ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी उपलब्धि, भारत ने फिर पार किया 1 अरब टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा

नई दिल्ली देश की ऊर्जा ऊर्जा को पूरा करने की दिशा में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लगातार दूसरे वर्ष भारत ने 1 अरब टन (बिलियन टन) कोयला उत्पादन का लक्ष्य पार कर लिया है, जो आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम उठाने पर विचार कर रहा है। 20 मार्च को ऐतिहासिक लक्ष्य प्राप्त हुआकोयला मंत्रालय के अनुसार, 20 मार्च को यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई। मंत्रालय ने इसे ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता और औद्योगिक विकास के लिए बेहद अहम बताया है। यह सफलता न केवल प्लाज्मा बिजली की मांग को पूरा करने में मदद करेगी, बल्कि प्लांट को प्लांटेशन की आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगी। सहयोग और रणनीति से मिली सफलतामंत्रालय का कहना है, इस उपलब्धि के पीछे बेहतर योजना, प्रभावशाली इंजीनियर और मजबूत शक्तिशाली चेन शेयरों की अहम भूमिका है। कोयला उत्पादन एवं वितरण में सभी हितधारकों के बीच इस लक्ष्य को संभव बनाया गया। सेक्टर सेक्टर में भी सुधारवाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में देश के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की संयुक्त यूनिट 2.3% बढ़ी है। कोयला उत्पादन: 2.3% वृद्धिबिजली उत्पादन: 0.5% वृद्धिये दस्तावेज हैं कि देश की दृष्टि मजबूत संरचना मजबूत हो रही है। थर्मल पावर प्लांट्स के पास ऑटोमोबाइल स्टॉकपश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बावजूद देश के ताप विद्युत संयंत्रों के पास करीब 53.41 मिलियन टन कोयला भंडार मौजूद है, जिसकी करीब 23 दिन की जरूरत है। इसके अलावा, खदानों के पास भी अतिरिक्त भंडार रखा जा रहा है, ताकि भविष्य की मांग को आसानी से पूरा किया जा सके। जमाकर्ता की भूमिका सुनिश्चित करने मेंकोल इंडिया लिमिटेड भी छोटे, मध्यम और सभी बड़े उद्योगों के लिए मजबूत कोयला खदानों के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदमइस उपलब्धि में यह शामिल है कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्थिर आपूर्ति, बेहतर प्रबंधन और व्यापक उत्पादन क्षमता देश की आर्थिक प्रगति को भी नई गति दे रही है।
ग्रीन एनर्जी और पावर ग्रिड पर बढ़ेगा सहयोग, Manohar Lal Khattar ने गिनाए अहम क्षेत्र

नई दिल्ली देश में छोटे उद्यमियों और वित्तीय संस्थानों को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार की नई योजना ‘क्रेडिट सोसाइटी फॉर माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूट्स-2.0’ के तहत करीब 36 लाख लोगों को सीधे मिलने का फायदा मिलने का अनुमान है। यह योजना क्या है? इस स्कॉबी के तहत बैंकों और वित्तीय ग्राहकों को मफाइनेंस के लिए नीचे दिए गए ऋण पर ऋण कवर दिया जाएगा। यह सोसाइटी नेशनल क्रेडिट ट्रस्ट ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड के माध्यम से प्रदान की जाएगी, जिससे लोन डिफॉल्ट की स्थिति में जोखिम कम होगा। सरकार का मकसद साफ है- बैंकों को गैर-लाभकारी बनाना ताकि वे एनबीएफसी-एमएफआई और अन्य माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को भारी कर्ज दे सकें, जिससे यह संस्थान आसानी से लोन की सुविधा तक पहुंच सके। 20,000 करोड़ रुपए तक कर्ज बढ़ाने का लक्ष्य इस योजना के तहत सरकार ने करीब 20,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इससे ग्रामीण और फ़्रैंचाइज़ी के लोगों को सस्ती और आसान ऋण मिलें मिलें, जिससे छोटे और उद्यमियों को बढ़ावा मिले। कितना उत्पादक कवर? सरकार ने अलग-अलग स्थानों के लिए डेमोक्रेट कवर तय किया है- छोटे अपलोड के लिए: 80% तकमध्यम दर्जे के लिए: 75% तकबड़े अपलोड के लिए: 70% तक इस कर्ज़ के रिलीज़ वाले प्रोजेक्ट रिस्क का काफी हद तक कम हो जाएगा और वे ज्यादातर संपत्तियों के साथ लोन दे देंगे। यह जरूरी क्यों था स्काइप? हाल के समय में मैकिनेंस सेक्टर पर वित्तीय दबाव बढ़ा है, जिसके तहत बैंकों ने कर्ज लेने की सलाह दी थी। इसका सीधा असर छोटे बैंकों पर पड़ा, जिसमें लोन मिलना मुश्किल हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय के अनुसार यह योजना नए और पुराने दोनों तरह के ऋण बैंकों को कवर करने के लिए है, जिससे सेक्टर में स्थिरता आएगी। वित्तीय समावेशन को बढ़ावा माइक्रोफाइनेंस सर्विसेज सेक्टर के लिए लोगों की जीवन रेखा है, जो पारंपरिक उपकरणों से दूर हैं। यह योजना न केवल छोटे पैमाने पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए है, बल्कि देश में वित्तीय समावेशन को भी नई नजर रखने के लिए। कब तक लागू रहेगी योजना? यह योजना 30 जून 2026 तक लागू होगी या तब तक, जब तक 20,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज़ कवर नहीं दिया जाएगा-जो भी पहले हो।
भारत-अफ्रीका साझेदारी में ऊर्जा सेक्टर पर फोकस, Manohar Lal Khattar का बयान

नई दिल्ली भारत और अफ्रीकी देशों के बीच ऊर्जा सहयोग अब नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। विद्युत मंत्री मनोहर और लाल रॉकेट ने स्पष्ट किया है कि सामुदायिक ऊर्जा, वन्यजीव आधुनिकीकरण ऊर्जा भंडार जैसे क्षेत्र दोनों के बीच केंद्रीय नामित के केंद्र में हैं। साझा लक्ष्य: समावेशी और स्थिर विकासभारत इलेक्ट्रिक समिति 2026 में प्रदर्शन करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत और अफ्रीका सामूहिक दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में दोनों का लक्ष्य समावेशी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए विकास मॉडल तैयार करना है। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं है, बल्कि आर्थिक विकास को गति देना और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना और मजबूत आधार बनाना है। ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन वलय’ से वैश्विक बातचीतमंत्री ने वन सन, वन वर्ल्ड, वन मित्र पहल को वैश्विक ऊर्जा महत्व के लिए गेमचेंजर के बारे में बताया। इस योजना के तहत सौर ऊर्जा को जोड़े से लेकर दुनिया भर में ऊर्जा की दृष्टि से पर्यटन की कोशिश की जा रही है। बुनियादी ढांचे में सहायता का उदाहरणभारत और अफ्रीका के बीच सहयोग अब जमीन पर भी दिख रहा है। असोसिएट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और अफ्रीका पावर50 के बीच साझेदारी के तहत केन्या में मिक्सिंग प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है, जिससे मजबूत पावर प्लांट तैयार किया जा रहा है। सौर ऊर्जा से सशक्त कम्पनियाँअंतर्राष्ट्रीय सूर्य एलायंस सबसे पहले भारत-अफ्रीका देशों के साथ मिलकर अपना सहयोग और मजबूती प्रदान कर रहा है। यह साझेदारी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि चमत्कारिक विकास और तकनीकी सहायता पर आधारित है। जमीन पर खोदाई पर जोरराज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने कहा कि अब इस साझेदारी को केवल विशेष दृष्टिकोण तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि केंद्रीय स्तर पर इसे जमीनी स्तर पर लागू करना जरूरी है, ताकि सभी को आयुर्विज्ञान और पर्यटन ऊर्जा मिल सके। वहीं, सोयालिनी ने स्थिरता विकास और जल प्रबंधन को प्रगति का आधार बताया। ‘मदद नहीं, निवेश करना चाहिए’ – अफ्रीका का संदेशएलेन एबोबिन ने साफा से कहा कि अफ्रीका को मदद की नहीं, बल्कि निवेश की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अब निवेश पर ध्यान केंद्रित करने, निवेश नेटवर्क के विस्तार और निजी निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
विदेश में UPI का विस्तार, India-Bhutan के बीच जल्द शुरू होगी क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर सेवा

नई दिल्ली। भारत की डिजिटल क्रांति अब सीमा से बाहर कदम रखने जा रही है। भारत और भूटान के बीच जल्द ही UPI आधारित क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर सेवा शुरू होने जा रही है। यह पहल दोनों देशों के बीच आर्थिक और डिजिटल क्रांति को नई बढ़त देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। UPI से आसान होगा विदेश में पैसा खुशनुमाइस नई व्यवस्था के तहत यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) के पोस्टल ट्रांसफर सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसके जरिए लोग डाक नेटवर्क का इस्तेमाल कर बेहद आसान, तेज और सस्ते तरीकों से एक देश से दूसरे देश में पैसे भेज और हासिल कर सकेंगे। यह सुविधा जरूरी पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी, जो छोटे ट्रांजैक्शन करते हैं या जिनके पास पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सीमित है। डाक सेवाओं के जरिए मजबूत होगा सहयोगइस पहल को सफल बनाने के लिए इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया गया है। यह समझौता केवल मनी ट्रांसफर तक सीमित नहीं है, बल्कि डाक सेवाओं के कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाएगा। इसमें लॉजिस्टिक्स, टेक्निकल डेवलपमेंट, डाक टिकट (फिलेटली), और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे दोनों देशों के बीच सेवा गुणवत्ता और दक्षता में सुधार होगा। ट्रेनिंग और टेक्नीक पर खास फोकससमझौते के तहत भूटान के डाक अधिकारियों को भारत में ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी जैसे विद्यार्थियों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।इन ट्रेनिंग प्रोग्राम में आधुनिक टेक्नीक, ऑपरेशन मैनेजमेंट और डिजिटल सेवाओं की जानकारी दी जाएगी, जिससे भूटान की डाक सेवाएं और अधिक उन्नत हो सकें। डिजिटल और लॉजिस्टिक्स सिस्टम मजबूत होगाभारत अपने डिजिटल पोस्टल सिस्टम और डिजिटल एड्रेस कोड जैसी तकनीकों का अनुभव भूटान के साथ साझा करेगा। इससे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा और सेवाओं की गति व सेवाएं जहां।साथ ही, यह सहयोग फाइनेंशियल इन्क्लूजन (वित्तीय समावेशन) को भी बढ़ावा देगा, जिससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी आसानी से बैंकिंग और पेमेंट सेवाएं मिल सकेंगी। वैश्विक स्तर पर बढ़ेगा भारत का डिजिटल प्रभावयूपीआई का यह विस्तार भारत की डिजिटल ताकत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है। इससे न सिर्फ दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ेगा, बल्कि भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल को वैश्विक पहचान भी मिलेगी।
कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट, डॉलर मजबूत होने से सोना 5.89% तक फिसला

नई दिल्ली। इस हफ्ते अनमोल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली, जहां कॉन्स्टैंट रिवाइवसूली (प्रोफिट शो) और डॉलर की कमाई के साथ सोने और चांदी की कीमत में तेज गिरावट दर्ज की गई। पूरे सप्ताह के दौरान सोने का भाव करीब 5.89 प्रतिशत तक टूट गया, जिससे उपभोक्ताओं के बीच स्थिरता बढ़ गई। हालांकि सप्ताह के अंतिम दिन के शेयरों की संख्या भी देखने को मिली, लेकिन कुल बाजार दबाव में ही कमी आ रही है। सप्ताहभर में सोना-रेवेअर में बड़ी गिरावटमल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जबकि जोशक्स गोल्ड अमेरीका की शुक्रवार को बढ़त के साथ 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गयी, जबकि जनाबेक्स गोल्ड अमेरीका में 3,990 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट के साथ 2,27,470 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गयी। वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 999 पाउंड वाला सोना 1,56,436 रुपये से लेकर 1,47,218 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। चांदी भी 2,48,711 रुपए टूटकर 2,32,364 रुपए प्रति लुढ़क गई, यानी इसमें 16,000 रुपए से ज्यादा की गिरावट आई। डॉलर की दोस्ती और रुचि का असरसिद्धांतों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की इज़ाजत और सरकारी अधिकारियों की समीक्षा नीति ने सोना-असलीयत पर दबाव डाला है। फ़ेडरल रिज़र्व, बैंक ऑफ़ जापान, बैंक ऑफ़ कनाडा और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के सख्त रुख के कारण ब्याज परिसंपत्ति जारी रह सकती है। ऐसे में मराठा में सोने से पैसा इन्वेस्टमेंट (सेफ हेवन) जैसे सोने से पैसा वाले निवेशकों की ओर से निवेश किया जाता है, जहां पर निवेशकों का दबाव बना रहता है। मध्य पूर्व तनाव का मिलाप-जुला असरमध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष का असर बाजार पर भी दिख रहा है। पहले इस तनाव के कारण सोना-रेयाला की झील में तेजी आई थी, लेकिन अब अनिश्चितता और उत्कट-अवस्था से अविश्वास का घाटा हो गया है। तेल और गैस के उत्पाद में स्टॉक का खतरा बढ़ गया है, जिससे बाजार में स्टॉक बना हुआ है। सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल क्या कहते हैं?विशेषज्ञ के मुताबिक, सोना इस समय अपने अहम सपोर्ट लेवल के करीब है। रेजिस्टेंस: 1,50,000 – 1,52,000 रुपयेसपोर्ट: 1,35,000 – 1,40,000 रुपये चांदी की बात करें तो यह 2,20,000 – 2,15,000 रुपये के डिजायन जोन के करीब पहुंच गया है। अगर बाजार में खरीदारी बहुतायत है, तो इसमें फिर से 2,40,000 रुपये तक की छूट संभव है। विदेशी मुद्रा भंडार और आरबीआई का हस्तक्षेपभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत के स्वर्ण भंडार में 664 करोड़ डॉलर की उछाल आई और यह 130.68 डॉलर तक पहुंच गई। हालाँकि कुल विदेशी मुद्रा भंडार 7.05 अरब डॉलर 709.76 अरब डॉलर रह गया। इसकी बड़ी वैल्यू आरबीआई का मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप है, जहां रुपये को सहारा देने के लिए डॉलर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। डॉलर की साख, वैश्विक हित हितैषी का दबाव और भू-राजनीतिक साख ने सोना-ए-कीमत को झटका दिया है। निकट भविष्य में बाजार में जारी की जा सकती है, इसलिए आवेदकों को रणनीति निषेध की आवश्यकता है।
1 अप्रैल से बदलेगा इनकम टैक्स सिस्टम, जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

नई दिल्ली 1 अप्रैल 2026 से देश में नया सीआरएचआर सिस्टम लागू होने जा रहा है, जो 64 साल पुराने सीआरएचआर एक्ट 1961 की जगह है। सेंट्रल कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा अधिसूचित नए जोखिम नियम 2026 का उद्देश्य प्रणाली को सबसे सरल, संयमित और विवाद-मुक्त बनाना है। हालांकि टैक्स ढांचे और नामांकन में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन पुराने में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, एकसमान प्रभाव वाली नौकरी पेशा, स्नातक और छूट पर। ‘टैक्स वर्ष’ समाप्त हो जाएगानए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘एसेसमेंट ईयर’ की जगह सिर्फ एक ही “टैक्स ईयर” होगा। इस टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया आसान होगी और लोगों को अलग-अलग टर्म सिग्नल की जरूरत नहीं होगी। साथ ही, रिटर्न्स फाइलिंग की नई समयसीमा भी तय कर दी गई हैसामान्य करदाता: 31 जुलाईव्यवसाय/प्रोफेशन: 31 अगस्तइंजेक्शन केस: 31 अक्टूबर (विशेष मामला 30 नवंबर तक)अब कर वर्ष समाप्त होने के 12 महीने बाद तक संवैधानिक रिटर्न का भी भुगतान किया जा रहा है। एचआरए और नई पीढ़ी पर ध्यानहाउस रेंटलाउंस (एचआरए) को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। अब छूट पाने के लिए मकान मालिक और किरायेदार के बिजनेस की जानकारी देना जरूरी होगा। राहत की बात यह है कि मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई के साथ अब रेजिडेंट, पुणे, पुणे और सुपरमार्केट जैसे शहरों में रहने वालों को 50% तक HRA की छूट मिलेगी। अन्य शहरों में यह सीमा 40% ही रहेगी। यदि एलएलसी व्यवसाय 1 लाख रुपये से अधिक है तो मकान मालिक के लिए पैन कार्ड अनिवार्य होगा। जॉबपेशा को राहत: परक्विजिट और अलाउंस में बदलाव होम होम (परक्विजिट) के टैक्स वैल्यू में कटौती की गई है, जिससे कर्मचारियों को दी गई कंपनी को छूट मिल जाएगी। बड़ा शहर: 10% दरमध्यम शहर: 7.5%छोटा शहर: 5% कंपनी की कार पर टैक्स भी तय किया गया है:1.6 लीटर तक: ₹5,000/माहइससे अधिक: ₹7,000/माहड्राइवर होने पर: ₹3,000 अतिरिक्त इसके अलावा-फ़ार्सी: ₹200 प्रति मील (पहले ₹50)उपहार/वाउचर: ₹15,000 तक कर-मुक्तशिक्षा अलाउंस: ₹3,000/माह (2 बच्चे तक)कॉर्पोरेट अलाउंस: ₹9,000/महबड़ी राहत के लिए नए के तहत 10 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले को विस्तृत विवरण पुस्तिका और रेटिंग से छूट दी जा सकती है (कुछ प्रतिशत के साथ)। इससे छोटे बच्चों का सामान खर्च कम होगा और बिजनेस करना आसान होगा। नवजात शिशु के लिए साफ नियमअब यह साफ हो गया है कि किसी निवेश की अवधि कितनी होगी। विशेष रूप से कन्वर्टिबल नताशा (जैसे बॉन्ड से शेयर) में पुराने स्टॉक अवधि भी जोड़ी जाएगी। इससे शॉर्ट टर्म और लार्गे टर्म कैपिटल को हासिल करना आसान होगा। नए सिस्टम को कम करना, जगह देना और टैक्सपेयर्स को राहत की दिशा में बड़ा कदम देना है। जहां कुछ नियम सख्त किए गए हैं, वहीं कई जगहों पर राहत भी दी गई है, जिससे टैक्सिंग और स्टाफ स्टाफ आसान हो जाएगा।
भारत की फार्मा इंडस्ट्री का जलवा, उत्पादन में दुनिया में तीसरे और मूल्य में 11वें स्थान पर

नई दिल्ली भारत की मेडिसिनल इंडस्ट्री आज वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और भरोसेमंद पहचान बनी है। प्रोडक्ट (वॉल्यूम) के आधार पर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादन उत्पादक देश है, जबकि मूल्य (वॉल्यूम) के खाते से 11वें स्थान पर है। देश में 3,000 से ज्यादा दवा निर्माता और 10,500 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां काम कर रही हैं, जो इस सेक्टर की विशालता और कारोबार को खत्म कर रही हैं। तेजी से मजबूत मांग, मजबूत उत्पादन क्षमता और कम्युनिस्ट पार्टी में उछाल ने भारत को “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” के रूप में स्थापित किया है। तेजी से बढ़ता घरेलू बाज़ार और भागीदारभारत का घरेलू दवा बाजार करीब 60 अरब डॉलर का है और अनुमान है कि 2030 तक यह उछाल 130 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर का कुल कारोबार 4.72 करोड़ लाख रुपये तक पहुंच गया। पिछले एक दशक में दवाओं में सामान्यतः 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। खास बात यह है कि भारत का ड्रग कंट्रोलर 2000-01 के 1.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 30.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो लगभग 16 गुना बढ़ गया है। जेनेरिक औषधियों में भारत का बाज़ारभारत दुनिया में जेनेरिक केरीज़ का सबसे बड़ा सप्लायर है और ग्लोबल स्टॉकहोम में उसका स्टॉक 20 प्रतिशत के करीब है। देश में करीब 60 अलग-अलग मेडिकल स्टोर्स में 60,000 से ज्यादा जेनेरिक दवाइयां बनाई जाती हैं। न केवल भारत में स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर हैं, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए भी भारत एक प्रतिष्ठित बाज़ार बन गया है। मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और गुणवत्ता पर भरोसाभारत में अमेरिका के सबसे अधिक ऐसे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जिनमें अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) के अनुमोदन शामिल हैं। यह भारतीय औषधियों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर वैश्विक मान्यता का बड़ा प्रमाण है। देश में करीब 500 एक्टिवेशन प्रोडक्शन रॉ माल (एपीआई) का उत्पादन होता है, जो ग्लोबल ग्लोबल मार्केट का करीब 8 प्रतिशत हिस्सा है। वैक्सीन पॉडकास्ट में भी भारत अग्रणीभारत वैक्सीन उत्पादन में दुनिया के प्रमुख देशों में भी शामिल है। डिप्थीरिया, टिटनस, काली खांसी (डीपीटी), बीसीजी और खसरा जैस वैक्सीन की भारत में बड़ी भूमिका है। यूनिसेफ भारत को लगभग 60 प्रतिशत वैक्सीन पोस्ट करता है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की खसरा वैक्सीन की मांग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा भारत पूरा करता है। यह वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में भारत की अहम भूमिका शामिल है। व्यापार घटनाक्रम और भविष्य की डेटयूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड जैसे देशों के प्रस्तावित और औद्योगिक व्यापार भारतीय दवा सेक्टर को और प्लेसमेंट देंगे। इससे बाजार नए खुलेंगे, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। सरकार की शुरूआत, विदेशी निवेश और इनोवेशन पर बड़ा फोकस इस सेक्टर को नई ऊंचाई तक ले जा रहा है। भारत की औषधि उद्योग न केवल देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन गया है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आने वाले वर्षों में इसका विस्तार और प्रभाव और भी बढ़ने की पूरी संभावना है।
सोना सस्ता, पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा: आम आदमी पर दोहरी मार, जानिए आज का पूरा अपडेट

नई दिल्ली। देश में आज आर्थिक मोर्चे पर मिली-जुली तस्वीर देखने को मिली है। जहां एक तरफ सोने की कीमतों में गिरावट आई है, वहीं दूसरी तरफ इंडस्ट्रियल डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर इजरायल-ईरान संघर्ष का असर अब भारत के बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। सोने के दाम में गिरावट21 मार्च 2026 को सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹650 सस्ता होकर ₹1,52,650 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी दिन यह ₹1,53,300 पर बंद हुआ था। हालांकि, वायदा बाजार MCX पर सोने में हल्की तेजी देखी गई और कीमत ₹1,44,825 प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट: ₹1,47,218, 23 कैरेट: ₹1,46,628, 22 कैरेट: ₹1,34,852, 18 कैरेट: ₹1,10,41, 14 कैरेट: ₹86,123, देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और पटना में 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.50 लाख के आसपास बना हुआ है। इंडस्ट्रियल डीजल के दाम में बड़ा उछालतेल कंपनियों ने इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में एक साथ ₹22 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। अब इसकी कीमत बढ़कर ₹109.59 प्रति लीटर हो गई है, जो पहले ₹87.67 थी। इस बढ़ोतरी की जानकारी Indian Oil Corporation ने दी है। नई कीमतें 20 मार्च 2026 से लागू कर दी गई हैं। डीजल के दाम बढ़ने के पीछे मुख्य कारण हैं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, खासकर इजरायल-ईरान संघर्ष कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सप्लाई चेन में बाधा इंडस्ट्रियल डीजल सीधे आम वाहनों में इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन इसका असर हर किसी की जेब पर पड़ता है, ट्रांसपोर्ट महंगा होगा फैक्ट्रियों की लागत बढ़ेगी बिजली उत्पादन महंगा होगा रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं जहां सोने की कीमतों में गिरावट से खरीदारों को थोड़ी राहत मिली है, वहीं डीजल के बढ़ते दाम आने वाले समय में महंगाई को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में आम आदमी को एक तरफ राहत और दूसरी तरफ महंगाई की मार दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
लगातार चौथे हफ्ते बाजार में गिरावट, मिडिल ईस्ट संकट से Nifty 50-BSE Sensex पर दबाव

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। लगातार चौथे हफ्ते बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। वैश्विक अनिश्चितता, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की दिशा पर दबाव बनाए रखा। निफ्टी-सेंसेक्स का प्रदर्शनसप्ताह के दौरान निफ्टी 50 में 0.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि आखिरी कारोबारी दिन यह 0.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,114.50 पर बंद हुआ। वहीं बीएसई सेंसेक्स हफ्ते के आखिर में 325.72 अंकों (0.44%) की तेजी के साथ 74,532.96 पर बंद हुआ, लेकिन पूरे हफ्ते में इसमें 0.04 प्रतिशत की हल्की गिरावट रही। तेल की कीमतों से बढ़ती चिंतावैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और भारत के व्यापार घाटे को लेकर चिंता बढ़ गई है। यही वजह है कि जींस का रुख सतर्क बना हुआ है और बाजार पर दबाव बना हुआ है। सेक्टर आधारित प्रदर्शनइस हफ्ते सेक्टरों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। आईटी और पीएसयू बैंकिंग सर्विसेज ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि मेटल सेक्टर में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।हालांकि, व्यापक बाजार में कमजोरी नजर आई-मिडकैप में मामूली बढ़त और स्मॉलकैप में गिरावट देखने को मिली। रुपये में गिरावट और FII की बिकवालीभारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.49 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके पीछे डॉलर की मजबूत मांग और विदेशी जींस (FII) की लगातार बिकवाली प्रमुख कारण रहे। पिछले 13 ट्रेडिंग सत्रों में एफआईआई करीब 81,263 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। निफ्टी की रायमोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, निकट अवधि में बाजार का रुख सतर्क ही रहेगा। निफ्टी कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया का तनाव जींस की भावना को प्रभावित कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार:निफ्टी के लिए 23,850 तत्काल रेजिस्टेंस हैइसके बाद 24,000 और 24,150 अहम स्तर होंगेनीचे की ओर 22,950 और 22,700 मजबूत सपोर्ट हैं वहीं बैंक निफ्टी के लिए 52,000–53,000 का फाइलरा सपोर्ट और 54,000–55,000 रेजिस्टेंस माना जा रहा है। पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की रिकवरी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करें। यदि निवेशकों को सतर्क रहकर सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
मिडिल ईस्ट तनाव के चलते रुपये में भारी गिरावट… पहली बार ₹93 प्रति डॉलर के पार

नई दिल्ली। भारतीय रुपया (Indian Rupee.) शुक्रवार, 20 मार्च को पहली बार 93 प्रति अमेरिकी डॉलर (93 Per US Dollar) के स्तर को पार गया। शुरुआती कारोबार (Initial business) में रुपया 3 पैसे गिरकर 92.92 पर खुला और बाद में 93.08 तक फिसल गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले 18 मार्च को रुपया 92.63 के स्तर तक गिरा था, जिसे अब पार कर लिया गया है। क्यों टूट रहा है रुपया?1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड करीब $120 प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि शुक्रवार को यह घटकर $107 के आसपास आ गया, लेकिन अभी भी ऊंचे स्तर पर है। तेल महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है। 2. डॉलर की बढ़ती मांग: ऊंचे इंपोर्ट बिल के कारण कंपनियां ज्यादा डॉलर खरीद रही हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। 3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से $8 अरब से ज्यादा निकाल लिए हैं। यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ा आउटफ्लो है। 4. मजबूत होता अमेरिकी डॉलर: वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर की ओर जा रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है और अन्य मुद्राएं कमजोर। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट: आपकी जेब पर कैसे पड़ता है असर?डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा देती है। जब रुपया कमजोर होता है, तो इसका सीधा असर महंगाई और आपके महीने के बजट पर पड़ता है। आइए समझते हैं कि रुपये में गिरावट क्यों होती है और इसका असर आप पर कैसे पड़ता है। महंगाई बढ़ती हैभारत अपनी जरूरत का 75% से 80% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो तेल आयात महंगा हो जाता है। अनुमान के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपये में 1 रुपये की गिरावट से तेल कंपनियों पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इस वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ जाते हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 10% बढ़ोतरी से महंगाई लगभग 0.8% तक बढ़ सकती है। इसका असर खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्ट खर्च पर साफ दिखता है। दवाएं और पढ़ाई महंगीकई जरूरी दवाएं भारत में विदेशों से आती हैं। रुपये के कमजोर होने से इन दवाओं की कीमत बढ़ जाती है। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई महंगी हो जाती है। विदेश यात्रा का खर्च बढ़ जाता है। होटल और खाने-पीने पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है। विकास योजनाओं पर असरसरकार तेल कंपनियों को सब्सिडी देती है ताकि जनता को राहत मिल सके, लेकिन जब डॉलर महंगा होता है, तो सरकार का खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को विकास योजनाओं (जैसे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा) पर खर्च कम करना पड़ सकता है। इसका असर आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है। सरकारी खजाने पर दबावदेश में आने और जाने वाली विदेशी मुद्रा के अंतर को चालू खाता घाटा (CAD) कहते हैं। जब आयात ज्यादा होता है, तो देश से ज्यादा डॉलर बाहर जाता है और CAD बढ़ जाता है। भारत में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा तेल और सोने के आयात पर खर्च होती है। गिरावट थामने के लिए RBI क्या कर रहा है?रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च में अब तक 15 अरब डॉलर से ज्यादा बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश की है। वित्तीय वर्ष के अंत (मार्च) में RBI का हस्तक्षेप आमतौर पर बढ़ जाता है, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है। आगे क्या?विश्लेषकों के अनुसार जब तक तेल कीमतें ऊंची रहेंगी, रुपये पर दबाव बना रहेगा, विदेशी निवेश का आउटफ्लो जारी रह सकता है। RBI का हस्तक्षेप ही फिलहाल बड़ा सपोर्ट है। शॉर्ट टर्म में रुपया कमजोर रह सकता है।