UP Employees Salary before Holi: यूपी में सरकारी कर्मचारियों को होली का तोहफा, CM योगी ने फरवरी का वेतन पहले देने का किया ऐलान

UP Employees Salary before Holi: लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होली के पावन अवसर को देखते हुए प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों संविदाकर्मियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि फरवरी माह का वेतन और पेंशन होली से पहले यानी 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से भुगतान कर दिया जाए। इस आदेश का दायरा केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इसमें आउटसोर्सिंग कर्मी संविदाकर्मी और सफाईकर्मी भी शामिल हैं। वित्त विभाग ने इस संबंध में औपचारिक शासनादेश जारी कर दिया है जिसमें साफ कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी के वेतन या पेंशन में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है कि भुगतान प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होगी। समय पर वेतन वितरण सुनिश्चित करने के लिए आगामी शनिवार को भी कार्यदिवस घोषित किया गया है। यह कदम प्रदेश सरकार की ओर से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को त्योहार से पहले वित्तीय सुरक्षा देने की पहल है। जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधे लाभान्वित करेगी। वेतन और पेंशन समय पर मिलने से न केवल कर्मचारियों में उत्साह बढ़ेगा बल्कि होली के त्योहार की तैयारियों में भी मदद मिलेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन की स्थिति में तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम राज्य सरकार की कर्मचारी-केंद्रित नीतियों का हिस्सा है जिसमें सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय स्थिरता और मनोबल बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इससे प्रदेश में सरकारी सेवाओं के सुचारू संचालन को भी बल मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार का यह प्रयास है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को त्योहार के अवसर पर अतिरिक्त सुविधा मिले और वे अपने परिवार के साथ उत्साहपूर्वक होली मना सकें। इस पहल को लेकर कर्मचारियों में प्रसन्नता का माहौल देखा जा रहा है।
ऑपरेशन ‘सिंदूर 2.0’ पर सख्त संदेश: जमीन, समुद्र और हवा-हर मोर्चे पर जवाब को तैयार सेना

नई दिल्ली। भारत ने सीमा पार से किसी भी उकसावे की स्थिति में पहले से अधिक कठोर प्रतिक्रिया देने के संकेत दिए हैं। भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के तहत सैन्य तैयारियों को व्यापक रूप से मजबूत किया गया है और भविष्य की कार्रवाई बहु-आयामी हो सकती है। यह बयान पठानकोट में आयोजित एक ऑपरेशनल क्षमता प्रदर्शन के दौरान सामने आया, जहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सेना की तैयारी और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया। 2 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग राजेश पुष्कर ने कहा कि पिछले वर्ष चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल भारतीय सैन्य क्षमता का सीमित उदाहरण था। उनका कहना था कि चार दिनों के भीतर ही पाकिस्तान को संघर्षविराम की अपील करनी पड़ी थी, जबकि मौजूदा चरण में कहीं अधिक बड़े स्तर की तैयारी की गई है। किसी भी मोर्चे पर जवाब की तैयारी अधिकारियों ने संकेत दिया कि भविष्य की सैन्य प्रतिक्रिया परिस्थितियों पर निर्भर करेगी, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई जमीन, समुद्र या हवा—तीनों क्षेत्रों में एक साथ की जा सकती है। सेना का उद्देश्य अब केवल जवाब देना नहीं, बल्कि प्रतिरोध क्षमता को निर्णायक स्तर तक ले जाना है। “न्यूक्लियर ब्लफ” पर भी सख्त रुख पश्चिमी कमान के प्रमुख मनोज कुमार कटियार ने पाकिस्तान की ओर से बार-बार दिए जाने वाले परमाणु संकेतों को “न्यूक्लियर ब्लफ” करार देते हुए कहा कि भारत अब ऐसे दबावों में आने वाला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहबाज शरीफ भारत को कड़ी कार्रवाई से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है। पिछले साल हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन जानकारी के अनुसार, मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक सैन्य कार्रवाई की गई थी। रणनीति अब और आक्रामक सेना के ताजा संकेतों से स्पष्ट है कि भारत ने अपनी सैन्य रणनीति, समन्वित युद्धक क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को पहले से अधिक सशक्त बनाया है। किसी भी संभावित उकसावे की स्थिति में इस बार जवाब अधिक तीव्र, व्यापक और बहु-क्षेत्रीय हो सकता है।
KUNO NATIONAL PARK: ग्वालियर होते हुए कुनो पहुंचेंगे 8 नए चीते, देश में संख्या बढ़कर होगी 46

HIGHLIGHTS: बोत्सवाना से 6 मादा और 2 नर चीते आ रहे हैं भारत शनिवार सुबह ग्वालियर एयरपोर्ट पर लैंडिंग हेलीकॉप्टर से कुनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचाए जाएंगे केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और सीएम मोहन यादव करेंगे रिलीज देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 46 होगी KUNO NATIONAL PARK: ग्वालियर। मध्य प्रदेश एक बार फिर चीता पुनर्वास परियोजना को लेकर चर्चाओं में है। बट्स दें कि आठ नए चीते जल्द ही भारत पहुंच रहे हैं, जिनमें 6 मादा और 2 नर शामिल हैं। ये सभी चीते अफ्रीकी देश बोत्सवाना से विशेष विमान के जरिए भारत लाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, ये चीते आज रात बोत्सवाना से उड़ान भरेंगे और शनिवार सुबह ग्वालियर एयरपोर्ट पर उतरेंगे। GWALIO-CHAMBAL WEATHER: ग्वालियर-चंबल में मौसम का यू-टर्न: दिन में बढ़ी तपिश, रात में ठंडक, 2 मार्च से फिर बदलेगा मौसम ग्वालियर से जायेंगे कुनो ग्वालियर पहुंचने के बाद सभी चीतों को विशेष निगरानी में हेलीकॉप्टर के माध्यम से श्योपुर जिले में स्थित कुनो राष्ट्रीय उद्यान ले जाया जाएगा। सूचना की माने तो शनिवार सुबह इन्हें कुनो के निर्धारित बाड़ों में रिलीज किया जाएगा, इसके साथ ही वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग करेगी। Holi Skin Care: होली की मस्ती में ऐसे रखें अपनी खूबसूरत स्किन का ख्याल, एलर्जी भी रहेगी दूर केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री करेंगे रिलीज चीतों के औपचारिक रिलीज कार्यक्रम में केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे। यह कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। T20 World Cup : भारत ने जिम्बाब्वे को 72 रन से हराया, अब वेस्टइंडीज के खिलाफ ‘करो या मरो’ का मुकाबला देश में चीतों की संख्या होगी 46 इन आठ चीतों के आने के बाद भारत में कुल चीतों की संख्या 38 से बढ़कर 46 हो जाएगी। कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पहले से मौजूद चीतों की निगरानी सैटेलाइट कॉलर और विशेष ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए चीतों के आगमन से प्रजनन और संरक्षण प्रयासों को और मजबूती मिलेगी। ग्वालियर और श्योपुर क्षेत्र एक बार फिर देशभर की नजरों में हैं, जहां चीता संरक्षण अभियान को नई दिशा मिलने जा रही है।
वीर सावरकर की वीरता और समर्पण: अमित शाह सहित मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों का सम्मान

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका त्याग और समर्पण हर राष्ट्रप्रेमी के लिए राष्ट्रप्रथम का ज्योति स्तंभ बना रहेगा। अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर आजादी के आंदोलन के उन नायकों में थे जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत से स्वतंत्रता व सांस्कृतिक स्वाधीनता के लिए संघर्ष किया। सावरकर ने क्रांतिकारी विचारों से स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक आधार दिया और देश से लेकर इंग्लैंड तक अपने साहसी अभियानों से युवाओं को प्रेरित किया। उनके त्याग समर्पण और वीरता की गाथाएं अनंत काल तक राष्ट्रप्रेमियों के लिए प्रेरणा स्तंभ बनी रहेंगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने उन्हें ओजस्वी क्रांतिकारी और तेजस्वी विचारक बताते हुए लिखा कि उनका संघर्ष भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने वीर सावरकर को प्रखर क्रांतिकारी एवं दूरदर्शी चिंतक बताया जिनके त्याग और राष्ट्रनिष्ठ चिंतन देशवासियों के लिए कर्तव्यबोध और आत्मसम्मान की प्रेरणा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma ने उन्हें मां भारती के अमर सपूत और महान विचारक बताते हुए उनके जीवन को साहस और धैर्य का पर्याय बताया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि वीर सावरकर का त्याग और तप हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने लिखा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र के प्रति अनन्य निष्ठा की अमर गाथा है जिसने जनता में स्वाभिमान का भाव जागृत किया। केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chauhan और Manohar Lal ने भी वीर सावरकर के त्याग साहस और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अदम्य योगदान को कोटिशः नमन अर्पित किया।इस प्रकार स्वातंत्र्यवीर वीर सावरकर का बहुआयामी व्यक्तित्व-साहस साहित्य समाज सुधार और राष्ट्रभक्ति-देशभर में आज भी प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणा और आदर्श बना हुआ है।
NCERT किताब विवाद: सुप्रीम कोर्ट में न्यायपालिका पर अध्याय पर गुस्सा, सीजेआई सूर्यकांत ने डायरेक्टर को नोटिस जारी किया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग NCERT की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका पर जोड़ दिए गए अध्याय के विवाद पर सुनवाई गुरुवार को जारी रही। इस मामले में सीजेआई D.Y. Chandrachud / Surya Kant की बेंच के सामने एसजी Tushar Mehta ने बिना शर्त माफी मांगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादित अध्याय को “कैलकुलेटेड मूव” बताते हुए कहा कि इससे भारतीय न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर गंभीर चोट लगी है। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की, आज न्यायपालिका लहूलुहान है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसे ऐसे ही छोड़ दिया गया तो आम जनता और युवाओं के मन में न्यायपालिका की पवित्रता प्रभावित होगी। तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि किताब की 32 प्रतियां बाजार में चली गई थीं, जिन्हें वापस लिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे अध्याय की टीम दोबारा समीक्षा करेगी। सीजेआई ने कहा कि यह मामूली मामला नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की संस्थागत स्थिति को चुनौती देने वाला कदम है। सुप्रीम कोर्ट ने NCERT के डायरेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं कि क्या यह सोची-समझी चाल थी या संयोग, लेकिन न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार का चित्रण संवैधानिक रूप से अनुचित है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने डिजिटल युग में हजारों प्रतियों के प्रसार को ध्यान में रखते हुए जांच की आवश्यकता बताई। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने संविधान निर्माताओं की मेहनत का उल्लेख किया और कहा कि तीनों स्तंभों की स्वायत्तता सुनिश्चित करने में गहरी सजगता बरती गई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की सामग्री युवाओं तक पहुंचती रही तो न्यायिक पद की पवित्रता खतरे में पड़ जाएगी। सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि पूरे तंत्र की व्यापक समस्याओं का कोई जिक्र नहीं था, केवल एक व्यक्ति को चुन लिया गया। वहीं कपिल सिब्बल ने पूछा कि राजनेताओं और नौकरशाही का क्या जिक्र है। न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को सुरक्षित रखने और पाठ्यपुस्तक में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से NCERT पर गहन समीक्षा और जवाब देने का निर्देश दिया। इस सुनवाई में यह भी तय किया गया कि भविष्य में इस तरह की गलतियों से बचने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। SC ने कहा कि कार्रवाई सिर्फ पब्लिक रिप्रेसेंटेशन के लिए नहीं बल्कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और संस्थागत मूल्य के लिए भी जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने माना रूह अफजा को फ्रूट ड्रिंक, टैक्स विवाद खत्म, जाने क्या दिया फैसला?

नई दिल्ली। भारत में गर्मियों का लोकप्रिय पेय रूह अफ़जा अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्पष्ट रूप से फ्रूट ड्रिंक के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। लंबे समय से चल रही टैक्स विवाद में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रूह अफ़जा को सिर्फ इसलिए उच्च टैक्स वाले ब्रैकेट में नहीं रखा जा सकता क्योंकि इसे शरबत के रूप में बेचा जाता है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि रूह अफ़जा फलों से बनाया जाता है और इसे केवल पानी में मिलाकर पीया जाता है। इसलिए इसे टैक्स कानून के तहत फ्रूट ड्रिंक माना जाएगा। विवाद की जड़ यह मामला हमदर्द वक्फ लैबोरेटरीज की अपील पर सुना गया। सवाल यह था कि रूह अफ़जा, जिसमें केवल 10% फ्रूट जूस होता है और जिसे इनवर्ट शुगर सिरप व हर्बल डिस्टिलेट के साथ मिलाया जाता है, कानूनी रूप से फ्रूट ड्रिंक कहलाया जा सकता है या नहीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट और टैक्स अधिकारियों के 2018 के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। इन फैसलों में रूह अफ़जा को उत्तर प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट के तहत 12.5% टैक्सेबल अनक्लासिफाइड आइटम के रूप में देखा गया था। सुप्रीम कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रूह अफ़जा UPVAT एक्ट की शेड्यूल II पार्ट A की एंट्री 103 के तहत फ्रूट ड्रिंक/प्रोसेस्ड फ्रूट प्रोडक्ट के रूप में आएगा। इस श्रेणी पर 1 जनवरी 2008 से 31 मार्च 2012 तक 4% रियायती VAT दर लागू होती थी। मामले में अधिकारियों ने फूड सेफ्टी रेगुलेशन का हवाला देते हुए कहा था कि फ्रूट सिरप में कम से कम 25% फ्रूट जूस होना चाहिए। चूंकि रूह अफ़जा में केवल 10% जूस होता है, इसलिए इसे नॉन-फ्रूट सिरप बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि फूड सेफ्टी कानून टैक्सिंग कानून की व्याख्या को नियंत्रित नहीं कर सकता।
दिल्ली सरकार ने बढ़ाया आयुष्मान भारत योजना का दायरा, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को मिलेगा कैशलेस स्वास्थ्य कवच

नई दिल्ली । दिल्ली सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि राजधानी के विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जाएगा। इस कदम से लगभग 3.96 लाख विधवा महिलाओं और 1.31 लाख दिव्यांग व्यक्तियों के परिवार अब स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ उठा सकेंगे। इस योजना के तहत ये लाभार्थी राजधानी के 208 सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार करा सकेंगे। राजधानी में योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद वर्ग को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि इलाज के खर्च का बोझ कम हो सके और गरीब नागरिक किसी बीमारी के चलते वंचित न रहें। रेखा गुप्ता ने बताया कि कैबिनेट के इस फैसले के बाद करीब 5.5 लाख अतिरिक्त परिवार अब आयुष्मान भारत योजना की सुरक्षा की छतरी के नीचे आ जाएंगे। ये परिवार पहले से योजना का लाभ ले रहे अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता PRS श्रेणी के परिवारों के अतिरिक्त होंगे। साथ ही 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक आशा कार्यकर्ता आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर्स भी इस योजना के दायरे में शामिल रहेंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली का कोई गरीब कमजोर या जरूरतमंद नागरिक इलाज के अभाव में वंचित न रहे। योजना लागू होने के बाद लाभार्थियों को निजी या सरकारी अस्पतालों में बिना किसी अग्रिम भुगतान के इलाज की सुविधा प्राप्त होगी। अब तक दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना के तहत 7,23,707 कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 2,74,620 कार्ड वरिष्ठ नागरिकों को प्रदान किए गए हैं। राजधानी में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 208 अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है जिसमें 156 निजी और 53 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। दिल्ली राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के माध्यम से अब तक 29,120 से अधिक लाभार्थियों ने मुफ्त इलाज का लाभ प्राप्त किया है। इस योजना के विस्तार से न केवल विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को सीधे लाभ मिलेगा बल्कि यह उनके परिवारों के लिए भी आर्थिक राहत का साधन बनेगी। कैबिनेट के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य सुरक्षा को उच्च प्राथमिकता देती है और जरूरतमंद वर्ग तक इलाज की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। इस पहल से राजधानी के गरीब और कमजोर वर्ग को मुफ्त और विश्वसनीय स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त होगी। योजना के तहत लाभार्थी सूचीबद्ध अस्पतालों में अस्पताल में भर्ती इलाज और आपातकालीन सेवाओं के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इससे स्वास्थ्य सुरक्षा का व्यापक जाल तैयार हुआ है और दिल्ली की स्वास्थ्य प्रणाली और अधिक समावेशी और प्रभावी बन रही है। इस तरह दिल्ली सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के दायरे में विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को जोड़कर लगभग 5.5 लाख नए परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच प्रदान किया है। यह कदम राजधानी के कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
Maharashtra: सुनेत्रा पवार की जगह बेटे पार्थ को राज्यसभा भेजेगी NCP, आधी रात को लिया गया फैसला

Maharashtra: मुंबई। महाराष्ट्र (Maharashtra) की सात राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव (Rajya Sabha Election) से पहले राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। महायुति की सरकार में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party- NCP) ने इस संबंध में अपने उम्मीदवार को लेकर बड़ा फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार,सोमवार की रात प्रफुल्ल पटेल (Prafull Patel) के आवास पर पार्टी की कोर कमेटी की हुई बैठक में पार्थ पवार को राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने पर सहमति बनी है। इस अहम बैठक मुंबई में प्रफुल्ल पटेल के अलावा उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। सूत्रों ने बताया कि बैठक में केवल राज्यसभा उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि पार्टी की आगामी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। 26 फरवरी को होने वाली इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर मुहर लग सकती है, जहां सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। यह बैठक मुंबई के वर्ली डोम में आयोजित होने की संभावना है। बीजेपी कोर कमेटी की आज बैठक दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। ABP माझा के मुताबिक, इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निवास पर मंगलवार की रात करीब 10 बजे कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई है। पार्टी इस बार राज्यसभा की चार सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। इनमें रामदास अठावले का नाम लगभग तय माना जा रहा है, जबकि विनोद तावड़े, विजया रहाटकर और धैर्यशील पाटिल के नामों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। बीजेपी चार सांसद भेज सकती है महाराष्ट्र में इस बार राज्यसभा की 7 सीटें खाली हैं और 286 विधायकों के आधार पर एक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 वोटों की जरूरत होगी। आंकड़ों के अनुसार, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के पास स्पष्ट बढ़त है। अकेले BJP के पास एक निर्दलीय को मिलाकर कुल (131+1) यानी 132 विधायकों का समर्थन है, जिससे वह 3 से 4 सांसद आसानी से भेज सकती है। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) अपने 58 विधायकों के साथ एक सीट सुरक्षित कर सकती है, जबकि NCP (अजित पवार गुट) भी एक सीट जीतने की स्थिति में है क्योंकि अजित पवार की मौत के बाद उसके पास 40 विधायक हैं। महाविकास अघाड़ी के पास एक को भेजने की क्षमता इसके मुकाबले महाविकास अघाड़ी (MVA), जिसमें कांग्रेस, NCP (शरद पवार गुट) और शिवसेना (ठाकरे गुट) शामिल हैं, के पास कुल मिलाकर लगभग 49 विधायकों का समर्थन है। इस संख्या के आधार पर MVA केवल एक सीट ही सुरक्षित कर सकती है। राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से महायुति गठबंधन 6 सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है, जबकि विपक्षी गठबंधन को सीमित सफलता मिलने की संभावना है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव 2026 में सत्ता पक्ष का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन और अंतिम रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं।
ASSAM RAPE CASE: असम में युवती से सात लोगों ने किया सामूहिक दुष्कर्म, दो आरोपी गिरफ्तार

ASSAM RAPE CASE: गुवाहाटी। असम के कछार जिला में एक युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, 28 वर्षीय युवती अपने पुरुष मित्र के साथ घूमने गई थी, तभी सात लोगों ने उसे निशाना बनाया। घटना 19 फरवरी की बताई जा रही है, जिसके बाद पीड़िता की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई।सिलचर के पास हुई वारदात यह घटना सिलचर शहर के बाहरी इलाके में बाईपास रोड के पास हुई। आरोप है कि एसयूवी में सवार कुछ लोग वहां पहुंचे, युवती और उसके मित्र को रोका और दोनों से पूछताछ के बहाने हमला कर दिया। परिजनों का कहना है कि आरोपियों ने युवक को काबू में कर लिया और उसके सामने ही युवती के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया। पैसे ट्रांसफर करने के लिए भी किया मजबूर पीड़िता ने आरोप लगाया कि अपराध के बाद आरोपियों ने उसे धमकाकर अपने एक साथी के बैंक खाते में 10,000 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। पुलिस इसे जबरन वसूली का मामला भी मान रही है। दो आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी मामला सिलचर सदर पुलिस थाना में दर्ज किया गया है। पुलिस ने पीड़िता द्वारा पहचान किए गए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश में छापेमारी जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है और उसका बयान भी दर्ज कर लिया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें सामूहिक दुष्कर्म, डकैती, आपराधिक धमकी और जबरन वसूली शामिल हैं।शुरुआत में चुप्पी, फिर मामला हुआ वायरल बताया जा रहा है कि घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। मामला तब चर्चा में आया जब एक पत्रकार पर कथित तौर पर आरोपियों के परिजनों ने हमला कर दिया। पत्रकार का दावा है कि उससे खबर प्रकाशित करने को लेकर सवाल किए गए और मारपीट की गई, हालांकि स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप से वह बच गया। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पुलिस प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले को दबाने की कोई कोशिश नहीं होनी चाहिए और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। तृणमूल कांग्रेस ने भी घटना की निंदा करते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने की बात कही है। जांच जारी, सुरक्षा पर उठे सवाल पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। घटना के बाद क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जबकि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है।
मेटा को बड़ा झटका: 213 करोड़ का जुर्माना और डेटा शेयरिंग पर रोक बरकरार, CJI की पीठ के सख्त रुख के आगे झुकी ग्लोबल टेक दिग्गज!

नई दिल्ली: वैश्विक तकनीकी दिग्गज मेटा और उसके लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने सोमवार 23 फरवरी को देश की सर्वोच्च अदालत में एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। मुख्य न्यायाधीश CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष व्हाट्सएप ने स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण NCLT के उन सभी निर्देशों का पालन करेगा, जो भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग CCI द्वारा निर्धारित गोपनीयता और सहमति मानकों से संबंधित हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ दिसंबर 2025 में आए NCLT के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान व्हाट्सएप के इस ‘यू-टर्न’ ने सबको चौंका दिया, क्योंकि कंपनी ने पहले इन निर्देशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। अब व्हाट्सएप ने अपनी वह अर्जी वापस ले ली है जिसमें उसने नियामक निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की थी।कपिल सिब्बल ने रखी दलील: 16 मार्च तक होगा अनुपालनव्हाट्सएप की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को भरोसा दिलाया कि कंपनियां आगामी 16 मार्च तक न्यायाधिकरण के सभी निर्देशों को पूरी तरह से लागू कर देंगी। इस पर पीठ ने न केवल स्थगन याचिकाओं को खारिज कर दिया, बल्कि कंपनियों से एक विस्तृत ‘अनुपालन रिपोर्ट’ Compliance Report भी तलब की है। हालांकि, अदालत ने यह साफ कर दिया कि इस सहमति का मुख्य अपील में उठाए गए कानूनी मुद्दों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उन पर अलग से विचार किया जाएगा। 213 करोड़ का जुर्माना और ‘डेटा’ का खेलयह पूरा विवाद व्हाट्सएप की 2021 की विवादास्पद गोपनीयता नीति से शुरू हुआ था। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग CCI ने व्हाट्सएप पर अपनी प्रधान स्थिति का दुरुपयोग करने के लिए 213.14 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया था। CCI का आरोप था कि व्हाट्सएप ‘टेक इट ऑर लीव इट’ मानो या छोड़ो की तर्ज पर उपयोगकर्ताओं को अपना डेटा मेटा की अन्य कंपनियों के साथ साझा करने के लिए मजबूर कर रहा है। यद्यपि NCLT ने अपने नवंबर 2025 के आदेश में उस हिस्से को हटा दिया था जिसमें विज्ञापन के लिए डेटा साझा करने पर पांच साल की पूर्ण रोक लगाई गई थी, लेकिन 213 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में 3 फरवरी को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि “नागरिकों के निजता के अधिकार के साथ ‘डेटा साझा करने’ के नाम पर खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।” क्या होगा असर?व्हाट्सएप के इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब उसे भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा का उपयोग विज्ञापनों के लिए करने से पहले उनकी स्पष्ट सहमति लेनी होगी और पारदर्शिता के कड़े मानकों का पालन करना होगा। यह फैसला भारत में डिजिटल नागरिक अधिकारों और डेटा सुरक्षा की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जहां बड़ी टेक कंपनियों को भारतीय नियामकों के प्रति जवाबदेह बनाया गया है।