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बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों ने दिखाई समझदारी, अप्रैल में शेयर बाजार में आया भारी निवेश

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में अप्रैल महीने के दौरान निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दिया। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में बाजार में निवेश का स्तर मार्च की तुलना में काफी बेहतर रहा। खास बात यह रही कि निवेशकों ने इस दौरान एसआईपी के जरिए सबसे अधिक भरोसा लार्ज कैप कंपनियों पर जताया। बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशकों ने अनुशासित निवेश रणनीति अपनाते हुए बड़े और मजबूत शेयरों की ओर रुख किया। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में भारतीय शेयर बाजार में कुल 73,639 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया। यह आंकड़ा मार्च के मुकाबले काफी अधिक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों का झुकाव अब जोखिम कम करने और स्थिर रिटर्न पाने की दिशा में बढ़ रहा है। यही वजह है कि लार्ज कैप कंपनियों में निवेश लगातार बना हुआ है। हालांकि इन फंड्स के प्रदर्शन में गिरावट देखी गई, लेकिन फिर भी निवेशकों का भरोसा इन पर कायम रहा। निवेशकों ने इस दौरान खासतौर पर पीएसयू और बीएफएसआई सेक्टर के वैल्यू स्टॉक्स में दिलचस्पी दिखाई। बैंकिंग, फाइनेंस और सरकारी कंपनियों से जुड़े शेयरों में निवेश बढ़ने से यह साफ संकेत मिला कि निवेशक अब सुरक्षित और स्थिर सेक्टरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर टेक्नोलॉजी सेक्टर के शेयरों से निवेशकों ने दूरी बनाए रखी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टेक शेयरों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक दबाव के कारण निवेशकों ने फिलहाल सावधानी बरतना बेहतर समझा। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारतीय निवेशकों की एसआईपी संस्कृति पहले से अधिक परिपक्व होती जा रही है। बाजार में कमजोरी और गिरावट के बावजूद निवेशकों ने नियमित निवेश जारी रखा। यह संकेत देता है कि अब लोग अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। यही कारण है कि कमजोर प्रदर्शन वाले फंड्स में भी एसआईपी निवेश जारी रहा। अप्रैल महीने में इक्विटी निवेश रणनीतियों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। जहां पहले भारी निकासी हो रही थी, वहीं अब निवेश दोबारा तेजी से लौटता दिखाई दिया। विशेष रूप से आर्बिट्राज फंड्स में निवेश का स्तर काफी बढ़ा। माना जा रहा है कि संस्थागत निवेशकों ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए इन फंड्स में अधिक रुचि दिखाई। इसके अलावा फैक्टर आधारित निवेश श्रेणियों में ‘ग्रोथ’ कैटेगरी ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इस श्रेणी में सकारात्मक रिटर्न दर्ज किए गए और नए निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ी। वहीं फोकस्ड फंड्स में निवेशकों की रुचि घटती नजर आई और इस श्रेणी में निकासी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक व्यापक बाजार पूरी तरह मजबूत स्थिति में नहीं लौटता, तब तक निवेशक आक्रामक निवेश की बजाय संतुलित और अनुशासित रणनीति अपनाते रहेंगे। अप्रैल के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय निवेशक अब पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक और धैर्यवान हो चुके हैं। यही परिपक्वता आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार को और अधिक स्थिरता प्रदान कर सकती है।

भारत बना भरोसेमंद ग्लोबल पार्टनर, युवाओं की ताकत और टेक्नोलॉजी से दुनिया प्रभावित: पीएम मोदी

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शनिवार को 19वें रोजगार मेले के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों में चयनित युवाओं को 51 हजार से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान उन्होंने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में उभर रहा है और दुनिया भारत की युवा शक्ति तथा तकनीकी क्षमता को लेकर बेहद उत्साहित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनना चाहती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है और इसका सबसे बड़ा लाभ देश के युवाओं को मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति और तकनीकी विकास नए रोजगार और अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने हालिया विदेश दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि विभिन्न देशों के नेताओं और वैश्विक कंपनियों के साथ हुई चर्चाओं में भारत के प्रति गहरा भरोसा देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि भारत के युवा, उनकी क्षमता और देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को लेकर दुनिया में सकारात्मक माहौल बना है। उन्होंने बताया कि नीदरलैंड के साथ सेमीकंडक्टर, कृषि और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है। वहीं स्वीडन के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इनोवेशन के क्षेत्र में साझेदारी पर सहमति बनी है। इसके अलावा नॉर्वे के साथ ग्रीन टेक्नोलॉजी और मैरीटाइम सेक्टर में सहयोग को आगे बढ़ाया गया है। यूएई और इटली जैसे देशों के साथ ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सभी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां सीधे तौर पर भारत के युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार के नए अवसर पैदा करेंगी। उन्होंने सेमीकंडक्टर सेक्टर का उदाहरण देते हुए बताया कि वैश्विक स्तर की कंपनियां भारत की कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं, जिससे देश में नई तकनीक और रोजगार दोनों का विस्तार हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले दशकों में क्लीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे और भारत इसमें अग्रणी भूमिका निभाएगा। रोजगार मेले को लेकर उन्होंने कहा कि यह पहल देश में रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब तक आयोजित 18 रोजगार मेलों के माध्यम से लगभग 12 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं। 19वें रोजगार मेले का आयोजन देशभर के 47 स्थानों पर किया गया, जिसमें चयनित उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सेवाएं प्रदान करने का अवसर मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक ऐसा देश बन रहा है जो वैश्विक विकास का प्रमुख आधार बन सकता है। उन्होंने युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि आने वाले समय में भारत की प्रगति में उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।

10 दिनों में तीसरी बढ़ोतरी: CNG 81 रुपये के पार, पेट्रोल-डीजल भी हुआ महंगा, ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर

नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली और एनसीआर में ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। शनिवार को सीएनजी के दामों में 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद नई कीमत 81 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है। यह पिछले कुछ दिनों में तीसरी बार है जब सीएनजी के रेट में बदलाव किया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर सीधा असर देखने को मिल रहा है। Indraprastha Gas Limited के अनुसार दिल्ली में सीएनजी की नई कीमत 80.09 रुपये से बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में कीमतें और अधिक बढ़कर करीब 89.70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। गुरुग्राम में भी सीएनजी के दाम 86 रुपये से अधिक हो गए हैं। पिछले 10 दिनों में ईंधन की कीमतों में यह तीसरी बार बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को 2 रुपये और 17 मई को 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई थी। लगातार हो रही इस वृद्धि ने ऑटो, टैक्सी और कमर्शियल वाहनों के संचालन पर दबाव बढ़ा दिया है। सीएनजी के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल में करीब 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब लगभग 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी का असर देश के अन्य बड़े शहरों में भी देखने को मिला है, जहां कोलकाता और मुंबई में भी ईंधन के दाम बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ने की संभावना है, जिसका असर अंततः रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। वहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद कीमतों को संतुलित रखने की कोशिश की जा रही है।

भोपाल से स्विट्जरलैंड तक पहुंची फ्लेवर्ड आइस्ड टी, एमएसएमई की वैश्विक पहचान पर सरकार ने जताई खुशी

मध्य प्रदेश /भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जहां मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal से तैयार की गई फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली खेप यूरोप के प्रमुख देश Switzerland के लिए निर्यात की गई है। यह कदम न केवल भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है, बल्कि देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की गुणवत्ता और नवाचार क्षमता को भी मजबूत करता है। इस उपलब्धि को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा है कि भारतीय एमएसएमई अब वैश्विक मानकों पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं और लगातार नए बाजारों में अपनी जगह बना रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह निर्यात कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के सहयोग से संभव हुआ है, जिसने मध्य प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। इस पहल को भारत के निर्यात आधारित विकास मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो न केवल उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाता है बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने में भी मदद करता है। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि पिछले एक दशक में भारत के चाय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे देश के पारंपरिक उत्पादों की वैश्विक मांग और स्वीकार्यता में लगातार बढ़ोतरी हुई है। सरकार का मानना है कि भारतीय चाय और उससे जुड़े उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बनाई है, जिसका श्रेय बेहतर गुणवत्ता, विविधता और निरंतर सुधार को जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार फ्लेवर्ड आइस्ड टी जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद भारत के निर्यात क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रहे हैं। इससे न केवल किसानों और छोटे उत्पादकों को लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह कदम “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियानों को भी मजबूती देता है, जिनका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। आने वाले समय में ऐसे और उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत की खाद्य प्रसंस्करण क्षमता और निर्यात हिस्सेदारी दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है। यह उपलब्धि देश के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, जो यह दर्शाती है कि भारतीय उत्पाद अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक उपभोक्ताओं की पसंद भी बन रहे हैं।

पेट्रोल-डीजल सप्लाई पर बड़ा बयान, देशभर में पर्याप्त स्टॉक मौजूद: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन

नई दिल्ली ।  कंपनी के अनुसार देशभर में उसके नेटवर्क के तहत हजारों पेट्रोल पंपों पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है और केवल कुछ ही आउटलेट्स पर अस्थायी बाधा देखी गई है। Indian Oil Corporation ने यह भी कहा कि वह लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जहां भी समस्या सामने आ रही है, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि ग्राहकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। जानकारी के मुताबिक हाल के दिनों में कुछ इलाकों में डीजल की मांग में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका प्रमुख कारण कृषि क्षेत्र में फसल कटाई का मौसम बताया जा रहा है। इसके साथ ही कुछ निजी पेट्रोल पंपों पर कीमतें अधिक होने के कारण उपभोक्ता सरकारी पंपों की ओर अधिक संख्या में जा रहे हैं, जिससे कुछ स्थानों पर अस्थायी दबाव की स्थिति बन गई है। इसके अलावा संस्थागत खरीद में वृद्धि ने भी कुछ क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाला है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी तरह की राष्ट्रीय स्तर की कमी की स्थिति नहीं है। मौजूदा चुनौतियां केवल वितरण और मांग के स्थानीय बदलाव से जुड़ी हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए तेल विपणन कंपनियां लगातार सक्रिय हैं। इसी बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कुछ अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में हाल ही में बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि Indian Oil Corporation ने यह भरोसा दिलाया है कि वह देशभर में निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कुल मिलाकर कंपनी का संदेश साफ है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सप्लाई व्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी हुई है।

आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय घटनाक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड स्तर का डिविडेंड देने का निर्णय लिया है। यह राशि करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जो अब तक के इतिहास में सबसे बड़े सरप्लस ट्रांसफर में से एक माना जा रहा है। इस निर्णय से सरकार की राजकोषीय स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और भू-राजनीतिक तनाव कई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। नई दिल्ली। यह फैसला मुंबई में आयोजित भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। बैठक में देश और दुनिया की आर्थिक स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें संभावित जोखिमों और भविष्य की वित्तीय चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि इस वर्ष सरप्लस ट्रांसफर की स्थिति मजबूत है और इसे केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जा सकता है। आरबीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक की बैलेंस शीट का आकार उल्लेखनीय रूप से बढ़कर लगभग 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि में बैंक की कुल आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे केंद्रीय बैंक की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है। डिविडेंड के इस बड़े निर्णय के पीछे बैंक की आय में वृद्धि और जोखिम प्रावधानों के बाद बची शुद्ध आय प्रमुख कारण रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जोखिम प्रावधान और अन्य वैधानिक फंड में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय में भी पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार को बड़ी राशि हस्तांतरित करना संभव हुआ। नई दिल्ली। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम सरकार के लिए वित्तीय रूप से राहत देने वाला साबित हो सकता है। इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे, विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था में निवेश और मांग दोनों को समर्थन मिलेगा। इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि आर्थिक पूंजी ढांचे के तहत एक सुरक्षित जोखिम बफर बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित आर्थिक अनिश्चितता का सामना किया जा सके। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि पर्याप्त प्रावधानों के बाद शेष राशि को केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जाए। इस ऐतिहासिक डिविडेंड के बाद सरकार की वित्तीय स्थिति को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है, जो आगामी बजट और आर्थिक नीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

gold jewelry demand: सोने की कीमतों में उछाल से ज्वेलरी बाजार पर दबाव, बिक्री घटी लेकिन कंपनियों की कमाई में जोरदार बढ़ोतरी का अनुमान

 gold jewelry demand: नई दिल्ली । देश में लगातार बढ़ती सोने की कीमतों ने ज्वेलरी बाजार की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। एक ओर जहां ग्राहकों की खरीदारी क्षमता पर दबाव बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर ज्वेलरी कंपनियों की आय में वृद्धि के संकेत भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में तेज उछाल और हाल ही में आयात शुल्क में की गई बढ़ोतरी का सीधा असर बाजार की मांग पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले समय में बिक्री मात्रा में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है। बाजार विश्लेषण के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में संगठित गोल्ड ज्वेलरी सेक्टर की बिक्री मात्रा में लगभग 13 से 15 प्रतिशत तक की कमी आने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में भी ज्वेलरी बिक्री में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार परिस्थितियां और अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही हैं। सोने की ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ता अपनी खरीदारी योजनाओं में बदलाव कर रहे हैं और भारी तथा महंगे गहनों की बजाय हल्के वजन और कम कैरेट वाले विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके बावजूद, कंपनियों के लिए राहत की बात यह है कि बिक्री मात्रा में गिरावट के बावजूद कुल राजस्व में वृद्धि की संभावना बनी हुई है। अनुमान है कि ज्वेलरी कंपनियों की आय में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका मुख्य कारण सोने की ऊंची कीमतें हैं, जिनकी वजह से प्रति यूनिट बिक्री मूल्य बढ़ गया है। यानी ग्राहक कम मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, लेकिन कीमत अधिक होने के कारण कंपनियों की कुल कमाई बढ़ सकती है। सरकारी स्तर पर हाल ही में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने का भी बाजार पर प्रभाव पड़ा है। इसका उद्देश्य न केवल आयात को नियंत्रित करना है, बल्कि देश के व्यापार घाटे को कम करना और रुपये को स्थिर बनाए रखना भी है। इस कदम से घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल रहा है, जिससे मांग और प्रभावित हो रही है। कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, 1,000 श्रद्धालुओं का चयन पूरा रिपोर्टों के अनुसार, देश में गोल्ड की कुल मांग इस वित्त वर्ष में 620 से 640 टन के बीच रहने का अनुमान है, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कमजोर स्तरों में से एक माना जा सकता है। कोविड काल को छोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा पिछले एक दशक में सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकता है। सोने की बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं के व्यवहार में भी बड़ा बदलाव किया है। अब लोग निवेश और गहनों दोनों के लिए सोने की खरीद में अधिक सतर्क हो गए हैं। बीते वर्षों में जहां निवेश के लिए गोल्ड बार और सिक्कों की मांग में तेजी देखी गई थी, वहीं अब बाजार में हल्के और डिजाइनर ज्वेलरी की ओर झुकाव बढ़ा है। 16 से 22 कैरेट ज्वेलरी की मांग में वृद्धि दर्ज की जा रही है क्योंकि ये अपेक्षाकृत सस्ती और उपयोगी विकल्प मानी जा रही हैं। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि सोने की कीमतों का यह उछाल बाजार के स्वरूप को बदल रहा है। जहां एक ओर मांग में कमी चिंता का विषय है, वहीं दूसरी ओर कीमतों के सहारे कंपनियों की आय में बढ़ोतरी एक नया संतुलन बना रही है, जो आने वाले महीनों में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

Suzlon Energy को मिला बड़ा विंड एनर्जी ऑर्डर, शेयर में तेजी, ऑर्डर बुक और मजबूत हुई

नई दिल्ली। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी एक बार फिर बाजार में चर्चा का केंद्र बन गई है। कंपनी को हाल ही में सनश्योर एनर्जी से 195 मेगावाट क्षमता वाले विंड एनर्जी उपकरणों की सप्लाई और इंस्टॉलेशन का नया ऑर्डर मिला है। इस खबर के सामने आने के बाद कंपनी के शेयरों में हल्की लेकिन स्पष्ट तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी एक बार फिर इस स्टॉक की ओर बढ़ी है। बाजार में यह भी ध्यान देने योग्य रहा कि सुजलॉन एनर्जी का स्टॉक अपने 52 हफ्तों के उच्च स्तर से करीब 28 प्रतिशत नीचे चल रहा था, ऐसे में इस नए ऑर्डर ने निवेशकों के बीच सकारात्मक संकेत दिए हैं। ट्रेडिंग के दौरान शेयर ने इंट्राडे स्तर पर मजबूती दिखाते हुए लगभग 53 रुपये से ऊपर का स्तर छुआ। यह तेजी संकेत देती है कि बाजार फिलहाल कंपनी के दीर्घकालिक ऑर्डर पाइपलाइन और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में उसकी मजबूत पकड़ को लेकर आशावादी नजर आ रहा है। कंपनी को मिले इस नए ऑर्डर के तहत 65 विंड टर्बाइन जनरेटर की सप्लाई और इंस्टॉलेशन किया जाएगा। प्रत्येक टरबाइन की क्षमता 3 मेगावाट निर्धारित की गई है। इस पूरे प्रोजेक्ट को कर्नाटक के बीजापुर जिले में स्थापित किया जाएगा, जो राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस ऑर्डर के जुड़ने के बाद कंपनी की 3 मेगावाट टर्बाइन प्लेटफॉर्म से कुल बिक्री लगभग 9 गीगावाट तक पहुंच चुकी है, जो कंपनी की तकनीकी और व्यावसायिक क्षमता को मजबूत दर्शाती है। सुजलॉन एनर्जी की मौजूदा ऑर्डर बुक में भी लगातार सुधार देखा जा रहा है। विशेष रूप से कर्नाटक राज्य कंपनी के लिए एक प्रमुख बाजार के रूप में उभर रहा है, जहां कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 2 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा, कंपनी कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है, जिनमें कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए कुल 664 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट शामिल हैं। यह दर्शाता है कि कंपनी केवल सरकारी या बड़े प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी क्षेत्र में भी उसकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के अनुसार, देश में विंड एनर्जी की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर उन कंपनियों के बीच जो चौबीसों घंटे स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा की तलाश में हैं। बड़े औद्योगिक ग्राहक अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के बजाय रिन्यूएबल विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे इस सेक्टर में ग्रोथ के नए अवसर बन रहे हैं। सनश्योर एनर्जी, जो इस ऑर्डर देने वाली कंपनी है, भारत में एक प्रमुख स्वतंत्र बिजली उत्पादक के रूप में काम करती है। कंपनी की स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी और यह विभिन्न कॉरपोरेट ग्राहकों को लॉन्ग टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट के माध्यम से रिन्यूएबल एनर्जी उपलब्ध कराती है। यह मॉडल उद्योगों को स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करने में मदद करता है। कुल मिलाकर, सुजलॉन एनर्जी को मिला यह नया ऑर्डर कंपनी के लिए केवल एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं बल्कि बाजार में उसके भविष्य को लेकर भरोसे का संकेत भी माना जा रहा है। आने वाले समय में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बढ़ती मांग के बीच कंपनी की स्थिति और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार का बड़ा फैसला: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8% हिस्सेदारी OFS के जरिए बिक्री पर, निवेशकों की नजर

नई दिल्ली । सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग सेक्टर में विनिवेश की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अपनी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से बिक्री के लिए पेश कर दी है। इस कदम के तहत सरकार कुल मिलाकर बैंक में अपनी 8 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना पर काम कर रही है, जिससे निवेशकों के बीच बाजार में हलचल बढ़ गई है। विनिवेश विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार पहले चरण में बैंक में अपनी 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही ग्रीन शू विकल्प के तहत अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का प्रावधान भी रखा गया है, जिससे कुल बिक्री 8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह पूरी प्रक्रिया सरकार की उन नीतियों का हिस्सा है, जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हिस्सेदारी घटाकर बाजार आधारित संरचना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। ऑफर फॉर सेल की शुरुआत नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए 22 मई से कर दी गई है। इस दौरान संस्थागत निवेशकों को निर्धारित समय के भीतर अपनी बोलियां लगाने का अवसर दिया गया है। सरकार ने इस इश्यू के लिए न्यूनतम मूल्य 31 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जो पिछले बंद भाव की तुलना में लगभग 9.4 प्रतिशत कम है। इस मूल्य निर्धारण को निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। रिटेल निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 25 मई से शुरू होगी। इस दिन आम निवेशक और पात्र कर्मचारी निर्धारित बाजार समय के दौरान अपनी बोलियां लगा सकेंगे। नियमों के अनुसार, कुल ऑफर किए गए शेयरों का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रहेगा, जिससे छोटे निवेशकों को भी इस विनिवेश प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिल सके। ऑफर डॉक्यूमेंट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बैंक के कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से 75 लाख इक्विटी शेयर आरक्षित किए गए हैं। यह कदम कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार की योजना के अनुसार, प्रारंभिक चरण में 36.21 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी, जो 4 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। यदि ग्रीन शू विकल्प का पूरा उपयोग किया जाता है, तो अतिरिक्त 36.21 करोड़ शेयर और बेचे जाएंगे, जिससे कुल बिक्री दोगुनी होकर लगभग 72.41 करोड़ शेयर तक पहुंच सकती है। इस स्थिति में कुल इश्यू साइज लगभग 2,244 करोड़ रुपये तक हो सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के OFS से बैंक के शेयरों में निकट भविष्य में अस्थिरता देखने को मिल सकती है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह प्रक्रिया निवेशकों के लिए अवसर भी पैदा कर सकती है। वहीं, सरकार के इस कदम को विनिवेश लक्ष्य पूरा करने और बैंकिंग सेक्टर में हिस्सेदारी संरचना को संतुलित करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

अस्थिर बाजार में भी चुनिंदा बड़े शेयर दे सकते हैं बेहतर रिटर्न, विशेषज्ञों ने वॉचलिस्ट में रखने की सलाह दी

नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में इस समय उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है, जहां निवेशकों को लगातार अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इसी अनिश्चितता के बीच कुछ चुनिंदा लार्जकैप स्टॉक्स ऐसे भी हैं, जिन पर बाजार विशेषज्ञों का भरोसा बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत फंडामेंटल्स और स्थिर बिजनेस मॉडल के चलते ये कंपनियां आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं और निवेशकों को आकर्षक रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं। बाजार में हाल के दिनों में जिस तरह की हलचल देखने को मिल रही है, उसमें कई बार बड़ी और मजबूत कंपनियों के शेयर भी दबाव में आ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका कारण कंपनियों की आंतरिक स्थिति नहीं, बल्कि वैश्विक फंड फ्लो और विदेशी निवेश से जुड़ी गतिविधियां होती हैं। जब विदेशी संस्थागत निवेशक अपनी पोजीशन में बदलाव करते हैं या उभरते बाजारों में निवेश घटाते हैं, तो उसका असर ब्लूचिप कंपनियों पर भी देखने को मिलता है। इसी कारण वर्तमान समय में बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, लेकिन इसे दीर्घकालिक नजरिए से अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। इसी बीच कुछ लार्जकैप स्टॉक्स को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं, जिनमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और नेस्ले इंडिया जैसे मजबूत नाम शामिल हैं। इन कंपनियों को अपने-अपने सेक्टर में स्थिर प्रदर्शन और मजबूत बिजनेस मॉडल के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर इन शेयरों में आगे चलकर अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है और कुछ मामलों में यह तेजी लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना भी जताई जा रही है। विभिन्न सेक्टरों से जुड़े अन्य प्रमुख लार्जकैप शेयरों पर भी एनालिस्ट्स की नजर बनी हुई है, जहां उन्हें मध्यम से लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की उम्मीद दिखाई दे रही है। बाजार जानकारों का कहना है कि इस समय निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अस्थिरता के दौर में गुणवत्ता वाले स्टॉक्स ही बेहतर प्रदर्शन करते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन यह स्थिति उन निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है जो लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करते हैं। मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर आय और भरोसेमंद बिजनेस मॉडल वाली कंपनियां इस तरह के माहौल में अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं। कुल मिलाकर, मौजूदा बाजार परिदृश्य भले ही अनिश्चितता से भरा हो, लेकिन कुछ चुनिंदा लार्जकैप स्टॉक्स निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण बने हुए हैं, जहां सही रणनीति अपनाकर बेहतर रिटर्न हासिल किए जा सकते हैं।