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अदालत के आदेश के बाद मिला नया घर, अरविंद केजरीवाल परिवार सहित नए बंगले में शिफ्ट

नई दिल्ली।आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपना नया आवास बदल लिया है और अब वे परिवार सहित लुटियंस दिल्ली स्थित एक सरकारी बंगले में शिफ्ट हो गए हैं। यह नया पता 95, लोधी एस्टेट, नई दिल्ली है, जो राजधानी के प्रतिष्ठित और वीआईपी इलाकों में गिना जाता है। केजरीवाल ने स्वयं इस बदलाव की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें यह आवास पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में निर्धारित नियमों और न्यायिक आदेश के तहत आवंटित किया गया है। यह बंगला उच्च श्रेणी के सरकारी आवासों में शामिल है, जिसे आमतौर पर शीर्ष राजनीतिक पदों पर आसीन नेताओं को दिया जाता है। लगभग 5000 वर्ग फीट में फैले इस आवास में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें चार बड़े कमरे, दो खुले लॉन, तीन सर्वेंट क्वॉर्टर और एक गैराज शामिल है। इसके साथ ही एक अलग ऑफिस स्पेस भी बनाया गया है, जहां से राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों को संचालित किया जा सकता है। इस तरह का आवास न केवल रहने के लिए बल्कि आधिकारिक कार्यों के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अरविंद केजरीवाल को अपना पूर्व आधिकारिक आवास खाली करना पड़ा था। उस समय यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र भी बना रहा, जब विपक्ष ने उस आवास को लेकर कई सवाल उठाए। इसके बाद कुछ समय तक वे अपनी पार्टी के एक सांसद के आवास पर रह रहे थे। हालांकि, राष्ट्रीय दलों के प्रमुखों को दिल्ली में आवास उपलब्ध कराने के नियम के तहत उन्हें यह नया बंगला प्रदान किया गया है, जिससे उनकी आवास संबंधी स्थिति स्पष्ट हो गई है। नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को राजधानी में एक निर्धारित श्रेणी का सरकारी आवास दिया जाता है, ताकि वे अपने संगठनात्मक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित कर सकें। इसी प्रावधान के अंतर्गत केजरीवाल को यह बंगला आवंटित किया गया है। खास बात यह भी रही कि इस आवंटन की प्रक्रिया में न्यायालय के निर्देशों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि उन्हें उनके पद के अनुरूप सुविधाएं मिल सकें। इस नए आवास में शिफ्ट होने के साथ ही अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर से अपनी राजनीतिक गतिविधियों को संगठित रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। लुटियंस दिल्ली का यह इलाका प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां देश के कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी निवास करते हैं। ऐसे में यह बदलाव न केवल व्यक्तिगत बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। यह घटनाक्रम राजधानी की राजनीति में एक नए अध्याय की ओर इशारा करता है, जहां आने वाले समय में केजरीवाल की सक्रियता और रणनीतियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

West Bengal election : पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाया, अमित शाह ने कांग्रेस और टीएमसी पर साधा निशाना

   West Bengal election : नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। दम दम उत्तर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने अपने संबोधन में राज्य की राजनीतिक स्थिति और आगामी मतदान को लेकर कई महत्वपूर्ण दावे किए, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गरम हो गया है। सभा के दौरान उन्होंने दावा किया कि इस बार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है और मौजूदा नेतृत्व को जनता का समर्थन कम होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव की ओर देख रही है और आगामी चुनाव परिणाम इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में उसका प्रभाव काफी कमजोर हो चुका है। उनके अनुसार, कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने में असफल रही है और इस बार भी उसके लिए स्थिति अनुकूल नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने में संघर्ष कर रही है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार को मिला बढ़ावा, एपीवाई में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज.. सभा में दिए गए भाषण के दौरान राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने विपक्षी नेताओं की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक विमर्श में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ बयान देना आवश्यक है ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान बना रहे। इसके अलावा उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि राज्य में कई मुद्दों पर जनता असंतोष व्यक्त कर रही है और यह आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे मतदान के दिन सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और अपने मताधिकार का प्रयोग करें। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान चुनावी माहौल में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास माने जाते हैं। पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र है और विभिन्न दल अपनी रणनीति के तहत मतदाताओं को आकर्षित करने में जुटे हुए हैं। BJP Mahila Morcha protest: नारी शक्ति बिल समर्थन में सड़क पर उतरी बीजेपी महिला मोर्चा, विपक्ष का फूंका पुतला चुनाव आयोग की निगरानी में राज्य में मतदान प्रक्रिया की तैयारी चल रही है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर प्रचार अभियान को अंतिम चरण में पहुंचा रहे हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक परिदृश्य लगातार बदलता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में मतदान और उसके बाद के परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सभी दल अंतिम चरण के प्रचार में पूरी ताकत लगा रहे हैं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।

पहलगाम हमले की बरसी: नरेंद्र मोदी का पाकिस्तान को कड़ा संदेश-‘भारत आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा’

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के Pahalgam में हुए आतंकी हमले की बरसी पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शहीदों को याद करते हुए आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी रूप में आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा और आतंकियों के मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। पीएम मोदी ने जताई संवेदनाप्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि पिछले साल इसी दिन हुए इस भयावह हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है और एक राष्ट्र के रूप में भारत शोक और संकल्प में एकजुट है। क्या हुआ था पहलगाम में?दरअसल, 22 अप्रैल 2025 को Pahalgam की बैसरन घाटी में आतंकियों ने घूमने आए सैलानियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba का हाथ बताया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकियों ने लोगों से नाम और धर्म पूछकर महिलाओं और बच्चों के सामने गोली चलाई थी, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। शहीदों की याद में बना स्मारकहमले में जान गंवाने वाले लोगों की याद में लिद्दर नदी के किनारे एक स्मारक बनाया गया है। काले संगमरमर से बने इस स्मारक पर सभी 26 मृतकों के नाम अंकित हैं। बरसी के मौके पर इलाके में सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर: भारत का जवाबहमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया था। इस अभियान के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के कई ठिकानों को निशाना बनाया और उन्हें तबाह किया। बताया जाता है कि इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। इसके बाद 28 जुलाई 2025 को “ऑपरेशन महादेव” के तहत हमले में शामिल आतंकियों को भी मार गिराया गया। आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट रुखप्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संदेश में दोहराया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा और किसी भी कीमत पर देश की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आतंक के खिलाफ यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक इस खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं कर दिया जाता।

बढ़ते पारे के बीच 'पाती' के जरिए सीधे जनता से जुड़े सीएम योगी; सुरक्षा के लिए जारी किए कड़े निर्देश!

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ रहा है और भीषण गर्मी का असर जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष पाती जारी कर लोगों से सावधानी बरतने और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बदलते मौसम के इस दौर में सतर्कता और तैयारी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, जिससे लू और गर्मी के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रकृति का चक्र निरंतर चलता रहता है और हर ऋतु अपने साथ अलग परिस्थितियां लेकर आती है। इस समय ग्रीष्म ऋतु अपने चरम की ओर बढ़ रही है और तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि जैसे सर्दी के मौसम में बचाव के उपाय किए जाते हैं, वैसे ही गर्मी के मौसम में भी व्यापक तैयारियां आवश्यक हैं। सरकार की ओर से आमजन की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग में भी तेजी आई है, जिसे ध्यान में रखते हुए पर्याप्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। उत्पादन इकाइयों को उनकी पूरी क्षमता से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रदेश के किसी भी हिस्से में बिजली की कमी न हो। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गर्मी के मौसम में श्रमिकों और खुले में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यस्थलों पर छाया, पेयजल और प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। लू और गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोग समय रहते आवश्यक सावधानियां अपना सकें। उन्होंने आगे बताया कि सार्वजनिक स्थानों जैसे सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, थानों और अन्य केंद्रों पर ठंडे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि आपात स्थिति में तुरंत उपचार मिल सके। मुख्यमंत्री ने पशुधन और वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। गोशालाओं और अन्य पशु आश्रयों में पानी, चारा और छाया की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पशुओं को भी इस भीषण गर्मी से सुरक्षित रखा जा सके। अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे स्वयं और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें और हल्के तथा सूती वस्त्र पहनें। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। साथ ही उन्होंने पशु पक्षियों के लिए पानी रखने की भी अपील की ताकि इस कठिन मौसम में संवेदनशीलता और मानवता का संदेश आगे बढ़ सके।

Patanjali Research : लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय सम्मान से चमका पतंजलि अनुसंधान संस्थान, वैज्ञानिक शोध ने बढ़ाया देश का मान

 Patanjali Research : नई दिल्ली:   वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए पतंजलि अनुसंधान संस्थान को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ है। संस्थान को Dr. P. D. Sethi National HPTLC Awards 2025 में प्राइवेट इंडस्ट्री कैटेगरी में प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि आंवला (Phyllanthus emblica) के बीज तेल पर किए गए गहन वैज्ञानिक शोध के लिए प्रदान की गई है, जिसमें इसके एंटी-माइक्रोबियल और बायोफिल्म-रोधी गुणों को प्रमाणित किया गया है। संस्थान ने पिछले वर्ष भी इसी श्रेणी में यह सम्मान प्राप्त किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अनुसंधान की गुणवत्ता और निरंतरता दोनों में स्थिरता बनी हुई है। इस बार का शोध विशेष रूप से आंवला बीज तेल के औषधीय गुणों पर केंद्रित रहा, जिसमें यह पाया गया कि यह प्राकृतिक तेल कई प्रकार के सूक्ष्मजीवों के खिलाफ प्रभावी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है और बायोफिल्म निर्माण को रोकने में भी सहायक है। इस शोध को वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह प्राकृतिक संसाधनों के औषधीय उपयोग की नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक सम्मान नहीं है, बल्कि संस्थान के वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत, समर्पण और शोध के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य ऐसे शोध करना है जो समाज के लिए उपयोगी, सुरक्षित और प्रभावी समाधान प्रदान कर सकें। उनके अनुसार यह सम्मान उन सभी वैज्ञानिकों के समर्पण की पहचान है जो निरंतर मानव कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने बताया कि यह पुरस्कार देश में विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध को पहचान देने वाला एक प्रतिष्ठित मंच है। लगातार दूसरी बार इस सम्मान का मिलना संस्थान की मजबूत वैज्ञानिक आधारशिला और अनुसंधान की गुणवत्ता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आंवला बीज तेल पर किए गए शोध को पहले भी विभिन्न वैज्ञानिक मंचों पर सराहा जा चुका है। संस्थान के अनुसार इन शोधों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है और इन्हें वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया है, जिससे भारतीय पारंपरिक औषधीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस उपलब्धि के साथ पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारत में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक का संगम वैश्विक स्तर पर नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

2013 पुणे कार्यक्रम में पीएम मोदी और आशा भोसले की पहली आत्मीय मुलाकात..

नई दिल्ली। मशहूर पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन के बाद उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच वर्षों पुराने संवाद और मुलाकातों से जुड़ी एक भावनात्मक कहानी फिर से चर्चा में आ गई है, जिसने उनके आपसी सम्मान, सादगी और आत्मीय संबंधों को उजागर किया है। इस पूरी कथा में कई ऐसे प्रसंग सामने आए हैं, जिनमें व्यक्तिगत अपनापन और सार्वजनिक जीवन की औपचारिकताओं से परे एक सहज मानवीय संबंध दिखाई देता है। जानकारी के अनुसार, आशा भोसले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली औपचारिक मुलाकात वर्ष 2013 में पुणे में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी, जब दीनानाथ मंगेशकर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के उद्घाटन समारोह में दोनों एक ही मंच पर मौजूद थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अत्यंत सरल और आत्मीय अंदाज में उन्हें संबोधित करते हुए पूछा था कि दीदी आप कैसी हैं, जिससे वहां मौजूद लोगों के बीच एक सहज और भावनात्मक वातावरण बन गया था। इस मुलाकात से पहले भी दोनों के बीच एक अनौपचारिक संवाद का उल्लेख मिलता है, जिसमें आशा भोसले ने स्वयं प्रधानमंत्री से संपर्क कर अपने पारिवारिक मूल और गुजरात से जुड़े भावनात्मक संबंधों का जिक्र किया था। उन्होंने उस समय गुजरात के विकास को लेकर भी सकारात्मक विचार व्यक्त किए थे, जिसे एक आत्मीय बातचीत के रूप में देखा गया था। समय के साथ दोनों के बीच यह संबंध और अधिक सम्मानपूर्ण होता गया। विभिन्न अवसरों पर हुई मुलाकातों में प्रधानमंत्री का व्यवहार हमेशा सहज और विनम्र रहा। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आशा भोसले को दीदी कहकर संबोधित किया और विदाई के समय हाथ जोड़कर नमस्कार करते हुए कहा कि फिर मिलेंगे। यह सादगीपूर्ण व्यवहार आशा भोसले के मन में गहराई तक अंकित हो गया। बताया जाता है कि एक बार प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान यह भी कहा था कि वे एक बार मिलने वाले व्यक्ति को कभी भूलते नहीं हैं। इस बात का असर आशा भोसले के परिवार पर भी पड़ा और उनके बीच एक भावनात्मक जुड़ाव और मजबूत हुआ। वर्ष 2015 में आशा भोसले के पुत्र के निधन के समय भी यह संबंध सामने आया, जब उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एक कार्यक्रम में शामिल न हो पाने के लिए क्षमा मांगी थी। इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने संवेदना व्यक्त करते हुए शोक संदेश भेजा और दुख की इस घड़ी में समर्थन और सहानुभूति जताई थी। आने वाले वर्षों में भी विभिन्न मंचों पर आशा भोसले ने प्रधानमंत्री के कार्यों और अनुशासन की प्रशंसा की और देश में हो रहे बदलावों को सकारात्मक रूप में स्वीकार किया। उनके बयानों में नेतृत्व के प्रति सम्मान और संतोष की भावना दिखाई देती रही। आशा भोसले का जीवन भारतीय संगीत जगत की एक अमूल्य धरोहर के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने अपनी आवाज से कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच यह संबंध सादगी, सम्मान और मानवीय जुड़ाव का एक प्रेरक उदाहरण माना जा रहा है।

विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पीएम मोदी ने महिला नेतृत्व को बताया देश की प्रगति का आधार

नई दिल्ली। राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है तो पूरा शासन तंत्र अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और जनहितकारी बनता है। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व केवल सामाजिक बदलाव का प्रतीक नहीं है बल्कि यह एक मजबूत और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था की नींव भी है, जिससे देश के विकास को नई दिशा मिलती है। प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में इसे सभी राजनीतिक दलों की सहमति से पारित किया गया था, जो भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी और अधिक प्रभावी और निर्णायक बने, ताकि नीति निर्माण में उनका योगदान और मजबूत हो सके। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भारत की प्रगति का सबसे बड़ा आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पदों से लेकर पंचायत स्तर तक महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और अपने दायित्वों को अत्यंत कुशलता और समर्पण के साथ निभा रही हैं। यह बदलाव न केवल शासन व्यवस्था को मजबूत कर रहा है बल्कि समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। प्रधानमंत्री ने पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। कई राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी लगभग आधी तक पहुंच चुकी है, जो भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक सशक्त बना रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न अध्ययनों में यह स्पष्ट हुआ है कि जहां निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है वहां व्यवस्था अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बनती है। जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं इसका सशक्त उदाहरण हैं, जहां महिलाओं की सक्रिय भूमिका ने ग्रामीण जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है। प्रधानमंत्री ने जनधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले करोड़ों महिलाएं बैंकिंग व्यवस्था से दूर थीं, लेकिन अब करोड़ों बैंक खाते खुलने से उनकी आर्थिक भागीदारी में बड़ा बदलाव आया है। इससे महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिली है और वे देश की विकास यात्रा का मजबूत हिस्सा बनी हैं। उन्होंने मुद्रा योजना और स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं उद्यमिता और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल रही है। प्रधानमंत्री ने मातृत्व अवकाश को बढ़ाकर 26 सप्ताह किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह निर्णय महिलाओं के कार्यस्थल पर सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्किल इंडिया मिशन और ड्रोन दीदी जैसी पहलों को महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बताते हुए कहा कि महिलाएं अब कृषि, तकनीक और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला नेतृत्व वाला विकास भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुका है, जिससे न केवल महिलाओं का जीवन बदल रहा है बल्कि पूरे समाज की दिशा और सोच भी बदल रही है।

देश में एलपीजी आपूर्ति स्थिर, डिजिटल सिस्टम से वितरण में बढ़ी पारदर्शिता..

नई दिल्ली:देश में रसोई गैस और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी हुई है और किसी भी हिस्से से गैस की कमी की कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से काम कर रही है और उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवा मिल रही है। इसके साथ ही गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक लगभग 4.05 लाख पीएनजी कनेक्शन सक्रिय किए जा चुके हैं, जबकि करीब 4.41 लाख नए उपभोक्ताओं ने पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। यह आंकड़ा देश में स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है, जहां नागरिक धीरे धीरे पाइप्ड गैस प्रणाली को अपनाने की ओर अग्रसर हैं। इससे एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से ईंधन या गैस का भंडारण न करें। लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक और सत्यापित जानकारी पर ही भरोसा करें तथा एलपीजी बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें, जिससे वितरण व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनी रहे। डिजिटल प्रणाली के विस्तार के साथ ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग का उपयोग अब लगभग 98 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि उपभोक्ता तेजी से तकनीक आधारित सेवाओं को अपना रहे हैं। इसके साथ ही डिलीवरी प्रक्रिया में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड आधारित व्यवस्था का उपयोग भी व्यापक स्तर पर किया जा रहा है, जिससे गैस की वास्तविक डिलीवरी सुनिश्चित हो सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा भू राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद घरेलू आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विशेष रूप से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और आवश्यक सेवाओं के लिए गैस आपूर्ति को बिना किसी बाधा के सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा उत्पन्न न हो। एलपीजी की जमाखोरी और अवैध भंडारण पर रोक लगाने के लिए देशभर में सघन अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान हजारों स्थानों पर निरीक्षण किए गए हैं और बड़ी संख्या में अवैध सिलेंडर जब्त किए गए हैं। कई मामलों में कानूनी कार्रवाई की गई है, जिसमें एफआईआर दर्ज होना और संबंधित व्यक्तियों की गिरफ्तारी भी शामिल है। वितरण व्यवस्था की निगरानी के तहत कई एलपीजी वितरकों पर कार्रवाई की गई है। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाया गया है, कुछ मामलों में चेतावनी दी गई है और गंभीर मामलों में लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई भी की गई है, ताकि उपभोक्ताओं को सुचारू और सुरक्षित सेवा मिलती रहे। सरकारी रिफाइनरियों की स्थिति को लेकर भी यह स्पष्ट किया गया है कि सभी प्रमुख इकाइयां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसके अलावा घरेलू मांग को पूरा करने के लिए एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है, जिससे आपूर्ति प्रणाली मजबूत बनी रहे। देश में ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था स्थिर है और सरकार का फोकस डिजिटल वितरण, पारदर्शिता और अवैध गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण के माध्यम से उपभोक्ताओं को सुरक्षित और निर्बाध सेवा देने पर केंद्रित है।

CAPF सामान्य प्रशासन अधिनियम 2026 से अर्धसैनिक बलों की एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था लागू

नई दिल्ली:केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सामान्य प्रशासन अधिनियम 2026 को लागू कर दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद यह कानून आधिकारिक रूप से प्रभाव में आ गया है, जिसके तहत देश के प्रमुख अर्धसैनिक बलों की भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा शर्तों को एकीकृत ढांचे में लाया जाएगा। इस फैसले को सुरक्षा बलों की संरचना और नेतृत्व व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है। एकीकृत प्रशासनिक ढांचे की शुरुआतनए कानून के तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल सहित सभी प्रमुख CAPF इकाइयों के लिए एक समान प्रशासनिक प्रणाली लागू की जाएगी। अब तक ये सभी बल अलग अलग अधिनियमों के तहत कार्य करते थे, जिससे सेवा शर्तों और पदोन्नति प्रक्रिया में असमानता की स्थिति बनी रहती थी। नए ढांचे का उद्देश्य इन सभी विसंगतियों को समाप्त कर एक समान व्यवस्था स्थापित करना है। प्रतिनियुक्ति प्रणाली में बड़ा बदलावनए कानून के तहत वरिष्ठ स्तर पर प्रतिनियुक्ति प्रणाली को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। निरीक्षक सामान्य स्तर पर आधे पदों पर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति जारी रहेगी, जबकि अतिरिक्त महानिदेशक स्तर पर भी बड़ी संख्या में पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाएंगे। विशेष महानिदेशक और महानिदेशक स्तर के पदों को पूरी तरह प्रतिनियुक्ति आधारित रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य नेतृत्व में अनुभव और प्रशासनिक दक्षता को बनाए रखना बताया जा रहा है।न्यायिक निर्देशों के बाद आया विधायी परिवर्तनयह कानून सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद लाया गया है, जिसमें CAPF में वरिष्ठ स्तर पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने सरकार से कैडर समीक्षा और संरचनात्मक सुधार पर भी जोर दिया था। इसी दिशा में यह नया अधिनियम तैयार किया गया है ताकि प्रशासनिक व्यवस्था को स्पष्ट और स्थायी ढांचे में बदला जा सके।प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान करने की कोशिशपिछले कुछ वर्षों में CAPF व्यवस्था में सेवा शर्तों, पदोन्नति और अधिकार क्षेत्र को लेकर कई विवाद और कानूनी चुनौतियां सामने आई थीं। अलग अलग नियमों के कारण प्रशासनिक असंतुलन की स्थिति बन रही थी। नए कानून के माध्यम से सरकार का उद्देश्य इन सभी समस्याओं को दूर कर एक मजबूत और एकीकृत प्रणाली विकसित करना है, जिससे संचालन क्षमता और अनुशासन दोनों को बेहतर बनाया जा सके। सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता पर संभावित प्रभावविशेषज्ञों का मानना है कि यह नया ढांचा CAPF के नेतृत्व और प्रबंधन प्रणाली को अधिक संगठित बना सकता है। हालांकि प्रतिनियुक्ति और आंतरिक पदोन्नति संतुलन को लेकर भविष्य में भी बहस जारी रह सकती है। फिर भी सरकार का मानना है कि यह कदम देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। संस्थागत ढांचे और मनोबल पर ध्यानपूर्व अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि किसी भी संरचनात्मक बदलाव का प्रभाव बलों के मनोबल और कार्य संस्कृति पर पड़ता है। इसलिए इस नए अधिनियम को लागू करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि नेतृत्व अवसरों और सेवा शर्तों में संतुलन बना रहे, ताकि सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता प्रभावित न हो।

कश्मीर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, अब किसान 40 हजार रुपये किलो वाले दुर्लभ मशरूम की कर सकेंगे खेती

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसके बाद अब किसान 15 हजार से 40 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकने वाला दुर्लभ मशरूम अपने खेतों में भी उगा सकेंगे। श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के वैज्ञानिकों ने पहली बार नियंत्रित वातावरण में इस मशरूम की सफल खेती कर दिखाई है। जंगलों पर निर्भरता से मिली मुक्ति यह मशरूम मोरल्स या मोरचेला (स्थानीय नाम कंगाच) है, जो अब तक सिर्फ ऊंचे पहाड़ी जंगलों में बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता था। इसकी उपलब्धता बेहद सीमित और मुश्किल होने के कारण बाजार में इसकी कीमत बेहद अधिक रहती है। वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि SKUAST के कुलपति प्रोफेसर नजीर अहमद गनई ने इस उपलब्धि को “गेम चेंजर” बताया है। उनके अनुसार, यह तकनीक जंगलों पर निर्भरता खत्म कर नियंत्रित उत्पादन का रास्ता खोलती है, जिससे किसानों, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा होंगे। पांच साल की मेहनत से मिला परिणाम इस शोध में प्रोफेसर तारिक अहमद सोफी, उनके छात्र कमरान मुनीर और प्रोफेसर विकास गुप्ता शामिल रहे। टीम ने पिछले पांच वर्षों में 1000 से अधिक प्राकृतिक स्थलों से मोरचेला के नमूने एकत्र किए और उनके वातावरण, मिट्टी, नमी और पौधों का गहन अध्ययन किया। शोध के दौरान 10 किस्मों को चुना गया, जिनमें से 3 किस्मों में सफलतापूर्वक खेती संभव हो सकी। पॉलीहाउस से लेकर खुले खेत तक सफलता शुरुआत में इस मशरूम की खेती पॉलीहाउस में की गई, जबकि बाद में इसे खुले वातावरण में भी उगाने में सफलता मिली। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके लिए पेटेंट प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह प्रयोग बारामूला, अनंतनाग और श्रीनगर सहित कई क्षेत्रों में किया गया है। खास पर्यावरण की जरूरत वाला मशरूम मोरचेला की खेती हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है क्योंकि इसे विशेष तापमान, नमी और मिट्टी की स्थिति की आवश्यकता होती है। साथ ही अलग-अलग किस्मों के लिए अलग पौधों और प्राकृतिक वातावरण का संतुलन भी जरूरी होता है। किसानों के लिए नई आर्थिक संभावना विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से जम्मू-कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग के चलते यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बन सकती है और जैव-अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे सकती है।