चांदी ₹6,667 लुढ़की, ₹2.34 लाख पर आई; सोना ₹2,903 गिरकर ₹1.51 लाख, 4 दिन में बड़ी गिरावट

नई दिल्ली । सोना-चांदी की कीमतों में आज 17 फरवरी को लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। India Bullion and Jewellers Association IBJA के अनुसार, एक किलो चांदी 6,667 रुपए गिरकर ₹2.34 लाख पर आ गई है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,903 रुपए सस्ता होकर ₹1.51 लाख पर पहुंच गया है। पिछले चार कारोबारी दिनों में चांदी की कीमत में कुल ₹32 हजार की गिरावट आई है। 29 जनवरी को चांदी ने ₹3.86 लाख प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था। तब से अब तक इसमें ₹1.51 लाख की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। सोना भी दबाव में है। चार दिनों में यह करीब ₹6 हजार सस्ता हुआ है। 29 जनवरी को 10 ग्राम सोना ₹1.76 लाख के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, जो अब तक ₹25 हजार तक टूट चुका है। हालांकि साल 2025 के पूरे आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर अलग दिखती है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹76 हजार था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹1.33 लाख हो गयायानी सालभर में ₹57 हजार करीब 75% की तेजी। इसी अवधि में चांदी ₹86 हजार प्रति किलो से बढ़कर ₹2.30 लाख हो गई, यानी ₹1.44 लाख करीब 167% की उछाल। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों? ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी लागत: आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ईंधन और सुरक्षा खर्च बढ़ता है, जिससे स्थानीय रेट प्रभावित होते हैं। खपत और बल्क खरीद: दक्षिण भारत में करीब 40% खपत होने से ज्वेलर्स बड़ी मात्रा में खरीद करते हैं, जिससे उन्हें छूट मिलती है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य के अपने एसोसिएशन होते हैं, जो मांग-सप्लाई के आधार पर स्थानीय रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक: ज्वेलर्स ने स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, इसका असर भी बिक्री मूल्य पर पड़ता है। सोना खरीदते समय रखें ध्यान हमेशा Bureau of Indian Standards BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। खरीद से पहले IBJA या अन्य विश्वसनीय स्रोतों से रेट क्रॉस-चेक करें। असली चांदी की पहचान के तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती। आइस टेस्ट: असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली चांदी में कोई गंध नहीं होती। क्लॉथ टेस्ट: सफेद कपड़े से रगड़ने पर काला निशान आना शुद्धता का संकेत हो सकता है। इसी बीच Morgan Stanley की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में करीब 34,600 टन सोना जमा है, जिसकी कुल वैल्यू देश की GDP से भी ज्यादा आंकी गई है।
Gold: सबसे सुरक्षित निवेश…. Gen-G का सोने के प्रति बढ़ा क्रेज, म्यूचुअल फंड-क्रिप्टो से मोहभंग

नई दिल्ली। देश की युवा पीढ़ी (Young Generation) के बीच सोने के प्रति क्रेज तेजी (Increasing Craze Gold ) से बढ़ रहा है। एक हालिया सर्वे के अनुसार जेन-जी (Gen-G ) और मिलेनियल वर्ग (Millennials) के करीब 62 प्रतिशत लोग सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं। जबकि म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर मार्केट और क्रिप्टो जैसे विकल्प पीछे रह गए हैं। यह सर्वे 18 से 39 साल के 5,000 से अधिक युवाओं से बीच किया गया। रिपोर्ट बताती है कि सोने पर भरोसा अब भी कायम है, लेकिन खरीदने का तरीका बदल रहा है। अब युवा पारंपरिक पारिवारिक फैसलों के बजाय खुद छोटी-छोटी रकम से सोना खरीद रहे हैं। यह रुझान दर्शाता है कि आर्थिक अनिश्चितता और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच युवा वर्ग सोने को सुरक्षित ठिकाना मान रहा है। क्या दिखा सर्वे मेंसर्वे के मुताबिक, अगर आज 25,000 रुपये निवेश करने हों, तो 61.9% युवा सोना चुनेंगे। इसके मुकाबले म्यूचुअल फंड को 16.6%, एफडी को 13%, शेयर बाजार को 6.6% और क्रिप्टो को सिर्फ 1.9% लोगों ने प्राथमिकता दी। लोगों का कहना है कि बैंक बचत, म्यूचुअल फंड या इक्विटी की तुलना में सोना उन्हें सबसे सुरक्षित विकल्प लगता है। सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 65 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि जब अर्थव्यवस्था में अस्थिरता होती है, तब सोना सबसे सुरक्षित निवेश साबित होता है। खरीदने का तरीका बदलाखास बात यह है कि अब सोना खरीदने का तरीका भी बदल रहा है। अधिकांश युवाओं ने बताया कि उन्होंने हाल में पांच ग्राम से कम सोना खरीदा। इससे संकेत मिलता है कि युवा छोटी-छोटी मात्रा में नियमित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, न कि एकमुश्त बड़ी खरीदारी की ओर। इसका मतलब है कि सोना अब सिर्फ शादी-ब्याह तक सीमित नहीं रह गया है। यह शुरुआती कमाई से जुड़ा एक लचीला बचत विकल्प बन गया है। खुद फैसले लेने का ट्रेंड बढ़ाएक और महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि लगभग दो-तिहाई युवाओं ने कहा कि सोना खरीदने का फैसला वे खुद लेते हैं। सर्वे में शामिल 42.3% लोगों ने कहा कि घर में हालिया सोना खरीदने की शुरुआत उन्होंने खुद की, जबकि 40% ने माना कि माता-पिता या बड़े सदस्यों की भूमिका रही। जेन जी में ज्यादा आत्मनिर्भरता दिखी है। वहीं मिलेनियल अब भी सोने को परिवार की लंबी सुरक्षा से जोड़कर देखते हैं। पहला वेतन मिलते ही खरीदा सोनासर्वे के परिणाम बताते हैं कि पहला वेतन या शुरुआती आय मिलने के बाद बहुत से युवा इसे सोने में निवेश के रूप में खरीदते हैं। लगभग 24.3% ने कहा कि पहला वेतन मिलते ही उन्होंने सोना खरीदा। जबकि 23.9% ने इसे निवेश विकल्प के रूप में लिया। इससे यह भी पता चलता है कि युवा अब सोने को केवल आभूषण की तरह नहीं देखते, बल्कि निवेश का बेहतरीन विकल्प मान रहे हैं। सोना पहली पसंदसोना — 61.9%म्यूचुअल फंड — 16.6%फिक्स्ड डिपॉजिट — 13%इक्विटी शेयर — 6.6%क्रिप्टो — 1.9%
Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में आज फिर गिरावट; चांदी 4000 रुपये फिसली, शादी सीजन में मिली राहत

Gold Silver Price Today: घरेलू फ्यूचर मार्केट में मंगलवार, 17 फरवरी को सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 2 अप्रैल, 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा मंगलवार को 1,53,551 रुपये (प्रति 10 ग्राम) पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1,54,760 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था. 17 फरवरी की सुबह करीब 9:50 बजे, एमसीएक्स पर 2 अप्रैल का एक्सपायरी वाला गोल्ड 0.70 प्रतिशत या करीब 1100 रुपये की गिरावट के साथ 1,53,680 रुपए पर ट्रेड कर रहा था. गोल्ड फ्यूचर वायदा शुरुआती कारोबार में 1,53,959 रुपए के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं प्रमुख शहरों में सोना-चांदी का ताजा भाव… चांदी की कीमत एमसीएक्स पर 5 मार्च 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 1.33 फीसदी या 3,200 रुपये की गिरावट के साथ 2,36,700 रुपये (प्रति किलो) पर ट्रेड कर रहा था. चांदी ने कारोबारी दिन की शुरुआत 2,35,207 रुपये पर की थी. दिन के कारोबार के दौरान चांदी का हाई लेवल 2,37,720 रुपये था. दिल्ली, मंबई, कोलकाता और चेन्नई में चांदी के दाम गिर गए है. दिल्ली और मुंबई में 10 ग्राम चांदी आज 2,600 रुपये की दर पर बिक रहा है. वहीं, 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 26,000 रुपये खर्च करने होंगे. चेन्नई में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,650 रुपये चल रही है. आपके शहर में सोने का भाव (गुड रिटर्न के अनुसार) दिल्ली में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट – 1,56,580 रुपए22 कैरेट – 1,43,540 रुपए18 कैरेट – 1,17,470 रुपए मुंबई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट – 1,54,910 रुपए22 कैरेट – 1,42,000 रुपए18 कैरेट – 1,16,180 रुपए चेन्नई में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट – 1,57,520 रुपए22 कैरेट – 1,44,390 रुपए18 कैरेट – 1,23,490 रुपए कोलकाता में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट – 1,54,910 रुपए22 कैरेट – 1,42,000 रुपए18 कैरेट – 1,16,180 रुपए अहमदाबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट – 1,56,480 रुपए22 कैरेट – 1,43,440 रुपए18 कैरेट – 1,17,370 रुपए लखनऊ में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट – 1,56,580 रुपए22 कैरेट – 1,43,540 रुपए18 कैरेट – 1,17,470 रुपए पटना में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट – 1,56,480 रुपए22 कैरेट – 1,43,440 रुपए18 कैरेट – 1,17,370 रुपए गुड रिटर्न के अनुसार प्रति 10 ग्राम सोने का भाव इस प्रकार है: दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,56,580 रुपये, 22 कैरेट 1,43,540 रुपये और 18 कैरेट 1,17,470 रुपये पर है। मुंबई में 24 कैरेट 1,54,910 रुपये, 22 कैरेट 1,42,000 रुपये और 18 कैरेट 1,16,180 रुपये पर बिक रहा है। चेन्नई में 24 कैरेट सोना 1,57,520 रुपये, 22 कैरेट 1,44,390 रुपये और 18 कैरेट 1,23,490 रुपये है। कोलकाता में 24 कैरेट 1,54,910 रुपये, 22 कैरेट 1,42,000 रुपये और 18 कैरेट 1,16,180 रुपये दर्ज किया गया है। अहमदाबाद में 24 कैरेट 1,56,480 रुपये, 22 कैरेट 1,43,440 रुपये और 18 कैरेट 1,17,370 रुपये है। लखनऊ में 24 कैरेट 1,56,580 रुपये, 22 कैरेट 1,43,540 रुपये और 18 कैरेट 1,17,470 रुपये है। पटना में 24 कैरेट 1,56,480 रुपये, 22 कैरेट 1,43,440 रुपये और 18 कैरेट 1,17,370 रुपये है, जबकि हैदराबाद में 24 कैरेट 1,54,910 रुपये, 22 कैरेट 1,42,000 रुपये और 18 कैरेट 1,16,180 रुपये पर सोना बिक रहा है।हैदराबाद में सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम) 24 कैरेट – 1,54,910 रुपए22 कैरेट – 1,42,000 रुपए18 कैरेट – 1,16,180 रुपए
जब कीमतें आसमान थी,,, सोने ने तोड़ डाले आयात के सभी रिकॉर्ड, व्यापार घाटा भी बढ़ा

नई दिल्ली। जनवरी में जब सोने-चांदी की कीमतें (Gold and Silver Prices) आसमान पर थी सोने के आयात (Gold Import) ने तो सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए, जो पिछले साल जनवरी के 2.66 अरब डॉलर के मुकाबले इस बार 350 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर पर पहुंच गया। दूसरी ओर, इसने भारत के व्यापार घाटे (Trade Deficits) पर बड़ा इंपैक्ट डाला। भारत का व्यापार घाटा जनवरी 2026 में बढ़कर 35 अरब डॉलर हो गया है। यह आंकड़ा दिसंबर में दर्ज 24 अरब डॉलर से कहीं अधिक है। सोने की चमक ने बढ़ाई व्यापार घाटे की टेंशनसोने का आयात भारत के व्यापार घाटे में उतार-चढ़ाव की एक अहम वजह बनकर उभरा है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से साफ होता है कि बढ़ती सोने की कीमतों ने आयात बिल को काफी प्रभावित किया है। पिछले छह वर्षों में सोने के आयात मूल्य में 76 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 2018-19 में 32.9 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 58.0 अरब डॉलर हो गया। आयात की मात्रा घटी, बिल बढ़ाहैरानी की बात यह है कि इस दौरान आयात की मात्रा में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो 982.7 टन से घटकर 757.1 टन रह गई। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है, जहां कीमतों में बढ़ोतरी आयात बिल बढ़ाने की मुख्य वजह है, न कि ज्यादा खपत। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान ही सोने का आयात बिल 49.39 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि इस दौरान सिर्फ 474.99 टन सोना आयात किया गया। अप्रैल-जनवरी की अवधि में यह आंकड़ा 61.46 अरब डॉलर हो गया। नवंबर में सोने के आयात के आंकड़ों में भी भारी संशोधन देखने को मिला था, जो शुरुआती 14.8 अरब डॉलर से घटाकर 9.84 अरब डॉलर कर दिया गया था, जो इसकी अस्थिरता को रेखांकित करता है। चांदी के आयात में भी जोरदार उछालसोने के साथ-साथ चांदी के आयात ने भी रफ्तार पकड़ी है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-दिसंबर के दौरान चांदी के आयात मूल्य में 128.95 प्रतिशत का उछाल आया है। यह 3.39 अरब डॉलर से बढ़कर 7.77 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसकी वजह आयात की मात्रा में 56.07 प्रतिशत और कीमतों में 46.69 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई जा रही है। अमेरिका और चीन के साथ व्यापारिक रिश्तेटैरिफ के दबाव के बावजूद, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात स्थल बना हुआ है। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के दौरान अमेरिका को निर्यात लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर 72.46 अरब डॉलर रहा। हालांकि, दिसंबर की तुलना में जनवरी में अमेरिका को निर्यात में 4.5 प्रतिशत की गिरावट जरूर आई है। वहीं, चीन भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना हुआ है। अप्रैल-जनवरी के दौरान चीन से आयात 13 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया। सकारात्मक पहलू यह है कि इसी अवधि में चीन को निर्यात में भी 38 प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह 15.88 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
चांदी में गिरावट ₹1,486, सोना बढ़ा ₹1,333; निवेशकों में खरीदारी का रुझान

नई दिल्ली। 16 फरवरी 2026 को चांदी की कीमत में लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन IBJA के अनुसार, एक किलो चांदी 1,486 रुपए सस्ती होकर ₹2,40,947 पर आ गई है। शुक्रवार को यह ₹2,42,433 प्रति किलो था। 18 दिनों में चांदी की कीमत में कुल ₹1,44,986 की गिरावट हो चुकी है। वहीं, सोने में बढ़त देखी गई है। आज 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,333 महंगा होकर ₹1,54,098 पर पहुंच गया। शुक्रवार को सोने का भाव ₹1,52,765 प्रति 10 ग्राम था। पिछले तीन कारोबारी दिनों में सोना ₹3,224 और चांदी ₹25,502 सस्ता हुआ था। 29 जनवरी को सर्राफा बाजार में सोने ने ₹1,76,121 और चांदी ने ₹3,85,933 का ऑल टाइम हाई बनाया था। तब से अब तक सोने की कीमत में ₹22,023 और चांदी में ₹1,44,986 की गिरावट आई है। शहरों में अलग-अलग रेट क्यों? IBJA के रेट्स में 3% GST, ज्वेलर्स का मेकिंग चार्ज और मार्जिन शामिल नहीं होता, इसलिए विभिन्न शहरों में कीमतें अलग हो सकती हैं। RBI सोवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंक गोल्ड लोन के रेट तय करने में इन रेट्स का उपयोग करते हैं। निवेशक खरीदारी में सक्रिय सोने-चांदी में हालिया गिरावट के बाद निवेशक निचले स्तर पर खरीदारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी एकमुश्त निवेश की बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर होगा। सोना खरीदते समय ध्यान रखें: सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें हमेशा BIS हॉलमार्क वाला गोल्ड लें, जो अल्फान्यूमेरिक नंबर जैसे AZ4524 के साथ आता है। कीमत क्रॉस चेक करें खरीद के दिन सही वजन और 24, 22 या 18 कैरेट के हिसाब से कीमत की पुष्टि करें। चांदी और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए अवसर और सावधानी दोनों का संकेत है।
निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाने के लिए SEBI का बड़ा फैसला… बदलेंगे Gold-Silver ETF के नियम

नई दिल्ली। बाजार नियामक सेबी (Market Regulator SEBI) ने सोने और चांदी के ईटीएफ (Gold-Silver ETF) के कारोबारी नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है। इसका मकसद है कि इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव के ज्यादा करीब रहें और निवेशकों को सही भाव पर खरीद-फरोख्त का मौका मिल सके। इससे आम निवेशकों को काफी फायदा होगा और अनचाहा नुकसान होने से बचाव हो सकेगा। दरअसल, दुनियाभर में सोने और चांदी की खरीद-बिक्री 24 घंटे होती है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज में भी इनकी कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो जाती हैं लेकिन भारत में ईटीएफ की खरीद-बिक्री शेयर बाजार के समय मुताबिक सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 बजे तक ही होती है। इस दौरान इनके भाव एक तय सीमा (फिक्स्ड प्राइस बैंड) के भीतर ही घट-बढ़ सकते हैं। इस तय सीमा और समय अंतर की वजह से अक्सर भारतीय ईटीएफ की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से पिछड़ जाती हैं या उनमें बड़ा अंतर आ जाता है। इसके चलते आम निवेशकों को सही दाम पर खरीद-बिक्री नहीं मिल पाती और कई बार बिना वजह नुकसान हो भी जाता है। वर्तमान में सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है जिसकी वजह से निवेशकों को नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। इसके चलते सेबी ने ईटीएफ के कारोबारी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। क्या है नया प्रस्तावसेबी ने अब ‘डायनामिक प्राइस बैंड’ लागू करने का सुझाव दिया है। इसका मतलब यह है कि कीमतों की सीमा बाजार की स्थिति के अनुसार बदली जा सकेगी। शुरुआत में एक तय सीमा रहेगी, लेकिन अगर बाजार में ज्यादा हलचल होती है तो यह दायरा बढ़ाया जा सकेगा। हर बड़े बदलाव के बाद कुछ समय का अंतर भी दिया जाएगा, ताकि बाजार स्थिर हो सके और घबराहट में खरीद-फरोख्त न हो। सेबी ने हाल ही में प्रस्ताव का मसौदा जारी किया है और मार्च 2026 तक लोगों से राय मांगी है, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। निवेशक ऐसे समझें योजना कोप्रस्ताव के मुताबिक, नया दायरा छह फीसदी का होगा। यानी एक दिन में ईटीएफ के भाव छह फीसदी तक ऊपर या नीचे हो सकते हैं। अगर बाजार में तेज हलचल होती है तो इस दायरे को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा और हर बार यह तीन फीसदी तक बढ़ेगा। हर बदलाव के बाद बाजार को स्थिर होने के लिए 15 मिनट का समय दिया जाएगा। एक दिन में कुल दायरा ±20% की सीमा तक जा सकेगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि निवेशक को ईटीएफ की जो कीमत स्क्रीन पर दिखेगी, वह उसकी वास्तविक वैल्यू के करीब होगी। बाजार खुलने से पहले ही तय होगी दिशासेबी ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, जो है ‘प्री-ओपन सेशन’ की शुरुआत। शेयर बाजार की तरह अब गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के लिए भी बाजार खुलने से पहले एक खास सत्र हो सकता है। इसका मकसद यह है कि रातभर में विदेशी बाजारों में जो भी बदलाव हुए हैं, उन्हें भारतीय बाजार खुलने से पहले ही समायोजित कर लिया जाए। इससे सुबह बाजार खुलते ही कीमतों में दिखने वाले भारी गैप को कम किया जा सकेगा और निवेशकों को एक संतुलित शुरुआत मिलेगी।
SIP शुरू करने से पहले समझ लें ये सच्चाई, वरना उम्मीदें बन सकती हैं बोझ

नई दिल्ली। भारतीय निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड का सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) तेजी से लोकप्रिय हुआ है। हर महीने छोटी रकम लगाकर बड़ा फंड बनाने का सपना अब मध्यम वर्ग की वित्तीय रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। आसान प्रक्रिया और ऑटोमैटिक निवेश की सुविधा ने इसे आकर्षक बनाया है, लेकिन इसके साथ कई गलतफहमियां भी जुड़ी हैं। सोशल मीडिया और अधूरी जानकारी के कारण कई निवेशक SIP को “गारंटीड मुनाफे” का जरिया मान बैठते हैं। हकीकत यह है कि SIP बाजार से जुड़ा निवेश है और इसमें जोखिम भी शामिल रहता है। सही जानकारी और संतुलित उम्मीदें ही लंबी अवधि में बेहतर परिणाम दे सकती हैं। तुरंत मोटा रिटर्न नहीं, समय ही असली ताकतकई नए निवेशक यह मान लेते हैं कि SIP शुरू करते ही उन्हें हर साल ऊंचा और स्थिर रिटर्न मिलेगा। कुछ लोग तो इसे जल्दी अमीर बनने का फॉर्मूला समझ लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि SIP कोई जादुई योजना नहीं, बल्कि अनुशासित निवेश की प्रक्रिया है। बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, जिसका असर फंड के प्रदर्शन पर पड़ता है। अगर चुना गया फंड कमजोर है तो नियमित निवेश भी अपेक्षित परिणाम नहीं देगा। आमतौर पर 7 से 15 साल की अवधि में कंपाउंडिंग का असर दिखता है और तब जाकर ठोस ग्रोथ नजर आती है। इसलिए धैर्य और लंबी अवधि की सोच जरूरी है। ज्यादा फंड मतलब ज्यादा फायदा? जरूरी नहींअक्सर निवेशक यह सोचकर कई अलग-अलग म्यूचुअल फंड में SIP शुरू कर देते हैं कि ज्यादा फंड रखने से जोखिम कम होगा और रिटर्न बढ़ेगा। इसी भ्रम में कुछ लोग 8–10 फंड तक जोड़ लेते हैं। लेकिन बहुत अधिक फंड रखने से पोर्टफोलियो जटिल हो जाता है और कई बार एक जैसे सेक्टर या स्टॉक में दोहराव भी हो जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 3 से 5 मजबूत और अलग रणनीति वाले फंड पर्याप्त होते हैं। निवेश लक्ष्य, जोखिम क्षमता और अवधि को ध्यान में रखकर संतुलित पोर्टफोलियो बनाना ज्यादा समझदारी भरा कदम है। जरूरत पड़े तो SIP रोकना भी समझदारीएक और आम मिथक यह है कि SIP को कभी बंद नहीं करना चाहिए। जबकि वास्तविकता यह है कि वित्तीय परिस्थितियां बदल सकती हैं। आय में कमी, आपात स्थिति या लक्ष्य में बदलाव आने पर SIP को रोका या बदला जा सकता है। यह कोई कानूनी अनुबंध नहीं है। यदि कोई फंड लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा हो, तो बेहतर विकल्प में स्विच करना भी सही फैसला हो सकता है। निवेश में लचीलापन बनाए रखना उतना ही जरूरी है जितना अनुशासन।
PPF में गलती से भी न खोलें दूसरा खाता, वरना डूब जाएगा ब्याज! जानिए पूरा नियम

नई दिल्ली। सुरक्षित निवेश की बात हो और Public Provident Fund (PPF) का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। सरकार समर्थित यह योजना न सिर्फ स्थिर और सुरक्षित रिटर्न देती है, बल्कि पुरानी टैक्स व्यवस्था में EEE कैटेगरी के तहत टैक्स छूट का भी लाभ देती है। यही वजह है कि करोड़ों लोग इसमें लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं। लेकिन कई बार ज्यादा फायदा कमाने या अधूरी जानकारी के कारण लोग एक से अधिक PPF खाते खोल लेते हैं—और यहीं से शुरू होती है परेशानी। एक व्यक्ति, एक ही PPF खातापब्लिक प्रॉविडेंट फंड एक्ट, 1968 के अनुसार पूरे देश में एक व्यक्ति अपने नाम पर केवल एक ही PPF खाता रख सकता है, चाहे वह बैंक में हो या पोस्ट ऑफिस में। अगर आपके पास पहले से किसी बैंक में PPF खाता है, तो आप दूसरे बैंक या डाकघर में नया खाता नहीं खोल सकते। नियम सख्त हैं और पूरे भारत में समान रूप से लागू होते हैं। दूसरा खाता खुला तो क्या होगा?यदि किसी ने गलती से दो या अधिक खाते खोल लिए हैं, तो प्राथमिक खाते को छोड़कर बाकी सभी खाते ‘अनियमित’ घोषित कर दिए जाते हैं। ऐसे खातों में जमा रकम पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। अतिरिक्त खातों को या तो बंद करना होगा या वित्त मंत्रालय (NS Branch) की अनुमति से प्राथमिक खाते में मर्ज कराना होगा। यदि मर्ज नहीं कराया गया, तो खाते बंद कर केवल मूल जमा राशि लौटाई जाएगी—बिना किसी ब्याज के। यानी छोटी सी चूक से बड़ा वित्तीय नुकसान संभव है। नाबालिग के लिए अलग नियमPPF में एकमात्र अपवाद नाबालिग बच्चे का खाता है। माता या पिता में से कोई एक 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे के नाम पर खाता खोल सकता है। हालांकि, यहां भी कुल निवेश सीमा लागू होती है। आपके और बच्चे के खाते में मिलाकर एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹1.5 लाख ही जमा किए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि आपने अपने खाते में ₹1 लाख जमा किए हैं, तो बच्चे के खाते में अधिकतम ₹50,000 ही निवेश कर सकते हैं। ब्याज दर, निवेश सीमा और अन्य सुविधाएंवित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के अनुसार PPF पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। न्यूनतम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख सालाना जमा किए जा सकते हैं। खाता 15 साल में मैच्योर होता है और इसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है। 5 वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है और 3 से 6 साल के बीच बैलेंस के आधार पर लोन भी लिया जा सकता है। ज्यादा निवेश के लिए विकल्पअगर आप ₹1.5 लाख से ज्यादा टैक्स बचत चाहते हैं, तो National Pension System (NPS) या बेटी होने पर Sukanya Samriddhi Yojana में निवेश पर विचार कर सकते हैं। PPF में एक व्यक्ति के नाम पर सिर्फ एक ही खाता मान्य है। अतिरिक्त खाता खुलने पर ब्याज का नुकसान तय है, इसलिए निवेश से पहले नियमों की पूरी जानकारी जरूरी है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में दुनिया भर की जबरदस्त भागीदारी, भारत बन रहा जिम्मेदार एआई नवाचार का वैश्विक केंद्र

नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में दुनिया भर से मिली जबरदस्त भागीदारी यह साबित कर रही है कि भारत जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नवाचार का एक उभरता हुआ वैश्विक केंद्र बन रहा है। यह पहल ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ यानी लोगों, पर्यावरण और प्रगति की सोच से प्रेरित है। समिट 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसी समिट से पहले तीन प्रमुख वैश्विक चुनौतियों के फाइनलिस्टों की घोषणा की गई है। ये चुनौतियां हैं- एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवाआई। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार इन चुनौतियों का उद्देश्य ऐसे एआई समाधान तैयार करना था, जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालें और वैश्विक जरूरतों के अनुरूप हों। इन तीनों प्रतियोगिताओं में 60 से अधिक देशों से 4,650 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए। कड़े चयन और कई चरणों की समीक्षा प्रक्रिया के बाद कुल 70 टीमों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया। ये टीमें 16 और 17 फरवरी को भारत मंडपम और सुषमा स्वराज भवन में आयोजित ग्रैंड फिनाले और पुरस्कार समारोह में अपने समाधान पेश करेंगी। एआई फॉर ऑल ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज में अकेले ही 60 देशों से 1,350 से अधिक आवेदन आए। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु, शासन, शिक्षा और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उपयोगी एआई समाधान तैयार करना था। इसमें चुनी गई 20 शीर्ष टीमों ने कई अभिनव तकनीकें विकसित की हैं, जैसे एआई आधारित संक्रमण जांच उपकरण, मिट्टी की गुणवत्ता बताने वाली प्रणाली, जलवायु जोखिम विश्लेषण प्लेटफॉर्म, डिजिटल स्वास्थ्य जांच, साइबर सुरक्षा समाधान, उद्योगों की कार्यक्षमता बढ़ाने वाले टूल और शिक्षा को आसान बनाने वाली तकनीकें। मंत्रालय ने कहा कि ये नवाचार दर्शाते हैं कि एआई कैसे समान विकास को बढ़ावा दे सकता है और खासकर ग्लोबल साउथ देशों में सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बना सकता है। एआई बाय हर ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज में 50 से अधिक देशों से 800 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए। इसका लक्ष्य महिलाओं के नेतृत्व में एआई नवाचार को बढ़ावा देना है। इसमें चुनी गई 30 शीर्ष महिला उद्यमी स्वास्थ्य, टिकाऊ विकास, वित्तीय समावेशन, रोजगार, कृषि, शिक्षा और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान पर काम कर रही हैं। इन परियोजनाओं में कैंसर और आंखों की जांच के लिए एआई, बहुभाषी मेडिकल निर्णय सहायता प्रणाली, वॉयस-टू-ईएमआर प्लेटफॉर्म, पोषण तकनीक, क्रेडिट इंटेलिजेंस सिस्टम और ईएसजी ऑटोमेशन शामिल हैं। सरकार ने कहा कि यह पहल समावेशी डिजिटल विकास की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है और महिलाओं को वैश्विक एआई इकोसिस्टम में अग्रणी भूमिका देने का प्रयास है। समिट 2026 केवल नवाचार के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक सहयोग और समान अवसर के महत्व को भी रेखांकित करता है।
सेंसेक्स-निफ्टी में मचेगा घमासान: अगले हफ्ते आईटी सेक्टर और विदेशी निवेशकों की चाल पर टिकी हैं बाजार की निगाहें, जानें अहम लेवल्स!

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। शुक्रवार13 फरवरी को जब बाजार बंद हुआ, तो चारों तरफ लाल निशान का बोलबाला था। सेंसेक्स1,048 अंक की भारी गिरावट के साथ82,626.76 पर सिमट गया, वहीं निफ्टी ने भी336 अंकों की डुबकी लगाई। इस बिकवाली के पीछे सबसे बड़ा कारणआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर पैदा हुई वैश्विक चिंताएं और कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेत रहे। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या अगले हफ्ते बाजार इस सदमे से उबर पाएगा? बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला सप्ताह16 से 22 फरवरी भारतीय निवेशकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि इसमें घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों पर कई बड़े घटनाक्रम होने जा रहे हैं। अगले हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिकाअमेरिकी फेडरल रिजर्व की होगी।18 फरवरी को फेडरल रिजर्व की हालिया नीति बैठक के मिनट्स जारी होने वाले हैं। दुनिया भर के निवेशक यह जानने को बेताब हैं कि महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अमेरिकी रुख क्या रहने वाला है। इसके साथ ही अमेरिका कीजीडीपी के आंकड़े भी सामने आएंगे, जिसका सीधा असर डॉलर की मजबूती और विदेशी संस्थागत निवेशकों यानीएफआईआई की गतिविधियों पर पड़ेगा। भारतीय संदर्भ में बात करें तो20 फरवरी का दिन काफी अहम है, जबभारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स साझा करेगा। ये मिनट्स यह संकेत देंगे कि भारत में ब्याज दरों की भविष्य की दिशा क्या होगी और क्या आरबीआई ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए कोई नया कदम उठा सकता है। बाजार में इस समय सबसे ज्यादा दबावआईटी सेक्टर पर देखा जा रहा है। पिछले सप्ताह निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब8 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह बाजार का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया।टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज TCS,इंफोसिस औरविप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों के निवेशकों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। इसकी मुख्य वजहजनरेटिव और एजेंटिक एआई तकनीक का तेजी से बढ़ता प्रभाव है। बाजार को डर है कि यह नई तकनीक पारंपरिक आउटसोर्सिंग सेवाओं की मांग को कम कर सकती है, जिससे इन कंपनियों की भविष्य की कमाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अगले सप्ताह भी निवेशकों की नजर इसी बात पर रहेगी कि क्या आईटी शेयरों में कोई सुधार आता है या बिकवाली और गहरी होती है। तकनीकी मोर्चे पर देखें तो निफ्टी के लिए25,300 का स्तर एक बेहद मजबूत सहारा यानी सपोर्ट का काम कर रहा है। यदि निफ्टी इस स्तर से नीचे फिसलता है, तो बाजार में और बड़ी गिरावट की संभावना बढ़ जाएगी। दूसरी ओर,25,700 का स्तर एक बड़ी बाधा यानी रेजिस्टेंस के रूप में सामने खड़ा है। अगर बाजार इस आंकड़े को पार करने में सफल रहता है, तभी हम कह सकते हैं कि तेजी के दिन वापस लौट आए हैं। ब्रोकरेज कंपनियों की सलाह है कि निवेशकों को इस समयस्ट्रिक्ट स्टॉप लॉस के साथ बहुत ही संभलकर कदम उठाना चाहिए और एक सीमित दायरे में रहकर ही ट्रेडिंग की रणनीति बनानी चाहिए। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की चाल भी बहुत मायने रखेगी। हालांकि फरवरी में अब तकएफआईआई ज्यादातर दिनों में शुद्ध खरीदार रहे हैं और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते ने उनके भरोसे को मजबूत किया है, लेकिन एआई से जुड़ी वैश्विक चिंताओं ने उन्हें फिर से सतर्क कर दिया है। साथ ही, सोना और चांदी की कीमतों में आई स्थिरता भी कमोडिटी बाजार के माध्यम से इक्विटी बाजार को प्रभावित कर सकती है। कुल मिलाकर, अगला हफ्ता डेटा, तकनीक और वैश्विक संकेतों का एक मिला-जुला पैकेज लेकर आ रहा है, जो तय करेगा कि क्या भारतीय बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ेगा या गिरावट का यह सिलसिला अभी जारी रहेगा।