल हैं। मध्यप्रदेश पेवेलियन में धरातल पर लागू किए जा चुके एआई समाधान प्रदर्शित किए जा रहे हैं। यह पेवेलियन दर्शाता है कि पारदर्शिता बढ़ाने, सेवाएं समय पर पहुंचाने और बेहतर निर्णय लेने के लिए एआई का उपयोग शासन व्यवस्था में कैसे किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, एमपीएसईडीसी के सहयोग से, इस राष्ट्रीय मंच पर राज्य की योजनाबद्ध और लक्ष्य-आधारित एआई पहलों को प्रस्तुत कर रहा है।

Gold and Silver Prices: US-Iran टेंशन के बीच सुरक्षित निवेश… फिर 3 लाख के पार जा सकते हैं चांदी के दाम

Gold and Silver Prices: नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच बढ़ते तनाव से सोने-चांदी की कीमतों (Gold and Silver Prices) में एक बार फिर उछाल आया है। देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को चांदी जहां 2.6 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई तो सोना 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम की ऊंचाई पर पहुंच गया। यह उछाल वैश्विक रुख तथा अमेरिका एवं ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की मांग में बढ़ोतरी की वजह से आया। अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो चांदी की कीमत (Silver Prices) एक बार फिर से 3 लाख रुपये के पार जा सकती है। वहीं, सोना भी अपने ऑल टाइम हाई के करीब जा सकता है। बता दें कि चांदी की कीमत जनवरी महीने में 4 लाख रुपये के स्तर को पार कर गई थी। 18 हजार रुपये महंगी हुई चांदी स्थानीय बाजार के जानकारों के मुताबिक, चांदी बुधवार के 2,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद स्तर से 18,000 रुपये या 7.32 प्रतिशत बढ़कर 2,64,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 1,950 रुपये या 1.24 प्रतिशत बढ़कर 1,58,650 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गया। पिछले सत्र में यह 1,56,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 1.03 प्रतिशत बढ़कर 77.97 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि सोना थोड़ा बढ़कर 4,991.24 डॉलर प्रति औंस पर था। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सौमिल गांधी ने कहा-ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की बढ़ती अटकलों के बीच भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने के कारण सुरक्षित निवेश परिसंपत्तियों की मांग में नई लहर से समर्थन पाकर सोने की कीमतें बढ़कर लगभग 5,000 डॉलर प्रति औंस हो गईं। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच नई बातचीत के विफल होने से भी वैश्विक अनिश्चितता फिर से बढ़ गई है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों में आवंटन बढ़ा रहे हैं। ऑगमोंट में रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी ने कहा कि निवेशक अमेरिकी जीडीपी और व्यक्तिगत खपत खर्च (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़े सहित मुख्य वृहद आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो आने वाले महीनों में फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की उम्मीदों को आकार दे सकता है। शेयर बाजार में भी कोहराम अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से उपजी चिंताओं के बीच गुरुवार को शेयर बाजार में भी कोहराम रहा। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स तीन सत्रों से जारी तेजी पर विराम लगाते हुए 1,236.11 अंक यानी 1.48 प्रतिशत टूटकर 82,498.14 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 1,470.05 अंक फिसलकर 82,264.20 अंक पर आ गया था। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 365 अंक यानी 1.41 प्रतिशत लुढ़ककर 25,454.35 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी एक समय 430.6 अंक के नुकसान के साथ 25,388.75 अंक तक आ गया था।

AMERICA VS IRAN: US-Iran तनाव का असरः शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट से निवेशकों ने गंवाए 8 लाख करोड़ रुपये…

AMERICA VS IRAN: नई दिल्ली। गुरुवार को सेंसेक्स (Sensex) में 1236 अंक की जोरदार गिरावट (Strong Decline) में निवेशकों के करीब ₹आठ लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। बीएसई (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग ₹464 लाख करोड़ पर आ गया, जो पिछले सत्र में करीब ₹472 लाख करोड़ था। बाजार की यह गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। बीएसई मिडकैप (BSE Midcap) और स्मॉलकैप इंडेक्स (Smallcap Indices) भी आधे प्रतिशत से ज्यादा गिर गए। इससे साफ है कि बिकवाली व्यापक थी। बुधवार को एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी सेना मिलिट्री (US Army Military) इस सप्ताहांत ही ईरान (Iran) पर हमला करने वाली है। बताया गया कि ईरान पर अमेरिकी हमला शायद एक ‘बड़ा, हफ्तों तक चलने वाला अभियान’ होगा जो सीमित हमले के बजाय पूरे युद्ध जैसा होगा। बाजार अमेरिका-ईरान रिश्तों से जुड़े घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है। जानकारों का कहना है कि निवेश तनाव के और बढ़ने की उम्मीद में बाजार से रकम निकाल रहे हैं। विदेशी हिस्सेदारी 15 साल के निचले स्तर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कुछ महीनों में एनएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों से रिकॉर्ड 18.9 अरब डॉलर यानी लगभग ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक निकाल लिया है, जिससे उनका कुल स्वामित्व पिछले 15.5 वर्षों के सबसे निचले स्तर 16.7% पर पहुंच गया है। इस गिरावट का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखा। निफ्टी 50 में एफपीआई का हिस्सा 23.8% तक गिर गया, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम रहा। आईटी कंपनियों से हाथ खींचे फरवरी के पहले छह महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय आईटी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लगभग ₹11,000 करोड़ के शेयर बेचे, क्योंकि इस सेक्टर में एआई से पैदा होने वाली चुनौतियों को लेकर चिंता बढ़ रही थी। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के मुताबिक, एक से 15 फरवरी के बीच एफपीआई ने भारतीय आईटी शेयरों में ₹10,956 करोड़ के शेयर बेचे। इससे पहले जनवरी 2026 में एफपीआई ने आईटी सेक्टर से ₹1,835 करोड़ निकाले थे। इस वजह से, 15 फरवरी, 2026 तक आईटी शेयरों में कुल एफपीआई निवेश लगभग 16% घटकर ₹4,48,938 करोड़ रह गया, जो जनवरी के आखिर में ₹5,33,953 करोड़ था। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने संभाला मोर्चा एफपीआई की निरंतर निकासी के बीच, घरेलू संस्थागत निवेशकों जैसे म्यूचुअल फंड, बैंकों, बीमा कंपनियों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी में तेजी बनाई रखी। घरेलू बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों का कुल हिस्सा अब 19% तक पहुच गया है, जो एफपीआई से अधिक है। इस दौरान म्यूचुअल फंड्स की होल्डिंग्स 11.1% के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंची हैं। यह प्रवाह मुख्यतः एसआईपी यानी सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये मजबूत निवेश और घरेलू संस्थानों की निरंतर खरीद के कारण रहा है। ऐसे माहौल में शेयर खरीदने कितना सही? जानकारों के मुताबिक, निफ्टी इस समय वित्त वर्ष 27 की अनुमानित कमाई के करीब 20 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि एनएसई मिडकैप इंडेक्स 28 गुना और स्मॉलकैप इंडेक्स 24 गुना के आसपास है। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में यह स्टॉक पिकर का बाजार बन जाता है, जहां सही शेयर चुनना ही असली खेल है। 1. प्रॉफिट-बुकिंग के कारण बिकवाली हाल के तेजी के बाद निवेशक मुनाफा सुरक्षित करने के लिए शेयर बेच रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा है। 2. वैश्विक संकेत कमजोर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के कमजोर रुख और अस्थिरता के कारण विदेशी निवेशक सतर्क हैं, जिससे भारतीय बाजार में बिकवाली बढ़ी। 3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें तेल की बढ़ती कीमतों से लागत और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है, जो निवेशकों के मनोबल को कमजोर करता है। 4. प्रमुख शेयरों में भारी गिरावट बैंक, वित्तीय सेवाएँ, मेटल, एफएमसीजी जैसे बड़े समूहों के शेयरों में बिकवाली से इंडेक्स को बड़ी चोट लग रही है। 5. वैश्विक नीतिगत अनिश्चितता यूएस फेडरल रिज़र्व की नीति समेत ग्लोबल नीतिगत असमंजस ने विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रभावित किया है। 6. बाजार में व्यापक मंदी मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी गिरावट के साथ व्यापक बिकवाली देखने को मिल रही है।