Business शुरू करने की सोच रहे हैं….तो अब बिना किसी गारंटी के ₹20 लाख तक का लोन

नई दिल्ली। केंद्रीय रिजर्व बेंक (Central Reserve Bank) ने कई अहम ऐलान किए हैं। इसमें एक बड़ा ऐलान उन लोगों से जुड़ा था जो अपना बिजनेस शुरू (Start Business) करने की सोच रहे हैं। दरअसल, आरबीआई (RBI) ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के छोटे बिजनेस के लिए बिना गारंटी वाले लोन की लिमिट 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की घोषणा की है। बिना गारंटी वाले लोन की बढ़ी हुई लिमिट 01 अप्रैल, 2026 को या उसके बाद मंजूर या रिन्यू किए गए छोटे कर्जदारों के सभी लोन पर लागू होगी। कोलैटरल-फ्री लोन क्या है?एक खबर में कोटक महिंद्रा बैंक की वेबसाइट का हवाला देते हुए बताया गया है कि यह एक अनसिक्योर्ड लोन है जो लेंडर आपकी बिजनेस की जरूरतों के लिए देते हैं। इस तरह के लोन में, लोन चुकाए जाने तक अपने घर, कार या प्रॉपर्टी जैसी कोई भी चीज गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। कोलैटरल-फ्री लोन बिजनेस के लिए तुरंत फंड पाने का एक शानदार तरीका है, जिसमें फाइनेंशियल संस्था के पास अपनी संपत्ति को जोखिम में डालने की जरूरत नहीं है। MSME का मतलब क्या है?MSME से मतलब माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज यानी कारोबार से होता है। एक माइक्रो एंटरप्राइज, जिसमें प्लांट और मशीनरी या इक्विपमेंट में इन्वेस्टमेंट 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है और टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है। वहीं, स्मॉल एंटरप्राइज में इन्वेस्टमेंट 25 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है और टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक होना चाहिए। इसके अलावा, मीडियम एंटरप्राइज में प्लांट और मशीनरी या इक्विपमेंट में इन्वेस्टमेंट 125 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है और टर्नओवर 500 करोड़ रुपये तक का होता है। किसान क्रेडिट कार्ड पर अपडेटइसके साथ ही आरबीआई किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से संबंधित नये दिशा-निर्देश भी जारी करेगा। इसमें फसल सीजन के मानकीकरण, केसीसी की अवधि बढ़ाकर छह साल करने और हर फसल सीजन के लिए लोन लिमिट तय करने संबंधी प्रावधान होंगे। इसके प्रारूप दिशा-निर्देश जल्द जारी किये जाएंगे।
एक अप्रैल से लागू होंगे इनकम टैक्स के नए रूल्स… विभाग ने जारी किया ड्राफ्ट

नई दिल्ली। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) ने इनकम-टैक्स नियम, 2026 (Income-tax Rules, 2026) का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। ये ड्राफ्ट नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने का प्रस्ताव है। इन ड्राफ्ट नियमों में कई दूसरी पहलों के साथ-साथ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग फॉर्म को आसान बनाया गया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने एक बयान में कहा कि ड्राफ्ट नियम और फॉर्म करीब 15 दिनों के लिए पब्लिक डोमेन में रहेंगे। सभी स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से अनुरोध है कि वे इन ड्राफ्ट नियमों और फॉर्म को देखें और उन पर सोच-समझकर फीडबैक दें ताकि और बेहतर किया जा सके । आपको बता दें कि 15 दिन की अवधि 22 फरवरी, 2026 को पूरी हो रही है। CBDT चेयरमैन ने क्या कहा था?CBDT का कहना है कि ड्राफ्ट नियमों का हिस्सा नए फॉर्म को भी टैक्स देने वालों की आसानी के लिए काफी हद तक आसान बनाया गया है। बीते दिनों CBDT के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने बताया था कि इसके अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची भी जारी की जाएगी। अग्रवाल ने कहा था कि CBDT नए कानून पर ‘बार-बार पूछे जाने वाले सवाल’ (एफएक्यू) और एक प्रस्तुति तैयार करने पर भी काम कर रहा है। यह नए अधिनियम के लागू होने के साथ जनता के लिए उपलब्ध होगी ताकि उन्हें चीजों को समझने में आसानी हो। सीबीडीटी प्रमुख ने कहा कि पिछले साल पूरा जोर (आयकर अधिनियम की) भाषा को सरल बनाने पर था और नए कानून को इस तरह से लाने पर था कि करदाता इसे आसानी से पढ़ और समझ सकें। क्या कहते हैं एक्सपर्टनांगिया ग्लोबल के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला ने कहा- इनकम टैक्स फॉर्म्स को आसान बनाया गया है। फॉर्म को ज्यादा साफ, आसानी से समझ में आने वाली भाषा में तैयार किया गया है ताकि ऑपरेशनल, एडमिनिस्ट्रेटिव या कानूनी अनिश्चितता से बचा जा सके और उनसे जुड़े नोट्स को भी उसी हिसाब से आसान बनाया गया है। खास बात यह है कि ड्राफ्ट फॉर्म नंबर 26, ऑडिट रिपोर्ट और इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 63 के तहत दी जाने वाली जानकारियों का स्टेटमेंट, ICDS एडजस्टमेंट का प्रावधान करता है।
Trade Deal: अगले 5 साल में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा भारत… क्या US कंपनियां पूरी कर पाएंगी डिमांड?

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका (India and America) के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Historic Trade Agreements) के तहत भारत (India) ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर लगभग 41 लाख करोड़ रुपये के मूल्य के सामान आयात करने की जो प्रतिबद्धता जताई है वह वैश्विक व्यापार की दिशा बदल सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस लक्ष्य की सफलता केवल भारतीय कंपनियों (Indian Companies) के ऑर्डर देने पर नहीं, बल्कि अमेरिकी सप्लायर्स की सप्लाई क्षमता पर भी निर्भर करेगी। शनिवार को जारी संयुक्त बयान के बाद अब इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किन क्षेत्रों में भारत अपनी खरीदारी बढ़ाएगा और अमेरिका के सामने क्या चुनौतियां होंगी। आयात के इस लक्ष्य को हासिल करने में ऊर्जा क्षेत्र सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में भारत ने अमेरिका से करीब 40 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें से 11 अरब डॉलर केवल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद थे। यह पिछले साल की तुलना में 35% अधिक है। भारत अब अपनी तेल जरूरतों के लिए रूस के बजाय अमेरिकी तेल को प्राथमिकता देने की ओर बढ़ रहा है। भारत अब इंडोनेशिया से आने वाले ‘कोकिंग कोल’ की जगह अमेरिकी कोयले को तरजीह दे सकता है। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी कोयला न केवल गुणवत्ता में बेहतर है, बल्कि कीमत में भी प्रतिस्पर्धी है। भारतीय तेल कंपनियों ने पहले ही अधिक तरल प्राकृतिक गैस (LNG) की खरीद के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। हाई-टेक और विमाननवाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, चिप्स, सेमीकंडक्टर और हवाई जहाज जैसे हाई-टेक उत्पाद इस 500 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने की कुंजी होंगे। भारत अकेले बोइंग को 70 से 80 अरब डॉलर के नए ऑर्डर देने की तैयारी में है। डेटा सेंटर्स और AI के लिए आवश्यक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स और हाई-एंड चिप्स की खरीद में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। सप्लाई चेन और पेंडिंग ऑर्डर्स जैसी अड़चनेंइस भव्य योजना की राह में कुछ तकनीकी अड़चनें भी हैं। उदाहरण के तौर पर, बोइंग जैसी कंपनियों के पास पहले से ही भारी ऑर्डर का बैकलॉग है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अमेरिकी कंपनियां समय पर डिलीवरी दे पाएंगी? इसी तरह, वैश्विक बाजार में सेमीकंडक्टर चिप्स की भारी मांग है। भारतीय खरीदारों को इन उत्पादों को हासिल करने के लिए वैश्विक कतार में लगना होगा। गोयल ने कहा, “यह अमेरिकी विक्रेताओं पर निर्भर करता है कि वे भारतीय खरीदारों को ऐसा प्रस्ताव दें जिसे वे ठुकरा न सकें। 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष का लक्ष्य पहले ही साल में शायद पूरा न हो, लेकिन हम उसी दिशा में बढ़ रहे हैं।” 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष का रोडमैपविशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत सालाना 100 अरब डॉलर का आयात अमेरिका से करता है तो अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार होने के साथ-साथ सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्तिकर्ता भी बन सकता है। इससे भारत की रूस पर निर्भरता कम होगी और अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक संबंध और गहरे होंगे। यह समझौता केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक दांव है। जहां भारत को 18% कम टैरिफ का लाभ मिल रहा है, वहीं अमेरिका को 500 अरब डॉलर का सुनिश्चित बाजार मिल गया है। अब सफलता इस बात पर टिकी है कि अमेरिकी फैक्ट्रियां और तेल के कुएं भारत की इस विशाल मांग को कितनी तेजी से पूरा करते हैं।
पोस्ट ऑफिस की RD स्कीम में हर महीने 5000 रुपये जमा करेंगे तो 5 साल में कितना फंड होगा तैयार?

नई दिल्ली।महंगाई के दौर में अगर आप बिना जोखिम के सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं, तो पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपोजिट (RD) स्कीम आपके लिए एक भरोसेमंद ऑप्शन बन सकती है। खासतौर पर वे लोग जो हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम बचाकर भविष्य के लिए एक अच्छा फंड तैयार करना चाहते हैं, उनके लिए यह स्कीम बेहद उपयोगी है। पोस्ट ऑफिस की RD न सिर्फ सरकारी गारंटी के साथ आती है, बल्कि इसमें मिलने वाला ब्याज भी स्थिर होता है, जिससे निवेशक पहले से जान सकता है कि मैच्योरिटी पर उसे कितनी रकम मिलेगी। क्या है पोस्ट ऑफिस RD स्कीम?पोस्ट ऑफिस की RD यानी रिकरिंग डिपोजिट स्कीम में निवेशक को हर महीने एक निश्चित रकम जमा करनी होती है। यह स्कीम उन लोगों के लिए बनाई गई है जो एक साथ बड़ी रकम निवेश नहीं कर सकते, लेकिन नियमित बचत की आदत डालना चाहते हैं। फिलहाल पोस्ट ऑफिस इस स्कीम पर 6.7% सालाना ब्याज दे रहा है, जो तिमाही चक्रवृद्धि के आधार पर जोड़ा जाता है। कितनी रकम से कर सकते हैं शुरुआत?इस स्कीम में खाता खोलने के लिए न्यूनतम मासिक जमा सिर्फ 100 रुपये है। अच्छी बात यह है कि इसमें अधिकतम जमा की कोई सीमा तय नहीं है, यानी आपकी आमदनी जितनी अनुमति दे, आप उतना निवेश कर सकते हैं। यही वजह है कि यह स्कीम नौकरीपेशा लोगों, गृहिणियों और छोटे कारोबारियों के बीच काफी लोकप्रिय है। मैच्योरिटी और अवधिपोस्ट ऑफिस की RD स्कीम की अवधि 5 साल यानी 60 महीने होती है। इस दौरान हर महीने तय तारीख तक राशि जमा करनी होती है। अगर किसी महीने किस्त चूक जाती है, तो मामूली जुर्माने के साथ उसे बाद में भी जमा किया जा सकता है। हर महीने 5000 रुपये जमा करने पर कितना मिलेगा?अगर आप पोस्ट ऑफिस की RD स्कीम में हर महीने 5000 रुपये जमा करते हैं, तो 5 साल में आपकी कुल जमा राशि 3,00,000 रुपये होगी। इस पर मिलने वाले ब्याज को जोड़ दें, तो 60 महीने बाद आपको कुल करीब 3,56,830 रुपये मिलेंगे। यानी आपको लगभग 56,830 रुपये से ज्यादा का ब्याज लाभ होगा। क्यों चुनें पोस्ट ऑफिस RD?पोस्ट ऑफिस की RD स्कीम पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि यह सरकार द्वारा समर्थित है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता और निवेशक को फिक्स रिटर्न मिलता है। बच्चों की पढ़ाई, शादी या किसी छोटे भविष्य लक्ष्य के लिए यह स्कीम एक मजबूत फाइनेंशियल प्लान बन सकती है।
एसबीआई का मुनाफा तीसरी तिमाही में 13 फीसदी बढ़कर 21,317 करोड़ रुपये

नई दिल्ली। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) (State Bank of India (SBI) ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 (Current Financial Year 2025-26) की दिसंबर तिमाही के नतीजे का ऐलान कर दिया है। एसबीआई ने शनिवार को कहा कि 31 दिसंबर को समाप्त अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में उसका मुनाफा 13.06 फीसदी बढ़कर 21,317 करोड़ रुपये रहा। बैंक को पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में 18,853 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। एसबीआई ने बयान में बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में बैंक ने 21,137 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। एकल आधार पर अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में शुद्ध लाभ 24.48 फीसदी बढ़कर 21,028 करोड़ रुपये रहा है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 16,891 करोड़ रुपये रहा था। देश के सबसे बड़े ऋणदाता बैंक का वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में एकल आधार पर कुल आय बढ़कर 1,40,915 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की इसी तिमाही में 1,28,467 करोड़ रुपये थी। इस दौरान बैंक का कुल खर्च 1,04,917 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,08,052 करोड़ रुपये हो गया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की सकल गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) का अनुपात 31 दिसंबर 2025 तक बेहतर होकर 1.57 फीसदी रहा, जो सितंबर 2025 में 1.73 फीसदी था। वहीं, बैंक का कुल प्रावधान 4,507 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 911 करोड़ रुपये रहा था। इसके अलावा बैंक का कुल पूंजी पर्याप्तता अनुपात 31 दिसंबर 2025 तक 14.04 फीसदी रहा।
बदल गया टोल टैक्स चुकाने का तरीका, बिना टोल प्लाजा के कटेगा टोल..

नई दिल्ली। Toll Tax Without Toll Plaza: देश में हाईवे नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और रोज लाखों वाहन लंबी दूरी तय करते हैं. लेकिन टोल प्लाजा पर रुकना यात्रियों के सफर को स्लो कर देता है. फास्टैग के बाद भी कई जगह कतारें, जाम और समय की बर्बादी आम है. अब इस परेशानी का समाधान नई तकनीक से किया जा रहा है. देश का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ गुजरात के सूरत में शुरू किया गया है. यहां वाहन बिना रुके निकल जाएंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. इस सिस्टम में हाई रिजोल्यूशन कैमरे, जीपीएस और ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. यानी अब टोल देने का तरीका पूरी तरह डिजिटल और स्मूथ होने जा रहा है. जान लें पूरी खबर. बिना टोल प्लाजा के टोल कलेक्शननए टोल प्लाजा सिस्टम में टोल प्लाजा पर बैरियर नहीं होगा. सड़क पर लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे हर गुजरने वाले वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे. अगर गाड़ी पर फास्टैग नहीं भी है. तब भी नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान हो जाएगी. सिस्टम इसे टोल उल्लंघन के तौर पर दर्ज करेगा और वाहन मालिक को ई चालान भेजा जाएगा. हर लेन में रडार और लिडार आधारित कैमरे 360 डिग्री रिकॉर्डिंग करेंगे. पूरा डेटा कंट्रोल रूम और एनएचएआई सर्वर पर रियल टाइम दर्ज होगा. यानी कोई भी वाहन बिना पेमेंट के नहीं निकल सकेगा. यह टेक्नोलॉजी दुबई, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ही इस्तेमाल की जा रही है फास्टैग है लेकिन बैलेंस कम है तो क्या होगा?अगर आपकी गाड़ी में फास्टैग लगा है लेकिन उसमें बैलेंस कम है या ब्लैकलिस्टेड है. तब भी सिस्टम उसे पहचान लेगा. ऐसे मामलों में वाहन को डिफॉल्टर के रूप में दर्ज किया जाएगा. वाहन मालिक को एसएमएस और ऐप के जरिए अलर्ट मिलेगा. तय समय के भीतर रिचार्ज न करने पर ई चालान जारी होगा. जानबूझकर टोल चोरी करने की कोशिश करने वालों पर भी यह सिस्टम नजर रखेगा. कैमरे हर एंगल से रिकॉर्डिंग करते हैं. इसलिए बच निकलना मुश्किल होगा. आने वाले समय में यह बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम देश के बाकी हाईवे पर भी लागू किया जा सकता है. इससे सफर तेज और आसान हो जाएगा.
सोना 14 हजार और चांदी 94 हजार गिरकर रिकॉर्ड स्तर से नीचे, निवेशकों में चिंता

नई दिल्ली। इस हफ्ते सोने और चांदी के दाम में तेज गिरावट देखी गई है। सोना 13,717 रुपये घटकर 1,52,078 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जबकि चांदी 3,39,350 रुपये प्रति किलो से गिरकर 2,44,929 रुपये पर पहुंच गई। इस गिरावट में चांदी करीब 94,421 रुपये प्रति किलो तक नीचे आ गई। विशेषज्ञों का कहना है कि सोना और चांदी में यह गिरावट मुख्य रूप से दो कारणों से हुई। पहला, हाल के दिनों में दोनों धातुओं की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी थीं, जिससे निवेशकों ने बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग की। दूसरा, फिजिकल डिमांड में कमी और औद्योगिक उपयोग को लेकर बढ़ी चिंताओं ने भी दामों पर दबाव डाला। निवेशकों के लिए यह गिरावट चेतावनी का संकेत है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि इस समय केवल सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें और कीमतों की क्रॉस-चेकिंग करें। सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क वाला गोल्ड चुनना चाहिए। हॉलमार्क नंबर अल्फान्यूमेरिक होते हैं, जैसे AZ4524, जो सोने की कैरेट वैल्यू बताते हैं। ज्वेलर्स और निवेशकों के लिए दो बातें खासकर महत्वपूर्ण हैं। पहला, सोने का सही वजन और दैनिक कीमत को विभिन्न सोर्सेज जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट से क्रॉस-चेक करें। दूसरा, सोने के भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के अनुसार अलग-अलग होते हैं, इसलिए खरीदते समय सही कैरेट का ध्यान रखें। चांदी की असली पहचान करने के लिए चार आसान तरीके हैं। मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। आइस टेस्ट: सिल्वर पर रखी बर्फ तेजी से पिघलेगी। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में कोई गंध नहीं होती, जबकि नकली में कॉपर जैसी गंध हो सकती है। क्लॉथ टेस्ट: सफेद कपड़े से रगड़ने पर असली चांदी के निशान काले होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को भाव के उतार-चढ़ाव को समझते हुए ही सोना और चांदी में निवेश करना चाहिए। वहीं, ज्वेलर्स को सावधानी से स्टॉक प्रबंधन करने और ग्राहकों को प्रमाणित उत्पाद देने की सलाह दी जा रही है।इस हफ्ते की गिरावट के बाद, सोने और चांदी के निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने का है। हालाँकि, अगर वैश्विक मार्केट और घरेलू मांग लंबे समय में स्थिर रहती है, तो इनकी कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं।
यूपीआई पेमेंट में UPI Now Pay Later सुविधा क्या है? जानें कैसे करता है काम और क्या हैं इसके फायदे

नई दिल्ली । अगर आप कभी कम बैंक बैलेंस की वजह से UPI पेमेंट फेल होने की परेशानी से जूझ चुके हैं, तो अब आपके लिए राहत की खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया एनपीसीआई ने UPI यूज़र्स के लिए एक नया और बेहद उपयोगी फीचर ‘UPI Now Pay Later’ लॉन्च किया है, जिसे यूपीआई के जरिए प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन के नाम से भी जाना जाता है। इस सुविधा के शुरू होने के बाद UPI सिर्फ आपके बैंक अकाउंट में मौजूद बैलेंस तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ने पर आप बैंक से पहले से स्वीकृत क्रेडिट का इस्तेमाल कर तुरंत भुगतान कर सकते हैं। क्या है UPI Now Pay Later यह एक डिजिटल क्रेडिट सुविधा है, जिसके तहत बैंक ग्राहकों को एक प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लिमिट प्रदान करते हैं। इस लिमिट का उपयोग कर यूज़र UPI के जरिये तुरंत पेमेंट कर सकते हैं और तय समय सीमा के भीतर बाद में उस राशि का भुगतान कर सकते हैं। यह सुविधा शॉर्ट-टर्म क्रेडिट की तरह काम करती है और खास तौर पर उस स्थिति में मददगार साबित होती है, जब खाते में पर्याप्त बैलेंस न हो। यह कैसे काम करता है herofincorp के मुताबिक, बैंक या लेंडर यूज़र की प्रोफाइल और क्रेडिट स्कोर के आधार पर एक निश्चित क्रेडिट लिमिट तय करता है। उदाहरण के लिए ₹20,000 से ₹50,000 तक। UPI से पेमेंट करते समय यूज़र अपने बैंक अकाउंट की जगह क्रेडिट लाइन को सेलेक्ट कर सकता है। ऐसा करने से भुगतान तुरंत पूरा हो जाता है और राशि क्रेडिट लिमिट से एडजस्ट हो जाती है। बिलिंग साइकिल पूरी होने पर इस्तेमाल की गई रकम का बिल जनरेट होता है, जिसे तय शर्तों के अनुसार चुकाना होता है। जानें इसके प्रमुख फायदे तुरंत क्रेडिट की सुविधाकम बैलेंस में भी बिना रुकावट भुगतानव्यापक स्वीकार्यताजहां भी UPI स्वीकार किया जाता है, वहां इस सुविधा का इस्तेमाल संभवलचीला भुगतान विकल्पतय समय बाद भुगतान करने की सहूलियतपूरी तरह डिजिटल प्रक्रियाबिना किसी कागजी झंझट के आसान और तेज़ ऑनबोर्डिंग क्या है पात्रता आपकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए और आप हर हार में भारतीय नागरिक होने चाहिए। डॉक्यूमेंट के तौर पर मोबाइल नंबर से लिंक पैन और आधार होना चाहिए। साथ ही आपका यूपीआई-सक्षम बैंक में सक्रिय खाता होना चाहिए। हां, आपका सिबिल स्कोर 750 या उससे अधिक होना चाहिए। एनपीसीआई का यह कदम डिजिटल भुगतान को और अधिक सुलभ, लचीला और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
MP TECH SANGAM: इंदौर में ‘टेक संगम’ का सफल आयोजन, आईटी युवाओं को मिला करियर मार्गदर्शन

MP TECH SANGAM: मध्यप्रदेश। तेजी से बदलती आईटी इंडस्ट्री के दौर में युवाओं और प्रोफेशनल्स के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। इन्हीं चुनौतियों को समझने और उनका समाधान तलाशने के उद्देश्य से बद्रीनाथ जिला आईटी मिलन, इंदौर द्वारा ‘टेक संगम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 1 फरवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक प्रेस्टीज कॉलेज यूजी कैंपस, स्कीम नंबर 74, विजय नगर, इंदौर में संपन्न हुआ। आईटी प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए खास मंच ‘टेक संगम’ विशेष रूप से आईटी प्रोफेशनल्स, जॉब सीकर्स, कॉलेज पासआउट्स और फाइनल ईयर के आईटी विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को आईटी इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों से अवगत कराना और करियर से जुड़े सवालों का समाधान प्रदान करना था। DATIYA POLITICS: संगठन विस्तार की तैयारी: दतिया भाजपा के 16 मंडलों में प्रभारी नियुक्त; जाने कौन-कौन है शामिल! विशेषज्ञों से मिला मार्गदर्शन कार्यक्रम के पहले सत्र में प्रतिभागियों को तीन समूहों में बांटा गया, जहां अनुभवी आईटी विशेषज्ञों ने उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान सुझाए। इसके बाद पैनल चर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें स्वप्निल पारखिया, अनुभा माखीजा और प्रवीन राठौर ने आईटी इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स, जरूरी स्किल्स और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। प्रतिभागियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर भी मिला। नेटवर्किंग और संवाद का अवसर कार्यक्रम के दौरान आईटी प्रोफेशनल्स की एकजुटता, संगठन और राष्ट्रीय निर्माण में तकनीकी प्रतिभा की भूमिका पर भी चर्चा हुई। ‘टेक संगम’ का समापन नेटवर्किंग सत्र और हाई टी के साथ हुआ, जहां प्रतिभागियों ने अनुभव साझा किए। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजन युवाओं के करियर के साथ-साथ समाज और देश के विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
एलन मस्क ने रचा इतिहास, बने दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति

नई दिल्ली । दुनिया के दिग्गज उद्योगपति और टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। उनकी एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया से जुड़ी फर्म xAI के अधिग्रहण के बाद मस्क की संपत्ति में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला है। इस बड़े मर्जर के बाद एलन मस्क की नेटवर्थ 800 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर गई है, जिससे वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। फोर्ब्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, SpaceX और xAI के मर्ज होने के बाद दोनों कंपनियों की संयुक्त वैल्यू करीब 1.25 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई है। इस सौदे का सीधा फायदा एलन मस्क की व्यक्तिगत संपत्ति को मिला, जिसमें करीब 84 बिलियन डॉलर की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। फिलहाल मस्क की कुल नेटवर्थ अनुमानित रूप से 852 बिलियन डॉलर करीब 7.7 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है, जो अब तक किसी भी व्यक्ति के लिए ऐतिहासिक स्तर माना जा रहा है। SpaceX-xAI डील से कैसे बढ़ी मस्क की दौलत मर्जर से पहले एलन मस्क के पास स्पेसएक्स में लगभग 42 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। दिसंबर 2025 में हुए एक टेंडर ऑफर के बाद स्पेसएक्स की वैल्यू करीब 800 बिलियन डॉलर आंकी गई थी। इस हिसाब से मस्क के हिस्से की कीमत लगभग 336 बिलियन डॉलर बैठती थी। वहीं, उनकी दूसरी कंपनी xAI में मस्क की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत थी। इस महीने की शुरुआत में xAI ने एक प्राइवेट फंडरेजिंग राउंड पूरा किया था, जिसके बाद कंपनी की वैल्यू लगभग 250 बिलियन डॉलर आंकी गई। इस वैल्यूएशन के हिसाब से xAI में मस्क के शेयर की कीमत करीब 122 बिलियन डॉलर थी। यानी मर्जर से पहले ही मस्क की दोनों कंपनियों में हिस्सेदारी की कुल कीमत सैकड़ों अरब डॉलर में पहुंच चुकी थी। मर्जर के बाद वैल्यू में जबरदस्त उछाल SpaceX और xAI के मर्ज होने के बाद स्पेसएक्स की वैल्यू बढ़कर करीब 1 ट्रिलियन डॉलर हो गई, जबकि xAI की वैल्यू 250 बिलियन डॉलर पर बनी रही। फोर्ब्स के अनुमान के मुताबिक, इस नई संयुक्त कंपनी में अब एलन मस्क की हिस्सेदारी करीब 43 प्रतिशत है। मौजूदा वैल्यू के आधार पर इस हिस्सेदारी की कीमत लगभग 542 बिलियन डॉलर आंकी जा रही है। इसी के चलते मस्क की कुल संपत्ति में एक ही झटके में करीब 84 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ और उनकी नेटवर्थ 800 बिलियन डॉलर के पार निकल गई। यह आंकड़ा उन्हें न केवल मौजूदा समय का सबसे अमीर व्यक्ति बनाता है, बल्कि आधुनिक इतिहास में भी एक नया रिकॉर्ड स्थापित करता है। मर्जर का विचार क्यों आया? SpaceX और xAI के मर्जर के पीछे सिर्फ बिजनेस वैल्यू बढ़ाना ही मकसद नहीं है, बल्कि इसके पीछे एलन मस्क का एक दीर्घकालिक तकनीकी विजन भी छिपा है। स्पेस ट्रांसपोर्टेशन और सैटेलाइट कम्युनिकेशन से जुड़ी कंपनी SpaceX और एआई स्टार्टअप xAI को इस उद्देश्य से जोड़ा गया है ताकि अंतरिक्ष में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कंप्यूटिंग क्षमता को कई गुना बढ़ाया जा सके। इस योजना के तहत आने वाले समय में अंतरिक्ष में बड़ी संख्या में सैटेलाइट्स भेजे जाएंगे, जो केवल इंटरनेट या कम्युनिकेशन के लिए नहीं, बल्कि एक विशाल “स्पेस-बेस्ड डेटा सेंटर” के रूप में भी काम करेंगे। इन सैटेलाइट्स के जरिए एआई मॉडल्स को ट्रेन करना, रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग और ग्लोबल-लेवल कंप्यूटिंग संभव हो सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य की टेक्नोलॉजी में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।पहले भी कर चुके हैं मर्जर यह पहली बार नहीं है जब एलन मस्क ने अपनी कंपनियों को आपस में मर्ज किया हो। इससे पहले मार्च 2025 में उन्होंने अपने एआई स्टार्टअप xAI को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) के साथ मर्ज किया था। उस मर्जर का मकसद सोशल मीडिया डेटा को एआई डेवलपमेंट के लिए इस्तेमाल करना था। अब SpaceX और xAI का मर्जर मस्क की “स्पेस-एआई इकोसिस्टम” की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है। दुनिया की अमीरी की रेस में मस्क सबसे आगे एलन मस्क पहले भी कई बार दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति रह चुके हैं, लेकिन 800 बिलियन डॉलर से ज्यादा की नेटवर्थ उन्हें बाकी अरबपतियों से कहीं आगे ले जाती है। बिजनेस एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर SpaceX-xAI का यह मॉडल सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में मस्क की संपत्ति और प्रभाव दोनों में और इजाफा हो सकता है।