सिबिल स्कोर के बिना भी मिल सकेगा लोन, जानिए क्या है सरकार की नई प्लानिंग?

नई दिल्ली । देश में लाखों ऐसे लोग हैं जिन्होंने कभी बैंक से कर्ज नहीं लिया, इसलिए उनका कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है। नतीजा यह होता है कि जब वे पहली बार लोन के लिए आवेदन करते हैं तो सिबिल स्कोर न होने के कारण उन्हें आसानी से मंजूरी नहीं मिलती। अब केंद्र सरकार इस स्थिति को बदलने की तैयारी में है। बिना सिबिल स्कोर के लोन क्या अब लोन लेने के लिए सिबिल स्कोर जरूरी नहीं रहेगा? केंद्र सरकार एक ऐसी नए सिस्टम पर काम कर रही है, जो देश के लाखों लोगों के लिए बैंकिंग के दरवाजे खोल सकती है। खासकर महिलाएं, ग्रामीण आबादी और वे लोग जिन्होंने कभी बैंक से लोन नहीं लिया, उन्हें इस पहल से बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित क्रेडिट स्कोरिंग फ्रेमवर्क विकसित करने पर विचार कर रही है, जिससे बिना पारंपरिक क्रेडिट इतिहास के भी ऋण मिल सके। फिलहाल बैंक किसी भी व्यक्ति को लोन देने से पहले उसका सिबिल स्कोर और क्रेडिट हिस्ट्री जांचते हैं। सिबिल जैसी क्रेडिट एजेंसियां पुराने लोन, समय पर भुगतान और डिफॉल्ट का रिकॉर्ड रखती हैं। जिन लोगों ने पहले कभी लोन नहीं लिया या जिनका कोई क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें अक्सर न्यू टू क्रेडिट मानकर लोन से वंचित कर दिया जाता है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था पहली बार लोन लेने वालों के लिए एक बड़ी बाधा है।AI आधारित क्रेडिट स्कोरिंग क्या करेगी? नई योजना के तहत एआई और डेटा एनालिटिक्स की मदद से वैकल्पिक आंकड़ों के आधार पर व्यक्ति की क्रेडिट योग्यता आंकी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर नियमित बिजली-पानी के बिल का भुगतान, मोबाइल रिचार्ज या डिजिटल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड, बैंक खाते में लेनदेन का व्यवहार और सरकारी योजनाओं का लाभ। इन सभी डेटा को मिलाकर एक वैकल्पिक क्रेडिट प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है। इससे उन लोगों को भी ऋण मिल सकेगा जिनका पारंपरिक सिबिल स्कोर नहीं है। महिलाओं और ग्रामीण आबादी को मिलेगा फायदा यह पहल खासकर महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों छोटे कारोबारियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है। इन वर्गों के पास आय का सोर्स तो होता है, लेकिन औपचारिक क्रेडिट इतिहास नहीं होता। नई प्रणाली उन्हें औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में मदद करेगी।बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या मतलब? यदि यह ढांचा लागू होता है, तो बैंक और वित्तीय संस्थान अपने ग्राहक आधार का विस्तार कर सकेंगे। साथ ही, वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी होंगे।
1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड के नियमों पर लागू होंगे 5 अहम बदलाव, जानिए कैसे बदलेंगे आपके खर्च के तरीके

नई दिल्ली । अगर आप रोजमर्रा के खर्च, ऑनलाइन शॉपिंग या टैक्स पैमेंट के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो 1 अप्रैल 2026 से आपके लिए कई नियम बदल सकते हैं। आयकर विभाग द्वारा जारी ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 में क्रेडिट कार्ड से जुड़े पांच बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ये नियम 1962 के पुराने प्रावधानों की जगह ले सकते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन बदलावों का आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग पर क्या असर पड़ेगा। बड़े क्रेडिट कार्ड बिल पर होगी सख्त रिपोर्टिंग नए ड्राफ्ट के मुताबिक, अगर किसी वित्त वर्ष में आपके एक या ज्यादा क्रेडिट कार्ड का कुल भुगतान ₹10 लाख या उससे ज्यादा है (कैश छोड़कर), तो बैंक या कार्ड जारी करने वाली कंपनी को इसकी जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी। वहीं, अगर ₹1 लाख या उससे ज्यादा का भुगतान नकद में किया जाता है, तो उसकी भी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य बड़े लेनदेन पर नजर रखना और टैक्स अनुपालन को मजबूत बनाना है। पैन बनवाते समय काम आएगा क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट अब तीन महीने से कम पुराना क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। इससे नए पैन आवेदनकर्ताओं को ज्यादा सुविधा मिलेगी और डॉक्यूमेंट जुटाने की प्रक्रिया आसान होगी।टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को मंजूरी अब आयकर का ऑनलाइन भुगतान करते समय क्रेडिट कार्ड भी मान्य इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड होगा। पहले केवल डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग आदि विकल्प उपलब्ध थे। इस बदलाव से करदाताओं को भुगतान में लचीलापन मिलेगा, हालांकि उन्हें ब्याज और चार्जेस का ध्यान रखना होगा। कंपनी के दिए क्रेडिट कार्ड पर टैक्स नियम अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया गया है और उस पर हुए खर्च का भुगतान कंपनी करती है, तो उसे परक्विजिट माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, अगर खर्च पूरी तरह ऑफिशियल काम के लिए है और कंपनी के पास उसका पूरा रिकॉर्ड व प्रमाणपत्र मौजूद है, तो टैक्स से छूट मिल सकती है। 1 अप्रैल 2026 से क्रेडिट कार्ड नियम बदलेंगे, जिनमें बड़े बिल की रिपोर्टिंग, पैन अनिवार्यता कंपनी कार्ड पर टैक्स और क्रेडिट कार्ड से टैक्स भुगतान शामिल जिससे खर्च और टैक्स प्लानिंग दोनों प्रभावित होंगे।क्रेडिट कार्ड के लिए पैन अनिवार्य अब किसी भी बैंक या संस्था से क्रेडिट कार्ड लेने के लिए पैन नंबर देना जरूरी होगा। बिना पैन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसका मकसद बड़े लेनदेन को टैक्स सिस्टम से जोड़ना और फर्जी खातों पर रोक लगाना है।क्या बदलेगा आपके खर्च का तरीका? इन नियमों से साफ है कि सरकार बड़े क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर नजर सख्त करने की तैयारी में है। साथ ही डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और पारदर्शिता लाने पर जोर है। यदि आप बड़े खर्च करते हैं या कंपनी कार्ड का उपयोग करते हैं, तो रिकॉर्ड और टैक्स प्लानिंग पर खास ध्यान देना जरूरी होगा।
नो टॉलरेंस… एयरपोर्ट और फ्लाइट में अब हंगामा किया तो खैर नहीं, होगी सख्त कार्रवाई, DGCA ने जारी किया ड्राफ्ट

नई दिल्ली । फ्लाइट में हंगामा करने वालों पर अब सरकार सख्ती बरतने जा रही है. नागर विमानन महानिदेशालय DGCA ने नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है. नए नियमों के मुताबिक अब फ्लाइट या एयरपोर्ट पर हंगामा करना, क्रू से बदतमीज़ी करना या नशे में उत्पात मचाना महंगा पड़ सकता है. इन सब चीजों को लेकर DGCA ने एयरलाइंस और दूसरे संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं. सुझावों के बाद ही इन्हें अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा. DGCA का कहना है कि विमान और एयरपोर्ट हंगामा या प्रदर्शन करने की जगह नहीं हैं. यात्रियों की सुरक्षा और फ्लाइट की व्यवस्था में रुकावट डालने वाले किसी भी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ड्राफ्ट में जीरो टॉलरेंस यानी बिल्कुल भी ढील न देने की बात कही गई है. किन हरकतों पर होगी कार्रवाई? ड्राफ्ट के मुताबिक फ्लाइट या एयरपोर्ट पर शराब या नशे में हंगामा करना, धूम्रपान करना, पायलट या केबिन क्रू की बात न मानना, गाली-गलौज या मारपीट करना, इमरजेंसी गेट से छेड़छाड़ करना, फ्लाइट के अंदर नारेबाजी या विरोध प्रदर्शन करना इन हरकतों को गंभीर माना जाएगा. ऐसे मामलों में यात्री को फ्लाइट से उतारा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस कार्रवाई भी हो सकती है. DGCA ने ड्राफ्ट में अनुशासनहीन व्यवहार को चार स्तरों में बांटने का प्रस्ताव रखा है. हल्की बदतमीज़ी से लेकर मारपीट, जानलेवा हिंसा और कॉकपिट में घुसने की कोशिश तक को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है. इसी आधार पर तय होगा कि यात्री पर कितनी सख्त कार्रवाई होगी.नो-फ्लाई लिस्ट और उड़ान से बैन गंभीर मामलों में यात्रियों को कुछ महीनों से लेकर कई साल तक उड़ान से बैन करने का प्रस्ताव है. ऐसे यात्रियों का नाम नो-फ्लाई लिस्ट में डाला जा सकता है. ताकि वे दूसरी एयरलाइन से टिकट लेकर भी नियमों से बच न पाएं. कम से कम 30 दिन तक उड़ान से बैन लगाने का प्रस्ताव भी है. हालांकि यह सूची सार्वजनिक नहीं होगी बल्कि सिर्फ एयरलाइंस और संबंधित एजेंसियों के बीच साझा की जाएगी. DGCA ने साफ किया है कि ये नियम फिलहाल सिर्फ ड्राफ्ट हैं. सभी पक्षों से सुझाव मिलने के बाद ही इन्हें फाइनल कर लागू किया जाएगा.
सोना 2000 रुपये से ज्यादा हुआ महंगा, चांदी की भी 15000 रुपये बढ़ी कीमत; चेक करें लेटेस्ट रेट

नई दिल्ली । बुधवार को सोने-चांदी के दाम में आई गिरावट के बाद आज फिर से कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. गुरुवार, 19 फरवरी को देश में 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत 1,54,200 रुपये है, जो कल के मुकाबले 2,290 रुपये ज्यादा है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत आज 2,100 रुपये बढ़कर 1,41,350 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोने की कीमत 1,15,650 रुपये है, जो बुधवार के मुकाबले 1,720 रुपये ज्यादा है. देश के इन शहरों में सोने का ताजा भाव मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल, पुणे, विजयवाड़ा, नागपुर, भुवनेश्वर, कटक, विशाखापत्तनम, मैंगलोर, अमरावती जैसे शहरों में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम के हिसाब से 15,649 रुपये है. वहीं, इन शहरों में 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत क्रमश: 14,345 और 11,737 रुपये है. दिल्ली, वडोदरा, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, पटना, चंडीगढ़, सूरत और अयोध्या में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 15,664 रुपये प्रति ग्राम है. इन शहरों में आज 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम के हिसाब से 14,360 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 11,752 रुपये है. चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, सेलम, त्रिची जैसे तमाम दक्षिण भारतीय शहरों में गुरुवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 15,818 रुपये, 22 कैरेट सोने की कीमत 14,500 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 12,400 रुपये है. चांदी ने भी लगाई छलांग देश में आज 1 किलो चांदी की कीमत 2,70,000 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि कल इसकी कीमत 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी. यानी कि सीधे-सीधे इसमें 15,000 रुपये का उछाल आया है. इस हिसाब से आज भारत में 1 ग्राम चांदी की कीमत कल के 255 रुपये से बढ़कर आज 270 रुपये प्रति ग्राम हो गई है. भारत में चांदी की कीमत इंटरनेशनल कीमतों से तय होती है, जो किसी भी दिशा में ऊपर-नीचे हो सकती हैं. इसके अलावा यह डॉलर के मुकाबले रुपये की के मूवमेंट पर भी निर्भर करता है. अगर डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता है और इंटरनेशनल कीमतें स्थिर रहती हैं, तो चांदी और भी महंगी हो जाएगी. बुधवार को सोने-चांदी के दाम में आई गिरावट के बाद आज फिर से कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. गुरुवार, 19 फरवरी को देश में 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत 1,54,200 रुपये है, जो कल के मुकाबले 2,290 रुपये ज्यादा है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत आज 2,100 रुपये बढ़कर 1,41,350 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोने की कीमत 1,15,650 रुपये है, जो बुधवार के मुकाबले 1,720 रुपये ज्यादा है. देश के इन शहरों में सोने का ताजा भाव मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल, पुणे, विजयवाड़ा, नागपुर, भुवनेश्वर, कटक, विशाखापत्तनम, मैंगलोर, अमरावती जैसे शहरों में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम के हिसाब से 15,649 रुपये है. वहीं, इन शहरों में 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत क्रमश: 14,345 और 11,737 रुपये है. दिल्ली, वडोदरा, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, पटना, चंडीगढ़, सूरत और अयोध्या में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 15,664 रुपये प्रति ग्राम है. इन शहरों में आज 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम के हिसाब से 14,360 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 11,752 रुपये है. चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, सेलम, त्रिची जैसे तमाम दक्षिण भारतीय शहरों में गुरुवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 15,818 रुपये, 22 कैरेट सोने की कीमत 14,500 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 12,400 रुपये है. चांदी ने भी लगाई छलांग देश में आज 1 किलो चांदी की कीमत 2,70,000 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि कल इसकी कीमत 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी. यानी कि सीधे-सीधे इसमें 15,000 रुपये का उछाल आया है. इस हिसाब से आज भारत में 1 ग्राम चांदी की कीमत कल के 255 रुपये से बढ़कर आज 270 रुपये प्रति ग्राम हो गई है. भारत में चांदी की कीमत इंटरनेशनल कीमतों से तय होती है, जो किसी भी दिशा में ऊपर-नीचे हो सकती हैं. इसके अलावा यह डॉलर के मुकाबले रुपये की के मूवमेंट पर भी निर्भर करता है. अगर डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता है और इंटरनेशनल कीमतें स्थिर रहती हैं, तो चांदी और भी महंगी हो जाएगी.
TATA SON’S CHAIRMAN:टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन के भविष्य का फैसला 24 फरवरी को… ग्रुप बोर्ड की होगी अहम बैठक

TATA SON’S CHAIRMAN: नई दिल्ली। टाटा समूह (Tata Group) के लिए अगला सप्ताह काफी अहम होगा। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अगले सप्ताह टाटा संस के बोर्ड की मीटिंग (Board meeting of Tata Sons) होने वाली है। 24 फरवरी को प्रस्तावित इस बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (Chairman N. Chandrasekaran) के तीसरे कार्यकाल पर फैसला होगा। जानकारी के मुताबिक इस बैठक में बोर्ड के सामने तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड के एक सूत्र के अनुसार टाटा संस बोर्ड में कार्यकाल बढ़ाने की चर्चा से चंद्रशेखरन खुद को अलग रखेंगे। बता दें कि एन चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल अगले वर्ष पूरा होने वाला है, ऐसे में समय से पहले ही उनके नेतृत्व को लेकर स्पष्टता लाने की तैयारी की जा रही है। पिछले साल नोएल टाटा ने रखा था प्रस्ताव टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स ने पिछले साल एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की सिफारिश करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। उस बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पांच साल के लिए फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा था। अब इस प्रस्ताव पर बोर्ड की मंजूरी जरूरी है। रतन टाटा ने की थी सिफारिश चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल की बात करें तो साल 2022 में जब कार्यकाल बढ़ाया गया था, तब टाटा ट्रस्ट्स के तत्कालीन अध्यक्ष और समूह के मानद अध्यक्ष रतन टाटा ने टाटा संस बोर्ड की बैठक में हिस्सा लिया था। इसके साथ ही अगले पांच वर्षों के लिए चंद्रशेखरन के नाम की सिफारिश की थी। बता दें कि नमक से सेमीकंडक्टर तक के कारोबार में सक्रिय टाटा समूह इस समय कई रणनीतिक विस्तार योजनाओं पर काम कर रहा है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व की निरंतरता को समूह की दीर्घकालिक रणनीति के लिए अहम माना जा रहा है। चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह ने एयरलाइन, टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और डिजिटल कारोबार में बड़े फैसले लिए हैं, जिससे कंपनी की वैश्विक उपस्थिति मजबूत हुई है। कौन है एन चंद्रशेखरन? नटराजन चंद्रशेखरन टाटा समूह की सभी कंपनियों के प्रमोटर टाटा संस के चेयरमैन हैं। वह अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में चेयरमैन नियुक्त हुए। वे टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, एयर इंडिया, इंडियन होटल्स कंपनी और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज सहित समूह की कई ऑपरेटिंग कंपनियों के बोर्ड के भी अध्यक्ष हैं।चेयरमैन बनने से पहले, वे टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे, जहां उन्होंने 30 वर्षों तक सेवा की। वह 2017 तक आठ वर्ष मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में शामिल हैं।
GOLD SILVER RATE: सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट का दौर जारी…. जानिए क्यों गिर रहे दाम?

GOLD SILVER RATE: नई दिल्ली। सोने और चांदी (Gold- Silver Price) के लिए मंगलवार को दिन अच्छा नहीं रहा है। इस दिन कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर (MCX Gold Futures) का रेट गिरकर 151244 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। गोल्ड की आज की कीमतों में 3500 रुपये या फिर 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर मार्च कॉन्ट्रैक्ट्स (MCX Silver March Contracts) के शेयरों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। चांदी का रेट 10,500 रुपये फिर 4.4 प्रतिशत टूटकर 229352 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया। सोने और चांदी की कीमतों में क्यों आ रही है गिरावट गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में गिरावट के पीछे की वजह डॉलर का मजूबत होना है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान बातचीत, यूएस फेड रिजर्व का ताजा अपडेट और छुट्टी की वजह से ज्यादा एशियाई बाजार के बंद होने की वजह से यह गिरावट देखने को मिली है। बता दें, आज डॉलर इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं? जियोजीत इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी कहते हैं, “गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में गिरावट का सिलसिला आज भी जारी है। इसके पीछे की वजह डॉलर का मजबूत होना और हालिया तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग है। कल छुट्टी की वजह से यूएस मार्केट बंद था। इसकी वजह से भी सोने और चांदी की कीमतों पर असर पड़ा है।” हरीश कहते हैं, “बाजार में मौजूद निवेशक इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी इकनॉमिक आंकड़ों से पहले सतर्कता दिखा रहे हैं। ताजा जीडीपी आंकड़े और FOMC मीटिंग का असर फेड रिजर्व की उम्मीदों पर पड़ेगा।” क्या सोना और चांदी खरीदने का यह है सही समय? गोल्ड और सिल्वर इस समय काफी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कोई भी तेजी शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए बेच कर बाहर निकलने का सही मौका होगा। ब्रोकरेज हाइस च्वाइस ब्रोकिंग का कहना है कि गोल्ड के लिए 149000 रुपये और चांदी 225000 का रेट काफी अहम होगा। अगर दाम इसके नीचे जाते हैं तो दबाव के कारण कीमतों में और गिरावट देखने को मिलेगी।
INSURANCE UPDATE: मुसीबत में बचाने वाला गाइड! जानें 20–50 की उम्र के लिए टॉप 5 इंश्योरेंस विकल्प
INSURANCE UPDATE: नई दिल्ली। जवानी में इंश्योरेंस लेना सिर्फ टैक्स बचाने की बात नहीं, बल्कि परिवार और सेविंग्स की सुरक्षा का सबसे बड़ा जरिया है। 25 की उम्र में लिया गया प्लान 45-50 की उम्र में लेने के मुकाबले करीब 50% तक सस्ता पड़ सकता है। सही पॉलिसी का चयन जीवन की अनिश्चितताओं में ढाल का काम करता है। 20s: ‘अर्ली बर्ड’ का फायदा 20 के दशक में जिम्मेदारियां कम और हेल्थ अच्छी होती है। इस उम्र में टर्म इंश्योरेंस लेना सबसे फायदेमंद होता है। कम प्रीमियम में कवर लॉक हो जाता है और वेटिंग पीरियड भी जल्दी कट जाता है। हेल्थ इंश्योरेंस के लिए कंपनी पर भरोसा कम रखें और ₹5-10 लाख का बेसिक पर्सनल कवर लें। MP POLITICS: राजस्व विभाग का बड़ा फैसला,119 राजस्व निरीक्षक बने नायब तहसीलदार; यहां देखें लिस्ट! 30s: परिवार और लोन का सुरक्षा कवच इस उम्र में शादी, बच्चे और होम लोन जैसी जिम्मेदारियां बढ़ती हैं। बेस हेल्थ प्लान के साथ कैंसर या हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों के लिए टॉप-अप कवर लेना चाहिए। अगर बेस प्लान ₹5 लाख का है, तो ₹20 लाख का टॉप-अप सस्ता पड़ता है और बड़ी सर्जरी में काम आता है। 40s-50s: रिटायरमेंट और एसेट प्रोटेक्शन इस उम्र में फोकस होना चाहिए कि जमा पूंजी किसी बीमारी या एक्सीडेंट में खर्च न हो। पर्सनल एक्सीडेंट कवर और टर्म प्लान लेना महत्वपूर्ण है। रिकवरी में समय ज्यादा लगता है, इसलिए परिवार और सेविंग्स दोनों को सुरक्षित रखने के लिए सही कवर जरूरी है। लाइफ के Big-5 इंश्योरेंस प्लान इंश्योरेंस प्रकार क्यों जरूरी लाभ टर्म इंश्योरेंस गैर-मौजूदगी में परिवार की आर्थिक सुरक्षा कर्ज मुक्त और भविष्य सुरक्षित रखता है हेल्थ इंश्योरेंस मेडिकल खर्च से बचाव सेविंग्स को हॉस्पिटल बिल से सुरक्षित रखता है एक्सीडेंट कवर दुर्घटना से विकलांगता या आय रुकने पर काम न कर पाने पर भी आय का सहारा देता है क्रिटिकल इलनेस कवर कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों में इलाज के दौरान एकमुश्त राशि देता है मोटर इंश्योरेंस गाड़ी से जुड़े नुकसान और कानूनी जोखिम से बचाव थर्ड पार्टी क्लेम और मरम्मत खर्च से राहत MP RAIN ALERT: एमपी में फिर बदलेगा मौसम: 22 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, ग्वालियर-चंबल पर ज्यादा असर इंश्योरेंस लेने से पहले ध्यान दें हमेशा 95%+ CSR वाली कंपनी चुनें। पुरानी बीमारियां या सिगरेट की आदत साफ बताएं, झूठ बोलने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। बेस पॉलिसी में ‘प्रीमियम वेवर’ जैसे राइडर जरूर जोड़ें, ताकि मुसीबत में आगे के प्रीमियम माफ हो जाए। इंश्योरेंस के प्रकार और फायदे टर्म इंश्योरेंस – परिवार को आर्थिक सुरक्षा और कर्ज मुक्त रखता है। हेल्थ इंश्योरेंस – मेडिकल महंगाई से बचाव और कैशलेस सुविधा। क्रिटिकल इलनेस कवर – गंभीर बीमारी में इलाज के खर्च के लिए एकमुश्त राशि। पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस – दुर्घटना में आय का सहारा। मोटर इंश्योरेंस – सड़क दुर्घटना या चोरी से कानूनी और वित्तीय सुरक्षा।
FINANCIAL ALERT: 10 फाइनेंशियल मिस्टेक्स जो किसी को भी नहीं करनी चाहिए, समय रहते समझने में है समझदारी

FINANCIAL ALERT: नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कमाई बढ़ाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है पैसों का सही प्रबंधन करना। अक्सर आर्थिक संकट बड़ी वजहों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी वित्तीय गलतियों से पैदा होता है। अनियोजित खर्च, बढ़ता क्रेडिट कार्ड बिल, बिना योजना के बड़े खरीद फैसले और बचत की अनदेखी-ये सभी मिलकर वित्तीय स्थिरता को कमजोर कर देते हैं। अगर समय रहते इन आदतों पर नियंत्रण न किया जाए, तो अच्छी आय होने के बावजूद आर्थिक दबाव बना रह सकता है। आइए, यहां हम उन 10 गलतियों की चर्चा करते हैं, जिनसे हर किसी को बचना चाहिए। गैर-जरूरी खर्च कभी-कभार महंगी कॉफी, बाहर खाना या पेड मूवी ऑर्डर करना मामूली लग सकता है, लेकिन ये छोटे खर्च मिलकर बड़ा बोझ बन जाते हैं। मान लीजिए, अगर आप हर हफ्ते बाहर खाने पर 500 रुपये खर्च करते हैं, तो साल भर में यह 24000 रुपये हो जाता है। यह रकम छोटे-मोटे कर्ज चुकाने या सेविंग में लगाई जा सकती है। आर्थिक तंगी के समय ऐसे खर्चों से बचना बेहद जरूरी है। बार-बार होने वाले नियमित खर्च हर महीने या सालाना कटने वाले खर्चों पर नजर डालें- जैसे कई स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन या महंगे जिम मेंबरशिप। खुद से पूछें, क्या ये जरूरत हैं या सिर्फ चाहत? कई बार कम खर्च वाला विकल्प भी काम चला सकता है और आपको बचत का मौका दे सकता है। क्रेडिट कार्ड का ज्यादा उपयोग गैर-जरूरी चीजों के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल आम हो गया है। लेकिन अगर आप महीने के आखिर तक पूरा बकाया नहीं चुका पाते, तो ऊंची ब्याज दरें खरीदी गई वस्तुओं को बेहद महंगा बना देती हैं। कई बार क्रेडिट कार्ड के चलते लोग अपनी आय से ज्यादा खर्च कर बैठते हैं। गाड़ी खरीदने में जल्दबाजी हर साल लाखों नई गाड़ियां बिकती हैं, लेकिन बहुत कम लोग उन्हें नकद खरीद पाते हैं। लोन लेकर गाड़ी खरीदना आसान लगता है, लेकिन किस्त भर पाने की क्षमता और गाड़ी का वास्तविक खर्च उठाने की क्षमता अलग बातें हैं। ध्यान रहे, गाड़ी एक घटती कीमत वाली संपत्ति है। उस पर ब्याज देना आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है। बार-बार गाड़ी बदलना भी घाटे का सौदा साबित होता है। जरूरत के अनुसार गाड़ी का चुनाव ही समझदारी है। दिखावे के लिए महंगी SUV खरीदना बजट पर भारी पड़ सकता है। घर पर जरूरत से ज्यादा खर्च घर खरीदते समय “बड़ा ही बेहतर है” हमेशा सही नहीं होता। बड़ी प्रॉपर्टी का मतलब ज्यादा टैक्स, मेंटेनेंस और यूटिलिटी बिल। मॉर्गेज के अलावा अन्य नियमित खर्चों पर भी विचार करना जरूरी है। घर ऐसा हो, जो आपकी जरूरत और बजट दोनों के मुताबिक हो। बार-बार रीफाइनेंसिंग करना अगर आप घर की जरूरत के लिए बार-बार रीफाइनेंसिंग करते हैं तो यह जोखिम भरा हो सकता है। अगर कम ब्याज दर पर कर्ज चुकाने के लिए ऐसा किया जाए तो ठीक है, लेकिन इसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड की तरह करना अनावश्यक ब्याज का कारण बन सकता है। बचत न करना कई परिवार “पेचेक टू पेचेक” जीवन जी रहे हैं। ऐसे में एक वेतन न मिलना भी संकट पैदा कर सकता है। आपातकालीन फंड का होना बेहद जरूरी है, खासकर आर्थिक मंदी जैसे समय में। रिटायरमेंट के लिए निवेश न करना अगर आपका पैसा निवेश के जरिए काम नहीं कर रहा, तो आरामदायक रिटायरमेंट मुश्किल हो सकता है। रिटायरमेंट खातों में नियमित निवेश लंबी अवधि में वित्तीय सुरक्षा देता है। इसलिए किसी अच्छी रिटायरमेंट स्कीम में अभी से निवेश की शुरुआत कर दें। कर्ज चुकाने के लिए रिटायरमेंट फंड का इस्तेमाल कुछ लोग ऊंचे ब्याज वाले कर्ज से बचने के लिए रिटायरमेंट फंड निकालने का सोचते हैं। ऐसा करने से कंपाउंडिंग का लाभ खत्म हो जाता है और तय वर्ष से कम उम्र में निकासी पर पेनल्टी भी लग सकती है। रिटायरमेंट फंड को छूना बिल्कुल आखिरी विकल्प होना चाहिए। वित्तीय योजना का अभाव आज के डिजिटल दौर में लोग घंटों मनोरंजन और सोशल मीडिया पर व्यतीत कर देते हैं, लेकिन अपने वित्तीय भविष्य की योजना बनाने के लिए समय नहीं निकालते। परिणामस्वरूप, आय और खर्च का सही आकलन नहीं हो पाता और बचत व निवेश की दिशा अस्पष्ट रह जाती है। बिना ठोस वित्तीय योजना के भविष्य अनिश्चित और असुरक्षित बन सकता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि आप नियमित रूप से अपनी आय, खर्च, बचत और निवेश की समीक्षा करें और स्पष्ट वित्तीय लक्ष्य तय करें।
BUSINESS NEWS: सेंसेक्स 173 अंक चढ़कर 83,450 पर बंद, निफ्टी 25,725 पर; बैंकिंग और IT शेयरों में खरीदारी

BUSINESS NEWS: मुंबई । शेयर बाजार में आज 17 फरवरी को सीमित दायरे में बढ़त देखने को मिली। BSE Sensex 173 अंक चढ़कर 83,450 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 करीब 42 अंक की तेजी के साथ 25,725 पर बंद हुआ। बाजार में बैंकिंग और IT शेयरों में खरीदारी रही, जबकि मेटल और एनर्जी सेक्टर दबाव में रहे। आज के कारोबार में Cochin Shipyard Limited के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई। रक्षा मंत्रालय से 5,000 करोड़ रुपए का ऑर्डर मिलने की खबर के बाद यह डिफेंस PSU स्टॉक BSE पर 7.27% तक उछलकर 1,575 रुपए तक पहुंच गया। अंत में इसमें करीब 3.5% की मजबूती दर्ज की गई।एशियाई बाजारों की बात करें तो Nikkei 225 0.42% गिरकर 56,566 पर बंद हुआ। वहीं दक्षिण कोरिया का कोस्पी, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स अवकाश के कारण बंद रहे। विदेशी निवेशकों की गतिविधि पर नजर डालें तो 16 फरवरी को FIIs ने 972 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि DIIs ने 1,667 करोड़ रुपए की खरीदारी की। फरवरी महीने में अब तक FIIs कुल 2,346 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं, जबकि DIIs ने 11,443 करोड़ रुपए की खरीद की है। जनवरी 2026 में FIIs ने 41,435 करोड़ रुपए के शेयर बेचे थे, जबकि DIIs ने 69,220 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। गौरतलब है कि इससे पहले 16 फरवरी को बाजार में जोरदार तेजी रही थी। उस दिन सेंसेक्स 650 अंक चढ़कर 83,277 पर और निफ्टी 212 अंक की बढ़त के साथ 25,683 पर बंद हुआ था।
चांदी ₹6,667 लुढ़की, ₹2.34 लाख पर आई; सोना ₹2,903 गिरकर ₹1.51 लाख, 4 दिन में बड़ी गिरावट

नई दिल्ली । सोना-चांदी की कीमतों में आज 17 फरवरी को लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। India Bullion and Jewellers Association IBJA के अनुसार, एक किलो चांदी 6,667 रुपए गिरकर ₹2.34 लाख पर आ गई है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,903 रुपए सस्ता होकर ₹1.51 लाख पर पहुंच गया है। पिछले चार कारोबारी दिनों में चांदी की कीमत में कुल ₹32 हजार की गिरावट आई है। 29 जनवरी को चांदी ने ₹3.86 लाख प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था। तब से अब तक इसमें ₹1.51 लाख की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। सोना भी दबाव में है। चार दिनों में यह करीब ₹6 हजार सस्ता हुआ है। 29 जनवरी को 10 ग्राम सोना ₹1.76 लाख के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, जो अब तक ₹25 हजार तक टूट चुका है। हालांकि साल 2025 के पूरे आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर अलग दिखती है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹76 हजार था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹1.33 लाख हो गयायानी सालभर में ₹57 हजार करीब 75% की तेजी। इसी अवधि में चांदी ₹86 हजार प्रति किलो से बढ़कर ₹2.30 लाख हो गई, यानी ₹1.44 लाख करीब 167% की उछाल। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों? ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी लागत: आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ईंधन और सुरक्षा खर्च बढ़ता है, जिससे स्थानीय रेट प्रभावित होते हैं। खपत और बल्क खरीद: दक्षिण भारत में करीब 40% खपत होने से ज्वेलर्स बड़ी मात्रा में खरीद करते हैं, जिससे उन्हें छूट मिलती है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य के अपने एसोसिएशन होते हैं, जो मांग-सप्लाई के आधार पर स्थानीय रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक: ज्वेलर्स ने स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, इसका असर भी बिक्री मूल्य पर पड़ता है। सोना खरीदते समय रखें ध्यान हमेशा Bureau of Indian Standards BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। खरीद से पहले IBJA या अन्य विश्वसनीय स्रोतों से रेट क्रॉस-चेक करें। असली चांदी की पहचान के तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती। आइस टेस्ट: असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली चांदी में कोई गंध नहीं होती। क्लॉथ टेस्ट: सफेद कपड़े से रगड़ने पर काला निशान आना शुद्धता का संकेत हो सकता है। इसी बीच Morgan Stanley की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में करीब 34,600 टन सोना जमा है, जिसकी कुल वैल्यू देश की GDP से भी ज्यादा आंकी गई है।