गोल्ड-सिल्वर में उछाल जारी, कमजोर डॉलर ने बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी

नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और डॉलर की कमजोरी के बीच सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे हफ्ते तेजी देखने को मिली है। सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक हालात ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है। सोने में 1.65% साप्ताहिक उछालइस हफ्ते सोने की कीमतों में 1.65 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने के जून फ्यूचर्स हल्की बढ़त के साथ करीब 1,52,690 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करते नजर आए। वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 999 प्योरिटी वाले सोने का भाव बढ़कर 1,50,327 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो सप्ताह की शुरुआत से ऊंचा स्तर है। चांदी भी चमकी, कीमतों में मजबूतीचांदी की कीमतों में भी तेजी का रुख बना रहा। एमसीएक्स पर मई फ्यूचर्स 2,43,300 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करते दिखे।आईबीजेए के मुताबिक, 999 प्योरिटी वाली चांदी 2,39,934 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में मजबूत बढ़त दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार का असरअंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉमेक्स (COMEX) पर सोना लगभग 3% की साप्ताहिक बढ़त के साथ 4,787 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि 5,000 डॉलर का स्तर एक बड़ा रेजिस्टेंस है, जिसे पार करने पर तेजी और तेज हो सकती है। डॉलर की कमजोरी और फेड नीति बनी वजहअमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने और सीजफायर बातचीत के चलते डॉलर पर दबाव बना है। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर नए सिरे से आकलन शुरू किया है।कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजबूत हुई है। बाजार में संतुलन, लेकिन सतर्कता बरकरारकमोडिटी बाजार इस हफ्ते संतुलित लेकिन सतर्क माहौल में रहा। हालिया उतार-चढ़ाव के बाद अब कीमतों में स्थिरता के शुरुआती संकेत भी देखने को मिल रहे हैं, हालांकि वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरविशेषज्ञों के अनुसार: सोना: 1,48,000–1,46,000 रुपए मजबूत सपोर्ट, 1,54,000–1,55,000 रुपए रेजिस्टेंसचांदी: 2,30,000–2,25,000 रुपए सपोर्ट, गहरा सपोर्ट 2,05,000–2,00,000 रुपए साथ ही डॉलर-रुपया (USD/INR) की चाल आगे भी कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
निवेशकों के लिए भारत सुरक्षित और खुला बाजार, SEBI प्रमुख ने जताया भरोसा

नई दिल्ली।भारत आज भी वैश्विक निवेशकों के लिए एक खुला, स्थिर और आकर्षक बाजार बना हुआ है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि मजबूत आर्थिक आधार, तेजी से बढ़ता निवेशक वर्ग और सुधार-आधारित नीतियां भारत को वैश्विक पूंजी के लिए खास बनाती हैं। 🇺🇸 सैन फ्रांसिस्को में निवेशकों से संवादयह बयान सैन फ्रांसिस्को में आयोजित एक इंटरएक्टिव सेशन के दौरान दिया गया, जिसे भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में वैश्विक निवेशकों, वेंचर कैपिटल फर्म्स और उद्योग जगत के दिग्गजों ने हिस्सा लिया। पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित रेगुलेटरी सिस्टमसेबी प्रमुख ने कहा कि नियामकीय ढांचा पारदर्शी, परामर्श-आधारित और तकनीक-संचालित है। सेबी का फोकस ऐसी नीतियों पर है जो जोखिम को ध्यान में रखते हुए निवेश को आसान बनाएं और पूंजी बाजार की स्थिरता बनाए रखें। उन्होंने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रजिस्ट्रेशन और री-केवाईसी प्रक्रिया को आसान किया गया है। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का बढ़ता उपयोग, मजबूत आईपीओ बाजार और वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) की बढ़ती भूमिका बाजार को और गहराई दे रही है। घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारीभारत के पूंजी बाजार की एक बड़ी ताकत घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी है। इससे बाजार को स्थिरता और मजबूती मिल रही है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए भी भरोसे का संकेत है। मजबूत आर्थिक संकेतक दे रहे सहारातुहिन कांत पांडे ने कहा कि नियंत्रित महंगाई, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और संतुलित बाहरी खाते भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देते हैं। यही कारण है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। भारत-अमेरिका व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्यइस मौके पर के. श्रीकर रेड्डी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार 240 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और इसे 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। वहीं रामकृष्णन मुकुंदन ने सरकार, उद्योग और वैश्विक निवेशकों के बीच सहयोग को भारत की भविष्य की ग्रोथ के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति वैश्विक साझेदारी, खासकर अमेरिका के साथ, पर निर्भर करेगी। निवेश माहौल को और बेहतर बनाने पर जोरसत्र के दौरान निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच खुली चर्चा हुई। इसमें नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, क्रॉस-बॉर्डर निवेश नियमों में स्पष्टता लाने, डीप-टेक सेक्टर में फंडिंग बढ़ाने और डिजिटल प्रक्रियाओं को तेज करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया।
सागरमाला का बड़ा असर! पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में रिकॉर्ड विकास

नई दिल्ली। देश के समुद्री क्षेत्र में पिछले एक दशक में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है और इसमें सागरमाला प्रोग्राम की अहम भूमिका रही है। बंदरगाहों के आधुनिकीकरण से लेकर जलमार्गों के विकास तक, इस महत्वाकांक्षी योजना ने भारत की लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। 845 परियोजनाएं शुरू, 315 पूरीपत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ‘सागरमाला’ के तहत अब तक करीब 845 परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 6.06 लाख करोड़ रुपए है। इनमें से 1.57 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली 315 परियोजनाएं 24 मार्च 2026 तक पूरी हो चुकी हैं।इसके अलावा 210 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि 320 परियोजनाएं अभी योजना चरण में हैं। ‘सागरमाला 2.0’ से निवेश को मिलेगा बड़ा बूस्टसरकार अब सागरमाला 2.0 के जरिए इस पहल को और आगे बढ़ा रही है। इसके तहत 85,482 करोड़ रुपए के निवेश से लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपए के कुल निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे देश में पोर्ट-आधारित औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। कार्गो हैंडलिंग और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार‘सागरमाला’ के प्रभाव से भारत के प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता और दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में बंदरगाहों ने 915.17 मिलियन टन कार्गो हैंडल किया, जो तय लक्ष्य से अधिक है और सालाना आधार पर 7.06% की वृद्धि दर्शाता है। साथ ही, जहाजों का औसत टर्नअराउंड टाइम 2014 के 96 घंटे से घटकर 2025 में 49.5 घंटे रह गया है। इससे माल ढुलाई की गति बढ़ी है और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है। वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई भारत की स्थितिभारतीय बंदरगाहों की वैश्विक रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। देश के 9 बंदरगाह अब दुनिया के टॉप-100 बंदरगाहों में शामिल हो चुके हैं।विशाखापत्तनम बंदरगाह कंटेनर ट्रैफिक के मामले में दुनिया के शीर्ष 20 बंदरगाहों में अपनी जगह बना चुका है, जो भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। जलमार्गों से बढ़ी माल ढुलाई, 700% की छलांगअंतर्देशीय जलमार्गों के जरिए कार्गो परिवहन में भी जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। यह 2013-14 के 18.10 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 145.50 मिलियन टन हो गया है, यानी करीब 700% की बढ़ोतरी। इससे देश का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल और विविधतापूर्ण बन गया है। मछुआरों और रोजगार पर सकारात्मक असर‘सागरमाला’ के तहत 1,057 करोड़ रुपए की लागत से 11 फिशिंग हार्बर परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिससे 30,000 से ज्यादा मछुआरों को सीधा लाभ मिला है।इसके अलावा, कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए तटीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका भी बेहतर हुई है। सरकार का अनुमान है कि इस कार्यक्रम से लगभग 1 करोड़ रोजगार सृजित होंगे, जिनमें 40 लाख प्रत्यक्ष और 60 लाख अप्रत्यक्ष नौकरियां शामिल हैं।
डिजिटल पेमेंट में भारत का दबदबा, UPI ने दुनिया में बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली। भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज अपने 10 साल पूरे कर चुका है और इस दौरान उसने न सिर्फ देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भारत अब दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में करीब 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जो देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल ताकत का प्रमाण है। रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ, आंकड़े बताते हैं कहानीयूपीआई की सफलता का अंदाजा इसके लेनदेन के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। जनवरी 2026 में ही यूपीआई के जरिए 21.70 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपये रही। आज देश के कुल रिटेल डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है। खास बात यह है कि महज एक दशक से भी कम समय में इस प्लेटफॉर्म ने 12,000 गुना से ज्यादा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और 4,000 गुना से अधिक वैल्यू की वृद्धि दर्ज की है। गांव से शहर तक पहुंचा डिजिटल क्रांति का असरयूपीआई की असली ताकत सिर्फ बड़े आंकड़ों में नहीं, बल्कि इसके व्यापक उपयोग में है। आज यह सिस्टम शहरों से लेकर गांवों तक पहुंच चुका है। ऑटो रिक्शा चालक, छोटे दुकानदार, सब्जी विक्रेता और मंडियों में भी यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। सिर्फ एक स्मार्टफोन की मदद से लोग देश के किसी भी कोने में तुरंत पैसे भेज सकते हैं। इससे न केवल लेनदेन आसान हुआ है, बल्कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की आर्थिक दूरी भी कम हुई है और वित्तीय समावेशन को मजबूती मिली है। वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा यूपीआई का दायराभारत का यह डिजिटल मॉडल अब दुनिया के लिए उदाहरण बन चुका है। विश्व बैंक समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इसकी दक्षता और समावेशी मॉडल की सराहना की है। यूपीआई अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तार कर रहा है। यह सिस्टम संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर जैसे देशों में पहुंच चुका है। इससे क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और रेमिटेंस पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गए हैं। सिर्फ पेमेंट नहीं, बन रहा फाइनेंशियल प्लेटफॉर्मयूपीआई अब केवल पैसे भेजने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह एक संपूर्ण फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है। यूपीआई लाइट छोटे और तेज भुगतान को आसान बना रहा है, वहीं यूपीआई ऑटोपे के जरिए बिल और सब्सक्रिप्शन जैसे नियमित भुगतान ऑटोमैटिक हो गए हैं। इसके अलावा, फिनटेक कंपनियां और एनबीएफसी यूपीआई के जरिए प्री-अप्रूव्ड लोन, आसान रीपेमेंट और कस्टमाइज्ड फाइनेंशियल सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।
Petrol-Diesel के रेट में कोई बदलाव नहीं… इस शहर में डीजल 78 और पेट्रोल 82 रुपये प्रति लीटर

नई दिल्ली। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price ) में आज शनिवार को कोई इजाफा नहीं किया है। तेल कंपनियों की तरफ से पुरानी की कीमतें बरकरार हैं। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जारी तेजी के बीच कई देशों में पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, भारत में कीमतों में कोई भी इजाफा सरकार तेल कंपनियों ने नहीं किया है। पेट्रोल रेट (Petrol Rate)– नई दिल्ली – 94.77 रुपये– मुंबई – 103.54 रुपये– कोलकाता – 105.41 रुपये– बेंगलुरू – 102.92 रुपये– चेन्नई – 100.90 रुपये– पटना – 105.23 रुपये– जयपुर – 104.86 रुपये– पोर्ट ब्लेयर – 82.46 रुपये– तिरुअनंतपुरम् – 107.48 रुपये डीजल रेट (Diesel Rate)– दिल्ली – 87.67 रुपये– मुंबई – 90.03 रुपये– कोलकाता – 92.02 रुपये– बेंगलुरू – 90.99 रुपये– चेन्नई – 92.49 रुपये– पटना – 91.49 रुपये– जयपुर – 90.34 रुपये– पोर्टब्लेयर – 78.05 रुपये– तिरुअनंतपुरम्- 96.48 रुपये रिलायंस ने अपने फैसले से डरायाबीते दिनों रिलायंस और बीपी पेट्रोल पंपों पर नया नियम लागू कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार एक बार में कोई भी व्यक्ति 1000 रुपये ही पेट्रोल या डीजल खरीद सकता है। जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से पहली बार किसी कंपनी ने ऐसा नियम लगाया है। कच्चे तेल का रेट 100 डॉलर के नीचेईरान-अमेरिका के बीच जारी बातचीत का असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर साफ दिख रहा है। कल शुक्रवार कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया था। युद्ध शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल 70 डॉलर के आस-पास बना हुआ था। Shell India ने 25.01 रुपये बढ़ाया डीजल का रेटकंपनी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। शेल इंडिया की तरफ से बीते सप्ताह पेट्रोल के रेट में 25.01 रुपये और डीजल के रेट में 7.41 रुपये का इजाफा किया था। इससे पहले नायरा ने भी कीमतों में बढ़ोतरी की थी। नायरा ने मार्च में पेट्रोल के रेट में 5 रुपये और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था। एक्साइज ड्यूटी में कटौतीतेल कंपनियों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई थी। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10-10 रुपये एक्साइज ड्यूटी घटा दिया था। जिसके बाद डीजल ड्यूटी फ्री हो गया था।
मध्यपूर्व में तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 918 अंक उछला

नई दिल्ली।मध्यपूर्व में तनाव कम होने के संकेतों के बीच शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कारोबार के अंत में BSE Sensex 918.60 अंक यानी 1.20% उछलकर 77,550.25 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 275.50 अंक यानी 1.10% की बढ़त के साथ 24,050.60 पर पहुंच गया। ऑटो और बैंकिंग शेयर बने बाजार के हीरोइस तेजी में सबसे बड़ा योगदान ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर का रहा। निफ्टी ऑटो: +2.85% (टॉप गेनर)निफ्टी रियल्टी: +2.08%निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज: +2.06%निफ्टी पीएसयू बैंक: +2.01%निफ्टी प्राइवेट बैंक: +1.98%इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंजम्प्शन सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। आईटी सेक्टर में रही कमजोरीजहां अधिकांश सेक्टर्स में तेजी रही, वहीं आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा। निफ्टी आईटी 1.91% की गिरावट के साथ बंद हुआ। Infosys, TCS और HCLTech जैसे दिग्गज शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी शानदार तेजीबाजार की तेजी सिर्फ लार्जकैप तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी खरीदारी का माहौल दिखा: निफ्टी मिडकैप 100: +1.52% (57,843.95)निफ्टी स्मॉलकैप 100: +1.65% (16,840.10)सेंसेक्स के टॉप गेनर्स इस तेजी में Asian Paints, ICICI Bank, Mahindra & Mahindra, State Bank of India, Axis Bank, HDFC Bank और Larsen & Toubro जैसे शेयरों में मजबूत खरीदारी रही। वहीं Sun Pharma, Infosys और Tech Mahindra गिरावट में रहे। एक्सपर्ट की राय: आगे क्या?Sudeep Shah (SBI सिक्योरिटीज) के अनुसार, बाजार ने गैप-अप ओपनिंग के बाद स्थिर रेंज में कारोबार किया और 24,000 के ऊपर मजबूती से बंद हुआ। रेजिस्टेंस: 24,200 – 24,250ब्रेकआउट पर लक्ष्य: 24,400 से 24,600सपोर्ट: 23,850 – 23,800 मध्यपूर्व में तनाव कम होने से निवेशकों का भरोसा लौटा है, जिससे बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली। अगर वैश्विक संकेत सकारात्मक बने रहते हैं, तो आने वाले समय में बाजार और ऊपर जा सकता है।
यूपीआई के 10 साल पूरे: लेनदेन की वॉल्यूम 12,000 गुना बढ़ी; वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी

नई दिल्ली। भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI (Unified Payments Interface) ने 11 अप्रैल को अपने 10 साल पूरे कर लिए हैं। इस एक दशक में यूपीआई ने देश में लेनदेन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, इसकी लेनदेन वॉल्यूम में 12,000 गुना से ज्यादा और वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। 2017 से 2026 तक का सफर: जबरदस्त ग्रोथएनालिटिक्स फर्म Tracxn के अनुसार, वित्त वर्ष 2017: 1.786 करोड़ ट्रांजैक्शन, 6,952 करोड़ रुपए वैल्यूवित्त वर्ष 2026: 218.98 अरब ट्रांजैक्शन, 285 लाख करोड़ रुपए वैल्यू यह आंकड़े दिखाते हैं कि यूपीआई ने बेहद कम समय में अभूतपूर्व विस्तार किया है। महामारी के दौरान मिली सबसे बड़ी रफ्तार शुरुआती वर्षों में धीमी बढ़त के बाद कोविड-19 महामारी के दौरान यूपीआई ने तेजी से रफ्तार पकड़ी: FY21: 22.33 अरब ट्रांजैक्शनFY22: 45.97 अरबFY23: 83.75 अरब इसके बाद भी ग्रोथ जारी रही और FY24 में 130.13 अरब और FY25 में 185.87 अरब लेनदेन दर्ज किए गए। मार्च 2026 में बना नया रिकॉर्डNational Payments Corporation of India (NPCI) के अनुसार, मार्च 2026 में यूपीआई ने अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड बनाया: 22.64 अरब ट्रांजैक्शन (फरवरी: 20.39 अरब)सालाना आधार पर 24% की बढ़त इसने जनवरी 2026 के 21.70 अरब के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। डिजिटल इकोसिस्टम का तेजी से विस्तारयूपीआई की सफलता का एक बड़ा कारण इसका तेजी से बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर भी है: यूपीआई QR कोड: 73.13 करोड़ (15% वृद्धि)पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनल: 1.148 करोड़ (15% वृद्धि) इससे छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े कारोबारियों तक डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला है। क्यों खास है यूपीआई?UPI (Unified Payments Interface) ने भारत में: कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा दियाछोटे व्यापारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ाआम लोगों के लिए आसान और तेज पेमेंट सिस्टम उपलब्ध करायानिष्कर्ष 10 साल में यूपीआई ने भारत को डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बना दिया है। इसकी तेजी से बढ़ती पहुंच और उपयोग भविष्य में भी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।
NITIN GADKARI STATEMENT : इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सुधार पर जोर, गडकरी बोले- क्लीयरेंस में देरी से बढ़ती है लागत

NITIN GADKARI STATEMENT : नई दिल्ली।भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। Reserve Bank of India (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। इससे पहले के सप्ताह में भंडार में 10.288 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। गोल्ड रिजर्व में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी विदेशी मुद्रा भंडार में इस बार सबसे बड़ा योगदान गोल्ड रिजर्व का रहा। गोल्ड रिजर्व: 7.221 अरब डॉलर बढ़कर 120.742 अरब डॉलर फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA): 1.784 अरब डॉलर बढ़कर 552.856 अरब डॉलर एफसीए में डॉलर के अलावा येन, यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू डॉलर में आंकी जाती है। एसडीआर में हल्की बढ़त, आईएमएफ पोजीशन स्थिर Kaal Bhairav Puja : कालाष्टमी 2026 पर करें ये अचूक उपाय बच्चों को नजर दोष से मिलेगी तुरंत सुरक्षा आरबीआई के अनुसार, एसडीआर (Special Drawing Rights): 5.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.707 अरब डॉलर आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजीशन: 4.816 अरब डॉलर (कोई बदलाव नहीं) क्यों अहम होता है विदेशी मुद्रा भंडार? किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यह मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद करता है वैश्विक व्यापार को सुगम बनाता है आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है जब रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक इसी भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर की बिक्री कर मुद्रा को स्थिर करता है। मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि देश में डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे भारत की वैश्विक व्यापार क्षमता बढ़ती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है। विदेशी मुद्रा भंडार में आई यह बढ़त भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, जो न केवल वित्तीय स्थिरता को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को भी और सुदृढ़ बनाएगी।
RBI forex data : भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 697 अरब डॉलर पार, 9.06 अरब डॉलर की जोरदार बढ़ोतरी

RBI forex data : नई दिल्ली। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। Reserve Bank of India (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। इससे पहले के सप्ताह में भंडार में 10.288 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। गोल्ड रिजर्व में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी विदेशी मुद्रा भंडार में इस बार सबसे बड़ा योगदान गोल्ड रिजर्व का रहा। गोल्ड रिजर्व: 7.221 अरब डॉलर बढ़कर 120.742 अरब डॉलर फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA): 1.784 अरब डॉलर बढ़कर 552.856 अरब डॉलर एफसीए में डॉलर के अलावा येन, यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू डॉलर में आंकी जाती है। एसडीआर में हल्की बढ़त, आईएमएफ पोजीशन स्थिर आरबीआई के अनुसार, एसडीआर (Special Drawing Rights): 5.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.707 अरब डॉलर आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजीशन: 4.816 अरब डॉलर (कोई बदलाव नहीं) क्यों अहम होता है विदेशी मुद्रा भंडार? किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यह मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद करता है वैश्विक व्यापार को सुगम बनाता है आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है जब रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक इसी भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर की बिक्री कर मुद्रा को स्थिर करता है। मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि देश में डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे भारत की वैश्विक व्यापार क्षमता बढ़ती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है। विदेशी मुद्रा भंडार में आई यह बढ़त भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, जो न केवल वित्तीय स्थिरता को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को भी और सुदृढ़ बनाएगी।
स्पेस मिशन में तकनीकी चुनौती, यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर सवाल!

नई दिल्ली। NASA ने हाल ही में एक एक्सप्लेनर वीडियो जारी कर Artemis II मिशन के दौरान सामने आई एक अहम तकनीकी समस्या के बारे में जानकारी दी है। यह दिक्कत Orion spacecraft में लगे स्पेस टॉयलेट यानी ‘यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ (UWMS) में आई थी। यह सिस्टम अंतरिक्ष में मानव अपशिष्ट (वेस्ट) को संभालने के लिए बेहद जरूरी होता है। इसमें यूरिन को एक टैंक में इकट्ठा किया जाता है और फिर उसे वैक्यूम के जरिए बाहर निकाला जाता है। चूंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, इसलिए यह पूरा सिस्टम हवा के तेज बहाव (एयर फ्लो) पर काम करता है। क्या आई थी समस्या?मिशन के दौरान अचानक इस सिस्टम में फ्लो बंद हो गया, जिससे एस्ट्रोनॉट्स टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। वीडियो में एस्ट्रोनॉट्स ने बताया कि “जब फ्लो ही नहीं था, तो सिस्टम काम नहीं कर रहा था। इस स्थिति में क्रू को अस्थायी तौर पर ‘कॉन्टिगेंसी कलेक्शन यूनिट्स’ (CCUS) का उपयोग करने की सलाह दी गई, जो आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला बैकअप सिस्टम होता है। तकनीकी चुनौती क्यों है यह?NASA के अनुसार, असली समस्या यूरिन को वैक्यूम में डिस्पोज करने के दौरान आई। शुद्ध पानी को वैक्यूम में भेजना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन यूरिन जैसे जटिल तरल पदार्थ में कई अतिरिक्त चुनौतियां सामने आती हैं। इस प्रक्रिया में तरल के अचानक उथल-पुथल करने और जमने (फ्रीजिंग) जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। एस्ट्रोनॉट्स ने इसे मजाकिया अंदाज में “बर्फ का तूफान” बताया। कैसे हुआ समाधान?इस तकनीकी खराबी को महिला एस्ट्रोनॉट Christina Hammock Koch ने ठीक किया। शुरुआत में लगा कि मोटर में कुछ फंस गया है, लेकिन बाद में यह ‘प्राइमिंग’ से जुड़ी छोटी तकनीकी गड़बड़ी निकली। क्रिस्टीना ने इसे ठीक कर दिया और मिशन को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया। उन्होंने मजाक में खुद को “स्पेस प्लंबर” भी बताया। क्यों है यह इतना अहम?स्पेस मिशनों में टॉयलेट जैसी बुनियादी चीजें भी बेहद अहम होती हैं। छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़ी चुनौती बन सकती है। यही वजह है कि NASA ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया, ताकि भविष्य के मिशनों में सुधार किया जा सके। आर्टेमिस III से पहले मिला बड़ा सबकArtemis II में आई यह समस्या Artemis III मिशन से पहले एक अहम सीख मानी जा रही है। नासा की योजना है कि आर्टेमिस III के जरिए इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजा जाए। ऐसे में इस तरह की तकनीकी खामियों को समय रहते सुधारना बेहद जरूरी है। स्पेस मिशन में हर छोटी तकनीक बड़ी भूमिका निभाती है। आर्टेमिस II में आई टॉयलेट की समस्या ने यह साबित कर दिया कि अंतरिक्ष में जीवन को सुचारू बनाए रखने के लिए हर सिस्टम का सही तरीके से काम करना कितना जरूरी है।