भारतीय अर्थव्यवस्था की गणना में बड़ा बदलाव: जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के लिए नया आधार वर्ष तय, जानें कब जारी होंगे सटीक आंकड़े

नई दिल्ली :भारतीय अर्थव्यवस्था की चाल को मापने और उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अधिक करीब लाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय MoSPI ने मुख्य आर्थिक आंकड़ों-जीडीपी सीपीआई और आईआईपी की प्रासंगिकता और सटीकता को बेहतर बनाने के लिए एक व्यापक समीक्षा पूरी कर ली है। सोमवार को संसद में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि सरकार अब नए आधार वर्ष Base Year पर आधारित आर्थिक आंकड़ों की नई सीरीज जारी करने के लिए तैयार है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य गणना के तरीकों में सुधार करना और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था विशेषकर सेवा और अनौपचारिक क्षेत्र की अधिक सटीक गणना सुनिश्चित करना है। मंत्रालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद GDP के नए आंकड़े 27 फरवरी को पेश किए जाएंगे। वहीं महंगाई को मापने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक CPI के आंकड़े 12 फरवरी को और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक IIP की नई सीरीज 28 मई को जारी की जाएगी। सरकार ने जीडीपी और आईआईपी का नया आधार वर्ष 2022-23 तय किया है जबकि सीपीआई का बेस ईयर अब 2024 होगा। आधार वर्ष को अपडेट करना इसलिए अनिवार्य हो गया था क्योंकि पुराना डेटा अब वर्तमान उपभोग पैटर्न और औद्योगिक उत्पादन की नई तकनीकों को सही ढंग से नहीं दर्शा पा रहा था। संसद में जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया तकनीकी सलाहकार समितियों की देखरेख में संपन्न हुई है। इन समितियों में प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ आरबीआई RBI के जानकार और केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। गणना की इस नई पद्धति में न केवल डेटा के स्रोतों को बढ़ाया गया है बल्कि वस्तुओं और सेवाओं के “वजन” Weightage को भी वर्तमान जरूरतों के हिसाब से अपडेट किया गया है। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से भारत के आर्थिक आंकड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF के विशेष डेटा प्रसार मानकों SDDS के और अधिक अनुरूप हो जाएंगे। नए आधार वर्ष के लागू होने से न केवल डेटा की पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि यह नीति निर्माताओं और निवेशकों को भी निवेश संबंधी निर्णय लेने में मदद करेगा। खासकर सीपीआई का बेस ईयर 2024 करने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की बदलती खपत की आदतों का सही अंदाजा लग सकेगा। सरकार के अनुसार ये सुधार देश की आर्थिक नीतियों को तैयार करने और जनकल्याणकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मील का पत्थर साबित होंगे। कुल मिलाकर नई सीरीज का आगमन यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के सांख्यिकीय आंकड़े वैश्विक स्तर पर सबसे भरोसेमंद और उपयोगी बने रहें।
नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत की बड़ी छलांग चार पायदान सुधार के साथ 45वें स्थान पर पहुंचा देश

नई दिल्ली :भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी डिजिटल और नेटवर्क से जुड़ी तैयारियों में एक बार फिर मजबूती दिखाई है। नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत ने चार पायदान की छलांग लगाते हुए 45वां स्थान हासिल किया है। यह जानकारी सरकार की ओर से साझा की गई है। इस रिपोर्ट में भारत ने न केवल अपनी रैंकिंग बेहतर की है बल्कि कई अहम वैश्विक संकेतकों में शीर्ष स्थान भी प्राप्त किया है। यह रिपोर्ट वॉशिंगटन डीसी स्थित स्वतंत्र और गैर लाभकारी शोध संस्थान पोर्टुलंस इंस्टीट्यूट द्वारा जारी की गई है। इसमें दुनिया के 127 देशों की डिजिटल टेक्नोलॉजी नेटवर्क कनेक्टिविटी और शासन व्यवस्था की तैयारियों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का कुल स्कोर वर्ष 2024 में 53.63 था जो 2025 में बढ़कर 54.43 हो गया है। नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स में देशों का मूल्यांकन चार प्रमुख आधारों पर किया जाता है। इनमें टेक्नोलॉजी लोग शासन व्यवस्था और प्रभाव शामिल हैं। इन चार स्तंभों के अंतर्गत कुल 53 संकेतकों का अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि भारत ने कई क्षेत्रों में दुनिया के अन्य देशों से बेहतर प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत टेलीकॉम सेवाओं में सालाना निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े वैज्ञानिक शोध पत्र आईटी और संचार सेवाओं के निर्यात और ई कॉमर्स कानून जैसे क्षेत्रों में पहले स्थान पर रहा है। इसके अलावा फाइबर इंटरनेट कनेक्शन देश के भीतर मोबाइल इंटरनेट उपयोग और अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट क्षमता के मामले में भारत को दूसरा स्थान मिला है। घरेलू बाजार के आकार और आय असमानता जैसे संकेतकों में भारत तीसरे स्थान पर रहा है। संचार मंत्रालय ने कहा कि भारत की नेटवर्क से जुड़ी तैयारियां उसके आय स्तर से भी बेहतर हैं। कम आय वाले मध्यम वर्ग के देशों की श्रेणी में भारत दूसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि देश में डिजिटल समावेशन और तकनीकी पहुंच को दर्शाती है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में कहा था कि भारत में दुनिया का सबसे सस्ता डेटा उपलब्ध है और डेटा का उपयोग भी वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक किया जा रहा है। मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते देश में 120 करोड़ से अधिक मोबाइल उपयोगकर्ता हैं। सरकार का लक्ष्य है कि जून तक 4जी नेटवर्क देश के हर गांव तक पहुंच जाए। सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने अब तक 97068 4जी साइट्स स्थापित की हैं जिनमें से 93511 साइट्स चालू हो चुकी हैं। बीएसएनएल आने वाले महीनों में अपने सभी 4जी टावरों को 5जी में बदलने की योजना पर काम कर रही है। देश में 5जी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5जी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं और वर्तमान में ये सेवाएं देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध हैं। टेलीकॉम कंपनियों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कुल 5.08 लाख 5जी बेस ट्रांससीवर स्टेशन स्थापित किए हैं।नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत की यह प्रगति डिजिटल इंडिया पहल मजबूत टेलीकॉम नेटवर्क और तकनीकी नवाचार का प्रमाण है। यह उपलब्धि वैश्विक मंच पर भारत की डिजिटल शक्ति को और मजबूत बनाती है।
Elara Securities: ने UGRO Capital को दी BUY रेटिंग 46 प्रतिशत तक तेजी की संभावना

Elara Securities: नई दिल्ली: ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल ने यूग्रो कैपिटल पर कवरेज शुरू करते हुए स्टॉक को BUY रेटिंग दी है और अनुमान लगाया है कि शेयर में करीब 46 प्रतिशत तक तेजी आ सकती है। ब्रोकरेज ने यूग्रो कैपिटल के शेयर को 155 रुपये पर खरीदने की सलाह दी है और टारगेट प्राइस 226 रुपये निर्धारित किया है। INDORE HIGH COURT: बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश एलारा का कहना है कि कंपनी अब ग्रोथ से अधिक मुनाफे पर फोकस कर रही है। इसके तहत कंपनी कम यील्ड वाले एसेट्स को कम करने, उच्च लागत वाले कर्ज को घटाने, लागत अनुकूलन और हाई-यील्ड एसेट्स की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर देगी। ब्रोकरेज के मुताबिक इस रणनीति से कंपनी के रिटर्न ऑन एसेट RoA में सुधार होगा और स्टॉक की वैल्यूएशन री-रेटिंग हो सकती है। यूग्रो कैपिटल एक प्राइवेट इक्विटी समर्थित एमएसएमई लेंडर है जिसने टेक्नोलॉजी आधारित प्लेटफॉर्म के दम पर पिछले पांच वर्षों में AUM में 69 प्रतिशत की मजबूत सीएजीआर दर्ज की है। कंपनी का बिजनेस मॉडल प्राइम और उभरते बाजारों में फैले विविध एमएसएमई ग्राहकों को कवर करता है जिससे यह आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच भी अपेक्षाकृत स्थिर बना रहता है। INDORE HIGH COURT: बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश हालांकि सोमवार को शेयर 7 प्रतिशत से अधिक टूटकर 137 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहे थे लेकिन एलारा ने इस शेयर में बुलिश नजरिया जताया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के RoA वित्त वर्ष 2026 के 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 2028 तक 3.4 प्रतिशत हो सकते हैं। यूग्रो कैपिटल की देशभर में मजबूत वितरण मौजूदगी है जिसमें ब्रांच आधारित नेटवर्क, इकोसिस्टम चैनल और पेमेंट प्लेटफॉर्म शामिल हैं। पिछले दो वर्षों में कंपनी ने 300 नई ब्रांच खोली हैं जिससे AUM में इजाफा होने की संभावना बढ़ गई है। इसके अलावा प्रोफेक्टस और एम्बेडेड फाइनेंस प्लेटफॉर्म के अधिग्रहण से भी स्केल बढ़ेगा। ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी की टेक-ड्रिवन क्रेडिट असेसमेंट क्षमता के कारण NPA पिछले पांच साल में 2.5 प्रतिशत से नीचे रहा है। भविष्य में NPA करीब 2.7 प्रतिशत और क्रेडिट कॉस्ट 1.7 प्रतिशत के आसपास स्थिर रहने की उम्मीद है। फंडिंग कॉस्ट में कमी, ऑपरेटिंग लीवरेज और हाई-यील्ड पोर्टफोलियो से आने वाले वर्षों में कमाई और वैल्यूएशन दोनों में सुधार होने की संभावना है। यूग्रो कैपिटल लिमिटेड एक डेटा-टेक आधारित NBFC है जो एमएसएमई और छोटे कारोबारों को फाइनेंस देने में विशेषज्ञता रखती है। उन्नत डेटा एनालिटिक्स और मजबूत वितरण नेटवर्क के जरिए कंपनी भारत में छोटे व्यवसायों की बड़ी क्रेडिट जरूरत को पूरा करती है। कंपनी देशभर के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को उनकी जरूरत के मुताबिक कर्ज समाधान उपलब्ध कराती है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय स्टॉक में निवेशकों के लिए यह अवसर है क्योंकि कंपनी के फोकस में बदलाव और उच्च RoA के संकेत स्टॉक की कीमत में तेज बढ़त ला सकते हैं। निवेशक और ट्रेडर इसे टारगेट प्राइस और संभावित अपसाइड के नजरिए से देख रहे हैं।
GOLD- SILVER PRICE RISE: सोने-चांदी के भाव में तेज उछाल भोपाल में आज के रेट में बड़ी बढ़त..

GOLD- SILVER PRICE RISE: नई दिल्ली :देशभर में सोने और चांदी के बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। खासकर इस शादी के सीजन में सोने और चांदी के भाव ने निवेशकों और खरीदारों की ध्यान खींचा है। पिछले दो हफ्तों में गोल्ड मार्केट ने ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की थी। इस गिरावट के दौरान सोने का भाव पिछले एक हफ्ते में 13 हजार रुपए सस्ता हुआ जबकि चांदी 94 हजार रुपए तक सस्ती हुई। इसी बीच आज बाजार खुलते ही सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आई है। भोपाल में आज 24 कैरेट सोने के दाम 157,610 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज किए गए हैं। वहीं चांदी का भाव 261,380 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। यह बढ़त निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत की खबर है क्योंकि पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार में हड़कंप मचा हुआ था। देशभर में आज सोने का भाव 157,530 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 260,040 रुपए प्रति किलो पर कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उतार-चढ़ाव वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव और घरेलू मांग में वृद्धि के कारण हो रहा है। निवेशक इस समय सोने और चांदी में तेजी से ट्रेडिंग कर रहे हैं और खरीदारी के लिए सावधानी बरत रहे हैं। सोने और चांदी के बाजार में निवेश करते समय हॉलमार्क पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। भारत में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स BIS हॉलमार्क निर्धारित करता है। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि सोना शुद्ध और मिलावट रहित हो। 24 कैरेट सोने में विशेष अंक होते हैं जिन्हें देखकर खरीदार असली सोना पहचान सकते हैं। बिना हॉलमार्क की गहने खरीदना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि इसमें मिलावट होने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक या खरीदार बाजार की हलचल को देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। सोने और चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव आम बात है और यह वैश्विक आर्थिक स्थिति, डॉलर के भाव और मांग पर निर्भर करता है। आज की बढ़त के बाद निवेशकों में थोड़ी राहत है और खरीदार सोने-चांदी की कीमतों को देखकर खरीदारी के अवसर तलाश रहे हैं। भोपाल में आज के रेट के अनुसार यदि आप सोने की खरीदी का विचार कर रहे हैं तो 24 कैरेट सोने का भाव 157,610 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 261,380 रुपए प्रति किलो है। यह कीमतें स्थानीय बाजार में थोड़ी अलग हो सकती हैं। इसके अलावा गहने खरीदते समय हमेशा हॉलमार्क जांचना और शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी है। इस प्रकार इस समय सोने और चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। निवेशक और खरीदार दोनों को सावधानी बरतते हुए बाजार की खबरों पर नजर रखनी चाहिए। खरीदारी करने से पहले कीमतों और शुद्धता की पुष्टि करना जरूरी है। बाजार में आज की तेजी ने निवेशकों के बीच नई उम्मीद जगाई है और खरीदारों को फैसला लेने के लिए अवसर दिया है।
Gold-Silver Price: सोना-चांदी के दामों में आयी तेजी, जानिए प्रमुख शहरों का आज का रेट

नई दिल्ली। सोमवार, 9 फरवरी को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। घरेलू फ्यूचर मार्केट में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 मार्च, 2026 की एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा 1,54,224 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 1,53,931 रुपये पर बंद हुआ था। दिन की शुरुआत में ही सोना 1,55,674 रुपये तक पहुंच गया, यानी पिछले बंद रेट से करीब 1,800 रुपये की तेजी। शुरुआती कारोबार में MCX गोल्ड ने 1,57,000 रुपये तक का उच्च स्तर भी छुआ। चांदी में भी तेजी, जानें MCX रेटसोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी मजबूती रही। MCX पर 5 मार्च 2026 की सिल्वर फ्यूचर वायदा 2,60,301 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही है। यह पिछले बंद रेट से लगभग 10,400 रुपये की तेजी दिखाता है। शुरुआती कारोबार में सिल्वर 2,64,885 रुपये के उच्च स्तर तक भी गया। शहरवार सोने का रेट दिल्ली:24 कैरेट: ₹1,56,74022 कैरेट: ₹1,43,69018 कैरेट: ₹1,17,590 मुंबई:24 कैरेट: ₹1,56,59022 कैरेट: ₹1,43,54018 कैरेट: ₹1,17,440 चेन्नई:24 कैरेट: ₹1,57,30022 कैरेट: ₹1,44,19018 कैरेट: ₹1,23,490 कोलकाता:24 कैरेट: ₹1,56,59022 कैरेट: ₹1,43,54018 कैरेट: ₹1,17,440 अहमदाबाद:24 कैरेट: ₹1,56,64022 कैरेट: ₹1,43,59018 कैरेट: ₹1,17,490 लखनऊ:24 कैरेट: ₹1,56,74022 कैरेट: ₹1,43,69018 कैरेट: ₹1,17,590 पटना:24 कैरेट: ₹1,56,64022 कैरेट: ₹1,43,59018 कैरेट: ₹1,17,490 हैदराबाद:24 कैरेट: ₹1,56,59022 कैरेट: ₹1,43,54018 कैरेट: ₹1,17,440
बैंकों में FDI की सीमा 20 से बढ़ाकर 49 फीसदी करने की तैयारी… वित्त मंत्रालय कर रहा विचार

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) Foreign Direct Investment – FDI) की सीमा को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने पर विचार कर रहा है। वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने कहा, हम अभी भी विचार कर रहे हैं, और एफडीआई सीमा को 49 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए अंतर-मंत्रालयी परामर्श जारी है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बेहतर स्थिति से उत्साहित वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने भरोसा जताया है कि मौजूदा वित्त वर्ष में इन बैंकों का संयुक्त मुनाफा दो लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर जाना चाहिए। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के अच्छी स्थिति में होने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इस साल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ऋण वृद्धि 12 प्रतिशत और जमा वृद्धि 10 प्रतिशत है, जो काफी उत्साहजनक है। बैंकों का संयुक्त मुनाफा तीन साल में दोगुना होगाउन्होंने कहा, बैंक अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत हैं। इसलिए, वे लचीले हैं। हमारे पास नियामक आरबीआई के तहत बहुत ही विवेकपूर्ण प्रबंधन प्रणाली मौजूद है। इसलिए हम अपने बैंकिंग क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले बाहरी कारकों के बारे में बहुत चिंतित नहीं हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का संयुक्त मुनाफा तीन साल में दोगुना हो जाएगा। संपत्ति की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार, ऋण वृद्धि, स्वस्थ पूंजी पर्याप्तता अनुपात और संपत्तियों पर बढ़ते प्रतिफल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मुनाफा वित्त वर्ष 2022-23 में एक लाख करोड़ रुपये को पार कर 1.05 लाख करोड़ रुपये हो गया था।
भारत में गोल्ड ETF में 98% उछाल, दुनिया भर के निवेशक सोने की ओर खिंचे

नई दिल्ली। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत के गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में 2.49 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश आया। यह दिसंबर 2025 के 1.25 अरब डॉलर से 98 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी है। यह लगातार आठवां महीना है जब गोल्ड ETF में निवेश बढ़ रहा है। 2025 का निवेश सिलसिला जारी साल 2025 में मार्च और मई को छोड़कर हर महीने गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा। पूरे साल 2025 में कुल 4.68 अरब डॉलर का निवेश आया, जो 2024 के 1.29 अरब डॉलर से 262 प्रतिशत अधिक है। तुलना करें तो 2023 में यह केवल 310 मिलियन डॉलर और 2022 में महज 33 मिलियन डॉलर था। वैश्विक स्तर पर भी रिकॉर्ड दुनियाभर में भी निवेशकों ने सोना ETF में पैसा लगाना जारी रखा। जनवरी में वैश्विक सोना ETF में 19 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो अब तक का सबसे मजबूत मासिक फंड फ्लो है। सोने की कीमतों में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ, वैश्विक सोना ETF में प्रबंधित संपत्ति 669 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछले महीने से 20 प्रतिशत अधिक है। वैश्विक होल्डिंग भी 120 टन बढ़कर 4,145 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। एशिया ने भी बनाया नया रिकॉर्ड एशियाई गोल्ड ETF में जनवरी में 10 अरब डॉलर का निवेश आया, जो 2025 के मासिक औसत से काफी अधिक है। यह क्षेत्र लगातार पांचवें महीने निवेश में वृद्धि दिखा रहा है और अब तक का सबसे मजबूत मासिक प्रवाह दर्ज किया है।सभी क्षेत्रों में बढ़त जनवरी में उत्तरी अमेरिका और एशिया ने वैश्विक मांग को बढ़ावा दिया। उत्तरी अमेरिका में दूसरा सबसे बड़ा मासिक फ्लो दर्ज किया गया, जबकि एशिया ने अपना सर्वाधिक मासिक प्रवाह देखा। यूरोप में भी भू-राजनीतिक और व्यापारिक तनावों के बावजूद निवेश उल्लेखनीय रहा। गिरावट के बावजूद निवेश जारी सोने की कीमतों में कुछ गिरावट के बावजूद, यूरोप को छोड़कर सभी क्षेत्रों में 30 जनवरी और 2 फरवरी को शुद्ध निवेश जारी रहा। निवेशकों ने कीमतों में गिरावट का फायदा उठाते हुए खरीदारी जारी रखी।निवेश को सहारा देने वाले कारक जनवरी में निवेश को शुरुआती कीमतों में तेजी, अमेरिका और ईरान, ग्रीनलैंड और यूरोप में भू-राजनीतिक तनावों ने सहारा दिया। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर अपरिवर्तित रखने के बावजूद, केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और नए फेड चेयर केविन वॉर्श की नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी रही। इसके साथ ही ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों ने गोल्ड ETF की मांग बनाए रखी।
RBI कर रहा खाता जमा बीमा के नियम में बदलाव की तैयारी… जोखिम आधारित प्रीमियम मॉडल होगा लागू!

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) अप्रैल 2026 से खाता जमा बीमा (Account Deposit Insurance) के लिए एक बड़ा बदलाव लागू करने जा रहा है। अब तक सभी बैंकों से एक समान दर पर वसूला जाने वाला बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) समाप्त होगा और उसकी जगह जोखिम आधारित प्रीमियम मॉडल लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था में मजबूत और सुरक्षित बैंकों को कम प्रीमियम देना होगा, जबकि जोखिम वाले बैंकों पर अधिक बोझ पड़ेगा। अब तक भारत में जमा बीमा के लिए समान दर प्रणाली लागू थी, जो 1962 से चला आ रही थी। इसके तहत सभी बैंक अपने जमा पर प्रति 100 रुपये पर 12 पैसे का प्रीमियम जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम को देते थे। बैंक कितना सुरक्षित है या उसकी वित्तीय स्थिति कैसी है, इसका इस दर पर कोई असर नहीं पड़ता था। आरबीआई का मानना है कि यह व्यवस्था बैंकों को बेहतर जोखिम प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित नहीं करती थी, इसलिए इसमें बदलाव जरूरी था। क्या है नया जोखिम आधारित प्रीमियम मॉडलनए मॉडल के तहत बैंकों को उनकी वित्तीय सेहत और जोखिम प्रोफाइल के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। इसके लिए पूंजी पर्याप्तता, एनपीए, लाभप्रदता, तरलता और पर्यवेक्षण रेटिंग जैसे मानकों को आधार बनाया जाएगा। अप्रैल 2026 से बैंकों को ए, बी, सी और डी-चार जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। कम जोखिम वाले सुरक्षित बैंक कम प्रीमियम चुकाएंगे, जबकि अधिक जोखिम वाले बैंकों को ज्यादा प्रीमियम देना होगा। कितनी होगी प्रीमियम दरसबसे सुरक्षित बैंकों को अब प्रति 100 रुपये जमा पर सिर्फ आठ पैसे का प्रीमियम देना पड़ सकता है, जो मौजूदा दर से करीब 33 फीसदी कम है। श्रेणी बी के बैंक 10 पैसे, श्रेणी सी के बैंक 11 पैसे और श्रेणी डी (सबसे अधिक जोखिम) के बैंक 12 पैसे प्रीमियम का भुगतान करेंगे। इसका सीधा फायदा मजबूत बैलेंस शीट वाले बैंकों को मिलेगा, जबकि कमजोर बैंकों पर दबाव बढ़ेगा। बैंकों के जोखिम का आकलन कैसे होगाजोखिम आकलन के लिए दो मॉडल अपनाए जाएंगे। टियर-1 मॉडल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) पर लागू होगा, जिसमें पर्यवेक्षी रेटिंग, कैमल्स मानक और जमा बीमा कोष पर संभावित नुकसान को आधार बनाया जाएगा। टियर-2 मॉडल क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के लिए होगा, जिसमें मात्रात्मक संकेतकों और संभावित नुकसान पर ध्यान दिया जाएगा। पुराने और स्थिर बैंकों को अतिरिक्त राहतआरबीआई ने इस व्यवस्था में एक ‘विंटेज इंसेंटिव’ भी जोड़ा है। जिन बैंकों का रिकॉर्ड लंबे समय तक स्थिर रहा है और जिन पर कोई बड़ा नियामकीय प्रतिबंध या पुनर्गठन नहीं हुआ है, उन्हें अतिरिक्त छूट मिलेगी। यह छूट सालाना एक फीसदी तक हो सकती है और अधिकतम 25 फीसदी तक जा सकती है। जो बैंक इस ढांचे से बाहर रहेंगेलोकल एरिया बैंक और पेमेंट्स बैंक जोखिम-आधारित प्रीमियम व्यवस्था से बाहर रहेंगे और पहले की तरह ₹100 जमा पर 12 पैसे की समान दर चुकाते रहेंगे। डेटा सीमाओं के कारण इनके लिए सटीक जोखिम मॉडलिंग संभव नहीं है। कुल प्रीमियम संग्रह में इनका योगदान 1% से भी कम है। जमाकर्ताओं के लिए क्या बदलेगा?इस बदलाव से जमाकर्ताओं की जमा सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जमा बीमा कवर की सीमा और भुगतान प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी। यानी बैंक डूबने की स्थिति में जमाकर्ताओं को मिलने वाली बीमा राशि में कोई कटौती नहीं होगी। हालांकि, मजबूत बैंकों के लिए लागत घटने से आगे चलकर इसका अप्रत्यक्ष लाभ ग्राहकों तक पहुंच सकता है। जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम क्या हैजमा बीमा और ऋण गारंटी निगम, भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है। यह भारत में बैंक जमाकर्ताओं को जमा बीमा सुरक्षा प्रदान करता है, जो वर्तमान में प्रति जमाकर्ता ₹पांच लाख तक है। जमा बीमा योजना आरबीआई द्वारा लाइसेंस प्राप्त सभी बैंकों (वाणिज्यिक और सहकारी) के लिए अनिवार्य है। 31 मार्च, 2025 तक पंजीकृत बीमित बैंकों की संख्या 1,982 थी। – आपकी जमा पहले की तरह सुरक्षित रहेगी, जमा बीमा कवर में कोई बदलाव नहीं।– मजबूत बैंकों में भरोसा और बढ़ेगा।– बैंक लागत घटने से बढ़ा सकते हैं ब्याज दर, यानी बेहतर एफडी दर और लोन पर कम ब्याज दर।– कमजोर बैंकों पर बढ़ेगा दबाव।– बैंक चुनते समय सतर्कता बढ़ेगी।– बैंकिंग सिस्टम ज्यादा सुरक्षित होगा।
CIBIL स्कोर खराब है तो क्या नहीं मिलेगा नया क्रेडिट कार्ड? जानिए क्या कहता है नियम

नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो फ्लाइट टिकट बुक करनी हो या अचानक आई जरूरत आज के दौर में क्रेडिट कार्ड केवल सुविधा नहीं बल्कि फाइनेंशियल लाइफ का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति नया क्रेडिट कार्ड अप्लाई करता है सबसे पहले जिस चीज की जांच होती है वह है उसका CIBIL स्कोर। ऐसे में जिन लोगों का सिबिल स्कोर खराब है उनके मन में यही सवाल उठता है कि क्या अब उन्हें कभी नया क्रेडिट कार्ड नहीं मिलेगा? चलिए जानते हैं। क्या है CIBIL स्कोर?CIBIL स्कोर एक तीन अंकों की संख्या होती है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को दर्शाती है। यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। आमतौर पर 750 या उससे ज्यादा स्कोर को बैंक अच्छा मानते हैं। वहीं 600 से नीचे का स्कोर यह संकेत देता है कि आपने पहले लोन या क्रेडिट कार्ड के भुगतान में लापरवाही की है। ऐसे में बैंक आपको ‘हाई रिस्क कस्टमर’ मान लेते हैं। क्या RBI ने खराब स्कोर वालों पर रोक लगाई है?यह जानना जरूरी है कि भारतीय रिजर्व बैंक RBIने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है जो खराब CIBIL स्कोर वाले व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड देने से रोकता हो। दरअसल क्रेडिट कार्ड जारी करना पूरी तरह बैंकों और कार्ड जारी करने वाली कंपनियों की नीति पर निर्भर करता है। बैंक अपने रिस्क को देखते हुए शर्तें तय करते हैं। खराब CIBIL स्कोर वालों के लिए कोई ऑप्शन?अगर आपका स्कोर कम है तब भी कुछ रास्ते खुले हैं। सबसे सेफ ऑप्शन है सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड। इसमें आपको बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट FDकरानी होती है और उसी के बदले कार्ड मिलता है। इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य के कार्ड पर ऐड-ऑन कार्ड भी लिया जा सकता है। कुछ फिनटेक कंपनियां और NBFC सीमित क्रेडिट लिमिट के साथ कार्ड ऑफर करती हैं ताकि यूजर धीरे-धीरे अपनी साख सुधार सके। क्रेडिट कार्ड से कैसे सुधरेगा सिबिल स्कोर?सही तरीके से इस्तेमाल किया गया क्रेडिट कार्ड आपके खराब CIBIL स्कोर को सुधारने में मदद कर सकता है। समय पर बिल भुगतान लिमिट से कम खर्च और नियमित उपयोग से 6 से 12 महीनों में स्कोर में अच्छा सुधार देखा जा सकता है। एक बार स्कोर बेहतर होते ही अनसिक्योर्ड यानी बिना FD वाले क्रेडिट कार्ड के रास्ते भी खुल जाते हैं।
सालाना इनकम 12 लाख रुपये से ज्यादा है तो आज ही करें ये 4 निवेश, रिटायरमेंट भी रहेगा सुरक्षित और टैक्स भी जीरो!

नई दिल्ली । अगर आपकी सालाना आमदनी 12 लाख रुपये से ज्यादा है और हर साल इनकम टैक्स आपकी जेब पर भारी पड़ता है, तो अब चिंता छोड़ दीजिए। सही टैक्स प्लानिंग और स्मार्ट निवेश से न सिर्फ टैक्स का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है, बल्कि रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फाइनेंशियल फंड भी तैयार किया जा सकता है। खास बात यह है कि कुछ निवेश ऐसे हैं, जो टैक्स बचत और भविष्य की सुरक्षा दोनों का डबल फायदा देते हैं। नेशनल पेंशन सिस्टम नेशनल पेंशन सिस्टम हाई इनकम वालों के लिए सबसे असरदार टैक्स सेविंग टूल माना जाता है। सेक्शन 80CCD के तहत इसमें 50,000 रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है, जो 80C की 1.5 लाख रुपये की सीमा से अलग है। यानी सीधे-सीधे टैक्सेबल इनकम कम। NPS में इक्विटी, डेट और सरकारी बॉन्ड में निवेश होता है, जिससे लंबे समय में 10-12% तक रिटर्न की उम्मीद की जाती है। रिटायरमेंट के समय 60% राशि टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है, जबकि बाकी रकम से नियमित पेंशन मिलती है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड जो लोग रिस्क से दूर रहना चाहते हैं, उनके लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड बेहतरीन ऑप्शन है। इसमें 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। मौजूदा समय में PPF पर 7.1% का फिक्स्ड और टैक्स-फ्री रिटर्न मिलता है। 15 साल की लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा इसे रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बेहद मजबूत बनाता है। इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम उन निवेशकों के लिए है, जो टैक्स बचाते हुए ज्यादा रिटर्न चाहते हैं। इसमें भी 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। 3 साल के लॉक-इन के साथ ELSS फंड्स इक्विटी में निवेश करते हैं और लंबे समय में 12–15% तक रिटर्न दे सकते हैं। हालांकि इसमें बाजार का रिस्क रहता है, इसलिए निवेश से पहले प्रोफाइल समझना जरूरी है। ULIP और पेंशन प्लान ULIP और लाइफ इंश्योरेंस पेंशन प्लान्स भी हाई इनकम वालों के लिए फायदेमंद हैं। 80C/80CCC के तहत टैक्स छूट और 10 के तहत टैक्स-फ्री मैच्योरिटी इन्हें अट्रैक्टिव बनाती है। ULIP में निवेश और इंश्योरेंस दोनों का लाभ मिलता है, जबकि पेंशन प्लान रिटायरमेंट के बाद नियमित आय सुनिश्चित करते हैं।