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बॉर्डर पार भी बॉलीवुड का क्रेज मर्दानी 3 टॉप पर ,धुरंधर समेत ये फिल्में भी ट्रेंड में

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा का जादू केवल देश तक सीमित नहीं है बल्कि सरहदों के पार भी इसका असर साफ दिखाई देता है। इसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान में देखने को मिल रहा है जहां नेटफ्लिक्स पर कई भारतीय फिल्में जबरदस्त तरीके से ट्रेंड कर रही हैं। खास बात यह है कि इस लिस्ट में बड़े बजट और चर्चित फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए एक सस्पेंस क्राइम थ्रिलर ने नंबर वन की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। इस समय पाकिस्तान में जो भारतीय फिल्म सबसे ज्यादा देखी जा रही है वह है मर्दानी 3। रानी मुखर्जी की यह फिल्म दर्शकों को बेहद पसंद आ रही है और वह एक बार फिर पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में मजबूत और दमदार अंदाज में नजर आ रही हैं। फिल्म की कहानी और उसका सस्पेंस दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में कामयाब रहा है जिसकी वजह से यह टॉप पोजीशन पर बनी हुई है। दूसरे नंबर पर जगह बनाई है वध 2 ने जो अपनी गहरी कहानी और दमदार अभिनय के कारण चर्चा में है। संजय मिश्रा और नीना गुप्ता जैसे अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी इस फिल्म को और खास बनाती है। यह फिल्म अपने इमोशनल और थ्रिलिंग कंटेंट के कारण दर्शकों से जुड़ने में सफल रही है। वहीं तीसरे स्थान पर ट्रेंड कर रही है धुरंधर जो पहले से ही चर्चा में रही है। रणवीर सिंह की इस फिल्म का ओटीटी पर भी शानदार प्रदर्शन जारी है। हालांकि बड़े पैमाने पर चर्चा में रहने के बावजूद यह मर्दानी 3 से पीछे रह गई है जो अपने आप में दिलचस्प बात है। इसके अलावा लिस्ट में हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस भी शामिल है जिसका दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। फिल्म में कॉमेडी और जासूसी का मिश्रण दर्शकों को खूब एंटरटेन कर रहा है और यही वजह है कि यह भी ट्रेंडिंग लिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए है। पुरानी फिल्मों का क्रेज भी कम नहीं हुआ है। मर्दानी 2 और मर्दानी भी पाकिस्तान में लगातार ट्रेंड कर रही हैं। यह दिखाता है कि मजबूत कहानी और दमदार किरदार वाली फिल्मों की लोकप्रियता समय के साथ कम नहीं होती बल्कि और बढ़ती जाती है। इस पूरी लिस्ट से एक बात साफ हो जाती है कि भारतीय फिल्मों की पहुंच अब वैश्विक हो चुकी है। कंटेंट अगर दमदार हो तो भाषा और सीमाएं मायने नहीं रखतीं। खासकर सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर जैसी शैलियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी पसंद किया जा रहा है। पाकिस्तान में इन फिल्मों का ट्रेंड करना इस बात का संकेत है कि दर्शक अब केवल मसाला एंटरटेनमेंट ही नहीं बल्कि मजबूत कहानी और बेहतरीन अभिनय को भी महत्व दे रहे हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है जहां भारतीय फिल्में दुनिया के अलग अलग हिस्सों में अपनी पहचान और भी मजबूत करेंगी।

सिनेमाई उत्कृष्टता के लिए कलाकार का अटूट समर्पण और साहसी स्टंट बना चर्चा का विषय।

नई दिल्ली : भारतीय सिनेमा के इतिहास में साहसी स्टंट और जोखिम भरे एक्शन दृश्यों के लिए मशहूर कलाकारों ने समय-समय पर अपनी सीमाओं को चुनौती दी है। इसी कड़ी में एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है जहाँ एक बड़े बजट की फिल्म के फिल्मांकन के दौरान गहरे नीले समुद्र के भीतर खतरनाक शार्क मछलियों के बीच एक्शन दृश्य को अंजाम दिया गया। इस दृश्य की मांग इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि कलाकार को बिना किसी सुरक्षा पिंजरे के पानी की गहराइयों में उतरना पड़ा। मनोरंजन जगत में वास्तविकता का पुट डालने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम ने न केवल तकनीकी टीम को हैरत में डाल दिया बल्कि कलाकार के जीवन पर भी एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया था। समुद्र के भीतर फिल्माए गए इस सीक्वेंस के दौरान दर्जनों शिकारी शार्क मछलियां कलाकार के बेहद करीब तैर रही थीं। दृश्य को प्रभावी बनाने के लिए कलाकार को पानी के भीतर काफी समय तक अपनी सांसें रोककर और बिना किसी विशेष सुरक्षा उपकरण के अभिनय करना था। शूटिंग के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब शार्क मछलियों का व्यवहार अप्रत्याशित हो गया और वहां मौजूद विशेषज्ञों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। पानी के भीतर ऑक्सीजन और दबाव के साथ तालमेल बिठाना पहले से ही कठिन था और ऊपर से इन हिंसक जीवों की मौजूदगी ने स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बना दिया था। इस जानलेवा जोखिम के पीछे का मुख्य कारण पर्दे पर दर्शकों को एक वास्तविक और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करना था। वर्तमान दौर में जहाँ अधिकांश दृश्यों के लिए कंप्यूटर ग्राफिक्स और विशेष प्रभावों का सहारा लिया जाता है वहीं इस कलाकार ने प्राकृतिक और वास्तविक माहौल में काम करने को प्राथमिकता दी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दृश्यों में जरा सी चूक भी प्राणघातक साबित हो सकती है। कलाकार ने इस जोखिम को स्वीकार करते हुए न केवल अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता दिखाई बल्कि यह भी साबित किया कि एक उत्कृष्ट रचना के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। फिल्मांकन के बाद जब इस घटना का विवरण साझा किया गया तो सिनेमा जगत में सुरक्षा मानकों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि टीम के साथ पेशेवर गोताखोर और चिकित्सा कर्मी तैनात थे लेकिन शार्क के हमले की स्थिति में बचाव की गुंजाइश बहुत कम होती है। यह अनुभव उस कलाकार के करियर के सबसे साहसी और चुनौतीपूर्ण क्षणों में से एक बन गया है। इस साहसिक कदम ने फिल्म निर्माण की कला के प्रति उनके समर्पण को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है और दर्शकों के बीच इस आगामी दृश्य को लेकर उत्सुकता कई गुना बढ़ गई है।

VFX, CGI और SFX में क्या फर्क है? जानिए फिल्मों का असली ‘जादू’ कैसे बनता है

नई दिल्ली। फिल्म निर्माण अब सिर्फ कैमरे और कलाकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक हाई-टेक आर्ट बन चुका है, जिसमें कल्पना को हकीकत जैसा दिखाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाता है। ‘बाहुबली’ के विशाल किले हों या ‘एवेंजर्स’ की अंतरिक्ष जंग इन सबके पीछे मुख्य रूप से तीन तकनीकों का योगदान होता है: VFX, CGI और SFX। हाल ही में ‘रामायण’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट की चर्चा के बीच एक बार फिर ये शब्द सुर्खियों में हैं। हालांकि आम दर्शक इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन असल में इन तीनों का काम और तरीका बिल्कुल अलग होता है। SFX यानी स्पेशल इफेक्ट्स: जो कैमरे के सामने होता है असली जादूSFX यानी स्पेशल इफेक्ट्स वे प्रभाव होते हैं जिन्हें फिल्म की शूटिंग के दौरान ही सेट पर तैयार किया जाता है। इसे ‘प्रैक्टिकल इफेक्ट्स’ भी कहा जाता है क्योंकि इसमें कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं होता। उदाहरण के तौर पर अगर किसी सीन में विस्फोट दिखाना है, बारिश करवानी है, नकली खून दिखाना है या फिर टूटते हुए शीशे का दृश्य फिल्माना है, तो ये सब SFX के अंतर्गत आता है। पुराने जमाने की फिल्मों में रोबोट, मिनिएचर सेट या यांत्रिक उपकरणों से बनाए गए दृश्य भी इसी श्रेणी में आते हैं। इसकी खास बात यह है कि यह रियल टाइम में कैमरे के सामने शूट होता है, जिससे दृश्य अधिक वास्तविक महसूस होता है। CGI: जब कंप्यूटर बनाता है पूरी नई दुनियाCGI यानी Computer Generated Imagery वह तकनीक है जिसमें पूरी तरह डिजिटल दुनिया बनाई जाती है। इसमें कंप्यूटर की मदद से 3D मॉडल, एनिमेशन और ग्राफिक्स तैयार किए जाते हैं। यह उन चीजों को पर्दे पर दिखाने के लिए इस्तेमाल होता है जो असल दुनिया में मौजूद ही नहीं हैं या जिन्हें बनाना बेहद महंगा या असंभव है। जैसे किसी फिल्म में विशाल ड्रैगन, एलियन ग्रह या अवास्तविक पात्र ये सब CGI का कमाल होते हैं। इसमें शूटिंग के दौरान असली सेट की जरूरत नहीं होती, बल्कि पूरा दृश्य कंप्यूटर में तैयार किया जाता है और बाद में उसे फिल्म में जोड़ा जाता है। VFX: असली और डिजिटल दुनिया का परफेक्ट मेलVFX यानी Visual Effects सबसे व्यापक तकनीक है, जो असली शूट की गई फुटेज और CGI का संयोजन होती है। इसका उपयोग पोस्ट-प्रोडक्शन यानी शूटिंग के बाद किया जाता है। उदाहरण के लिए किसी अभिनेता को ग्रीन स्क्रीन के सामने शूट किया जाता है और बाद में उसके पीछे जलता हुआ शहर, पहाड़ या काल्पनिक दुनिया जोड़ दी जाती है। VFX का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि डिजिटल और असली फुटेज इतने सहज तरीके से मिल जाएं कि दर्शक को फर्क ही न दिखे। आज के समय में लगभग हर बड़ी फिल्म में VFX का भारी इस्तेमाल होता है। फिल्म देखते वक्त कैसे पहचानें फर्क?अगर आप ध्यान से देखें तो इन तकनीकों में फर्क पहचानना संभव है। जहां असली विस्फोट, बारिश या सेट पर बनी चीजें दिखें, वह SFX है। अगर कोई पूरी तरह काल्पनिक जीव या दुनिया दिखे जो असली लगने के बावजूद वास्तविक नहीं हो सकती, तो वह CGI है। वहीं जब असली शूटिंग के साथ डिजिटल बैकग्राउंड या बदलाव जोड़े गए हों, तो वह VFX होता है। हालांकि आधुनिक फिल्मों में इतनी सफाई से काम होता है कि कई बार इन्हें अलग पहचानना मुश्किल हो जाता है।  कल्पना को हकीकत बनाने की कलाआज फिल्म इंडस्ट्री में ये तीनों तकनीकें मिलकर सिनेमा को एक नया आयाम दे रही हैं। दर्शकों को अब ऐसी दुनिया देखने को मिलती है जो पहले सिर्फ कल्पना में ही संभव थी। आने वाले समय में ‘रामायण’ जैसे प्रोजेक्ट्स इन तकनीकों के और भी उन्नत रूप को सामने लाएंगे, जिससे भारतीय सिनेमा का स्तर वैश्विक स्तर पर और ऊंचा होगा।

आशा भोसले का खुलासा: हिमेश रेशमिया को थप्पड़ मारने की बात, आरडी बर्मन पर कही दिलचस्प बात

नई दिल्ली।भारतीय संगीत की महान गायिका आशा भोसले अपने पति और दिग्गज संगीतकार आर. डी. बर्मन की विरासत को लेकर बेहद संवेदनशील मानी जाती थीं। वे कभी भी उनके काम या योगदान पर किसी तरह की नकारात्मक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करती थीं।इसी सख्त रवैये के कारण साल 2006 में एक बड़ा विवाद सामने आया, जब उनका नाम मशहूर सिंगर और कंपोजर हिमेश रेशमिया से जुड़ा।  कैसे शुरू हुआ विवाद?उस समय हिमेश रेशमिया अपने “नाक से गाने” वाले स्टाइल को लेकर काफी चर्चा में थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने स्टाइल का बचाव करते हुए कुछ दिग्गज कलाकारों का उदाहरण दिया, जिसमें R.D. बर्मन का नाम भी शामिल था।यही बात आशा भोसले को बेहद आपत्तिजनक लगी। आशा भोसले का तीखा जवाबइस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए आशा भोसले ने कड़ा रुख अपनाया और कहा कि अगर कोई आर.डी. बर्मन के बारे में गलत टिप्पणी करता है तो “उसे थप्पड़ मारना चाहिए।”उनका यह बयान उस समय मीडिया में काफी सुर्खियों में रहा और संगीत जगत में बहस छिड़ गई। बाद में कैसे सुलझा मामला?विवाद बढ़ने के बाद हिमेश रेशमिया ने अपनी बात पर स्पष्टीकरण दिया और माना कि उन्हें किसी महान कलाकार का उदाहरण देने से पहले सोच-समझकर बोलना चाहिए था।इसके बाद उन्होंने आशा भोसले से माफी मांगी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। रिश्ते फिर हुए सामान्यमाफी के बाद दोनों के बीच तनाव खत्म हो गया और बाद में आशा भोसले ने हिमेश रेशमिया के लिए गाने भी गाए। इससे साफ हुआ कि व्यक्तिगत नाराजगी के बावजूद वे प्रोफेशनल रिश्तों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखती थीं।

सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर किया लॉन्च

नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में श्री बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर जारी किया। इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव, स्वामी चिदानंद सरस्वती, फिल्म के निर्देशक शरद सिंह ठाकुर सहित कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति और कलाकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का माहौल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से ओतप्रोत नजर आया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह फिल्म केवल एक मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और मानवता के मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों पर आधारित फिल्में समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं। सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन और उनके विचारों को याद करते हुए कहा कि उनका दिव्य व्यक्तित्व आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बाबा की शिक्षाएं सरलता, करुणा, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं और समाज को दिशा देने का कार्य करती हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संत परंपरा और सनातन संस्कृति के मूल्यों को सहेजना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की आध्यात्मिक फिल्मों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति जागरूक किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशक और निर्माण टीम की सराहना करते हुए उन्हें इस प्रयास के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और लोगों को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करेगी। इस आयोजन को उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो संत परंपरा के महान व्यक्तित्वों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

Athiya Shetty Controversy : आशा भोसले को श्रद्धांजलि देते समय अथिया शेट्टी ने अनजाने में साझा की लता मंगेशकर की फोटो।

Athiya Shetty Controversy : नई दिल्ली।भारतीय फिल्म जगत में अपनी एक अलग पहचान रखने वाली अभिनेत्री अथिया शेट्टी इन दिनों एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण चर्चा और विवादों के केंद्र में आ गई हैं। हाल ही में दिग्गज गायिका आशा भोसले के निधन की खबर के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई और मनोरंजन जगत की तमाम हस्तियों ने उन्हें भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की। इसी क्रम में अथिया शेट्टी ने भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए एक पोस्ट साझा किया लेकिन उसमें हुई एक तकनीकी या मानवीय चूक ने नेटिजन्स का ध्यान खींच लिया। अभिनेत्री ने आशा भोसले को नमन करते हुए अनजाने में स्वर कोकिला लता मंगेशकर की तस्वीर साझा कर दी जिसके बाद उन्हें तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले दर्शकों ने इस चूक को तुरंत पकड़ लिया और इसे एक गैर जिम्मेदार व्यवहार करार दिया। ट्रोल करने वालों का तर्क है कि फिल्म उद्योग से जुड़ी एक हस्ती होने के नाते इतनी बड़ी चूक होना निराशाजनक है। लोगों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि बिना जांचे परखे इतनी महान विभूतियों के बारे में जानकारी साझा करना उनकी गरिमा के अनुकूल नहीं है। हालांकि कुछ प्रशंसकों ने इसे एक मानवीय भूल बताते हुए अभिनेत्री का बचाव भी किया लेकिन तब तक यह मुद्दा इंटरनेट पर पूरी तरह वायरल हो चुका था और बहस का विषय बन गया था। अथिया शेट्टी के इस पोस्ट पर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई जिसमें लोगों ने उन्हें दोनों महान गायिकाओं के बीच अंतर समझाने की कोशिश की। कई यूजर्स ने लिखा कि श्रद्धांजलि देने की जल्दबाजी में तथ्यों और तस्वीरों की गरिमा का ध्यान रखना अनिवार्य होता है। फिल्म सितारों के लिए सोशल मीडिया एक ऐसा मंच है जहां उनकी हर छोटी बड़ी गतिविधि पर लाखों लोगों की नजर होती है और ऐसे में इस तरह की गलती उनकी संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर देती है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में कलाकारों को अपनी सार्वजनिक अभिव्यक्ति के प्रति अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। आशा भोसले के निधन से संगीत जगत के एक युग का अंत हो गया है और उनके प्रशंसक इस समय अत्यधिक भावुक हैं। ऐसे संवेदनशील समय में गलत तस्वीर का उपयोग होना प्रशंसकों की भावनाओं को आहत करने वाला सिद्ध हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि कलाकारों के सोशल मीडिया हैंडल अक्सर उनकी टीम द्वारा संचालित किए जाते हैं लेकिन अंतिम जिम्मेदारी कलाकार की ही मानी जाती है। इस विवाद के बाद अथिया शेट्टी ने हालांकि अपनी भूल सुधारने की कोशिश की होगी लेकिन स्क्रीनशॉट और चर्चाओं ने तब तक सोशल मीडिया के हर कोने में अपनी जगह बना ली थी। मनोरंजन जगत में अक्सर सितारों को उनकी छोटी-छोटी गलतियों के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है और अथिया शेट्टी के साथ हुआ यह वाकया भी इसी का उदाहरण है। यह घटना सेलिब्रिटी संस्कृति और सोशल मीडिया के दबाव के बीच एक संतुलन बनाने की चुनौती को दर्शाती है। जहां एक ओर पूरा देश संगीत जगत की महान हस्ती को खोने के गम में डूबा है वहीं दूसरी ओर इस तरह के विवाद मुख्य शोक समाचार से ध्यान भटकाने का काम करते हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि अभिनेत्री इस पूरे प्रकरण पर अपनी क्या सफाई देती हैं या वे इसे शांति से शांत होने का समय देती हैं।

आशा भोसले के निधन और अंतिम संस्कार की खबर अफवाह, आधिकारिक पुष्टि नहीं

नई दिल्ली। भारतीय संगीत की दिग्गज गायिका Asha Bhosle को आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है। 12 अप्रैल को 92 वर्ष की आयु में उनके निधन के बाद देशभर में शोक की लहर है। अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कारAsha Bhosle के पार्थिव शरीर को मुंबई स्थित उनके आवास पर रखा गया है, जहां दोपहर 3 बजे तक अंतिम दर्शन किए जा रहे हैं।इसके बाद शाम 4 बजे उनका अंतिम संस्कार Shivaji Park श्मशान भूमि में किया जाएगा। 🇮🇳 राजकीय सम्मान के साथ विदाई महान गायिका को तिरंगे में लपेटकर राजकीय सम्मान दिया गया। यह सम्मान भारतीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए है। हस्तियों ने दी श्रद्धांजलिRiteish Deshmukh ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कीSachin Tendulkar भावुक नजर आएTabu ने उनकी पोती को गले लगाकर सांत्वना दीA. R. Rahman ने भी अंतिम दर्शन किएपरिवार का हाल उनकी पोती जिनाई भोसले का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार और करीबी लोग उन्हें संभालते नजर आए। खास श्रद्धांजलि सैंड आर्टिस्ट Manas Sahoo ने उनके सम्मान में एक विशेष सैंड एनीमेशन बनाकर श्रद्धांजलि दी। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम अत्यधिक भीड़ और वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक की खास व्यवस्था की है, ताकि अंतिम विदाई सम्मानजनक तरीके से हो सके। “एक युग का अंत” गायिका Maithili Thakur ने कहा— “हम सभी उनके गाने सुनते हुए बड़े हुए हैं, यह एक युग का अंत है।” Asha Bhosle की आवाज भले ही अब खामोश हो गई हो, लेकिन उनकी धुनें और विरासत हमेशा पीढ़ियों तक गूंजती रहेंगी।ओम शांति

Asha Bhosle untold story : सफलता की ऊंचाइयों के बाद भी अधूरी रही ये ख्वाहिश, Asha Bhosle की भावुक कहानी

   Asha Bhosle untold story : नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत की महान हस्ती Asha Bhosle के निधन ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके जाने से न सिर्फ बॉलीवुड, बल्कि करोड़ों फैंस के दिलों में खालीपन आ गया है। रिकॉर्ड्स बनाए, लेकिन एक कमी रह गई अपने 70+ साल लंबे करियर में आशा ताई ने हजारों गाने गाकर अनगिनत रिकॉर्ड बनाए। हिंदी, मराठी, बंगाली से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में गाकर उन्होंने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। लेकिन इतनी बड़ी सफलता के बावजूद उनके मन में एक अधूरा सपना हमेशा रहा। health insurance system : हेल्थ इंश्योरेंस सिस्टम को ज्यादा सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की तैयारी… पढ़ाई और अंग्रेजी न सीख पाने का अफसोस Asha Bhosle को इस बात का जीवनभर अफसोस रहा कि उन्हें पढ़ाई का पूरा मौका नहीं मिला। उन्होंने खुद एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर उन्होंने अच्छी शिक्षा ली होती और अंग्रेजी भाषा सीखी होती, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी पहचान बना सकती थीं। उन्होंने बताया था कि जब वे विदेश जाती थीं और अंग्रेजी गाने सुनती थीं, तो उन्हें यह महसूस होता था कि काश वे भी उस स्तर पर गा पातीं। उस दौर की सोच बनी रुकावट आशा ताई ने यह भी कहा था कि उनके समय में महिलाओं की शिक्षा को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। समाज की सोच के कारण उन्हें पढ़ाई का मौका नहीं मिला, जिसका असर उनके करियर के एक हिस्से पर पड़ा। युवाओं को दिया संदेश उन्होंने युवाओं को हमेशा यही संदेश दिया कि सफलता के लिए मेहनत और सीखना बेहद जरूरी है। उनका मानना था कि अगर उन्हें सही शिक्षा मिली होती, तो वे और भी ऊंचाइयों तक पहुंच सकती थीं।

Yuzvendra Chahal controversy : युजवेंद्र चहल पर तानिया चटर्जी के आरोप, बोलीं-मैसेज कर ‘क्यूट’ कहा, सबूत भी दिखाए

   Yuzvendra Chahal controversy : नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका खेल नहीं बल्कि एक विवाद है। ‘उल्लू’ और ‘गंदी बात’ जैसी वेब सीरीज से पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस तानिया चटर्जी ने दावा किया है कि चहल ने उन्हें इंस्टाग्राम पर मैसेज किया और ‘क्यूट’ कहा। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और मामला तेजी से वायरल हो रहा है। क्या है पूरा मामला? तानिया चटर्जी ने एक वायरल वीडियो में पपराजी के सामने अपना इंस्टाग्राम डीएम दिखाते हुए कहा कि युजवेंद्र चहल ने उनके वीडियो पर रिएक्ट करते हुए उन्हें ‘क्यूट’ कहा। उन्होंने कैमरे के सामने यह भी कहा कि “क्यूट कहना तो आम बात है, बहुत लोग कहते हैं,” लेकिन इस खुलासे ने इंटरनेट पर हलचल जरूर मचा दी। क्या तानिया ने दिया जवाब? जब पपराजी ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने इस मैसेज का जवाब दिया, तो तानिया ने कहा कि उन्होंने मैसेज काफी देर से देखा और कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी। इस बयान के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर लोगों का रिएक्शन इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ लोग युजवेंद्र चहल को ट्रोल कर रहे हैं, तो कुछ इसे एक सामान्य बातचीत बता रहे हैं। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि क्या सिर्फ ‘क्यूट’ कहना इतना बड़ा मुद्दा है, जबकि कुछ ने इसे अनुचित बताया। कौन हैं तानिया चटर्जी? तानिया चटर्जी कोलकाता की रहने वाली एक्ट्रेस, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उन्होंने गंदी बात और Ullu जैसे प्लेटफॉर्म की वेब सीरीज में काम किया है। अपने बोल्ड रोल्स और सोशल मीडिया प्रेजेंस के चलते उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है।

Asha Bhosle unknown facts : आशा भोसले की जिंदगी के हैरान कर देने वाले राज, जानिए उनके सफर की खास बातें

   Asha Bhosle unknown facts : नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत की महान हस्ती आशा भोसले ने 12 अप्रैल 2026 को 92 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन से संगीत प्रेमियों को गहरा सदमा लगा है। आठ दशकों से भी लंबे करियर में उन्होंने हर तरह के संगीत में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। फिल्मी गीतों से लेकर गजल, भजन, पॉप और लोक संगीत तक हर शैली में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ ऐसे रोचक और अनसुने तथ्य, जो आपको हैरान कर देंगे। कम उम्र में संभाली जिम्मेदारी, यहीं से शुरू हुआ सफर बहुत कम लोग जानते हैं कि आशा भोसले के पिता दीनानाथ मंगेशकर एक प्रसिद्ध गायक और अभिनेता थे। लेकिन जब आशा सिर्फ 9 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने और उनकी बहन लता मंगेशकर ने परिवार की जिम्मेदारी उठाई और फिल्मों में गाना शुरू किया। यही से उनके संघर्ष और सफलता की कहानी की शुरुआत हुई। 10 साल की उम्र में गाया पहला गाना आशा भोसले ने बेहद छोटी उम्र में ही गायकी की दुनिया में कदम रख दिया था। उन्होंने महज 10 साल की उम्र में 1943 में मराठी फिल्म माझा बल के लिए अपना पहला गाना गाया। इतनी कम उम्र में शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर उन्हें संगीत की ऊंचाइयों तक ले गया। 20 भाषाओं में गाने गाकर बनाया रिकॉर्ड आशा ताई की सबसे बड़ी खासियत उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी। उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, भोजपुरी समेत करीब 20 भाषाओं में गाने गाए। यही वजह है कि उनकी आवाज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में सुनी और पसंद की जाती रही। गायिका ही नहीं, सफल बिजनेसवुमन भी थीं गायकी के अलावा आशा भोसले को खाना बनाने का भी बेहद शौक था। उन्होंने अपने इस शौक को बिजनेस में बदलते हुए साल 2002 में दुबई में ‘Asha’s’ नाम से रेस्टोरेंट शुरू किया। धीरे-धीरे यह ब्रांड बहरीन, कुवैत, कतर और यूके के शहरों तक फैल गया। इस तरह उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ सुरों की रानी ही नहीं, बल्कि एक सफल उद्यमी भी थीं। आखिरी गाने में भी दिखा प्रयोग का जादू अपने करियर के अंतिम पड़ाव में भी आशा भोसले ने संगीत के साथ प्रयोग करना नहीं छोड़ा। उनका आखिरी गाना ‘Shadoe Light’ ब्रिटिश बैंड Gorillaz के साथ था, जिसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत और पॉप का अनोखा मेल देखने को मिला। यह गाना उनके घर, मुंबई में रिकॉर्ड किया गया था।  हर दौर में कायम रही उनकी बादशाहत आशा भोसले का नाम उन कलाकारों में शामिल है, जिन्होंने समय के साथ खुद को ढाला और हर पीढ़ी के दिलों में जगह बनाई। उनकी आवाज में वह जादू था, जो हर मूड और हर दौर के लिए परफेक्ट था।