मेटल शेयरों में बिकवाली से बाजार धड़ाम, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद

नई दिल्ली। /मुंबई में शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आया और कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ बंद हुए। 13 फरवरी के कारोबारी सत्र में BSE Sensex 1,048.16 अंक यानी 1.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,626.76 पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 50 336.10 अंक यानी 1.30 प्रतिशत टूटकर 25,471.10 पर आ गया। पूरे दिन बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा और निवेशकों की धारणा कमजोर दिखी। गिरावट का नेतृत्व मेटल शेयरों ने किया। सेक्टोरल सूचकांकों में Nifty Metal 3.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे बड़ा लूजर रहा, जबकि Nifty Commodities 2.24 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। इसके अलावा Nifty Realty 2.23 प्रतिशत, Nifty Energy 2.04 प्रतिशत, Nifty FMCG 1.90 प्रतिशत, Nifty Oil & Gas 1.88 प्रतिशत, Nifty PSE 1.68 प्रतिशत और Nifty Consumption 1.63 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुए। इससे साफ है कि बिकवाली व्यापक रही और लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे। सेंसेक्स पैक में हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा स्टील, टाइटन, टीसीएस, पावर ग्रिड, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट देखी गई। वहीं बजाज फाइनेंस और एसबीआई ही ऐसे शेयर रहे जो हरे निशान में बंद हुए। केवल लार्जकैप ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव रहा। Nifty Midcap 100 1,032.85 अंक यानी 1.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,438 पर बंद हुआ, जबकि Nifty Smallcap 100 311.20 अंक यानी 1.79 प्रतिशत गिरकर 17,032.90 पर आ गया। इससे संकेत मिलता है कि व्यापक बाजार में निवेशकों ने मुनाफावसूली या जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई। एलकेपी सिक्योरिटीज के विश्लेषक रूपक दे ने कहा कि अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण निफ्टी की शुरुआत ही गिरावट के साथ हुई और दिनभर दबाव बना रहा। उन्होंने बताया कि इंडिया वीआईएक्स का 200 डीएमए के ऊपर जाना बाजार में बढ़ते डर को दर्शाता है। उनके अनुसार निफ्टी के लिए 25,500 का स्तर अहम सपोर्ट है और इसके नीचे जाने पर 25,000 का स्तर भी देखा जा सकता है। वहीं 25,800 के आसपास रुकावट का स्तर बना हुआ है। इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड करीब 0.55 प्रतिशत बढ़कर 68 डॉलर प्रति बैरल के आसपास और डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग आधा प्रतिशत चढ़कर 63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। तेल कीमतों में बढ़ोतरी भी बाजार की धारणा पर असर डाल सकती है।कुल मिलाकर शुक्रवार का सत्र निवेशकों के लिए निराशाजनक रहा। वैश्विक संकेत, सेक्टोरल दबाव और तकनीकी कमजोरी ने मिलकर बाजार को लाल निशान में धकेल दिया। आने वाले सत्रों में 25,500 का स्तर निवेशकों की नजर में प्रमुख रहेगा।
इंडिया-इजरायल एआई समिट 2026: खेती, डिजिटल नवाचार और जिम्मेदार एआई पर ध्यान

नई दिल्ली: भारत और इजरायल अगले सप्ताह होने वाले ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में एआई सहयोग को और मजबूत करने जा रहे हैं। दोनों देशों का सहयोग खेती, जलवायु नवाचार, डिजिटल बदलाव और भविष्य के लिए जरूरी कौशल तैयार करने जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। नई दिल्ली स्थित इजरायल दूतावास ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। समिट में इजरायल से उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पूर्व राजदूत और ईडीटीएस नीति समन्वयक इलान फ्लस करेंगे। दल में सरकारी अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, शोधकर्ता और नीति विशेषज्ञ शामिल हैं। उनका उद्देश्य एआई, जलवायु लचीलापन, ईएसजी निवेश, डिजिटल शासन और जिम्मेदार नवाचार में इजरायल-भारत सहयोग को गहरा करना है। इलान फ्लस ने बयान में कहा कि एआई जब दुनिया को बदल रहा है, तब भारत और इजरायल की जिम्मेदारी है कि नवाचार को नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी यह दिखाती है कि उन्नत तकनीक और मानवीय मूल्यों को साथ लेकर कैसे प्रगति की जा सकती है। उनका कहना है कि यह समिट दोनों देशों के रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत होगी। समिट में एआई के जरिए जलवायु परिवर्तन से निपटने, सटीक खेती, डिजिटल ढांचे, रोजगार में बदलाव और नई तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा टिकाऊ विकास के लिए नए निवेश मॉडल और सरकारी-निजी भागीदारी पर भी विचार किया जाएगा। इजरायली दूतावास की इनोवेशन अटैची माया शेरमैन ने कहा कि भारत और इजरायल दोनों ऐसी तकनीक में विश्वास रखते हैं जो लोगों के हित में काम करे। उन्होंने कहा कि समिट दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूत करेगा। समिट से पहले ही दूतावास ने शिक्षा, उद्योग और सरकार से जुड़े विशेषज्ञों के बीच बातचीत बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं। मुख्य समिट कार्यक्रम भारत मंडपम में आयोजित होंगे। इस दौरान दूतावास भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़ (IIT-Ropar), धीरूभाई अंबानी विश्वविद्यालय और तकनीकी नीति थिंक-टैंक द डायलॉग के साथ मिलकर एआई और नई तकनीकों में सहयोग को आगे बढ़ाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समिट न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देगा बल्कि भारत और इजरायल के बीच ज्ञान, शोध और नीति निर्माण में भी साझेदारी को मजबूती देगा। कृषि, शिक्षा और डिजिटल क्षेत्रों में इस सहयोग से छोटे और बड़े व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, युवा वर्ग को भविष्य के लिए तैयार करने और जिम्मेदार एआई के उपयोग को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।इस समिट से दोनों देशों के लिए यह संदेश जाएगा कि एआई और डिजिटल नवाचार को मानवीय मूल्यों के साथ लागू किया जा सकता है, जिससे सतत और समावेशी विकास को बल मिलेगा।
Gold-Silver Rates: 26000 सस्ती हुई चांदी… फिर आई तेजी, आज इतने महंगे हुए गोल्ड-सिल्वर

नई दिल्ली। सोना और चांदी के भाव में गुरुवार को ग्लोबल स्तर पर गिरावट देखने को मिली, लेकिन अब इनके दाम में तेजी देखी जा रही है. यह तेजी निवेशकों की निचले स्तर पर खरीदारी के बाद आई है.सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. अमेरिका से लेकर भारतीय बाजार तक सोने और चांदी के भाव तेजी से गिरे थे. अमेरिकी बाजार में चांदी करीब 9 फीसदी और सोना 2 फीसदी से ज्यादा गिरकर बंद हुए थे. इधर, मल्टी कमोडिटी मार्केट (MCX) पर गुरुवार को अप्रैल वायदा के लिए सोना 6,400 रुपये सस्ते हुए थे और 1.52 लाख रुपये पर आ गए थे. वहीं चांदी की कीमत देर रात करीब 26000 रुपये गिरी थी, जिस कारण वायदा बाजार में एक किलो चांदी का भाव 2.37 लाख रुपये पर आ गया. सोने और चांदी के भाव में तेजी सुबह 10.30 बजे MCX पर मार्च वायदा के लिए चांदी 6196 रुपये चढ़कर 2,42,599 रुपये पर कारोबार कर रही थी. वहीं अप्रैल वायदा के लिए गोल्ड 1464 रुपये चढ़कर 1.54 लाख रुपये पर आ गया. सोने और चांदी के भाव में यह तेजी एक दिन पहले आई बड़ी गिरावट के बाद आई है. कल क्यों गिरे थे सोने और चांदी के भावसोने और चांदी के भाव में गिरावट की वजह मजबूत अमेरिकी बेरोजगारी डाटा और फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से रेट कटौती की उम्मीदें कमजोर होना माना जा रहा है. जिस कारण डॉलर के मजबूत होने के संकेत मिले हैं और सोना और चांदी के दाम गिरे हैं. हालांकि शुक्रवार को एमसीएक्स पर गिरावट के बाद खरीदारी होने से तेजी देखी जा रही है. रिकॉर्ड हाई से इतने सस्ते हुए सोना-चांदी 29 जनवरी 2026 को सोने की कीमत 1.93 लाख रुपये पर थे और चांदी का भाव 4.20 लाख रुपये थे, जो इनका रिकॉर्ड हाई लेवल है. सोने की कीमत शुक्रवार को 1.54 लाख रुपये पर आ गए और चांदी की कीमत 2.42 लाख रुपये पर आ गए. इसका मतलब है कि सोने की कीमत 40 हजार रुपये और चांदी की कीमत 1.82 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है. इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी के भावअंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दोनों के भाव गिरकर बंद हुए. अमेरिका (COMEX/Spot) में सोना लगभग 2.3–2.8% गिरकर लगभग $4,980–$4,940 प्रति औंस पर आ गया और चांदी लगभग 8.8% तक टूट गई, जो $75–$76 पर पहुंच गई.
महंगाई मापने का आधार बदला… नई सीरीज में 299 की जगह 358 वस्तुएं, ई-कॉमर्स-ओटीटी भी शामिल

नई दिल्ली। खुदरा महंगाई (Retail Inflation) की गणना के लिए नई शृंखला (New Series) का आगाज गुरुवार को किया गया। इसके लिए आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 किया गया है। आधार वर्ष वह संदर्भ वर्ष होता है जिसे तुलना के लिए चुना जाता है। इसके माध्यम से यह आकलन किया जाता है कि कीमतों (Prices) में कितनी वृद्धि या कमी हुई है। कितने बाजार और कस्बे शामिल किए गए?नई सीरीज में 1,465 ग्रामीण बाजार और 1,395 शहरी बाजार शामिल हैं, जो 434 कस्बों में फैले हुए हैं। इसके अलावा, 25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 कस्बों में 12 ऑनलाइन बाजार भी शामिल किए गए हैं। ग्रामीण और शहरी बाजारों से मूल्य डेटा मासिक आधार पर एकत्र किया गया, जबकि ऑनलाइन कीमतें साप्ताहिक आधार पर ली गई हैं। इसमें ऑनलाइन बाजार क्यों शामिल किए गए ?25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 कस्बों में 12 ऑनलाइन बाजार शामिल किए गए हैं, ताकि ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिकने वाली वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को दर्ज किया जा सके। इसके अलावा हवाई किराया, टेलीफोन और ओटीटी सेवाओं की कीमतें भी ऑनलाइन माध्यम से एकत्र की जा रही हैं। क्या बदलाव हुआ ?अखिल भारतीय स्तर पर भारित वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़कर 358 हो गई है। इनमें वस्तुओं की संख्या 259 से बढ़कर 308 और सेवाओं की संख्या 40 से बढ़कर 50 हो गई है। मकान किराये के लिए आवासों का नमूना आकार क्या है?किराया संग्रह के लिए कुल 19,039 आवासों की पहचान की गई है, जिनमें 15,715 शहरी और 3,324 ग्रामीण आवास शामिल हैं। चेन-आधारित सूचकांक के उपयोग को देखते हुए भविष्य में, उपलब्धता के अनुसार और आवास जोड़े जा सकते हैं। इसमें ग्रामीण आवास का भार 11.764% है, जिसमें आवास, पानी, बिजली, गैस और अन्य ईंधन शामिल हैं। क्या हवाई किराए की कीमतों की गणना भी होगी?– हवाई किराए की कीमतें प्रसिद्ध ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से एकत्र की जाती हैं। क्या स्ट्रीमिंग सेवाओं की कीमतें भी शामिल?– अमेजन प्रइम वीडियो, नेटफ्लिक्स, जियो हॉटस्टर, सोनी लिव जैसी सेवाओं की कीमतें सीधे सेवा प्रदाताओं की वेबसाइट्स से ऑनलाइन एकत्र की जाती हैं। ‘खाद्य एवं पेय पदार्थ’ के भार में कितना बदलाव हुआ ?– यदि सीपीआई 2012 की वर्गीकरण प्रणाली अपनाई जाती, तो खाद्य एवं पेय पदार्थों का हिस्सा 45.86% से घटकर 40.10% हो जाता। नई वर्गीकरण संरचना के अनुसार इसका हिस्सा 36.75% है। यह बदलाव संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग के फ्रेमवर्क को अपनाने के कारण हुआ है।
दुनिया का सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाला देश… यहां 1 कप चाय से भी बेहद कम कीमत..

नई दिल्ली। दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल (Cheapest Petrol) बेचने वाले देशों की लिस्ट में बड़े चौंकाने वाले तथ्य हैं। इन देशों में पेट्रोल की कीमत भारतीय नजरिए से न सिर्फ बहुत कम है, बल्कि कई में तो पेट्रोल की कीमत (Petrol-Price) भारत में बिकने वाले एक कप चाय (One Cup Tea) से भी सस्ती है। लीबिया (Libya) दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाला देश है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत मात्र 2.15 रुपये है। यानी कए कप चाय की कीमत में करीब 5 लीटर पेट्रोल यहां मिल रहा है। भारत के अधिकतर शहरों में एक कप चाय की कीमत 10 से 15 रुपये के बीच है। इस लिस्ट में ईरान दूसरे स्थान पर है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत केवल 2.59 रुपये है। जबकि, सबसे महंगा तेल हांगकांग में 340.53 रुपये लीटर है। यह जानकारी ग्लोबलपेट्रोलप्राइसेज डॉट कॉम के 9 फरवरी 2026 के आंकड़ों पर आधारित है। दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देशदेश और पेट्रोल की अनुमानित कीमत (₹)1. लीबिया ₹2.152. ईरान ₹2.593. वेनेजुएला ₹3.174. अंगोला ₹29.635. कुवैत ₹30.986. अल्जीरिया ₹32.897. तुर्कमेनिस्तान ₹38.788. मिस्र ₹40.659. कजाकिस्तान ₹45.0610. कतर ₹46.02स्रोत: globalpetrolprices.com आज पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बदलाव नहींअगर भारत की बात करें तो आज ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम जारी कर दी हैं। पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बदलवा नहीं हुआ है। देश में सबसे सस्ता पेट्रोल आज भी पोर्ट ब्लेयर में ₹82.46 प्रति लीटर और डीजल ₹78.05 प्रति लीटर है। बता दें मार्च 2024 में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹2 प्रति लीटर घटाए गए थे। इसके बाद अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले शहरपोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹82.46 प्रति लीटरईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹90.87 प्रति लीटरसिलवासा, दादरा और नगर हवेली: ₹92.37 प्रति लीटरदमन, दमन और दीव: ₹92.55 प्रति लीटरहरिद्वार, उत्तराखंड: ₹92.78 प्रति लीटररुद्रपुर, उत्तराखंड: ₹92.94 प्रति लीटरउना, हिमाचल प्रदेश: ₹93.27 प्रति लीटरदेहरादून, उत्तराखंड: ₹93.35 प्रति लीटरनैनीताल, उत्तराखंड: ₹93.41 प्रति लीटरस्रोत: इंडियन ऑयल भारत में सबसे सस्ता डीजल बेचने वाले शहरपोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹78.05 प्रति लीटरइटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹80.38 प्रति लीटरजम्मू, जम्मू और कश्मीर: ₹81.32 प्रति लीटरसंबा, जम्मू और कश्मीर: ₹81.58 प्रति लीटरकठुआ, जम्मू और कश्मीर: ₹81.97 प्रति लीटरउधमपुर, जम्मू और कश्मीर: ₹82.15 प्रति लीटरचंडीगढ़: ₹82.44 प्रति लीटरराजौरी, जम्मू और कश्मीर: ₹82.64 प्रति लीटरस्रोत: इंडियन ऑयल
निफ्टी आईटी में 5.5% की भारी गिरावट, मार्केट कैप 1.6 लाख करोड़ रुपए घटा..

नई दिल्ली। मुंबई। गुरुवार के कारोबारी सत्र में आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स 5.51 प्रतिशत गिरकर चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे न केवल इंडेक्स प्रभावित हुआ बल्कि आईटी कंपनियों की कुल बाजार पूंजी में भी 1.6 लाख करोड़ रुपए की भारी कमी दर्ज की गई। इस दौरान निफ्टी आईटी कंपनियों का मार्केट कैप घटकर 27,32,579 करोड़ रुपए रह गया। प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में गिरावट विशेष रूप से गंभीर रही। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का शेयर 5.48 प्रतिशत गिरकर 2,750 रुपए पर पहुंच गया, जो पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। इंफोसिस में भी 5.48 प्रतिशत की गिरावट आई। टेक महिंद्रा 6.40 प्रतिशत गिरा, जबकि एचसीएल टेक, एमफैसिस और विप्रो के शेयरों में 4.5 से 5 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बिकवाली के पीछे सबसे बड़ा कारण उभरती एआई तकनीक है। हाल ही में ‘एंथ्रोपिक’ नामक कंपनी ने ‘क्लॉड कोवर्क’ नामक नया एआई टूल लॉन्च किया है, जो कई व्यावसायिक कामों को स्वतः पूरा करने में सक्षम है। इस एआई टूल में ऐसे ऑटोमेशन सिस्टम शामिल हैं जो पहले कई अलग-अलग सॉफ्टवेयर की जरूरत वाले कामों को एक ही प्लेटफॉर्म पर कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस स्थिति को ‘सासपोकैलिप्स’ कहा है, यानी एआई पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों की जगह ले सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर एआई ने पारंपरिक आईटी सेवाओं का काम ले लिया, तो कंपनियों की आमदनी में 40 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है। इसके अलावा अमेरिका से मिले मजबूत रोजगार आंकड़े भी बाजार पर दबाव बनाने वाले रहे। जनवरी में अमेरिका में 1.3 लाख नई नौकरियां जुड़ीं और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत हो गई। इससे संकेत मिला कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्दी ब्याज दरें कम नहीं करेगा। इससे भारतीय आईटी कंपनियों की विदेशी आय पर असर पड़ सकता है और शेयरों पर दबाव बढ़ा। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि आने वाले समय में नए एआई टूल पुराने सॉफ्टवेयर और टेस्टिंग सेवाओं की मांग को घटा सकते हैं। पारंपरिक आईटी कंपनियों को इस बदलाव के लिए तैयार रहना होगा। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निवेशक एआई तकनीक के प्रभाव और अमेरिका की मौद्रिक नीति पर नजर बनाए रखें। आईटी सेक्टर में उच्च लागत वाले पारंपरिक सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स की मांग में कमी आने की संभावना है, जिससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशक और कंपनियां दोनों ही इस बदलाव की जटिलताओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं। आईटी कंपनियों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें न केवल टेक्नोलॉजी में बदलाव अपनाना होगा बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों के आधार पर अपनी रणनीति भी बदलनी होगी।
IRDA: गलत तरीके, झूठे वायदों के आधार पर बेच रहे बीमा पॉलिसी…कमीशन पर लगाम लगाने की तैयारी

नई दिल्ली। बीमा नियामक इरडा (Insurance Regulator IRDA) ने बीमा कंपनियों (Insurance Companies) के प्रमुखों के सामने गलत तरीके, झूठे वायदों के आधार पर बीमा पॉलिसी बेचने पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, उनकी बैठक में जीवन बीमा कंपनियों ने स्थगित कमीशन भुगतान मॉडल (Commission Payment Model) का सुझाव दिया है। इसमें एजेंट को पूरा कमीशन एक साथ नहीं, बल्कि पॉलिसी की पूरी अवधि के दौरान दिया जाएगा। बताया जा रहा है इन सुझावों में कॉरपोरेट एजेंट्स के लिए पांच साल और व्यक्तिगत एजेंट्स के लिए तीन साल का प्रस्ताव दिया गया है। इसका मकसद साफ है, बीमा पॉलिसी के गलत बिक्री रोकना, कंपनियों का खर्च घटाना और ग्राहकों को सस्ता, टिकाऊ बीमा देना। वैसे खास बात यह है कि हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक और आर्थिक सर्वेक्षण में भी ऊंचे कमीशन पर सवाल उठाए गए थे। 60,800 करोड़ रुपये से अधिक कमीशन भुगतानदरअसल, इरडा और बीमा कंपनियों के प्रमुखों की यह मुलाकात बीमा कंपनियों के कमीशन भुगतान से जुड़े बढ़ते खर्चों और नियामिकीय सीमाओं को लेकर हो हुई थी। बताया जा रहा है कि इस बैठक का आधार वित्त वर्ष 2025 में, जीवन बीमा कंपनियों के कमीशन भुगतान 60,800 करोड़ रुपये से अधिक रहना था। जबकि साधारण बीमा कंपनियों के माले में यह भुगतान आंकड़ा 47,000 करोड़ रुपये के पार चला गया। इन बढ़ते खर्चों के चलते कई कंपनियां अपने प्रबंधन खर्च की सीमा को पार कर चुकी हैं। इस स्थिति को देखते हुए बीमा नियामक नए नियमों लाने पर विचार कर रहा है। ये नियम अगले कुछ महीनों में जारी किए जा सकते हैं। पिछले एक दशक में पॉलिसी की संख्या में ठहराव के बावजूद खर्चों में लगभग 9.4% सालाना की वृद्धि हुई है। गैर-जीवन बीमा में स्वास्थ्य बीमा सबसे आगे है, जिसका कुल गैर जीवन बीमा प्रीमियम में 41% हिस्सा है। बदलाव की जरूरत क्यों पड़ रहीएजेंट को पहले साल ही बहुत ज्यादा कमीशन मिल जाता है। इसी कारण से कई बार गलत पॉलिसी बेच दी जाती है। इससे बीमा कंपनियों का खर्च भी बढ़ जाता है।कई पॉलिसियां बीच में ही बंद हो जाती हैं। इरडा कमीशन को पॉलिसी की उम्र से जोड़ना चाहता है ताकि एजेंट जिम्मेदार बनें और ग्राहक को सस्ता, टिकाऊ बीमा मिले। क्या है स्थगित कमीशन का मतलबडिफर्ड कमीशन का मतलब ये है कि बीमा एजेंट को पूरा कमीशन एक साथ नहीं मिलता, कमीशन पॉलिसी के साथ-साथ सालों में किस्तों में दिया जाता है। इससे एजेंट पॉलिसी को चालू रखने और ग्राहक की सेवा करने में ज्यादा रुचि लेता है। पॉलिसी जितने लंबे समय तक चलेगी, एजेंट को उतना ही कमीशन मिलता रहेगा। शुरुआती सालों में थोड़ा ज्यादा और बाद के सालों में थोड़ा कम, लेकिन लगातार मिलता रहेगा। कमीशन पर सख्ती के संभावित खतरेकमीशन भुगतान में यह अप्रत्याशित उछाल भारतीय बीमा सेक्टर के लिए बड़े जोखिम पैदा कर रहा है। कंपनियों का यह तर्क कि डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल के विकास के लिए उच्च कमीशन आवश्यक है। कमीशन पर कड़े और एकसमान सीमा लगाने से एजेंसी-आधारित नेटवर्क और बैंकएश्योरेंस पार्टनरशिप जैसे स्थापित डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों को गंभीर झटका लग सकता है, जो बाजार तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इससे वितरकों और बीमाकर्ताओं दोनों के लिए बिजनेस की मात्रा कम हो सकती है, जो बाजार को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, पारंपरिक उत्पादों पर 60-70% तक पहुंचने वाले अग्रिम कमीशन, गलत बिक्री और पॉलिसीधारकों के मूल्य के कमी की चिंताएं बढ़ाते हैं।
प्रत्यक्ष कर संग्रह 10 फरवरी तक 9.4 फीसदी बढ़कर 19.44 लाख करोड़ रुपये पर

नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था (Economy) के मोर्चे पर अच्छी खबर है। भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की मजबूती का संकेत देते हुए चालू वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार के कर संग्रह (Tax Collection) में शानदार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। चालू वित्त वर्ष में 10 फरवरी तक प्रत्यक्ष कर संग्रह (Direct Tax Collection) 9.4 फीसदी बढ़कर लगभग 19.44 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। आयकर विभाग ने बुधवार को जारी आंकड़ों में बताया कि 10 फरवरी तक प्रत्यक्ष कर संग्रह 9.4 फीसदी बढ़कर करीब 19.44 लाख करोड़ रुपये रहा है। विभाग के मुताबिक इस दौरान शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 14.51 फीसदी बढ़कर 8.90 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, यह बढ़ोतरी कॉरपोरेट कर की बेहतर वसूली और कर रिफंड की धीमी गति का परिणाम है। वहीं गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह, जिसमें व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) से मिले कर शामिल हैं, 5.91 फीसदी बढ़कर करीब 10.03 लाख करोड़ रुपये रहा। शेयरों एवं अन्य प्रतिभूतियों के लेनदेन पर लगाया जाने वाला प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) का संग्रह 1 अप्रैल, 2025 से 10 फरवरी, 2026 के दौरान 50,279 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले की समान अवधि के लगभग समान है। मंत्रालय के मुताबिक इस अवधि में कर रिफंड जारी करने में 18.82 फीसदी की गिरावट आई और यह घटकर 3.34 लाख करोड़ रुपये रह गया। रिफंड में कमी से शुद्ध कर संग्रह की वृद्धि दर को सहारा मिला। आंकड़ों के मुताबिक देश का सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 4.09 प्रतिशत बढ़कर 22.78 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें 10.88 लाख करोड़ रुपये का सकल कॉरपोरेट कर और 11.39 लाख करोड़ रुपये का सकल गैर-कॉरपोरेट कर शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान (आरई) में कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 24.84 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया है।
नए इनकम टैक्स कानून में बड़ा बदलाव Form 128 से प्रॉपर्टी समेत कई ट्रांजैक्शन पर मिलेगा लोअर या NIL TDS का रास्ता आसान

नई दिल्ली। इनकम टैक्स एक्ट 2025 के लागू होते ही टैक्सपेयर्स के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। अब प्रॉपर्टी और अन्य ट्रांजैक्शन पर लोअर या NIL TDS सर्टिफिकेट के लिए नया Form 128 लागू किया गया है जो पुराने Form 13 की जगह लेगा। सरकार का मकसद नियमों को आसान बनाना और प्रोसेस को ज्यादा पारदर्शी तथा स्ट्रीमलाइन करना है ताकि जिन लोगों पर वास्तविक टैक्स देनदारी कम है उन्हें अनावश्यक रूप से ज्यादा TDS कटने की परेशानी न झेलनी पड़े। यदि कोई व्यक्ति प्रॉपर्टी बेच रहा है और उसे लगता है कि उसकी कुल टैक्स देनदारी कम है या शून्य है तो वह निर्धारित अवधि के लिए लोअर या NIL TDS सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई कर सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई संपत्ति अप्रैल से अक्टूबर के बीच बिकनी है तो उसी अवधि के लिए सर्टिफिकेट जारी किया जा सकता है। इससे टैक्सपेयर्स को कैश फ्लो मैनेज करने में आसानी होगी और बाद में रिफंड के झंझट से राहत मिलेगी। नए Form 128 में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहले Form 13 में पिछले चार साल के ITR की कॉपी अपलोड करनी पड़ती थी जिससे प्रोसेस लंबा और दस्तावेज आधारित हो जाता था। अब केवल ITR से जुड़ी जरूरी जानकारियां जैसे अकनॉलेजमेंट नंबर फाइलिंग डेट टैक्सेबल इनकम और टैक्स लाइबिलिटी देना पर्याप्त होगा। इसी तरह पहले पेयर्स का TAN PAN या आधार नंबर देना होता था लेकिन अब केवल TAN या PAN देना ही काफी है। इससे दस्तावेजों का बोझ कम हुआ है और आवेदन प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हुई है। बजट 2026 में सरकार ने NIL TDS सर्टिफिकेट के लिए ऑटोमैटेड सिस्टम लाने की घोषणा की थी। हालांकि फिलहाल Form 128 के तहत प्रक्रिया मैन्युअल ही है। फॉर्म में चार कैटेगरी दी गई हैं जिनमें NPO स्पेसिफाइड एंटिटी बिजनेस या प्रोफेशन वाले व्यक्ति और अन्य शामिल हैं। माना जा रहा है कि भविष्य में अन्य कैटेगरी में आने वाले छोटे टैक्सपेयर्स को ऑटोमैटिक सर्टिफिकेट जारी करने की सुविधा मिल सकती है जिससे उन्हें Assessing Officer की मैन्युअल मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अभी की प्रक्रिया के अनुसार टैक्सपेयर को ई फाइलिंग पोर्टल पर Form 128 भरना होगा। इसके बाद Assessing Officer संबंधित दस्तावेज और इनकम रिकॉर्ड की जांच करेगा। संतुष्ट होने पर वह लोअर या NIL TDS सर्टिफिकेट जारी करेगा। यह सर्टिफिकेट संबंधित पेयर को दिया जाएगा और उसी के आधार पर तय दर से TDS काटा जाएगा। पहले सेक्शन 197 के तहत Form 13 भरकर यह सुविधा ली जाती थी लेकिन अब नए कानून में यही काम Form 128 के जरिए होगा। कुल मिलाकर यह बदलाव टैक्स सिस्टम को डिजिटल और सरल बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है जिससे प्रॉपर्टी डील समेत अन्य बड़े ट्रांजैक्शन में टैक्सपेयर्स को राहत मिल सके।
भारत-चिली FTA: क्रिटिकल मिनरल में भारत की रणनीतिक मजबूती, इलेक्ट्रिक व्हीकल और क्लीन एनर्जी सेक्टर को बड़ा लाभ

नई दिल्ली। अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड डील की चर्चाओं के बीच भारत चुपचाप एक और अहम मोर्चे पर काम कर रहा है। भारत और दक्षिण अमेरिकी देश चिली के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है। चिली दुनिया के प्रमुख लिथियम और अन्य क्रिटिकल मिनरल रिजर्व वाला देश है। यह समझौता सिर्फ व्यापार के लिहाज से ही नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लिथियम इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरियों और ऊर्जा स्टोरेज सिस्टम के लिए सबसे जरूरी संसाधन है और चिली दुनिया में इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके अलावा चिली में कॉपर, कोबाल्ट, रेनियम और मोलिब्डेनम जैसे महत्वपूर्ण मिनरल भी मौजूद हैं। ये मिनरल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और सोलर सेक्टर के लिए जरूरी हैं। वर्तमान में क्रिटिकल मिनरल केवल इंडस्ट्री के कच्चे माल नहीं हैं, बल्कि उनका ग्लोबल पावर बैलेंस पर भी बड़ा असर है। कई देश सप्लाई चेन को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए भरोसेमंद सोर्स से मिनरल की स्थिर सप्लाई सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है। भारत और चिली के बीच 2006 से प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट लागू है। लेकिन अब दोनों देश इसे आगे बढ़ाकर एक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट करना चाहते हैं। प्रस्तावित समझौते में केवल सामान का व्यापार ही नहीं बल्कि डिजिटल सर्विस, निवेश और एमएसएमई सहयोग भी शामिल होगा। खास बात यह है कि इसमें क्रिटिकल मिनरल सेक्टर को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। क्रिटिकल मिनरल की स्थिर और किफायती सप्लाई से भारत के मेक इन इंडिया और क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन प्रोजेक्ट्स को बड़ा फायदा मिलेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और सोलर पैनल प्रोडक्शन के लिए इन मिनरल की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। अगर चिली से भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित होती है तो डोमेस्टिक प्रोडक्शन में विस्तार, लागत कम करना और रणनीतिक मजबूती हासिल करना संभव होगा। इस समझौते से भारत को न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक लाभ भी मिलेगा। क्रिटिकल मिनरल की उपलब्धता से देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत का प्रभाव बढ़ेगा। इसके अलावा, यह कदम भारत के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह मजबूत करने का भी जरिया बनेगा। अमेरिका और यूरोप के साथ ट्रेड डील की चर्चाओं के बीच चिली के साथ भारत का यह रणनीतिक कदम शिक्षा देता है कि क्रिटिकल मिनरल पर फोकस केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं बल्कि देश की रणनीतिक सुरक्षा और इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी जरूरी है।