सन टीवी नेटवर्क के कमजोर नतीजे: तिमाही मुनाफा 37% लुढ़का, स्टॉक में तेज गिरावट

नई दिल्ली । भारत की प्रमुख क्षेत्रीय मीडिया कंपनियों में शामिल सन टीवी नेटवर्क को वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कमजोर वित्तीय प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है। कंपनी के ताजा नतीजों के अनुसार, जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान उसका शुद्ध लाभ 37.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 232.02 करोड़ रुपये पर आ गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ 370.79 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इस गिरावट ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। कंपनी के प्रदर्शन में केवल मुनाफे की ही नहीं बल्कि राजस्व की भी कमी देखने को मिली है। इस तिमाही में सन टीवी नेटवर्क का कुल रेवेन्यू 882.51 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 941.81 करोड़ रुपये था। यानी रेवेन्यू में भी सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कारोबार के प्रमुख संकेतकों में यह कमजोरी ऐसे समय आई है जब मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर पहले से ही प्रतिस्पर्धा और बदलते उपभोक्ता व्यवहार की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऑपरेटिंग प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी का EBITDA भी दबाव में रहा। इस तिमाही में EBITDA 8.9 प्रतिशत घटकर 390.7 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि EBITDA मार्जिन भी पिछले वर्ष के 45.5 प्रतिशत से घटकर 44.3 प्रतिशत रह गया। यह संकेत देता है कि कंपनी की लाभप्रदता पर लागत और अन्य वित्तीय दबावों का असर पड़ा है। कंपनी ने अपने नतीजों में बताया कि मुनाफे में आई गिरावट के पीछे कुछ असाधारण और गैर-आवर्ती कारण भी जिम्मेदार रहे हैं। इनमें म्यूचुअल फंड निवेश पर मार्क-टू-मार्केट प्रोविजन और रेडियो निवेश से जुड़े एक संस्थान में हुए नुकसान शामिल हैं। इसके अलावा पिछले वर्ष की समान तिमाही में प्राप्त ब्याज आय का इस बार अनुपस्थित रहना भी अन्य आय में कमी का कारण बना, जिससे कुल लाभ पर असर पड़ा। हालांकि कमजोर तिमाही नतीजों के बावजूद कंपनी ने अपने मुख्य कारोबार को स्थिर बताया है। प्रबंधन के अनुसार, चुनौतीपूर्ण बाजार परिस्थितियों के बावजूद कंपनी का कोर बिजनेस मजबूत स्थिति में बना हुआ है। विशेष रूप से घरेलू सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में वृद्धि दर्ज की गई है, जो वित्त वर्ष 2026 में 9.7 प्रतिशत बढ़कर 1,891.7 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह संकेत देता है कि लंबी अवधि में कंपनी का मुख्य राजस्व मॉडल अभी भी स्थिरता बनाए हुए है। बाजार में इस कमजोर प्रदर्शन का असर भी साफ दिखाई दिया, जहां कंपनी के शेयरों में शुक्रवार को 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने कमजोर तिमाही परिणामों के बाद सतर्क रुख अपनाया, जिससे स्टॉक पर दबाव बढ़ गया। सन टीवी नेटवर्क, जो भारत की सबसे बड़ी क्षेत्रीय टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों में से एक है, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला, मराठी और हिंदी भाषाओं में अपने चैनल संचालित करती है। इसके अलावा कंपनी रेडियो, ओटीटी प्लेटफॉर्म और फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय है। कंपनी की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर काव्या मारन हैं, जो इसके प्रमुख प्रमोटर कलानिधि मारन की पुत्री हैं।
नाम की गड़बड़ी ने बदला खेल, Parle Industries के शेयर 3 दिन से अपर सर्किट पर, ‘मेलोडी’ टॉफी बनी मार्केट सेंसेशन

नई दिल्ली। शेयर बाजार में कई बार कंपनियों की असली परफॉर्मेंस से ज्यादा असर उनके नाम, चर्चा और सोशल मीडिया ट्रेंड का देखने को मिलता है। ऐसा ही एक दिलचस्प मामला इन दिनों Parle Industries के शेयरों में देखने को मिल रहा है, जहां लगातार तीसरे कारोबारी दिन अपर सर्किट लग गया है। इस तेजी के पीछे कंपनी का बिजनेस नहीं, बल्कि एक वायरल ‘मेलोडी मोमेंट’ और नाम की गफलत को बड़ी वजह माना जा रहा है। दरअसल हाल ही में एक कूटनीतिक मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा इटली की प्रधानमंत्री को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की गई थी। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह टॉफी चर्चा का विषय बन गई। इटली की प्रधानमंत्री ने भी इस टॉफी की सराहना की, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ गई। इस पूरे घटनाक्रम ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ‘मेलोडी’ नाम को अचानक सुर्खियों में ला दिया। इसी वायरल चर्चा के बीच शेयर बाजार में एक दिलचस्प भ्रम की स्थिति बन गई। कई निवेशकों ने टॉफी बनाने वाली कंपनी को समझने में गलती करते हुए Parle Industries के शेयर खरीदने शुरू कर दिए, जबकि वास्तविक टॉफी बनाने वाली कंपनी एक अलग अनलिस्टेड FMCG इकाई है। नाम में समानता होने की वजह से यह भ्रम और बढ़ गया और बाजार में खरीदारी का दबाव अचानक तेज हो गया। Parle Industries का असली बिजनेस टॉफी या बिस्किट से जुड़ा नहीं है। यह कंपनी मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। इसके अलावा कंपनी कागज कचरे के रीसाइक्लिंग से जुड़े कारोबार में भी सक्रिय है। लेकिन सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा और ‘पारले’ नाम की पहचान ने इसे अनजाने में एक अलग वजह से सुर्खियों में ला दिया। इस अप्रत्याशित खरीदारी के चलते कंपनी के शेयर लगातार तीसरे कारोबारी दिन 5 प्रतिशत के अपर सर्किट पर पहुंच गए। पिछले तीन दिनों में शेयर में लगभग 16 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की तेजी अक्सर तब देखने को मिलती है जब किसी स्टॉक को लेकर अचानक चर्चा बढ़ जाती है और निवेशक बिना पूरी जानकारी के खरीदारी करने लगते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि आज के समय में सोशल मीडिया और वायरल ट्रेंड्स का असर शेयर बाजार पर कितना तेजी से पड़ सकता है। एक साधारण उपहार से शुरू हुई चर्चा ने न केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ध्यान खींचा, बल्कि शेयर बाजार में भी अस्थायी हलचल पैदा कर दी। फिलहाल निवेशकों की दिलचस्पी के चलते Parle Industries के शेयरों में तेजी जारी है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे ट्रेंड आधारित मूवमेंट लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होते। असली दिशा कंपनी के मूल व्यवसाय और वित्तीय प्रदर्शन पर ही निर्भर करती है, जबकि इस मामले में तेजी का कारण पूरी तरह भावनात्मक और भ्रम पर आधारित दिखाई देता है।
पेट्रोल, दूध के बाद अब दवाओं पर महंगाई का असर, 384 जरूरी दवाएं हो सकती हैं महंगी

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के दवा बाजार पर भी पड़ सकता है। केंद्र सरकार 384 आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में एक बार की ‘आपातकालीन बढ़ोतरी’ करने पर विचार कर रही है। हालांकि यह बढ़ोतरी अस्थायी होगी और हालात सामान्य होने पर कीमतें फिर से घटाई जा सकती हैं। बीते कुछ समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब दवाओं के महंगे होने की आशंका ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे माल की कीमतों में भारी उछालदवा उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के चलते कई जरूरी रसायनों और कच्चे माल की कीमतों में 200 से 300 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही पैकेजिंग सामग्री और परिवहन लागत भी तेजी से बढ़ी है, जिसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, फार्मास्यूटिकल्स विभाग और वाणिज्य मंत्रालय के बीच लगातार चर्चा जारी है। किन दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैंसूत्रों के मुताबिक, जिन 384 दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है, उनमें कई जरूरी और जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं। इनमें शामिल हैं:-एंटीबायोटिक्स: एमॉक्सिसिलिन, एजिथ्रोमाइसिनहृदय रोग की दवाएं: एम्लोडिपाइन, एटोरवास्टेटिनदर्द निवारक दवाएं: पैरासिटामोलस्टेरॉयड: डेक्सामेथासोनविटामिन सप्लीमेंट्स: एस्कॉर्बिक एसिड अस्थायी होगी कीमतों में बढ़ोतरीसरकारी सूत्रों का कहना है कि यह बढ़ोतरी स्थायी नहीं होगी। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति सामान्य होगी और सप्लाई चेन बहाल होगी, कीमतों को वापस नियंत्रित किया जाएगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरीहाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी बढ़ोतरी है। नई कीमतों के बाद नई दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। सरकार के बचत उपाय और ऊर्जा नीतिईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार ने ऊर्जा और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कई कदमों की बात कही है। प्रधानमंत्री की ओर से ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को टालने और सोने की खरीद में संयम बरतने की अपील की गई है। पर्याप्त भंडार का दावापेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। भारत में डीजल उत्पादन खपत से अधिक है, जबकि एलपीजी की 60 प्रतिशत मांग आयात पर निर्भर है, जिसमें बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया मार्ग से आता है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है और फिलहाल किसी गंभीर कमी की स्थिति नहीं है।
खरबपति बनने की ओर एलन मस्क, दौलत में बड़ा उछाल, 722 अरब डॉलर के पार नेटवर्थ

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की संपत्ति में तेज रफ्तार से बढ़ोतरी जारी है। गुरुवार को उनकी नेटवर्थ में एक ही दिन में 45 अरब डॉलर का इजाफा हुआ, जिसके बाद कुल संपत्ति बढ़कर 722 अरब डॉलर तक पहुंच गई। इस उछाल के साथ मस्क अब ट्रिलियनेयर यानि खरबपति बनने की दिशा में और करीब माने जा रहे हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, दूसरे स्थान पर मौजूद लैरी पेज की संपत्ति मस्क के मुकाबले आधे से भी कम है। स्पेसएक्स IPO से और बढ़ सकती है दौलतएलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका में IPO लाने की तैयारी में है। यह कंपनी रॉकेट निर्माण और स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए जानी जाती है। माना जा रहा है कि यह IPO वॉल स्ट्रीट के इतिहास में सबसे बड़े इश्यू में से एक हो सकता है और अगले महीने SPCX कोड के तहत लॉन्च किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्पेसएक्स की अनुमानित वैल्यू 1.25 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकती है, जिसमें मस्क की हिस्सेदारी का मूल्य 600 अरब डॉलर से अधिक आंका जा सकता है। इसके बाद उनकी कुल संपत्ति 1 ट्रिलियन डॉलर से भी ऊपर जा सकती है। 5 महीने में 103 अरब डॉलर की बढ़ोतरीरिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक एलन मस्क की संपत्ति में 103 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। यह राशि भारत के शीर्ष उद्योगपतियों की दौलत से भी अधिक है। तुलना के अनुसार, मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति 88.10 अरब डॉलर है, जबकि गौतम अडानी की नेटवर्थ लगभग 108 अरब डॉलर के आसपास है। अरबपतियों की रेस में मस्क सबसे आगेब्लूमबर्ग रैंकिंग के अनुसार, इस साल संपत्ति बढ़ाने वाले अरबपतियों की सूची में मस्क शीर्ष पर हैं। उनके बाद लैरी पेज, सर्गी ब्रिन, माइकल डेल, जेफ बेजोस, जेनसेन हुआंग और गौतम अडानी जैसे नाम शामिल हैं, जिनकी संपत्ति में अरबों डॉलर का इजाफा दर्ज किया गया है। ट्रिलियनेयर बनने की ओर कदमस्पेसएक्स की संभावित लिस्टिंग के बाद एलन मस्क इतिहास में पहले ऐसे व्यक्ति बन सकते हैं जिनकी संपत्ति 1 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच जाएगी। इससे वैश्विक अरबपति सूची में उनकी बढ़त और भी मजबूत हो जाएगी।
पनगढ़िया ने दी रुपये की गिरावट में हस्तक्षेप न करने की सलाह, बोले- 100 सिर्फ एक संख्या

नई दिल्ली। नीति आयोग (Policy Commission) के पूर्व उपाध्यक्ष और प्रमुख अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया (Arvind Panagariya) ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India.- RBI) को रुपये के गिरावट (Decline of Rs) पर हस्तक्षेप न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि एक डॉलर के बराबर 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को नीति निर्धारण का आधार न बनाएं। पनगढ़िया ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि 100 भी बस एक संख्या है, ठीक 99 और 101 की तरह। उन्होंने साफ कहा कि कच्चे तेल (Crude oil) की कमी अल्पकालिक हो या दीर्घकालिक, इस समय रुपये को अपने स्तर पर गिरने देना ही सही नीति है। अर्थशास्त्री ने कहा कि यदि कच्चे तेल की कमी तीन महीने से एक साल तक की है तो रुपये में शुरुआती कमजोरी आएगी, लेकिन बाद में तेल कीमतों में नरमी आने पर रुपये में मजबूत वापसी होगी। इस दौरान विदेशी निवेशक ‘सस्ते’ रुपये का फायदा उठाकर भारत में निवेश बढ़ा सकते हैं। दीर्घकालिक तेल संकट की स्थिति में पनगढ़िया का मत है कि रुपये के अवमूल्यन के अलावा कोई विकल्प घाटे का सौदा साबित होगा। विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करके रुपये बचाने की कोशिश बेकार होगी, क्योंकि इससे कोई स्थायी फायदा नहीं होगा। उन्होंने डॉलर में बॉन्ड जारी करने या प्रवासी भारतीयों से ऊंची ब्याज दर पर जमा स्वीकार करने जैसे उपायों को अस्थायी राहत बताते हुए खारिज किया। पनगढ़िया ने चेतावनी दी कि इनसे प्राप्त विदेशी मुद्रा पर चुकाए जाने वाले ब्याज की लागत, मिलने वाले लाभ से ज्यादा होगी। पनगढ़िया ने आगे कहा कि मौजूदा समय 2013 जैसा नहीं है, जब मुद्रास्फीति दोहरे अंकों में थी। आज भारतीय अर्थव्यवस्था रुपये के कुछ अवमूल्यन से आने वाले मुद्रास्फीति दबाव को सहन करने की क्षमता रखती है। गुरुवार को रुपये में उछालइस बीच, विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने गुरुवार को अपने सर्वकालिक निचले स्तर से उबरते हुए 50 पैसे की तेजी दर्ज की। अंतरबैंक बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये 96.36 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपये ने 96.05 के उच्चतम और 96.60 के निम्नतम स्तर को छुआ। बुधवार को रुपये ने 96.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद होने के बाद गुरुवार को मजबूती दिखाई। भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेत और केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप की उम्मीद ने रुपये को सहारा दिया। क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने के शुरुआती संकेत और आरबीआई के सक्रिय हस्तक्षेप से रुपये संभला है। आगे निवेशकों का ध्यान भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और मौद्रिक नीति समीक्षा पर रहेगा। उन्होंने अनुमान जताया कि रुपये 95.74 से 96.50 के दायरे में रह सकता है। मिराए एसेट शेयरखान के अनुज चौधरी ने कहा कि आरबीआई के दखल और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये में मजबूती आई है।
ग्रामीण और शहरी भारत के लिए बड़ा बदलाव, डाक विभाग की नई सर्विस से घर बैठे लोन और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध

नई दिल्ली ।भारतीय वित्तीय सेवाओं के डिजिटल विस्तार में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जहां अब बैंकिंग सुविधाएं सिर्फ शाखाओं तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि सीधे आम नागरिकों के घर तक पहुंचेंगी। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा शुरू की गई नई स्मार्ट पोस्टमैन सेवा के तहत अब डाकिया केवल पत्र या पार्सल ही नहीं, बल्कि वित्तीय सेवाओं का पूरा पैकेज लेकर लोगों के दरवाजे तक पहुंचेगा। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं को और अधिक सरल, तेज और सुलभ बनाना बताया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत डाकिया अब बायोमेट्रिक डिवाइस और डिजिटल टैबलेट के माध्यम से लोगों को पर्सनल लोन, माइक्रो इंश्योरेंस और डिजिटल लॉकर जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम होगा। इसका सीधा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो बैंक शाखाओं तक पहुंचने में असमर्थ हैं या जिनके लिए बैंकिंग प्रक्रियाएं जटिल और समय लेने वाली साबित होती हैं। इस पहल से वित्तीय समावेशन को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सेवा के तहत ग्राहक घर बैठे ही लोन के लिए आवेदन कर सकेंगे और डाकिया उनके घर पहुंचकर आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन करेगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्रता के आधार पर लोन की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जा सकेगी। इसी तरह माइक्रो इंश्योरेंस की सुविधा भी सरल प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे छोटे प्रीमियम पर बीमा कवरेज हासिल किया जा सकेगा। डिजिटल लॉकर सेवा के माध्यम से नागरिक अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संरक्षित कर सकेंगे। डाकिया इस प्रक्रिया में दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित करने में सहायता करेगा, जिससे कागजी दस्तावेजों के खोने या खराब होने की समस्या से राहत मिलने की संभावना है। यह कदम विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जो अपने दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। इस पूरी व्यवस्था को सरकार के वित्तीय समावेशन अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य देश के अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाना है। विशेषज्ञों के अनुसार इस पहल से छोटे व्यवसायियों, किसानों और निम्न आय वर्ग के परिवारों को काफी राहत मिल सकती है, क्योंकि उन्हें छोटे-छोटे वित्तीय कार्यों के लिए अब बैंक शाखाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। हालांकि, इस नई व्यवस्था के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या और डिजिटल साक्षरता की कमी इस सेवा के प्रभावी संचालन में बाधा बन सकती है। इसके अलावा डाक कर्मचारियों पर बढ़ती जिम्मेदारियों के चलते उन्हें विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी ताकि सेवा की गुणवत्ता प्रभावित न हो। इसके बावजूद यह पहल भारतीय डाक प्रणाली को एक नए डिजिटल वित्तीय ढांचे में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल बैंकिंग व्यवस्था को सरल बनाएगा बल्कि देश के आर्थिक ढांचे में भी व्यापक बदलाव ला सकता है।
बाजार में क्या रहेगा ट्रेंड? जानें 22 मई का शेयर मार्केट और गोल्ड आउटलुक

नई दिल्ली। 22 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार और सर्राफा बाजार दोनों में हलचल देखने को मिल सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेत, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां शुक्रवार के कारोबार की दिशा तय करेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार में जहां उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, वहीं सोने की कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिल सकती है। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और NIFTY 50 में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में दबाव और खरीदारी दोनों का मिश्रित असर देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों का रुख निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेगा। आईटी, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिल सकती है, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव रह सकता है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में जारी तेजी के बाद निवेशक अब सतर्क नजर आ रहे हैं। ऐसे में ट्रेडिंग के दौरान उतार-चढ़ाव अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक संकेतकों का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई देगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बिना रणनीति के बड़े निवेश से बचें और स्टॉप लॉस के साथ ट्रेडिंग करें। दूसरी ओर, सर्राफा बाजार में सोना की कीमतों में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी और सुरक्षित निवेश के बढ़ते रुझान के कारण सोने की मांग बढ़ सकती है। अनुमान है कि 24 कैरेट सोना 98 हजार से 99 हजार 500 रुपए प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार कर सकता है, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव 89 हजार 500 से 91 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के माहौल में निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। यही वजह है कि गोल्ड में लगातार निवेश बढ़ रहा है। हालांकि शहरों और राज्यों के हिसाब से टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है। आर्थिक जानकारों के अनुसार, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में गिरावट के दौरान अच्छी कंपनियों के शेयर खरीदना फायदेमंद हो सकता है। वहीं सोने में निवेश करने वालों के लिए डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF भी अच्छे विकल्प बनकर उभर रहे हैं। कुल मिलाकर 22 मई का दिन निवेशकों के लिए काफी अहम रहने वाला है। शेयर बाजार में जहां सावधानी के साथ निवेश की जरूरत होगी, वहीं सोने की चमक निवेशकों को आकर्षित कर सकती है।
डॉक्टरों के लिए बड़ी खुशखबरी, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों में 118 प्रोफेसर पदों पर भर्ती शुरू, जानिए पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली । चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे अनुभवी डॉक्टरों और शिक्षकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने देश के विभिन्न ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों और पीजीआईएमएसआर संस्थानों में प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए बड़ा भर्ती अभियान शुरू किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत अलग-अलग मेडिकल विभागों में कुल 118 पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। भर्ती को लेकर जारी अधिसूचना के बाद मेडिकल शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अभ्यर्थियों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत एनाटॉमी, अनेस्थीसियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, सामुदायिक चिकित्सा, सामान्य चिकित्सा, सामान्य सर्जरी, माइक्रोबायोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक्स, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, मनोरोग चिकित्सा, रेस्पिरेटरी मेडिसिन और ब्लड बैंक समेत कई महत्वपूर्ण विभागों में रिक्तियां निकाली गई हैं। मेडिकल शिक्षा और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह भर्ती स्वास्थ्य शिक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में एमडी, एमएस या समकक्ष मान्यता प्राप्त पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री होना अनिवार्य रखा गया है। इसके साथ ही संबंधित विषय में निर्धारित वर्षों का शिक्षण अनुभव भी जरूरी होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चयनित उम्मीदवार मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण योगदान दे सकें। आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र 50 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि आरक्षित वर्गों से आने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में विशेष छूट प्रदान की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू, शॉर्टलिस्टिंग और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान के साथ अन्य सरकारी सुविधाएं और भत्ते भी दिए जाएंगे। जानकारी के अनुसार चयनित प्रोफेसरों को प्रति माह एक लाख तेइस हजार रुपये से लेकर दो लाख पंद्रह हजार रुपये तक का वेतन मिल सकेगा। आवेदन शुल्क को लेकर भी अलग-अलग श्रेणियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और विभागीय पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को शुल्क में छूट दी गई है। इससे अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को आवेदन का अवसर मिल सकेगा। उम्मीदवारों को आवेदन पत्र भरते समय सभी आवश्यक दस्तावेज सावधानीपूर्वक संलग्न करने होंगे। आवेदन फॉर्म जमा करने के बाद उसकी एक प्रति भविष्य के लिए सुरक्षित रखना भी जरूरी बताया गया है। मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में स्थायी और प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती एक बड़ा अवसर मानी जा रही है। आने वाले समय में इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्रतियोगिता भी काफी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
बढ़ सकती हैं जरूरी दवाओं की कीमतें: फार्मा कंपनियों की तैयारी, आम लोगों पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालातों का असर अब वैश्विक सप्लाई चेन पर साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से दवा निर्माण की लागत में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसी कारण देश में 384 जरूरी दवाओं की कीमतें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे फार्मा सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार और दवा मूल्य निर्धारण से जुड़ी संस्थाओं के बीच इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा चल रही है। उद्योग जगत की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया है कि बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए आवश्यक दवाओं की कीमतों में संशोधन किया जाए। फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है और अंतिम निर्णय परिस्थितियों को देखते हुए लिया जा सकता है। बताया जा रहा है कि जिन दवाओं की कीमतों में बदलाव की चर्चा हो रही है, उनमें कई जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं। इनमें एंटीबायोटिक, हृदय रोगों की दवाएं, बुखार और दर्द निवारक दवाएं, सूजन कम करने वाली दवाएं तथा विटामिन सप्लीमेंट जैसी आवश्यक दवाएं भी शामिल हैं। इन दवाओं का उपयोग सामान्य संक्रमण से लेकर गंभीर बीमारियों के इलाज तक में किया जाता है, जिससे इनकी मांग हमेशा बनी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर दवा निर्माण पर पड़ता है। कई जरूरी फार्मा सामग्री आयात पर निर्भर होती है, ऐसे में सप्लाई बाधित होने पर उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इसी वजह से कंपनियां कीमतों में संशोधन की मांग कर रही हैं। हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं और सप्लाई चेन फिर से स्थिर हो जाती है, तो इन दवाओं की कीमतों में कमी भी संभव है। फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अंतिम निर्णय नियामक संस्थाओं की समीक्षा के बाद ही सामने आएगा। इस संभावित बदलाव को लेकर आम लोगों में चिंता भी बढ़ सकती है, क्योंकि जरूरी दवाओं की कीमतों में वृद्धि सीधे स्वास्थ्य खर्च पर असर डालती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस दौरान संतुलन बनाए रखना होगा ताकि मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और दवा उद्योग भी स्थिर बना रहे।
साइबर फ्रॉड पर सख्ती: वरिष्ठ नागरिकों के लिए डबल OTP सिस्टम से बढ़ेगी बैंकिंग सुरक्षा

नई दिल्ली । देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध और ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के मामलों के बीच वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। डिजिटल लेनदेन के दौरान होने वाली ठगी की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से अब “डबल OTP सिस्टम” लागू किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के खाताधारकों के बैंक ट्रांजैक्शन को तभी मंजूरी मिलेगी जब दो अलग-अलग स्तरों पर OTP की पुष्टि पूरी हो जाएगी। जानकारी के अनुसार, इस प्रणाली के तहत पहला OTP खाताधारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा, जबकि दूसरा OTP उस व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर जाएगा जिसे खाताधारक ने अपने विश्वसनीय संपर्क यानी “ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट” के रूप में चुना होगा। यह संपर्क आमतौर पर परिवार का कोई सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति होता है। जब तक दोनों OTP की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक कोई भी वित्तीय लेनदेन पूरा नहीं किया जा सकेगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वरिष्ठ नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी न हो सके। कई बार देखा गया है कि साइबर अपराधी फर्जी कॉल, लिंक या खुद को अधिकारी बताकर लोगों से बैंक डिटेल्स हासिल कर लेते हैं। ऐसे मामलों में बुजुर्ग अधिक असुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि वे तकनीकी धोखाधड़ी को तुरंत पहचान नहीं पाते। डबल OTP सिस्टम इस खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा। फिलहाल इस व्यवस्था को सीमित स्तर पर लागू किया गया है और इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ बैंकों में शुरू किया गया है। शुरुआती चरण में चुनिंदा शाखाओं को इसमें शामिल किया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक ग्राहकों के लिए इस नई सुविधा का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण सफल रहने के बाद इसे धीरे-धीरे अन्य बैंकों में भी लागू किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल है। इससे न केवल धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि परिवार के सदस्यों की भागीदारी भी वित्तीय सुरक्षा में बढ़ेगी। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि सुरक्षा के साथ-साथ सिस्टम को सरल बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को किसी प्रकार की तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में यह डबल OTP सिस्टम एक अतिरिक्त सुरक्षा परत की तरह काम करेगा, जिससे बिना दूसरी पुष्टि के कोई भी बड़ा लेनदेन संभव नहीं होगा। इससे ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी लेनदेन जैसे मामलों पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।