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एजेंट अर्थव्यवस्था का भविष्य: भारत में एआई और क्रिप्टो का सामंजस्य और नीति की भूमिका

नई दिल्ली । जैसे-जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ रहा है, भारत में एआई और क्रिप्टो का संगम एक नई तकनीकी संरचना को जन्म दे रहा है। शुरुआती दौर में जब जनरेटिव एआई ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया, तब क्रिप्टो क्षेत्र में प्रतिक्रियाएं सतही और ट्रेंड आधारित थीं। “एआई टोकन” तेजी से फैल रहे थे, लेकिन उनका वास्तविक उपयोग सीमित नजर आता था। 2026 की शुरुआत तक यह दौर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा और अब एक अधिक गंभीर दिशा उभर रही है। मूल सवाल केवल बड़े भाषा मॉडलों को ब्लॉकचेन पर रखने का नहीं है। असली चुनौती यह है कि ब्लॉकचेन नेटवर्क को भरोसेमंद आधारभूत ढांचे के रूप में इस्तेमाल किया जाए-ऐसा ढांचा जो एआई आधारित गतिविधियों को प्रमाणित कर सके, प्रोत्साहनों को संतुलित करे, डिजिटल संसाधनों का मूल्य तय कर सके और उन प्रतिभागियों के बीच ऑडिट योग्य रिकॉर्ड बनाए रख सके, जो एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते। एआई और ब्लॉकचेन अलग-अलग समस्याओं के समाधान के लिए बनाए गए हैं। एआई स्वचालन, सामग्री निर्माण और बड़े पैमाने पर निर्णय लेने की क्षमता देता है, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही की चुनौतियों को नहीं हल करता। इसके विपरीत, सार्वजनिक ब्लॉकचेन धीमे और सीमित होते हुए भी सत्यापन, नियमों का अनुपालन और अविश्वास की स्थिति में साझा डेटा की विश्वसनीयता बनाए रखते हैं। इस कारण, दोनों तकनीकों का संयोजन व्यावहारिक जरूरत बनकर सामने आ रहा है-एआई बुद्धिमत्ता और क्रिप्टो भरोसे का आधार प्रदान करता है। वैश्विक उदाहरण इस दिशा को दर्शाते हैं। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स का प्रोजेक्ट एटलस यूरोपीय केंद्रीय बैंकों के सहयोग से क्रिप्टो प्रवाह का विश्लेषण करता है और नियामकीय निगरानी को अधिक स्पष्ट बनाता है। सिंगापुर में TokenAIse जैसे जनरेटिव एआई उपकरण क्रिप्टो टोकनाइजेशन को समझने और अपनाने में मदद कर रहे हैं। वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसी परियोजनाएं ब्लॉकचेन का उपयोग औद्योगिक अनुपालन, डिजिटल सत्यापन और उत्पाद जीवनचक्र की पारदर्शिता के लिए कर रही हैं। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण नीतिगत मोड़ है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 और फ्रंटियर एआई एजेंडा ने साफ संदेश दिया कि एआई उपयोगी, समावेशी और जवाबदेह होना चाहिए। वहीं क्रिप्टो नीति अभी भी अनुपालन-केंद्रित है-कड़े एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियम और रिपोर्टिंग बाध्यताएं हैं। इस स्थिति में अवसर है कि क्रिप्टो को केवल ट्रेडिंग गतिविधि के बजाय एआई शासन और भरोसेमंद डिजिटल ढांचे के लिए इस्तेमाल किया जाए। क्यों जरूरी है? क्योंकि डीपफेक, स्वचालित फ़िशिंग और बॉट आधारित ठगी जैसी धोखाधड़ी तेजी से फैल रही है। पारदर्शी लेजर लेनदेन, ऑन-चेन निगरानी और गोपनीयता-संवेदनशील पहचान प्रणालियां इस चुनौती का समाधान दे सकती हैं। एफएटीएफ का ध्यान स्थिर मुद्राओं और ट्रैवल रूल अनुपालन पर भी इसी दिशा में संकेत देता है। भारत में एआई और क्रिप्टो का भविष्य केवल नए टोकनों या विकेंद्रीकरण से तय नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि डिजिटल प्रणालियों पर कितना भरोसा किया जा सकता है। एक जिम्मेदार एजेंट अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए ब्लॉकचेन भरोसे की परत बन सकता है और एआई को सुरक्षित, उत्तरदायी और ऑडिट योग्य ढांचे में जोड़ सकता है। यही भारत को नई तकनीकी संरचना में नेतृत्व देने का वास्तविक अवसर है।

भारत को वैश्विक कृषि प्रतिस्पर्धा में लाने की तैयारी : पीएम मोदी ने निर्यात, तकनीक और फसल विविधीकरण पर जोर दिया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि अब समय आ गया है कि भारत में निर्यात आधारित कृषि उत्पादन को बढ़ाया जाए और इसे वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ा जाए। इससे न केवल नए रोजगार पैदा होंगे बल्कि किसानों को सशक्त बनाने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने यह बात ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर आयोजित पोस्ट-बजट वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कही। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार और रणनीतिक स्तंभ है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की दूसरी तिमाही की शुरुआत हो चुकी है और कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करना समय की मांग है। वैश्विक बाजार में मांग तेजी से बदल रही है और इसलिए अब चर्चा निर्यात आधारित खेती, फसल विविधीकरण और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर केंद्रित होनी चाहिए। पीएम मोदी ने केंद्रीय बजट 2026-27 में किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई अहम सुधारों का जिक्र किया। उन्होंने कृषि विशेषज्ञों, उद्योग जगत और किसानों से मिलकर काम करने की अपील की ताकि उच्च मूल्य वाली खेती को बढ़ावा दिया जा सके और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने गुणवत्ता और ब्रांडिंग मानकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की भी बात कही। उनका कहना था कि इससे समग्र स्वास्थ्य को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने मत्स्य पालन को भविष्य का बड़ा निर्यात आधारित क्षेत्र बताते हुए कहा कि इसमें नए बिजनेस मॉडल और उद्यमियों की भागीदारी बढ़ानी होगी। पीएम मोदी ने उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे काजू, नारियल, चंदन, अगरवुड, बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पशुपालन और तटीय मत्स्य क्षेत्र में निजी निवेश और उद्यमियों की भूमिका बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए एसएचई-मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की भी बात कही। प्रधानमंत्री ने डिजिटल कृषि के क्षेत्र में किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि भारत में अब तक 7.63 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत 23.5 करोड़ फसल प्लॉट का सर्वे किया गया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में उच्च मूल्य वाली खेती, तकनीक आधारित खेती और कृषि से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और कृषि के आधुनिकीकरण के लिए कई लक्षित कदमों की घोषणा की। बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 1,62,671 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से लगभग 7 प्रतिशत अधिक है। प्रधानमंत्री ने बताया कि तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में अगरवुड, बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की खेती को समर्थन मिलेगा। इन कदमों से किसानों की आय बढ़ेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारत की कृषि को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।

डिजिटल भुगतान का बढ़ता दबदबा, सरकारी बैंकों ने दिखाया निजी बैंकों से आगे निकलने का दम

नई दिल्ली में जारी रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 में ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड लेनदेन में सरकारी बैंकों ने निजी बैंकों को पीछे छोड़ दिया है। कुल ऑनलाइन लेनदेन में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें सरकारी बैंकों का आंकड़ा 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि निजी बैंकों की वृद्धि केवल 2.7 प्रतिशत रही। केयरएज की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जनवरी में क्रेडिट कार्ड खर्च सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। इसी अवधि में सरकारी बैंकों ने बकाया कार्डों में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो निजी बैंकों की तुलना में काफी अधिक है। डिजिटल भुगतान में तेजी का सबसे बड़ा योगदान ई-कॉमर्स का रहा है, जो कुल लेनदेन का 61 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बना। इस बीच, एसबीआई ग्रुप का कार्ड बेस भी मजबूत हुआ और सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 2.19 करोड़ कार्ड धारकों तक पहुँच गया। इसके विपरीत विदेशी बैंकों द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। रिपोर्ट में इसका कारण उनकी प्रीमियम ग्राहक रणनीतियों से जोड़ा गया है। हालांकि, विवेकाधीन खरीदारी में साल के अंत में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे समग्र वृद्धि में कुछ नरमी के संकेत मिले। महीने-दर-महीने आधार पर खर्च में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष जनवरी में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि के उच्च आधार प्रभाव के कारण कम रही। कुल बकाया क्रेडिट कार्डों की संख्या जनवरी 2025 में 10.9 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2026 में 11.7 करोड़ हो गई। यह सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत और पिछले महीने की तुलना में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इस दौरान कुल बकाया क्रेडिट कार्ड बैलेंस 2.95 लाख करोड़ रुपए रहा। निजी क्षेत्र के बैंकों ने कार्ड जारी करने में अग्रणी भूमिका निभाई और सालाना आधार पर 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसका श्रेय उनके मजबूत वितरण नेटवर्क और ई-कॉमर्स तथा फिनटेक प्लेटफॉर्म के साथ सह-ब्रांडेड साझेदारियों को दिया गया है। वित्त वर्ष 2026 के अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्रेडिट कार्ड पर खर्च में लगभग 13 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई और कुल खर्च 19.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। यह संकेत देता है कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन शॉपिंग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और सरकारी बैंकों ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की है।

वियतनाम और जापान के लिए सीधी नई उड़ानें शुरू करेगी एयर इंडिया

नई दिल्ली। टाटा समूह की अगुवाई वाली विमानन कंपनी एयर इंडिया ने वियतनाम और जापान के लिए अपनी नई उड़ानें शुरू करने का ऐलान किया है। इसके तहत कंपनी अपने नेटवर्क विस्तार के तहत वियतनाम के हनोई और टोक्यो के हनेडा के लिए नॉन स्टॉप सर्विस को जोड़ेगी। कंपनी ने बताया कि एयर इंडिया 01 मई से दिल्ली से वियतनाम के हनोई के लिए और 15 जून से मुंबई से टोक्यो के हानेडा के लिए अपनी सीधी उड़ानें शुरू करने वाली है। एयर इंडिया ने ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, मरीन ड्राइव के सनसेट से लेकर शिबुया की रौनक भरी रातों तक जापान अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है। हम 15 जून से मुंबई और टोक्यो हानेडा के बीच हफ़्ते में 4x नॉन-स्टॉप फ्लाइट की शुरुआत कर रहे हैं, जिससे यात्रियों के लिए जापान के कल्चर, एनर्जी और हमेशा रहने वाले आकर्षण का अनुभव करना आसान हो जाएगा। एयरलाइन ने कहा कि बुकिंग अभी शुरू है।

तीन दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में आयी तेजी, सेंसेक्स 414 अंक उछला

मुंबई । लगातार तीन दिन की गिरावट के बाद गुरुवार को घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में तेजी देखने को मिली। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 414.29 अंक बढ़कर 79,530.48 अंक पर खुला। निफ्टी में भी मजबूतीइसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 135.45 अंक चढ़कर 24,615.95 अंक पर खुला। खबर लिखे जाने तक यह 123.95 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,604.45 अंक पर रहा। रुपया भी मजबूती के साथ खुलाविदेशी मुद्रा बाजार में भी सुधार देखने को मिला। बुधवार के ऐतिहासिक निचले स्तर से उबरते हुए रुपया 45 पैसे की मजबूती के साथ 91.62 रुपये प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। अधिकांश सेक्टरों में तेजीआईटी और एफएमसीजी को छोड़कर सभी प्रमुख समूहों के सूचकांक हरे निशान में हैं। ऑटो, धातु, फार्मा, रियल्टी, स्वास्थ्य, मीडिया, बैंकिंग और रसायन सेक्टरों में बढ़त दर्ज की गई। सेंसेक्स की बढ़त में शामिल प्रमुख शेयरसेंसेक्स में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी, सनफार्मा, एयरटेल, एनटीपीसी और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। वहीं आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, इन्फोसिस और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर फिलहाल नीचे चल रहे हैं।

आज पेट्रोल-डीजल के दाम: दिल्ली मुंबई कोलकाता से लेकर हैदराबाद तक लेटेस्ट रेट्स

नई दिल्ली :सूरज की पहली किरणों के साथ ही न केवल दिन की शुरुआत होती है बल्कि आम आदमी की जेब पर असर डालने वाले पेट्रोल और डीजल के नए रेट भी सुबह 6 बजे अपडेट होते हैं देश की प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियां यानी इंडियन ऑयल बीपीसीएल और एचपीसीएल इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये के एक्सचेंज रेट के आधार पर रोजाना लेटेस्ट रेट जारी करती हैं यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराती है ताकि कोई गुमराह न हो आज आपके शहर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं नई दिल्ली में पेट्रोल 94.72 और डीजल 87.62 मुंबई में पेट्रोल 104.21 और डीजल 92.15 कोलकाता में पेट्रोल 103.94 और डीजल 90.76 चेन्नई में पेट्रोल 100.75 और डीजल 92.34 अहमदाबाद में पेट्रोल 94.49 और डीजल 90.17 बेंगलुरु में पेट्रोल 102.92 और डीजल 89.02 हैदराबाद में पेट्रोल 107.46 और डीजल 95.70 जयपुर में पेट्रोल 104.72 और डीजल 90.21 लखनऊ में पेट्रोल 94.69 और डीजल 87.80 पुणे में पेट्रोल 104.04 और डीजल 90.57 चंडीगढ़ में पेट्रोल 94.30 और डीजल 82.45 इंदौर में पेट्रोल 106.48 और डीजल 91.88 पटना में पेट्रोल 105.58 और डीजल 93.80 सूरत में पेट्रोल 95.00 और डीजल 89.00 नासिक में पेट्रोल 95.50 और डीजल 89.50 पिछले दो साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है इसके पीछे केंद्र और कई राज्यों द्वारा लागू की गई टैक्स में कटौती एक मुख्य कारण है मई 2022 के बाद से यह स्थिरता बनी हुई है जबकि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी है स्थिरता उपभोक्ताओं के लिए राहत का कारण बनी हुई है फ्यूल की कीमतें कई फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं सबसे पहला और बड़ा कारण है क्रूड ऑयल की कीमतें पेट्रोल और डीजल मुख्य रूप से क्रूड ऑयल से बनते हैं जब इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं इसका असर भारतीय मार्केट पर भी पड़ता है दूसरा कारण डॉलर के मुकाबले रुपये की ताकत है क्योंकि भारत ज्यादातर क्रूड आयात डॉलर में करता है अगर रुपया कमजोर होता है तो कीमतें बढ़ जाती हैं तीसरा कारण सरकारी टैक्स और ड्यूटी है केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं यही कीमतों में अंतर का मुख्य कारण है इसके अलावा रिफाइनिंग कॉस्ट भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाती है क्रूड ऑयल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया में लागत आती है यह लागत क्रूड ऑयल की क्वालिटी और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है अंत में फ्यूल की डिमांड और सप्लाई का बैलेंस भी कीमतें तय करता है त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में खपत बढ़ जाती है जिससे दाम में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है अगर आप मोबाइल से अपने शहर के पेट्रोल और डीजल के दाम जानना चाहते हैं तो प्रक्रिया आसान है इंडियन ऑयल कस्टमर अपने शहर कोड को RSP के साथ 9224992249 पर भेज सकते हैं बीपीसीएल कस्टमर 9223112222 पर RSP टेक्स्ट करें और एचपीसीएल कस्टमर 9222201122 पर HP Price भेजकर अपने शहर की कीमतें जान सकते हैं रोजाना अपडेट रहना न सिर्फ समझदारी है बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता सही और पारदर्शी जानकारी के आधार पर अपने खर्च का प्रबंधन कर सकें पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे आपकी जेब पर असर डालती हैं इसलिए समय पर जानकारी रखना महत्वपूर्ण है

Insurance Regulator IRDA: बीमा लेना होगा सस्ता… भारी कमीशन में चलेगी कैची…. बड़े सुधार लागू करने की तैयारी में IRDA

Insurance Regulator IRDA: नई दिल्ली। अगर आपको लगता है कि बीमा (Insurance) लेना महंगा (Costly) हो गया है, तो यह खबर आपके काम की है। बीमा नियामक इरडा (Insurance Regulator IRDA) अगले 4-6 महीनों में ऐसे कई बड़े सुधार लागू करने जा रहा है, जिससे बीमा किफायती होगा और आपको पैसे का पूरा दम मिलेगा। इन बदलावों की सबसे बड़ी मार उन भारी-भरकम कमीशनों पर पड़ेगी, जो बीमा कंपनियां एजेंटों और बैंकों को देती हैं। बीमा सुगम: एक प्लेटफॉर्म, सबके लिए जल्द ही लॉन्च होगा बीमा सुगम – एक डिजिटल मार्केटप्लेस जहां आप अमेजॉन-फ्लिपकार्ट की तरह सभी बीमा कंपनियों की पॉलिसियां कंपेयर कर सकेंगे। कीमत, फीचर्स, क्लेम सेटलमेंट रेशियो – सब कुछ एक क्लिक पर। जब सबकुछ खुला होगा, कंपनियों को अपने दम पर प्रीमियम कम रखना होगा। 1 लाख करोड़ रुपये का सवाल सोचिए, वित्त वर्ष 2025 में अकेले कमीशन के नाम पर बीमा कंपनियों ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये बांटे। यही वह पैसा है जो आपकी जेब से प्रीमियम के रूप में निकलता है। आरबीआई और इरडा दोनों ने इस पर चिंता जताई है। अब नियामक इस वितरण लागत को तर्कसंगत बनाने पर काम कर रहा है। 30% खर्च पर कैंची चलेगी फिलहाल बीमा कंपनियां आपके प्रीमियम का 30% हिस्सा डिस्ट्रिब्यूशन और एडमिन के कामों पर खर्च करती हैं। इसमें 17-18% सीधे बैंकों, एनबीएफसी और एजेंटों की जेब में जाता है। इरडा अब इसे घटाने की तैयारी में है, खासकर हेल्थ इंश्योरेंस में जहां प्रीमियम तेजी से बढ़े हैं। कम लागत, तेज प्रोसेस और ज्यादा पारदर्शिता नियामक IRDA एक सहमति-आधारित डेटा रजिस्ट्री बना रहा है, जहां पॉलिसी और दावों का सारा डेटा सुरक्षित रहेगा। इससे अंडरराइटिंग तेज होगी, फ्रॉड पर लगाम लगेगी और पॉलिसी पोर्टेबिलिटी आसान होगी। मतलब – कम लागत, तेज प्रोसेस और ज्यादा पारदर्शिता। अब कंपनियां नहीं छुपा पाएंगी सच इरडा बीमा कंपनियों पर शिकंजा कस रहा है। अब कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स, रिटर्न और क्लेम सेटलमेंट रेशियो का खुलकर खुलासा करना होगा। जब सबकुछ सार्वजनिक होगा, तो कंपनियों के बीच बेहतर सर्विस और कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग की होड़ लगेगी। आम आदमी को क्या मिलेगा? इन सुधारों का सीधा फायदा आपको मिलेगा। कमीशन खर्च घटेगा तो प्रीमियम स्थिर या कम हो सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तुलना से बेहतर और किफायती पॉलिसी चुन पाएंगे। पता चलेगा कि आपका पैसा कहां जा रहा है और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से क्लेम प्रोसेस तेज होगा। खासकर हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस में इन बदलावों का असर साफ दिखेगा, जहां बढ़ती लागत ने मिडल क्लास की जेब पर दबाव बढ़ा दिया था।

GUJRAT GAS LIMITED: भारत में गहराया गैस संकट… गुजरात गैस लिमिटेड ने की फोर्स मेज्योर लागू करने की घोषणा

GUJRAT GAS LIMITED: नई दिल्ली। पेट्रोनेट एलएनजी (Petronet LNG) के बाद अब भारतीय गैस वितरण कंपनी (Indian gas Distribution Company) गुजरात गैस लिमिटेड (Gujarat Gas Limited) ने भी फोर्स मेज्योर लागू करने की घोषणा की है। कंपनी ने बुधवार को घोषणा की कि वह अपने आपूर्ति अनुबंधों में फोर्स मेज्योर लागू करेगी, क्योंकि आरएलएनजी की उपलब्धता “गंभीर रूप से सीमित” हो गई है। शेयर बाजार को दी गई जानकारी में कंपनी ने बताया कि वह 6 मार्च से गैस की मात्रा में प्रतिबंध लगाएगी। कतर के संयंत्र बंद होने से भारत पर संकट गहराया सोमवार को, एक ईरानी ड्रोन हमले के बाद कतर ने अपने प्रमुख रास लफ्फान संयंत्र में परिचालन रोक दिया। यह संयंत्र दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति के लिए जिम्मेदार है। पिछले साल अपने कुल एलएनजी आयात का लगभग आधा हिस्सा कतर से प्राप्त करने वाला भारत इस व्यवधान की चपेट में विशेष रूप से आ गया है। गुजरात गैस के ग्राहक और बीमा कवरेज जनवरी की एक निवेशक प्रस्तुति के अनुसार, गुजरात गैस भारत के छह राज्यों में ग्राहकों को सेवा प्रदान करती है, जिनमें लगभग 4,430 औद्योगिक ग्राहक, 15,600 से अधिक वाणिज्यिक ग्राहक और 2.27 मिलियन घरेलू उपभोक्ता शामिल हैं। कंपनी ने अपने बयान में कहा, “गुजरात गैस द्वारा लिए गए बीमा के तहत युद्ध जैसी घटनाएं कवर नहीं होती हैं। फोर्स मेजेयर का संभावित प्रभाव, जो वर्तमान में एक जारी घटना है, का इस समय अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।” पेट्रोनेट एलएनजी ने भी किया है ऐलान भारत की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी ने बुधवार को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसने अपने सप्लॉयर कतर एनर्जी और घरेलू खरीदारों को फोर्स मेज्योर की सूचना जारी कर दी है। इसकी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के कारण कंपनी के जहाजों का रास लफ्फान के लोडिंग पोर्ट तक न पहुंच पाना है। अमेरिका-ईरान संघर्ष ने इस क्षेत्र में ईंधन की खेप को बाधित कर दिया है। क्या है फोर्स मेज्योर अगर कोई काम किसी समझौते के अनुसार होना था, लेकिन प्राकृतिक आपदा या बड़ी अप्रत्याशित घटना की वजह से वह काम नहीं हो पाया, तो उसे Force Majeure कहा जाता है। बता दें ईरान और ओमान के बीच स्थित हॉर्मुज स्ट्रेट, जहां से होकर वैश्विक स्तर पर खपत होने वाले तेल का लगभग एक-पांचवां हिस्सा और बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का ट्रांसपोटेशन होता है, वहां से गुजरना लगभग ठप हो गया है। इस क्षेत्र में कुछ जहाजों के हिट होने की घटनाओं के बाद यह स्थिति बनी है। कंपनी ने किन्हें भेजा नोटिस? कंपनी ने मंगलवार रात जारी नोटिस में कहा कि सुरक्षा स्थिति और समुद्री नेविगेशन के लिए पैदा हुए गंभीर खतरों को देखते हुए, पेट्रोनेट ने अपने एलएनजी टैंकरों दिशा, राही और असीम के लिए कतर एनर्जी को फोर्स मेज्योर नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही पेट्रोनेट ने अपने ग्राहकों गेल (इंडिया), इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम को भी फोर्स मेज्योर की सूचना दी है। पेट्रोनेट के अनुसार, कतरएनर्जी ने भी उसे “क्षेत्र में व्याप्त शत्रुता के कारण फोर्स मेज्योर की संभावित घटना” की सूचना दी है। बाजार और उद्योग पर क्या पड़ा असर? इस खबर के बाद बुधवार को बीएसई पर पेट्रोनेट के शेयर 9.3% गिरकर 281 रुपये पर बंद हुए। कारोबार के दौरान यह 11.7% तक लुढ़ककर 273 रुपये तक चला गया था। भारतीय गैस सप्लॉयर गेल और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन पहले ही फर्टिलाइजर्स प्लांट्स सहित उद्योगों को गैस आपूर्ति में कटौती कर चुके हैं। मामले से वाकिब सूत्रों ने बताया कि कम गैस आपूर्ति का असर पहले से ही कुछ फर्टिलाइजर कंपनियों के उत्पादन पर पड़ा है, जिनमें इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव (इफ्को) और कृभको फर्टिलाइजर्स शामिल हैं। हालांकि, अब तक कंपनियों ने घरेलू इस्तेमाल या ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए गैस आपूर्ति में किसी कटौती की घोषणा नहीं की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में 2.7 करोड़ टन एलएनजी का आयात किया, जो देश की कुल गैस खपत का लगभग आधा है। इस आयात का बड़ा हिस्सा कतर से होता है।

ईरान जंग का असर: कतर ने भारत को LNG सप्लाई में 40% तक कटौती की, ऊर्जा बाजार में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव का सीधा असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दिखाई देने लगा है। भारत को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देश कतर ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात में 10 से 40 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान और इज़राइल-अमेरिका के बीच संघर्ष तेज हो चुका है और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बिगड़ गए हैं। हमलों के बाद प्लांट बंद, सप्लाई प्रभावितईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही दुनिया के सबसे बड़े LNG हब में से एक रास लफ़्फ़ान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए। इन हमलों के बाद कतर को एहतियातन LNG उत्पादन रोकना पड़ा। नतीजतन वैश्विक गैस आपूर्ति पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। भारत कतर से LNG खरीदने वाले सबसे बड़े ग्राहकों में शामिल है। देश हर साल करीब 27 मिलियन टन LNG आयात करता है, जिसमें लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कतर से आता है। इस गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, CNG वितरण और पाइप्ड कुकिंग गैस नेटवर्क जैसे अहम क्षेत्रों में होता है। पेट्रोनेट ने दी सप्लाई रुकने की सूचनाभारत की प्रमुख गैस आयातक कंपनी पेट्रोनेट LNG लिमिटेड ने गैस मार्केटर्स को सूचित किया है कि कतर ने उत्पादन रोक दिया है। इसके बाद GAIL लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को भी सप्लाई बाधित होने की जानकारी दी गई। बताया जा रहा है कि CNG रिटेलिंग के लिए फ्लो रेट बनाए रखते हुए औद्योगिक इकाइयों को गैस आपूर्ति में कटौती की गई है। सूत्रों के अनुसार यह कटौती 10 प्रतिशत से लेकर 40 प्रतिशत तक हो सकती है। पेट्रोनेट का कतर से हर साल 8.5 मिलियन टन LNG खरीदने का दीर्घकालिक अनुबंध है, जबकि कुछ मात्रा स्पॉट मार्केट से भी ली जाती है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना संकट की जड़तनाव का बड़ा कारण होर्मुज स्ट्रेट है, जिस पर ईरान का नियंत्रण है। यह समुद्री मार्ग भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि लगभग 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत LNG आपूर्ति इसी रास्ते से होकर गुजरती है। यही मार्ग कतर और UAE से आने वाली गैस के लिए मुख्य ट्रांजिट रूट है। हमलों के बाद इस मार्ग से तेल और LNG शिपमेंट लगभग ठप पड़ गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल आ गया है और युद्ध जोखिम बीमा व शिपिंग लागत भी बढ़ गई है। स्पॉट मार्केट में कीमतें दोगुनीGAIL और IOC कमी की भरपाई के लिए स्पॉट मार्केट से LNG खरीदने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। स्पॉट मार्केट में LNG की कीमत अब 25 अमेरिकी डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक पहुंच गई है, जो दीर्घकालिक अनुबंध दर से लगभग दोगुनी है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो भारत समेत कई आयातक देशों के लिए गैस आपूर्ति और कीमतों का संकट और गहरा सकता है।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर! सोने की चमक बढ़ी, लगातार पांचवें दिन दाम चढ़े

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ऊर्जा कीमतों में उछाल के बीच सोना एक बार फिर निवेशकों का पसंदीदा सुरक्षित ठिकाना बन गया है। वैश्विक बाजारों में मंगलवार को सोने की कीमतों में लगातार पांचवें सत्र में तेजी दर्ज की गई। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और महंगाई की आशंकाओं ने कीमती धातुओं में जोरदार खरीदारी को बढ़ावा दिया है। एमसीएक्स पर रिकॉर्ड उछालभारत के Multi Commodity Exchange of India (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना सोमवार को 2.53 प्रतिशत चढ़कर 1,66,199 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी 0.90 प्रतिशत गिरकर 2,80,090 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। होली के कारण मंगलवार को पहले सत्र में एमसीएक्स पर कारोबार बंद रहा और शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू होनी है। वैश्विक बाजारों में भी तेजीअंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.8 प्रतिशत बढ़कर 5,360 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। स्पॉट सिल्वर लगभग 1.9 प्रतिशत उछलकर 91.11 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। हालांकि डॉलर इंडेक्स 0.19 प्रतिशत बढ़कर 98.57 पर पहुंच गया, जिससे डॉलर आधारित सोना विदेशी खरीदारों के लिए महंगा हो गया और तेजी की रफ्तार पर कुछ हद तक अंकुश लगा। तनाव की आग में घी का काम कर रहा तेलअमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जरूरत पड़ने तक जारी रहेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने सऊदी अरब में तेल और गैस ढांचे को निशाना बनाया है और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी है। इसके जवाब में इजरायल ने ईरान के कमांड केंद्रों पर ‘हमलों की नई लहर’ शुरू करने की घोषणा की। इस बढ़ते टकराव से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है। अमेरिकी कच्चा तेल वायदा 1.4 प्रतिशत बढ़कर 72.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 1.87 प्रतिशत की तेजी के साथ 79.2 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई की चिंताओं को और हवा दे रही हैं, जिससे सोने की मांग मजबूत हो रही है। फेड की नीति पर नजरनिवेशक अब अमेरिका के विनिर्माण और गैर-विनिर्माण पीएमआई, एडीपी नॉन-फार्म रोजगार आंकड़े और बेरोजगारी दर जैसे संकेतकों पर नजर टिकाए हुए हैं। इन आंकड़ों से Federal Reserve की आगे की मौद्रिक नीति का संकेत मिल सकता है। यदि महंगाई दबाव बना रहता है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। हालांकि अनिश्चितता के माहौल में निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। 2026 में 25% चढ़ चुका है सोनासाल 2026 में अब तक सोने की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। पिछले वर्ष भी सोना लगभग 64 प्रतिशत चढ़ा था। इस तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में बढ़ता निवेश और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं प्रमुख कारण रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में हालात सामान्य नहीं होते और ऊर्जा बाजार स्थिर नहीं होता, तब तक सोने में मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें इसकी रफ्तार को सीमित कर सकती हैं।