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नवरात्रि व्रत में नहीं होगी थकान: ये 4 सुपरफूड्स रखेंगे आपको दिनभर एनर्जेटिक

नई दिल्ली । शक्ति की उपासना का पावन पर्व चैत्र नवरात्रि पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों में कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं कोई पहले और आखिरी दिन तो कोई पूरे नौ दिन उपवास करता है। हालांकि अक्सर गलत खान पान के कारण व्रत के दौरान कमजोरी थकान सिरदर्द और सुस्ती महसूस होने लगती है जिसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है। दरअसल व्रत का असली लाभ तभी मिलता है जब आपका आहार संतुलित सात्विक और पोषण से भरपूर हो। अगर सही चीजों का चुनाव किया जाए तो न केवल शरीर ऊर्जावान बना रहता है बल्कि मन भी शांत और एकाग्र रहता है। ऐसे में आइए जानते हैं 4 ऐसे सुपरफूड्स के बारे में जिन्हें व्रत की थाली में शामिल कर आप पूरे दिन एनर्जी से भरपूर रह सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं मखाना की जिसे व्रत का सबसे हेल्दी और गिल्ट फ्री स्नैक माना जाता है। इसमें कैलोरी कम और प्रोटीन अधिक होता है। साथ ही यह फाइबर मैग्नीशियम और पोटैशियम का अच्छा स्रोत है। मखाना खाने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती और यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। आप इसे हल्के घी में भूनकर या खीर बनाकर खा सकते हैं। दूसरा सुपरफूड है साबूदाना। जब शरीर को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है तब यह सबसे बेहतर विकल्प बन जाता है। कार्बोहाइड्रेट से भरपूर और ग्लूटेन फ्री साबूदाना जल्दी पचता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। हालांकि इसमें प्रोटीन कम होता है इसलिए इसे दही या मूंगफली के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। साबूदाने की खिचड़ी या वड़ा स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संयोजन है। तीसरा महत्वपूर्ण आहार है कुट्टू का आटा । यह पोषण का खजाना माना जाता है जिसमें मैग्नीशियम आयरन जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके कॉम्प्लेक्स कार्ब्स शरीर को धीरे धीरे ऊर्जा देते हैं जिससे दिनभर कमजोरी महसूस नहीं होती। कुट्टू से बनी पूरी चीला या कढ़ी न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। चौथा और सबसे जरूरी हिस्सा है फल। व्रत के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी होता है। सेब केला संतरा और अनार जैसे फल विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं। केला तुरंत ऊर्जा देता है जबकि संतरा और अनार शरीर में पानी की कमी पूरी कर ठंडक प्रदान करते हैं। फलों का सेवन शरीर को डिटॉक्स करने और इम्युनिटी मजबूत बनाने में भी मदद करता है। नवरात्रि का व्रत केवल भूखा रहने का नाम नहीं बल्कि यह अनुशासन और संतुलित जीवनशैली अपनाने का अवसर है। अगर आप सही और पौष्टिक आहार लेते हैं तो न केवल आपका शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि आपकी पूजा और साधना में भी मन एकाग्र रहेगा। इस नवरात्रि इन 4 सुपरफूड्स को अपनी व्रत की थाली में जरूर शामिल करें और भक्ति के साथ साथ अपनी सेहत का भी पूरा ध्यान रखें।

मिजोरम की खूबसूरती और सांस्कृतिक रंग, लुंगलेई ट्रैकिंग ट्रिप के लिए परफेक्ट

नई दिल्ली।  गर्मियों की शुरुआत के साथ ही पर्यटकों में छुट्टियों की योजना बनाना आम हो जाता है। अगर आप प्रकृति, ट्रैकिंग और मिजोरम की संस्कृति का अनूठा अनुभव चाहते हैं, तो मिजोरम के लुंगलेई शहर की यात्रा आपके लिए बेस्ट विकल्प है। प्रकृति के अद्भुत नजारेलुंगलेई अपने नाम की तरह अनोखा है। इसका अर्थ है “चट्टानों का पुल”, और यह 1222 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। आइजोल से 169 किलोमीटर दूर यह शहर पहाड़ों, नदियों और हरे-भरे जंगलों के खूबसूरत संगम का प्रतीक है। यहां की नदियों का पानी इतना साफ होता है कि आप तल में बैठे कंकड़ों को आसानी से देख सकते हैं। गर्मियों में यह जगह विशेष रूप से पर्यटकों को आकर्षित करती है। खावंगलुंग वन्यजीव अभयारण्यप्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए खावंगलुंग वन्यजीव अभयारण्य सबसे पसंदीदा जगह है। यहां पर्यटक तेंदुआ, सांभर, बार्किंग डियर और हूलॉक गिब्बन जैसे वन्यजीवों को देख सकते हैं। अभयारण्य में सफारी का अनुभव भी लिया जा सकता है। मार्च से अक्टूबर का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। फुननाउमा की चट्टान और ट्रैकिंग का रोमांचलुंगपुई शहर से 100 किलोमीटर दूर लुंगपुई त्लांग या फुननाउमा की चट्टान स्थित है। यह लुंगपुई की सबसे पुरानी और बड़ी चट्टान है। यहां तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को कठिन ट्रैकिंग करनी पड़ती है, लेकिन ऊपर पहुंचकर शहर का दृश्य देखने का अनुभव अद्भुत होता है। फुननाउमा की चट्टान को लेकर कई लोककथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि यहां परियां शिकार के लिए आती थीं और इस जगह की खोज फुननाउमा नाम के शख्स ने की थी। यही कारण है कि यह चट्टान फुननाउमा की चट्टान के नाम से जानी जाती है। मिजोरम की संस्कृति का अनुभवलुंगलेई के हरे-भरे ऊंचे पहाड़ न केवल प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं, बल्कि यहां का मौसम भी सुहावना रहता है। इसके अलावा, लुंगलेई में मिजोरम की संस्कृति और कल्चर की झलक भी देखने को मिलती है। गांव के लोग आज भी अपनी पारंपरिक पहचान बनाए हुए हैं। यहां ऑथेंटिक मिजोरम व्यंजन का स्वाद लेना भी पर्यटकों के लिए खास अनुभव होता है। ट्रैकिंग और एडवेंचर के लिए उपयुक्तलुंगलेई न केवल प्रकृति प्रेमियों, बल्कि ट्रैकिंग और एडवेंचर के शौकीनों के लिए भी बेस्ट डेस्टिनेशन है। फुननाउमा की चट्टान और खावंगलुंग अभयारण्य जैसी जगहें इसे ट्रैवल लवर्स के लिए एक परफेक्ट हाइकिंग और फोटोग्राफी स्पॉट बनाती हैं।

इच्छामृत्यु से अंगदान तक हरीश राणा की जिंदगी की कहानी अब फिल्म बनेगी.

नई दिल्ली:कभी-कभी जिंदगी ऐसी कहानी लिखती है, जिसे सुनकर हर कोई भीतर तक हिल जाता है. हरीश राणा की कहानी भी ऐसी ही एक दर्दभरी लेकिन साहस से भरी दास्तान है, जिसमें 13 साल का लंबा इंतजार, परिवार का अटूट साथ और अंत में इंसानियत की मिसाल देखने को मिलती है. अब यही कहानी बड़े पर्दे पर आने की तैयारी में है, जिसने पहले ही लोगों के दिलों को छूना शुरू कर दिया है. करीब 13 साल पहले एक हादसे ने हरीश राणा की पूरी जिंदगी बदल दी. वह एक होनहार छात्र थे और सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन रक्षाबंधन के दिन हुए एक हादसे में वह चौथी मंजिल से गिर गए. इस हादसे के बाद डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से जूझ रहे हैं, जिसमें शरीर के चारों अंग काम करना बंद कर देते हैं. एक पल में उनका सक्रिय जीवन पूरी तरह बिस्तर तक सिमट गया. इसके बाद शुरू हुआ दर्द, संघर्ष और उम्मीद का लंबा सफर. परिवार ने कभी हिम्मत नहीं हारी और हर हाल में हरीश के साथ खड़ा रहा. इलाज, देखभाल और उम्मीद के बीच साल दर साल बीतते गए, लेकिन हालत में कोई बड़ा सुधार नहीं आया. आखिरकार परिवार ने कानूनी रास्ता अपनाया और इस मामले को अदालत तक लेकर गए. लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी. यह फैसला जितना संवेदनशील था, उतना ही भावनात्मक भी. इसके बाद उन्हें एम्स दिल्ली के पैलिएटिव केयर वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहां उनकी तकलीफ को कम करने के लिए विशेष चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई जा रही है.  ताकि उन्हें कम से कम दर्द महसूस हो. मेडिकल बोर्ड की निगरानी में हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है. इस पूरी कहानी का सबसे भावुक पहलू है परिवार का साहस और उनका बड़ा फैसला. हरीश के पिता अशोक राणा ने अपने बेटे के अंगदान का निर्णय लिया है. यह फैसला न सिर्फ उनके बेटे की पीड़ा को एक अर्थ देता है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा बनता है. इतने सालों तक बेटे को इस हालत में देखना किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय होता है, लेकिन उन्होंने हर पल धैर्य और हिम्मत दिखाई. अब इस सच्ची घटना पर फिल्म बनाने की योजना भी सामने आई है. एक राइटर प्रोड्यूसर ने इस कहानी को बड़े पर्दे पर लाने की इच्छा जताई है और इसके लिए बातचीत भी शुरू हो चुकी है. हालांकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल जल्दबाजी नहीं की जा रही है. हरीश राणा की कहानी सिर्फ दर्द और अंत की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्यार, त्याग और इंसानियत की गहराई को भी दर्शाती है. जब यह कहानी बड़े पर्दे पर आएगी, तो शायद हर दर्शक के दिल में कई सवाल और भावनाएं छोड़ जाएगी. यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि मुश्किल हालात में भी इंसानियत और संवेदनशीलता सबसे बड़ी ताकत होती है.

चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान, जानें क्या संकेत दे रहा है समय

नई दिल्ली। देशभर में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से हो चुका है और श्रद्धालु माँ भवानी के नौ रूपों की आराधना में जुटे हैं। नवरात्रि न केवल हिंदू नववर्ष का प्रतीक है, बल्कि देवी के आगमन और प्रस्थान की सवारी भविष्य के शुभ-अशुभ संकेतों का मार्गदर्शन भी करती है। इस वर्ष मां जगदंबा का आगमन गुरुवार को पालकी पर हुआ, जबकि प्रस्थान शुक्रवार को हाथी पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, पालकी पर आगमन सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता। यह प्राकृतिक आपदाओं, सामाजिक उपद्रव, दंगे या आर्थिक चुनौतियों का संकेत दे सकता है। गुरुवार को आगमन से जुड़े संकेतों को सावधानी और वित्तीय सतर्कता से जोड़ा जा रहा है। वहीं, प्रस्थान का समय और सवारी विशेष महत्व रखते हैं। शुक्रवार को मां का हाथी पर प्रस्थान शुभ माना गया है। हाथी स्थिरता, सुख-संपत्ति और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। इसका अर्थ है कि आने वाला समय अप्रिय घटनाओं के साथ-साथ जीवन में स्थिरता और अवसर भी लाएगा। शास्त्रों के अनुसार वार दिन और सवारी का तालमेल भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है। उदाहरण के लिए: रविवार और सोमवार को प्रस्थान – भैंसे की सवारी- रोग, शोक, अशुभता। मंगलवार और शनिवार को प्रस्थान – मुर्गा की सवारी – महामारी और जनहानि। बुधवार और शुक्रवार को प्रस्थान – हाथी की सवारी – सुख, समृद्धि और स्थिरता। गुरुवार को प्रस्थान – मानव पर सवार – भक्त पर विशेष कृपा और जीवन में संतुलन। इस साल आगमन पालकी पर और प्रस्थान हाथी पर होने से मिश्रित संकेत मिलते हैं। आगमन से सावधानी और चुनौतियों की चेतावनी मिलती है, जबकि प्रस्थान सुख-समृद्धि और स्थिरता की संभावना दर्शाता है। ऐसे में यह समय जीवन में सतर्क रहकर अवसरों का लाभ उठाने का प्रतीक है। पिछले वर्ष शारदीय नवरात्रि में मां का आगमन हाथी पर हुआ था और प्रस्थान भक्तों के कंधे पर हुआ था। यह दोनों ही शुभ संकेतों का प्रतीक थे। इस वर्ष के संकेत कुछ मिश्रित हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार सावधानी के साथ श्रद्धा और कर्म से जीवन में संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

रणवीर सिंह की धुरंधर 2 को मिला साउथ का सपोर्ट महेश बाबू और जूनियर एनटीआर ने कही बड़ी बात

नई दिल्ली:फिल्म धुरंधर 2 द रिवेंज इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है और रिलीज के साथ ही चर्चा का बड़ा विषय बन गई है. जहां एक तरफ फिल्म ने शानदार कमाई करते हुए भारत में 139 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शन भी तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि फिल्म को दर्शकों से मिले-जुले रिव्यू मिल रहे हैं, लेकिन साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों ने इसे लेकर खुलकर तारीफ की है. सुपरस्टार महेश बाबू ने सोशल मीडिया पर फिल्म की सराहना करते हुए इसे एक शानदार सिनेमैटिक अनुभव बताया. उन्होंने खासतौर पर रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस की तारीफ की और कहा कि यह उनका अब तक का सबसे बेहतरीन अवतार है. इसके साथ ही उन्होंने फिल्म के निर्देशक आदित्य धर की भी जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने हर फ्रेम को परफेक्शन के साथ पेश किया है. महेश बाबू ने फिल्म के म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर को भी खास बताया, जिससे फिल्म का इमोशनल और एक्शन प्रभाव और मजबूत हुआ. वहीं दूसरी ओर जूनियर एनटीआर ने भी फिल्म को लेकर लंबा चौड़ा रिएक्शन शेयर किया. उन्होंने पूरी टीम की तारीफ करते हुए कहा कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिए एक दमदार पेशकश है. जूनियर एनटीआर ने रणवीर सिंह की एक्टिंग को शानदार बताया और कहा कि उन्होंने स्क्रीन पर एक अलग ही स्तर की परफॉर्मेंस दी है. उन्होंने आगे आर माधवन, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल के अभिनय की भी सराहना की और कहा कि सभी कलाकारों ने अपने किरदारों को पूरी गहराई और मजबूती के साथ निभाया है. खासतौर पर फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर शाश्वत सचदेव के काम को उन्होंने अलग ही स्तर का बताया, जिसने हर सीन को और ज्यादा प्रभावी बना दिया. जूनियर एनटीआर ने एक अलग पोस्ट में अक्षय खन्ना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इस फ्रेंचाइजी की मजबूत नींव रखी थी. पार्ट 1 में उनका शांत लेकिन खतरनाक अंदाज आज भी यादगार है और उनकी परफॉर्मेंस ने फिल्म को एक अलग पहचान दी थी. फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त चर्चा हो रही है. जहां एक तरफ फैंस अपने पसंदीदा सितारों की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि रिलीज के पहले ही दिन दोनों साउथ सुपरस्टार्स ने फिल्म कैसे देख ली. इस पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिसमें कुछ लोग मजाक कर रहे हैं तो कुछ इसे प्रमोशन का हिस्सा बता रहे हैं. धुरंधर 2 द रिवेंज ने रिलीज के साथ ही एक बड़ा माहौल बना दिया है. फिल्म की कमाई, स्टार पावर और बड़े सितारों की तारीफ ने इसे और भी चर्चा में ला दिया है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितनी दूर तक जाती है और दर्शकों के दिलों में कितनी गहरी छाप छोड़ पाती है.

गर्मियों में सूरज की तीखी धूप से जलती त्वचा? अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय

नई दिल्ली। गर्मी में महिलाओं को अक्सर कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है उसमें से एक है स्क्रीन। आप कितना भी स्क्रीन केयर कर लें लेकिन गर्मी में इसमें कई बदलाव देखने को मिलते हैं। कई लोगों को बाहर निकलते ही त्वचा में जलन, लालपन और टैनिंग की समस्या होने लगती है।तो चलिए इसके लिए कुछ उपाय जानते हैं। इस प्रकार गर्मी में स्क्रीन का ध्यानगर्मी शुरू होते ही स्क्रीन पर काफी प्रभाव पड़ता है जिसके कारण आपकी त्वचा से निखार दूर जाने लगता है। ऐसे में ये जरूरी है कि, गर्मियों में अपनी त्वचा की खास देखभाल की जाए। कुछ आसान और रोजाना अपनाए जाने वाले स्किन केयर टिप्स आपकी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रख सकते हैं। सनस्क्रीन लगाना हमेशा रखें यादगर्मी में घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी होता है। तेज धूप में मौजूद यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए बाहर जाने से करीब 20 मिनट पहले एसपीएफ 30 या उससे ज्यादा वाली सनस्क्रीन जरूर लगाएं। त्वचा को रखें हाइड्रेटेडगर्मी में शरीर के साथ-साथ त्वचा को भी हाइड्रेशन की जरूरत होती है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और त्वचा भी फ्रेश और ग्लोइंग नजर आती है। अगर यह आप बरकरार रखती हैं तो आपकी त्वचा में हमेशा निखार और ग्लो बना रहेगा। दिन में दो-तीन बार धोने फेसबाहर कई प्रकार की धूल,मिट्टी गर्म हवाएं और पसीना आपके चेहरे को खराब कर देती है।इसलिए सुबह और रात को चेहरे को अच्छे फेसवॉश से साफ करना चाहिए। इससे स्किन साफ रहती है और पिंपल्स की समस्या भी कम होती है। धूप से बचाव करेंतेज धूप में बाहर निकलते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे त्वचा सीधे धूप के संपर्क में आने से बच जाती है और टैनिंग की समस्या भी कम होती है।

DATIYA RAPE CASE: घर छोड़ने के बनाए युवती के साथ दुष्कर्म, आरोपी के खिलाफ POSCO एक्ट के तहत मामला दर्ज

DATIYA WOMEN RAPED

HIGHLIGHTS: • घटना 27 नवंबर 2025 को बड़ौनी के पास जंगल में हुई • आरोपी ने बच्चे को बहाना बनाकर महिला को अलग-थलग किया • परिवार को मारने की धमकी से तीन महीने चुप रही पीड़िता • हालिया उत्पीड़न के बाद गुरुवार को दर्ज हुई शिकायत • दुष्कर्म और POCSO धाराओं में केस, जांच तेज DATIYA RAPE CASE: ग्वालियर। दतिया के जिगना पुलिस थाना क्षेत्र के एक गांव में 22 वर्षीय विवाहित महिला ने स्थानीय युवक पर जबरन दुष्कर्म करने और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। बता दें कि पीड़िता ने गुरुवार को थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने रात में ही मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस पर रेखांकित किया: आनंद धन से नहीं, अंतस से आता है मायके से लौटते समय हुआ हादसा पीड़िता ने बताया कि करीब चार महीने पहले पति से विवाद के बाद वह मायके चली गई थीं। 27 नवंबर 2025 को बीमार बच्चे की दवा दिलाने वह बड़ौनी आई थीं। इसी दौरान गांव का एक युवक आया और घर छोड़ने के बहाने मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गया। टी20 सीरीज में न्यूज़ीलैंड का दबदबा, तीसरे मैच में SA को दी 8 विकेट से मात जंगल में बच्चे को बनाया बंधक आरोप है कि रास्ते में फॉरेस्ट क्षेत्र के पास आरोपी ने बाइक रोकी। बच्चे को शौच के बहाने झाड़ियों में ले गया और फिर महिला को जबरदस्ती खींचकर अंदर ले गया। वहां बच्चे को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी ने उसे बड़ौनी टैक्सी स्टैंड पर छोड़ दिया और किसी को बताने पर पूरे परिवार को मार डालने की धमकी दी। “पंजाब किंग्स को चैंपियन बनाना मेरा लक्ष्य”: सूर्यांश शेडगे का आत्मविश्वासी बयान डर के साये में तीन महीने चुप रही डर के कारण पीड़िता ने लंबे समय तक किसी को कुछ नहीं बताया। हाल ही में आरोपी द्वारा फिर से परेशान करने और पीछा करने पर उसने हिम्मत जुटाई, पति और परिजनों को पूरी घटना बताई और गुरुवार को जिगना थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र पुलिस ने तेज की कार्रवाई पुलिस ने दुष्कर्म, आपराधिक धमकी और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, आरोपी की पहचान हो चुकी है। टीम गठित कर उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की जारी है। साथ ही मेडिकल जांच और फॉरेंसिक सबूत जुटाए जा रहे हैं।

एक तस्वीर ने बदली जिंदगी परवीन बाबी से मिलने आया शख्स बना 80s का खतरनाक विलेन

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के 80 और 90 के दशक को याद किया जाए तो जहां एक तरफ दमदार हीरो का दौर था, वहीं दूसरी तरफ खतरनाक विलेन भी फिल्मों की जान हुआ करते थे. इसी दौर में एक ऐसा विदेशी चेहरा बार-बार बड़े पर्दे पर दिखाई देता था, जिसने अपनी मजबूत कद-काठी और डरावने अंदाज से दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली. यह अभिनेता थे बॉब क्रिस्टो, जिनकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. 20 मार्च 1938 को सिडनी में जन्मे बॉब क्रिस्टो का असली नाम रॉबर्ट जॉन क्रिस्टो था. वह पेशे से सिविल इंजीनियर थे और पढ़ाई के साथ-साथ थिएटर में भी रुचि रखते थे. उनकी जिंदगी सामान्य ढंग से चल रही थी, लेकिन एक दुखद घटना ने सबकुछ बदल दिया. उनकी पत्नी का एक सड़क हादसे में निधन हो गया, जिससे वह पूरी तरह टूट गए और उनकी जिंदगी एक नए मोड़ की ओर मुड़ गई. उनकी जिंदगी का सबसे दिलचस्प अध्याय तब शुरू हुआ जब उन्होंने एक मैगजीन के कवर पर मशहूर अभिनेत्री परवीन बाबी की तस्वीर देखी. इस एक तस्वीर ने उन पर ऐसा असर डाला कि वह उनसे मिलने भारत चले आए. मुंबई पहुंचकर उन्होंने परवीन बाबी को ढूंढ निकाला और उनसे मुलाकात की. यही मुलाकात उनकी किस्मत बदलने वाली साबित हुई. परवीन बाबी की मदद से उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री मिली और फिल्म अब्दुल्ला के जरिए उन्हें पहला बड़ा मौका मिला. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 80 और 90 के दशक में वह बॉलीवुड के सबसे चर्चित विदेशी विलेन बन गए. उनकी दमदार पर्सनैलिटी और एक्शन सीन ने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दिलाई. उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में काम किया, जिनमें कालिया, नमक हलाल, मर्द और मिस्टर इंडिया शामिल हैं. खास बात यह रही कि उनकी भिड़ंत अक्सर महानायक अमिताभ बच्चन और सुपरस्टार धर्मेंद्र जैसे सितारों के साथ होती थी. जब भी वह स्क्रीन पर इन बड़े सितारों के सामने आते, तो थिएटर में सीटियां और तालियां गूंज उठती थीं. बॉब क्रिस्टो की लंबी-चौड़ी काया और रौबदार व्यक्तित्व उन्हें परफेक्ट विलेन बनाता था. उन्होंने अपने करियर में करीब 200 फिल्मों में काम किया और हिंदी के साथ-साथ साउथ सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई. उनकी मौजूदगी ही किसी भी फिल्म में खतरे का एहसास पैदा कर देती थी. हालांकि समय के साथ उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली और बेंगलुरु में बस गए. वहां उन्होंने योगा इंस्ट्रक्टर के रूप में एक नई जिंदगी शुरू की. ग्लैमर की दुनिया से दूर वह एक साधारण जीवन जीने लगे. 20 मार्च 2011 को 72 साल की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी यादें आज भी फिल्मों के जरिए जिंदा हैं. बॉब क्रिस्टो की कहानी यह साबित करती है कि कभी-कभी एक छोटा सा पल या एक तस्वीर भी किसी इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकती है.

सलमान खान के साथ नजर आने वाला ये हीरो आज निभाता है पिता के रोल पहचानना मुश्किल

नई दिल्ली:बॉलीवुड की दुनिया में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपनी शुरुआत तो शानदार की लेकिन समय के साथ उनका करियर एक अलग मोड़ लेता चला गया. ऐसे ही एक अभिनेता हैं विवेक मुशरन, जिन्हें एक समय में चॉकलेट हीरो के रूप में जाना जाता था. उनकी मासूमियत और क्यूट लुक ने दर्शकों का दिल जीत लिया था लेकिन अब वही अभिनेता पूरी तरह बदल चुके हैं और उन्हें पहचान पाना भी आसान नहीं है. विवेक मुशरन ने फिल्म सौदागर से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. यह फिल्म उस दौर में काफी चर्चित रही और दर्शकों ने विवेक को खूब पसंद किया. उनके अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें एक उभरता हुआ स्टार बना दिया था. उस समय यह माना जा रहा था कि वह इंडस्ट्री के बड़े नामों में शामिल हो सकते हैं. हालांकि आगे चलकर उनका करियर उस दिशा में नहीं बढ़ पाया जिसकी उम्मीद की जा रही थी. हाल ही में उनका एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वह सुपरस्टार सलमान खान के साथ नजर आ रहे हैं. इस वीडियो में उनकी मासूमियत और उस दौर की सादगी साफ झलकती है. दिलचस्प बात यह है कि इस वीडियो में सलमान खान और एंकर के बीच हल्की बहस चल रही है, जबकि विवेक शांत बैठे दिखाई दे रहे हैं. फैंस इस वीडियो को देखकर हैरान हैं और पुराने दिनों को याद कर रहे हैं. फिल्मों में कुछ शुरुआती सफलताओं के बाद विवेक मुशरन का करियर धीरे धीरे साइड रोल्स की तरफ मुड़ गया. उन्होंने कई फिल्मों में छोटे लेकिन महत्वपूर्ण किरदार निभाए. इसके बाद उन्होंने टीवी इंडस्ट्री का रुख किया जहां उन्हें एक नया मंच मिला. छोटे पर्दे पर भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई और कई लोकप्रिय शोज का हिस्सा बने. टीवी सीरियल सोनपरी में उनका किरदार काफी चर्चित रहा और यह शो उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है. इसके अलावा वह कई अन्य टीवी सीरियल्स में भी नजर आए और अपने अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन करते रहे. समय के साथ उन्होंने अपने करियर को एक नई दिशा दी और खुद को लगातार एक्टिव बनाए रखा. आज की बात करें तो विवेक मुशरन का लुक पूरी तरह बदल चुका है. उनके बाल, चेहरा और पर्सनैलिटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. एक समय में जो अभिनेता युवा और चॉकलेटी हीरो के रूप में जाने जाते थे, आज वे पिता के किरदार निभाते नजर आते हैं. उनके किरदारों में अब परिपक्वता और अनुभव साफ दिखाई देता है. विवेक सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं और अपने प्रोजेक्ट्स और निजी जीवन से जुड़ी अपडेट्स फैंस के साथ साझा करते हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी शॉर्ट फिल्म ‘जिद’ के बारे में जानकारी दी, जो एक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में चयनित हुई है. यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है और उनके करियर में एक नई पहचान जोड़ती है.

नवरात्रि व्रत में मखाना: हल्का, पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर, व्रत का सर्वोत्तम आहार

नई दिल्ली । नवरात्रि के नौ दिवसीय व्रत में आहार का चुनाव बहुत मायने रखता है। आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञ मानते हैं कि मखाना व्रत के लिए सबसे अच्छा और सात्विक आहार है। यह हल्का आसानी से पचने वाला और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। मखाने का सेवन शरीर को ऊर्जा देता है थकान दूर करता है और व्रत के दौरान कमजोरी नहीं होने देता। उत्तर प्रदेश कल्चरल डिपार्टमेंट के अनुसार व्रत का असली सार है आस्था अनुशासन और स्वास्थ्य का संतुलन। मखाना इस संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। मखाने के स्वास्थ्य लाभ ऊर्जा और ताकत: मखाना में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में होते हैं जिससे लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है और व्रत के दौरान भूख और कमजोरी कम लगती है। पाचन स्वास्थ्य: इसमें हाई फाइबर पाया जाता है जिससे पाचन सुधरता है कब्ज नहीं होती और पेट हल्का रहता है। ब्लड शुगर नियंत्रण: मखाने में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है इसलिए यह डायबिटीज में भी फायदेमंद है। दिल और हड्डियां: पोटैशियम और मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखते हैं जबकि कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है। इम्यूनिटी और त्वचा: एंटीऑक्सीडेंट से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है सूजन कम होती है और त्वचा स्वस्थ रहती है। वजन नियंत्रण: कम कैलोरी और हाई फाइबर होने के कारण यह वजन बढ़ने नहीं देता। व्रत में मखाने का सेवन मखाना को कई तरीकों से खाया जा सकता है: घी में भूनकर: कुरकुरे और स्वादिष्ट स्नैक के रूप में। दूध में डालकर खीर: मीठा और पौष्टिक विकल्प। सादा स्नैक: हल्का और आसानी से पचने वाला।इस प्रकार मखाना न सिर्फ व्रत को सात्विक और पौष्टिक बनाता है बल्कि शरीर और मन को हल्का ऊर्जा से भरपूर और स्वस्थ रखता है।