दक्षिण भारत में सियासी भूचाल: तमिलनाडु में TVK का ऐतिहासिक उभार, केरल में कांग्रेस की वापसी, असम में BJP की सत्ता बरकरार; पुडुचेरी में भी NDA आगे

नई दिल्ली। दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के चार राज्यों तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी की 2026 विधानसभा चुनावों की मतगणना ने शुरुआती रुझानों में बड़ा राजनीतिक उलटफेर दिखाया है। कई दिग्गज दल पीछे होते नजर आ रहे हैं, जबकि नई और क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत स्थिति में उभरकर सामने आई हैं। तमिलनाडु में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को लगा है। यहां 234 सीटों में से DMK केवल 41 सीटों पर आगे है, जबकि अभिनेता विजय की नई पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम (टीवीके) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर बढ़त बना ली है और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है। वहीं अन्नाद्रमुक 63 सीटों पर आगे चल रही है। शुरुआती रुझानों के बाद चेन्नई स्थित DMK कार्यालय में गतिविधियां शांत पड़ गईं और कई तैयारियां रोक दी गईं। द्रमुक प्रमुख और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपनी सीट कोलाथुर से पीछे बताए जा रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर टीवीके कार्यकर्ताओं में कोयंबटूर सहित कई शहरों में जश्न का माहौल देखा गया। केरल में कांग्रेस की बड़ी वापसीकेरल में 140 सीटों के रुझानों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन 93 सीटों पर आगे है, जबकि सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाला LDF 44 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। यह रुझान राज्य में सत्ता परिवर्तन का संकेत दे रहे हैं। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत कई मंत्री पीछे चल रहे हैं।कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे “बदलाव की लहर” बताया और कहा कि मतदाताओं ने नई राजनीतिक दिशा चुनी है। असम में फिर BJP की मजबूत पकड़असम की 126 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (BJP) 95 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस 29 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपनी जालुकबारी सीट से आगे हैं, जबकि अधिकांश मंत्री भी मजबूत स्थिति में बताए जा रहे हैं। गुवाहाटी में BJP कार्यालय में जश्न की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पुडुचेरी में भी NDA की बढ़तपुडुचेरी की 30 सीटों में से भाजपा गठबंधन 22 सीटों पर आगे है, जबकि कांग्रेस गठबंधन 6 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी अपनी सीट पर मिश्रित स्थिति में हैं। विजय और TVK का राजनीतिक उभारटीवीके प्रमुख विजय की राजनीति में एंट्री अब बड़ा फैक्टर बनती दिख रही है। शुरुआती रुझानों में उनकी पार्टी सबसे आगे चल रही है, जिससे तमिलनाडु की राजनीति में नया समीकरण बन गया है। कुल मिलाकर तस्वीरशुरुआती रुझानों ने साफ संकेत दिया है कि दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जहां तमिलनाडु में नया राजनीतिक उभार दिख रहा है, वहीं केरल में सत्ता परिवर्तन के संकेत और असम में मौजूदा सरकार की पकड़ मजबूत नजर आ रही है। हालांकि अंतिम नतीजों के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी
हाईटेक सुरक्षा कवच में चलेगी कश्मीर की वंदे भारत ट्रेन, आरपीएफ कमांडो संभालेंगे मोर्चा

नई दिल्ली । जम्मू-श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इस रूट की संवेदनशीलता को देखते हुए अब ट्रेन की सुरक्षा में रेलवे सुरक्षा बल के विशेष कमांडो दस्ते को तैनात किया जाएगा, जो आधुनिक हथियारों और उन्नत सुरक्षा उपकरणों से लैस रहेंगे। यह पूरा फैसला इस बात को ध्यान में रखकर लिया गया है कि यह रेल मार्ग रणनीतिक और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जम्मू से कश्मीर घाटी को जोड़ने वाली यह ट्रेन न केवल यात्रियों के लिए तेज और आधुनिक यात्रा का साधन है, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क के लिहाज से भी इसकी अहम भूमिका है। ऐसे में इसकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। तैनात किए जाने वाले कमांडो विशेष रूप से प्रशिक्षित होंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति या खतरे से तुरंत निपटा जा सके। इन सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक हथियारों के साथ-साथ निगरानी और संचार से जुड़े आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे ट्रेन के भीतर और बाहर दोनों जगह मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार रहेगा। सुरक्षा योजना केवल ट्रेन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे रूट पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। खासकर सुरंगों, पुलों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। स्टेशनों पर भी कड़ी जांच और सतर्कता बढ़ाई जाएगी ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके। इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया गया है, जिससे किसी भी स्थिति में तुरंत और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। यह समन्वय पूरे सिस्टम को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाता है। वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड और आधुनिक ट्रेन के लिए सुरक्षा का यह स्तर जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल खतरे से बचाव करना नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा अनुभव देना भी है। जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन की सुरक्षा को लेकर उठाया गया यह कदम न केवल एक मजबूत सुरक्षा ढांचे की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित बलों के जरिए यात्रा को और सुरक्षित बनाया जा रहा है।
बंगाल चुनाव: सुबह 9 बजे तक 18% मतदान, खरगे की अपील- बिना डर के करें वोट; TMC-BJP में जुबानी जंग तेज

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को 142 सीटों पर मतदान जारी है। सुबह 9 बजे तक राज्य में करीब 18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है। राज्य की सियासत में इस समय मुकाबला बेहद दिलचस्प है एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। शुभेंदु अधिकारी ने मतदान प्रक्रिया पर उठाए सवालभाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मतदान केंद्रों के आसपास मौजूद रहने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जहां धारा 163 लागू है, वहां मुख्यमंत्री का इस तरह घूमना नियमों पर सवाल खड़ा करता है। शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियां चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रभाव डाल सकती हैं। खरगे की अपील- बिना डर लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करेंकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग बिना किसी डर या दबाव के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग करें। खरगे ने कहा कि यह समय उन ताकतों के खिलाफ खड़े होने का है जो जनता के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों से विशेष रूप से सक्रिय भागीदारी की अपील की। खरगे ने अपने संदेश में कहा कि मतदाता विकास, प्रगतिशील मूल्यों, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव के लिए मतदान करें। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल हमेशा बदलाव और लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र रहा है और यह चुनाव भी उसी दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है। मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा दावाभाजपा नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने मतदान के दौरान दावा किया कि इस बार मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत से अधिक जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो चुनाव के नतीजे बड़े बदलाव का संकेत देंगे। अभिषेक बनर्जी का भाजपा पर हमलातृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर मतदान के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में टीएमसी की जीत तय है और भाजपा 50 से भी कम सीटों पर सिमट सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नतीजे हमेशा टीएमसी के पक्ष में आते हैं। उन्होंने पिछले चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताया।तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर मतदान के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में टीएमसी की जीत तय है और भाजपा 50 से भी कम सीटों पर सिमट सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नतीजे हमेशा टीएमसी के पक्ष में आते हैं। उन्होंने पिछले चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताया। 4 मई को आएंगे नतीजेराज्य में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान जारी है। इससे पहले पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। सभी सीटों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
ऑफिस मार्केट में तेजी का नया दौर, भारत में लीजिंग गतिविधियों ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

नई दिल्ली। भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर 2026 की पहली तिमाही में एक मजबूत और रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन के साथ सामने आया है। देशभर में ऑफिस स्पेस की मांग लगातार बढ़ती हुई दिखाई दी और यह आंकड़ा 21.5 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गया, जो अब तक के हालिया वर्षों में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक माना जा रहा है। इस तेज वृद्धि के पीछे मुख्य कारण ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स की बढ़ती भागीदारी रही है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत को केवल सपोर्ट सेंटर के तौर पर नहीं देख रही हैं, बल्कि इसे अपने इनोवेशन, रिसर्च और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट का महत्वपूर्ण केंद्र बना रही हैं। ऑफिस लीजिंग में हुई इस बढ़ोतरी से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक पसंदीदा निवेश और ऑपरेशन डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। जीसीसी की भूमिका इस बदलाव में सबसे अहम रही है, जिन्होंने अपने विस्तार को तेज गति से आगे बढ़ाया है और कुल लीजिंग गतिविधियों में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की है। इन सेंटर्स में अब पारंपरिक बैक-ऑफिस कार्यों से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट डिजाइन और इंजीनियरिंग जैसे हाई-वैल्यू काम किए जा रहे हैं। इससे भारत के टैलेंट मार्केट को भी बड़ा फायदा मिल रहा है। इसके साथ ही फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की मांग भी तेजी से बढ़ी है। कंपनियां अब हाइब्रिड और रिमोट वर्क मॉडल को ध्यान में रखते हुए अधिक लचीले ऑफिस स्पेस की ओर बढ़ रही हैं, जिससे इस सेगमेंट में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। देश के प्रमुख शहरों में इस वृद्धि का असर साफ दिखाई दिया है। बेंगलुरु ने ऑफिस लीजिंग में सबसे आगे रहकर अपनी स्थिति मजबूत की है, जबकि मुंबई और हैदराबाद ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। पुणे और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों ने भी स्थिर और मजबूत योगदान दिया है। बेंगलुरु में जीसीसी की हिस्सेदारी विशेष रूप से काफी अधिक रही, जिससे यह शहर टेक्नोलॉजी और ग्लोबल इनोवेशन के सबसे बड़े केंद्रों में से एक बनता जा रहा है।
पूर्व सेना प्रमुख का स्पष्टीकरण, सार्वजनिक कॉपी की प्रामाणिकता पर उठाए सवाल..

नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख ने अपनी किताब से जुड़े विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जो भी चर्चा सार्वजनिक रूप से सामने आई कॉपी को लेकर हो रही है, उस पर वह कोई अंतिम राय नहीं दे सकते क्योंकि उन्होंने स्वयं अभी तक अपनी पुस्तक का अंतिम ड्राफ्ट नहीं देखा है। उनके इस बयान के बाद किताब को लेकर चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि एक लेखक के तौर पर उनके सामने जो सामग्री आई है, वह अंतिम संस्करण नहीं है। ऐसे में जो कॉपी सार्वजनिक रूप से प्रसारित की जा रही है, उसकी प्रमाणिकता पर वह कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। उनका कहना है कि बिना अंतिम रूप देखे किसी भी सामग्री को आधिकारिक मानना सही नहीं होगा। इस पूरे मामले में एक और अहम बात यह सामने आई है कि प्रकाशन से जुड़ी प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। प्रकाशक की ओर से भी पहले यह कहा गया था कि पुस्तक का कोई आधिकारिक और अंतिम संस्करण अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से अलग-अलग माध्यमों में जो अंश सामने आए हैं, उन्हें अंतिम सत्य मानना उचित नहीं माना जा सकता। विवाद की जड़ में किताब का एक कथित अंश रहा, जिसमें एक पंक्ति को लेकर अलग-अलग तरह की व्याख्याएं की जाने लगीं। इस पंक्ति को कुछ लोगों ने राजनीतिक संदर्भ में जोड़कर देखा, जिससे इस पर बहस और तेज हो गई। हालांकि पूर्व सेना प्रमुख ने इस पर साफ किया कि किताब में किसी भी स्थान पर किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सेना में ऑपरेशन के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया में जिम्मेदारी और भरोसे का संतुलन होता है, जिसे गलत तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी कथन या विचार को उसके मूल संदर्भ में समझना जरूरी होता है, न कि उसे तोड़-मरोड़कर अलग अर्थ देना। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अक्सर किसी भी विषय को अलग-अलग नजरिए से देखा जाता है, लेकिन हर बात को विवाद या राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाना सही नहीं है। उनका मानना है कि किसी भी लेखन को उसके पूरे संदर्भ और वास्तविक उद्देश्य के साथ ही समझा जाना चाहिए।
अदालत के आदेश के बाद मिला नया घर, अरविंद केजरीवाल परिवार सहित नए बंगले में शिफ्ट

नई दिल्ली।आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपना नया आवास बदल लिया है और अब वे परिवार सहित लुटियंस दिल्ली स्थित एक सरकारी बंगले में शिफ्ट हो गए हैं। यह नया पता 95, लोधी एस्टेट, नई दिल्ली है, जो राजधानी के प्रतिष्ठित और वीआईपी इलाकों में गिना जाता है। केजरीवाल ने स्वयं इस बदलाव की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें यह आवास पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में निर्धारित नियमों और न्यायिक आदेश के तहत आवंटित किया गया है। यह बंगला उच्च श्रेणी के सरकारी आवासों में शामिल है, जिसे आमतौर पर शीर्ष राजनीतिक पदों पर आसीन नेताओं को दिया जाता है। लगभग 5000 वर्ग फीट में फैले इस आवास में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें चार बड़े कमरे, दो खुले लॉन, तीन सर्वेंट क्वॉर्टर और एक गैराज शामिल है। इसके साथ ही एक अलग ऑफिस स्पेस भी बनाया गया है, जहां से राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों को संचालित किया जा सकता है। इस तरह का आवास न केवल रहने के लिए बल्कि आधिकारिक कार्यों के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अरविंद केजरीवाल को अपना पूर्व आधिकारिक आवास खाली करना पड़ा था। उस समय यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र भी बना रहा, जब विपक्ष ने उस आवास को लेकर कई सवाल उठाए। इसके बाद कुछ समय तक वे अपनी पार्टी के एक सांसद के आवास पर रह रहे थे। हालांकि, राष्ट्रीय दलों के प्रमुखों को दिल्ली में आवास उपलब्ध कराने के नियम के तहत उन्हें यह नया बंगला प्रदान किया गया है, जिससे उनकी आवास संबंधी स्थिति स्पष्ट हो गई है। नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को राजधानी में एक निर्धारित श्रेणी का सरकारी आवास दिया जाता है, ताकि वे अपने संगठनात्मक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित कर सकें। इसी प्रावधान के अंतर्गत केजरीवाल को यह बंगला आवंटित किया गया है। खास बात यह भी रही कि इस आवंटन की प्रक्रिया में न्यायालय के निर्देशों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि उन्हें उनके पद के अनुरूप सुविधाएं मिल सकें। इस नए आवास में शिफ्ट होने के साथ ही अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर से अपनी राजनीतिक गतिविधियों को संगठित रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। लुटियंस दिल्ली का यह इलाका प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां देश के कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी निवास करते हैं। ऐसे में यह बदलाव न केवल व्यक्तिगत बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। यह घटनाक्रम राजधानी की राजनीति में एक नए अध्याय की ओर इशारा करता है, जहां आने वाले समय में केजरीवाल की सक्रियता और रणनीतियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।
West Bengal election : पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाया, अमित शाह ने कांग्रेस और टीएमसी पर साधा निशाना

West Bengal election : नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। दम दम उत्तर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने अपने संबोधन में राज्य की राजनीतिक स्थिति और आगामी मतदान को लेकर कई महत्वपूर्ण दावे किए, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गरम हो गया है। सभा के दौरान उन्होंने दावा किया कि इस बार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है और मौजूदा नेतृत्व को जनता का समर्थन कम होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव की ओर देख रही है और आगामी चुनाव परिणाम इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में उसका प्रभाव काफी कमजोर हो चुका है। उनके अनुसार, कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने में असफल रही है और इस बार भी उसके लिए स्थिति अनुकूल नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने में संघर्ष कर रही है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार को मिला बढ़ावा, एपीवाई में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज.. सभा में दिए गए भाषण के दौरान राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने विपक्षी नेताओं की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक विमर्श में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ बयान देना आवश्यक है ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान बना रहे। इसके अलावा उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि राज्य में कई मुद्दों पर जनता असंतोष व्यक्त कर रही है और यह आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे मतदान के दिन सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और अपने मताधिकार का प्रयोग करें। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान चुनावी माहौल में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास माने जाते हैं। पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र है और विभिन्न दल अपनी रणनीति के तहत मतदाताओं को आकर्षित करने में जुटे हुए हैं। BJP Mahila Morcha protest: नारी शक्ति बिल समर्थन में सड़क पर उतरी बीजेपी महिला मोर्चा, विपक्ष का फूंका पुतला चुनाव आयोग की निगरानी में राज्य में मतदान प्रक्रिया की तैयारी चल रही है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर प्रचार अभियान को अंतिम चरण में पहुंचा रहे हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक परिदृश्य लगातार बदलता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में मतदान और उसके बाद के परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सभी दल अंतिम चरण के प्रचार में पूरी ताकत लगा रहे हैं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।
पहलगाम हमले की बरसी: नरेंद्र मोदी का पाकिस्तान को कड़ा संदेश-‘भारत आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा’

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के Pahalgam में हुए आतंकी हमले की बरसी पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शहीदों को याद करते हुए आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी रूप में आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा और आतंकियों के मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। पीएम मोदी ने जताई संवेदनाप्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि पिछले साल इसी दिन हुए इस भयावह हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा है और एक राष्ट्र के रूप में भारत शोक और संकल्प में एकजुट है। क्या हुआ था पहलगाम में?दरअसल, 22 अप्रैल 2025 को Pahalgam की बैसरन घाटी में आतंकियों ने घूमने आए सैलानियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba का हाथ बताया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकियों ने लोगों से नाम और धर्म पूछकर महिलाओं और बच्चों के सामने गोली चलाई थी, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। शहीदों की याद में बना स्मारकहमले में जान गंवाने वाले लोगों की याद में लिद्दर नदी के किनारे एक स्मारक बनाया गया है। काले संगमरमर से बने इस स्मारक पर सभी 26 मृतकों के नाम अंकित हैं। बरसी के मौके पर इलाके में सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर: भारत का जवाबहमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया था। इस अभियान के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के कई ठिकानों को निशाना बनाया और उन्हें तबाह किया। बताया जाता है कि इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। इसके बाद 28 जुलाई 2025 को “ऑपरेशन महादेव” के तहत हमले में शामिल आतंकियों को भी मार गिराया गया। आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट रुखप्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संदेश में दोहराया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा और किसी भी कीमत पर देश की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आतंक के खिलाफ यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक इस खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं कर दिया जाता।
बढ़ते पारे के बीच 'पाती' के जरिए सीधे जनता से जुड़े सीएम योगी; सुरक्षा के लिए जारी किए कड़े निर्देश!

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ रहा है और भीषण गर्मी का असर जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष पाती जारी कर लोगों से सावधानी बरतने और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बदलते मौसम के इस दौर में सतर्कता और तैयारी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, जिससे लू और गर्मी के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रकृति का चक्र निरंतर चलता रहता है और हर ऋतु अपने साथ अलग परिस्थितियां लेकर आती है। इस समय ग्रीष्म ऋतु अपने चरम की ओर बढ़ रही है और तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि जैसे सर्दी के मौसम में बचाव के उपाय किए जाते हैं, वैसे ही गर्मी के मौसम में भी व्यापक तैयारियां आवश्यक हैं। सरकार की ओर से आमजन की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग में भी तेजी आई है, जिसे ध्यान में रखते हुए पर्याप्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। उत्पादन इकाइयों को उनकी पूरी क्षमता से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रदेश के किसी भी हिस्से में बिजली की कमी न हो। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गर्मी के मौसम में श्रमिकों और खुले में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यस्थलों पर छाया, पेयजल और प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। लू और गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोग समय रहते आवश्यक सावधानियां अपना सकें। उन्होंने आगे बताया कि सार्वजनिक स्थानों जैसे सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, थानों और अन्य केंद्रों पर ठंडे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि आपात स्थिति में तुरंत उपचार मिल सके। मुख्यमंत्री ने पशुधन और वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। गोशालाओं और अन्य पशु आश्रयों में पानी, चारा और छाया की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पशुओं को भी इस भीषण गर्मी से सुरक्षित रखा जा सके। अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे स्वयं और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें और हल्के तथा सूती वस्त्र पहनें। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। साथ ही उन्होंने पशु पक्षियों के लिए पानी रखने की भी अपील की ताकि इस कठिन मौसम में संवेदनशीलता और मानवता का संदेश आगे बढ़ सके।
Patanjali Research : लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय सम्मान से चमका पतंजलि अनुसंधान संस्थान, वैज्ञानिक शोध ने बढ़ाया देश का मान

Patanjali Research : नई दिल्ली: वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए पतंजलि अनुसंधान संस्थान को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ है। संस्थान को Dr. P. D. Sethi National HPTLC Awards 2025 में प्राइवेट इंडस्ट्री कैटेगरी में प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि आंवला (Phyllanthus emblica) के बीज तेल पर किए गए गहन वैज्ञानिक शोध के लिए प्रदान की गई है, जिसमें इसके एंटी-माइक्रोबियल और बायोफिल्म-रोधी गुणों को प्रमाणित किया गया है। संस्थान ने पिछले वर्ष भी इसी श्रेणी में यह सम्मान प्राप्त किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अनुसंधान की गुणवत्ता और निरंतरता दोनों में स्थिरता बनी हुई है। इस बार का शोध विशेष रूप से आंवला बीज तेल के औषधीय गुणों पर केंद्रित रहा, जिसमें यह पाया गया कि यह प्राकृतिक तेल कई प्रकार के सूक्ष्मजीवों के खिलाफ प्रभावी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है और बायोफिल्म निर्माण को रोकने में भी सहायक है। इस शोध को वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह प्राकृतिक संसाधनों के औषधीय उपयोग की नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक सम्मान नहीं है, बल्कि संस्थान के वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत, समर्पण और शोध के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य ऐसे शोध करना है जो समाज के लिए उपयोगी, सुरक्षित और प्रभावी समाधान प्रदान कर सकें। उनके अनुसार यह सम्मान उन सभी वैज्ञानिकों के समर्पण की पहचान है जो निरंतर मानव कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने बताया कि यह पुरस्कार देश में विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध को पहचान देने वाला एक प्रतिष्ठित मंच है। लगातार दूसरी बार इस सम्मान का मिलना संस्थान की मजबूत वैज्ञानिक आधारशिला और अनुसंधान की गुणवत्ता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आंवला बीज तेल पर किए गए शोध को पहले भी विभिन्न वैज्ञानिक मंचों पर सराहा जा चुका है। संस्थान के अनुसार इन शोधों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है और इन्हें वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया है, जिससे भारतीय पारंपरिक औषधीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस उपलब्धि के साथ पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारत में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक का संगम वैश्विक स्तर पर नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।