fuel price today India : पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, सोने की खरीद पर भी लगी सख्ती: आज का पूरा अपडेट

fuel price today India : नई दिल्ली। 4 अप्रैल 2026 को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम जारी कर दिए हैं। देश के ज्यादातर बड़े शहरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिली है। हालांकि, कुछ शहरों में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पेट्रोल के दाम दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और मुंबई में ₹103.54 प्रति लीटर पर स्थिर है। कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। नोएडा, मुजफ्फरपुर और रांची जैसे कुछ शहरों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डीजल की कीमतों में स्थिरता डीजल के दाम भी ज्यादातर शहरों में स्थिर रहे। दिल्ली में डीजल ₹87.67 और मुंबई में ₹90.03 प्रति लीटर मिल रहा है। कुछ शहरों में मामूली बढ़ोतरी और गिरावट जरूर देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार स्थिर बना हुआ है। कीमतें क्यों बदलती हैं? पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स (Excise Duty और VAT) इसी वजह से हर राज्य और शहर में कीमतें अलग-अलग होती हैं। सरकार का बड़ा फैसला: सोने की खरीद पर नए नियम सरकार अब सोने की खरीदारी से जुड़े नियमों को और सख्त करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सोने की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अब हर सोने के गहने पर 6 अंकों का HUID (Hallmark Unique Identification) कोड अनिवार्य होगा। यह कोड एक तरह का यूनिक पहचान नंबर है, जिसे दोबारा किसी अन्य गहने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। ग्राहक BIS CARE ऐप के जरिए इस कोड की जांच कर सकते हैं ताकि सोने की असलियत की पुष्टि हो सके। हॉलमार्किंग एक प्रमाणन प्रक्रिया है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सोना तय शुद्धता मानकों के अनुसार है। इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इससे नकली या कम गुणवत्ता वाले सोने की बिक्री पर रोक लगती है और ग्राहकों को सही जानकारी मिलती है। नए नियमों के तहत क्या बदलाव होंगे? सोने पर HUID कोड का दोबारा इस्तेमाल नहीं होगा हर गहने की अलग पहचान होगी खरीदारी में पारदर्शिता बढ़ेगी धोखाधड़ी और नकली हॉलमार्क पर रोक लगेगी ₹2 लाख से अधिक खरीद पर PAN कार्ड जरूरी ₹10 लाख से अधिक खरीद पर PAN + आधार + आय प्रमाण जरूरी₹2 लाख से अधिक का कैश भुगतान नहीं किया जा सकेगा 4 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल के दामों में स्थिरता देखने को मिली है, जिससे आम जनता को राहत मिली है। वहीं, सरकार के नए फैसले के तहत सोने की खरीद को और सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। आने वाले समय में ये नियम ग्राहकों के लिए सुरक्षा और भरोसे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
भारत का एलपीजी टैंकर ‘Green Sanvi’ ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया, दो और टैंकर लाइन में

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी सफलता सामने आई है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ग्रीन सान्वी ने होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रूप से पार कर लिया। यह जहाज इस रणनीतिक और संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार करने वाला सातवां भारत के झंडे वाला पोत है। जहाज में लगभग 44,000 टन एलपीजी था, जो देश की लगभग आधे दिन की एलपीजी खपत के बराबर है। रणनीतिक नेविगेशन और सुरक्षाग्रीन सान्वी ने ईरानी समुद्री इलाके से होकर एक तय मार्ग का पालन किया। शिपिंग विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि जहाज संवेदनशील पानी से सुरक्षित गुजरें। इसके साथ ही दो और भारतीय एलपीजी टैंकर, ग्रीन आशा और जग विक्रम, आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट पार करके भारत आने की उम्मीद में हैं। भारत के झंडे वाले जहाजों की स्थितिस्ट्रेट पार करने के साथ ही फारस की खाड़ी के पूर्वी हिस्से में भारत के झंडे वाले 17 जहाज मौजूद हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के जहाज शामिल हैं: तीन एलपीजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक LNG टैंकर, एक केमिकल प्रोडक्ट टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और दो जहाज जिनका नियमित मेंटेनेंस चल रहा है। ईरान के साथ डिप्लोमैटिक समन्वयभारत अपने व्यापारी जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत कर रहा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इजरायल के सहयोगी देशों के अलावा अन्य गैर-दुश्मन देशों के जहाज ईरानी अधिकारियों के समन्वय में स्ट्रेट पार कर सकते हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह भी बताया कि चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को इस चोकपॉइंट से गुजरने की अनुमति दी गई है। ट्रांजिट के दौरान प्रोटोकॉलग्रीन सान्वी ने अपने भारतीय पहचान और नाविकों की जानकारी ईरानी अधिकारियों को उपलब्ध करवाई। यह प्रैक्टिस अब सुरक्षित नेविगेशन का स्टैंडर्ड बन चुकी है, ताकि तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी व्यापारिक जहाज अपने मार्ग पर सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकें। होर्मुज स्ट्रेट का महत्वहोर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम मार्ग है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच इसे सुरक्षित बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। ग्रीन सान्वी का सफलतापूर्वक पार होना दर्शाता है कि भारत एनर्जी सप्लाई लाइन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रभावी डिप्लोमेसी और समुद्री सुरक्षा उपाय कर रहा है।
ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव: नए कोड के तहत छोटा अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ

नई दिल्ली।नई श्रम नीति ने कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब कुछ योग्य कर्मचारियों को सिर्फ एक साल की लगातार सेवा पूरी होने के बाद भी ग्रेच्युटी पाने का अधिकार मिल सकता है। इससे पहले यह लाभ केवल 5 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को ही मिलता था। यह बदलाव नवंबर 2025 से लागू हुआ है और इसका उद्देश्य फॉर्मल सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को नौकरी के बाद मिलने वाले लाभों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना है। फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को लाभनए नियमों के अनुसार, फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी अब अपनी नौकरी की अवधि के आधार पर ग्रेच्युटी पाने के पात्र होंगे। फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी वे हैं जिन्हें कंपनियां एक तय समय के लिए लिखित कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त करती हैं, जो आमतौर पर एक या दो साल का हो सकता है। अब उनके ग्रेच्युटी की राशि उनकी सेवा अवधि के अनुरूप तय होगी। यह बदलाव विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए लाभकारी है, जो छोटे या सीमित कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। इससे उन्हें भी लंबे समय तक नौकरी न होने पर भी कानूनी रूप से ग्रेच्युटी का हक मिलेगा। स्थायी कर्मचारियों के लिए नियमस्थायी या परमानेंट कर्मचारियों के लिए नियम अभी भी पुराने अनुसार हैं, यानी 5 साल की लगातार सेवा पूरी करना अनिवार्य है। हालांकि, मृत्यु या दिव्यांगता के मामलों में स्थायी कर्मचारियों को भी एक साल की सेवा पूरी होने के बाद ग्रेच्युटी का अधिकार मिल सकता है। इससे कर्मचारियों को अप्रत्याशित परिस्थितियों में भी सुरक्षा का आश्वासन मिलेगा। ग्रेच्युटी की गणना और वेतन संरचनानए नियमों के अनुसार ग्रेच्युटी की गणना वेतन के आधार पर की जाएगी। इसमें कर्मचारी के कुल CTC (कॉस्ट-टू-कंपनी) का कम से कम 50 प्रतिशत शामिल होगा। वेतन में बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (DA), रिटेनिंग अलाउंस और अन्य भत्ते शामिल होंगे। जिन कर्मचारियों का पहले बेसिक वेतन कम था, उनके लिए अब ग्रेच्युटी की राशि में पर्याप्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। कानूनी मान्यता और लाभग्रेच्युटी एक कानूनी रूप से अनिवार्य एकमुश्त भुगतान है, जो नियोक्ता अपने कर्मचारी को लंबी सेवा या रिटायरमेंट के सम्मान में देता है। अब यह लाभ छोटे समय की नौकरी करने वाले फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए भी उपलब्ध होगा। इसका मतलब है कि 21 नवंबर 2025 या उसके बाद जॉइन करने वाले कर्मचारी एक साल की लगातार सेवा पूरी होने के बाद ग्रेच्युटी का दावा कर सकेंगे। संस्थानों की जिम्मेदारीश्रम मंत्रालय ने सभी संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपने अकाउंटिंग नियमों के अनुसार इस प्रावधान को लागू करें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कर्मचारियों को उनके हक का भुगतान समय पर और सही तरीके से मिले। यह बदलाव विशेष रूप से औपचारिक सेक्टर के कर्मचारियों के लिए राहत और सुरक्षा का जरिया साबित होगा।
ईरान से तेल कार्गो डायवर्जन की खबरें भ्रामक, सरकार ने कहा-‘तथ्यात्मक रूप से गलत’

नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने शनिवार को उन खबरों और सोशल मीडिया दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण ईरान से भारत आने वाले तेल के एक कार्गो को चीन भेज दिया गया। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इसे “तथ्यात्मक रूप से गलत” और भ्रामक बताया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है और तेल कंपनियों को व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार किसी भी सप्लायर से तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता होती है। मंत्रालय ने कहा कि हाल ही में जहाज ‘पिंग शुन’ के वाडिनार से मार्ग बदलने को गलत तरीके से जोड़कर यह दावा किया गया कि भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण तेल चीन भेजा गया, जबकि ऐसा कोई मामला नहीं है। शिप ट्रैकिंग डेटा में जहाज पहले भारत की ओर आ रहा था, लेकिन बाद में उसने अपनी मंजिल बदल ली। इसके आधार पर बाजार और सोशल मीडिया में अटकलें शुरू हुईं कि भुगतान की समस्या वजह हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह गलत है और ईरान से तेल आयात में कोई बाधा नहीं है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि भारतीय रिफाइनरियों ने मध्य पूर्व में सप्लाई संकट के बावजूद आने वाले महीनों की कच्चे तेल की जरूरत पहले ही सुनिश्चित कर ली है, जिसमें ईरान से सप्लाई भी शामिल है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि जहाजों का मार्ग बदलना व्यापारिक और ऑपरेशनल कारणों से होता है और इसे गलत रूप में पेश किया गया। एलपीजी सप्लाई को लेकर आई खबरों को भी सरकार ने खारिज किया। पुष्टि की गई कि ‘सी बर्ड’ नामक जहाज, जिसमें लगभग 44 हजार मीट्रिक टन ईरानी एलपीजी था, 2 अप्रैल को मैंगलोर पहुंच चुका है और अपना माल उतार रहा है। ईरान से तेल और एलपीजी की सप्लाई सुरक्षित है। सरकार ने सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में फैल रही गलत जानकारी को स्पष्ट रूप से भ्रामक बताया। भुगतान संबंधी कोई बाधा नहीं है और भारतीय रिफाइनरियों की आवश्यकताएं पूरी तरह सुनिश्चित हैं।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बंपर रेट बढ़ोतरी! 60k टिकट हुआ 1.5 L, यात्रियों के लिए अलर्ट

नई दिल्ली। इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराये में भारी उछाल, ₹60 हजार का टिकट अब ₹1.5 लाख के पार। दिल्ली से लंदन, दुबई और न्यूयॉर्क की उड़ानें महंगी। पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-इज़राइल-अमेरिका तनाव का असर अब हवाई यात्रा पर साफ दिखने लगा है। कई देशों के एयरस्पेस बंद होने की वजह से एयरलाइंस को लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है और टिकट की कीमतों में भारी उछाल आया है। दिल्ली से लंदन का किराया दोगुने से ज्यादादिल्ली से London जाने वाली फ्लाइट्स के किराये में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है। मौजूदा समय में इकोनॉमी क्लास का नॉन-स्टॉप टिकट करीब ₹1.49 लाख तक पहुंच गया है, जबकि बिज़नेस क्लास का किराया ₹1.79 लाख तक जा चुका है। पहले यही टिकट ₹45,000 से ₹65,000 के बीच मिल जाता था, यानी अब कीमत दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। सिर्फ लंदन ही नहीं, Dubai और New York City जाने वाली फ्लाइट्स के किराये भी तेजी से बढ़े हैं। दिल्ली-दुबई का इकोनॉमी टिकट अब ₹28,000 से ऊपर पहुंच गया है, जो पहले ₹12,000 से ₹20,000 के बीच होता था। वहीं दिल्ली-न्यूयॉर्क का किराया ₹1.26 लाख से लेकर ₹2 लाख से ज्यादा तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य दिनों में यह ₹55,000 से ₹80,000 के बीच रहता था। ATF और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछालकिराये में इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उछाल भी है। ATF के दाम $85-90 प्रति बैरल से बढ़कर $150-200 प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड ऑयल भी $72 से बढ़कर $105 प्रति बैरल हो गया है, जिससे एयरलाइंस की लागत और बढ़ गई है। यूरोप रूट पर फ्लाइट्स रद्द और किराया बढ़ायूरोप जाने वाली उड़ानों पर भी इस संकट का असर पड़ा है। मार्च के शुरुआती हफ्तों में 700 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द हुईं और किराये में 40% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौजूदा हालात में इंटरनेशनल हवाई यात्रा काफी महंगी हो गई है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में किराये और भी बढ़ सकते हैं, जिससे यात्रियों की जेब पर और बोझ पड़ना तय है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने हवाई यात्रा को काफी महंगा बना दिया है। अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले समय में इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराये और भी बढ़ सकते हैं। यात्रियों को फिलहाल यात्रा से पहले किराये और रूट की अच्छी तरह जांच करने की सलाह दी जा रही है।
HDFC बैंक का वित्तीय अलर्ट! जमा और लोन के बीच बढ़ा अंतर, 18 अप्रैल को बोर्ड बैठक

नई दिल्ली।एचडीएफसी बैंक ने मार्च तिमाही में अपने कर्ज और जमा के बीच अंतर और बढ़ने की जानकारी दी है। बैंक के अनुसार, लोन की ग्रोथ जमा से तेज रही, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट (C-D) रेशियो 106-108 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। लोन की ग्रोथ: रिटेल और SME का योगदान31 मार्च तक बैंक के कुल लोन (ग्रॉस एडवांस) सालाना आधार पर लगभग 17 प्रतिशत बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपए हो गए, जबकि एक साल पहले यह 21.4 लाख करोड़ रुपए थे। तिमाही आधार पर लोन की ग्रोथ मध्यम रही, जिसमें मुख्य रूप से रिटेल और SME सेगमेंट ने योगदान दिया। कॉरपोरेट लोनिंग सीमित और संतुलित रही। जमा की धीमी बढ़त और सीएएसए पर दबावबैंक की कुल जमा राशि लगभग 23.5 लाख करोड़ रुपए रही, जो एक साल पहले 20.5 लाख करोड़ रुपए थी। हालांकि, डिपॉजिट की ग्रोथ लोन के मुकाबले धीमी रही, जिससे C-D रेशियो ऊंचा बना रहा। कम लागत वाले डिपॉजिट (CASA) की ग्रोथ भी धीमी रही, जिससे CASA रेशियो 37-38 प्रतिशत पर आ गया। इससे स्पष्ट होता है कि कड़े लिक्विडिटी माहौल में सस्ते फंड जुटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बोर्ड बैठक और डिविडेंडएचडीएफसी बैंक का बोर्ड 18 अप्रैल को बैठक करेगा, जिसमें मार्च तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के ऑडिटेड नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। इस बैठक में FY 2026 के लिए डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा और इसके लिए रिकॉर्ड डेट तय की जाएगी। आगे की रणनीतिविश्लेषकों का मानना है कि बैंक के लिए डिपॉजिट ग्रोथ बढ़ाना, CASA बढ़ाना और मार्जिन को स्थिर बनाए रखना सबसे अहम होगा। बैंक वर्तमान में कुछ गवर्नेंस मामलों को भी संभाल रहा है और आंतरिक सिस्टम को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है, खासकर थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स की बिक्री प्रक्रिया में। कानूनी और आंतरिक कार्रवाईपूर्व नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई फिलहाल शुरू नहीं की गई है। इसके अलावा, 2018-19 में एटी-1 बॉन्ड की मिस-सेलिंग मामले में बैंक ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड किया और 12 अन्य कर्मचारियों पर जुर्माना लगाया। एचडीएफसी बैंक में मार्च तिमाही में लोन की ग्रोथ जमा से तेज रही, जिससे C-D रेशियो ऊंचा बना। बोर्ड बैठक 18 अप्रैल को होगी, जिसमें ऑडिटेड नतीजे और डिविडेंड पर निर्णय लिया जाएगा। बैंक CASA बढ़ाने और आंतरिक सिस्टम मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।
FTL सिलेंडर योजना: बिना स्थायी पते के भी घर लाएं 5 किलो का LPG, आसान प्रक्रिया

नई दिल्ली।केंद्र सरकार की एलपीजी उपलब्धता बढ़ाने की पहल के तहत, सरकारी तेल वितरण कंपनियां अब 5 किलोग्राम के एफटीएल (फ्री-ट्रेड) एलपीजी सिलेंडर को आसानी से उपलब्ध करा रही हैं। खास बात यह है कि इस सिलेंडर को पाने के लिए अब स्थायी पते की आवश्यकता नहीं है; केवल एक सरकारी आईडी दिखाकर आप इसे अपने नजदीकी एलपीजी एजेंसी या वितरक से ले सकते हैं। छात्रों और प्रवासी कामगारों के लिए सुविधासरकार की यह सुविधा विशेषकर उन लोगों के लिए है जो अपने शहरों से दूर रहते हैं और उनके पास स्थायी पता नहीं है। छात्र और प्रवासी कामगार अब बिना किसी पते की बाधा के घर से दूर भी एलपीजी सिलेंडर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इंडियन ऑयल ने पोस्ट करते हुए बताया, “अगर आप घर से दूर रहते हैं, आपके पास स्थायी पता नहीं है, और एलपीजी कनेक्शन लेने में कठिनाई हो रही है, तो अब इसका आसान समाधान है।” ‘छोटू’ – छोटा, सुविधाजनक और भरोसेमंदइंडियन ऑयल ने इस सिलेंडर को ‘छोटू’ नाम दिया है। पोस्ट के अनुसार, यह छोटा और सुविधाजनक सिलेंडर खासकर छात्रों और प्रवासी कामगारों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें तुरंत और भरोसेमंद खाना पकाने का समाधान चाहिए। एलपीजी आपूर्ति सामान्य, डिजिटल प्लेटफॉर्म से बुकिंगकंपनी ने कहा कि देश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और प्रतिदिन लगभग 28 लाख सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद परिचालन सामान्य रूप से चल रहा है। 87 प्रतिशत एलपीजी बुकिंग अब डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे एसएमएस और IVRS के माध्यम से हो रही हैं। सिलेंडर की डिलीवरी को डीएसी ओटीपी से प्रमाणित किया जाता है, जिससे ग्राहकों को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिलती है। ग्राहकों को आश्वासनइंडियन ऑयल ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया कि किसी भी कमी की संभावना नहीं है और घबराहट में बुकिंग या जमाखोरी करने की जरूरत नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि आधिकारिक सहायता चैनलों के जरिए ग्राहकों की चिंताओं का सक्रिय समाधान किया जा रहा है।
चांद के करीब इंसान की वापसी! आर्टेमिस II मिशन से सामने आया धरती का अद्भुत नजारा

नई दिल्ली। मानव अंतरिक्ष इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। NASA का Artemis II मिशन आधी सदी बाद इंसानों को फिर से चंद्रमा के करीब ले गया है। इस ऐतिहासिक मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष से पृथ्वी की ऐसी शानदार तस्वीरें भेजी हैं, जिन्हें देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो रहा है। ओरियन कैप्सूल से दिखी ‘ब्लू मार्बल’ की खूबसूरतीमिशन के कमांडर Reid Wiseman द्वारा ली गई तस्वीरों में पृथ्वी का अद्भुत नजारा देखने को मिला। Orion spacecraft की खिड़की से ली गई एक तस्वीर में धरती का घुमावदार हिस्सा दिखाई देता है, जबकि दूसरी तस्वीर में पूरी पृथ्वी नजर आती है नीले महासागर, सफेद बादल और हरे रंग की चमकती ऑरोरा के साथ। इन तस्वीरों में पृथ्वी की खूबसूरती और उसकी नाजुकता दोनों साफ झलकती हैं, मानो अंतरिक्ष से ‘ब्लू मार्बल’ जीवंत हो उठी हो। ‘टर्मिनेटर’ लाइन ने खींचा ध्यानएक अन्य तस्वीर में दिन और रात के बीच की स्पष्ट सीमा दिखाई देती है, जिसे ‘टर्मिनेटर’ कहा जाता है। यह वह रेखा होती है जहां सूरज की रोशनी और अंधेरा मिलते हैं। इस दृश्य ने वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों को आकर्षित किया है। तकनीक का कमाल: शटर स्पीड से बदली तस्वीरों की कहानीइन तस्वीरों को अलग-अलग शटर स्पीड पर कैद किया गया है। एक तस्वीर में ज्यादा शटर स्पीड के कारण धरती की रोशनी अधिक चमकदार दिख रही है, जबकि दूसरी में कम शटर स्पीड के जरिए रात में चमकती मानव बस्तियों और प्राकृतिक रोशनी को बेहतर तरीके से दिखाया गया है। यह अंतरिक्ष फोटोग्राफी की तकनीकी खूबसूरती को भी दर्शाता है। 1972 के बाद पहली बार इतना करीबयह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि 1972 में Apollo 17 के बाद पहली बार कोई मानव मिशन चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। लगभग 50 साल बाद इंसान एक बार फिर चांद के पड़ोस तक पहुंचा है, जो भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए रास्ता खोलता है। चार अंतरिक्ष यात्री, एक साझा सपनाइस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। एक्सप्लोरेशन सिस्टम लीडर लकीशा हॉकिन्स ने कहा, “इस तस्वीर को देखते हुए यह एहसास होता है कि हमारे चार अंतरिक्ष यात्रियों को छोड़कर पूरी मानवता इसमें शामिल है।” यह बयान इस मिशन की भावनात्मक गहराई को भी दर्शाता है। चंद्रमा की ओर बढ़ता कदमरिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 1,80,000 किलोमीटर दूर पहुंच चुके हैं और उन्हें चंद्रमा तक पहुंचने के लिए करीब 2,40,000 किलोमीटर और सफर तय करना है। मिशन की योजना चंद्रमा की परिक्रमा कर ‘यू-टर्न’ लेकर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटने की है, बिना लैंडिंग के। भविष्य के मिशनों की नींवArtemis II मिशन को आने वाले समय में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह मिशन न सिर्फ तकनीकी परीक्षण है, बल्कि मानवता के अंतरिक्ष में आगे बढ़ने के सपनों को नई उड़ान भी देता है।
निवेशकों के लिए अलर्ट! सोना-चांदी में आई बड़ी गिरावट के पीछे क्या कारण, आगे खरीदें या रुकें?

नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और अमेरिका-ईरान संघर्ष के पांचवें सप्ताह में पहुंचने के बावजूद, अब बाजार का रुख बदलता नजर आ रहा है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2.2% और चांदी 3.8% तक टूट गई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। रिकॉर्ड स्तर से भारी गिरावटघरेलू बाजार में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। एमसीएक्स पर सोना अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 50 हजार रुपए नीचे आ गया है, जबकि चांदी में तो और बड़ी गिरावट आई है—यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 2 लाख रुपए तक टूट चुकी है। इस गिरावट ने उन निवेशकों को झटका दिया है जिन्होंने ऊंचे स्तर पर निवेश किया था। मजबूत डॉलर बना सबसे बड़ा कारणविशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है। इससे मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बनता है। कच्चे तेल और महंगाई का असरइसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई की चिंता को बढ़ा दिया है। महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों का सीधा असर सोने और चांदी पर पड़ता है, क्योंकि ये धातुएं ब्याज नहीं देतीं। ऐसे में निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए अन्य विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं। ट्रंप के बयान से बदला बाजार का मूडविश्लेषकों के अनुसार, शुरुआत में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने को “सेफ हेवन” के रूप में समर्थन मिला था, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ी, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया और कीमतें नीचे आ गईं। चांदी में ज्यादा गिरावट क्यों?चांदी की कीमतों में ज्यादा गिरावट की एक अहम वजह यह है कि यह सिर्फ निवेश धातु नहीं, बल्कि एक औद्योगिक धातु भी है। जब वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो उद्योगों में इसकी मांग घटने का डर रहता है, जिससे कीमतों पर ज्यादा दबाव आता है। आगे कैसी रहेगी चाल?अब निवेशकों की नजर अमेरिका के अहम आर्थिक आंकड़ों नॉन-फार्म पेरोल, एडीपी रोजगार डेटा और बेरोजगारी दर पर टिकी है। ये आंकड़े आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। तकनीकी तौर पर सोने के लिए 1,48,000 रुपए के आसपास सपोर्ट और 1,55,000 रुपए के करीब रेजिस्टेंस माना जा रहा है। हालांकि, सभी दबावों के बावजूद सोने ने सप्ताह के दौरान करीब 2.20% की बढ़त भी दर्ज की है, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है। निवेशकों के लिए संकेतफिलहाल बाजार पूरी तरह मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतों जैसे महंगाई, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर है। आने वाले समय में भी सोना-चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
Gold Jewellery: हॉलमार्किंग नियमों को सख्त करने की तैयारी… हर आईटम का होगा यूनिक नंबर!

Gold Jewellery: नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Government) अब सोने के गहनों (Gold Jewellery) की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हॉलमार्किंग नियमों (Hallmarking rules.) को और सख्त करने की तैयारी में है। इसके तहत, हर आइटम के लिए एक खास पहचान संख्या (HUID) का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाएगा। इसका मकसद नकली सामान पर रोक लगाना और उसकी पहचान को बेहतर बनाना है। यूनिक ID का दोबारा नहीं हो सकेगा इस्तेमाल मिंट की एक खबर में सूत्र के हवाले से बताया गया है कि नई व्यवस्था के तहत हर गहने को उसके डिजाइन, आकार और अन्य विशेषताओं के आधार पर एक अलग पहचान संख्या दी जाएगी। यह संख्या किसी भी हालत में दोबारा इस्तेमाल नहीं की जा सकेगी, भले ही गहने एक जैसे क्यों न दिखें। वहीं, एक बार जब कोई ज्वेलरी आइटम पिघला दिया जाता है तो उसे दी गई यूनिक ID का दोबारा इस्तेमाल किसी दूसरे प्रोडक्ट के लिए नहीं किया जा सकेगा। इससे सर्टिफिकेशन की नकल या गलत इस्तेमाल को रोका जा सकेगा। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। क्यों लिया जा रहा फैसला? सूत्र ने बताया कि यह फैसला उन बढ़ती शिकायतों को देखते हुए लिया गया है, जिनमें किसी खास हॉलमार्क ID और शुद्धता के स्तर के साथ खरीदे गए गहनों की प्योरिटी बाद में अलग पाई गई। यह बात संज्ञान में आई है कि एक ही यूनिक ID का इस्तेमाल कई चीजों के लिए किया जा रहा है। हालांकि, शिकायतों की कुल संख्या का खुलासा नहीं किया गया है। इंडस्ट्री का मिल रहा समर्थन आदित्य बिड़ला ज्वेलरी की कंपनी इंद्रिया के सीईओ संदीप कोहली ने कहा कि यह पहल कॉर्पोरेट ज्वेलर्स के साथ पार्टनरशिप में शुरू की जा रही है और धीरे-धीरे इसे ज्वेलरी के पूरे इकोसिस्टम तक बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरीके से थर्ड पर्टी द्वारा हमारे प्रोडक्ट के HUID नंबरों की डुप्लीकेशन या गलत इस्तेमाल का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि हॉलमार्क निशानों की तस्वीरें उनके प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जाएंगी, जिससे भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नकली या जाली निशानों की पहचान करके उन्हें रोका जा सकेगा। कंपनी भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के साथ मिलकर इस बदलाव को अपने सिस्टम में शामिल कर रही है। 2025 में पायलट प्रोजेक्ट बता दें कि अक्टूबर 2025 में उपभोक्ता मामलों के विभाग ने अपनी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स विंग BIS के जरिए, 25 जिलों में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसका मकसद ज्वेलरी की डिटेल्स को डिजिटली रिकॉर्ड करना था। BIS ने इंटीग्रेटेड कैमरों और वजन करने वाले सिस्टम का इस्तेमाल करके अपने पोर्टल पर हर हॉलमार्क वाली ज्वेलरी आइटम की फोटो और वजन रिकॉर्ड किया, जिससे पारदर्शिता बढ़ी। हॉलमार्किंग की शुरुआत साल 2000 में हुई थी और 2021 से इसे अलग-अलग चरणों में अनिवार्य कर दिया गया, जो अब लगभग 400 जिलों तक पहुंच चुका है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, तब से अब तक 580 मिलियन से ज़्यादा सोने की चीजों पर हॉलमार्क लगाया जा चुका है, जिसका औसत हर महीने 10 मिलियन से ज्यादा है।