New इनकम टैक्स एक्ट.. बायबैक से लेकर HRA तक… 1st April से बदल जाएंगे ये 8 बड़े नियम

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Union Finance Ministry) ने 20 मार्च 2026 को इनकम टैक्स नियम-2026 (New Income-Tax Rules 2026) के ड्राफ्ट को ई-गजट में नोटिफाई (Notified in e-Gazette) और पब्लिश कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 से यह इनकम टैक्स एक्ट लागू हो जाएगा। नया नियम 1961 के नियमावली की जगह लेगा। आइए जानते हैं कि 1 अप्रैल से क्या कुछ बदल रहा है? 1-HRA में हो रहा है बड़ा बदलावआयकर नियम वेतनभोगी करदाताओं पर लागू होने वाले एचआरए (HRA) छूट के लिए प्रस्तावित ढांचे को बरकरार रखते हैं। नए नियमों के तहत आठ शहर – मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु – वेतन के 50 प्रतिशत की उच्च छूट सीमा के लिए पात्र होंगे। पहले इस दायरे में मात्र तीन ही शहर थे। अन्य सभी स्थान पर छूट की सीमा 40 प्रतिशत पर बनी रहेगी। बता दें, यह छूट ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत ही मिलेगी। 2- बच्चों की शिक्षा से जुड़े खर्चबच्चों की शिक्षा पर मिलने वाले प्रति माह छूट को 100 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, एक बच्चे पर हॉस्टल खर्च को भी 300 रुपये से बढ़ाकर 9000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यह छूट भी ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत मिलेगी। 3- कॉरपोरेट/कंपनी की गाड़ीऑफिस कार्य या व्यक्तिगत कार्य के लिए कंपनी की तरफ से मिली 1.6 लीटर के इंजन वाली कार पर 8000 रुपये प्रति माह टैक्स लगेगा। वहीं, 1.6 लीटर इंजन से अधिक के वाहनों पर 10,000 महीने का टैक्स लगेगा। यह नियम नए और पुराने दोनों टैक्स कानून में है। 4- मील कार्ड्सनए नियमों में मील कार्ड्स की लिमिट को भी 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है। अब 200 रुपये तक के कॉरपोरेट मील कार्ड्स कोई टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि, यह छूट ओल्ड टैक्स रिजीम में ही है। 5- कूपन और गिफ्ट कार्ड्सओल्ड टैक्स रिजीम के तहत प्रत्येक वर्ष 15000 रुपये तक के कॉरपोरेट गिफ्ट्स कार्ड्स, गिफ्ट सर्टीफिकेट और कूपंस पर छूट मिलेगी। 6- सेक्टर भत्ताकिसी भी ट्रांसपोर्ट सिस्टम में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले भत्ते की लिमिट को 10,000 रुपये या भत्ते का 70 प्रतिशत से बढ़ाकर 25000 रुपये या भत्ते का 70 प्रतिशत कर दिया गया है। 7- सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स में इजाफाफ्यूचर्स पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, ऑप्शंस ट्रांजैक्शन पर 0.1 प्रतिशत बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है। यह टैक्स हर एक खरीद और बिक्री पर लागू होगा। 8- बायबैक पर लगेगा टैक्सबायबैक के जरिए मिले हर एक राशि पर टैक्स 1 अप्रैल 2026 से लगेगा। अगले महीने की पहली तारीख से कॉरपोरेट प्रमोटर्स को ‘differential buyback tax’ के तहत 22 प्रतिशत और नॉन कॉरपोरेट प्रमोटर्स को 30 प्रतिशत टैक्स देना होगा।
गुजरात का आर्थिक लक्ष्य बड़ा, 2030 तक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना: CM भूपेंद्र पटेल

नई दिल्ली। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार को कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के राज्य वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर उद्योग है। उन्होंने उद्योग जगत को इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी के समर्थन और अनुमोदित प्रस्ताव की आवश्यकता बताई। प्रधानमंत्री की परिकल्पना और गुजरात का विकाससीएम पटेल ने कहा कि गुजरात के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास पथ की परिकल्पना कर रहे हैं। उन्होंने बताया, “इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार उद्योग उद्यमियों के साथ मिलकर सभी को सहयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।” उन्होंने गुजरात के औद्योगिक विकास के प्रारंभिक चरण का भी ज़िक्र किया। एक समय था जब विकास केवल वापी और वडोदरा तक ही सीमित था। लेकिन समग्र विकास की दृष्टि से पानी, बिजली और सौंदर्य प्रसाधनों को मजबूत किया गया और पूरे राज्य में निवेश आकर्षित किया गया। वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन और वैश्विक निवेशसीएम ने 2003 में शुरू हुए वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा था कि अन्य कलाकारों का विश्वास हासिल करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने माइक्रोन टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित बौद्ध निवेशों को गुजरात में उन्नत उद्यमों के प्रवेश का उदाहरण बताया। पटेल ने कहा, “प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर विश्वास मजबूत हुआ है, जिससे सेमीकंडक्टर और अन्य हाई-टेक उद्योग गुजरात में आ रहे हैं। कभी-कभी जो प्रभावशाली लगता था, वह अब राज्य में वास्तविकता बना रहा है।” गुजरात के आर्थिक नामांकनमुख्यमंत्री ने प्रमुख आर्थिक आँकड़ों का मूल्यांकन करते हुए बताया कि राज्य की जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या लगभग 5 प्रतिशत है, जबकि सांख्यिकी में योगदान लगभग 8 प्रतिशत है। इस सहायक को 10 प्रतिशत से अधिक करना लक्ष्य है। देश के उत्पादन उत्पादन में 17 प्रतिशत, कुल मिलाकर 33 प्रतिशत, और देश के 40 प्रतिशत माल का प्रबंधन राज्य है। उन्होंने अलग-अलग भूमिका के योगदान का भी उल्लेख किया: रसायन उद्योग में 33 प्रतिशतदवा में 19.2 प्रतिशत किसानों के बाज़ार में 80 प्रतिशत एमएसएमई और नीति-संचालन राज्यपटेल ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की संख्या 2001-02 में 1.85 लाख से बढ़कर अब 27.9 लाख हो गई है। उन्होंने गुजरात को नीति-संचालन राज्य के बारे में बताया और कहा कि उद्योग उद्यमियों के लिए हर स्तर पर पुष्टि की जा रही है। भूपेन्द्र पटेल ने कहा कि राज्य में ‘2047 तक विकसित भारत’ के लक्ष्य के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है, जिसे लागू करना शुरू कर दिया गया है।
ईंधन की कीमतें स्थिर, LPG की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार के सभी प्रयास जारी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को साफ किया कि आम आदमी के लिए इस्तेमाल होने वाले आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। सिर्फ प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं, जो कुल बिक्री का सिर्फ 3-4 परसेंट हिस्सा बनता है। सरकार की ब्रीफिंगपेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने डेली ब्रीफिंग में बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कंट्रोल फ्री (डीरेगुलेटेड) हैं और इन्हें तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा तय किया जाता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ा दिए हैं। एलपीजी सप्लाई बनी रहेगीसुश्री शर्मा ने कहा कि देश में एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी गैस खत्म होने की स्थिति नहीं है। उत्पादन बढ़ाया गया है ताकि सप्लाई बेकार बनी रहे। हालांकि, उन्होंने माना कि भारत पूरी तरह ऊर्जा आत्मनिर्भर नहीं है और अभी भी आयात पर निर्भर है। स्थिति संभालने के लिए 13,700 से ज़्यादा पन्नों के कनेक्शन दिए गए हैं, ताकि एलपीजी पर दबाव कम हो सके। पिछले एक हफ़्ते में 11,300 टन कोयले की सप्लाई एलपीजी की सप्लाई की गई है। इसके अलावा, करीब 7,500 कंज्यूमर एलपीजी से पन्नों की ओर शिफ्ट हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि घबराहट में गैस बुकिंग में कमी आई है और एक दिन में लगभग 55 लाख रीफिल बुकिंग हुई हैं। सरकार लगातार सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए नए सोर्स तलाश रही है और राज्यों से सख्त निगरानी और डिस्ट्रीब्यूशन में बाधा न आने की अपील की गई है। ईरान से तेल खरीद और समुद्री सुरक्षासुश्री शर्मा ने ईरान से तेल खरीदने के सवाल पर कहा कि इस पर इंतज़ार कुछ भी कहना मुश्किल है। वहीं, पट्टन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पिछले 24 घंटे में कोई समुद्री घटना नहीं हुई है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास मौजूद 22 भारतीय जहाज और सभी नाविक सुरक्षित हैं। अंतरराष्ट्रीय तनाव और घरेलू स्थितिपश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार ने यह संदेश दिया है कि साधारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखीं। वहीं, प्रीमियम पेट्रोल पर हुई मामूली बढ़ोतरी केवल उच्च ऑक्टेन वाले महंगाई पर असर डाल सकती है। सरकार के प्रयास यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि ऊर्जा आपूर्ति लगातार बनी रहे और घरेलू बाजार में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी न आए।
जोमैटो यूज़र्स के लिए अपडेट, प्रति ऑर्डर शुल्क हुआ बढ़कर लगभग 15 रुपए

नई दिल्ली। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने अपने प्लेटफॉर्म फीस में 19.2 प्रतिशत यानी 2.40 रुपये प्रति ऑर्डर की बढ़ोतरी कर दी है। ऐप के लेटेस्ट बिलिंग डेटा के अनुसार, अब प्लेटफॉर्म फीस 14.90 रुपये प्रति ऑर्डर होगी, जो पहले 12.50 रुपये थी। फीस बढ़ोतरी के पीछे कारणप्लेटफॉर्म फीस में यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब एलपीजी की प्लेटफॉर्म में पहुंचा हुआ है, जिससे रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी कंपनियों की लागत बढ़ेगी है। जोमैटो ने यह कदम यूनिट इकोनॉमिक्स और मार्जिन सुधार के उद्देश्य से उठाया है, ताकि बढ़ती परिचालन लागतों के बीच संचालन को स्थिर रखा जा सके। फीस बढ़ोतरी का इतिहासजोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस में आखिरी बार सितंबर 2025 में बदलाव किया था। इससे पहले, फरवरी 2025 में त्योहारी सीजन के दौरान यह फीस 6 रुपये प्रति ऑर्डर से बढ़कर 10 रुपये कर दिया गया था। अगस्त 2023 में कंपनी ने प्रति ऑर्डर 2 रुपये का प्लेटफॉर्म फीस लागू किया था, जिसे बाद में प्रमुख बाजारों में धीरे-धीरे बढ़ाया गया। प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलनाप्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी वर्तमान में कर सहित 14.99 रुपए प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म फीस ले रही है। इसका मतलब है कि जोमैटो और स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस अब लगभग बराबर हो गई है। शेयर बाजार में असरजोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल के शेयर शुक्रवार को 1.55 प्रतिशत यानी 3.55 रुपए की तेजी के साथ 232.29 रुपए पर बंद हुए। दिन के दौरान शेयर ने 236.70 रुपए का सर्वोच्च स्तर और 230.10 रुपए का न्यूनतम स्तर जारी किया। वित्तीय प्रदर्शनदिसंबर तिमाही के बढ़ोतरी में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रेशर इंडेक्स आधार पर 72.88 प्रतिशत बढ़कर 102 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल समान अवधि में 59 करोड़ रुपए था। इसी दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू करीब तीन गुना बढ़कर 16,315 करोड़ रुपए हो गया, जो कि एक साल पहले समान अवधि में 5,405 करोड़ रुपए था। ब्रांडिंग और भविष्य की योजनामार्च 2025 में जोमैटो ने अपने आपको इटरनल के नाम से रीब्रांड किया था। प्लेटफॉर्म फीस में यह बढ़ोतरी कंपनी की लॉन्ग-टर्म बढ़ोतरी और स्टेबिलिटी सुनिश्चित करने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भविष्य में भी अपनी प्राइस स्ट्रक्चर और फीस मॉडल में बदलाव कर सकते हैं।
फ्लिपकार्ट के वित्तीय नेतृत्व में हड़कंप, सीएफओ श्रीराम वेंकटरमन का इस्तीफा

नई दिल्ली दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनके मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) श्रीराम वेंकटरमैन कंपनी छोड़ देंगे। वेंकटरमैन ने कंपनी में एक दशक से अधिक समय तक सेवा दी है। हालाँकि, उन्होंने अगले कुछ महीनों तक अपनी भूमिका नहीं छोड़ी, ताकि बदलाव की प्रक्रिया क्रमिक रूप से पूरी तरह से हो सके। वित्त विभाग में अंतरिम व्यवस्थाकंपनी ने बताया कि यह कदम फाइनेंशियल ऑपरेशन की स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इस दौरान रवि अभिनव अंतरिम रूप से कंपनी के वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जब तक नए सीएफओ की नियुक्ति नहीं हो जाती। आई मंडल की तैयारी के बीच बदलावयह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारत में अपनी आई.आई.वी. की तैयारी कर रही है। लीडरशिप में बदलावों की नज़रों में महत्वपूर्ण घटनाएँ होती हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसकी डिजाइन योजना तय समय पर आगे बढ़ रही है। साथ ही, बेकर ने अपनी लीडरशिप टीम को मजबूत करते हुए निशांत वर्मा को सचिवालय और मैड्रिडशिप के लिए सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। यह संकेत बताता है कि कंपनी अपने अगले पैमाने के चरणों के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स का नवीनीकरण कर रही है। वित्तीय प्रदर्शन: राजस्व में वृद्धि, घाटा बढ़ामार्च 2025 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में कंपनी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का समेकित घाटा 5,189 करोड़ रुपये तक बढ़ गया। पिछले वित्तीय वर्ष 2024 में यह घाटा 4,248.3 करोड़ रुपये था। हालाँकि, कुल राजस्व 17.3 प्रतिशत प्रतिशत 82,787.3 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 70,541.9 करोड़ रुपये था। कंपनी का कुल खर्च भी इसी तरह बढ़ा, 17.4 प्रतिशत उछाल 88,121.4 करोड़ रुपये हो गया। स्टॉक-इन-ट्रेड और फाइनेंस कॉस्ट पर खर्चसबसे बड़ा खर्च स्टॉक-इन-ट्रेड की खरीद पर हुआ, जो 87,737.8 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 74,271.2 करोड़ रुपये था। इसके अलावा, फाइनेंस कॉस्ट में 57 फीसदी की तेजी आई और यह 454 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। भविष्य की दिशाइन बदलावों और वित्तीय प्रदर्शनों के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि जल्द ही आई फिल्में और सार्वजनिक बाजार में विस्तार की तैयारी की जा रही है। कंपनी का लक्ष्य मजबूत सुदृढ़ीकरण और सुव्यवस्थित वित्तीय संरचना के साथ वृद्धि और उद्यमियों का विश्वास सुनिश्चित करना है।
प्रीमियम पेट्रोल 2 रुपए प्रति प्रीमियम पेट्रोल 2 रुपए प्रति लीटर हुआ महंगा, सामान्य ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं लीटर हुआ महंगा, सामान्य ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच तेल विपणन कंपनियों ने शुक्रवार को प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2.09 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। यह नई कीमत 20 मार्च से ही लागू हो गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने बढ़ाई प्रीमियम पेट्रोल की कीमतहिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड सहित सभी सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने अपने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में लगभग 2.09 से 2.35 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बदलाव के साथ पावर पेट्रोल और एक्सपी95 जैसे किफायती ईंधन की कीमत 111.68 रुपये से बढ़कर लगभग 113.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है। सामान्य पेट्रोल और डीजल पर कोई असर नहींहालांकि, सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रह रही हैं, जिससे आम वाहन चालकों को तुरंत राहत मिली है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन फायदों पर पड़ेगा जो हाई-ऑक्टेन या प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल करते हैं। प्रीमियम पेट्रोल की लोकप्रियता और असरप्रीमियम पेट्रोल आमतौर पर बेहतर इंजन चलाने, लोडिंग ड्राइविंग और हाई माइलेज के लिए जाना जाता है। कीमत बढ़ने से कार और बाइक मालिक की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। खासकर मेट्रो शहरों और हाई-परफॉर्मेंस वालों का इस्तेमाल करने वाले लोग इसका ज्यादा असर महसूस करेंगे। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और कीमतों में उछालसरकार या तेल कंपनियों ने अभी तक इस बढ़ोतरी की आधिकारिक वजह नहीं बताई है। बेंचमार्क का रुख है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और लॉजिस्टिक्स लागत इसके मुख्य कारण हैं। 19 मार्च को वैश्विक तेल बाजार में 4 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी से दर्ज की गई थी। ब्रेंट क्रूड का भाव 111.78 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 99.57 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा सुरक्षाविशेषज्ञों के अनुसार, यह उछाल इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले और इसके जवाब में ईरान द्वारा कतर के रास लाफान औद्योगिक शहर पर हमले के बाद आया। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। भारत जैसे देश, जो अपनी करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल की ज़रूरत आयात से पूरी करते हैं, ऐसे वैश्विक घटनाओं से सीधे प्रभावित होते हैं। बची हुई कंपनियों ने आम पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन प्रीमियम पेट्रोल में यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव को दर्शाती है। भविष्य में संभावित बदलावउद्योग विश्लेषक का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में घरेलू ईंधन कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- भारत वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बना रहा महत्वपूर्ण भूमिका

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत एक अहम भूमिका निभा रहा है। देश की ऊर्जा नीति अब विद्युतीकरण, स्वच्छ ऊर्जा और घरेलू विनिर्माण पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया, विद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने एक आलेख साझा किया। व्यावसायिक उद्यम और आत्मनिर्भरता पर ज़ोरप्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन, व्यावहारिक नीतिगत निर्णय और आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा, “स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को बढ़ाना, विद्युतीकरण को बढ़ावा देना और घरेलू बाजार को मजबूत करने के प्रयास से भारत वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में मजबूत हो रहा है।” विद्युतीकरण और स्वच्छ ऊर्जा: भारत की देशभक्तिमोदी ने आगे कहा कि विद्युतीकरण, स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ भारत वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में चौथा अध्याय लिखा जा रहा है। उन्होंने इस बदलाव से देश की विकास यात्रा और आत्मनिर्भर भारत की रणनीति के बारे में बताया। लेख के माध्यम से जनता को सुझाव देनाप्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल रेखा द्वारा लिखित एक लेख भी साझा किया और पाठकों से अनुरोध किया कि वे इसे पढ़ें। इसके अलावा वैयक्तिक लोगों को भारत के ऊर्जा साझीदारों और उनके शानदार सामानों की जानकारी मिली। पीएम मोदी ने कहा, “मनोहर लाल इस बात पर विचार रख रहे हैं कि भारत किस प्रकार एक मजबूत ऊर्जा इको-सिस्टम को शक्ति प्रदान कर रहा है और भविष्य की स्थिरता के लिए एक प्रतिष्ठित पर्यावरणीय तैयारी कर रहा है।” घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को स्थानप्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा रणनीति में घरेलू उत्पादन को मजबूत करना अहम है। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा और विद्युतीकरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश के आर्थिक विकास और संकट में भी मदद मिलेगी। वैश्विक ऊर्जा पर भारत की बहुसंख्यक भूमिकाप्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत लगातार प्रयास कर रहा है कि वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में एक खिलाड़ी बने। स्वच्छ ऊर्जा और विद्युतीकरण में बढ़त के साथ, भारत वैश्विक किशोरी और प्रौद्योगिकी नवाचार में प्रमुख भूमिका निभा रही है। यह केवल देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को मजबूत करना है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में भी भारत की भागीदारी हासिल करना है।
ऑटो इंडस्ट्री पर फिलहाल कोई असर नहीं, महिंद्रा-मारुति-टाटा-किआ प्रोडक्शन जारी

नई दिल्ली खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के भविष्य में इतिहास से जुड़े महाकाव्य का सामना हो सकता है। हालांकि, महिंद्रा सुजुकी, मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और किआ इंडिया की फैक्ट्रियों पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा है। उद्योग के उद्यम का कहना है कि अगर स्थिति समान बनी रही तो 4 से 6 उद्यम के अंदर प्रभाव दिखाई देता है। गैस गैजेट पर चिंताऑटो सेक्टर में सबसे बड़ी चिंता गैस पेट्रोल को लेकर है। कई मैन्युफैक्चरिंग स्टोर्स में गैस का अहम उपयोग होता है, जैसे कि पेंट शॉप, एस्बेस्टस यूनिट और फोर्जिंग। यदि गैस की कमी बनी रहती है तो कच्चे माल की कीमत बढ़ सकती है और उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। एनडीटीवी प्रोफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, कई सप्लायर्स ने सबसे पहले मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण देरी की समस्याओं की जानकारी दी है। विशेष रूप से कतर से गैस गैसोलीन लगभग बंद हो गया है, क्योंकि वहां ईरान के मिसाइलों और तूफान तूफान से उत्पादन प्रभावित हुआ है। कंपनी के पास ऑटोमोबाइल स्टॉकनोएडा के पास 4 से 6 ग्रेटर का कंपोनेंट स्टॉक मौजूद है, जिससे उन्हें कुछ समय के लिए राहत मिल गई है। इंस्टीट्यूट इंस्टीट्यूट्स का कहना है कि अगर संकट दो महीने के लिए बचा है, तो वास्तविक समस्याएं शुरू हो सकती हैं, खासकर उन कॉलेजों में जहां ज्यादा ऊर्जा की जरूरत है। फ़्रॉस्ट चेन स्थिर लेकिन ऑपरेटिंग सिस्टमबड़ी ऑटो कंपनी ने कहा है कि उनके उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। सरकार के अनुसार, शैतान चेन अभी स्थिर है, लेकिन शीशों पर नजर रखी जा रही है। सप्लायर्स के साथ लगातार संपर्क में हैं, विशेष रूप से उन सप्लायर्स के साथ जो महत्व या गैस पर मुख्य रूप से सहमत हैं। संस्था के अधिकारियों ने कहा कि स्थिति तेजी से बदल रही है और ऋण अधिग्रहण पर तुरंत निर्णय लेने की तैयारी है। अलग-अलग इंजीनियरों की गैस कंपनीरिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग कंपनियों में गैस पर कारोबार अलग-अलग है। मारुति सुजुकी की फैक्ट्रियों में गैस पर लगभग 74 प्रतिशत है, जबकि महिंद्रा और महिंद्रा में 38 प्रतिशत, टाटा मोटर्स में 33 प्रतिशत और हुंडई मोटर में 31 प्रतिशत है। इसका मतलब यह है कि यदि गैस स्टेशन लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो अलग-अलग कंपनियों पर अलग-अलग तरह का प्रभाव पड़ता है। भविष्य की चुनौतीभारत का ऑटो सेक्टर इस संकट से सुरक्षित नजर आ रहा है। लेकिन आने वाले हफ्ते बेहद अहम होंगे, जो तय करेंगे कि केवल रामबाण की मांग सीमित है या बड़े पैमाने पर संकट में है। औद्योगिक अधिकारियों का आरोप है कि व्यापारी डूबे हुए हैं और किसी भी स्थिति में तुरंत मैडम कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
International Energy Agency की बड़ी सलाह, ऊर्जा संकट से निपटने के लिए वर्क फ्रॉम होम से आधुनिक कुकिंग तक सुझाव

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर के बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने दुनिया को संभावित ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई बड़े सुझाव दिए हैं। एजेंसी के अनुसार, मौजूदा हालात वैश्विक तेल बाजार के इतिहास के सबसे बड़े सप्लाई संकटों में से एक बन सकते हैं, जिसका असर आने वाले समय में अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी साफ दिखाई देगा। IEA के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फतिह बिरोल ने कहा कि अगर इस संकट का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो ऊर्जा की सप्लाई में भारी उछाल और सप्लाई में कमी जैसे हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में ज़िलों, कंपनियों और आम लोगों को मिलकर ईंधन की खपत कम करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। वर्क फ्रॉम होम और ट्रांसपोर्ट में कटौती पर जोरIEA ने सुझाव दिया है कि जहां संभव हो, लोगों को वर्क फ्रॉम होम अपनाना चाहिए। इससे रोजाना ऑफिस आने-जाने में खर्च होने वाले ईंधन की बचत होगी। साथ ही अनावश्यक हवाई लेवल को कम करने की भी सलाह दी गई है, क्योंकि इससे जेट ईंधन की मांग में कमी आएगी और ऊर्जा संकट का दबाव घटेगा। आधुनिक कुकिंग और एलपीजी पर निर्भरता कम करने की सलाहरिपोर्ट में कहा गया है कि एलपीजी की बढ़ती मांग को देखते हुए लोगों को इलेक्ट्रिक कुकिंग जैसे विकल्प अपनाने चाहिए। इससे गैस की खपत कम होगी और जरूरी सेवाओं के लिए एलपीजी की उपलब्धता बनी रहेगी। उद्योगों को भी एलपीजी के विकल्प जैसे नेफ्था का उपयोग करने की सलाह दी गई है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बदलाव जरूरीआईईए ने सड़क परिवहन में ईंधन बचाने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इसमें निजी गाड़ियों की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ाना, कार शेयरिंग को बढ़ावा देना और हाईवे पर गाड़ियों की स्पीड कम करना शामिल है। साथ ही माल गाड़ियों में दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। ग्रामीणों को निभानी होगी बड़ी भूमिकारिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीणों को लक्षित सहायता योजनाएं लागू करनी चाहिए, ताकि जागरूकता लोगों को ही मदद मिले और संसाधनों का सही उपयोग हो सके। साथ ही जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को ऊर्जा बचाने के लिए प्रेरित करना भी जरूरी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर असर से बढ़ती चिंताआईईए के अनुसार, वैश्विक तेल संसाधनों का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है, लेकिन मौजूदा तनाव के चलते इस अहम मार्ग पर बिगड़ी हुई प्रभावित हुई है। आमतौर पर यहां से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, लेकिन परिस्थितियां बिगड़ने से संसाधनों में बड़ी बाधाएं देखी जा रही है।
रिपोर्ट का दावा, अपस्ट्रीम ऑयल और सर्विस कंपनियों को मिल सकता है बड़ा बूस्ट

नई दिल्ली .खाड़ी देश में एनर्जी इंफ्रा कंपनी पर उठे दावे के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल और गैस की कमी में तेजी से अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों को फायदा हो सकता है, जबकि डाउनस्ट्रीम कंपनियों और अंतिम कंपनियों की मुश्किलें बढ़ने का खतरा है। फायदे में कौन, नुकसान में कौन?एपमस्ट्री निर्माता वे होते हैं जो कच्चे तेल का उत्पादन करते हैं, इसलिए कीमत बढ़ने पर उनकी आय सीधे तौर पर बहुत कम हो जाती है। वहीं, डाउनस्ट्रीम बिल्डर-जो रिफाइनिंग और वितरण का काम करता है-उच्च लागत के कारण दबाव में है। ऊर्जा क्षेत्र में तेजी का असरसिस्टेमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऊर्जा क्षेत्र में वृद्धि और विक्रय में, विशेष रूप से भारत जैसे महत्वपूर्ण देशों में, उग्रवाद का प्रभाव वैश्विक स्तर पर है। रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में उत्पादित और सैटलाइट को पूरी तरह से बहाल होने में लंबा समय लग सकता है, जिससे लंबे समय तक बाजार में मिश्रण बना रह सकता है। तेल मिश्रण और आय में बड़ी गिरावटरिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च के आरंभ में भारत के कच्चे तेल का आंकड़ा 1.9 मिलियन प्रति सप्ताह था, जबकि फरवरी में यह करीब 25 मिलियन प्रति सप्ताह था। वैश्विक स्तर पर भी वैश्विक स्तर पर गिरावट आई है – मार्च के दूसरे सप्ताह में यह आंकड़ा 184 मिलियन प्रति सप्ताह रहा, जो फरवरी में लगभग 268 मिलियन प्रतिशत था। सऊदी अरब, इराक़ और संयुक्त अरब अमीरात से कब्रिस्तान सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत, युनाइटेड स्टेट्स से तेल कंबाइंड में प्लांटेशन देखने को मिला है, जो ग्लोबल सप्लाई बैलेंस बनाने की कोशिश का संकेत है। एलएनजी की फैक्ट्री, व्यवसायियों पर दबाव रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और भारत जैसे देशों में एल इजाज़त की कमी है। इसकी कंपनी एलएलसी की प्रॉपर्टी तेजी से बढ़कर 10 डॉलर प्रति माह बीटीयू से करीब 20 डॉलर प्रति बीटीयू तक पहुंच गई है। भारत जैसा राष्ट्र पर प्रभावशालीअंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संरक्षण के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। कच्चे तेल और गैस का सीधा असर पेट्रोल-डीजल, बिजली और अन्य उद्योगों की लागत पर पड़ता है, जिससे संतुलन बढ़ सकता है। स्थिर उद्यमों में जहां अपस्ट्रीम कंपनी के लिए यह अवसर बन सकता है, वहीं डाउनस्ट्रीम सेक्टर और सामान्य उद्यमों के लिए नौकरियां बढ़ने वाली हैं।