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फिनटेक सेक्टर में नया ट्रेंड: शुरुआती कंपनियों में गिरावट, बड़े सौदों पर बढ़ा निवेश

नई दिल्ली।भारत के फिनटेक सेक्टर की कहानी इस साल की पहली तिमाही में एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंची है। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में इस सेक्टर में करीब 513 मिलियन डॉलर की फंडिंग दर्ज की गई, जो पिछले साल की तुलना में हल्की बढ़त दिखाती है। हालांकि यह बढ़ोतरी सिर्फ 2 प्रतिशत की रही, लेकिन असली बदलाव फंडिंग के तरीके में देखने को मिला। पहले जहां दर्जनों छोटे-बड़े निवेश राउंड होते थे, वहीं अब तस्वीर बदल गई है। इस बार कुल 99 की जगह सिर्फ 45 फंडिंग डील्स हुईं। यानी निवेशक अब कम सौदों में ज्यादा पैसा लगाने की रणनीति अपना रहे हैं। औसतन निवेश राशि भी पहले से काफी बढ़ गई है, जिससे साफ है कि ध्यान अब मजबूत और स्थापित कंपनियों पर ज्यादा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण लेट-स्टेज कंपनियां हैं, जहां निवेश 273 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया—जो पिछली तिमाही से दोगुने से भी ज्यादा है। इसके उलट शुरुआती स्टार्टअप्स को मिलने वाली फंडिंग में गिरावट आई है, जो यह दिखाती है कि जोखिम लेने की बजाय अब निवेशक सुरक्षित विकल्प चुन रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि पूरे निवेश का बड़ा हिस्सा सिर्फ एक ही क्षेत्र—ऑनलाइन लेंडिंग—को मिला, जो लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि ऐसे मॉडल ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं जिनकी कमाई पहले से साबित हो चुकी है और जिनमें स्थिरता दिखती है। अगर भौगोलिक बदलाव की बात करें तो इस बार मुंबई ने बड़ा उछाल दिखाया है। कुल फंडिंग का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा मुंबई की कंपनियों को मिला, जबकि बेंगलुरु का हिस्सा घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गया। पहले तस्वीर इसके उलट थी, जहां बेंगलुरु आगे रहता था। इस बदलाव की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि मुंबई में बैंकिंग, एनबीएफसी और बीमा कंपनियों का मजबूत नेटवर्क मौजूद है, जिससे फिनटेक कंपनियों को तेजी से स्केल करने में मदद मिल रही है।

Amrit Bharat Express: यात्रियों के लिए नई राहत: अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई ट्रेनें शुरू, उत्तर से महाराष्ट्र तक सीधी कनेक्टिविटी

Amrit Bharat Express: नई दिल्ली। भारतीय रेल ने यात्रियों को बड़ी सुविधा देते हुए अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई सेवाओं की शुरुआत की है, जो उत्तर भारत और महाराष्ट्र के बीच यात्रा को अधिक आसान और किफायती बनाएंगी। नई ट्रेन सेवाएं अयोध्या से मुंबई और वाराणसी से पुणे के बीच चलाई जा रही हैं, जिससे लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इन ट्रेनों के शुरू होने से लंबे समय से प्रतीक्षित सीधी कनेक्टिविटी अब साकार हो गई है। विशेष रूप से वाराणसी से पुणे तक चलने वाली ट्रेन उत्तर भारत और महाराष्ट्र के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरेगी। यह ट्रेन अपने मार्ग में कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहराव करेगी, जिससे विभिन्न शहरों के यात्रियों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। इसी तरह अयोध्या से मुंबई के बीच शुरू की गई ट्रेन धार्मिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। यह सेवा राम मंदिर अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सरल बनाएगी, वहीं मुंबई जैसे बड़े महानगर तक सीधी पहुंच भी उपलब्ध कराएगी। नई सेवाओं के संचालन के साथ रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग, तीर्थ स्थलों की लोकप्रियता और राज्यों के बीच बढ़ते आवागमन को ध्यान में रखा है। इन ट्रेनों के रूट ऐसे चुने गए हैं, जो प्रमुख शहरों और महत्वपूर्ण जंक्शनों को जोड़ते हैं, जिससे यात्रा समय और लागत दोनों में कमी आएगी। इस पहल का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। छोटे व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के लिए यह कनेक्टिविटी नई संभावनाएं लेकर आएगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

पीयूष गोयल ने EPC प्रमुखों संग की बैठक, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक अवसरों पर किया मंथन

नई दिल्ली| भारत के निर्यात क्षेत्र को नई गति देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने सोमवार को विभिन्न निर्यात संवर्धन परिषदों (EPCs) के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में निर्यात को मजबूत बनाने और वैश्विक व्यापार अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मंत्री Piyush Goyal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में क्षेत्र-विशेष प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों की रचनात्मक प्रतिक्रियाएं भी सुनी गईं। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि हाल ही में भारत द्वारा किए गए विभिन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTA) देश के निर्यातकों के लिए नए बाजार खोल सकते हैं। इन समझौतों का अधिकतम लाभ उठाकर भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने पर फोकस किया गया। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार निर्यातकों को मजबूत बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार नीतिगत सहयोग प्रदान कर रही है। इससे पहले, Piyush Goyal ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत का बड़ा बाजार, कुशल कार्यबल, डिजिटल क्षमता और विनिर्माण शक्ति न्यूजीलैंड की कृषि-तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और फिनटेक विशेषज्ञता के साथ मिलकर नए अवसर पैदा कर सकती है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। दोनों देशों का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में व्यापार को 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का है, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की यह पहल भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कच्चे तेल की तेजी से शेयर बाजार दबाव में, बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली

नई दिल्ली| कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कमजोरी के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर सीधे प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया। सुबह 9:17 बजे तक सेंसेक्स करीब 203 अंक गिरकर 77,099 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी लगभग 50 अंक टूटकर 24,042 पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को माना जा रहा है। सेक्टोरल फ्रंट पर बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। Nifty Bank Index में आधा प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर भी लाल निशान में रहे। हालांकि कुछ सेक्टरों में मजबूती भी देखी गई। एनर्जी, मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो और डिफेंस सेक्टर में खरीदारी का रुझान बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए हरे निशान में कारोबार किया, जिससे व्यापक बाजार में कुछ संतुलन देखने को मिला। एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख रहा। टोक्यो, शंघाई और हांगकांग के बाजार कमजोर रहे, जबकि बैंकॉक और सोल में हल्की तेजी देखी गई। वहीं अमेरिकी बाजारों में सोमवार को डाओ जोन्स में गिरावट और नैस्डैक में हल्की तेजी दर्ज की गई। बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 109 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव का परिणाम है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता के कारण। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के शांति प्रस्ताव पर अमेरिका की असहमति ने भी बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है, जिससे ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है। जब तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी में गिरावट, शुरुआती कारोबार में दबाव

नई दिल्ली| अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच मंगलवार को सोने और चांदी के दामों में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुएं करीब आधा प्रतिशत तक कमजोर होकर खुलीं, जिससे निवेशकों में हल्का दबाव देखा गया। घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का 05 जून 2026 कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,51,721 रुपये के मुकाबले 1,51,700 रुपये पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 1,51,514 रुपये तक गिरा, जबकि 1,51,802 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ। चांदी में भी गिरावट देखने को मिली। 05 मई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2,41,824 रुपये की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले 2,40,490 रुपये पर खुला और 2,40,400 रुपये के स्तर तक फिसल गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर सोना 0.27 प्रतिशत गिरकर लगभग 4,680 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 0.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74.48 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में सोना और चांदी ने मजबूत रिटर्न दिया है। पिछले एक साल में डॉलर में सोना 40 प्रतिशत से अधिक और चांदी 126 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है, जिससे यह साफ है कि दोनों धातुएं अभी भी सुरक्षित निवेश विकल्प बनी हुई हैं। बाजार में यह हलचल ऐसे समय पर देखी जा रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता पर अनिश्चितता बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के शांति प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव स्पष्ट दिशा नहीं लेता, तब तक सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को लेकर बड़ा बयान: पीएम मोदी के नेतृत्व की टॉड मैक्ले ने की सराहना

नई दिल्ली| भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री Todd McClay ने कहा है कि इस समझौते को रिकॉर्ड नौ महीनों में पूरा करने में प्रधानमंत्री Narendra Modi और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस लक्सन के मजबूत नेतृत्व की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच विकसित हुए मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों ने बातचीत की प्रक्रिया को बेहद तेज और प्रभावी बनाया। पिछले वर्ष न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री द्वारा भारत का दौरा एक ऐतिहासिक कदम था, जिसमें अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल था। Todd McClay ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की नेतृत्व क्षमता की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि उनके साथ मुलाकात करना उनके लिए सम्मान की बात रही। उन्होंने यह भी कहा कि अब सरकारों का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब व्यापारिक समुदाय को इस समझौते का लाभ उठाने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल लगातार बढ़ाए जाएंगे ताकि आर्थिक सहयोग को नई गति मिल सके। साथ ही भारतीय कंपनियों को भी न्यूजीलैंड में निवेश और व्यापार के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया गया है। Todd McClay ने यह भी कहा कि भारत और न्यूजीलैंड दुनिया के दो मजबूत लोकतंत्र हैंभारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जबकि न्यूजीलैंड सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक माना जाता है। बातचीत के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि इस वर्ष भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल सहयोग के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने हल्के अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी को न्यूजीलैंड आने और अपनी क्रिकेट टीम साथ लाने का आमंत्रण भी दिया।

लीबिया में तेल-गैस खोज से बढ़ी भारत की वैश्विक ऊर्जा ताकत, केंद्र ने बताया बड़ा कदम

नई दिल्ली| भारत की ऊर्जा कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि लीबिया में भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा की गई तेल और गैस की खोज देश की बढ़ती वैश्विक ऊर्जा उपस्थिति का संकेत है। सरकार के अनुसार, Oil India Limited और Indian Oil Corporation Limited ने स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर लीबिया के घदामेस बेसिन में यह खोज की है। यह कार्य अल्जीरिया की एसआईपीईएक्स के साथ एक भारतीय कंसोर्टियम के तहत किया गया। यह खोज कॉन्ट्रैक्ट एरिया 95/96 में हुई, जहां कुओं की खुदाई लगभग 8,440 फीट गहराई तक की गई। परीक्षण के दौरान इस कुएं से प्रतिदिन करीब 13 मिलियन क्यूबिक फीट गैस और 327 बैरल कंडेनसेट उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसे एक सकारात्मक और व्यावसायिक रूप से उपयोगी संकेत माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस उपलब्धि पर दोनों कंपनियों को बधाई देते हुए कहा कि यह खोज भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय तेल कंपनियां अब घरेलू बाजार से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। सरकार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए ऊर्जा संपत्तियों में निवेश और खोज से भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। इसी बीच सरकार ने यह भी दोहराया कि देश में कच्चे तेल के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर 2030 तक 29 मिलियन टन से 35 मिलियन मीट्रिक टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने और नई नीतियों के तहत तेजी से खोज एवं विकास कार्य किए जा रहे हैं। बाजार में भी इस खबर का असर देखा गया, जहां Oil India Limited के शेयर में मजबूती दर्ज की गई, जबकि Indian Oil Corporation Limited में मामूली गिरावट देखने को मिली। कुल मिलाकर यह खोज भारत की ऊर्जा रणनीति और वैश्विक विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा दे सकती है।

हॉर्मुज स्ट्रेट से तनाव के बीच पहली बार निकला LNG टैंकर, शिपिंग रूट पर फिर हलचल

नई दिल्ली| मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट से पहली बार एक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर सफलतापूर्वक गुजरने में कामयाब रहा है। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर बना हुआ है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह LNG टैंकर मार्च की शुरुआत में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दास द्वीप प्लांट से लोड होकर रवाना हुआ था। इसके बाद यह टैंकर भारत के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र से गुजरता हुआ आगे बढ़ा। बताया जा रहा है कि तनाव के चलते यह टैंकर कई हफ्तों तक फारस की खाड़ी में ही रुका रहा और इसके ट्रांसमिशन सिग्नल 31 मार्च के आसपास बंद हो गए थे, जो बाद में भारत के नजदीक आने पर फिर से सक्रिय हुए। हॉर्मुज स्ट्रेट, जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक बेहद संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस का निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरता है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां काफी प्रभावित हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने इस स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है, जबकि अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। इसी तनाव के बीच कई LNG टैंकरों को कतर से रवाना होने के बाद वापस लौटना पड़ा था। हालांकि अब इस नए टैंकर के गुजरने को एक संभावित राहत संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। सूत्रों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत भी चल रही है। ईरान ने एक नया शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने की बात शामिल है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर असहमति के चलते अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है। इस बीच यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य होता है या फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर और गहराता है।

कच्चा माल महंगा होने से ऑटो इंडस्ट्रीज पर संकट… बढ़ सकती हैं कारों की कीमतें

नई दिल्ली। ऑटोमोबाइल कंपनियों (Automobile Companies) के सामने लागत का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मार्च 2026 से स्टील, मेटल और प्लास्टिक जैसे जरूरी कच्चे माल की कीमतों (Raw Materials Prices) में तेज उछाल आया है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा और गाड़ियों की मांग भी घट सकती है। यह जानकारी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) (Society of Indian Automobile Manufacturers – SIAM) के ताजा आंकड़ों में सामने आई है। पश्चिम एशिया में जंग का सीधा असरएक खबर के मुताबिक पश्चिम एशिया में जंग के चलते स्टील के दाम बढ़े हैं। मार्च 2026 में स्टील का भाव करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 60,000 रुपये प्रति टन पर पहुंच गया। वहीं, स्टेनलेस स्टील 16 प्रतिशत महंगा होकर 2 लाख रुपये प्रति टन से ऊपर निकल गया, जिससे गाड़ियों के बॉडी और दूसरे पुर्जों की लागत बढ़ गई। कोकिंग कोल से लेकर कीमती धातु तक, सब हुआ महंगास्टील बनाने में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल की कीमत में 31 प्रतिशत का उछाल देखा गया। एल्युमीनियम (27 प्रतिशत) और कॉपर (28 प्रतिशत) के दाम लगभग एक-तिहाई बढ़ चुके हैं। गाड़ियों के इंटीरियर और पुर्जों में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के दाम और भी तेजी से बढ़े हैं। पॉलीप्रोपाइलीन जैसे थर्मोप्लास्टिक 34 प्रतिशत महंगा होकर 136.2 रुपये प्रति किलो (पिछले साल 102 रुपये था) हो गया है, जबकि पॉलीकार्बोनेट 9 प्रतिशत बढ़कर 227 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। एमिशन कंट्रोल पर भारी पड़ेगी कीमती धातुओं की महंगाईगाड़ियों में प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली में उपयोग होने वाली कीमती धातुओं के दामों में भी उछाल आया है। प्लैटिनम 124 प्रतिशत बढ़कर 6,196 रुपये प्रति ग्राम, रोडियम 121 प्रतिशत बढ़कर 33,000 रुपये प्रति ग्राम से अधिक और पैलेडियम 74 प्रतिशत बढ़कर 4,712 रुपये प्रति ग्राम हो गया है। इससे कारों में लगने वाले एमिशन कंट्रोल डिवाइस की लागत काफी बढ़ गई है। रुपये की कमजोरी से और बढ़ेगी मुश्किलएक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल इस कीमत बढ़ोतरी का तुरंत असर मांग पर नहीं दिखेगा, लेकिन अगर यह दबाव लंबा चला तो लोग गाड़ी खरीदने में देरी कर सकते हैं। एसएंडपी ग्लोबल मोबिलिटी के गौरव बांगर ने बताया कि धातुओं, पॉलिमर और कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतें कार निर्माताओं के मुनाफे को निचोड़ रही हैं। कमजोर रुपये ने समस्या और बढ़ा दी है, जिससे कंपनियों को अपने मार्जिन बचाने के लिए गाड़ियों के दाम बढ़ाने होंगे। कुल इनपुट लागत का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा स्टील काउद्योग के जानकारों का कहना है कि वैल्यू चेन पर इसका असर साफ दिख रहा है। अकेले स्टील ही गाड़ी की कुल इनपुट लागत का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा होता है। टीओआई को एक कारोबारी ने बताया, “यह दबाव बिल्कुल असली है और कंपनियां इसकी मार झेल रही हैं।”

वित्तीय साक्षरता शिविर में पहुंचकर आरबीआई गवर्नर ने दिया आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश

नई दिल्ली। देहरादून जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम के दौरान आर्थिक जागरूकता और वित्तीय सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े लोगों को वित्तीय प्रणाली की बुनियादी समझ देना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना था। कार्यक्रम के दौरान यह बात विशेष रूप से सामने रखी गई कि आज के समय में आर्थिक स्थिरता केवल बचत पर निर्भर नहीं है, बल्कि सही जानकारी और योजनाओं के उपयोग पर भी आधारित है। लोगों को बताया गया कि पेंशन और बीमा जैसी योजनाएं भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हर नागरिक को इनके बारे में जागरूक होना चाहिए। इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। यह भी कहा गया कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक बैंकिंग और वित्तीय सुविधाएं सरल तरीके से पहुंचनी चाहिए, ताकि वे मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जुड़ सकें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने अपने स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन भी किया। उनके प्रयासों की सराहना करते हुए यह संदेश दिया गया कि ऐसे समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और इन्हें और अधिक प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। लोगों को यह भी समझाया गया कि वित्तीय जानकारी को केवल व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों के साथ भी साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें। इस दौरान बैंकिंग सेवाओं को आसान बनाने के लिए मौके पर ही कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे लोगों को सीधे लाभ मिला। छोटे स्तर पर नकद और सिक्कों के आदान-प्रदान जैसी सेवाओं ने भी ग्रामीण लोगों के लिए सुविधा का काम किया। इसके अलावा, वित्तीय सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए मोबाइल बैंकिंग जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया, जिससे लोगों को अपने क्षेत्र में ही बैंकिंग सेवाएं प्राप्त हो सकें। कार्यक्रम में विभिन्न वित्तीय संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि वित्तीय शिक्षा ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर समाज की नींव है।