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खनन क्षेत्र को राहत: लो-ग्रेड आयरन ओर के इस्तेमाल पर नए नियम लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कम गुणवत्ता (लो-ग्रेड) वाले लौह अयस्क के बेहतर उपयोग और बर्बादी रोकने के लिए अहम कदम उठाया है। खान मंत्रालय ने इसके लिए प्राइसिंग नियमों में बदलाव करते हुए नया ढांचा तैयार किया है, जिससे ऐसे अयस्क का आर्थिक रूप से उपयोग संभव हो सके। नई प्राइसिंग व्यवस्था से स्पष्टतानए नियमों के तहत 45% से कम आयरन (Fe) कंटेंट वाले अयस्क जैसे बैंडेड हेमेटाइट क्वार्टजाइट (BHQ) और बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (BHJ) के लिए अलग से मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है। 35% से 45% Fe कंटेंट वाले अयस्क की औसत बिक्री कीमत (ASP) अब 45-51% ग्रेड के अयस्क की ASP का 75% होगी। 35% से कम Fe कंटेंट वाले अयस्क की ASP 50% तय की गई है। पहले क्या थी समस्या?पहले लो-ग्रेड अयस्क के लिए अलग प्राइसिंग सिस्टम नहीं था। रॉयल्टी और अन्य शुल्क उच्च ग्रेड (45-51%) अयस्क के आधार पर तय होते थे, जिससे लो-ग्रेड अयस्क को प्रोसेस करना आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो जाता था। यही वजह थी कि बड़ी मात्रा में यह संसाधन बेकार चला जाता था। नई तकनीक से बढ़ेगा उपयोगसरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीकों की मदद से BHQ और BHJ जैसे लो-ग्रेड अयस्क को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाले स्टील निर्माण योग्य मटेरियल में बदला जा सकता है। नई प्राइसिंग नीति इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित करेगी। रॉयल्टी नियमों में भी बदलावनए नियमों के तहत यदि कच्चे अयस्क (ROM) को प्रोसेस करने से उसकी कीमत घटती है, तो रॉयल्टी का निर्धारण प्रोसेसिंग से पहले की स्थिति (प्रारंभिक स्क्रीनिंग) के आधार पर किया जाएगा। इससे कीमत को कृत्रिम रूप से कम दिखाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। स्टील इंडस्ट्री और संसाधन संरक्षण को फायदासरकार के मुताबिक इस कदम से: हाई-ग्रेड अयस्क पर निर्भरता कम होगी स्टील उद्योग को कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति मिलेगी खनिज संसाधनों का संरक्षण होगा बेकार माने जाने वाले अयस्क का भी उपयोग बढ़ेगा

राहत भरी खबर: सस्ता हुआ सोना और चांदी, ईंधन कीमतों में क्या बदलाव?

नई दिल्ली। आज देशभर में सोना-चांदी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा अपडेट देखने को मिला है। जहां लगातार दूसरे दिन सोने की चमक फीकी पड़ी है, वहीं चांदी भी सस्ती हो गई है। दूसरी तरफ पेट्रोल-डीजल के दामों में शहरों के हिसाब से हल्का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। सोने की कीमतों में गिरावट का दबाव जारीवैश्विक बाजार में अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिली है। हालांकि कुछ शहरों में मामूली बढ़ोतरी भी दर्ज की गई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में गिरावट का रुझान बना हुआ है। दिल्ली में आज 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दाम में हल्की बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन पिछले दो दिनों में कुल मिलाकर सोना सस्ता हुआ है। चांदी के भाव में भी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार दो दिनों में चांदी करीब ₹5100 प्रति किलो तक सस्ती हुई है। दिल्ली में आज चांदी ₹2,54,900 प्रति किलो के भाव पर बिक रही है। प्रमुख शहरों में सोने के ताजा दाम (10 ग्राम)दिल्ली: ₹1,52,600 (24K), ₹1,39,890 (22K), ₹1,14,480 (18K)मुंबई: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330कोलकाता: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330चेन्नई: ₹1,53,370, ₹1,40,590, ₹1,17,290बेंगलुरु: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330हैदराबाद: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330पटना: ₹1,52,500, ₹1,39,790, ₹1,14,380 पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारीसुबह 6 बजे तेल कंपनियों ने देशभर में पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें जारी कीं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर देखा गया है। प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल रेटनई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.72, डीजल ₹87.62मुंबई: पेट्रोल ₹104.21, डीजल ₹92.15कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94, डीजल ₹90.76चेन्नई: पेट्रोल ₹100.75, डीजल ₹92.34हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46, डीजल ₹95.70पटना: पेट्रोल ₹105.58, डीजल ₹93.80लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69, डीजल ₹87.80जयपुर: पेट्रोल ₹104.72, डीजल ₹90.21 कीमतें क्यों बदलती हैं?विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों का टैक्स रिफाइनिंग लागत और मांग-आपूर्ति का संतुलन ग्राहक अपने मोबाइल से भी आसानी से अपने शहर का ईंधन रेट जान सकते हैं। Indian Oil: RSP लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें, आज के बाजार अपडेट में साफ दिख रहा है कि सोना और चांदी पर दबाव बना हुआ है, जबकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता के साथ हल्का बदलाव देखा गया है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल ही इन कीमतों की दिशा तय करेगी।

मिडिल ईस्ट तनाव का गोल्ड मार्केट पर असर… कीमत में गिरावट का सिलसिला जारी

नई दिल्ली। ग्लोबल मार्केट (Global Market) में सोने की कीमतों (Gold Prices) में हल्की गिरावट देखने को मिल रही है और इसकी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ता तनाव बन रही है। हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को ब्लॉक करने की योजना ने दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट्स में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान सीधे तौर पर तेल की कीमतों को प्रभावित करता है और यही असर अब सोने के बाजार पर भी दिखने लगा है। दरअसल, जब तेल महंगा होता है, तो महंगाई बढ़ने लगती है। इस समय कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में आमतौर पर सोना सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। बढ़ती महंगाई के कारण निवेशक अब ब्याज दरों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और यही वजह है कि सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। सोना एक ऐसा निवेश है, ज्यादातर मामलों में ब्याज नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है, तो निवेशक इससे दूरी बनाने लगते हैं। फिलहाल, अमेरिका में महंगाई बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे यह उम्मीद कम हो गई है कि जल्द ही ब्याज दरों में कटौती होगी। यही कारण है कि सोने की कीमतों में हाल ही में लगभग 2% तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि, पूरी तरह से तस्वीर नकारात्मक भी नहीं है। डॉलर में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट जैसे फैक्टर सोने को कुछ हद तक सपोर्ट दे रहे हैं। इसके अलावा ग्लोबल स्तर पर आर्थिक सुस्ती और अनिश्चितता भी निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित कर सकती है। यही वजह है कि शुरुआती गिरावट के बाद सोने ने कुछ रिकवरी भी दिखाई। एक और दिलचस्प बात यह है कि फरवरी से शुरू हुए इस जियो-पॉलिटिकल तनाव के दौरान सोना करीब 10% तक गिर चुका है, लेकिन अब धीरे-धीरे यह संभलने की कोशिश कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में अगर तनाव बढ़ता है या आर्थिक ग्रोथ धीमी होती है, तो सोना फिर से मजबूत हो सकता है। अभी सोने का बाजार कई फैक्टर्स के बीच फंसा हुआ है। इसमें एक तरफ बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों का दबाव है, तो दूसरी तरफ वैश्विक अनिश्चितता का सपोर्ट है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें, बल्कि बाजार के रुझान को समझकर ही निवेश करें।

भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री नई ऊंचाई पर: वित्त वर्ष 26 में AUM में जोरदार उछाल

नई दिल्ली। भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 12.2 प्रतिशत बढ़कर 73.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस दौरान इंडस्ट्री के कुल एसेट बेस में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी आंकड़ों में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बावजूद सक्रिय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों की रुचि मजबूत बनी हुई है। मार्च में इक्विटी फंड्स में इनफ्लो बढ़कर 40,450.26 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो जुलाई 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। यह संकेत देता है कि निवेशक बाजार में गिरावट को अवसर के रूप में देख रहे हैं और लंबी अवधि के दृष्टिकोण से निवेश कर रहे हैं। सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए भी निवेश लगातार बढ़ रहा है। मार्च में SIP इनफ्लो 32,087 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो फरवरी के 29,845 करोड़ रुपये से अधिक है। यह दर्शाता है कि रिटेल निवेशक बाजार की अस्थिरता के बावजूद नियमित और अनुशासित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इक्विटी इनफ्लो में यह वृद्धि मुख्य रूप से वित्त वर्ष के अंत में पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग, बाजार में हालिया गिरावट और आकर्षक वैल्यूएशन के कारण हुई है। निवेशकों ने गिरावट के समय खरीदारी को अवसर माना है, जिससे बाजार में फंड फ्लो मजबूत हुआ है। हालांकि, पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग में मार्च के दौरान 2.39 लाख करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि फरवरी में 94,530 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो देखा गया था। डेट म्यूचुअल फंड्स में भी भारी आउटफ्लो देखने को मिला, जो 2.94 लाख करोड़ रुपये रहा। यह उतार-चढ़ाव बाजार में अल्पकालिक अस्थिरता को दर्शाता है। गोल्ड ETF में निवेश भी घटकर 2,266 करोड़ रुपये रह गया, जबकि फरवरी में यह 5,254.95 करोड़ रुपये था। वहीं इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड्स सबसे आगे रहे, जिनमें 10,054.12 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इसके अलावा स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में भी मजबूत निवेश देखा गया, जो क्रमशः 6,263.56 करोड़ रुपये और 6,063.53 करोड़ रुपये रहा। लार्ज-कैप फंड्स में भी 2,997.84 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया। कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है और निवेशक अब लंबी अवधि के निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बाजार की स्थिरता और गहराई दोनों बढ़ रही हैं।

आईटी इंडस्ट्री में वापसी की रफ्तार: भारत में डिमांड बढ़ी, ग्रोथ आउटलुक हुआ मजबूत

नई दिल्ली। भारत के आईटी सेक्टर को लेकर एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार देश का आईटी उद्योग धीरे-धीरे रिकवरी की राह पर लौट रहा है और आने वाले समय में ग्रोथ आउटलुक में भी सुधार देखने को मिल सकता है। निवेशकों की सतर्कता के बावजूद मांग और आय के संकेतों में क्रमिक सुधार दर्ज किया जा रहा है, जिससे सेक्टर में नई उम्मीदें जगी हैं।  रिपोर्ट में कहा गया है कि भर्ती गतिविधियों में बढ़ोतरी, मैनेजमेंट की स्थिर टिप्पणी और क्लाउड सर्विसेज से होने वाली आय में लगातार सुधार यह दर्शाता है कि सेक्टर अब स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में आईटी सेवाओं की मांग भी धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट से भारतीय आईटी कंपनियों की आय पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे कंपनियों के मार्जिन मजबूत होने की संभावना है, जो पूरे सेक्टर के लिए लाभकारी संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मुद्रा विनिमय दर का यह प्रभाव आने वाले समय में कंपनियों की कमाई को सपोर्ट करेगा। वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही को लेकर अनुमान लगाया गया है कि आईटी कंपनियों की आय में तिमाही आधार पर मामूली वृद्धि देखने को मिल सकती है, जबकि सालाना आधार पर इसमें बेहतर ग्रोथ दर्ज होने की संभावना है। बड़ी आईटी कंपनियों का प्रदर्शन स्थिर रहने का अनुमान है, वहीं मिडकैप कंपनियां इस सेक्टर की ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन सेक्टर में सुधार के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं, जबकि अन्य संबंधित क्षेत्र स्थिर बने हुए हैं। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2027 तक आईटी सेक्टर में स्थिर आय वृद्धि का अनुमान जताया गया है। इसी आधार पर वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए आय अनुमानों में लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपनाया जा रहा है, जिससे आईटी सेक्टर में नए अवसर बन रहे हैं। भारतीय कंपनियां बड़ी टेक फर्मों के साथ साझेदारी कर रही हैं और जनरेटिव एआई तथा एंटरप्राइज सॉल्यूशंस में नए प्लेटफॉर्म विकसित कर रही हैं। इससे आने वाले वर्षों में सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर रिपोर्ट संकेत देती है कि चुनौतियों के बावजूद भारत का आईटी सेक्टर धीरे-धीरे स्थिरता और रिकवरी की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसमें बेहतर ग्रोथ देखने को मिल सकती है। भारत का आईटी सेक्टर धीरे-धीरे रिकवरी दिखा रहा है और मांग व आय में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। AI, क्लाउड सर्विसेज और रुपये की कमजोरी से आने वाले समय में ग्रोथ और मजबूत होने की उम्मीद है।

‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी उड़ान: तेजस फाइटर जेट के इंजन रिपेयर सेंटर के लिए GE एयरोस्पेस और IAF में समझौता

नई दिल्ली। भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार देते हुए अमेरिकी कंपनी GE Aerospace और भारतीय वायुसेना भारतीय वायुसेना के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत भारत में तेजस फाइटर जेट को शक्ति देने वाले F404-IN20 इंजन के लिए एक आधुनिक रिपेयर और मेंटेनेंस डिपो स्थापित किया जाएगा। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है। इस नई सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब तेजस लड़ाकू विमानों के इंजन की मरम्मत और रखरखाव भारत में ही किया जा सकेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि विमान की ऑपरेशनल उपलब्धता भी बढ़ेगी। अभी तक कई महत्वपूर्ण मरम्मत कार्यों के लिए विदेशी सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस डिपो के शुरू होने के बाद यह निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। समझौते के अनुसार यह डिपो पूरी तरह भारतीय वायुसेना के स्वामित्व और संचालन में रहेगा, जबकि तकनीकी सहयोग GE एयरोस्पेस द्वारा दिया जाएगा। कंपनी विशेषज्ञ तकनीशियन, प्रशिक्षण, जरूरी उपकरण और स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराएगी, जिससे भारत में ही उच्च स्तरीय इंजन मेंटेनेंस संभव हो सकेगा। इस समझौते को भारत के रक्षा क्षेत्र में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह देश की स्वदेशी क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ लड़ाकू विमानों की तैयारियों को भी बेहतर बनाएगा। तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान के लिए यह सुविधा बेहद अहम साबित होगी, क्योंकि इससे मिशन रेडीनेस और फ्लीट उपलब्धता में सुधार होगा। GE एयरोस्पेस की ओर से कहा गया है कि यह साझेदारी भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी के अनुसार इससे भारतीय वायुसेना को आधुनिक तकनीक और सपोर्ट तेजी से उपलब्ध होगा, जिससे संचालन और भी प्रभावी होगा। कंपनी पहले से ही भारत के रक्षा और विमानन क्षेत्र में सक्रिय है। इसके इंजन P-8I समुद्री निगरानी विमान, MH-60R हेलीकॉप्टर और AH-64 अपाचे जैसे प्लेटफॉर्म्स में उपयोग किए जाते हैं। इसके अलावा GE के LM2500 मरीन गैस टर्बाइन का उपयोग INS विक्रांत और शिवालिक क्लास फ्रिगेट्स में भी किया गया है, जिससे भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ी है। पिछले चार दशकों से GE एयरोस्पेस भारत के एयरोस्पेस सेक्टर में सक्रिय है और पुणे स्थित इसका निर्माण संयंत्र तथा देश के कई साझेदार इसके वैश्विक सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा हैं। इस नए डिपो के साथ भारत अब रक्षा मेंटेनेंस और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ा रहा है।

ऑफिस लीजिंग में जबरदस्त उछाल: 5 साल में सबसे मजबूत ग्रोथ, 21 मिलियन स्क्वायर फीट के पार बाजार

नई दिल्ली। भारत के रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी और सकारात्मक रिपोर्ट सामने आई है। देश में ऑफिस लीजिंग की मांग वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 21.6 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई है। यह पिछले पांच वर्षों में दर्ज की गई सबसे मजबूत वृद्धि मानी जा रही है। इस बढ़त ने भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट को नई मजबूती दी है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाया है। यह जानकारी सैविल्स इंडिया की ताजा रिपोर्ट में दी गई है, जिसमें कहा गया है कि मजबूत मांग के साथ-साथ आपूर्ति में गिरावट भी देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में ऑफिस स्पेस की नई आपूर्ति सालाना आधार पर 28 प्रतिशत घटकर 7.9 मिलियन स्क्वायर फीट रह गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि देश में खाली पड़े ऑफिस स्पेस का स्तर घटकर कुल उपलब्ध स्टॉक का 13.9 प्रतिशत रह गया, जो बाजार के लिए एक स्वस्थ संकेत माना जा रहा है। लीजिंग गतिविधियों में टेक्नोलॉजी सेक्टर की भूमिका सबसे अहम रही, जिसने कुल मांग में 32 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की। इसके बाद फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेक्टर ने 22 प्रतिशत योगदान दिया, जबकि बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई) सेक्टर की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत का ऑफिस मार्केट तेजी से विविधता की ओर बढ़ रहा है और सिर्फ आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं रह गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बड़े आकार के ऑफिस स्पेस की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। कुल लीजिंग में एक लाख स्क्वायर फीट या उससे अधिक के सौदों की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत रही, जो यह दर्शाता है कि बड़ी कंपनियां भारत में अपने ऑपरेशन का विस्तार कर रही हैं। वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) भी इस वृद्धि को लगातार सपोर्ट कर रहे हैं, जिससे बड़े शहरों में कमर्शियल डिमांड बढ़ी है। शहरों के प्रदर्शन की बात करें तो बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहां आईटी-बीपीएम कंपनियों की मजबूत मौजूदगी के कारण ऑफिस लीजिंग 6 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई। यहां सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दिल्ली-एनसीआर ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 3.6 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग दर्ज की। वहीं हैदराबाद ने सबसे तेज उछाल दिखाया, जहां 39 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मांग 4.3 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई। पुणे में भी 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3 मिलियन स्क्वायर फीट की लीजिंग हुई, जबकि मुंबई में 2.8 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत का ऑफिस मार्केट लगातार मजबूत हो रहा है। कंपनियां भारत को अपने विस्तार और निवेश के लिए सुरक्षित और लाभकारी बाजार के रूप में देख रही हैं। आने वाले समय में भी इस सेक्टर में स्थिर और मजबूत ग्रोथ की उम्मीद जताई जा रही है, खासकर आईटी, बीएफएसआई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के चलते।

लोन का गारंटर बनने से पहले सावधान! ये कानून जानना जरूरी, वरना चुकाना पड़ सकता है पूरा कर्ज

नई दिल्ली। जब हम लोन लेने के लिए आवेदन करते हैं तो गारंटर की जरूरत पड़ती ही है। किसी दोस्त या रिश्तेदार की मदद के लिए लोग अक्सर बिना सोचे-समझे लोन में गारंटर बन जाते हैं, लेकिन यह फैसला कई बार भारी पड़ सकता है। Loan Guarantor बनने का मतलब सिर्फ औपचारिकता नहीं होता, बल्कि आप कानूनी रूप से उस लोन की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ले लेते हैं। अगर लोन लेने वाला व्यक्ति समय पर EMI नहीं भरता या डिफॉल्ट कर देता है, तो बैंक सीधे गारंटर से पैसे वसूल सकता है जो कि कानून सम्मत है। कई मामलों में गारंटर को पूरा बकाया चुकाना पड़ता है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति भी खराब हो सकती है। Loan Guarantor पर कब आती है कानूनी जिम्मेदारीभारतीय कानून के तहत, खासकर Indian Contract Act 1872 के अनुसार, गारंटर (Surety) की जिम्मेदारी उधार लेने वाले (Principal Borrower) के बराबर मानी जाती है। लोन लेने वाला व्यक्ति अगर चुकाने में असमर्थता जता रहा है तो लोन गारंटर की जिम्मेदारी भी उतनी ही बनती है। इसका मतलब यह है कि अगर borrower पैसा नहीं चुकाता, तो बैंक सीधे गारंटर से वसूली कर सकता है, बिना पहले borrower पर पूरी कार्रवाई किए। यही वजह है कि गारंटर बनना एक बड़ा कानूनी जोखिम माना जाता है। गारंटर बनने से पहले किन बातों का रखें ध्यानगारंटर बनने से पहले यह जरूरी है कि आप उस व्यक्ति की वित्तीय स्थिति को अच्छी तरह समझ लें, जिसके लिए आप गारंटी दे रहे हैं। साथ ही लोन की शर्तें और दस्तावेज ध्यान से पढ़ें। ध्यान रखें कि डिफॉल्ट होने पर आपका क्रेडिट स्कोर भी खराब हो सकता है, जिससे भविष्य में आपको खुद लोन लेने में परेशानी आ सकती है। कुल मिलाकर, गारंटर बनना एक बड़ी जिम्मेदारी है, इसलिए भावनाओं में आकर नहीं बल्कि पूरी जानकारी और समझ के साथ ही यह फैसला लेना चाहिए।

सुरों की विदाई पर भावुक हुए गौतम अदाणी: "अमर रहेगी आशा भोसले की विरासत, सदियों तक गूँजेगी वो आवाज़"

नई दिल्ली।  भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सुरों की जादूगर और लाखों दिलों की धड़कन रहीं आशा भोसले ने 92 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। बीते कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी और उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से संगीत प्रेमियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है। आठ दशकों तक चला सुरों का जादू40 के दशक में अपने करियर की शुरुआत करने वाली आशा भोसले ने संगीत की दुनिया में एक लंबा और शानदार सफर तय किया। उन्होंने बिमल रॉय, राज कपूर जैसे दिग्गजों के साथ काम किया और ओ. पी. नैय्यर, ए. आर. रहमान जैसे महान संगीतकारों के साथ मिलकर कई यादगार गीत दिए। शुरुआत में उन्होंने लो-बजट फिल्मों में गाकर पहचान बनाई, लेकिन 1957 की फिल्म नया दौर ने उन्हें स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हर दौर की आवाज, हर दिल की धड़कनआशा भोसले की आवाज ने हर जॉनर में अपनी छाप छोड़ी। मोहम्मद रफी के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही। ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘ये मेरा दिल’ जैसे गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं।1966 में आर. डी. बर्मन के साथ फिल्म तीसरी मंजिल के गानों ने उन्हें नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वहीं 1981 की फिल्म उमराव जान में गाई गई गज़लों ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलाया और उनकी गायकी की गहराई को साबित किया। रिकॉर्ड, सम्मान और अमर विरासतआशा भोसले ने अपने करियर में 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए और उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण और कई राष्ट्रीय व फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनकी आवाज सिर्फ गाने नहीं थी, बल्कि एक एहसास थी, जिसने पीढ़ियों को जोड़े रखा। देशभर में शोक, हमेशा जिंदा रहेंगी यादेंआशा भोसले के निधन पर देशभर में शोक की लहर है। संगीत, फिल्म और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनकी मधुर आवाज, उनके गीत और उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी—एक ऐसी धरोहर, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी महसूस करती रहेंगी।

स्पेस अपडेट: Northrop Grumman CRS-24 मिशन लॉन्च की तैयारी में, जानें कैसे देखें लाइव

नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने Northrop Grumman के कमर्शियल रिसप्लाई सर्विसेज-24 (CRS-24) मिशन के लॉन्च की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह अहम मिशन 11 अप्रैल को भारतीय समयानुसार शाम 5:11 बजे लॉन्च किया जाएगा, जिस पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं। ISS के लिए 5000 किलो सामानइस मिशन के तहत Cygnus XL spacecraft लगभग 11,000 पाउंड (करीब 5,000 किलोग्राम) वैज्ञानिक उपकरण, रिसर्च सामग्री और जरूरी सप्लाई लेकर International Space Station (ISS) की ओर रवाना होगा। यह साइगनस का उन्नत और बड़ा वर्जन है, जो सौर ऊर्जा से संचालित होता है।  फाल्कन 9 से होगा प्रक्षेपणइस मिशन को SpaceX के Falcon 9 रॉकेट के जरिए फ्लोरिडा स्थित Cape Canaveral Space Force Station से लॉन्च किया जाएगा। यह लॉन्च स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स-40 से होगा। 13 अप्रैल को ISS से जुड़ेगा स्पेसक्राफ्टलॉन्च के दो दिन बाद, 13 अप्रैल को ISS पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री Canadarm2 robotic arm की मदद से इस स्पेसक्राफ्ट को कैप्चर करेंगे। इसके बाद इसे यूनिटी मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा, ताकि सामान को सुरक्षित तरीके से उतारा जा सके। कई अहम वैज्ञानिक प्रयोग भेजे जा रहेइस मिशन में कई महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं: क्वांटम साइंस को आगे बढ़ाने के लिए कोल्ड एटम लैब मॉड्यूलकैंसर और खून की बीमारियों के इलाज के लिए स्टेम सेल रिसर्च हार्डवेयरआंत के माइक्रोबायोम का अध्ययनस्पेस वेदर को समझने के लिए एडवांस रिसीवरये प्रयोग भविष्य में चिकित्सा, कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष विज्ञान में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अंतरिक्ष यात्री के नाम पर रखा गया नामइस स्पेसक्राफ्ट का नाम नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री Steven R. Nagel के सम्मान में “SS स्टीवन आर नागेल” रखा गया है। यह अक्टूबर 2026 तक ISS से जुड़ा रहेगा और बाद में कचरे के साथ पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाएगा। यहां देख सकेंगे लाइव लॉन्चनासा ने इस ऐतिहासिक लॉन्च की लाइव स्ट्रीमिंग NASA+, Amazon Prime Video और यूट्यूब पर उपलब्ध कराई है। लाइव कवरेज भारतीय समयानुसार शाम 4:50 बजे से शुरू होगी।