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दिल जीतने वाला फैसला! Shiv Thakare ने ‘The 50’ जीतकर फैन को दी पूरी प्राइज मनी

नई दिल्ली।‘द 50 शो’ (The 50) एक ऐसा रियलिटी शो था जहां पर 50 सेलेब्स आए और अपना गेम खेलते हुए नजर आएं। शो ‘द 50’ का पहला सीजन रविवार 22 मार्च को खत्म हो गया है। 1 फरवरी से शुरू हुए इस शो का खिताब शिव ठाकरे ने अपने नाम किया। 26 दिनों तक चले टास्क और दिमागी खेल के बाद शिव ने ट्रॉफी अपने नाम की। फाइनल में पहुंचे थे ये खिलाड़ीजब से शुरू हुआ था तो 50 लोग इसमें नजर आ रहे थे फिर धीरे-धीरे सब से बाहर निकलने लगे इसके बाद फिनाले में शिव ठाकरे का मिस्टर फैसु, काका, रजत दलाल और कृष्णा श्रॉफ के साथ मुकाबला हुआ और उन्होंने सबको मत देकर ट्रॉफी जीती। फैंस ने सोशल मीडिया पर शिव को बधाई दी और उनकी जीत को पूरी तरह से सही बताया। इस जीत के साथ, उन्होंने एक बार फिर रियलिटी शो में अपनी जबरदस्त फैन फॉलोइंग और लोकप्रियता साबित कर दी। कितनी मिली प्राइस मनीआपको बता दें कि, शिव ठाकरे को चमचमाती हुई द 50 की ट्रॉफी मिली लेकिन प्राइस मनी उन्हें नहीं बल्कि उनके फैन को मिली। द 50 का यही रुल था की प्राइस मनी आपको नहीं आपके फैन को मिलेगी आपको अपने फैंस के लिए इस शो को खेलना था और जितना था। इस पर शिव ठाकरे ने भी कहा, मुझे इस बात की सबसे ज्यादा खुशी है कि मेरे किसी एक चाहने वाले को 50 लाख का इनाम मिलेगा।मैं इस समय बहुत भावुक हूं और आने वाले कल के लिए बेहद उत्साहित हूं। जीत के बाद शिव ठाकरेट्रॉफी जीतने के बाद शिव ठाकरे ने कहा, ‘यह 50 का अनुभव मेरे लिए बिल्कुल नया था। मैं शिव ठाकरे का एक अलग पहलू दिखाना चाहता था। एक ऐसा पहलू जो यह मानता है कि अपनी बात सुनाने के लिए आपको चिल्लाने या लड़ने की जरूरत नहीं है। आप पूरे दिल से खेल सकते हैं, खुद के प्रति सच्चे रह सकते हैं। फिर भी जीत सकते हैं। पहले सीजन का विजेता बनना, खासकर 50 मजबूत खिलाड़ियों के बीच, एक ऐसी बात है जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।

शाहरुख-सलमान की दोस्ती पर सलीम खान का बड़ा बयान कंपीटिटर कभी दोस्त नहीं बन सकते

नई दिल्ली: बॉलीवुड के दो सबसे बड़े सितारे Shah Rukh Khan और Salman Khan आज भले ही अच्छे दोस्त माने जाते हों लेकिन एक समय ऐसा भी था जब दोनों के बीच तनाव और अनबन की खबरें सुर्खियों में रहती थीं उनके रिश्ते को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और आम दर्शकों के बीच भी कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं इस विषय पर पहली बार खुलकर बात की थी सलमान खान के पिता और मशहूर लेखक Salim Khan ने उन्होंने एक इंटरव्यू में रिश्तों और दोस्ती की परिभाषा को अपने नजरिए से समझाया और बताया कि हर रिश्ते में मतभेद होना स्वाभाविक है लेकिन इससे प्यार कम नहीं होता सलीम खान ने अपने बयान में कहा कि उनके और सलमान के बीच भी कई विचारों में अंतर है लेकिन इसके बावजूद उनका प्यार मजबूत है उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रिश्तों की असली ताकत प्यार और समझ में होती है न कि केवल समान विचारों में जब बात शाहरुख और सलमान के रिश्ते पर आई तो उन्होंने कहा कि दोनों ही बड़े कलाकार हैं और एक ही क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करते हैं ऐसे में उनके बीच प्रतिद्वंद्विता होना स्वाभाविक है सलीम खान के अनुसार जब दो लोग एक ही काम के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं तो उनके बीच हमेशा एक दूरी बनी रहती है लेकिन यह दूरी आपसी सम्मान को खत्म नहीं करती उन्होंने यह भी समझाया कि कंपीटिटर के बीच सामान्य शिष्टाचार और बातचीत संभव है जैसे एक-दूसरे को शुभकामनाएं देना या काम के बारे में बातचीत करना लेकिन गहरी दोस्ती की अपेक्षा हमेशा वास्तविकता से दूर हो सकती है सलीम खान ने यह भी कहा कि दोस्ती और प्रतिस्पर्धा दो अलग-अलग चीजें हैं और हर रिश्ते की अपनी सीमाएं होती हैं उनके अनुसार दो प्रतिस्पर्धियों के बीच प्यार भले ही संभव हो लेकिन दोस्ती जैसा गहरा रिश्ता बन पाना मुश्किल होता है हालांकि समय के साथ Shah Rukh Khan और Salman Khan ने अपने रिश्तों को सुधार लिया और आज दोनों के बीच आपसी सम्मान और दोस्ती का रिश्ता देखा जाता है दोनों सितारे कई मौकों पर एक साथ नजर आते हैं और एक-दूसरे के काम की सराहना भी करते हैं यह पूरा मामला दर्शाता है कि समय के साथ रिश्तों में बदलाव आ सकता है और प्रतिस्पर्धा के बावजूद सम्मान और समझदारी से संबंधों को बेहतर बनाया जा सकता है

टेक्नोलॉजी ने छीना फिल्मों का जादुई रोमांस जावेद अख्तर की बात ने खोल दी सोच की नई खिड़की

नई दिल्ली । फिल्मों में कभी जो रोमांस दिलों को छू जाता था आज वही एहसास धीरे धीरे फीका पड़ता नजर आ रहा है। पुराने दौर की फिल्मों में इंतजार तड़प और अधूरी ख्वाहिशों का जो जादू था वह अब कम होता दिख रहा है। इस बदलते ट्रेंड पर दिग्गज लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने एक बेहद दिलचस्प और तार्किक वजह सामने रखी है जो आज की पीढ़ी को सोचने पर मजबूर कर देती है। एक कार्यक्रम के दौरान बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा कि टेक्नोलॉजी खासकर स्मार्टफोन्स ने रोमांस की बुनियाद को ही बदल दिया है। उनके मुताबिक असली रोमांस पाने में नहीं बल्कि पाने की उम्मीद में होता है। यानी जो इंतजार होता था वही प्यार को खास बनाता था। आज के दौर में सब कुछ तुरंत उपलब्ध है और यही वजह है कि उस इंतजार का रोमांच खत्म हो गया है। उन्होंने अपने तर्क को समझाने के लिए रोमियो और जूलिएट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर उस दौर में दोनों के पास स्मार्टफोन होते तो क्या रोमियो ठंडी रात में जूलिएट की बालकनी के नीचे खड़ा होकर उसका इंतजार करता। शायद नहीं क्योंकि वह एक कॉल या मैसेज में बात कर सकता था। यही फर्क आज के और पुराने रोमांस में सबसे बड़ा बदलाव बनकर सामने आया है। जावेद अख्तर ने आगे कहा कि पहले दूरी ही आकर्षण पैदा करती थी। जब किसी को देखने मिलने या समझने के लिए वक्त लगता था तो कल्पनाएं जन्म लेती थीं। वही कल्पनाएं एक आम इंसान को भी खास बना देती थीं। लेकिन आज सब कुछ तुरंत सामने आ जाता है। न इंतजार है न कल्पना की जरूरत। इसी कारण रोमांस का वह जादू जो धीरे धीरे बनता था अब गायब होता जा रहा है। इस चर्चा के दौरान आमिर खान भी उनकी बात से सहमत नजर आए। यह साफ दिखा कि फिल्म इंडस्ट्री के बड़े नाम भी इस बदलाव को महसूस कर रहे हैं। आज की फिल्मों में तेजी है लेकिन भावनाओं की गहराई कहीं न कहीं कम होती जा रही है। वर्क फ्रंट की बात करें तो आमिर खान इन दिनों अपनी फिल्म लाहौर 1947 को लेकर चर्चा में हैं। इसके अलावा उनके बेटे जुनैद खान की फिल्म एक दिन भी सुर्खियों में बनी हुई है। हालांकि इन प्रोजेक्ट्स को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है लेकिन दर्शकों की उत्सुकता लगातार बनी हुई है। कुल मिलाकर जावेद अख्तर की यह बात सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी लागू होती है। टेक्नोलॉजी ने जहां जिंदगी को आसान बनाया है वहीं उसने रिश्तों के उस एहसास को भी बदल दिया है जिसमें इंतजार और कल्पना की सबसे बड़ी भूमिका हुआ करती थी।

अब क्यों नहीं दिखता फिल्मों में प्यार? जावेद अख्तर का बयान कर देगा हैरान

नई दिल्ली।  क्या सच में फिल्मों से वो जादुई रोमांस गायब हो रहा है, जिसे देखकर दिल देखने जैसा लगता था? इस सवाल का बेहद दिलचस्प और दिलचस्प जवाब दिया है दिग्गज लेखक जावेद अख्तर ने। उनका मानना ​​है कि आधुनिक तकनीक, खासकर प्रौद्योगिकी, ने सिर्फ हमारी जिंदगी नहीं बल्कि फिल्मों के रोमांस को भी गहराई से बदल दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान आमिर खान के साथ बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने रोमांस की आत्मा को ही खत्म कर दिया है। ‘इंतजार में था असली रोमांस’जावेद अख्तर के मुताबिक, रियल रोमांस ‘मिलने’ में नहीं, बल्कि ‘इंतजार’ में होता है। उन्होंने कहा कि पहले प्रेम कहानियों में दूरी और असमानता थी, जो भावनाओं को गहराई तक ले जाती थी। आज के दौर में जब एक क्लिक पर कोई भी इंसान सामने आता है, तो वो बेसब, वो परेशान और वो कल्पना कहीं खो गया है, जो रोमांस की जान हुआ करता था। रोमियो-जूलियट का उदाहरण चर्चा का केंद्र बनाअपनी बात को कॉमिक्स के लिए जावेद अख्तर ने मशहूर प्रेम कहानी रोमियो और जूलियट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “अगर रोमियो और जूलियट के पास आज होता है, तो क्या रोमियो अनोखी रात में जूलियट की मूर्ति के नीचे घंटों खड़े रहते हैं?इस सवाल में वहां मौजूद लोगों को जबरदस्ती कर दिया गया और हॉल तालियों से गूंज उठाया गया। कल्पना ख़त्म, तो जादू भी ख़त्मजावेद अख्तर ने आगे कहा कि पहले प्रेम में कल्पना की बड़ी भूमिका थी। दूरी की वजह से एक साधारण चेहरा भी बेहद खूबसूरत लग रहा था, क्योंकि उसे देखने पर तसल्ली नहीं मिलती थी।लेकिन आज के समय में वीडियो कॉल और सोशल मीडिया ने इस कल्पना को ख़त्म कर दिया है। जब सब कुछ तुरंत उपलब्ध हो जाता है, तो रहस्य और आकर्षण भी कम हो जाते हैं। आमिर खान ने भी रखी दौलतइस चर्चा के दौरान आमिर खान भी जावेद अख्तर की बातों से पूरी तरह सहमत नजर आए। दोनों के बीच पुरानी दोस्ती रही है और कई बार वे एक-दूसरे के काम की पहचान करते हैं। वर्क फ्रंट: आमिर की फिल्मों का इंतजारकाम की बात करें तो आमिर खान इन दिनों अपनी फिल्म लाहौर 1947 को लेकर चर्चा में हैं। इसके अलावा उनके बेटे जुनैद खान की फिल्म एक दिन भी फिल्म में बनी हुई है, जिसमें आमिर के कैमियो की शूटिंग चल रही है।

ब्लॉकबस्टर बन सकती थी ये फिल्म, फिर भी राजकुमार हिरानी ने क्यों नहीं बनाई?

नई दिल्ली। बॉलीवुड के स्टार डायरेक्टर प्रिंस हिरानी ने आमिर खान के साथ मिलकर अभी तक कुल 2 फिल्में बनाई हैं। पहली ‘3 इडियट्स’ थी और दूसरी ‘पीके’ थी। ये दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर हिट रही थीं, लेकिन क्या आपको पता है कि इन दोनों फिल्मों में प्रिंस हिरानी के अलावा सुपरस्टार आमिर खान के साथ मिलकर एक फिल्म बनाई गई थी, जो फाइनली एक और फिल्म में ट्रांसफॉर्म कर दी और आमिर खान के साथ की स्क्रिप्ट ये निकल गई। लेकिन अगर यह जोड़ी इस फिल्म को तैयार करती तो दोनों मिलकर सिनेमा जगत को एक और ब्लॉकबस्टर हिट फिल्म दे सकते थे। तो जानिए क्या थी यह फिल्म और क्या थी इसकी कहानी? असली भाई 2 की असली कहानी अलग थीआमिर खान ने एक इवेंट के दौरान बताया- स्पेशल भाई 2 के लिए जो ऑरिजनल स्क्रिप्ट स्टूडियो (राजकुमार हिरानी) ने लिखी थी, वो मुझे पिच की थी। वह चाहती थी कि मैं उस फिल्म में लीड रोल प्ले की खरीदारी करूं। लेकिन जिस दिन वो मुझे वो स्क्रिप्ट सुनाने आया, उसने कहा- आमिर असल में जो स्क्रिप्ट मैं सुनने वाला था वो अब बदल गया है। वो फिल्म अब पक्की भाई 2 बन गई है। मैंने पूछा कि वो कौन सी स्क्रिप्ट है जो तुम मुझे सुनने वाले थे, लेकिन अब वो कुछ और फिल्म बनाने वाली है? तो इस पर प्रिंस हिरानी ने कहा कि अब मैं उस स्क्रिप्ट से दोस्ती भाई 2 बना रहा हूं। कौन सी फिल्म की ऑरिजनल कहानी थी?लेकिन आमिर खान की जिज्ञासा इस खोज में थी कि आखिर ऑरिजनल स्क्रिप्ट क्या थी? जवाब में राजकुमार हिरानी ने जो कहानी कही, वो आमिर खान को बहुत प्रभावित किया। यह भी एक कहानी है जिसे सुनकर ऐसा लगा कि अगर प्रिंस हिरानी ने यह फिल्म आमिर खान के साथ मिलकर बनाई होती तो यह ब्लॉकबस्टर हिट हो जाती। प्रिंस हिरानी ने आमिर खान से सुनी फिल्म की कहानी, कहा- एक लड़का है जो आजादी से पहले फ्रीडम फाइटर आ रहा है। तब वो एक बहुत जवान लड़का था. वह एक लाठीचार्ज का हिस्सा रही थीं और इसी दौरान उनके सिर पर चोट लगी थी। मजबूत थी असल कहानी लेकिन फिर..प्रिंस हिरानी ने आमिर खान को बताया था कि यह स्पेशल कोमा में चला गया है। उसकी आंख करीब 40 या 45 साल बाद खुलती है और तब तक भारत को आजादी मिल चुकी है। हम 90 के दशक में चले गए, दुनिया बहुत आगे बढ़ गई लेकिन ऐसा लगता है कि हम अभी भी वहीं हैं। इसी वजह से वो गांधी जी से जुड़ी बातें करती हैं और वो सारी चीजें रखती हैं। क्योंकि उन्हें यह नहीं पता था कि गांधी जी गुजर गये थे और उनकी हत्या कर दी गयी थी। तो यह ऑरिजनल कॉन्सेप्ट था जिस पर आमिर खान के साथ प्रिंस हिरानी फिल्म बनाने वाले थे, लेकिन फिर वही कहानी मोल्ड द्वारा उन्होंने नायब भाई 2 बनाई, जिसमें संजय दत्त ने लीड रोल प्ले किया था।

स्टारडम से गिरावट तक अरमान कोहली का संघर्ष अक्षय-सनी भी नहीं बचा सके डूबता करियर

नई दिल्ली: बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे रहे हैं जिनकी किस्मत ने बड़ा साथ नहीं दिया और अरमान कोहली का नाम भी उन्हीं में शामिल है एक समय था जब उनके पिता राजकुमार कोहली ने अपने बेटे के करियर को संवारने के लिए अपनी पूरी ताकत और पूंजी दांव पर लगा दी थी इसके बावजूद अरमान कोहली वह मुकाम हासिल नहीं कर सके जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी वर्ष 2002 में रिलीज हुई फिल्म जानी दुश्मन: एक अनोखी कहानी में अक्षय कुमार सनी देओल सुनील शेट्टी और मनीषा कोइराला जैसे बड़े सितारों के बीच भी फिल्म का मुख्य केंद्र अरमान कोहली ही थे उनके पिता राजकुमार कोहली ने इस फिल्म के जरिए अपने बेटे के डूबते करियर को संवारने की पूरी कोशिश की लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई हालांकि बाद में यह टीवी पर जरूर लोकप्रिय हो गई अरमान कोहली का जन्म एक फिल्मी परिवार में हुआ था जहां उनके पिता 70 और 80 के दशक के मशहूर निर्माता निर्देशक थे और उनकी मां निशि कोहली भी अपने समय की एक सफल अभिनेत्री रही हैं ऐसे माहौल में उनका बचपन फिल्मों और बड़े सितारों के बीच बीता जिससे उन्हें इंडस्ट्री में शुरुआत से ही कई मौके मिले लेकिन करियर की शुरुआत से ही उनके फैसलों ने उनके भविष्य पर गहरा असर डाला 1992 में उन्हें दीवाना फिल्म में दिव्या भारती के साथ काम करने का मौका मिला लेकिन सेट पर उनके व्यवहार के कारण उन्हें इस फिल्म से बाहर कर दिया गया बाद में यह फिल्म शाहरुख खान के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुई और उन्होंने रातोंरात सुपरस्टार का दर्जा हासिल कर लिया इसके बाद बाजीगर और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स भी उनके हाथ से निकल गए क्योंकि उन्होंने उन भूमिकाओं को स्वीकार करने से मना कर दिया जो उन्हें लीड रोल के बराबर नहीं लगती थीं इन फैसलों का सीधा फायदा अन्य कलाकारों को मिला और वे फिल्में इतिहास बन गईं इसी दौरान उनके पिता ने लगातार उन्हें लॉन्च करने की कोशिश की लेकिन विरोधी अनाम और जुआरी जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं हालांकि फिल्म कहर में सनी देओल और सुनील शेट्टी जैसे सितारों के साथ काम करने के बाद भी उन्हें बड़ा ब्रेक नहीं मिला 2015 में सलमान खान की सिफारिश पर उन्हें प्रेम रतन धन पायो में एक नकारात्मक भूमिका मिली और फिल्म सफल भी रही लेकिन यह उनके करियर को नई ऊंचाई नहीं दे सकी 2013 में रियलिटी शो बिग बॉस 7 ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया लेकिन इस बार वजह नकारात्मक थी शो में उनके गुस्से और विवादों ने उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचाया एक घटना के दौरान सोफिया हयात के साथ विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस तक मामला पहुंच गया और उन्हें राष्ट्रीय टेलीविजन पर गिरफ्तार भी किया गया यह घटना उनके करियर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई और उनकी छवि एक गुस्सैल और अस्थिर व्यक्ति के रूप में स्थापित हो गई आज अरमान कोहली भले ही एक्टिंग से दूर हैं लेकिन वह अपने नए प्रोजेक्ट्स और निर्देशन की योजना के साथ इंडस्ट्री में वापसी की कोशिश में जुटे हुए हैं

ट्रोलिंग से टूटीं श्रीलीला एक्टिंग छोड़ने तक पहुंची थी, मां से करती थीं पढ़ाई की बात

नई दिल्ली:पुष्पा 2: द रूल के आइटम सॉन्ग किसिक से पैन इंडिया स्टार बनीं श्रीलीला आज भले ही फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी हों, लेकिन शुरुआती दिनों में उन्हें कई मुश्किलों और मानसिक दबावों का सामना करना पड़ा था हाल ही में उन्होंने खुलासा किया कि एक समय ऐसा भी आया जब वह पूरी तरह से एक्टिंग छोड़ने के बारे में सोचने लगी थीं श्रीलीला ने बताया कि जब उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब वह काफी सेंसिटिव थीं और सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग का उन पर गहरा असर पड़ता था उन्हें कई बार इतना बुरा लगता था कि वह रोने लगती थीं इस कठिन दौर में उन्होंने अपनी मां से भी अपनी भावनाएं साझा की थीं और यहां तक कह दिया था कि उन्हें नहीं लगता कि वह यह काम कर पाएंगी और वह स्कूल या कॉलेज वापस जाने के बारे में सोच रही थीं उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती दिनों की यह असुरक्षा उनके लिए काफी भारी थी लेकिन धीरे धीरे उन्होंने खुद को संभाला और इस ट्रोलिंग के साथ जीना सीख लिया समय के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा और अब वह इन नकारात्मक टिप्पणियों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेतीं श्रीलीला का मानना है कि आज के दर्शक पहले की तुलना में ज्यादा समझदार हो गए हैं और वे चीजों को समझने की कोशिश करते हैं उन्होंने कहा कि लोग अब केवल ट्रोलिंग को देखकर प्रतिक्रिया नहीं देते बल्कि सोच समझकर अपनी राय बनाते हैं इस बातचीत में उनकी को स्टार राशी खन्ना ने भी सहमति जताई और कहा कि सोशल मीडिया पर कई बार लोग सिर्फ क्लिकबेट के लिए कुछ भी लिख देते हैं राशी खन्ना ने भी स्वीकार किया कि ट्रोलिंग आज के समय में एक बड़ी चुनौती बन चुकी है उन्होंने कहा कि लोग बिना सच्चाई जाने किसी को जज कर लेते हैं और यह कलाकारों के लिए मानसिक रूप से काफी कठिन होता है उन्होंने यह भी कहा कि अपनी पहचान और वर्षों की मेहनत को बनाए रखना भी ऐसे माहौल में एक बड़ी चुनौती बन जाता है वर्क फ्रंट की बात करें तो श्रीलीला जल्द ही कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाली हैं जिसमें वह कार्तिक आर्यन के साथ अनुराग बसु की फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू करेंगी इसके अलावा वह धनुष की आगामी फिल्म का भी हिस्सा होंगी उन्होंने 2019 में अपने करियर की शुरुआत की थी और अब वह तेजी से आगे बढ़ रही हैं वहीं राशी खन्ना भी लगातार अपने करियर में सक्रिय हैं और कई फिल्मों और प्रोजेक्ट्स का हिस्सा हैं वह फर्जी सीजन 2 और अन्य कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आएंगी दोनों अभिनेत्रियों ने यह साबित किया है कि ट्रोलिंग और मुश्किलों के बावजूद अगर हौसला मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है

BTS की ग्रैंड वापसी 260000 लोगों की भीड़ में नेटफ्लिक्स पर लाइव शो ने मचाई धूम

नई दिल्ली : दक्षिण कोरिया का विश्व प्रसिद्ध के पॉप बैंड BTS एक लंबे इंतजार के बाद फिर से सुर्खियों में आ गया है मिलिट्री सर्विस के कारण करीब चार साल तक ब्रेक लेने के बाद इस मशहूर बैंड ने 21 मार्च 2026 को अपनी शानदार वापसी की और अपने फैंस को एक बार फिर मंत्रमुग्ध कर दिया BTS ने अपनी वापसी नेटफ्लिक्स पर लाइव स्ट्रीम किए गए खास कार्यक्रम ‘BTS द कमबैक लाइव अरिरंग’ के जरिए की यह कार्यक्रम सोल के ग्वांगवामुन स्क्वायर में आयोजित किया गया था जहां बैंड के सातों सदस्यों ने एक साथ मंच पर परफॉर्म किया और अपने दमदार म्यूजिक और परफॉर्मेंस से दर्शकों का दिल जीत लिया इस इवेंट को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला सियोल मेट्रोपॉलिटन पुलिस के आंकड़ों के अनुसार करीब 260000 लोग इस कार्यक्रम को देखने के लिए सेंट्रल सियोल में जमा हुए यह संख्या BTS की वैश्विक लोकप्रियता और उनके प्रति फैंस के गहरे लगाव को दर्शाती है कार्यक्रम के दौरान मौजूद फैंस ने अपनी खुशी और भावनाएं साझा कीं एक महिला फैन ने बताया कि उन्होंने लंबे समय से इस पल का इंतजार किया था और BTS की वापसी उनके लिए बेहद खास है उन्होंने कहा कि उन्होंने एल्बम को पूरी तरह से सुनने का इंतजार किया ताकि वह इसे लाइव अनुभव कर सकें एक अन्य फैन ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पल उनके लिए बहुत ही खास है क्योंकि वे काफी समय से BTS की वापसी का इंतजार कर रही थीं वहीं नेपाल से आई एक फैन ने बताया कि वह इस बड़े कॉन्सर्ट का हिस्सा बनकर बेहद खुश हैं और यह उनके लिए पहला इतना बड़ा BTS इवेंट है उन्होंने बताया कि वे BTS के कई सदस्यों को पसंद करती हैं और खास तौर पर जंगकुक का नाम उन्हें बहुत आकर्षित करता है BTS की यह वापसी न केवल उनके फैंस के लिए एक भावनात्मक क्षण है बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि यह बैंड वैश्विक संगीत जगत में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है मिलिट्री ब्रेक के बाद इस धमाकेदार वापसी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि BTS की लोकप्रियता और प्रभाव पहले की तरह ही बरकरार है

'तुम्बाड' के डायरेक्टर का बड़ा धमाका: बिना एक पैसा खर्च किए बना डाली 80 मिनट की हॉरर फिल्म; जानें कहाँ फ्री में देखें 'मन पिशाच'।

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा में हॉरर फिल्मों की परिभाषा बदलने वाली फिल्म ‘तुम्बाड’ के निर्देशक राही अनिल बर्वे एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार चर्चा किसी करोड़ों के बजट वाली फिल्म की नहीं, बल्कि एक ऐसे क्रांतिकारी प्रयोग की है जिसने फिल्म जगत को हैरान कर दिया है। राही अनिल बर्वे ने पूरी तरह से “ज़ीरो बजट” में एक 80 मिनट की हॉरर फिल्म ‘मन पिशाच’ तैयार की है। यह फिल्म न केवल एक निर्देशक की कल्पनाशीलता का प्रमाण है, बल्कि उन तमाम उभरते हुए फिल्ममेकर्स के लिए एक प्रेरणा भी है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपने पूरे नहीं कर पाते। 17 मार्च को रिलीज हुई इस फिल्म को राही ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अपने पर्सनल कंप्यूटर की मदद से अकेले ही अंजाम दिया है। राही अनिल बर्वे ने इस फिल्म को बनाने के पीछे के अपने संघर्ष और उद्देश्य को सोशल मीडिया पर विस्तार से साझा किया है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म एक प्रयोग थी—यह देखने के लिए कि क्या कोई अकेला फिल्ममेकर बिना किसी टीम या फंडिंग के एक पूरी फीचर लेंथ फिल्म बना सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चाहते तो लोग हायर कर सकते थे और बेहतर विजुअल्स बनवा सकते थे, लेकिन तब यह प्रयोग विफल हो जाता। उनके अनुसार, एक बेहतरीन फिल्म बनाने के लिए महंगे कैमरों से ज्यादा अच्छी लेखन क्षमता, गहरी कल्पनाशीलता, एक बेसिक लैपटॉप और ढेर सारे धैर्य की जरूरत होती है। उन्होंने फोटोशॉप और प्रीमियर जैसे बेसिक टूल्स का उपयोग कर ‘मन पिशाच’ को वह डरावना स्वरूप दिया है, जिसे देखकर दर्शक दंग रह गए हैं। फिल्म ‘मन पिशाच’ के प्लॉट की बात करें, तो यह 1 घंटे 20 मिनट की एक ऐसी कहानी है जो आपको भीतर तक झकझोर देगी। कहानी एक पुरातत्व अधिकारी (Archaeology Officer) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में एक बेहद रहस्यमयी गांव पहुँचता है। उस गांव के नियम और वहां रहने वाले लोग सामान्य नहीं हैं। जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, अधिकारी के साथ घटने वाली अजीबोगरीब घटनाएँ दर्शक को बेचैन करने लगती हैं। क्या वह उस शापित गांव से सही-सलामत बाहर निकल पाएगा? इसी सस्पेंस के इर्द-गिर्द राही ने एक डरावना जाल बुना है। फिल्म के विजुअल्स और बैकग्राउंड स्कोर इतने प्रभावी हैं कि विश्वास करना मुश्किल होता है कि इसे ज़ीरो बजट में बनाया गया है। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर ‘मन पिशाच’ को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। यूजर्स राही अनिल बर्वे के इस साहस और प्रतिभा की सराहना कर रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि राही जैसे टैलेंट को पहचानना इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों को एक भी पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है; यह फिल्म राही अनिल बर्वे के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर पूरी तरह से मुफ्त उपलब्ध है। अगर आप भी हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं और ‘तुम्बाड’ जैसी कलाकारी के कायल हैं, तो ‘मन पिशाच’ आपके लिए एक मस्ट-वॉच फिल्म है।

शूटिंग के दौरान किशोर कुमार को पड़ा असली जोरदार मुक्का, 'विलेन' प्राण को आखिर क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

नई दिल्ली:  भारतीय सिनेमा के इतिहास में किशोर कुमार एक ऐसे कलाकार रहे हैं, जिनकी ऊर्जा और मजाकिया अंदाज का कोई मुकाबला नहीं था। लेकिन कभी-कभी उनकी यही ‘मस्ती’ उनके साथी कलाकारों के लिए सिरदर्द बन जाया करती थी। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा बॉलीवुड के मशहूर विलेन प्राण ने साझा किया था, जो फिल्म ‘पहली झलक’ की शूटिंग से जुड़ा है। प्राण और किशोर कुमार की जोड़ी ने ‘हाफ टिकट’ और ‘आशा’ जैसी कई यादगार फिल्मों में साथ काम किया, लेकिन ‘पहली झलक’ के सेट पर कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना खुद किशोर दा ने भी नहीं की होगी। वाकया एक फाइट सीन का था, जहाँ प्राण को किशोर कुमार के पेट में मुक्का मारना था, लेकिन किशोर कुमार की खिलंदड़ फितरत के चलते यह सीन पूरा होना नामुमकिन लग रहा था। प्राण साहब ने एक पुराने इंटरव्यू में इस घटना को याद करते हुए बताया था कि किशोर कुमार के साथ सीरियस सीन शूट करना किसी चुनौती से कम नहीं था। उस दिन फाइट सीन के दौरान जैसे ही प्राण उनके करीब जाकर फिल्मी मुक्का मारते, किशोर कुमार दर्द का नाटक करने के बजाय जोर-जोर से हंसने लगते थे। एक के बाद एक लगभग 12 से 14 रीटेक हो चुके थे, लेकिन किशोर कुमार गंभीर होने का नाम ही नहीं ले रहे थे। पूरी यूनिट परेशान थी और वक्त निकलता जा रहा था। आखिरकार, प्राण ने एक कड़ा फैसला लिया। अगले शॉट में जैसे ही कैमरा रोल हुआ, प्राण ने हवा में हाथ चलाने के बजाय सचमुच का एक जोरदार मुक्का किशोर कुमार के पेट में जड़ दिया। असली चोट लगते ही किशोर कुमार के मुंह से चीख निकल पड़ी और वे दर्द से दोहरे हो गए। प्राण ने तुरंत कहा, “बस, यही रिएक्शन तो हमें फिल्म के लिए चाहिए था!” इस वाकये के बाद सीन तो परफेक्ट शूट हो गया, लेकिन किशोर कुमार की हालत कुछ देर के लिए खराब हो गई थी। प्राण ने मजाकिया लहजे में यह भी स्वीकार किया कि किशोर कुमार का व्यक्तित्व इतना संक्रामक था कि उनके साथ काम करते-करते एक गंभीर विलेन की छवि वाला इंसान भी उनकी तरह ही बन जाता था। प्राण ने कहा कि अगर वे एक-दो फिल्में और किशोर दा के साथ कर लेते, तो शायद वे भी उनके ‘क्लोन’ बन जाते और अपनी गंभीरता खो देते। यह किस्सा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में बड़े चाव से सुनाया जाता है, जो यह दर्शाता है कि उस दौर के कलाकारों के बीच कितनी गहरी समझ और काम के प्रति कितना अनूठा समर्पण हुआ करता था। किशोर कुमार आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी ये शरारतें और प्राण साहब जैसे दिग्गजों के साथ उनके ये किस्से आज भी प्रशंसकों के चेहरों पर मुस्कान ले आते हैं।