शेयर बाजार में शानदार रैली! सेंसेक्स 650 अंक चढ़ा, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली। मंगलवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी दर्ज की गई। सुबह करीब 11:45 बजे BSE Sensex 668 अंक यानी 0.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,224 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 भी 198 अंक या 0.85 प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,225 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में यह तेजी कई घरेलू और वैश्विक कारणों के चलते देखने को मिल रही है, जिनमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों का सकारात्मक रुख प्रमुख हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजीलार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Nifty Midcap 100 Index 721 अंक यानी 1.28 प्रतिशत की तेजी के साथ 56,892 पर पहुंच गया। वहीं Nifty Smallcap 100 Index 274 अंक या 1.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,406 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक खरीदारी हो रही है और निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को मिला सहाराभारतीय बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को माना जा रहा है। Brent Crude की कीमत करीब 6 प्रतिशत गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है। गौरतलब है कि एक दिन पहले यानी सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में आई तेज गिरावट से ऊर्जा लागत कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे शेयर बाजार को समर्थन मिला है। ट्रंप के बयान से कम हुआ भू-राजनीतिक तनावकच्चे तेल में आई गिरावट के पीछे अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का बयान भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि Iran के साथ चल रहा युद्ध समाप्त होने के करीब है। इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव कम होने की उम्मीद बनी, जिससे तेल की कीमतों में नरमी आई और इसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर पड़ा। रुपये की मजबूती से बढ़ा निवेशकों का भरोसाशेयर बाजार में तेजी का एक कारण डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा की मजबूती भी है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया मजबूत दिखाई दिया। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये का उच्चतम स्तर 91.72 और न्यूनतम स्तर 92.33 रहा। मजबूत रुपये से आयात लागत कम होने की उम्मीद रहती है, जिससे बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बनता है। इंडिया विक्स में गिरावट से घटा बाजार का डरबाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला India VIX भी मंगलवार को तेजी से नीचे आया। खबर लिखे जाने तक यह करीब 15.37 प्रतिशत गिरकर 19.77 पर पहुंच गया था। इंडिया विक्स में गिरावट का मतलब है कि बाजार में डर कम हो रहा है और निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है, जो शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। वैश्विक बाजारों से भी मिला समर्थनवैश्विक बाजारों में तेजी का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिला। एशिया के प्रमुख बाजार जैसे Nikkei 225, Shanghai Composite Index और Hang Seng Index बढ़त के साथ खुले। इसके अलावा सोल, बैंकॉक और जकार्ता के बाजारों में भी मजबूती देखी गई। वहीं अमेरिकी बाजार भी सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और भारतीय शेयर बाजार को भी सहारा मिला।
मेक इन इंडिया को बढ़ावा, एप्पल ने भारत में 53% बढ़ाया उत्पादन; हर चौथा iPhone यहीं बन रहा

नई दिल्ली। अमेरिकी टेक्नोलॉजी दिग्गज Apple ने भारत में अपने उत्पादन को तेजी से बढ़ाते हुए 2025 में आईफोन निर्माण में बड़ा विस्तार किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने इस दौरान भारत में करीब 5.5 करोड़ आईफोन यूनिट्स की असेंबली की, जो पिछले वर्ष के 3.6 करोड़ यूनिट्स के मुकाबले लगभग 53 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि एप्पल अब वैश्विक सप्लाई चेन में भारत को एक अहम मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित कर रहा है। टैरिफ से बचने के लिए भारत बना प्रमुख विकल्पएक रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल अमेरिका में चीनी उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ से बचने के लिए अपने फ्लैगशिप उत्पादों का बड़ा हिस्सा भारत में तैयार कर रहा है। दुनिया भर में कंपनी हर साल लगभग 22 से 23 करोड़ iPhone का उत्पादन करती है। इनमें से अब करीब एक चौथाई हिस्सा भारत में बनने लगा है, जो वैश्विक उत्पादन में भारत की तेजी से बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। पीएलआई योजना से मिला बड़ा प्रोत्साहनभारत में उत्पादन बढ़ाने के पीछे सरकार की Production Linked Incentive Scheme (PLI) योजना की अहम भूमिका रही है। इस योजना के तहत कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने पर वित्तीय प्रोत्साहन मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पीएलआई योजना ने चीन की तुलना में भारत में मौजूद कुछ चुनौतियों जैसे आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत को कम करने में मदद की है। इससे वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला है। फॉक्सकॉन, टाटा और पेगाट्रॉन बना रहे आईफोनएप्पल भारत में अपने कई प्रमुख सप्लायरों के साथ मिलकर आईफोन का निर्माण कर रहा है। इनमें Foxconn, Tata Electronics और Pegatron शामिल हैं। इन कंपनियों के प्लांट्स में अब नई iPhone 17 सीरीज के सभी मॉडल, जिनमें प्रो और प्रो मैक्स वेरिएंट भी शामिल हैं, बनाए जा रहे हैं। वहीं iPhone 15 और iPhone 16 जैसे पुराने मॉडल घरेलू बाजार और निर्यात के लिए भारत में ही तैयार किए जा रहे हैं। भारत में एप्पल का रिटेल नेटवर्क भी बढ़ाभारत में आईफोन की बढ़ती मांग को देखते हुए एप्पल अपने रिटेल नेटवर्क का भी विस्तार कर रहा है। देश में कंपनी की बिक्री 9 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है। इसके साथ ही कंपनी के अब भारत में कुल छह रिटेल स्टोर हो चुके हैं और आने वाले समय में इनके और बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा एप्पल इस साल के अंत तक भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सेवा Apple Pay लॉन्च करने की तैयारी भी कर रहा है। भारत से रिकॉर्ड आईफोन निर्यातइंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत से निर्यात होने वाली सबसे मूल्यवान वस्तु आईफोन बन गया है। देश के विभिन्न प्लांट्स से एप्पल ने करीब 23 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन निर्यात किए, जिनमें से अधिकांश अमेरिका भेजे गए। जनवरी से दिसंबर के दौरान भारत से कुल 30.13 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन निर्यात हुए। पहली बार स्मार्टफोन भारत की शीर्ष निर्यात श्रेणी बनकर उभरे। कुल स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की बड़ी हिस्सेदारीआंकड़ों के मुताबिक भारत के कुल स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए भारत तेजी से एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एप्पल भारत में और निवेश कर सकता है, जिससे देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को और मजबूती मिलेगी
सोना-चांदी में फिर आई चमक! गोल्ड 1.62 लाख पार, चांदी 2.76 लाख के ऊपर

नई दिल्ली। मंगलवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। निवेशकों की बढ़ती खरीदारी के चलते दोनों कीमती धातुएं मजबूत स्तर पर पहुंच गईं। सुबह करीब 10:22 बजे Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने का 2 अप्रैल वाला वायदा कॉन्ट्रैक्ट 1.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,62,010 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी का 5 मई का कॉन्ट्रैक्ट 3.46 प्रतिशत उछलकर 2,76,411 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की मांग बढ़ने से कीमतों में यह उछाल देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ी चमककेवल घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी मजबूत दिखाई दिए। अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर सोने की कीमत 1.40 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5,175 डॉलर प्रति औंस हो गई। वहीं चांदी की कीमत में और ज्यादा तेजी देखने को मिली और यह 5.42 प्रतिशत बढ़कर 89.105 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती दिलचस्पी ने इन धातुओं को मजबूती दी है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से मिला सहारासोने और चांदी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह अमेरिकी मुद्रा में आई कमजोरी को माना जा रहा है। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला US Dollar Index गिरकर 98.85 पर आ गया है, जबकि सोमवार को यह 99 के ऊपर था। डॉलर कमजोर होने पर आमतौर पर सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन मिलता है, क्योंकि इससे अन्य मुद्राओं में इन धातुओं को खरीदना सस्ता हो जाता है और मांग बढ़ जाती है। वैश्विक तनाव ने बढ़ाई सुरक्षित निवेश की मांगइसके अलावा वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने भी सोने और चांदी की कीमतों को सहारा दिया है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक इंटरव्यू में कहा कि Iran के खिलाफ अमेरिकी अभियान “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जीत का मतलब तब माना जाएगा जब तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रहेगी जो अमेरिका, Israel या उसके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सकें। ईरान की प्रतिक्रिया से बढ़ी वैश्विक अनिश्चितताट्रंप के इस बयान पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने सरकारी मीडिया के जरिए कहा कि संघर्ष कब खत्म होगा, यह वाशिंगटन नहीं बल्कि तेहरान तय करेगा। इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूर होकर सोना और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि इन धातुओं की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। आगे भी बनी रह सकती है तेजीविशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है और डॉलर में कमजोरी जारी रहती है तो सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है।हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन मौजूदा हालात में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से कीमती धातुओं का रुख फिलहाल मजबूत बना हुआ है।
मिडिल ईस्ट तनाव में नरमी के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में 6% की बड़ी गिरावट

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में Iran के साथ तनाव कम होने की उम्मीद के बीच मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार में अचानक आई इस नरमी के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Crude फ्यूचर्स की कीमत 6.51 डॉलर यानी लगभग 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी मानक West Texas Intermediate (WTI) कच्चे तेल की कीमत 6.12 डॉलर या 6.5 प्रतिशत गिरकर 88.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। ट्रंप के बयान के बाद बाजार में आई नरमीतेल की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि इस अभियान की सफलता का मतलब यह होगा कि तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रहेगी जो अमेरिका, Israel या उसके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सकें। उनके इस बयान से वैश्विक बाजारों को संकेत मिला कि क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित होने का जोखिम घट सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी चेतावनीट्रंप ने ईरान को Strait of Hormuz के जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यह जलडमरूमध्य सुरक्षित रहेगा क्योंकि वहां अमेरिकी नौसेना के कई जहाज तैनात हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों से निर्यात होने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता बन सकता है। इजरायल के साथ संयुक्त अभियान का असरइस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने Iran की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से Israel के साथ संयुक्त सैन्य अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए गए थे। इन घटनाओं के चलते वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई थी और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि अब तनाव कम होने की उम्मीद से बाजार में राहत का माहौल बना है। सोमवार को कई साल के उच्च स्तर पर पहुंचा था तेलगौरतलब है कि इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। उस समय Brent Crude की कीमत 119.50 डॉलर प्रति बैरल और West Texas Intermediate की कीमत 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। इसके बाद मंगलवार को बाजार में मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद से कीमतों में तेज गिरावट आ गई। भारत में महंगाई पर असर सीमित रहने की उम्मीदइस बीच भारत की वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को संसद में कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि का भारत की मुद्रास्फीति दर पर फिलहाल बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि देश में महंगाई दर अभी “निम्नतम सीमा” के करीब बनी हुई है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 को भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले तक भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमतें लगभग एक साल से लगातार गिर रही थीं।
म्यूचुअल फंड में बढ़ा निवेश का जोश, फरवरी में इक्विटी इनफ्लो 25,977 करोड़ पार; AUM 82 लाख करोड़ से ऊपर
नई दिल्ली। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में फरवरी के दौरान इक्विटी निवेश में मजबूती देखने को मिली। Association of Mutual Funds in India (AMFI) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में नेट इक्विटी इनफ्लो बढ़कर 25,977.91 करोड़ रुपये हो गया। यह जनवरी के 24,028.59 करोड़ रुपये से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा इक्विटी म्यूचुअल फंड में बना हुआ है। लंबी अवधि के निवेश के लिए निवेशक लगातार इस विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसके कारण इक्विटी फंड में निवेश की गति बनी हुई है। इक्विटी AUM में भी हुआ इजाफाफरवरी के अंत तक म्यूचुअल फंड उद्योग का इक्विटी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 35,39,475.91 करोड़ रुपये हो गया। जनवरी में यह आंकड़ा 34,86,777.63 करोड़ रुपये था। अगर डेट और अन्य फंड कैटेगरी को भी शामिल किया जाए तो पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल AUM फरवरी के अंत तक 82,02,956.35 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। वहीं पूरे फरवरी महीने में औसत AUM 83,42,616.57 करोड़ रुपये रहा। इसके मुकाबले जनवरी के अंत में कुल AUM 81,01,305.58 करोड़ रुपये था और पूरे महीने का औसत AUM 82,01,174.62 करोड़ रुपये रहा था। फ्लेक्सी कैप फंड में सबसे ज्यादा निवेशफरवरी में सबसे ज्यादा निवेश Flexi Cap Funds में दर्ज किया गया। इस श्रेणी में 6,924.65 करोड़ रुपये का नेट इक्विटी इनफ्लो आया। इसके अलावा Multi Cap Funds में 1,933.53 करोड़ रुपये और Large Cap Funds में 2,111.68 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। वहीं Large and Mid Cap Funds में 3,137.73 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। मिडकैप और स्मॉलकैप फंड में निवेश जारीफरवरी में Mid Cap Funds में 4,002.99 करोड़ रुपये और Small Cap Funds में 3,881.06 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया। इसके अलावा Sectoral and Thematic Funds में भी 2,987.29 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो देखने को मिला। इससे साफ है कि निवेशक अलग-अलग कैटेगरी के फंड में संतुलित निवेश कर रहे हैं। हाइब्रिड और डेट स्कीम में भी निवेशफरवरी में Hybrid Mutual Fund Schemes में कुल 11,983.37 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया, हालांकि यह जनवरी के 17,356.02 करोड़ रुपये से कम रहा। वहीं Debt Mutual Fund Schemes में फरवरी के दौरान 94,530 करोड़ रुपये का कुल इनफ्लो दर्ज किया गया, जो जनवरी में आए 1,56,458.63 करोड़ रुपये से कम है। गोल्ड ETF और इंडेक्स फंड में भी निवेशफरवरी में निवेशकों ने अन्य निवेश विकल्पों में भी रुचि दिखाई। Gold ETFs में 5,254.95 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। इसके अलावा Index Funds में 3,233.44 करोड़ रुपये और अन्य Exchange Traded Funds में 4,487.15 करोड़ रुपये का निवेश आया। फरवरी में लॉन्च हुए 21 नए फंडफरवरी के दौरान म्यूचुअल फंड उद्योग में कई नए निवेश विकल्प भी सामने आए। इस महीने कुल 21 नए फंड लॉन्च किए गए। इनमें 8 इक्विटी फंड, 1 डेट स्कीम, 1 हाइब्रिड स्कीम, 4 इंडेक्स फंड और 7 ETF शामिल हैं।
निवेशकों का भरोसा बरकरार! फरवरी में म्यूचुअल फंड SIP इनफ्लो 29,845 करोड़ रुपये पहुंचा

नई दिल्ली। म्यूचुअल फंड में निवेश का लोकप्रिय माध्यम बन चुके SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए फरवरी 2026 में 29,845 करोड़ रुपये का निवेश आया। यह आंकड़ा जनवरी 2026 के 31,002 करोड़ रुपये से थोड़ा कम रहा। यह जानकारी Association of Mutual Funds in India (AMFI) द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आंकड़ों से सामने आई है। हालांकि, सालाना आधार पर निवेश में मजबूत बढ़त देखने को मिली है। फरवरी 2025 में SIP इनफ्लो 25,999 करोड़ रुपये था, जबकि इस साल यह बढ़कर 29,845 करोड़ रुपये हो गया। यानी एक साल में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो म्यूचुअल फंड में बढ़ते निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। इक्विटी फंड में भी बढ़ा निवेशइक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। फरवरी में नेट इक्विटी इनफ्लो बढ़कर 25,977.91 करोड़ रुपये हो गया, जो जनवरी में 24,028.59 करोड़ रुपये था। यह संकेत देता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक इक्विटी फंड में निवेश जारी रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए SIP और इक्विटी फंड को निवेशक बेहतर विकल्प मान रहे हैं। यही कारण है कि बाजार में अस्थिरता के बावजूद निवेश की रफ्तार बनी हुई है। फ्लेक्सी कैप फंड में सबसे ज्यादा निवेशफरवरी में सबसे अधिक निवेश Flexi Cap Funds में देखा गया। इस श्रेणी में 6,924.65 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। हालांकि यह आंकड़ा जनवरी के 7,672.36 करोड़ रुपये से थोड़ा कम रहा। वहीं Multi Cap Funds में फरवरी के दौरान 1,933.53 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो जनवरी के 1,995.23 करोड़ रुपये से थोड़ा कम है। इसके अलावा Large Cap Funds में निवेश बढ़कर 2,111.68 करोड़ रुपये हो गया, जबकि जनवरी में यह 2,004.98 करोड़ रुपये था। मिडकैप और स्मॉलकैप फंड में भी निवेशकों की दिलचस्पीमिडकैप और स्मॉलकैप फंड में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। फरवरी में Mid Cap Funds में 4,002.99 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। वहीं Small Cap Funds में निवेश बढ़कर 3,881.06 करोड़ रुपये हो गया, जो जनवरी में 2,942.11 करोड़ रुपये था। इसके अलावा Sectoral and Thematic Funds में भी निवेश बढ़कर 2,987.29 करोड़ रुपये हो गया, जो जनवरी के 1,042.56 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM भी बढ़ाफरवरी के अंत तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का इक्विटी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 35,39,475.91 करोड़ रुपये हो गया। जनवरी में यह 34,86,777.63 करोड़ रुपये था। अगर डेट फंड को मिलाकर देखा जाए तो कुल AUM (Assets Under Management) फरवरी के अंत तक 82,02,956.35 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं पूरे फरवरी महीने में औसत AUM 83,42,616.57 करोड़ रुपये रहा। इसके मुकाबले जनवरी के अंत में कुल AUM 81,01,305.58 करोड़ रुपये था और पूरे महीने का औसत AUM 82,01,174.62 करोड़ रुपये रहा था। SIP के जरिए निवेश का ट्रेंड लगातार मजबूतविशेषज्ञों के मुताबिक SIP के जरिए निवेश का ट्रेंड लगातार मजबूत हो रहा है। छोटे निवेशकों से लेकर बड़े निवेशक तक नियमित निवेश के इस तरीके को अपनाते जा रहे हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद SIP निवेशकों को लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देने का भरोसा देता है। यही वजह है कि हर महीने म्यूचुअल फंड उद्योग में SIP के जरिए बड़ी मात्रा में निवेश आता रहा है और भविष्य में भी इसके और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। 📊
चंडीगढ़ ब्रांच फ्रॉड केस में बड़ा कदम, IDFC First Bank ने चुकाए 645 करोड़ रुपये के दावे
नई दिल्ली। निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक IDFC First Bank ने मंगलवार को बताया कि उसने अपनी चंडीगढ़ शाखा में सामने आए धोखाधड़ी मामले से जुड़े सभी दावों का निपटारा कर दिया है। बैंक ने प्रभावित खातों से जुड़े कुल 645 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। यह राशि बैंक के शुरुआती अनुमान से करीब 55 करोड़ रुपये अधिक है। बैंक ने यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी और स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में कोई नई गड़बड़ी सामने नहीं आई है। बैंक के मुताबिक सभी दावे उसी घटना और उसी चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हैं और फिलहाल किसी नए मामले की पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती अनुमान से बढ़ी भुगतान राशिबैंक के अनुसार शुरुआत में धोखाधड़ी की राशि करीब 590 करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि बाद में जांच और खातों के मिलान के दौरान कुछ अतिरिक्त दावे सामने आए, जिसके बाद कुल भुगतान बढ़कर 645 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बैंक ने कहा कि उसने सभी प्रभावित ग्राहकों के दावों का निपटारा अपने निर्धारित सिद्धांतों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि 25 फरवरी 2026 के बाद देश भर में इस घटना से संबंधित कोई नया दावा सामने नहीं आया है। ग्राहकों के खातों का पूरा मिलानआईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया कि इस मामले से जुड़े सभी खातों का मिलान पूरा कर लिया गया है। बैंक ने कहा कि यह घटना केवल चंडीगढ़ की एक शाखा तक सीमित थी और पूरे बैंकिंग सिस्टम पर इसका कोई व्यापक प्रभाव नहीं पड़ा है। बैंक ने अपने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए यह भी कहा कि वह इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा और धोखाधड़ी से हुई राशि की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया जारी रखेगा। बैंक के डिपॉजिट बेस पर नहीं पड़ा असरबैंक के मुताबिक इस घटना के बावजूद उसके डिपॉजिट बेस पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। 28 फरवरी 2026 तक बैंक का कुल डिपॉजिट 2,92,381 करोड़ रुपये रहा, जबकि दिसंबर 2025 के अंत में यह 2,91,133 करोड़ रुपये था। इससे साफ संकेत मिलता है कि ग्राहकों का भरोसा बैंक पर बना हुआ है और जमा राशि में स्थिरता बनी हुई है। बैंक ने यह भी बताया कि उसका लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) मौजूदा तिमाही में 114 प्रतिशत के आरामदायक स्तर पर है, जो बैंक की वित्तीय स्थिति को मजबूत दर्शाता है। हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ा था मामलाइससे पहले सामने आई जानकारी के अनुसार यह मामला Haryana सरकार के कुछ खातों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित था। इस मामले में बैंक के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने अंतरराष्ट्रीय ऑडिट फर्म KPMG को फॉरेंसिक ऑडिट का जिम्मा सौंपा है। उम्मीद है कि इस ऑडिट की अंतिम रिपोर्ट अगले चार से पांच सप्ताह के भीतर सामने आ जाएगी, जिससे पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। जांच पूरी होने तक चार अधिकारी निलंबितबैंक ने इस घटना के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। बैंक का कहना है कि जांच पूरी होने तक ये अधिकारी अपने पद पर नहीं रहेंगे। इस बीच घटना के बाद Government of Haryana ने एहतियाती कदम उठाते हुए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ-साथ AU Small Finance Bank को भी सरकारी कामकाज से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। बैंक ने कहा कि जांच पूरी होने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल वह ग्राहकों के हितों की सुरक्षा और बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है।
ग्लोबल संकेतों से बाजार में जोश, हरे निशान में खुला शेयर मार्केट; कंज्यूमर स्टॉक्स में जोरदार खरीदारी

नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को जोरदार शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहा और प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले। BSE Sensex 809 अंक यानी करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ 78,375.73 के स्तर पर खुला। वहीं Nifty 50 भी 252 अंक या लगभग एक प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,280.80 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल और घरेलू स्तर पर निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते शुरुआती सत्र में बाजार में उत्साह दिखाई दिया। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारीमंगलवार के शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी का नेतृत्व कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने किया। Nifty Consumer Durables Index दो प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ टॉप गेनर बनकर उभरा। इसके अलावा ऑटो, पीएसयू बैंक, रियल्टी, मैन्युफैक्चरिंग, मेटल, फार्मा, डिफेंस, हेल्थकेयर, मीडिया, कमोडिटी और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर आईटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई, जिसके चलते ये सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजीलार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी तेजी का रुख देखने को मिला। Nifty Midcap 100 Index 618 अंक यानी 1.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 56,884 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty Smallcap 100 Index 224 अंक या 1.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 16,357 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। इससे साफ संकेत मिला कि बाजार में केवल बड़ी कंपनियों ही नहीं, बल्कि मिड और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों में रही बढ़तसेंसेक्स पैक में कई दिग्गज कंपनियों के शेयर तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। इनमें InterGlobe Aviation, UltraTech Cement, Asian Paints, Mahindra & Mahindra, Adani Ports, Titan Company, Tata Steel, Larsen & Toubro, ICICI Bank, State Bank of India, Maruti Suzuki, Bajaj Finserv, HDFC Bank, Hindustan Unilever, Trent Limited, Kotak Mahindra Bank, Bharat Electronics Limited और Sun Pharmaceutical शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर Infosys, Tech Mahindra, HCLTech, Power Grid Corporation of India, Bharti Airtel, ITC Limited और Axis Bank के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। एशियाई और अमेरिकी बाजारों का मिला सपोर्टवैश्विक बाजारों से भी सकारात्मक संकेत मिले। एशिया के प्रमुख बाजार जैसे Nikkei 225, Shanghai Composite Index और Hang Seng Index बढ़त के साथ खुले। इसके अलावा बैंकॉक, जकार्ता और सोल के बाजारों में भी तेजी का रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजार भी सोमवार के कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। Dow Jones Industrial Average में करीब 0.50 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी आधारित Nasdaq Composite में 1.38 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। एफआईआई ने बेचे शेयर, डीआईआई ने किया निवेशनिवेश के मोर्चे पर विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का रुख अलग-अलग रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी Foreign Institutional Investors ने सोमवार को 6,345.57 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी Domestic Institutional Investors ने 9,013.80 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को सहारा दिया। कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमीअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी के बाद अब कुछ नरमी देखने को मिल रही है। खबर लिखे जाने तक WTI Crude Oil 6.30 प्रतिशत गिरकर 88.80 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं Brent Crude 6.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक संकेतों की मजबूती और घरेलू निवेशकों की खरीदारी से फिलहाल बाजार में सकारात्मक रुख बना हुआ है, हालांकि आगे के सत्रों में वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
ट्रंप के ईरान युद्ध जल्द खत्म होने के संकेत के बाद कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट,,,

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के यह संकेत देने के बाद कि ईरान में युद्ध जल्द (Iran War) ही समाप्त हो जाएगा, कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Price) में भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 91.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत में 10% तक की गिरावट आई और यह 85.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। यह गिरावट सोमवार को हुए उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बाद आई है, जब तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दायरा महामारी के दौरान कीमतों के नकारात्मक होने के बाद सबसे ज्यादा था। बता दें मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने ग्लोबल एनर्जी माार्केट्स को हिलाकर रख दिया है और मुद्रास्फीति संकट को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक फ्लोरिडा में एक संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि वह तेल से संबंधित प्रतिबंधों में छूट देने और होर्मुज स्ट्रेट्स से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए अमेरिकी नौसेना को तैनात करने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप ने सोमवार देर रात पत्रकारों से कहा, “हम तेल की कीमतों को कम रखना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “इस संकट की वजह से कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई थीं,” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह संघर्ष इस सप्ताह के अंत तक खत्म होगा। तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं थींसोमवार को तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं, जब फारस की खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों को होर्मुज के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण उत्पादन कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। यह संकरे जलमार्ग आमतौर पर वैश्विक कच्चे तेल के प्रवाह का पांचवां हिस्सा संभालता है। हालांकि, बाद में सत्र में कीमतों में गिरावट आई क्योंकि, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने आपातकालीन भंडार जारी करने के प्रयास पर विचार किया। ट्रंप पर अतिरिक्त दबावयह संघर्ष अब अपने दूसरे सप्ताह में है और इसमें एक दर्जन से अधिक देश शामिल हो गए हैं, जिससे तेल, प्राकृतिक गैस और गैसोइल जैसे उत्पादों सहित ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है। अमेरिका में खुदरा पेट्रोल की कीमतें अगस्त 2024 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे ट्रंप पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैंकरों को एस्कॉर्ट करने या तेल संबंधी प्रतिबंधों में छूट देने की योजना पर अतिरिक्त जानकारी नहीं दी, सिवाय इसके कि उन्होंने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर इस विषय पर चर्चा की थी। पिछले सप्ताह, ट्रंप प्रशासन ने भारत के लिए रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद में अस्थायी रूप से वृद्धि करने का रास्ता साफ कर दिया, जो इस व्यापार पर महीनों से चल रहे दबाव से उलट था। बाजार की नजरें होर्मुज परबाजार की नजरें होर्मुज से टैंकरों के आवागमन को फिर से शुरू होते देखने पर टिकी हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से कई जहाजों पर हमले के कारण अधिकांश जहाजों ने इस जलमार्ग से बचना शुरू कर दिया है। फिर भी, हाल के दिनों में सऊदी कच्चा तेल ले जाने वाला एक टैंकर वहां से गुजरा, जबकि ईरान ने इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल भेजना जारी रखा है। होर्मुज के बंद होने के कारणभंडारण तेजी से भर जाने के कारण सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात ने उत्पादन कम कर दिया है। मध्य पूर्व से कच्चे तेल और तेल उत्पादों के प्रवाह पर पड़े इस संकट के कारण रिफाइनरियों ने कुछ कार्यों और आपूर्ति को रोक दिया है, और एशियाई ऊर्जा खरीदारों ने मूल रूप से अन्य क्षेत्रों के लिए जाने वाले ईंधन शिपमेंट को लुभाने के लिए प्रतिस्पर्धियों से आगे बढ़कर बोली लगाई है।
Iran युद्ध के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल… 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा कुल बाजार मूल्य

नई दिल्ली। ईरान युद्ध (Iran America War) के कारण दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। दूसरी तरफ, इस अनिश्चितता के बीच सोने (Gold) की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। लिहाजा, निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में तेजी से सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इस वजह से वैश्विक स्तर पर सोने का कुल बाजार मूल्य लगभग 30 से 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह मूल्य भारत और ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम (UK) की संयुक्त अर्थव्यवस्था यानी साझा GDP से भी काफी बड़ा माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों और उसके जवाब में ईरान की सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता आई है। इसी वजह से निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सोने में लगाना शुरू कर दिया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,400 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई है और यह 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने वाली है। क्यों कहा जा रहा है ‘फाइनेंशियल सुपरपावर’?एक रिपोर्ट के मुताबिक सोने की कीमतों में इस तेज बढ़ोत्तरी के कारण दुनिया में मौजूद कुल सोने का अनुमानित मूल्य 30–35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भारत की कुल जीडीपी फिलहाल लगभग 3.5 से 4 ट्रिलियन डॉलर के बीच है जिसके जल्द ही 5 ट्रिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है। दूसरी तरफ यूनाइडेट किंगडम यानी ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की है। इस तरह सोने का कुल मूल्य दोनों देशों की संयुक्त जीडीपी से कई गुना बड़ा हो गया है। इसी कारण कुछ विश्लेषक इसे “गोल्ड सुपरपावर” कह रहे हैं। निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकानाजब दुनिया में युद्ध, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद संपत्ति मानते हैं। इसलिए हर बार किसी बड़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सोने की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हाल के महीनों में सोने की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की खरीद, महामारी के बाद बढ़ी महंगाई, डॉलर और अन्य मुद्राओं पर बढ़ती अनिश्चितता। आगे क्या होगा?हालांकि विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि यदि ईरान संघर्ष कम होता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है या ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है। वहीं कई विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कागजी मुद्राओं पर कम होते भरोसे के कारण सोना लंबे समय तक मजबूत निवेश बना रह सकता है। बहरहाल, ईरान युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बीच सोना एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षित संपत्ति के रूप में उभर रहा है, जिसका कुल मूल्य कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से भी अधिक हो चुका है।