FY27 में ऑटो इंडस्ट्री की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत, ग्रोथ में आ सकती है नरमी

नई दिल्ली। भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन आने वाले वित्त वर्ष 2027 (FY27) में इस रफ्तार में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। रेटिंग एजेंसी ICRA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जहां FY26 में जीएसटी कटौती, बेहतर आर्थिक गतिविधियों और मजबूत मांग ने इंडस्ट्री को गति दी, वहीं FY27 में हाई बेस और बढ़ती लागत के कारण ग्रोथ थोड़ी धीमी पड़ सकती है। रिपोर्ट बताती है कि जीएसटी दरों में कमी से खासतौर पर दोपहिया और वाणिज्यिक वाहन (CV) सेगमेंट को बड़ा फायदा हुआ। इससे ग्राहकों की खरीद क्षमता (affordability) बढ़ी और कंपनियों को भी मांग में तेजी देखने को मिली। खासकर कमर्शियल व्हीकल्स के बेड़े बनाना पहले के मुकाबले ज्यादा किफायती हो गया, जिससे ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निवेश बढ़ा। कमर्शियल व्हीकल्स में जबरदस्त उछाल, LCV सेगमेंट को मिला फायदा फरवरी 2026 में 23.8% की वृद्धि, इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स ने बढ़ाई मांग रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 में वाणिज्यिक वाहनों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 23.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पूरे वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में यह वृद्धि 12.5% रही। खुदरा बिक्री में भी 28.9% की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली, जिसमें मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों (M&HCV) की अहम भूमिका रही। हल्के वाणिज्यिक वाहन (LCV) सेगमेंट को भी काफी फायदा मिला है। अंतिम मील डिलीवरी (last-mile delivery) की मांग में सुधार और जीएसटी के चलते लागत कम होने से इस सेगमेंट में तेजी आई है। FY26 में LCV सेगमेंट में 7-9% की वृद्धि का अनुमान है, लेकिन FY27 में यह घटकर 4-6% रह सकती है। दोपहिया सेगमेंट में आई मजबूती, ग्रामीण मांग बनी सहारा बिक्री कई साल के उच्च स्तर पर, लेकिन FY27 में धीमी हो सकती है ग्रोथ दोपहिया वाहन सेगमेंट में भी व्यापक सुधार देखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ने, आसान फाइनेंसिंग और जीएसटी कटौती से कीमतों में कमी के कारण FY26 में बिक्री कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में घरेलू थोक बिक्री में लगभग 9% की वृद्धि का अनुमान है, लेकिन FY27 में यह घटकर 3-5% रह सकती है। हालांकि, रिप्लेसमेंट डिमांड (पुराने वाहनों को बदलने की जरूरत) और ग्रामीण आय में सुधार भविष्य में मांग को सपोर्ट देते रहेंगे। आगे की चुनौतियां: महंगा लोन और पुराने वाहनों की बढ़ती मांग फाइनेंसिंग लागत और सेकंड-हैंड मार्केट बन सकते हैं बाधा हालांकि इंडस्ट्री की बुनियाद मजबूत बनी हुई है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च फाइनेंसिंग लागत (महंगे लोन) और खासकर LCV सेगमेंट में पुराने वाहनों की बढ़ती मांग नई बिक्री पर असर डाल सकती है। इसके अलावा, हाई बेस इफेक्ट (पिछले साल की ज्यादा ग्रोथ) के कारण भी FY27 में वृद्धि दर कम दिखाई दे सकती है।
भारत की क्रिटिकल मिनरल्स खोज, स्टार्टअप माइनिंग को बढ़ावा, आयात निर्भरता कम करने पर जोर: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली। केंद्रीय सरकार अब क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की खोज को तेजी से बढ़ाने और माइनिंग सेक्टर में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को दी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि देश में मजबूत घरेलू सप्लाई चेन तैयार करने में भी मदद करेगा। एनएमईटी (राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण और विकास ट्रस्ट) की बैठक में बोलते हुए मंत्री ने लिथियम जैसे खनिजों पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये खनिज नई तकनीकों और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम हैं। मंत्री ने बताया कि भारत अब स्टार्टअप-आधारित माइनिंग इकोसिस्टम तैयार करने और घरेलू वैल्यू चेन मजबूत करने पर काम कर रहा है। राजस्थान के सिवाना क्षेत्र और जम्मू-कश्मीर के सलाल-हैमना ब्लॉक में चल रहे प्रोजेक्ट इसका उदाहरण हैं, जिन्हें और क्षेत्रों में विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को माइनिंग सेक्टर में आने के लिए अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है। बायोटेक स्टार्टअप्स की सफलता को उदाहरण बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि इसी तरह संस्थागत समर्थन और प्रोत्साहन से माइनिंग सेक्टर में भी नई तकनीकों और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। सरकार निजी एक्सप्लोरेशन एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने, प्रोजेक्ट्स में देरी कम करने और मंजूरी प्रक्रिया सरल बनाने के उपाय कर रही है। खासकर वन (फॉरेस्ट) क्लियरेंस जैसी बाधाओं को दूर करना इस दिशा में प्राथमिकता है। मंत्री ने बताया कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल से काम की गति बढ़ाई जा सकती है। तेज मंजूरी, समय पर प्री-एक्सप्लोरेशन क्लीयरेंस और बेहतर खरीद प्रणाली से खनिज खोज की प्रक्रिया और तेजी से आगे बढ़ेगी। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने के लिए पूरी घरेलू सप्लाई चेन विकसित करना जरूरी है, जिसमें प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन भी शामिल हैं। उनका मानना है कि इस पहल से भारत खुद अपनी खनिज जरूरतों में आत्मनिर्भर बन सकता है और साथ ही वैश्विक मांग के अनुरूप रणनीतिक रूप से अपनी खोज गतिविधियों को ढाल सकता है।
airline news India: एयर इंडिया की दिल्ली-लंदन फ्लाइट तकनीकी खराबी के कारण वापस लौटी, सभी यात्री सुरक्षित

airline news India: नई दिल्ली। एयर इंडिया की दिल्ली-लंदन हीथ्रो जाने वाली फ्लाइट एआई111 गुरुवार दोपहर तकनीकी खराबी के शक के चलते बीच रास्ते में वापस दिल्ली लौट गई। यह उड़ान सुबह करीब 6 बजे दिल्ली से रवाना हुई थी और लगभग 7 घंटे हवा में रहने के बाद दोपहर 12:30 बजे सुरक्षित तरीके से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी। एयर इंडिया ने स्पष्ट किया कि सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और विमान को लौटाने का निर्णय केवल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया। तकनीकी खराबी का संदेह, यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिक एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि उड़ान के दौरान तकनीकी समस्या का संदेह होने पर एहतियातन विमान को वापस बुलाया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यात्रियों की सुरक्षा एयरलाइन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। विमान ने सभी मानक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए सुरक्षित लैंडिंग की। प्रवक्ता ने बताया कि विमान की विस्तृत तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है, जो कुछ समय ले सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की उड़ानों के लिए निर्णय लिया जाएगा। एयरलाइन ने जताया खेद, तुरंत किए जा रहे हैं इंतजाम एयर इंडिया ने कहा कि इस घटना से यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद है और प्रभावित यात्रियों को जल्द से जल्द लंदन पहुंचाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। तकनीकी खराबी की असली वजह जांच के बाद ही सामने आएगी। एयरलाइन ने यात्रियों को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा और तकनीकी निरीक्षण को और मजबूत किया जा रहा है। पहले भी हुई फ्लाइट की वापसी यह घटना पिछले हफ्ते हुई दिल्ली-वैंकूवर फ्लाइट (एआई185) की वापसी की याद ताजा कर रही है। उस फ्लाइट को 9 घंटे बाद वापस लौटना पड़ा, क्योंकि उस रूट पर तैनात बोइंग 777-200एलआर विमान को कनाडा के एविएशन रेगुलेटर से उड़ान भरने की अनुमति नहीं थी। एयर इंडिया के पास उस मार्ग पर केवल बोइंग 777-300ईआर विमानों के लिए अनुमति थी। एयर इंडिया का सुरक्षा फोकस हाल के दोनों घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि एयर इंडिया यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। चाहे तकनीकी खराबी हो या उड़ान अनुमति का मामला, एयरलाइन हमेशा एहतियात और सावधानी बरतती है। विशेषज्ञों का कहना है कि विमान को लौटाना कोई असामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है। एयर इंडिया की दिल्ली-लंदन फ्लाइट एआई111 तकनीकी खराबी के शक में वापस दिल्ली लौट गई। विमान लगभग 7 घंटे हवा में रहने के बाद सुरक्षित उतरा। सभी यात्री सुरक्षित हैं, एयरलाइन ने असुविधा के लिए खेद जताया। विमान की विस्तृत तकनीकी जांच जारी है, असली वजह अभी तय नहीं हुई। इससे पहले, दिल्ली-वैंकूवर फ्लाइट एआई185 भी अनुमति और तकनीकी कारणों से वापस लौट चुकी है। एयर इंडिया का सुरक्षा और सावधानी पर विशेष ध्यान, यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता। एयर इंडिया की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि सुरक्षा के लिए किसी भी जोखिम को स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे इससे उड़ान में देरी या असुविधा ही क्यों न हो। यात्रियों के लिए यह भरोसा है कि उनकी सुरक्षा एयरलाइन की प्राथमिकता है और तकनीकी समस्याओं के मामलों में तुरंत सुरक्षित निर्णय लिया जाएगा।
LPG availability India : देश में पेट्रोल, डीजल और LPG पर्याप्त मात्रा में, कोई कमी नहीं, सरकार ने बताया कितना है स्टॉक

LPG availability India : नई दिल्ली । पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में पेट्रोल डीजल और LPG की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सभी रिटेल फ्यूल आउटलेट्स पर पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है और देश के किसी हिस्से में भी इसकी कमी नहीं है। मंत्रालय ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे जानबूझकर फैलाए जा रहे गलत और भ्रामक संदेशों पर विश्वास न करें। IPL 2026: इरफान पठान ने चुनी LSG की प्लेइंग इलेवन, कहा- ‘मार्करम और मार्श की जोड़ी न छेड़ें, पंत 3 नंबर पर’ पीआईबी की गुरुवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है जो 150 से अधिक देशों को रिफाइन ईंधन उपलब्ध कराता है। चूंकि भारत शुद्ध निर्यातक है घरेलू पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता संरचनात्मक रूप से सुनिश्चित है। देश में एक लाख से अधिक रिटेल फ्यूल आउटलेट्स नियमित रूप से ईंधन की आपूर्ति कर रहे हैं। स्टॉक की स्थिति सरकार ने बताया कि भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की खरीद पहले ही सुनिश्चित कर ली है। देश में कुल आरक्षित क्षमता 74 दिनों की है और वर्तमान में वास्तविक स्टॉक लगभग 60 दिनों का कवर प्रदान करता है। इसमें कच्चा तेल पेट्रोलियम उत्पाद और रणनीतिक भंडार शामिल हैं। 2 अप्रैल को लॉन्च होगा Realme 16 5G, डुअल 50MP कैमरा और 7000mAh बैटरी के साथ LPG की उपलब्धता सरकार ने स्पष्ट किया कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय के आदेश के बाद घरेलू रिफाइनरी उत्पादन में 40% की बढ़ोतरी हुई है। अब दैनिक उत्पादन लगभग 50 टीएमटी है जबकि कुल दैनिक आवश्यकता 80 टीएमटी है यानी जरूरत का 60% से अधिक। तेल कंपनियां हर दिन 50 लाख से अधिक सिलेंडर वितरित कर रही हैं। पहले उपभोक्ताओं की घबराहट के कारण सिलेंडर की मांग 89 लाख तक बढ़ गई थी लेकिन अब यह फिर से 50 लाख सिलेंडर पर आ गई है।
PAKISTAN UNESCO HERITAGE : पाकिस्तान की कई धरोहरें यूनेस्को सूची में, लेकिन उन्हें खतरा बना रहा गंभीर मामला

PAKISTAN UNESCO HERITAGE : इस्लामाबाद: पाकिस्तान की कई ऐतिहासिक धरोहरें, जिनमें प्राचीन तक्षशिला आर्कियोलॉजिकल कॉम्प्लेक्स भी शामिल है, ‘वर्ल्ड हेरिटेज इन डेंजर’ सूची में शामिल होने के खतरे के घेरे में हैं। अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि इन स्थलों के रखरखाव और संरक्षण में कोताही बरती जा रही है, और जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय की कमी से स्थिति और गंभीर हो रही है। विवादित स्थल और संरक्षण कार्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला विशेष रूप से मोहरा मोरादू और सरकैप से जुड़ा है। इन स्थलों पर मरम्मत और पुनर्निर्माण के दौरान मूल संरचनाओं में बदलाव, दीवारों को ऊंचा करना और सीमेंट का उपयोग जैसे कदम उठाए गए, जिससे संरक्षण विशेषज्ञों ने आपत्ति जताई। यह शिकायत पेरिस में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि तक पहुंची और वहां आधिकारिक चिंता जताई गई। डीओएएम का दृष्टिकोण पाकिस्तान के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग (डीओएएम) ने इन कार्यों को गंभीर उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि सीमेंट का उपयोग ऐतिहासिक प्रामाणिकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाता है और यह यूनेस्को के संरक्षण मानकों के खिलाफ है। विभाग ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो इन स्थलों को ‘डेंजर लिस्ट’ में डाल दिया जा सकता है। 1980 में तक्षशिला आर्कियोलॉजिकल कॉम्प्लेक्स को विश्व धरोहर का दर्जा मिला था। यह 18 स्थलों का समूह है, जो नवपाषाण काल से लेकर 5वीं सदी तक के शहरी विकास और बौद्ध संस्कृति के विकास को दर्शाता है। पंजाब पुरातत्व विभाग का बयान वहीं, पाकिस्तान स्थित पंजाब पुरातत्व विभाग ने इन आरोपों को खारिज किया है। विभाग के महानिदेशक ने कहा कि यह कार्य “जरूरी संरक्षण” के तहत किया गया ताकि संरचनाएं और अधिक खराब न हों। उनका दावा है कि सभी कार्य अंतरराष्ट्रीय मानकों, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और विशेषज्ञ सलाह के अनुसार किए गए हैं, और मूल ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ पुराने “गलत” कंक्रीट कार्यों को हटाया गया है और छिपी हुई ऐतिहासिक विशेषताओं जैसे प्राचीन जलकुंड को पुनर्जीवित किया जा रहा है। साथ ही, पर्यटकों की सुविधाओं जैसे रेस्टोरेंट, धर्म कक्ष और गेस्ट हाउस का विकास बफर जोन के बाहर किया गया है। वैश्विक साख पर प्रभाव यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान कई अन्य ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में संरक्षण के तरीकों पर उठ रहे सवाल उसकी वैश्विक साख और विश्व धरोहर संरक्षण के प्रति गंभीरता को प्रभावित कर सकते हैं। पाकिस्तान की प्राचीन धरोहरों, खासकर तक्षशिला और अन्य स्थल, संरक्षण में कोताही और विवादित कार्यों के कारण यूनेस्को की डेंजर लिस्ट में शामिल होने के खतरे में हैं। जबकि डीओएएम ने चेतावनी दी है, पंजाब पुरातत्व विभाग ने संरक्षण को सही ठहराया है। इस विवाद का असर पाकिस्तान की वैश्विक साख और विश्व धरोहर परियोजनाओं पर पड़ सकता है।
सरकार का बयान: भारत के पास 60 दिन का कच्चे तेल भंडार, एलपीजी की एक महीने की पूरी व्यवस्था

नई दिल्ली: सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि भारत में पेट्रोल, डीजल और ऑटोमोबाइल की दुकानें पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रण में हैं। कोयला एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में कहीं भी पौधों की कमी नहीं है और हर नागरिक के लिए लगभग दो महीने तक का अवशेष सुरक्षित है। मिनिस्ट्री ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अफवाहों से नफरत न करें, क्योंकि उनका मकसद सिर्फ डर और भ्रम फैलाना है। कच्चे तेल का भंडार और प्रमुख तैयारीमंत्रालय के अनुसार, भारत के पास कुल 74 दिनों के चिप्स और कच्चे तेल के भंडार की क्षमता है, जिसमें लगभग 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल और भंडारगृह शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि देश अब 27वें दिन भी मध्य पूर्व तनाव के बावजूद पूरी तरह सुरक्षित है। इसके अलावा बाकी दो महीने के लिए कच्चे तेल की खरीद पहले से तय कर दी गई है, ताकि किसी भी समय वैश्विक संकट का असर न हो। क्वांटम नेटवर्क में पर्याप्त स्टॉकसरकार ने कहा कि देश के सभी पेट्रोल पंपों में पर्याप्त मात्रा में कोयला मौजूद है। ऑयल कंपनी ने क्रेडिट अवधि मिलाकर तीन दिन कर दी है, जिससे किसी भी पंप पर काम करने वाले की कमी के कारण जंगल की कमी न हो। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत अब 41 से अधिक देशों से कच्चा तेल मंगा रहा है और सभी रिफाइनरी 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं। लाभ की स्थिति और घरेलू उत्पादईसाई धर्म का इतिहास भी पूरी तरह से सुरक्षित है। घरेलू उत्पादन में प्रतिदिन 40 प्रतिशत की वृद्धि कर 50 टी का उत्पादन किया जा रहा है, जबकि कुल आवश्यकता लगभग 80 टी की है। इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टिकट पहले ही भारत के 22 तीर्थ टर्मिनलों पर पहुंच चुके हैं। सरकार ने निर्देश दिया है कि कम से कम एक महीने की कीमत पर स्टॉक पूरी तरह से सुनिश्चित है और वितरण स्थिर है। ब्लैक मार्केटिंग निषेध का उपायतेल उद्योग प्रतिदिन 50 लाख से अधिक की कमाई कर रहे हैं। साथ ही, 50 प्रतिशत तक की कमाई के साथ अर्नेस्ट गैस स्टूडियो की मार्केटिंग ब्लैक को छोड़ी जा रही है। सरकारी पाइप्ड सिलिकॉन गैस (पीएनजी) को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है। देश में वीडियो नेटवर्क तेजी से बढ़ा है, और घरेलू कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ हो गया है। सरकारी आधिकारिक संपत्ति पर भरोसा करेंमंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे जल और गैस से जुड़ी जानकारी के लिए केवल सरकारी और आधिकारिक संपत्ति पर भरोसा करें। अफवाहों और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हंसी-मजाक वाली खबरों से डरने की कोई जरूरत नहीं है। भारत आने वाले कई महीनों तक पूरी तरह से सुरक्षित है, और हर नागरिक को पेट्रोल, डीजल और सुपरमार्केट की निरंतरता सुनिश्चित है।
निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने बढ़ाया दाम, पेट्रोल 5 और डीजल 3 रुपए महंगा

नई दिल्ली। निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा किया है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल के दाम 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। इस कदम के साथ नायरा एनर्जी उन शुरुआती कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया। कीमतों में राज्यवार अंतर, पेट्रोल 5.30 रुपए तक महंगाकंपनी ने बताया कि राज्यों में वैट (वीएटी) जैसे स्थानीय टैक्स के कारण दामों में मामूली अंतर हो सकता है। कुछ राज्यों में पेट्रोल की कीमत 5.30 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ोतरी वैश्विक बाजार में तेल के महंगे होने के साथ हुई है, जिससे ईंधन की कीमतें घरेलू स्तर पर भी प्रभावित हुई हैं। मिडिल ईस्ट तनाव और तेल की बढ़ती कीमतेंतेल की कीमतों में यह उछाल मिडिल ईस्ट के तनाव के चलते हुआ। फरवरी के आखिर से अब तक कच्चे तेल की कीमतें लगभग 50 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। हाल ही में इजरायल द्वारा ईरान पर हमला और उसके जवाब में कार्रवाई के चलते तेल सप्लाई में बाधा की आशंका बढ़ गई। अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल कुछ समय के लिए 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, जो बाद में घटकर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।सार: मिडिल ईस्ट में तनाव और तेल सप्लाई पर असर की वजह से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। सरकारी कंपनियों ने अभी तक दाम स्थिर रखे इस दौरान सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अभी तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए। ये कंपनियां देश के लगभग 90 प्रतिशत फ्यूल रिटेल मार्केट को नियंत्रित करती हैं। अप्रैल 2022 से सरकारी कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।सार: सरकारी कंपनियां अभी दाम नहीं बढ़ा रही हैं और देश में ईंधन आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। भारत की ऊर्जा निर्भरता और सरकार का भरोसाभारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ी मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। इस मार्ग पर तनाव के चलते सप्लाई प्रभावित हो सकती है। सरकार ने कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सभी पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। पीएनजी कनेक्शन तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं और रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। अफवाहों से बचें, घबराहट में खरीदारी न करेंकुछ क्षेत्रों में अफवाहों के चलते लोग घबराहट में ईंधन खरीदने लगे, लेकिन सरकार ने साफ किया कि किसी तरह की कमी नहीं है। विशेषज्ञों ने भी लोगों से शांत रहने और घबराहट में खरीदारी न करने की सलाह दी।
भारत का हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट FY2025 में बढ़ा 9%, प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ से अधिक

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर लगातार मजबूत हुआ है। सरकार ने गुरुवार को बताया कि इस वित्त वर्ष में हेल्थ इंश्योरेंस का कुल प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। यह सेक्टर सालाना लगभग 9 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे लोगों में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, बेहतर हेल्थ फाइनेंसिंग सुविधाएं और बढ़ती मेडिकल खर्चों से सुरक्षा की आवश्यकता प्रमुख कारण हैं। कैशलेस क्लेम में नई समयसीमा, मरीजों को मिलेगा तेजी से इलाजबीमा क्षेत्र की सुधार प्रक्रिया को और मजबूत करने के लिए आईआरडीएआई ने कैशलेस क्लेम के लिए सख्त समय सीमा तय की है। नए नियमों के अनुसार बीमा कंपनियों को प्री-ऑथराइजेशन रिक्वेस्ट एक घंटे के भीतर मंजूरी देनी होगी, जबकि अंतिम मंजूरी तीन घंटे के भीतर पूरी करनी होगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से क्लेम में देरी कम होगी और मरीजों को समय पर इलाज मिलने में मदद मिलेगी।सार: आईआरडीएआई की नई समयसीमा से मरीजों को इलाज में तेजी और बीमा सेक्टर में भरोसा बढ़ेगा। प्रीमियम बढ़ोतरी के पीछे: उम्र, कवर और बेहतर फीचर्सहेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में बढ़ोतरी के कई कारण हैं। इनमें पॉलिसीधारकों की बढ़ती उम्र, ज्यादा कवर राशि और बेहतर पॉलिसी फीचर्स शामिल हैं। आईआरडीएआई ने 2024 के दिशा-निर्देशों में कहा है कि बीमा उत्पादों की कीमत जोखिम के आधार पर तय हो और समय-समय पर डेटा और ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर उनकी समीक्षा की जाए। क्लेम सेटलमेंट में सुधार, लेकिन कुछ खारिज भीक्लेम सेटलमेंट के मामले में सेक्टर में सुधार देखा गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में क्लेम भुगतान अनुपात 87.5 प्रतिशत रहा, जबकि 2023-24 में यह 82.46 प्रतिशत और 2022-23 में 85.66 प्रतिशत था। आईआरडीएआई के ‘बीमा भरोसा’ पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, इस वित्त वर्ष में 1,37,361 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से करीब 93 प्रतिशत का समाधान उसी वर्ष में कर दिया गया। हालांकि कुछ क्लेम अब भी खारिज होते हैं, जिनमें बीमा कवर से ज्यादा खर्च, को-पेमेंट, सब-लिमिट, डिडक्टिबल और रूम रेंट लिमिट शामिल हैं। पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने के लिए कदमबीमा रेगुलेटर ने क्लेम प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए कई उपाय किए हैं। इन कदमों का उद्देश्य पॉलिसीधारकों का भरोसा बढ़ाना और हेल्थ इंश्योरेंस सिस्टम को अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नई नीतियां न केवल क्लेम प्रक्रिया को तेज करेंगी, बल्कि बीमा उद्योग में निवेश और विस्तार के अवसर भी बढ़ाएंगी। वित्त वर्ष 2025 में भारत का हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर 9 प्रतिशत बढ़कर 1.2 लाख करोड़ प्रीमियम पार कर गया। नई कैशलेस क्लेम नीति, प्रीमियम वृद्धि के कारण और क्लेम सेटलमेंट सुधार से सेक्टर अधिक मजबूत और भरोसेमंद बन रहा है।
FY2026 में क्रेडिट ग्रोथ में उछाल: रिटेल और MSME सेक्टर बने सहारा

नई दिल्ली। भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ ने जोरदार रफ्तार पकड़ी है। यस बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल कर्ज वितरण (क्रेडिट फ्लो) में 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह उछाल मुख्य रूप से रिटेल ग्राहकों और MSME सेक्टर की मजबूत मांग की वजह से आया है, जिसने अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में कुल क्रेडिट फ्लो बढ़कर 25.1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो लगभग 26.1 लाख करोड़ रुपए के डिपॉजिट के बराबर है। रिटेल, MSME और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग इस ग्रोथ का प्रमुख आधार रही। हालांकि, डिपॉजिट ग्रोथ की गति धीमी रहने से बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी पर हल्का दबाव भी देखने को मिला है। इसी के चलते क्रेडिट-डिपॉजिट (C/D) रेशियो बढ़कर 82.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि बैंक अब ज्यादा आक्रामक तरीके से कर्ज दे रहे हैं, जबकि जमा की रफ्तार उतनी तेज नहीं है। रिटेल लोन इस ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरा है। पर्सनल लोन की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गई है। टैक्स में राहत और GST से जुड़े फायदों के चलते लोगों की आय में बढ़ोतरी हुई है, जिससे उनकी कर्ज लेने की क्षमता भी मजबूत हुई है। खास बात यह है कि इस बार वाहन लोन ने हाउसिंग लोन को पीछे छोड़ दिया है और क्रेडिट ग्रोथ का सबसे बड़ा ड्राइवर बनकर सामने आया है। दूसरी ओर, लोन लेने के ट्रेंड में भी बदलाव देखने को मिला है। अब लोग अनसिक्योर्ड (बिना गारंटी) लोन की बजाय सिक्योर्ड लोन की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम में जोखिम भी कम हो सकता है। इंडस्ट्रियल क्रेडिट में भी सुधार दर्ज किया गया है, जिसमें MSME सेक्टर की अहम भूमिका रही है। यह सेक्टर अब कुल औद्योगिक कर्ज का करीब एक-तिहाई हिस्सा बन चुका है। सरकार की क्रेडिट गारंटी स्कीम और MSME की नई परिभाषा ने इस सेगमेंट को मजबूती दी है। माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज ने 2.38 लाख करोड़ रुपए का कर्ज जोड़ा, जबकि मीडियम एंटरप्राइज ने 63,000 करोड़ रुपए का योगदान दिया। हालांकि, रिपोर्ट में भविष्य को लेकर थोड़ी चिंता भी जताई गई है। FY27 में क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसके पीछे बढ़ती तेल कीमतें, कमजोर निर्यात और खाद्य महंगाई जैसे कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। साथ ही, GST से मिलने वाले फायदों का असर कम होने से भी लोन की मांग प्रभावित हो सकती है।
केंद्र का बड़ा प्लान: रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाने की तैयारी

नई दिल्ली। भारत ने रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों से बनने वाले स्थायी चुंबकों की घरेलू उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 5,000 टन करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम इलेक्ट्रिक व्हीकल, रक्षा और हाई-टेक सेक्टर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। क्या बोले Jitendra Singh?केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत दुर्लभ खनिजों और लिथियम की खोज में तेजी ला रहा है। सरकार का फोकस न सिर्फ इन खनिजों की खोज पर है, बल्कि इनके प्रोसेसिंग और उपयोग के लिए मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना भी है। मांग तेजी से बढ़ रही, चुनौती भी बड़ीसरकार के मुताबिक, इस समय देश में दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों की जरूरत करीब 4,000 टन है, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 8,000 टन तक पहुंच सकती है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके। नए प्रोजेक्ट्स से मिलेगी रफ्तारसरकार ने इस दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं: नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) चुंबकों की प्रायोगिक परियोजना शुरूविशाखापत्तनम में समैरियम-कोबाल्ट चुंबक प्लांट चालूशुरुआती उत्पादन क्षमता 500 टन/वर्ष, जिसे बढ़ाकर 2,000 टन और फिर 5,000 टन करने की योजना ये प्रोजेक्ट भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेंगे। किन सेक्टरों के लिए जरूरी हैं ये खनिज? दुर्लभ पृथ्वी तत्व और लिथियम कई उभरती तकनीकों की रीढ़ माने जाते हैं, जैसे: इलेक्ट्रिक वाहन (EV)नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर, विंड)इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टररक्षा और एयरोस्पेसअंतरिक्ष तकनीक इनकी मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदमसरकार का लक्ष्य एक मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना है, जिससे भारत इन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर कम निर्भर रहे। इसके लिए अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं और खनन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा रहा है। क्यों है यह रणनीतिक कदम?वैश्विक स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर कुछ ही देशों का दबदबा है। ऐसे में भारत का यह कदम न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी विकास और औद्योगिक क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।