योग से मिलेगा बेहतर जीवन, ताड़ासन अभ्यास से शरीर और मन दोनों होंगे अधिक स्थिर

नई दिल्ली ।आज की आधुनिक जीवनशैली में गलत शरीर मुद्रा एक आम समस्या बनती जा रही है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल और कंप्यूटर का लगातार उपयोग और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण लोगों में पीठ दर्द, गर्दन में जकड़न और शरीर में थकान जैसी परेशानियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसी समस्या के समाधान के रूप में योग अभ्यास को एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है, जिसमें ताड़ासन को विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है। ताड़ासन एक ऐसा योगासन है जो देखने में बेहद सरल लगता है, लेकिन इसका प्रभाव शरीर और मन दोनों पर गहरा पड़ता है। इसे पर्वत मुद्रा भी कहा जाता है क्योंकि इसमें शरीर को एक स्थिर और सीधी स्थिति में रखा जाता है, जैसे एक पर्वत अडिग और मजबूत खड़ा हो। यह अभ्यास शरीर की मुद्रा को सुधारने, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने और संतुलन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस आसन के अभ्यास में व्यक्ति को सीधे खड़े होकर पैरों को एक साथ रखना होता है और शरीर का भार दोनों पैरों पर समान रूप से संतुलित करना होता है। इसके बाद घुटनों को सीधा रखते हुए शरीर को हल्का ऊपर की ओर खींचा जाता है, छाती को खुला रखा जाता है और कंधों को पीछे की ओर ले जाकर रीढ़ को सीधा किया जाता है। इस दौरान सांसों को सामान्य और गहरा बनाए रखना जरूरी होता है। यह स्थिति शरीर में जागरूकता और स्थिरता पैदा करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ताड़ासन का नियमित अभ्यास शरीर की गलत मुद्रा को सुधारने में मदद करता है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और लंबे समय तक झुककर बैठने या खड़े रहने से होने वाले दर्द को कम करने में सहायक होता है। इसके अलावा यह कंधों और गर्दन की अकड़न को दूर करता है, जिससे शरीर अधिक लचीला और आरामदायक महसूस होता है। ताड़ासन केवल शारीरिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मानसिक स्थिति पर भी देखा जाता है। यह एकाग्रता बढ़ाने, मन को शांत करने और आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति दिनभर अधिक सक्रिय और संतुलित महसूस करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस योगासन को किसी भी उम्र के लोग आसानी से अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। इसे सुबह या शाम के समय कुछ मिनटों तक किया जा सकता है। शुरुआती लोगों के लिए दीवार का सहारा लेना भी उपयोगी हो सकता है, जिससे शरीर को सही संतुलन समझने में मदद मिलती है। नियमित अभ्यास के साथ शरीर की मुद्रा धीरे-धीरे बेहतर होने लगती है और व्यक्ति अपने खड़े होने, बैठने और चलने के तरीके में स्पष्ट सुधार महसूस करता है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि दैनिक जीवन में आत्मविश्वास और स्थिरता भी बढ़ाता है। कुल मिलाकर, ताड़ासन एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी योग अभ्यास है, जो शरीर को मजबूत, संतुलित और ऊर्जावान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच यह एक सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय के रूप में तेजी से अपनाया जा रहा है।
शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है कई गंभीर समस्याएं, जानें इसके संकेत और बचाव

नई दिल्ली। शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए इसका संतुलन बनाए रखना अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो इसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है, जो धीरे-धीरे कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है। पानी की कमी का सबसे पहला असर शरीर की ऊर्जा पर पड़ता है। व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस हो सकती है। कई मामलों में ध्यान केंद्रित करने में भी दिक्कत आने लगती है, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं। त्वचा पर भी डिहाइड्रेशन का सीधा असर दिखाई देता है। पानी की कमी से त्वचा रूखी, बेजान और डल हो सकती है। साथ ही होंठ फटने और आंखों के नीचे काले घेरे बढ़ने की समस्या भी देखी जा सकती है। पाचन तंत्र पर भी इसका असर पड़ता है। पर्याप्त पानी न पीने से कब्ज, पेट भारी लगना और अपच जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पानी आंतों के सुचारू कामकाज में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए इसकी कमी पाचन को धीमा कर देती है। इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी से सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या भी हो सकती है। गंभीर स्थिति में डिहाइड्रेशन रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। आमतौर पर 7-8 गिलास पानी रोजाना पीने की सलाह दी जाती है, हालांकि यह व्यक्ति की उम्र, मौसम और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है। पानी की कमी से बचने के लिए सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि नारियल पानी, फलों का जूस और पानी से भरपूर फल जैसे तरबूज, खीरा और संतरा भी डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है। गर्मियों के मौसम में पसीना ज्यादा निकलने के कारण डिहाइड्रेशन का खतरा और बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष रूप से पानी का सेवन बढ़ाना चाहिए। सही मात्रा में पानी पीना न केवल शरीर को हाइड्रेट रखता है, बल्कि त्वचा, पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
फटी एड़ियों से परेशान? इन आसान घरेलू उपायों से पाएं तुरंत राहत

नई दिल्ली। फटी हुई एड़ियां यानी क्रैक्ड हील्स एक आम समस्या है, जो ज्यादातर रूखी त्वचा, अनदेखी देखभाल, लंबे समय तक खड़े रहने या गलत फुटवियर पहनने के कारण होती है। शुरुआत में यह समस्या केवल रूखापन लगती है, लेकिन समय के साथ गहरी दरारें बनकर दर्द और खून निकलने जैसी स्थिति भी पैदा कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या का सबसे आसान और प्रभावी इलाज नियमित देखभाल और घरेलू नुस्खों में छिपा है। सबसे पहले पैरों को हल्के गुनगुने पानी में 10-15 मिनट तक भिगोना चाहिए, जिससे डेड स्किन नरम हो जाती है। इसके बाद हल्के हाथों से प्यूमिक स्टोन या स्क्रबर से मृत त्वचा हटाई जा सकती है। इसके बाद सबसे जरूरी कदम मॉइस्चराइजिंग होता है। पैरों को अच्छी तरह सुखाने के बाद गाढ़ी क्रीम, पेट्रोलियम जेली या नारियल तेल लगाना फायदेमंद माना जाता है। इससे त्वचा में नमी बनी रहती है और दरारें धीरे-धीरे भरने लगती हैं। घरेलू उपायों में शहद, नारियल तेल और एलोवेरा जैसे प्राकृतिक तत्व भी काफी उपयोगी माने जाते हैं। शहद में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा को साफ और मुलायम रखने में मदद करते हैं। वहीं नारियल तेल और घी त्वचा को गहराई से पोषण देते हैं और सूखापन कम करते हैं। एक और प्रभावी उपाय है शहद और नींबू का मिश्रण, जिसे फुट मास्क की तरह लगाया जा सकता है। यह डेड स्किन हटाने और त्वचा को सॉफ्ट बनाने में मदद करता है। इसके अलावा रात में पैरों पर तेल या मॉइस्चराइजर लगाकर मोजे पहनना भी काफी असरदार तरीका माना जाता है, क्योंकि इससे नमी लॉक हो जाती है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बहुत गर्म पानी से पैरों को धोने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा और ज्यादा ड्राई हो सकती है। साथ ही लंबे समय तक नंगे पैर चलना या सख्त सतह पर ज्यादा दबाव डालना भी फटी एड़ियों को बढ़ा सकता है। अगर घरेलू उपायों के बावजूद समस्या गंभीर बनी रहे या दरारों में दर्द और खून आने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि यह कभी-कभी किसी अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकता है। सही देखभाल, नियमित सफाई और मॉइस्चराइजिंग के साथ फटी एड़ियों की समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है और पैरों को फिर से मुलायम बनाया जा सकता है।
नारियल पानी हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं, इन 5 स्थितियों में सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान

नई दिल्ली । गर्मियों में शरीर को ठंडक और हाइड्रेशन देने के लिए नारियल पानी सबसे लोकप्रिय प्राकृतिक पेय माना जाता है। इसे अक्सर एक सुरक्षित और हेल्दी ड्रिंक के रूप में देखा जाता है, जो शरीर में तुरंत ऊर्जा देने के साथ जरूरी मिनरल्स की कमी को भी पूरा करता है। लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है कि नारियल पानी हर किसी के लिए समान रूप से फायदेमंद होता है। कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में इसका सेवन लाभ की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है। नारियल पानी में पोटैशियम, मैग्नीशियम और इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करते हैं। यही वजह है कि गर्मी के मौसम में इसे एक नेचुरल एनर्जी ड्रिंक के तौर पर खूब पसंद किया जाता है। लेकिन इसके सेवन को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि हर शरीर की जरूरत और स्थिति अलग होती है। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर पहले से ही कम रहता है, उनके लिए नारियल पानी का अधिक सेवन समस्या पैदा कर सकता है। यह ब्लड प्रेशर को और नीचे कर सकता है, जिससे चक्कर आना, कमजोरी और थकान जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे लोगों को इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए। किडनी से जुड़ी बीमारियों वाले मरीजों को भी इसके सेवन में विशेष सावधानी रखनी चाहिए। नारियल पानी में मौजूद अधिक पोटैशियम किडनी द्वारा सही तरीके से फिल्टर नहीं हो पाता, जिससे शरीर में इसका स्तर बढ़ सकता है और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह पूरी तरह सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता। हालांकि इसमें शुगर की मात्रा कम होती है, लेकिन यह पूरी तरह शुगर-फ्री नहीं होता। ऐसे में अगर इसका सेवन अधिक मात्रा में किया जाए तो ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है। इसलिए डायबिटिक मरीजों को इसे लेने से पहले सावधानी और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे सर्जरी से पहले या बाद के समय, नारियल पानी का सेवन भी सोच-समझकर करना चाहिए। इस दौरान शरीर संवेदनशील अवस्था में होता है और किसी भी प्रकार का पेय पदार्थ शारीरिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जिससे रिकवरी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा जिन लोगों का शरीर स्वभाव से ठंडा रहता है, उन्हें भी इसका अधिक सेवन करने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों में नारियल पानी सर्दी-जुकाम, गले की समस्या या पाचन से जुड़ी दिक्कतें पैदा कर सकता है। स्वस्थ व्यक्तियों के लिए नारियल पानी सीमित मात्रा में लाभकारी माना जाता है। आमतौर पर दिन में एक से दो बार इसका सेवन पर्याप्त होता है, और इसे सुबह या दोपहर के समय लेना ज्यादा फायदेमंद समझा जाता है। खाली पेट इसका सेवन कई मामलों में लाभकारी हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। कुल मिलाकर, नारियल पानी एक प्राकृतिक और पोषक पेय जरूर है, लेकिन इसका सेवन बिना सोच-समझकर करना ठीक नहीं है। सही मात्रा और सही स्थिति में ही यह शरीर के लिए फायदेमंद साबित होता है, अन्यथा यह स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकता है।
गर्मियों की छुट्टियों में बनाएं इन खूबसूरत जगहों का प्लान, कैमरे में कैद करें यादगार नजारे

नई दिल्ली। गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही लोग ऐसी जगहों की तलाश में निकल पड़ते हैं, जहां तपती गर्मी से राहत मिले और मन को सुकून देने वाले नजारे देखने को मिलें। भारत में कई ऐसे खूबसूरत पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जहां प्राकृतिक सौंदर्य, ठंडी हवाएं और शांत वातावरण हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। अगर आप भी इस समर वेकेशन में फैमिली, दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो दार्जिलिंग, शिमला और लेह-लद्दाख जैसी जगहें आपकी यात्रा को यादगार बना सकती हैं। पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरत वादियों में बसा दार्जिलिंग गर्मियों में घूमने के लिए सबसे पसंदीदा हिल स्टेशनों में गिना जाता है। यहां की ठंडी जलवायु, दूर-दूर तक फैले चाय के बागान और पहाड़ों पर तैरते बादल पर्यटकों का दिल जीत लेते हैं। दार्जिलिंग की सबसे खास जगह टाइगर हिल मानी जाती है, जहां सुबह के समय सूर्योदय का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। सूरज की पहली किरण जब कंचनजंगा की बर्फीली चोटियों पर पड़ती है, तो पूरा दृश्य सुनहरी रोशनी से चमक उठता है। इसके अलावा यहां की टॉय ट्रेन की सैर, लोकल मार्केट में शॉपिंग और मोमोज-थुकपा जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद यात्रा को और खास बना देता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है, जिससे लोग भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। शिमला की मॉल रोड पर शाम के समय घूमना, कैफे में बैठकर पहाड़ों के खूबसूरत नजारों का आनंद लेना और लोकल मार्केट से खरीदारी करना पर्यटकों को खूब पसंद आता है। देवदार के ऊंचे पेड़, बादलों से ढकी पहाड़ियां और शांत वातावरण यहां की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। इसके अलावा जाखू मंदिर और द रिज जैसी जगहों से पूरे शहर का शानदार दृश्य दिखाई देता है, जिसे कैमरे में कैद करना हर किसी को पसंद आता है। अगर आप एडवेंचर और रोमांच पसंद करते हैं, तो लेह-लद्दाख आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है और बर्फ से ढकी पहाड़ियां, नीला आसमान तथा शांत झीलें पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। पैंगोंग लेक का नीला पानी और नुब्रा वैली की खूबसूरत वादियां यहां आने वाले हर पर्यटक को आकर्षित करती हैं। बाइक राइडिंग, कैंपिंग और पहाड़ों के बीच बिताए गए पल जिंदगीभर याद रहते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में लेह-लद्दाख युवाओं की पहली पसंद बन जाता है। इस समर वेकेशन अगर आप भी प्रकृति के करीब कुछ यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो इन शानदार डेस्टिनेशंस का प्लान जरूर बनाएं। यहां की खूबसूरती न सिर्फ आपकी यात्रा को खास बनाएगी, बल्कि कैमरे में कैद किए गए नजारे जिंदगीभर की यादें बन जाएंगे।
गर्मी में ठंडक और सेहत दोनों का राज, घड़े का पानी क्यों है विशेषज्ञों की पसंद

नई दिल्ली ।गर्मियों का मौसम जैसे-जैसे तेज होता है, वैसे-वैसे शरीर को ठंडक और संतुलन की अधिक जरूरत महसूस होने लगती है। तापमान बढ़ने के साथ लोग राहत पाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं, लेकिन पुराने और प्राकृतिक उपाय आज भी अपनी उपयोगिता साबित करते हैं। इन्हीं में सबसे सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है मिट्टी के घड़े या मटके का पानी। मिट्टी के घड़े में रखा पानी किसी मशीन या बिजली की मदद से नहीं, बल्कि प्राकृतिक प्रक्रिया से ठंडा होता है। मिट्टी की खास बनावट और उसकी सांस लेने की क्षमता पानी के तापमान को संतुलित बनाए रखती है, जिससे यह शरीर को धीरे-धीरे ठंडक पहुंचाता है। यही वजह है कि यह पानी पीने के बाद शरीर में एक अलग ही ताजगी महसूस होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीना कई बार शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अचानक अत्यधिक ठंडक गले और पाचन तंत्र पर असर डाल सकती है। इसके विपरीत घड़े का पानी शरीर के प्राकृतिक तापमान के करीब होता है, जिससे यह शरीर को बिना झटका दिए ठंडक प्रदान करता है। माना जाता है कि मिट्टी के घड़े में रखा पानी हल्का प्राकृतिक रूप से शुद्ध भी होता है, क्योंकि मिट्टी पानी में मौजूद कुछ अशुद्धियों को सोखने की क्षमता रखती है। इससे पानी अधिक संतुलित और हल्का महसूस होता है। लोग अक्सर बताते हैं कि इस पानी को पीने से उन्हें एक अलग तरह की ताजगी और हल्कापन महसूस होता है। गर्मी के मौसम में शरीर तेजी से पानी खोता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में सही तरीके से हाइड्रेशन बेहद जरूरी हो जाता है। घड़े का पानी शरीर को सिर्फ ठंडक ही नहीं देता, बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से संतुलित रखने में सहायक माना जाता है। परंपरागत रूप से भी मिट्टी के घड़े का उपयोग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लंबे समय से किया जाता रहा है। बिना किसी तकनीक के यह तरीका आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह सरल, सस्ता और प्राकृतिक है। यही कारण है कि आधुनिक सुविधाओं के बावजूद लोग इसे अपनाना पसंद करते हैं। गर्मी में जब शरीर थकान, गर्मी और डिहाइड्रेशन से प्रभावित होता है, तब घड़े का पानी एक प्राकृतिक राहत की तरह काम करता है। यह न केवल शरीर को ठंडा रखता है, बल्कि एक स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा भी बन सकता है। आज के समय में जब लोग तेज और कृत्रिम ठंडक की ओर बढ़ रहे हैं, तब भी मिट्टी के घड़े का पानी अपनी प्राकृतिक विशेषताओं के कारण एक भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है। यह दिखाता है कि सरलता और प्रकृति पर आधारित उपाय आज भी स्वास्थ्य के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पहले थे।
शहद के स्किन के लिए फायदे: सही तरीके से इस्तेमाल करने पर मिलता है नेचुरल ग्लो

नई दिल्ली। शहद को आयुर्वेद और घरेलू स्किन केयर में लंबे समय से एक प्रभावी प्राकृतिक उपाय माना जाता है। यह न केवल त्वचा को नमी प्रदान करता है, बल्कि दाग-धब्बों को हल्का करने और स्किन को साफ रखने में भी मदद करता है। हालांकि, इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके और सही सामग्री के साथ इस्तेमाल किया जाए। शहद को चेहरे पर सीधे मास्क की तरह लगाना सबसे आसान तरीका माना जाता है। इसके लिए थोड़ा सा शहद लेकर पूरे चेहरे पर समान रूप से फैलाया जाता है और 5 से 10 मिनट बाद हल्के गुनगुने पानी से धो लिया जाता है। यह तरीका त्वचा को प्राकृतिक रूप से हाइड्रेट करने में मदद करता है और स्किन को सॉफ्ट बनाता है। इसके अलावा शहद को छाछ और अंडे की जर्दी के साथ मिलाकर फेस पैक की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मिश्रण को चेहरे पर लगभग 20 मिनट तक लगाकर धोने से त्वचा में निखार आने की संभावना रहती है। यह पैक त्वचा की गहराई से देखभाल करने में मदद करता है और डलनेस को कम कर सकता है। शहद को प्राकृतिक स्क्रब के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसके लिए दो चम्मच शहद में बादाम पाउडर मिलाकर हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज की जाती है। यह मिश्रण डेड स्किन हटाने में मदद करता है और त्वचा को साफ व चमकदार बनाता है। बादाम त्वचा को एक्सफोलिएट करता है, जबकि शहद उसे मॉइस्चराइज करता है। मेकअप हटाने के लिए भी शहद का उपयोग किया जा सकता है। शहद और ऑलिव ऑयल को मिलाकर चेहरे पर लगाने से यह प्राकृतिक क्लींजर की तरह काम करता है। इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा धोने पर त्वचा साफ और मुलायम महसूस होती है। शहद के साथ नींबू का इस्तेमाल भी स्किन के लिए फायदेमंद माना जाता है। नींबू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी त्वचा को एक्सफोलिएट करने में मदद करते हैं, जबकि शहद त्वचा को नमी देता है। हालांकि, संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए। इसके अलावा शहद को जैतून के तेल और नींबू के रस के साथ मिलाकर ड्राई स्किन के लिए एक नेचुरल लोशन की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह त्वचा की रूखापन को कम करने में मदद करता है और स्किन को पोषण देता है। एक अन्य घरेलू उपाय में कद्दूकस किए हुए सेब में शहद मिलाकर फेस मास्क तैयार किया जाता है। इसे 15 मिनट तक चेहरे पर लगाने के बाद धोने से त्वचा में ताजगी और निखार महसूस किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शहद त्वचा के लिए एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प है, लेकिन हर स्किन टाइप अलग होता है। इसलिए किसी भी नए घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी होता है। सही तरीके से और नियमित उपयोग के साथ शहद त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ, मुलायम और ग्लोइंग बनाए रखने में मदद कर सकता है।
हेयर केयर टिप्स: एलोवेरा और प्याज के रस से कम होंगी बालों की ये समस्याएं, जानें सही इस्तेमाल का तरीका

नई दिल्ली। आज की बदलती लाइफस्टाइल, तनाव और गलत खानपान के कारण कम उम्र में ही बालों से जुड़ी कई समस्याएं देखने को मिल रही हैं। बालों का झड़ना, डैंड्रफ, रूखापन और समय से पहले सफेद होना लोगों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। ऐसे में घरेलू और प्राकृतिक उपायों की ओर रुझान बढ़ रहा है, जिनमें एलोवेरा और प्याज का रस खास तौर पर लोकप्रिय हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एलोवेरा और प्याज का रस दोनों ही बालों की सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। एलोवेरा स्कैल्प को ठंडक देने और नमी बनाए रखने में मदद करता है, जबकि प्याज का रस बालों की जड़ों को मजबूत करने में सहायक माना जाता है। इन दोनों का सही मिश्रण बालों की कई समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है। इस घरेलू उपाय को तैयार करने के लिए सबसे पहले एक प्याज को कद्दूकस करके उसका रस निकाल लिया जाता है। इसके बाद इसमें एक चम्मच एलोवेरा जेल मिलाया जाता है। तैयार मिश्रण को अच्छी तरह से बालों की जड़ों और स्कैल्प पर लगाया जाता है और हल्के हाथों से मसाज की जाती है। इस पैक को लगभग 20 से 30 मिनट तक बालों में लगाए रखने के बाद माइल्ड शैंपू से धो लिया जाता है। नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने से बालों की जड़ों को मजबूती मिलती है और बालों का झड़ना धीरे-धीरे कम हो सकता है। एलोवेरा में मौजूद प्राकृतिक एंजाइम्स और पोषक तत्व स्कैल्प को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। यह डैंड्रफ की समस्या को कम करने और स्कैल्प की सूजन को शांत करने में सहायक होता है। वहीं प्याज का रस सल्फर से भरपूर होता है, जो केराटिन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। केराटिन बालों की मजबूती और ग्रोथ के लिए जरूरी प्रोटीन है। इसके अलावा प्याज का रस बालों की रंगत को बनाए रखने में भी मदद करता है और समय से पहले सफेद होने की समस्या को कम करने में सहायक माना जाता है। यह स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाकर बालों की ग्रोथ को भी सपोर्ट करता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर व्यक्ति की त्वचा और स्कैल्प अलग होते हैं। इसलिए किसी भी नए घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है, ताकि एलर्जी या जलन जैसी समस्या से बचा जा सके। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और सही हेयर केयर रूटीन अपनाना भी जरूरी है। सही देखभाल के साथ एलोवेरा और प्याज का रस बालों को प्राकृतिक रूप से मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
समर स्किन केयर टिप्स: घर पर बनाएं ये आसान फेस पैक, गर्मियों में मिलेगा नेचुरल ग्लो

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही त्वचा पर इसका असर साफ दिखाई देने लगता है। तेज धूप, बढ़ता पसीना और गर्म हवाएं स्किन की प्राकृतिक नमी को कम कर देती हैं, जिससे चेहरे पर टैनिंग, जलन, रूखापन और लालपन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में सही स्किन केयर रूटीन अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ महंगे प्रोडक्ट्स ही नहीं बल्कि घर में मौजूद साधारण सामग्री से भी त्वचा की बेहतर देखभाल की जा सकती है। दही, शहद, चावल का आटा और बेसन जैसे प्राकृतिक तत्व स्किन को साफ करने, नमी देने और हल्की एक्सफोलिएशन में मदद कर सकते हैं। पहला आसान फेस पैक दही और शहद का है। दो चम्मच ताज़ा दही में एक चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे साफ चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाएं। इसके बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए ठंडे पानी से धो लें। दही त्वचा को मुलायम बनाने में मदद करता है, जबकि शहद स्किन में नमी बनाए रखने का काम करता है। हालांकि, संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को पहले पैच टेस्ट करने की सलाह दी जाती है। दूसरा घरेलू नुस्खा चावल के आटे, दूध और शहद से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए दो चम्मच चावल का आटा, आधा कप दूध और एक चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं। अगर दूध उपलब्ध न हो तो दही का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पैक को चेहरे पर लगभग 15 मिनट तक लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें और फिर धो लें। चावल का आटा त्वचा की हल्की एक्सफोलिएशन करता है, जबकि दूध और शहद स्किन को मॉइस्चराइज करते हैं। तीसरा लोकप्रिय फेस पैक बेसन, हल्दी और दही का है। इसमें एक चम्मच बेसन, आधा चम्मच हल्दी और एक चम्मच दही मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है। इसे 15 मिनट तक चेहरे पर लगाने के बाद ठंडे पानी से धो लें। बेसन त्वचा की गहराई से सफाई करता है, हल्दी स्किन टोन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है और दही त्वचा को मुलायम बनाती है। हालांकि, हल्दी की मात्रा बहुत कम रखने की सलाह दी जाती है ताकि त्वचा पर पीला रंग न रह जाए। इन घरेलू फेस पैक्स के साथ-साथ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि असली स्किन ग्लो सिर्फ बाहरी देखभाल से नहीं आता, बल्कि इसके लिए पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, भरपूर पानी और सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाव भी जरूरी है। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति को एलर्जी, एक्जिमा या त्वचा पर गंभीर दाने की समस्या है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी उपाय अपनाना सही नहीं होता। गर्मियों में नियमित और सरल स्किन केयर अपनाकर त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।
भुजंगासन में ये गलतियां पड़ सकती हैं कमर पर भारी, आयुष मंत्रालय ने बताया सही अभ्यास का तरीका

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