धोखाधड़ी मामलों में गिरावट के बावजूद बैंकिंग सिस्टम को भारी झटका, तीन साल में रकम चार गुना तक बढ़ी

नई दिल्ली । देश के बैंकिंग क्षेत्र में सामने आए ताज़ा आंकड़े एक विरोधाभासी तस्वीर पेश कर रहे हैं, जहां एक तरफ धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर इन मामलों से जुड़े वित्तीय नुकसान में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। एक हालिया वार्षिक वित्तीय आकलन के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी मामलों की संख्या घटकर लगभग 10,114 रह गई, जबकि एक वर्ष पहले यह संख्या 23,722 के करीब थी। इसके बावजूद इन मामलों में शामिल कुल रकम बढ़कर लगभग 48,021 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत अधिक है। यह स्थिति इस ओर संकेत करती है कि छोटे स्तर की धोखाधड़ी कम हुई है, लेकिन बड़े और जटिल वित्तीय घोटालों का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों के दौरान यह रुझान और अधिक स्पष्ट हो गया है, जिसमें मामलों की संख्या लगातार कम होती गई लेकिन वित्तीय नुकसान कई गुना बढ़ता गया। विशेष रूप से बैंकिंग प्रणाली में कर्ज और एडवांस से जुड़े धोखाधड़ी मामलों ने सबसे बड़ा योगदान दिया है, जो कुल धोखाधड़ी राशि का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। यह दर्शाता है कि बैंकिंग संस्थानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब डिजिटल या छोटे स्तर की धोखाधड़ी नहीं बल्कि बड़े कॉरपोरेट और लोन आधारित घोटाले बन चुके हैं। सरकारी बैंकों पर इन धोखाधड़ी मामलों का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया है, जहां नुकसान की राशि में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी से होने वाला वित्तीय नुकसान 35,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 51 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही कुल धोखाधड़ी राशि में इन बैंकों की हिस्सेदारी भी बढ़कर तीन-चौथाई के करीब पहुंच गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस चुनौती का सबसे बड़ा बोझ उठा रहे हैं। दूसरी ओर निजी बैंकों में भी धोखाधड़ी की रकम में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि वहां इसका दायरा अपेक्षाकृत सीमित रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह अंतर बैंकिंग मॉडल, जोखिम मूल्यांकन और ऋण वितरण प्रक्रियाओं में अंतर के कारण देखा जा रहा है। वहीं डिजिटल भुगतान, कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि तकनीकी सुरक्षा उपायों ने छोटे साइबर फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है। हालांकि डिजिटल क्षेत्र में सुधार के बावजूद बड़े वित्तीय घोटाले बैंकिंग व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। कर्ज आधारित धोखाधड़ी मामलों में लगातार वृद्धि इस बात की ओर इशारा करती है कि ऋण मंजूरी और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही वित्तीय संस्थानों को जोखिम आकलन और अनुपालन तंत्र को अधिक सख्त करने की दिशा में कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह के बड़े नुकसान को रोका जा सके। कुल मिलाकर यह स्थिति स्पष्ट करती है कि बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी का स्वरूप बदल रहा है। जहां छोटे और डिजिटल फ्रॉड पर नियंत्रण बढ़ा है, वहीं बड़े वित्तीय घोटाले अब सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं, जिनका सीधा असर अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर पड़ सकता है।
HDFC बैंक का बड़ा बयान, 45 करोड़ की गड़बड़ी के आरोपों से किया इनकार

नई दिल्ली। HDFC Bank ने 45 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बैंक में मजबूत निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं तथा सभी मामलों को तय प्रक्रियाओं के तहत ही संभाला जाता है। बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया कि चुनिंदा तथ्यों के आधार पर लगाए जा रहे आरोप भ्रामक हैं और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की अटकलों को पूरी तरह अस्वीकार किया जाता है। बैंक ने स्पष्ट किया कि आंतरिक समीक्षा और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम निष्कर्ष निकाला जाता है। दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ऑफ द बोर्ड (एसीबी) ने वित्त वर्ष 2024 और 2025 के दौरान Maharashtra State Road Development Corporation को किए गए करीब 45 करोड़ रुपए के भुगतान की आंतरिक सतर्कता जांच के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला एमएसआरडीसी द्वारा बैंक में जमा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज भुगतान से जुड़ा बताया गया। आरोप लगाया गया कि राशि सीधे ब्याज भुगतान के तौर पर जारी करने के बजाय मार्केटिंग विभाग के जरिए चार स्थानीय विक्रेताओं को सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के नाम पर भेजी गई। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर इस व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई थी, जिसमें बैंक के एमडी और सीईओ Sashidhar Jagdishan की मौजूदगी का भी जिक्र किया गया। हालांकि बैंक ने इन आरोपों पर सीधे तौर पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उसकी सभी प्रक्रियाएं तय नियामकीय मानकों और आंतरिक नियमों के अनुसार संचालित होती हैं। इन खबरों के बाद शेयर बाजार में भी असर देखने को मिला। NSE: HDFCBANK के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और कारोबार के दौरान यह करीब 2.69 प्रतिशत टूटकर 757.90 रुपए तक पहुंच गया।
दिल्ली से पटना तक पेट्रोल 110 के पार, गोल्ड-सिल्वर खरीदने वालों को मिली राहत

नई दिल्ली। देशभर में आम जनता इस समय भीषण महंगाई के चक्रव्यूह में फंस चुकी है। एक तरफ जहां पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है, वहीं दूसरी तरफ सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के दाम सर्वकालिक उच्च स्तर के आसपास बने हुए हैं। आज यानी 28 मई 2026 को भी देश के अधिकांश हिस्सों में ईंधन की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे ट्रांसपोर्टेशन से लेकर रोजमर्रा की जरूरी चीजों के महंगे होने का खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर, रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने के बाद आज सोने और चांदी की कीमतों में बेहद मामूली नरमी देखी गई है, लेकिन यह गिरावट इतनी कम है कि इससे उपभोक्ताओं को कोई खास राहत मिलती नहीं दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में गहराते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण घरेलू तेल कंपनियों ने पिछले 13 दिनों में चार बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। इस अल्पावधि में पेट्रोल और डीजल करीब 7 से 8 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इसका सबसे बड़ा असर दिल्ली-NCR और मुंबई जैसे महानगरों में देखा जा रहा है। दिल्ली में जो पेट्रोल कुछ समय पहले तक 95 रुपये के आसपास था, वह अब 102 रुपये के पार चला गया है। वहीं मुंबई और पटना जैसे शहरों में तो पेट्रोल की कीमतें 110 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को भी पार कर चुकी हैं। इस बढ़ोतरी ने न केवल निजी वाहन चालकों बल्कि ऑटो, कैब और माल ढुलाई करने वाले कमर्शियल वाहनों की कमर तोड़ दी है। ईंधन की इस चौतरफा मार के बीच सर्राफा बाजार से आज हल्की गिरावट की खबर आई है। पिछले काफी समय से आसमान छू रहे सोने के भाव में आज थोड़ी सुस्ती रही, जिसके बाद 24 कैरेट सोना बाजार में ₹1,59,000 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,46,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह चांदी की कीमतों में भी मामूली गिरावट आई है और यह ₹2,84,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। हालांकि, इस मामूली गिरावट के बावजूद मई के महीने में चांदी अब तक 11 प्रतिशत से ज्यादा महंगी हो चुकी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी को तरजीह दे रहे हैं, जिससे लंबी अवधि में इनमें तेजी का रुख बना रहेगा। ऐसे में जानकारों की सलाह है कि इस उच्च स्तर पर एकमुश्त निवेश करने के बजाय छोटी-छोटी किश्तों में खरीदारी करना ही समझदारी होगी।
मंगल पर एपीएक्सएस का कमाल, 1761 नमूनों की जांच कर भेजीं 3943 वैज्ञानिक रिपोर्ट

नई दिल्ली। मंगल ग्रह की सतह पर लगातार वैज्ञानिक खोजों में जुटा नासा का क्यूरियोसिटी रोवर एक बार फिर चर्चा में है। इस रोवर पर लगा कनाडा का अत्याधुनिक अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (APXS) अब तक 1761 नमूनों की जांच कर 3943 वैज्ञानिक रिपोर्ट पृथ्वी तक भेज चुका है। यह हाईटेक उपकरण मंगल की मिट्टी और चट्टानों के रहस्यों को समझने में वैज्ञानिकों की बड़ी मदद कर रहा है। कनाडाई स्पेस एजेंसी के अनुसार, APXS का मुख्य उद्देश्य मंगल ग्रह की सतह पर मौजूद रासायनिक तत्वों की पहचान करना और यह पता लगाना है कि क्या कभी वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद थीं। आकार में रूबिक क्यूब जैसा दिखने वाला यह उपकरण क्यूरियोसिटी रोवर की रोबोटिक भुजा के सिरे पर लगा है। जब रोवर किसी चट्टान या मिट्टी के नमूने के करीब पहुंचता है, तब APXS उस पर एक्स-रे और अल्फा कणों की बौछार करता है। इसके बाद नमूने से निकलने वाली ऊर्जा का विश्लेषण कर उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाया जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह उपकरण बेहद सूक्ष्म तत्वों की भी पहचान करने में सक्षम है। किसी नमूने की विस्तृत जांच में लगभग दो से तीन घंटे का समय लगता है, जबकि त्वरित विश्लेषण करीब 10 मिनट में पूरा हो जाता है। APXS ने साल 2024 में एक अहम खोज में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। क्यूरियोसिटी रोवर के गुजरने के दौरान एक चट्टान टूट गई थी, जिसके अंदर शुद्ध सल्फर के क्रिस्टल मिले थे। मंगल ग्रह पर पहली बार इस तरह के क्रिस्टल मिलने से वैज्ञानिकों में उत्साह बढ़ गया था। माना जा रहा है कि इससे मंगल के प्राचीन वातावरण और वहां की प्राकृतिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी। कनाडाई स्पेस एजेंसी ने बताया कि APXS दिन और रात दोनों समय काम कर सकता है। यह उपकरण थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर से संचालित होता है, जिससे रोवर को सौर ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यही वजह है कि क्यूरियोसिटी रोवर मंगल की कड़ाके की सर्दी में भी सक्रिय बना रहता है। 1 फरवरी 2026 तक क्यूरियोसिटी रोवर मंगल ग्रह पर 36.2 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि APXS से मिलने वाले आंकड़े भविष्य में मानव मिशनों और मंगल पर जीवन की संभावनाओं को समझने में बेहद अहम साबित होंगे।
भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने पकड़ी रफ्तार, अप्रैल में 10.4 अरब डॉलर का कारोबार

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद भारत के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात ने वित्त वर्ष 2026-27 की मजबूत शुरुआत की है। अप्रैल 2026 में देश का इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 10.35 अरब डॉलर पहुंच गया। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अप्रैल में यह निर्यात 9.52 अरब डॉलर था। इस बार कई प्रमुख सेक्टर्स में मजबूत मांग और बेहतर प्रदर्शन के कारण निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। डेटा के मुताबिक एल्युमीनियम और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि तांबा और उससे संबंधित उत्पादों में 80 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल मशीनरी और उपकरणों के निर्यात में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ऑटोमोबाइल सेक्टर ने भी निर्यात वृद्धि में अहम योगदान दिया। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के निर्यात में 36 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि ऑटो कंपोनेंट्स और पार्ट्स के निर्यात में 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। EEPC इंडिया के अनुसार, इंजीनियरिंग गुड्स के कुल 34 पैनलों में से 28 ने अप्रैल महीने में सकारात्मक निर्यात वृद्धि दर्ज की, जो सेक्टर की व्यापक मजबूती को दर्शाता है। ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों और बाजारों में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत-ओमान व्यापार समझौते के कारण ओमान को निर्यात में बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (WANA) क्षेत्र में संघर्ष के कारण निर्यात पर दबाव बना हुआ है। वहीं आसियान देशों में भी मांग कमजोर रहने और ऑटोमोबाइल शिपमेंट में गिरावट के चलते निर्यात अपेक्षाकृत धीमा रहा। अप्रैल में अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के प्रमुख बाजार रहे। वहीं चीन को होने वाला निर्यात 81.7 प्रतिशत बढ़कर 301 मिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गया। क्षेत्रीय स्तर पर उत्तरी अमेरिका में 7.1 प्रतिशत और यूरोपीय संघ में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि यूएई, सिंगापुर और सऊदी अरब को होने वाले निर्यात में गिरावट देखने को मिली। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में देश के कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग गुड्स की हिस्सेदारी 23.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 24.9 प्रतिशत थी।
कोयला गैसीकरण को लेकर बड़ा कदम, 37,500 करोड़ की योजना के तहत निवेश और रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली । भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में गुरुवार को एक राष्ट्रीय स्तर का रोड शो आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में निवेश, तकनीक और साझेदारी को प्रोत्साहित करना है। यह पहल कोयला संसाधनों के अधिक कुशल और पर्यावरण-अनुकूल उपयोग को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि गैसीकरण तकनीक के माध्यम से देश के विशाल कोयला भंडार का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कोयला मंत्रालय के अनुसार इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये रखा गया है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक लगभग 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण को सुनिश्चित करना है। इस पहल से न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात पर निर्भरता में भी कमी आने की संभावना है। सरकार का आकलन है कि यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा देगा और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगा। इस योजना के तहत लगभग 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद जताई गई है। इससे कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 25 बड़ी परियोजनाओं का विकास हो सकता है, जिनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 50 हजार रोजगार के अवसर उत्पन्न होने का अनुमान है। इसके अलावा, 75 मिलियन टन कोयला और लिग्नाइट के उपयोग से प्रतिवर्ष लगभग 6,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होने की संभावना जताई गई है। साथ ही जीएसटी और अन्य करों के माध्यम से भी सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी। इस रोड शो का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं है, बल्कि एक मजबूत कोयला गैसीकरण इकोसिस्टम विकसित करना भी है। इसमें नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, प्रौद्योगिकी प्रदाता और वित्तीय संस्थान एक साथ मिलकर इस क्षेत्र के भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे। सरकार चाहती है कि भारत में इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए ताकि ऊर्जा उत्पादन को अधिक स्वच्छ, कुशल और आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाया जा सके। कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री G. Kishan Reddy और केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री Satish Chandra Dubey सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इस आयोजन को नीति और उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा संरचना को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में भूमिका निभा सकता है। सरकार का कहना है कि यह पहल देश के कोयला और लिग्नाइट संसाधनों के वैज्ञानिक और औद्योगिक उपयोग को नई गति देगी, जिससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र मजबूत होगा बल्कि भारत की वैश्विक ऊर्जा प्रतिस्पर्धा में स्थिति भी बेहतर होगी।
ऑटो सेक्टर में महंगाई का असर, हुंडई मोटर इंडिया ने जून से कीमतों में 12,800 रुपए तक बढ़ोतरी की घोषणा

नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी का दौर देखने को मिल रहा है, जहां प्रमुख वाहन निर्माता Hyundai Motor India ने अपने वाहनों की कीमतों में वृद्धि का ऐलान किया है। कंपनी ने जानकारी दी है कि जून 2026 से उसके सभी मॉडलों की कीमतों में अधिकतम 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी लागू की जाएगी। यह फैसला बढ़ती उत्पादन लागत, कच्चे माल की महंगाई और परिचालन खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए लिया गया है। कंपनी का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में लागत दबाव को पूरी तरह से वहन करना संभव नहीं रह गया है, जिसके चलते आंशिक रूप से यह बढ़ोतरी ग्राहकों तक पहुंचाई जा रही है। कंपनी की ओर से जारी नियामक जानकारी में स्पष्ट किया गया है कि कीमतों में यह बदलाव मॉडल और वेरिएंट के आधार पर अलग-अलग होगा। कुछ मॉडलों पर इसका प्रभाव कम होगा, जबकि कुछ प्रीमियम वेरिएंट में यह बढ़ोतरी अधिक हो सकती है। कंपनी ने यह भी कहा है कि वह लगातार उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ कम करने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की लागत ने स्थिति को प्रभावित किया है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई बड़ी कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा कर चुकी हैं। हाल ही में Maruti Suzuki India ने भी अपने वाहनों की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। इसी तरह Mahindra & Mahindra ने अपने एसयूवी और कमर्शियल वाहनों की कीमतों में संशोधन किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरे ऑटो सेक्टर पर इनपुट कॉस्ट का दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर स्टील, एल्युमिनियम और अन्य कच्चे माल की कीमतों में तेजी के कारण वाहन निर्माण लागत प्रभावित हो रही है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा खर्चों में भी बढ़ोतरी ने कंपनियों के मार्जिन पर असर डाला है। ऐसे में कंपनियां आंशिक रूप से यह बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए मजबूर हो रही हैं। इसका सीधा असर मध्यम वर्गीय ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में बिक्री पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, ऑटो सेक्टर में मांग अभी भी स्थिर बनी हुई है, खासकर एसयूवी सेगमेंट में, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें ग्राहकों के खरीद निर्णय को प्रभावित कर सकती हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई कीमतें 1 जून 2026 से पूरे देश में लागू होंगी। इसके साथ ही मौजूदा बुकिंग और डिलीवरी पर लागू होने वाले नियमों को लेकर भी डीलर नेटवर्क को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, ऑटोमोबाइल बाजार में बढ़ती लागत का असर अब सीधे ग्राहकों की जेब पर दिखाई देने लगा है, और आने वाले समय में अन्य कंपनियों द्वारा भी इसी तरह के फैसले लिए जाने की संभावना बनी हुई है।
सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरी गिरावट, निवेशकों की निगाहें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकीं

नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं पर दबाव स्पष्ट रूप से देखा गया। बाजार में आई इस गिरावट के बाद निवेशकों और कारोबारियों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,539 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद इसका भाव 1,56,072 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले यह कीमत 1,57,611 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी सस्ता होकर 1,42,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जबकि पहले यह 1,44,372 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 18 कैरेट सोने के दाम में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 1,17,054 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी के बाजार में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। चांदी का भाव 5,296 रुपये प्रति किलो कम होकर 2,60,917 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। इससे पहले यह 2,66,213 रुपये प्रति किलो था। चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि एक ही दिन में इतनी बड़ी कमी को निवेशक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं। वायदा बाजार में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी दोनों के कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट दर्ज की गई है। 5 जून 2026 के लिए सोने का कॉन्ट्रैक्ट और 3 जुलाई 2026 के लिए चांदी का कॉन्ट्रैक्ट दोनों ही दबाव में रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों के दाम नीचे आए हैं। वैश्विक बाजार में कॉमेक्स पर भी कीमती धातुओं में कमजोरी दर्ज की गई है, जहां सोना और चांदी दोनों में प्रतिशत के आधार पर गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक फिलहाल अमेरिका में आने वाले महंगाई और जीडीपी से जुड़े आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिनके आधार पर आगे की दिशा तय होगी। इन आंकड़ों के जारी होने से वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की उम्मीदों पर भी असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई देगा। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्पष्ट नहीं होते, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश की बजाय प्रतीक्षा की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक डेटा इस रुझान को और स्पष्ट कर सकता है और सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
बीएसएनएल में जेटीओ भर्ती का बड़ा अवसर, 100 पदों पर आवेदन 4 जून से शुरू, इंजीनियर युवाओं के लिए सुनहरा मौका

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के इंजीनियरिंग युवाओं के लिए भारत संचार निगम लिमिटेड की ओर से एक महत्वपूर्ण रोजगार अवसर सामने आया है, जिसमें जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर के 100 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को एक मजबूत अवसर प्राप्त हुआ है। जारी जानकारी के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 4 जून की सुबह 10 बजे से शुरू होगी और उम्मीदवार 3 जुलाई की सुबह 10 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। इस अवधि के भीतर इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। साथ ही आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि सुधारने के लिए 4 जुलाई से 11 जुलाई तक सुधार विंडो भी उपलब्ध रहेगी, जिससे उम्मीदवार अपनी जानकारी को सही कर सकेंगे। इस भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में उन उम्मीदवारों को पात्र माना गया है जिन्होंने दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी, विद्युत या इंस्ट्रूमेंटेशन जैसे विषयों में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की हो। इसके अलावा कंप्यूटर साइंस या इलेक्ट्रॉनिक्स में एमएससी तथा संबंधित क्षेत्रों में एमटेक करने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। यह अवसर विशेष रूप से तकनीकी क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयु सीमा के अनुसार उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित बहुविकल्पीय परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और चिकित्सा परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से योग्य और तकनीकी रूप से सक्षम अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चित किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को 16,400 रुपये से 40,500 रुपये तक मासिक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो इस पद को और अधिक आकर्षक बनाता है। परीक्षा के आयोजन को लेकर संभावना जताई जा रही है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा अगस्त महीने में आयोजित की जा सकती है। परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए बुलाया जाएगा। आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 2000 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क 1000 रुपये रखा गया है। इस भर्ती प्रक्रिया को सरकारी क्षेत्र में तकनीकी करियर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। देशभर के इंजीनियरिंग स्नातक इस भर्ती का लाभ उठाकर एक स्थिर और सम्मानजनक करियर की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
ब्लैक बॉक्स का वित्त वर्ष 2026 रहा शानदार, रिकॉर्ड ऑर्डर बुक और वैश्विक विस्तार से कंपनी को मिला नया उछाल

नई दिल्ली । एस्सार ग्रुप की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी कंपनी ब्लैक बॉक्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन दर्ज किया है, जिससे कंपनी की बाजार स्थिति और वैश्विक उपस्थिति दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। कंपनी ने इस अवधि में न केवल राजस्व और लाभप्रदता में स्थिर वृद्धि दर्ज की, बल्कि अपने ऑर्डर बैकलॉग को भी एक अरब डॉलर से अधिक पहुंचाकर भविष्य की मजबूत विकास संभावनाओं का संकेत दिया है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने अपने प्रमुख वित्तीय मानकों में निरंतर सुधार किया। बेहतर व्यावसायिक मिश्रण, मजबूत ग्राहक संबंधों और रणनीतिक अनुबंधों के चलते कंपनी की ग्रोथ स्थिर बनी रही। डेटा सेंटर, नेटवर्किंग और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे मुख्य क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने कंपनी की स्थिति को और मजबूत किया। चौथी तिमाही में भी कंपनी ने स्थिर प्रदर्शन जारी रखा, जिससे पूरे वर्ष का परिणाम सकारात्मक रहा। कंपनी का ऑर्डर बैकलॉग लगभग 792 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। इस वृद्धि ने न केवल राजस्व की स्थिरता को मजबूत किया, बल्कि वित्त वर्ष 2027 के लिए भी मजबूत शुरुआत की नींव रखी है। इसी अवधि में कंपनी को वैश्विक स्तर पर कई बड़े अनुबंध प्राप्त हुए, जिनमें डेटा सेंटर सेवाएं, हवाई अड्डा परियोजनाएं और विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के महत्वपूर्ण डिजिटल समाधान शामिल रहे। घरेलू बाजार में भी कंपनी ने दूरसंचार, बैंकिंग और एंटरप्राइज नेटवर्किंग सेक्टर में महत्वपूर्ण अनुबंध हासिल किए, जिससे इसकी घरेलू उपस्थिति और मजबूत हुई। विभिन्न क्षेत्रों में मिले नए ऑर्डरों ने कंपनी की विकास गति को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, कंपनी ने ब्राजील स्थित एक टेक्नोलॉजी फर्म का अधिग्रहण कर लैटिन अमेरिका में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी पकड़ और मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को भी मजबूत किया और पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस कदम ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिरता प्रदान की और निवेशकों का विश्वास और मजबूत हुआ। कंपनी के नेतृत्व ने इस प्रदर्शन को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग से जोड़ते हुए इसे दीर्घकालिक विकास का आधार बताया है। कंपनी प्रबंधन का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क और एंटरप्राइज डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की मांग आने वाले वर्षों में और तेज होगी। इस बहु-वर्षीय निवेश चक्र से कंपनी को बड़े अवसर मिलने की संभावना है, जिससे उसका व्यवसाय और विस्तार करेगा। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026 ब्लैक बॉक्स लिमिटेड के लिए मजबूत विकास, बेहतर निष्पादन और वैश्विक विस्तार का वर्ष साबित हुआ है। ऑर्डर बुक में रिकॉर्ड वृद्धि और रणनीतिक अधिग्रहणों ने कंपनी को आने वाले वर्षों के लिए एक मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया है।