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आयुष्मान भारत वय वंदना योजना से 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिक जुड़े, 13.84 लाख उपचारों पर 3,000 करोड़ रुपये खर्च

नई दिल्ली । देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और कवरेज बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभाव को लेकर जारी ताजा आंकड़ों में वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यापक विस्तार का दावा किया गया है। सरकार के अनुसार आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के तहत अब तक 1.20 करोड़ से अधिक वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि इस योजना के अंतर्गत 13.84 लाख से अधिक उपचार किए गए हैं। इन उपचारों पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत आई है। सरकार का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बढ़ती उम्र के साथ उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान करना और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना है। योजना के माध्यम से लाखों बुजुर्गों को अस्पतालों में उपचार और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिला है। स्वास्थ्य क्षेत्र में चलाए जा रहे टीकाकरण अभियानों को लेकर भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आई हैं। मिशन इंद्रधनुष के तहत उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण सेवाएं पहुंचाई गईं, जो पहले नियमित टीकाकरण से वंचित रह गए थे। अभियान के अंतर्गत 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया। इससे देश में पूर्ण टीकाकरण कवरेज को मजबूत करने में मदद मिली है। सरकार के अनुसार बिना किसी टीके वाले बच्चों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में ऐसे बच्चों की हिस्सेदारी कुल आबादी का 0.11 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2024 में घटकर 0.06 प्रतिशत रह गई। इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक प्रगति का संकेत माना जा रहा है। सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत प्रत्येक वर्ष करोड़ों नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए निःशुल्क टीके उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस कार्यक्रम ने देश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य संकेतकों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भी प्रमुख भूमिका निभा रही है। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाता है। सरकार के अनुसार अब तक 44.14 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं और 12.03 करोड़ अस्पताल भर्ती मामलों का लाभार्थियों को फायदा मिला है। इन उपचारों का कुल मूल्य लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अस्पताल नेटवर्क का भी विस्तार किया गया है। वर्तमान में 36 हजार से अधिक अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं, जिनमें सरकारी और निजी दोनों संस्थान शामिल हैं। इससे लाभार्थियों को अपने क्षेत्र के निकट उपचार सुविधाएं प्राप्त करने में सहायता मिली है। सरकार ने यह भी बताया कि 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा टेलीमेडिसिन सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है और अब तक 47 करोड़ से अधिक डिजिटल परामर्श सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों, एम्स संस्थानों तथा डॉक्टरों और नर्सों के प्रशिक्षण की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरकार का दावा है कि इन पहलों के माध्यम से देश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और व्यापक बनाया जा रहा है।

रेपो रेट स्थिर, अर्थव्यवस्था को मिला भरोसा; विकास की रफ्तार पर सकारात्मक असर

नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (भारतीय रिजर्व बैंक) द्वारा नीतिगत रेपो दर को यथावत रखने के फैसले को अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत ने संतुलित और दूरदर्शी कदम बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को मजबूत करेगा। वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूतविशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग के कारण स्थिर बनी हुई है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने कहा कि मौजूदा नीति एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिससे मध्यम और दीर्घकालिक विकास के लिए अनुकूल माहौल बना रहेगा। मुद्रास्फीति और ब्याज दरों पर नजरविशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि मुद्रास्फीति बढ़कर 5.9 प्रतिशत के करीब पहुंचती है, तो आने वाले समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और आरबीआई का रुख स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित है। विदेशी निवेश और मुद्रा बाजार को समर्थनअर्थशास्त्रियों ने यह भी कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और एनआरआई जमा जैसे उपायों से विदेशी मुद्रा प्रवाह को मजबूती मिल रही है। इससे रुपये की स्थिरता को भी समर्थन मिला है और बाजार में सकारात्मक संकेत देखे जा रहे हैं। रियल एस्टेट और बैंकिंग सेक्टर को राहतबैंकिंग और हाउसिंग सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिर ब्याज दरों से ऋण प्रवाह बेहतर होगा और रियल एस्टेट सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। इससे आवास की मांग में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर विशेषज्ञों की राय है कि RBI का यह कदम फिलहाल स्थिरता और भरोसा बनाए रखने वाला है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूती देता है और भविष्य में विकास की राह को सुरक्षित बनाता है।

CMR Green Technologies IPO पर निवेशकों की टूट पड़ी भीड़, 90 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन ने बढ़ाया उत्साह

नई दिल्ली । प्राथमिक बाजार में इन दिनों CMR Green Technologies का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम निवेशकों के बीच प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 631 करोड़ रुपये के इस आईपीओ को अंतिम दिन तक जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और विभिन्न निवेशक वर्गों की ओर से रिकॉर्ड स्तर पर आवेदन प्राप्त हुए हैं। मजबूत ग्रे मार्केट प्रीमियम, रीसाइक्लिंग उद्योग में कंपनी की अग्रणी स्थिति और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन ने इस इश्यू को बाजार में चर्चा का विषय बना दिया है। कंपनी ने अपने शेयरों के लिए 182 रुपये से 192 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। एक लॉट में 78 शेयर रखे गए हैं। यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल आधारित है, जिसके तहत मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इसलिए आईपीओ से प्राप्त राशि सीधे कंपनी के व्यवसाय विस्तार में नहीं जाएगी, बल्कि विक्रेता शेयरधारकों को प्राप्त होगी। सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों ने निवेशकों के उत्साह को और बढ़ा दिया है। अंतिम दिन तक यह इश्यू 90 गुना से अधिक सब्सक्राइब हो चुका था। सबसे अधिक रुचि गैर-संस्थागत निवेशकों की ओर से देखने को मिली, जिन्होंने अपने लिए आरक्षित हिस्से की तुलना में कई गुना अधिक आवेदन किए। खुदरा निवेशकों और संस्थागत निवेशकों ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी दर्ज कराई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में कंपनी को लेकर सकारात्मक धारणा बनी हुई है। ग्रे मार्केट में भी इस आईपीओ को मजबूत संकेत मिल रहे हैं। बाजार सूत्रों के अनुसार कंपनी के शेयरों का प्रीमियम इश्यू मूल्य के मुकाबले उल्लेखनीय स्तर पर बना हुआ है। इससे संभावित लिस्टिंग को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल एक संकेतक होता है और वास्तविक लिस्टिंग प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों तथा निवेशकों की मांग पर निर्भर करता है। CMR Green Technologies देश की प्रमुख नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग कंपनियों में शामिल है। कंपनी रिसाइकल्ड एल्युमिनियम अलॉय, एल्युमिनियम बिलेट्स, जिंक अलॉय इंगॉट्स और अन्य मूल्यवर्धित धातु उत्पादों का निर्माण करती है। देशभर में फैली इसकी विनिर्माण इकाइयां इसे उद्योग में मजबूत उपस्थिति प्रदान करती हैं। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए उपयोग होने वाले एल्युमिनियम उत्पादों के क्षेत्र में कंपनी की उल्लेखनीय हिस्सेदारी बताई जाती है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी पर बढ़ता जोर रीसाइक्लिंग उद्योग के लिए अवसर पैदा कर रहा है। रिसाइकल्ड एल्युमिनियम का उत्पादन पारंपरिक एल्युमिनियम निर्माण की तुलना में कम ऊर्जा की खपत करता है और पर्यावरणीय प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम होता है। यही कारण है कि सस्टेनेबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियां निवेशकों के बीच अधिक लोकप्रिय हो रही हैं। कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। हालिया वित्त वर्ष में कंपनी ने राजस्व वृद्धि दर्ज की और पिछले वर्ष के नुकसान से उबरते हुए लाभ में वापसी की। यह सुधार परिचालन दक्षता और बाजार में बढ़ती मांग का संकेत माना जा रहा है। इसके अलावा आईपीओ से पहले एंकर निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने भी बाजार में सकारात्मक संदेश दिया। हालांकि विश्लेषकों ने कुछ जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया है। ऑफर फॉर सेल संरचना, सीमित मार्जिन और कुछ बड़े ग्राहकों पर निर्भरता ऐसे कारक हैं जिन पर निवेशकों को विचार करना चाहिए। इसके बावजूद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रीसाइक्लिंग क्षेत्र में कंपनी की स्थिति और संभावित विकास अवसर इसे निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनाते हैं।

दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद फिसला शेयर बाजार, प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ बंद, कई दिग्गज शेयर टूटे

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बाद कमजोरी के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती घंटों में सकारात्मक रुख के बावजूद दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ता गया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बाजार पर सबसे अधिक दबाव मेटल और आईटी सेक्टर के शेयरों से आया, जबकि कुछ रक्षात्मक क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंकों की गिरावट के साथ 74,243.34 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 49.85 अंक फिसलकर 23,366.70 पर आ गया। बाजार की शुरुआत हालांकि उत्साहजनक रही थी और दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया था, लेकिन बाद में निवेशकों की मुनाफावसूली और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार की दिशा बदल दी। दिनभर के कारोबार में मेटल और आईटी कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। वैश्विक संकेतों और सेक्टर आधारित बिकवाली के कारण इन क्षेत्रों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। निफ्टी मेटल और निफ्टी आईटी सूचकांकों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा कमोडिटी, ऑयल एंड गैस, सार्वजनिक उपक्रमों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में भी दबाव बना रहा। इसके विपरीत कुछ सेक्टरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। मीडिया, रियल्टी, हेल्थकेयर, पीएसयू बैंक, फार्मा, प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इन क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार को अधिक गिरावट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निवेशकों का रुझान इस बात का संकेत देता है कि वे फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में एचयूएल, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, सन फार्मा, एलएंडटी और आईटीसी जैसे शेयरों ने मजबूती दिखाई। दूसरी ओर ट्रेंट, टीसीएस, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशक किसी मजबूत दिशा का इंतजार कर रहे हैं। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 23,200 के आसपास महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र मौजूद है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं ऊपर की ओर 23,550 का स्तर महत्वपूर्ण बाधा माना जा रहा है। इस स्तर को पार करने पर बाजार में नई तेजी की संभावना बन सकती है। विश्लेषकों के अनुसार घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतकों, ब्याज दरों से जुड़े निर्णयों तथा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर नए आर्थिक संकेत पर करीबी नजर रखे हुए हैं। शुक्रवार का कारोबार यह संकेत देता है कि निवेशकों का विश्वास पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, लेकिन वे जोखिम लेने से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में प्रमुख समर्थन और प्रतिरोध स्तरों पर बाजार की चाल निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है।

विदेशी निवेशकों को बड़ी टैक्स राहत, सरकारी बॉन्ड बाजार में निवेश बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार का बड़ा आर्थिक दांव

नई दिल्ली । विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और भारतीय ऋण बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार की घोषणा की है। सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से प्राप्त होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट देने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी और इसका उद्देश्य भारतीय बॉन्ड बाजार में वैश्विक निवेशकों की भागीदारी को बढ़ाना है। सरकार द्वारा जारी आयकर संशोधन अध्यादेश के तहत अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को सरकारी बॉन्ड और अन्य सरकारी प्रतिभूतियों से अर्जित आय पर कर नहीं देना होगा। इससे पहले इन निवेशकों को ब्याज आय के साथ-साथ सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री से प्राप्त शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर भी कर देना पड़ता था। नई व्यवस्था के बाद यह कर बोझ समाप्त हो जाएगा, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड अधिक आकर्षक बन सकते हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वैश्विक पूंजी विभिन्न उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बेहतर रिटर्न और स्थिरता की तलाश कर रही है। भारत पहले से ही दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में कर संबंधी राहत विदेशी निवेशकों के निर्णय को प्रभावित कर सकती है और उन्हें भारतीय ऋण बाजार में अधिक निवेश के लिए प्रेरित कर सकती है। सरकारी प्रतिभूतियां केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा धन जुटाने के लिए जारी किए जाने वाले बॉन्ड और ऋण साधन होते हैं। इन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि इनके पीछे सरकार की गारंटी होती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कर छूट सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध दोनों प्रकार की सरकारी प्रतिभूतियों पर लागू होगी, जिससे निवेशकों को व्यापक लाभ मिलेगा। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी कुल बाजार का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा है। सरकार का मानना है कि नई कर व्यवस्था के बाद विदेशी भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे बाजार में तरलता बढ़ेगी और सरकारी उधारी की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने से भारतीय वित्तीय बाजारों को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि वैश्विक निवेशकों के लिए निवेश संबंधी निर्णयों में कर नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाएं विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कर प्रोत्साहन प्रदान करती हैं। भारत का यह कदम उसी दिशा में एक रणनीतिक पहल माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक निवेश परिदृश्य में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करना है। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से न केवल विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा बल्कि भारतीय बॉन्ड बाजार की गहराई और विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से भारतीय वित्तीय प्रणाली को दीर्घकालिक स्थिरता और व्यापक निवेश आधार प्राप्त हो सकता है। आर्थिक जानकार इसे केवल कर राहत नहीं बल्कि भारत के वित्तीय बाजारों को वैश्विक स्तर पर अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार के रूप में देख रहे हैं।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय ऑटो सेक्टर चमका, मई में 4.4 लाख वाहन बिके..

नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था की गति को नई मजबूती प्रदान की है। मई 2026 में यात्री वाहन बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होने के बाद केंद्र सरकार ने इसे देश की बढ़ती आर्थिक क्षमता, मजबूत उपभोक्ता विश्वास और विनिर्माण क्षेत्र की सफलता का संकेत बताया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की विकास यात्रा निरंतर गति पकड़ रही है और विभिन्न क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं। मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में बताया कि मई 2026 के दौरान देश में लगभग 4.4 लाख यात्री वाहनों की बिक्री हुई। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 23 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार संबंधी चुनौतियों का माहौल बना हुआ है। पीयूष गोयल के अनुसार इस उपलब्धि में देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विशेष रूप से मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने बाजार में मजबूत प्रदर्शन करते हुए बिक्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। इन कंपनियों की बेहतर बिक्री ने पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग को सकारात्मक दिशा दी है। मंत्री ने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं का घरेलू स्तर पर निर्मित वाहनों पर बढ़ता भरोसा देश के विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का सकारात्मक परिणाम बताते हुए कहा कि इस पहल ने देश में औद्योगिक उत्पादन, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी अधिक सक्षम बनाया है। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र में दिखाई दे रही यह प्रगति केवल बिक्री के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक संरचना में हो रहे व्यापक बदलावों की भी झलक प्रस्तुत करती है। तकनीकी नवाचार, उत्पादन क्षमता में विस्तार और उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रय शक्ति जैसे कारकों ने इस क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान की है। इस बीच देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने भी मई महीने में नया रिकॉर्ड कायम किया है। कंपनी ने घरेलू बाजार में डीलरों को 1,90,337 यात्री वाहन भेजे, जो उसके इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिक्री मानी जा रही है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही कंपनी ने अप्रैल में स्थापित अपने पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती वाहन बिक्री से जुड़े आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग की मजबूती का संकेत देते हैं। यदि आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रहता है तो ऑटोमोबाइल क्षेत्र देश के आर्थिक विकास में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मजबूत मांग, बढ़ते निवेश और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के बीच भारत का ऑटो उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

रेपो रेट यथावत रखकर आरबीआई ने दिया स्थिरता का संदेश, विशेषज्ञ बोले- दीर्घकालिक विकास को मिलेगा मजबूत आधार

नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत रेपो दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने के निर्णय को अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत ने संतुलित तथा दूरदर्शी कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू चुनौतियों के बीच लिया गया यह फैसला वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के साथ-साथ दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था कई प्रकार की चुनौतियों से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बढ़ते दबाव का असर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में ब्याज दरों को स्थिर रखना आरबीआई की सतर्क और संतुलित नीति को दर्शाता है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अधिकारियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक ने विकास और महंगाई के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ने के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है और मौजूदा नीति से मध्यम तथा दीर्घकालिक विकास को समर्थन मिलेगा। विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई अभी आरबीआई के निर्धारित लक्ष्य के आसपास बनी हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति संबंधी व्यवधान और मानसून की स्थिति जैसे कारक आगे चलकर आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद मजबूत घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देने का काम कर रही है। बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले महीनों में महंगाई अपेक्षा से अधिक बढ़ती है तो वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। हालांकि फिलहाल आरबीआई ने विकास की गति को बनाए रखने और बाजार को स्थिर संदेश देने को प्राथमिकता दी है। इससे उद्योगों और निवेशकों को नीति संबंधी स्पष्टता मिलेगी। आरबीआई द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए किए गए उपायों को भी सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा जमा से जुड़े फैसलों से बाजार में तरलता बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से भारतीय वित्तीय बाजारों की स्थिति और मजबूत हो सकती है तथा विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। इंडियन बैंक के प्रबंधन का कहना है कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। ऐसे में ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय यह संकेत देता है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधियों को गति देने और विकास को समर्थन देने के पक्ष में है। इससे खुदरा, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्रों में मांग को बल मिलने की संभावना है। आवास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि स्थिर ब्याज दरों का माहौल घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत लेकर आएगा। इससे होम लोन लेने वाले ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा और आवास बाजार में मांग को मजबूती मिलेगी। साथ ही ऋण वितरण में भी सुधार देखने को मिल सकता है। आर्थिक जानकारों के अनुसार आरबीआई का यह निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती पर भरोसे को दर्शाता है। वर्तमान परिस्थितियों में स्थिर ब्याज दरें निवेश, उपभोग और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने का काम करेंगी। आने वाले महीनों में महंगाई, मानसून और वैश्विक बाजारों की दिशा पर नजर रहेगी, लेकिन फिलहाल केंद्रीय बैंक का यह कदम विकास और स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर बने अर्थव्यवस्था के इंजन, भारत ने दर्ज की 7.7 प्रतिशत विकास दर

नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 7.7 प्रतिशत की रियल जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की है। यह पिछले वित्त वर्ष की 7.1 प्रतिशत वृद्धि दर की तुलना में उल्लेखनीय सुधार माना जा रहा है। ताजा आंकड़े यह संकेत देते हैं कि घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र की मजबूती ने आर्थिक विकास को नई गति प्रदान की है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 8.9 प्रतिशत रही। इसके साथ ही रियल और नॉमिनल ग्रॉस वैल्यू एडेड में क्रमशः 7.9 प्रतिशत और 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। विकास दर में सबसे बड़ा योगदान द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों का रहा। औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े द्वितीयक क्षेत्र ने 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि सेवा क्षेत्र की विकास दर 9.3 प्रतिशत रही। मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, परिवहन, संचार, होटल, स्टोरेज, वित्तीय सेवाओं और रियल एस्टेट से जुड़े क्षेत्रों में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला। विशेष रूप से सेवा क्षेत्र ने आर्थिक वृद्धि को गति देने में अहम भूमिका निभाई। वित्तीय सेवाओं, पेशेवर सेवाओं, व्यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में बढ़ोतरी ने अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन और निवेश गतिविधियों के विस्तार का सकारात्मक असर भी समग्र विकास दर पर दिखाई दिया। हालांकि प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम रही। कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को शामिल करने वाले प्राथमिक क्षेत्र ने वित्त वर्ष के दौरान 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके बावजूद समग्र आर्थिक प्रदर्शन पर इसका सीमित प्रभाव देखने को मिला क्योंकि औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों ने विकास की गति बनाए रखी। जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही के आंकड़े भी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। इस अवधि में देश की रियल जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जबकि नॉमिनल जीडीपी में 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी दौरान रियल जीवीए में 7.9 प्रतिशत और नॉमिनल जीवीए में 9.9 प्रतिशत का विस्तार हुआ। चौथी तिमाही में भी सेवा और औद्योगिक क्षेत्र विकास के प्रमुख आधार बने रहे। द्वितीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 9.9 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों में निरंतर विस्तार बना हुआ है और विकास की रफ्तार स्थिर बनी हुई है। इस बार आर्थिक आंकड़े नए आधार वर्ष 2022-23 के अनुसार जारी किए गए हैं। इससे अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना और उपभोग पैटर्न को अधिक सटीक रूप से दर्शाने में मदद मिलेगी। नए आधार वर्ष के तहत जारी आंकड़े देश की आर्थिक स्थिति का अधिक यथार्थवादी आकलन प्रस्तुत करते हैं। वैश्विक स्तर पर जारी अस्थिरता, व्यापारिक चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत की मजबूत विकास दर यह संकेत देती है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में लचीलापन बना हुआ है। आने वाले समय में निवेश, उत्पादन और सेवा गतिविधियों में निरंतर वृद्धि देश को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

अंडमान सागर में ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी सफलता, ऑयल इंडिया के तीसरे खोजी कुएं में मिली प्राकृतिक गैस

नई दिल्ली । देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड को अंडमान के अपतटीय क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की खोज के रूप में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। कंपनी ने घोषणा की है कि अंडमान सागर में ड्रिल किए गए अपने तीसरे खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस और हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इस उपलब्धि को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू संसाधनों की खोज के प्रयासों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। कंपनी के अनुसार, यह खोज विजयपुरम-3 नामक खोजी कुएं में हुई है, जिसे ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत अंडमान के अपतटीय ब्लॉक में विकसित किया गया है। यह कुआं अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है। समुद्री क्षेत्र में लगभग 355 मीटर की जल गहराई पर स्थित इस स्थान पर उन्नत तकनीक की सहायता से ड्रिलिंग कार्य किया गया। ऑयल इंडिया ने बताया कि ड्रिलिंग अभियान के दौरान इयोसीन भू-स्तर में 1,900 मीटर से अधिक गहराई तक पहुंचकर परीक्षण किए गए। प्रारंभिक उत्पादन परीक्षणों के दौरान प्राकृतिक गैस की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत प्राप्त हुए। परफोरेशन प्रक्रिया के बाद लगातार गैस का प्रवाह और उसका जलना इस बात का प्रमाण माना गया कि क्षेत्र में व्यावसायिक महत्व की गैस मौजूद हो सकती है। कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार परीक्षण के दौरान कुएं के भीतर दबाव में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई, जिसके बाद गैस का प्रवाह शुरू हुआ। यह संकेत ऊर्जा विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन प्रणाली की सक्रियता की पुष्टि होती है। फिलहाल प्राप्त गैस के नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है ताकि उसकी रासायनिक संरचना और ऊष्मीय क्षमता का सटीक आकलन किया जा सके। इसके साथ ही विशेषज्ञ आइसोटोप अध्ययन भी कर रहे हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य गैस और अन्य हाइड्रोकार्बन के स्रोत, उत्पत्ति तथा भूगर्भीय विकास को समझना है। इन परीक्षणों के परिणाम भविष्य में क्षेत्र की ऊर्जा संभावनाओं का अधिक सटीक मूल्यांकन करने में मदद करेंगे। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अंडमान अपतटीय ब्लॉक में यह हाइड्रोकार्बन की दूसरी पुष्टि है। इससे पहले सितंबर 2025 में विजयपुरम-2 नामक खोजी कुएं में भी प्राकृतिक गैस मिलने की पुष्टि हुई थी। अब तक इस ब्लॉक में कुल तीन खोजी कुएं ड्रिल किए जा चुके हैं, जिनमें से दो में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत मिले हैं। इससे पूरे क्षेत्र की ऊर्जा क्षमता को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि लगातार मिल रही सफलताएं अंडमान क्षेत्र को भविष्य के महत्वपूर्ण गैस उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती हैं। यदि आगे के परीक्षण और अन्वेषण भी सकारात्मक रहते हैं तो इससे देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है। ऑयल इंडिया ने इस खोज को भविष्य की अन्वेषण और उत्पादन गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक बताया है। कंपनी का मानना है कि अंडमान क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की मौजूदगी के बढ़ते प्रमाण आने वाले वर्षों में नई ऊर्जा परियोजनाओं और निवेश के अवसरों को भी बढ़ावा देंगे। यह खोज भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

भारत-रूस रिश्तों पर पुतिन का बड़ा बयान, कहा- कोई बाहरी ताकत नहीं डाल सकती असर; 100 अरब डॉलर व्यापार का रखा लक्ष्य

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही अहम बातचीत के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के संबंधों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भारत को एक महान राष्ट्र, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और रूस का भरोसेमंद सहयोगी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते इतने मजबूत हैं कि किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं हो सकते। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी खुलकर सराहना की और भारत की आर्थिक प्रगति को उनकी सरकार की नीतियों का परिणाम बताया। सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम के दौरान दुनिया की प्रमुख समाचार एजेंसियों के प्रमुखों से बातचीत करते हुए पुतिन ने कहा कि भारत आज विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसकी विकास दर दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती है। उन्होंने कहा कि भारत की यह उपलब्धि उसके नेतृत्व, स्थिर नीतियों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की सोच का परिणाम है। रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका सहित कुछ देशों द्वारा भारत पर रूस के साथ संबंधों को लेकर बनाए जाने वाले दबाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े और स्वतंत्र देश पर किसी प्रकार का राजनीतिक या आर्थिक दबाव बनाना आसान नहीं है। उनके अनुसार डेढ़ अरब से अधिक आबादी वाले देश के अपने राष्ट्रीय हित हैं और वह उन्हीं के आधार पर अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आर्थिक साझेदारियों का निर्धारण करता है। पुतिन ने संकेत दिया कि किसी भी देश द्वारा भारत की विदेश नीति को प्रभावित करने का प्रयास अंततः उसके अपने हितों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। भारत-रूस आर्थिक सहयोग का उल्लेख करते हुए पुतिन ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसे 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की पूरी संभावना मौजूद है। उनके अनुसार ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, जिनका लाभ दोनों देशों को मिलेगा। पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका एक बार फिर सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दी गई कुछ प्रतिबंध छूटों की समीक्षा की जा सकती है। भारत उन प्रमुख देशों में शामिल है जिन्होंने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के दौरान रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा किया है। ऐसे में पुतिन का बयान भारत-रूस ऊर्जा सहयोग के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूस और भारत के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को लेकर पुतिन ने भरोसा जताया कि दोनों देश भविष्य में भी विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने दीर्घकालिक सहयोग की ऐसी रूपरेखा तैयार की है जो पारस्परिक लाभ और साझा विकास पर आधारित है। विशेष महत्व की बात यह है कि पुतिन का यह बयान उनके प्रस्तावित भारत दौरे से पहले आया है। सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में उनके शामिल होने की संभावना है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज़ हैं। ऐसे में पुतिन के हालिया बयान को भारत-रूस संबंधों की मजबूती और दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।