कोयला गैसीकरण को लेकर बड़ा कदम, 37,500 करोड़ की योजना के तहत निवेश और रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली । भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में गुरुवार को एक राष्ट्रीय स्तर का रोड शो आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में निवेश, तकनीक और साझेदारी को प्रोत्साहित करना है। यह पहल कोयला संसाधनों के अधिक कुशल और पर्यावरण-अनुकूल उपयोग को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि गैसीकरण तकनीक के माध्यम से देश के विशाल कोयला भंडार का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कोयला मंत्रालय के अनुसार इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये रखा गया है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक लगभग 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण को सुनिश्चित करना है। इस पहल से न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात पर निर्भरता में भी कमी आने की संभावना है। सरकार का आकलन है कि यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा देगा और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगा। इस योजना के तहत लगभग 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद जताई गई है। इससे कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 25 बड़ी परियोजनाओं का विकास हो सकता है, जिनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 50 हजार रोजगार के अवसर उत्पन्न होने का अनुमान है। इसके अलावा, 75 मिलियन टन कोयला और लिग्नाइट के उपयोग से प्रतिवर्ष लगभग 6,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होने की संभावना जताई गई है। साथ ही जीएसटी और अन्य करों के माध्यम से भी सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी। इस रोड शो का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं है, बल्कि एक मजबूत कोयला गैसीकरण इकोसिस्टम विकसित करना भी है। इसमें नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, प्रौद्योगिकी प्रदाता और वित्तीय संस्थान एक साथ मिलकर इस क्षेत्र के भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे। सरकार चाहती है कि भारत में इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए ताकि ऊर्जा उत्पादन को अधिक स्वच्छ, कुशल और आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाया जा सके। कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री G. Kishan Reddy और केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री Satish Chandra Dubey सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इस आयोजन को नीति और उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा संरचना को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में भूमिका निभा सकता है। सरकार का कहना है कि यह पहल देश के कोयला और लिग्नाइट संसाधनों के वैज्ञानिक और औद्योगिक उपयोग को नई गति देगी, जिससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र मजबूत होगा बल्कि भारत की वैश्विक ऊर्जा प्रतिस्पर्धा में स्थिति भी बेहतर होगी।
ऑटो सेक्टर में महंगाई का असर, हुंडई मोटर इंडिया ने जून से कीमतों में 12,800 रुपए तक बढ़ोतरी की घोषणा

नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी का दौर देखने को मिल रहा है, जहां प्रमुख वाहन निर्माता Hyundai Motor India ने अपने वाहनों की कीमतों में वृद्धि का ऐलान किया है। कंपनी ने जानकारी दी है कि जून 2026 से उसके सभी मॉडलों की कीमतों में अधिकतम 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी लागू की जाएगी। यह फैसला बढ़ती उत्पादन लागत, कच्चे माल की महंगाई और परिचालन खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए लिया गया है। कंपनी का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में लागत दबाव को पूरी तरह से वहन करना संभव नहीं रह गया है, जिसके चलते आंशिक रूप से यह बढ़ोतरी ग्राहकों तक पहुंचाई जा रही है। कंपनी की ओर से जारी नियामक जानकारी में स्पष्ट किया गया है कि कीमतों में यह बदलाव मॉडल और वेरिएंट के आधार पर अलग-अलग होगा। कुछ मॉडलों पर इसका प्रभाव कम होगा, जबकि कुछ प्रीमियम वेरिएंट में यह बढ़ोतरी अधिक हो सकती है। कंपनी ने यह भी कहा है कि वह लगातार उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ कम करने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की लागत ने स्थिति को प्रभावित किया है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई बड़ी कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा कर चुकी हैं। हाल ही में Maruti Suzuki India ने भी अपने वाहनों की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। इसी तरह Mahindra & Mahindra ने अपने एसयूवी और कमर्शियल वाहनों की कीमतों में संशोधन किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरे ऑटो सेक्टर पर इनपुट कॉस्ट का दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर स्टील, एल्युमिनियम और अन्य कच्चे माल की कीमतों में तेजी के कारण वाहन निर्माण लागत प्रभावित हो रही है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा खर्चों में भी बढ़ोतरी ने कंपनियों के मार्जिन पर असर डाला है। ऐसे में कंपनियां आंशिक रूप से यह बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए मजबूर हो रही हैं। इसका सीधा असर मध्यम वर्गीय ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में बिक्री पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, ऑटो सेक्टर में मांग अभी भी स्थिर बनी हुई है, खासकर एसयूवी सेगमेंट में, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें ग्राहकों के खरीद निर्णय को प्रभावित कर सकती हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई कीमतें 1 जून 2026 से पूरे देश में लागू होंगी। इसके साथ ही मौजूदा बुकिंग और डिलीवरी पर लागू होने वाले नियमों को लेकर भी डीलर नेटवर्क को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, ऑटोमोबाइल बाजार में बढ़ती लागत का असर अब सीधे ग्राहकों की जेब पर दिखाई देने लगा है, और आने वाले समय में अन्य कंपनियों द्वारा भी इसी तरह के फैसले लिए जाने की संभावना बनी हुई है।
सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरी गिरावट, निवेशकों की निगाहें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकीं

नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं पर दबाव स्पष्ट रूप से देखा गया। बाजार में आई इस गिरावट के बाद निवेशकों और कारोबारियों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,539 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद इसका भाव 1,56,072 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले यह कीमत 1,57,611 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी सस्ता होकर 1,42,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जबकि पहले यह 1,44,372 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 18 कैरेट सोने के दाम में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 1,17,054 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी के बाजार में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। चांदी का भाव 5,296 रुपये प्रति किलो कम होकर 2,60,917 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। इससे पहले यह 2,66,213 रुपये प्रति किलो था। चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि एक ही दिन में इतनी बड़ी कमी को निवेशक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं। वायदा बाजार में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी दोनों के कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट दर्ज की गई है। 5 जून 2026 के लिए सोने का कॉन्ट्रैक्ट और 3 जुलाई 2026 के लिए चांदी का कॉन्ट्रैक्ट दोनों ही दबाव में रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों के दाम नीचे आए हैं। वैश्विक बाजार में कॉमेक्स पर भी कीमती धातुओं में कमजोरी दर्ज की गई है, जहां सोना और चांदी दोनों में प्रतिशत के आधार पर गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक फिलहाल अमेरिका में आने वाले महंगाई और जीडीपी से जुड़े आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिनके आधार पर आगे की दिशा तय होगी। इन आंकड़ों के जारी होने से वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की उम्मीदों पर भी असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई देगा। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्पष्ट नहीं होते, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश की बजाय प्रतीक्षा की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक डेटा इस रुझान को और स्पष्ट कर सकता है और सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
बीएसएनएल में जेटीओ भर्ती का बड़ा अवसर, 100 पदों पर आवेदन 4 जून से शुरू, इंजीनियर युवाओं के लिए सुनहरा मौका

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के इंजीनियरिंग युवाओं के लिए भारत संचार निगम लिमिटेड की ओर से एक महत्वपूर्ण रोजगार अवसर सामने आया है, जिसमें जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर के 100 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को एक मजबूत अवसर प्राप्त हुआ है। जारी जानकारी के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 4 जून की सुबह 10 बजे से शुरू होगी और उम्मीदवार 3 जुलाई की सुबह 10 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। इस अवधि के भीतर इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। साथ ही आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि सुधारने के लिए 4 जुलाई से 11 जुलाई तक सुधार विंडो भी उपलब्ध रहेगी, जिससे उम्मीदवार अपनी जानकारी को सही कर सकेंगे। इस भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में उन उम्मीदवारों को पात्र माना गया है जिन्होंने दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी, विद्युत या इंस्ट्रूमेंटेशन जैसे विषयों में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की हो। इसके अलावा कंप्यूटर साइंस या इलेक्ट्रॉनिक्स में एमएससी तथा संबंधित क्षेत्रों में एमटेक करने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। यह अवसर विशेष रूप से तकनीकी क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयु सीमा के अनुसार उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित बहुविकल्पीय परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और चिकित्सा परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से योग्य और तकनीकी रूप से सक्षम अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चित किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को 16,400 रुपये से 40,500 रुपये तक मासिक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो इस पद को और अधिक आकर्षक बनाता है। परीक्षा के आयोजन को लेकर संभावना जताई जा रही है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा अगस्त महीने में आयोजित की जा सकती है। परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए बुलाया जाएगा। आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 2000 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क 1000 रुपये रखा गया है। इस भर्ती प्रक्रिया को सरकारी क्षेत्र में तकनीकी करियर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। देशभर के इंजीनियरिंग स्नातक इस भर्ती का लाभ उठाकर एक स्थिर और सम्मानजनक करियर की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
ब्लैक बॉक्स का वित्त वर्ष 2026 रहा शानदार, रिकॉर्ड ऑर्डर बुक और वैश्विक विस्तार से कंपनी को मिला नया उछाल

नई दिल्ली । एस्सार ग्रुप की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी कंपनी ब्लैक बॉक्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन दर्ज किया है, जिससे कंपनी की बाजार स्थिति और वैश्विक उपस्थिति दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। कंपनी ने इस अवधि में न केवल राजस्व और लाभप्रदता में स्थिर वृद्धि दर्ज की, बल्कि अपने ऑर्डर बैकलॉग को भी एक अरब डॉलर से अधिक पहुंचाकर भविष्य की मजबूत विकास संभावनाओं का संकेत दिया है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने अपने प्रमुख वित्तीय मानकों में निरंतर सुधार किया। बेहतर व्यावसायिक मिश्रण, मजबूत ग्राहक संबंधों और रणनीतिक अनुबंधों के चलते कंपनी की ग्रोथ स्थिर बनी रही। डेटा सेंटर, नेटवर्किंग और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे मुख्य क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने कंपनी की स्थिति को और मजबूत किया। चौथी तिमाही में भी कंपनी ने स्थिर प्रदर्शन जारी रखा, जिससे पूरे वर्ष का परिणाम सकारात्मक रहा। कंपनी का ऑर्डर बैकलॉग लगभग 792 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। इस वृद्धि ने न केवल राजस्व की स्थिरता को मजबूत किया, बल्कि वित्त वर्ष 2027 के लिए भी मजबूत शुरुआत की नींव रखी है। इसी अवधि में कंपनी को वैश्विक स्तर पर कई बड़े अनुबंध प्राप्त हुए, जिनमें डेटा सेंटर सेवाएं, हवाई अड्डा परियोजनाएं और विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के महत्वपूर्ण डिजिटल समाधान शामिल रहे। घरेलू बाजार में भी कंपनी ने दूरसंचार, बैंकिंग और एंटरप्राइज नेटवर्किंग सेक्टर में महत्वपूर्ण अनुबंध हासिल किए, जिससे इसकी घरेलू उपस्थिति और मजबूत हुई। विभिन्न क्षेत्रों में मिले नए ऑर्डरों ने कंपनी की विकास गति को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, कंपनी ने ब्राजील स्थित एक टेक्नोलॉजी फर्म का अधिग्रहण कर लैटिन अमेरिका में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी पकड़ और मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को भी मजबूत किया और पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस कदम ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिरता प्रदान की और निवेशकों का विश्वास और मजबूत हुआ। कंपनी के नेतृत्व ने इस प्रदर्शन को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग से जोड़ते हुए इसे दीर्घकालिक विकास का आधार बताया है। कंपनी प्रबंधन का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क और एंटरप्राइज डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की मांग आने वाले वर्षों में और तेज होगी। इस बहु-वर्षीय निवेश चक्र से कंपनी को बड़े अवसर मिलने की संभावना है, जिससे उसका व्यवसाय और विस्तार करेगा। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026 ब्लैक बॉक्स लिमिटेड के लिए मजबूत विकास, बेहतर निष्पादन और वैश्विक विस्तार का वर्ष साबित हुआ है। ऑर्डर बुक में रिकॉर्ड वृद्धि और रणनीतिक अधिग्रहणों ने कंपनी को आने वाले वर्षों के लिए एक मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया है।
सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली कमजोरी, लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप की रफ्तार ने निवेशकों को दिया सहारा

नई दिल्ली । बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला और बाजार हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही मामूली कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुए, हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जिससे बाजार की व्यापक धारणा संतुलित बनी रही। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 141 अंक से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी बेहद सीमित दायरे में रहते हुए हल्की कमजोरी के साथ समाप्त हुआ। बाजार में लार्जकैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट ने निवेशकों को कुछ राहत दी। मिडकैप इंडेक्स में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई, वहीं स्मॉलकैप इंडेक्स भी हल्की मजबूती के साथ बंद हुआ। सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो कई क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान देखा गया। मीडिया, एनर्जी, मेटल, ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में तेजी रही, जिससे बाजार को सहारा मिला। इन सेक्टरों में निवेशकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, खासकर मेटल और ऑटो सेक्टर में मजबूत खरीदारी का रुझान बना रहा। इसके विपरीत बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में दबाव देखा गया। निजी बैंक और कुछ प्रमुख वित्तीय कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण लार्जकैप इंडेक्स पर असर पड़ा। आईटी और कंज्यूमर सेक्टर में भी मिला-जुला रुख रहा, जिससे पूरे बाजार में संतुलित लेकिन कमजोर समापन देखने को मिला। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में कुछ कंपनियों ने मजबूती दिखाई, जिनमें ऊर्जा, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर बैंकिंग और आईटी सेक्टर के प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। इससे सूचकांक सीमित दायरे में ही कारोबार करता रहा और दिन के अंत में हल्की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी ने दिन की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ की थी और शुरुआती कारोबार में यह सीमित दायरे में ऊपर-नीचे होता रहा। दिन के मध्य सत्र में यह स्तरों पर पहुंचा लेकिन ऊपरी स्तरों पर दबाव बनने के कारण मुनाफावसूली देखने को मिली। इसके बाद इंडेक्स में गिरावट आई और यह अंततः हल्की कमजोरी के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी के लिए निकट भविष्य में एक अहम प्रतिरोध स्तर बना हुआ है, जबकि नीचे की ओर भी एक मजबूत सपोर्ट जोन मौजूद है। यदि बाजार में खरीदारी का रुझान बढ़ता है तो आगे और तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि बिकवाली बढ़ने पर इंडेक्स सीमित दायरे में रह सकता है। कुल मिलाकर, बुधवार का सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए मिला-जुला रहा, जहां बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप ने बाजार को संभाले रखा। निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्रों पर बनी हुई है, जहां वैश्विक संकेत और घरेलू आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे।
गौतम अडानी की संपत्ति में एक दिन में ₹84,500 करोड़ का उछाल, दुनिया के अरबपतियों की रैंकिंग में बड़ा फेरबदल

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में मंगलवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। भारत के उद्योगपति गौतम अडानी की संपत्ति में एक ही दिन में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। उनकी कंपनियों के शेयरों में आई तेज तेजी के चलते उनकी नेटवर्थ में करीब 8.85 अरब डॉलर यानी लगभग 84,500 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, इस उछाल के बाद अडानी की कुल संपत्ति बढ़कर 117 अरब डॉलर पहुंच गई है। वहीं भारत के दूसरे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी की संपत्ति भी बढ़कर 89.1 अरब डॉलर हो गई। मंगलवार को उनकी नेटवर्थ में करीब 195 मिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। दुनिया के टॉप-10 अरबपतियों की सूची में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिला। लैरी एलिसन अब दुनिया के पांचवें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। उन्होंने मार्क जुकरबर्ग को पीछे छोड़ते हुए यह स्थान हासिल किया। वहीं स्टीव बाल्मर ने एक बार फिर दुनिया के शीर्ष-10 अरबपतियों की सूची में वापसी की है। उन्होंने जिम वाल्टन को पीछे छोड़कर सूची में जगह बनाई। साल 2026 में अब तक दुनिया के कई बड़े अरबपतियों की संपत्ति में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने इस साल अब तक अपनी नेटवर्थ में 114 अरब डॉलर जोड़े हैं, जिसके बाद उनकी कुल संपत्ति 733 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। दूसरे स्थान पर मौजूद लेरी पेज की संपत्ति में इस साल 59.3 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है और उनका नेटवर्थ 328 अरब डॉलर हो गया है। वहीं सर्गेई ब्रिन ने 54.9 अरब डॉलर की बढ़त के साथ अपनी कुल संपत्ति 305 अरब डॉलर तक पहुंचा दी है। इसके अलावा माइकल डेल की संपत्ति में 51.7 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है और उनका नेटवर्थ 192 अरब डॉलर हो गया है। डेविड सन की संपत्ति में भी इस साल 47.5 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक दुनिया के टॉप-10 अमीरों की सूची में एलन मस्क पहले, लैरी पेज दूसरे, सर्गी ब्रिन तीसरे और Jeff Bezos चौथे स्थान पर हैं। इसके बाद लैरी एलिसन, मार्क जुकरबर्ग, माइकल डेल, Jensen Huang, Bernard Arnault और स्टीव बाल्मर शामिल हैं।
PM मोदी की मितव्ययिता की अपील पर मारुति सुजुकी में लागू किया वर्क फ्रॉम होम

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी (Country Largest Car Maker) मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) (Maruti Suzuki India Limited – MSIL) ने वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) को लागू कर दिया है। सप्ताह के दूसरे दिन यानी मंगलवार को कहा कि कंपनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रभाव को कम करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं, जिनमें संभव होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करना और विदेशी यात्राओं पर रोक शामिल है। क्या कहा कंपनी ने?कंपनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि वह प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया युद्ध के संभावित प्रभाव को कम करने के आह्वान को अत्यधिक महत्व देती है। मारुति सुजुकी ने कहा कि यह सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और उन्हें अधिक कुशल बनाने का उपयुक्त समय है, ताकि राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ-साथ कारोबार के स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सके। कंपनी के अनुसार, प्रबंधन ने कर्मचारियों को कई उपायों को संस्थागत रूप देने का संदेश दिया है। इसके तहत जहां संभव हो वहां पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया जा रहा है, ताकि आवागमन से जुड़े ईंधन की खपत कम की जा सके। कंपनी ने कहा कि यह कदम उसकी मौजूदा रिमोट वर्किंग नीति के अनुरूप है। विदेश यात्रा पर क्या कहा?इसके अलावा, विदेश यात्राओं को केवल बेहद जरूरी व्यावसायिक जरूरतों तक सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी ने कर्मचारियों को बैठकों के लिए वर्चुअल माध्यम को प्राथमिकता देने और घरेलू यात्राओं को भी न्यूनतम रखने को कहा है। मारुति सुजुकी ने कर्मचारियों को भी कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग जैसे उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। साथ ही, कार्यालय और घर दोनों जगह ऊर्जा संरक्षण पर जोर देते हुए एयर कंडीशनर, पंखे और रोशनी के बचत के हिसाब से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। कंपनी ने कहा कि इन सभी उपायों की जानकारी आंतरिक कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों तक व्यापक रूप से पहुंचाई जा रही है। हरियाणा में मैन्युफैक्चरिंग लैबइस बीच, मारुति सुजुकी ने सरकार के कौशल विकास मिशन के तहत हरियाणा के रोहतक में अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग लैब स्थापित की है। कंपनी ने बयान में कहा कि रोहतक स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) हसनगढ़ में स्थापित इस मैन्युफैक्चरिंग लैब में पहले वर्ष में लगभग 200 छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस लैब में छात्रों को वाहन असेंबली, वेल्डिंग और रंगाई जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने कहा- इस लैब में आधुनिक मशीनों और कार्यस्थल जैसे वातावरण का उपयोग किया जाएगा। कौशल विकास मिशन के अनुरूप यह पहल छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार होने और बदलते वाहन परिवेश के लिए प्रतिभा को निखारती है। मारुति सुजुकी देशभर में 31 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को सहयोग दे रही है और अब तक 18 ऐसी लैब स्थापित कर चुकी है।
आठवें वेतन आयोग पर बढ़ीं उम्मीदें, फिटमेंट फैक्टर 4.0x पहुंचा तो केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में आ सकता है बड़ा उछाल

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इन दिनों असामान्य गतिविधियों की खबरें चर्चा में हैं। राज्य में अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ने के बाद सीमावर्ती जिलों में हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। उत्तर 24 परगना और मालदा जैसे सीमा क्षेत्रों से सामने आ रही जानकारियां यह संकेत दे रही हैं कि प्रशासन अब इस मुद्दे को अधिक गंभीरता से ले रहा है और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। हाल के दिनों में राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान और जांच को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई नए प्रयास शुरू किए गए हैं। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। इसके साथ ही सीमा पार से जुड़े मामलों की निगरानी और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है। इससे सीमा क्षेत्रों में गतिविधियों का स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है। राज्य में हाल ही में सामने आई ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति ने इस पूरे विषय को नई दिशा दी है। इस नीति का उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना बताया जा रहा है, जो निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के बाहर देश में रह रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर यह भी स्पष्ट किया गया है कि वैध दस्तावेजों और कानूनी मानकों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इस नीति के लागू होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के बीच चर्चा और सतर्कता बढ़ी है। इसके साथ ही सीमावर्ती जिलों में होल्डिंग सेंटरों की स्थापना को भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन केंद्रों का उद्देश्य कानूनी स्थिति और दस्तावेजों की जांच से जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना बताया जा रहा है। मालदा जिले में इस दिशा में शुरुआत होने की जानकारी सामने आई है, जहां निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को मजबूत बनाया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे संबंधित मामलों की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी। सुरक्षा और प्रवास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है। इसी क्रम में नागरिकता और सीमा सुरक्षा से संबंधित नियमों को लेकर भी अलग-अलग स्तर पर विचार और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। कुछ पक्ष इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ समूह इसके सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर भी चर्चा कर रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ी गतिविधियों के बीच सुरक्षा एजेंसियां तकनीक आधारित निगरानी प्रणालियों का भी उपयोग कर रही हैं। बायोमेट्रिक पहचान, डेटा सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड जैसे उपायों को प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे जांच व्यवस्था अधिक संगठित और प्रभावी होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल सीमा सुरक्षा, नागरिकता और प्रवास से जुड़ा यह मुद्दा प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। आने वाले समय में इन नीतियों और व्यवस्थाओं का असर किस रूप में सामने आता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
ईंधन बाजार में फिर झटका, दिल्ली में सीएनजी ₹83 के पार, कच्चे तेल की तेजी से बढ़ा दबाव

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश सहित देशभर में ईंधन की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंताओं को और गहरा कर दिया है। पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद अब सीएनजी उपभोक्ताओं को भी महंगाई का नया झटका लगा है। राजधानी दिल्ली में मंगलवार से सीएनजी की कीमत में 2 रुपए प्रति किलोग्राम की वृद्धि लागू कर दी गई है। नई कीमतों के बाद दिल्ली में सीएनजी अब 83.09 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध होगी। हाल के दिनों में ईंधन बाजार में लगातार हो रहे संशोधन ने परिवहन क्षेत्र से लेकर आम घरेलू बजट तक व्यापक असर डालना शुरू कर दिया है। बीते कुछ दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सीएनजी की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। पिछले 11 दिनों के दौरान इसकी कीमत में कुल 6 रुपए प्रति किलोग्राम की वृद्धि दर्ज की गई है। अलग-अलग तारीखों में कई चरणों में बढ़ोतरी की गई, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ गया है। सीएनजी को लंबे समय से पेट्रोल और डीजल की तुलना में किफायती विकल्प माना जाता रहा है, लेकिन मौजूदा बढ़ोतरी के बाद इसका लाभ पहले की अपेक्षा कम होता दिखाई दे रहा है। सार्वजनिक परिवहन, टैक्सी सेवाओं और निजी वाहनों का बड़ा वर्ग सीएनजी पर निर्भर करता है, ऐसे में कीमतों में यह बदलाव सीधे लाखों लोगों को प्रभावित कर सकता है। सीएनजी से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सोमवार को पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। राजधानी में नई दरों के बाद पेट्रोल और डीजल दोनों ही ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। पिछले दस दिनों में कई बार ईंधन दरों में संशोधन किया गया है, जिससे वाहन चालकों के लिए रोजाना का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। ईंधन कीमतों में हो रही वृद्धि का प्रभाव केवल निजी वाहन उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका असर माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि से बाजार में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। जब परिवहन लागत बढ़ती है तो इसका सीधा असर रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पादों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। ऐसे में आने वाले समय में आम जनता को अप्रत्यक्ष रूप से और अधिक आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में भी सीएनजी की कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में नई दरें पहले से अधिक स्तर पर पहुंच चुकी हैं। मुंबई में भी सीएनजी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। इससे स्पष्ट है कि यह प्रभाव केवल किसी एक शहर तक सीमित नहीं है बल्कि देश के कई हिस्सों में ऊर्जा बाजार दबाव की स्थिति में है। विशेषज्ञ वैश्विक परिस्थितियों को इस तेजी की प्रमुख वजह मान रहे हैं। मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर दबाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में होने वाला उतार-चढ़ाव घरेलू ईंधन कीमतों पर सीधा प्रभाव डालता है। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं तो आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।