पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर, एक्साइज में कटौती से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती का फायदा सीधे उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा, बल्कि इसका उपयोग सरकारी तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसानपेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं। मौजूदा हालात में पेट्रोल पर लगभग 26 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर करीब 81.90 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कुल मिलाकर, ये कंपनियां रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपए का घाटा झेल रही हैं, जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। एक्साइज ड्यूटी में कटौती का मकसदसरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की है। इस कदम से तेल कंपनियों के नुकसान में आंशिक राहत मिलेगी। मंत्रालय का कहना है कि इससे प्रति लीटर करीब 10 रुपए तक की भरपाई हो सकेगी, जिससे कंपनियां बिना किसी बाधा के ईंधन की सप्लाई जारी रख पाएंगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार का असरवैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण तेल की कीमतें चार हफ्तों में लगभग 75% बढ़कर 70 डॉलर प्रति बैरल से 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। ऐसे में कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है—दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में 30-50%, उत्तरी अमेरिका में करीब 30% और यूरोप में लगभग 20% तक। भारत ने रखा स्थिर रुख इन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों को महंगाई के झटके से बचाया जा सकता है। हालांकि, इस स्थिरता की कीमत सरकार और तेल कंपनियों को उठानी पड़ रही है, जिसे एक्साइज कटौती और अन्य उपायों से संतुलित किया जा रहा है। वित्त मंत्री का बयान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर शून्य हो गई है। निर्यात पर भी लगाया गया शुल्कसरकार ने डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर भी शुल्क लगाया है। डीजल पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क तय किया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। आम लोगों के लिए क्या मायने?आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। हालांकि, एक्साइज कटौती का सीधा फायदा उन्हें नहीं मिलेगा। यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने और ईंधन की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
1 अप्रैल से बदलेंगे नियम: इनकम टैक्स से लेकर ट्रेन टिकट रिफंड तक नए अपडेट लागू

नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल से कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। सरकार हर साल की तरह इस बार भी टैक्स सिस्टम को आसान बनाने और नियमों में पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम बदलाव कर रही है। आइए जानते हैं, कौन-कौन से नए नियम लागू होंगे और उनका आप पर क्या प्रभाव पड़ेगा। नया इनकम टैक्स एक्ट करेगा शुरुआतसबसे बड़ा बदलाव नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 है, जो 1 अप्रैल से पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। सरकार का उद्देश्य टैक्स से जुड़े नियमों और भाषा को सरल बनाना है, ताकि आम लोगों को समझने में आसानी हो। इसके तहत कई जटिल शब्दों को हटाया गया है और पूरी प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाने की कोशिश की गई है। ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’नए कानून के तहत अब ‘असेसमेंट ईयर’ जैसे जटिल शब्दों को हटाकर ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को समझना आसान होगा और आम करदाताओं को कम भ्रम का सामना करना पड़ेगा। 12 लाख तक की आय पर टैक्स राहतनए वित्त वर्ष में न्यू टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपए तक की आय पर टैक्स छूट का फायदा मिलेगा। सेक्शन 87A के तहत इस सीमा तक आने वाले करदाताओं की टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है। यह मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, जिससे उनकी बचत बढ़ेगी। फॉर्म 16-16A की जगह नए फॉर्म1 अप्रैल से फॉर्म 16 और फॉर्म 16A की जगह क्रमशः फॉर्म 130 और फॉर्म 131 लागू किए जाएंगे। इसका उद्देश्य टैक्स डॉक्यूमेंटेशन को और व्यवस्थित करना और रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है। साथ ही, इनके जारी करने की समयसीमा में भी बदलाव संभव है। पैन कार्ड के लिए नए नियमअब पैन कार्ड बनवाने के लिए केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा। इनकम टैक्स विभाग जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में कक्षा 10 का सर्टिफिकेट, पासपोर्ट जैसे अन्य दस्तावेज भी अनिवार्य करेगा। इससे पहचान प्रक्रिया और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी। रेलवे टिकट रिफंड के नियम बदले1 अप्रैल से भारतीय रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के नियमों में भी बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार: ट्रेन चलने से 8 से 24 घंटे पहले टिकट रद्द करने पर 50% रिफंड मिलेगा।24 से 72 घंटे पहले रद्द करने पर 25% रिफंड मिलेगा।72 घंटे से पहले रद्द करने पर अधिकतम कैंसिलेशन शुल्क लागू होगा और रिफंड रेलवे के नियमों पर निर्भर करेगा।इन बदलावों का उद्देश्य टिकट कैंसिलेशन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। आम लोगों के लिए क्या मायने?इन सभी बदलावों का असर सीधे आम लोगों की वित्तीय योजना पर पड़ेगा। जहां एक ओर टैक्स में राहत से बचत बढ़ेगी, वहीं नए नियमों को समझना और समय पर उनका पालन करना जरूरी होगा। रेलवे के नए नियम भी यात्रा की योजना बनाते समय ध्यान में रखने होंगे।
जापान का भारत को बड़ा तोहफा: 16,420 करोड़ का ODA लोन, मेट्रो-हेल्थ और कृषि को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली। भारत के विकास को गति देने के लिए जापान ने एक बड़ा कदम उठाया है। जापान सरकार ने भारत को 275.858 बिलियन येन (करीब 16,420 करोड़ रुपए) का आधिकारिक विकास सहायता (ODA) लोन देने का ऐलान किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह फंड देश के शहरी परिवहन, स्वास्थ्य और कृषि जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इस फैसले से भारत-जापान के बीच दशकों पुराने आर्थिक रिश्ते और मजबूत होने की उम्मीद है। मेट्रो प्रोजेक्ट्स को मिलेगा बड़ा सहाराइस लोन का सबसे बड़ा हिस्सा शहरी परिवहन, खासकर मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार पर खर्च किया जाएगा। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मेट्रो रेल फेज-3 परियोजना के लिए 102.480 बिलियन येन दिए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और लोगों को बेहतर व तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी। इसी तरह, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मेट्रो लाइन-11 परियोजना के लिए 92.400 बिलियन येन की सहायता दी जाएगी। इस परियोजना से मुंबई में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने, यात्रा को आसान बनाने और प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी। यह पहल शहरी जीवन को अधिक सुगम और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में होगा सुधारजापान की इस आर्थिक सहायता का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास पर भी खर्च किया जाएगा। महाराष्ट्र में आधुनिक अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग संस्थानों के निर्माण के लिए 62.294 बिलियन येन का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य आम लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस निवेश से स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच भी बढ़ेगी। कृषि क्षेत्र को भी मिलेगा बढ़ावाकृषि क्षेत्र में सुधार के लिए भी इस लोन का उपयोग किया जाएगा। पंजाब में टिकाऊ बागवानी (हॉर्टिकल्चर) को बढ़ावा देने के लिए 18.684 बिलियन येन की सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर ज्यादा लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़ने का मौका मिलेगा। साथ ही, कृषि से जुड़ी सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। 1958 से मजबूत हो रहे रिश्तेभारत और जापान के बीच विकास सहयोग का रिश्ता नया नहीं है। यह साझेदारी 1958 से लगातार मजबूत होती आ रही है। जापान लंबे समय से भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं में निवेश करता रहा है। मौजूदा फंडिंग पैकेज इस रिश्ते को और गहराई देगा और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। विकास को मिलेगी नई रफ्तारविशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में व्यापक सुधार लाने में सहायक होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट्स से शहरी परिवहन बेहतर होगा, स्वास्थ्य निवेश से चिकित्सा सुविधाएं मजबूत होंगी और कृषि क्षेत्र में बदलाव से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है। कुल मिलाकर, यह लोन भारत के समग्र विकास को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
जेफरीज का बड़ा फैसला: HDFC Bank को पोर्टफोलियो से हटाया, शेयर 3% तक लुढ़के

नई दिल्ली। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के बड़े जज ने भारतीय फाइनेंसियल सेक्टर में हलचल मचा दी है। कंपनी ने देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक को अपना मुख्य पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है, जिसके बाद शुक्रवार के कारोबार में बैंक के स्टॉक पर दबाव साफ नजर आया। सूची पर बैंक का शेयर करीब 3 प्रतिशत तक जनसंख्या 758 रुपये के आसपास पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पहले से ही बैंक का स्टॉक पिछले एक महीने में 14.3 प्रतिशत और छह महीने में करीब 20 प्रतिशत तक टूट गया है, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़ गई है। ‘ग्रिड एंड फियर’ की रिपोर्ट में बड़ा बदलाव, एचएसबीसी को मिली जगहजेफरीज़ के रणनीतिकार क्रिस वुड ने अपनी नामांकन रिपोर्ट “ग्रिड एंड फियर” में इस बदलाव का ज़िक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया (जापान को खत्म), ग्लोबल और इंटरनेशनल लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो को हटा दिया गया है। हालाँकि, इस निर्णय के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन बाजार में इसे शामिल करने की घटना देखी जा रही है। खास बात यह है कि बैंक की जगह एचएसबीसी को 4 प्रतिशत वेटेज के साथ पोर्टफोलियो में शामिल किया गया है। इस बदलाव के चलते भारत का कुल वेटेज भी थोड़ा कम हो गया है, जो विदेशी निवेशकों के नजरिए में बदलाव का संकेत देता है। एशिया-पैसिफिक पोर्टफोलियो में भी स्टॉक, भारत का वेटेज कम हो गयाजेफरीज ने सिर्फ ग्लोबल पोर्टफोलियो में ही नहीं, बल्कि एशिया-पैसिफिक (जापान को छोड़कर) पोर्टफोलियो में भी बदलाव किए हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया का वेस्टेज़ 2-2 प्रतिशत नीचे आया है, जबकि ताइवान का वेस्टेज़ 4 प्रतिशत नीचे आया है। इस पोर्टफोलियो में भारत की 13 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो अभी भी MSCI से थोड़ी अधिक बनी हुई है। इसके बावजूद वेस्टेज में यह टिप्पणी की गई है कि विदेशी ब्रोकरेज हाउस को भारत ले जाने से रोका गया है। शव के अवशेषों से लेकर गहनता तक की जांच, जांच की भी चर्चायह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में डिजिटल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरधारक अतनु चक्रवर्ती ने ‘मूल्यों और संपत्तियों’ से जुड़े शेयरों की शपथ ली थी। इसके बाद बैंक ने केकी मिस्त्री को पोर्टफोलियो में नियुक्त कर दिया। बताया जा रहा है कि बैंक ने इस मामले की जांच के लिए लॉ फर्मों को भी नियुक्त किया है। वहीं, अन्यत्र में यह भी संकेत मिले हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस मामले की समीक्षा कर सकता है। इन घटनाओं में बैंक की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे गए हैं, जिससे किसी भी व्यक्ति का भरोसेमंद प्रभाव हो सकता है। युवाओं की धारणा पर असर, आगे भी रह सकता है दबावविशेषज्ञ विशेषज्ञ का मानना है कि भले ही अभी तक किसी भी तरह की गड़बड़ी साबित नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाओं की धारणा प्रभावित होती है। इससे शेयर पर शॉर्ट टर्म में प्रेशर बनाया जा सकता है। स्थिर स्थिति में बैंक का 52 ग्रेड का निचला स्तर 741.05 रुपये और उच्च स्तर 1,020.50 रुपये है, जबकि बैंक की बाजार पूंजी करीब 5.82 करोड़ लाख रुपये है। ऐसे में किसी भी निवेश के लिए यह समय अत्यावश्यक रहना होगा और किसी भी निवेश निर्णय से पहले स्थिति को भरना जरूरी होगा।
शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, ग्लोबल संकेतों के चलते गिरावट में ओपनिंग

नई दिल्ली। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की सतर्कता साफ नजर आई, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए। सुबह करीब 9:18 बजे बीएसई सेंसेक्स 808 अंकों यानी 1.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,435 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, वहीं एनएसई निफ्टी भी 274 अंक यानी 1.18 प्रतिशत टूटकर 23,033 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे लगभग सभी सेक्टर प्रभावित हुए। खासकर पीएसयू बैंक और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई, जो बाजार की गिरावट के प्रमुख कारण बने। सेक्टरों में मिला-जुला रुख, आईटी ने दिखाई मजबूतीशुरुआती सत्र में जहां एक ओर निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी ऑटो इंडेक्स टॉप लूजर्स के रूप में उभरे, वहीं कुछ सेक्टरों ने मजबूती भी दिखाई। निफ्टी आईटी एकमात्र ऐसा प्रमुख सेक्टर रहा जो हरे निशान में कारोबार करता दिखा। इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस, रियल्टी, इंडिया डिफेंस, प्राइवेट बैंक, कंजप्शन, मेटल और इंफ्रा में सीमित खरीदारी देखने को मिली। हालांकि यह तेजी बाजार की कुल गिरावट को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 561 अंक यानी 1.02 प्रतिशत गिरकर 54,769 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 130 अंक यानी 0.82 प्रतिशत टूटकर 15,766 पर आ गया। दिग्गज शेयरों का प्रदर्शन: आईटी चमका, बैंकिंग और ऑटो दबाव मेंसेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में आईटी कंपनियों ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की। एचसीएल टेक, टीसीएस, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा सन फार्मा और ट्रेंट भी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। दूसरी ओर बैंकिंग, ऑटो और इंफ्रा से जुड़े शेयरों में गिरावट हावी रही। बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, इंडिगो, एलएंडटी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, एक्सिस बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, मारुति सुजुकी, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक और पावर ग्रिड जैसे बड़े शेयर नुकसान में रहे, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। वैश्विक संकेतों का असर, अमेरिका-ईरान तनाव बना वजहएशियाई बाजारों का रुख मिला-जुला रहा। टोक्यो, सोल और जकार्ता में जहां तेजी देखी गई, वहीं शंघाई और हांगकांग के बाजार गिरावट के साथ खुले। अमेरिकी बाजार गुरुवार को पहले ही गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में आई कमजोरी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। शांति वार्ता की समय सीमा नजदीक आने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। हालांकि बाद में इस समय सीमा को आगे बढ़ा दिया गया, जिससे कुछ राहत की उम्मीद जरूर बनी, लेकिन शुरुआती कारोबार में इसका सकारात्मक असर नहीं दिखा। निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी, उतार-चढ़ाव के बीच सीमित मौकेविशेषज्ञों का मानना है कि खबरों के आधार पर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में सीमित अवसर ही दिखाई दे रहे हैं, इसलिए जोखिम प्रबंधन बेहद जरूरी है।
केंद्र का बड़ा फैसला: पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाई

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह खत्म कर शून्य कर दिया गया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब अमेरिका और इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य इस वैश्विक अस्थिरता का असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ने से रोकना है। निर्यात पर टैक्स, घरेलू बाजार को प्राथमिकताडीजल और ATF पर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कदम भी उठाए हैं। डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का टैक्स लगाया गया है। इसके साथ ही, 2022 की एक पुरानी अधिसूचना को रद्द करते हुए आयातित ATF पर एक्साइज ड्यूटी में भी राहत दी गई है। इससे एविएशन सेक्टर को भी कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। OMC पर बढ़ा दबाव, भारी नुकसान का अनुमानकंपनियों को प्रति लीटर 48.8 रुपये तक का नुकसान रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को वर्तमान में ईंधन की बिक्री पर लगभग 48.8 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है। इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी है। उम्मीद जताई जा रही है कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद कंपनियां इस नुकसान को आंशिक रूप से समायोजित करेंगी और उपभोक्ताओं को राहत देने में मदद करेंगी। ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर के पार, 40% की बढ़ोतरीमध्य पूर्व तनाव का सीधा असर, वैश्विक बाजार में उथल-पुथल पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बीते एक महीने में ब्रेंट क्रूड करीब 40% बढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसका असर पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतों पर पड़ा है, लेकिन भारत में सरकार के हस्तक्षेप के चलते कीमतों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता, घबराने की जरूरत नहीं74 दिनों का भंडार, सरकार ने अफवाहों से बचने की दी सलाह पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। भारत के पास कुल 74 दिनों का भंडार है, जिसमें से करीब 60 दिनों का वास्तविक स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के दुष्प्रचार या अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि सभी रिटेल पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है।
ईंधन कीमतों पर नियंत्रण: पीएम मोदी की नीति से उपभोक्ताओं को राहत-हरदीप पुरी

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखना केंद्र सरकार का बड़ा फैसला माना जा रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच देश के नागरिकों को राहत देने के लिए ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके चलते दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। दुनिया में महंगाई, भारत में राहतएशिया से लेकर यूरोप तक कीमतों में उछाल, भारत में स्थिरता बरकरार पुरी के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ईंधन की कीमतें 30% से 50% तक बढ़ी हैं, जबकि उत्तरी अमेरिका में करीब 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।से हालात में भारत सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो वैश्विक ट्रेंड के अनुसार कीमतें बढ़ाई जाएं या फिर खुद वित्तीय बोझ उठाकर आम जनता को राहत दी जाए। सरकार ने दूसरा रास्ता चुना और नागरिकों को महंगाई के सीधे असर से बचाने का फैसला किया। एक्साइज ड्यूटी में कटौती से दी राहतपेट्रोल पर 3 रुपये, डीजल पर शून्य हुआ टैक्स सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह समाप्त कर शून्य कर दिया गया है। पुरी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है—पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार ने कर राजस्व में कटौती कर आम लोगों को राहत देने का फैसला लिया है। निर्यात शुल्क और रणनीतिक कदमघरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए अतिरिक्त कदम सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्यात पर भी शुल्क लगाया है। अब विदेशी देशों को पेट्रोल-डीजल निर्यात करने वाली रिफाइनरियों को अतिरिक्त कर देना होगा, जिससे देश के भीतर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का असर, उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत

नई दिल्ली।देश में बढ़ती महंगाई और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को कीमतों में संभावित वृद्धि से बचाना है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ऐसे में सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की है। पेट्रोल 13 से घटकर 3 रुपये, डीजल पर एक्साइज हुआ शून्यसरकार ने सीधे राहत दी, कंपनियों से समायोजन की उम्मीद इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जो पहले 13 रुपये थी। वहीं, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त करते हुए शून्य कर दिया गया है, जो पहले 10 रुपये प्रति लीटर थी। वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार हमेशा यह सुनिश्चित करती है कि आम नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का कम से कम असर पड़े। निर्यात शुल्क बढ़ाकर घरेलू आपूर्ति पर फोकसडीजल और ATF पर लगाया गया नया शुल्क, देश में उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश सरकार ने सिर्फ एक्साइज ड्यूटी में कटौती ही नहीं की, बल्कि घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए रणनीतिक कदम भी उठाए हैं। डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है। इस कदम का मकसद यह है कि कंपनियां ज्यादा निर्यात करने के बजाय घरेलू बाजार की जरूरतों को प्राथमिकता दें, जिससे आम जनता को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े। कच्चे तेल की कीमतों में 40% उछाल, OMC पर बढ़ा दबावब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल, कंपनियों को हो रहा नुकसान पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। बीते एक महीने में ब्रेंट क्रूड करीब 40% तक बढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। इसका सीधा असर देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है, जिन्हें ईंधन की खुदरा बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि ये कंपनियां इस टैक्स कटौती को अपने स्तर पर समायोजित कर उपभोक्ताओं को राहत देने में मदद करेंगी। सरकार के फैसले को मिला समर्थनपीयूष गोयल बोले- 140 करोड़ भारतीयों को मिलेगा फायदा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस फैसले को सराहनीय बताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम वैश्विक अस्थिरता के बीच 140 करोड़ भारतीयों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा और देश की विकास गति को बनाए रखने में मदद करेगा।
FY27 में ऑटो इंडस्ट्री की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत, ग्रोथ में आ सकती है नरमी

नई दिल्ली। भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन आने वाले वित्त वर्ष 2027 (FY27) में इस रफ्तार में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। रेटिंग एजेंसी ICRA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जहां FY26 में जीएसटी कटौती, बेहतर आर्थिक गतिविधियों और मजबूत मांग ने इंडस्ट्री को गति दी, वहीं FY27 में हाई बेस और बढ़ती लागत के कारण ग्रोथ थोड़ी धीमी पड़ सकती है। रिपोर्ट बताती है कि जीएसटी दरों में कमी से खासतौर पर दोपहिया और वाणिज्यिक वाहन (CV) सेगमेंट को बड़ा फायदा हुआ। इससे ग्राहकों की खरीद क्षमता (affordability) बढ़ी और कंपनियों को भी मांग में तेजी देखने को मिली। खासकर कमर्शियल व्हीकल्स के बेड़े बनाना पहले के मुकाबले ज्यादा किफायती हो गया, जिससे ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निवेश बढ़ा। कमर्शियल व्हीकल्स में जबरदस्त उछाल, LCV सेगमेंट को मिला फायदा फरवरी 2026 में 23.8% की वृद्धि, इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स ने बढ़ाई मांग रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 में वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 23.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पूरे वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में यह वृद्धि 12.5% रही। खुदरा बिक्री में भी 28.9% की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली, जिसमें मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों (M&HCV) की अहम भूमिका रही। हल्के वाणिज्यिक वाहन (LCV) सेगमेंट को भी काफी फायदा मिला है। अंतिम मील डिलीवरी (last-mile delivery) की मांग में सुधार और जीएसटी के चलते लागत कम होने से इस सेगमेंट में तेजी आई है। FY26 में LCV सेगमेंट में 7-9% की वृद्धि का अनुमान है, लेकिन FY27 में यह घटकर 4-6% रह सकती है। दोपहिया सेगमेंट में आई मजबूती, ग्रामीण मांग बनी सहारा बिक्री कई साल के उच्च स्तर पर, लेकिन FY27 में धीमी हो सकती है ग्रोथ दोपहिया वाहन सेगमेंट में भी व्यापक सुधार देखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ने, आसान फाइनेंसिंग और जीएसटी कटौती से कीमतों में कमी के कारण FY26 में बिक्री कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में घरेलू थोक बिक्री में लगभग 9% की वृद्धि का अनुमान है, लेकिन FY27 में यह घटकर 3-5% रह सकती है। हालांकि, रिप्लेसमेंट डिमांड (पुराने वाहनों को बदलने की जरूरत) और ग्रामीण आय में सुधार भविष्य में मांग को सपोर्ट देते रहेंगे। आगे की चुनौतियां: महंगा लोन और पुराने वाहनों की बढ़ती मांग फाइनेंसिंग लागत और सेकंड-हैंड मार्केट बन सकते हैं बाधा हालांकि इंडस्ट्री की बुनियाद मजबूत बनी हुई है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च फाइनेंसिंग लागत (महंगे लोन) और खासकर LCV सेगमेंट में पुराने वाहनों की बढ़ती मांग नई बिक्री पर असर डाल सकती है। इसके अलावा, हाई बेस इफेक्ट (पिछले साल की ज्यादा ग्रोथ) के कारण भी FY27 में वृद्धि दर कम दिखाई दे सकती है।
भारत की क्रिटिकल मिनरल्स खोज, स्टार्टअप माइनिंग को बढ़ावा, आयात निर्भरता कम करने पर जोर: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली। केंद्रीय सरकार अब क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की खोज को तेजी से बढ़ाने और माइनिंग सेक्टर में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को दी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि देश में मजबूत घरेलू सप्लाई चेन तैयार करने में भी मदद करेगा। एनएमईटी (राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण और विकास ट्रस्ट) की बैठक में बोलते हुए मंत्री ने लिथियम जैसे खनिजों पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये खनिज नई तकनीकों और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम हैं। मंत्री ने बताया कि भारत अब स्टार्टअप-आधारित माइनिंग इकोसिस्टम तैयार करने और घरेलू वैल्यू चेन मजबूत करने पर काम कर रहा है। राजस्थान के सिवाना क्षेत्र और जम्मू-कश्मीर के सलाल-हैमना ब्लॉक में चल रहे प्रोजेक्ट इसका उदाहरण हैं, जिन्हें और क्षेत्रों में विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को माइनिंग सेक्टर में आने के लिए अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है। बायोटेक स्टार्टअप्स की सफलता को उदाहरण बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि इसी तरह संस्थागत समर्थन और प्रोत्साहन से माइनिंग सेक्टर में भी नई तकनीकों और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। सरकार निजी एक्सप्लोरेशन एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने, प्रोजेक्ट्स में देरी कम करने और मंजूरी प्रक्रिया सरल बनाने के उपाय कर रही है। खासकर वन (फॉरेस्ट) क्लियरेंस जैसी बाधाओं को दूर करना इस दिशा में प्राथमिकता है। मंत्री ने बताया कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल से काम की गति बढ़ाई जा सकती है। तेज मंजूरी, समय पर प्री-एक्सप्लोरेशन क्लीयरेंस और बेहतर खरीद प्रणाली से खनिज खोज की प्रक्रिया और तेजी से आगे बढ़ेगी। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने के लिए पूरी घरेलू सप्लाई चेन विकसित करना जरूरी है, जिसमें प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन भी शामिल हैं। उनका मानना है कि इस पहल से भारत खुद अपनी खनिज जरूरतों में आत्मनिर्भर बन सकता है और साथ ही वैश्विक मांग के अनुरूप रणनीतिक रूप से अपनी खोज गतिविधियों को ढाल सकता है।