समर स्किन केयर टिप्स: घर पर बनाएं ये आसान फेस पैक, गर्मियों में मिलेगा नेचुरल ग्लो

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही त्वचा पर इसका असर साफ दिखाई देने लगता है। तेज धूप, बढ़ता पसीना और गर्म हवाएं स्किन की प्राकृतिक नमी को कम कर देती हैं, जिससे चेहरे पर टैनिंग, जलन, रूखापन और लालपन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में सही स्किन केयर रूटीन अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ महंगे प्रोडक्ट्स ही नहीं बल्कि घर में मौजूद साधारण सामग्री से भी त्वचा की बेहतर देखभाल की जा सकती है। दही, शहद, चावल का आटा और बेसन जैसे प्राकृतिक तत्व स्किन को साफ करने, नमी देने और हल्की एक्सफोलिएशन में मदद कर सकते हैं। पहला आसान फेस पैक दही और शहद का है। दो चम्मच ताज़ा दही में एक चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे साफ चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाएं। इसके बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए ठंडे पानी से धो लें। दही त्वचा को मुलायम बनाने में मदद करता है, जबकि शहद स्किन में नमी बनाए रखने का काम करता है। हालांकि, संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को पहले पैच टेस्ट करने की सलाह दी जाती है। दूसरा घरेलू नुस्खा चावल के आटे, दूध और शहद से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए दो चम्मच चावल का आटा, आधा कप दूध और एक चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं। अगर दूध उपलब्ध न हो तो दही का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पैक को चेहरे पर लगभग 15 मिनट तक लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें और फिर धो लें। चावल का आटा त्वचा की हल्की एक्सफोलिएशन करता है, जबकि दूध और शहद स्किन को मॉइस्चराइज करते हैं। तीसरा लोकप्रिय फेस पैक बेसन, हल्दी और दही का है। इसमें एक चम्मच बेसन, आधा चम्मच हल्दी और एक चम्मच दही मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है। इसे 15 मिनट तक चेहरे पर लगाने के बाद ठंडे पानी से धो लें। बेसन त्वचा की गहराई से सफाई करता है, हल्दी स्किन टोन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है और दही त्वचा को मुलायम बनाती है। हालांकि, हल्दी की मात्रा बहुत कम रखने की सलाह दी जाती है ताकि त्वचा पर पीला रंग न रह जाए। इन घरेलू फेस पैक्स के साथ-साथ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि असली स्किन ग्लो सिर्फ बाहरी देखभाल से नहीं आता, बल्कि इसके लिए पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, भरपूर पानी और सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाव भी जरूरी है। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति को एलर्जी, एक्जिमा या त्वचा पर गंभीर दाने की समस्या है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी उपाय अपनाना सही नहीं होता। गर्मियों में नियमित और सरल स्किन केयर अपनाकर त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।
भुजंगासन में ये गलतियां पड़ सकती हैं कमर पर भारी, आयुष मंत्रालय ने बताया सही अभ्यास का तरीका

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लू और तेज धूप से बचने का देसी तरीका, सत्तू शरबत देगा शरीर को तुरंत ठंडक और ताकत

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में जब तेज धूप और लू शरीर को थका देती है, तब शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने वाले पेय की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में सत्तू का नमकीन शरबत एक बेहद सरल और प्रभावी देसी विकल्प बनकर सामने आता है। यह न सिर्फ शरीर को तुरंत राहत देता है बल्कि लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में भी मदद करता है। सत्तू, जिसे भुने हुए चने से तैयार किया जाता है, भारतीय घरों में एक पारंपरिक और पौष्टिक सामग्री के रूप में जाना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। गर्मियों में इसका सेवन पाचन को बेहतर बनाने के साथ-साथ शरीर की गर्मी को भी संतुलित करता है। यही कारण है कि इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है। इस शरबत को तैयार करना बेहद आसान है। सबसे पहले सत्तू को ठंडे पानी में अच्छी तरह घोलकर स्मूद मिश्रण बनाया जाता है ताकि कोई गांठ न रहे। इसके बाद इसमें भुना जीरा, काला नमक और साधारण नमक मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है। चाहें तो इसमें नींबू का रस, बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च भी मिलाई जा सकती है, जिससे इसका स्वाद चटपटा और ताजगी भरा हो जाता है। तैयार मिश्रण को कुछ देर ठंडा करने के बाद इसे परोसा जाता है। ऊपर से हरा धनिया डालकर इसका स्वाद और भी बढ़ाया जा सकता है। बर्फ मिलाकर इसे और अधिक ठंडा बनाया जा सकता है, जिससे गर्मी में तुरंत राहत महसूस होती है। सत्तू का नमकीन शरबत न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है। इससे अनावश्यक भूख कम लगती है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। यही वजह है कि यह ड्रिंक खासकर गर्मियों में बहुत उपयोगी माना जाता है। देसी और प्राकृतिक होने के कारण यह बाजार के ठंडे पेयों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। इसे रोजाना की डाइट में शामिल करके गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है और शरीर को तरोताजा रखा जा सकता है।
गर्मी में घड़े का पानी क्यों है सबसे बेहतर? एक्सपर्ट्स ने बताए सेहत से जुड़े बड़े फायदे

नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच शरीर को हाइड्रेट और संतुलित रखने के लिए सही पानी का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है। आमतौर पर लोग ठंडक पाने के लिए फ्रिज का पानी पीते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी के घड़े यानी मटके का पानी ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, फ्रिज का बहुत ठंडा पानी गले और पाचन तंत्र पर बुरा असर डाल सकता है। इससे कई बार गले में खराश, सर्दी-जुकाम और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके विपरीत, मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है। मिट्टी के घड़े में रखा पानी न सिर्फ ठंडक देता है, बल्कि इसमें हल्की प्राकृतिक सुगंध भी होती है, जो इसे और अधिक ताजगी भरा बनाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी पानी में मौजूद अशुद्धियों को अपने अंदर सोख लेती है और कुछ हद तक उसे शुद्ध करने में मदद करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मटके का पानी पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है और इम्युनिटी को मजबूत करता है। इसके अलावा यह शरीर के पीएच लेवल को संतुलित रखने में भी मदद करता है, जिससे कई मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। आयुर्वेद में भी मिट्टी के घड़े के पानी को बेहद लाभकारी माना गया है। इसे प्राकृतिक और शुद्ध जल का स्रोत माना जाता है, जो शरीर को भीतर से ठंडक और ऊर्जा प्रदान करता है। आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मटके का पानी फ्रिज के पानी की तुलना में अधिक सुरक्षित विकल्प है, खासकर गर्मियों के मौसम में। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मटके का पानी पूरी तरह केमिकल-फ्री होता है और इसमें प्राकृतिक मिनरल्स मौजूद रहते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। यह बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है। गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए मटके का पानी एक सस्ता, प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि घर में मिट्टी का घड़ा जरूर रखा जाए और नियमित रूप से इसका पानी पिया जाए, ताकि शरीर को प्राकृतिक ठंडक मिलती रहे और स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
साउथ इंडिया की इन हसीन जगहों पर बिताएं गर्मियों की छुट्टी, ठंडा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता कर देगी मंत्रमुग्ध

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही लोग ऐसी जगहों की तलाश करने लगते हैं जहां तेज धूप और गर्म हवाओं से राहत मिल सके। शहरों की भागदौड़ और बढ़ते तापमान के बीच सुकून भरी छुट्टियां बिताने का सबसे अच्छा विकल्प साउथ इंडिया के हिल स्टेशन और प्राकृतिक डेस्टिनेशन माने जाते हैं। यहां की ठंडी हवा, हरियाली से भरे पहाड़, चाय और कॉफी के बागान तथा शांत वातावरण यात्रियों को एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराते हैं। साउथ इंडिया में मुन्नार और वायनाड जैसी जगहें गर्मियों की छुट्टियों के लिए बेहद लोकप्रिय हैं। मुन्नार अपनी खूबसूरत चाय की बगानों की घाटियों और बादलों से ढकी पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। यहां का मौसम इतना सुहावना होता है कि हर सुबह एक नई ताजगी का एहसास कराती है। वहीं वायनाड घने जंगलों, झीलों और एडवेंचर ट्रेकिंग स्पॉट्स के कारण यात्रियों के बीच खास पहचान रखता है। यहां प्रकृति के बीच बिताए गए पल लंबे समय तक याद रहते हैं। कर्नाटक की बात करें तो कूर्ग और चिकमगलूर उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं जो शांति और प्राकृतिक सुंदरता के बीच समय बिताना चाहते हैं। कूर्ग को अक्सर “भारत का स्कॉटलैंड” कहा जाता है, जहां कॉफी के बागान और पहाड़ियों की हरियाली मन को सुकून देती है। हल्की बारिश और ठंडी हवा यहां के वातावरण को और भी आकर्षक बना देती है। दूसरी ओर चिकमगलूर अपने शानदार ट्रेकिंग रूट्स, झरनों और खूबसूरत सूर्यास्त दृश्यों के लिए जाना जाता है, जो हर ट्रैवलर को आकर्षित करता है। अगर कोई पहाड़ों से अलग समुद्र किनारे का अनुभव लेना चाहता है तो केरल की एलेप्पी और वर्कला जैसी जगहें बेहतरीन विकल्प हैं। एलेप्पी अपने हाउसबोट और शांत बैकवॉटर के लिए मशहूर है, जहां पानी के बीच तैरती नावों में यात्रा करना एक अलग ही अनुभव देता है। वहीं वर्कला बीच, योग और आयुर्वेदिक अनुभवों के लिए जाना जाता है। यहां समुद्र की लहरों के साथ बैठकर ठंडी हवा का आनंद लेना यात्रियों को मानसिक सुकून देता है। साउथ इंडिया के ये सभी डेस्टिनेशन गर्मियों में न सिर्फ ठंडा मौसम देते हैं बल्कि प्रकृति के बेहद करीब ले जाते हैं। यहां की हर जगह अपनी अलग पहचान रखती है और हर ट्रिप को यादगार बना देती है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में लोग गर्मियों में इन खूबसूरत स्थानों की ओर रुख करते हैं।
कड़वा खीरा घर लाने से बचना है तो जान लें ये सीक्रेट तरीका, मीठे खीरे की पहचान मिनटों में

नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में खीरा एक ऐसी सब्जी है जो हर घर में लगभग रोज इस्तेमाल होती है। यह न सिर्फ शरीर को ठंडक पहुंचाता है बल्कि पानी की कमी को भी पूरा करने में मदद करता है। लेकिन कई बार लोगों को बाजार से खीरा खरीदते समय यह समस्या हो जाती है कि वह कड़वा निकल आता है, जिससे पूरा स्वाद खराब हो जाता है। ऐसे में सही खीरे की पहचान करना बहुत जरूरी हो जाता है ताकि घर लाकर किसी तरह की परेशानी न हो। खीरे की पहचान करने का पहला तरीका उसके रंग और छिलके से जुड़ा होता है। अगर खीरे का रंग हल्का हरा हो और उसका छिलका समान रूप से साफ दिखे तो ऐसे खीरे अक्सर मीठे और ताजे होते हैं। वहीं जिन खीरों का रंग ज्यादा गहरा या बीच-बीच में पीला दिखाई देता है, उनमें कड़वाहट आने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा खुरदुरे या दानेदार छिलके वाले खीरे भी स्वाद में बेहतर माने जाते हैं। खीरे का आकार भी उसकी गुणवत्ता को दर्शाता है। बहुत बड़े या असामान्य रूप से छोटे खीरे अक्सर स्वाद में अच्छे नहीं होते। मध्यम आकार के सीधे और संतुलित खीरे आमतौर पर ज्यादा ताजे और मीठे होते हैं। टेढ़े-मेढ़े या असमान आकार वाले खीरों में कड़वाहट की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए इन्हें चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए। खीरे की कठोरता भी उसकी ताजगी का एक महत्वपूर्ण संकेत होती है। ताजा खीरा हल्का सख्त और मजबूत महसूस होता है। अगर खीरा बहुत ज्यादा नरम या दबाने पर पिचका हुआ लगे तो वह पुराना हो सकता है और उसका स्वाद खराब होने की संभावना रहती है। इसलिए हमेशा ऐसे खीरे चुनने चाहिए जो संतुलित रूप से कड़े हों। खीरे के सिरों पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। अगर खीरे का डंठल वाला हिस्सा ज्यादा सूखा हुआ या गहरे रंग का दिखे तो उसमें कड़वाहट आने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं ताजा और हल्के रंग वाले सिरे वाले खीरे आमतौर पर ज्यादा मीठे और खाने में बेहतर होते हैं। अगर कभी गलती से कड़वा खीरा घर आ भी जाए तो उसे फेंकने की जरूरत नहीं होती। उसका छिलका उतारकर और सिरों को काटकर कड़वाहट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कई लोग पारंपरिक तरीके से खीरे के सिरे को हल्का रगड़कर भी उसकी कड़वाहट कम करने की कोशिश करते हैं, जिससे उसका स्वाद बेहतर हो जाता है। इन आसान तरीकों को अपनाकर कोई भी व्यक्ति बाजार से अच्छे और स्वादिष्ट खीरे की पहचान आसानी से कर सकता है और गर्मियों में अपने भोजन को और भी हेल्दी और ताजा बना सकता है।
कमजोर और सूखे नाखूनों की समस्या: जानिए कैसे वापस पा सकते हैं मजबूत और चमकदार नाखून

नई दिल्ली। नाखून हमारी पर्सनैलिटी का एक अहम हिस्सा होते हैं। साफ, मजबूत और चमकदार नाखून जहां हाथों की खूबसूरती बढ़ाते हैं, वहीं टूटते और सूखे नाखून अक्सर स्वास्थ्य से जुड़ी कमियों की ओर इशारा करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नाखून मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं, और जब शरीर में पोषण या नमी की कमी होती है, तो ये कमजोर होने लगते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार साबुन, डिटर्जेंट और केमिकल के संपर्क में आने से नाखूनों की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। इससे वे सूखे, भुरभुरे और जल्दी टूटने लगते हैं। इसके अलावा पानी की कमी भी नाखूनों की सेहत पर सीधा असर डालती है। नाखूनों को मजबूत बनाने के आसान उपायविशेषज्ञों के अनुसार, नाखूनों की सही देखभाल से उनकी सेहत को दोबारा बेहतर किया जा सकता है। सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना। पर्याप्त पानी पीने से नाखूनों की बनावट बेहतर होती है और वे मजबूत बने रहते हैं। हाथ धोने के बाद मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना भी बेहद जरूरी है। इससे नाखूनों के आसपास की त्वचा में नमी बनी रहती है और सूखापन कम होता है। रात के समय नाखूनों की देखभाल और भी ज्यादा असरदार मानी जाती है। सोने से पहले नारियल तेल, पेट्रोलियम जेली या मॉइस्चराइजिंग क्रीम लगाने से नाखूनों में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे टूटने की समस्या कम होती है। विटामिन और तेलों का महत्वविशेषज्ञ विटामिन ई को नाखूनों के लिए बेहद फायदेमंद मानते हैं। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो नाखूनों को अंदर से मजबूत बनाता है। विटामिन ई ऑयल से हल्की मालिश करने पर ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और नाखूनों को पर्याप्त पोषण मिलता है। जैतून का तेल भी नाखूनों की देखभाल में कारगर माना जाता है। इसमें मौजूद हेल्दी फैट्स नाखूनों की सूखी परत को मुलायम बनाते हैं और उनकी टूटने की संभावना को कम करते हैं। सही डाइट भी है जरूरीडॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि अंदरूनी पोषण भी बेहद जरूरी है। प्रोटीन, बायोटिन, आयरन, जिंक और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व नाखूनों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हरी सब्जियां, अंडे, दालें, मेवे और फल नाखूनों की सेहत को बेहतर बनाते हैं। साथ ही, जरूरत से ज्यादा नेल पॉलिश रिमूवर या नकली नाखूनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये नाखूनों को कमजोर कर सकते हैं।
गर्मी में कूलर की गर्म हवा से परेशान? ये 2 आसान उपाय बना सकते हैं कमरे को AC जैसा ठंडा

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में जब तापमान लगातार बढ़ता है तो घरों में कूलर ही सबसे बड़ा सहारा बनता है। लेकिन कई बार लोगों को यह समस्या परेशान करती है कि कूलर ठंडी हवा देने के बजाय गर्म हवा फेंकने लगता है। ऐसे में लगता है कि अब राहत मिलना मुश्किल है, लेकिन कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से कूलर की कूलिंग को फिर से बेहतर किया जा सकता है और कमरे में ठंडक का असर बढ़ाया जा सकता है। कूलर की हवा को ठंडा बनाने के लिए सबसे सरल तरीका पानी में सेंधा नमक का उपयोग माना जाता है। जब कूलर के टैंक में पानी भरते समय उसमें थोड़ी मात्रा में सेंधा नमक मिलाया जाता है तो पानी जल्दी गर्म नहीं होता और लंबे समय तक ठंडा बना रहता है। इससे कूलर की हवा का असर बेहतर हो जाता है और कमरे में ठंडक महसूस होती है। यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनके घर में लगातार गर्म हवा की समस्या आती रहती है। इसके अलावा फिटकरी का उपयोग भी कूलर की कूलिंग को सुधारने में मदद करता है। जब कूलर के पानी में फिटकरी डाली जाती है तो यह पानी को साफ रखने में मदद करती है और उसमें मौजूद गंदगी और बदबू को कम करती है। साफ और शुद्ध पानी के कारण कूलर की हवा ज्यादा ताजगी भरी और ठंडी महसूस होती है, जिससे कमरे का वातावरण काफी हद तक बेहतर हो जाता है। कूलर की कूलिंग को और बढ़ाने के लिए कुछ अन्य घरेलू उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। जैसे टैंक में सामान्य पानी की जगह ठंडा पानी या बर्फ डालने से तुरंत ठंडक महसूस होती है और कमरे का तापमान तेजी से कम होता है। यह तरीका खासकर तब ज्यादा असरदार होता है जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा हो। इसके साथ ही कूलर की घास या कूलिंग पैड की स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। अगर यह पुराना या खराब हो जाए तो कूलर की हवा गर्म आने लगती है। इसलिए समय-समय पर इसकी सफाई या बदलाव जरूरी होता है ताकि हवा का फ्लो सही बना रहे और कूलिंग बेहतर मिले। कमरे में कूलर का असर बढ़ाने के लिए वेंटिलेशन का ध्यान रखना भी जरूरी है। अगर कमरे की खिड़कियां और दरवाजे सही तरीके से खुले रहें तो हवा का सही प्रवाह बना रहता है और कूलर की ठंडी हवा पूरे कमरे में फैल जाती है। इससे कमरा जल्दी ठंडा होता है और लंबे समय तक ठंडक बनी रहती है। इसके अलावा कूलर में जरूरत से ज्यादा पानी भरने से बचना चाहिए क्योंकि इससे हवा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। सही मात्रा में पानी और नियमित सफाई कूलर की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए रखती है और गर्मी में राहत दिलाने में मदद करती है।
मीठी ड्रिंक्स बन रही लिवर की दुश्मन, फैटी लिवर से बचाव के लिए जरूरी हैं ये 3 आसान आदतें

नई दिल्ली। आज की बदलती जीवनशैली और अनहेल्दी खानपान की आदतें शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर असर डाल रही हैं, जिनमें लिवर सबसे अधिक प्रभावित होने वाले अंगों में से एक है। लिवर शरीर में डिटॉक्सिफिकेशन, पाचन और एनर्जी बैलेंस जैसे कई अहम कार्य करता है, लेकिन जब खानपान में अधिक मात्रा में चीनी और मीठी ड्रिंक्स शामिल हो जाती हैं, तो इसका सीधा असर लिवर की कार्यक्षमता पर पड़ने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक ज्यादा शुगर का सेवन फैटी लिवर जैसी गंभीर स्थिति को जन्म दे सकता है, जिसमें लिवर के अंदर फैट जमा होने लगता है और उसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। शरीर में जब अधिक मात्रा में चीनी जाती है तो वह फ्रुक्टोज और ग्लूकोज में बदलकर लिवर तक पहुंचती है। सामान्य स्थिति में लिवर इन शुगर को ऊर्जा में बदलकर उपयोग करता है, लेकिन जब इनकी मात्रा जरूरत से अधिक हो जाती है तो शरीर इन्हें फैट के रूप में स्टोर करने लगता है। समय के साथ यह फैट लिवर में जमा होता जाता है और धीरे-धीरे फैटी लिवर की समस्या पैदा हो जाती है। यह स्थिति न केवल लिवर के कार्य को प्रभावित करती है बल्कि शरीर की ऊर्जा, पाचन और मेटाबॉलिज्म पर भी नकारात्मक असर डालती है। मीठी ड्रिंक्स इस समस्या को और भी तेजी से बढ़ा सकती हैं। इन पेयों में मौजूद हाई शुगर कंटेंट और आर्टिफिशियल तत्व शरीर में तेजी से अवशोषित होते हैं, जिससे लिवर पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। लगातार इनका सेवन लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। इसके अलावा इनमें मौजूद केमिकल्स और एडिटिव्स भी लिवर की सेहत को कमजोर करने का काम करते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ मीठी ड्रिंक्स के सेवन को सीमित करने की सलाह देते हैं। फैटी लिवर जैसी समस्या से बचने के लिए संतुलित आहार को सबसे जरूरी माना जाता है। जब भोजन में पोषक तत्वों का सही संतुलन होता है तो लिवर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और वह बेहतर तरीके से अपना काम करता है। इसके साथ ही ताजे फल और फाइबर युक्त आहार लिवर की सफाई प्रक्रिया को मजबूत करते हैं और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी लिवर के सही कामकाज के लिए बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि यह शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। अनहेल्दी खानपान, अत्यधिक शुगर का सेवन और निष्क्रिय जीवनशैली धीरे-धीरे लिवर को कमजोर कर सकती है, जिससे आगे चलकर गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों को अपनाकर लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रखा जा सकता है।
मदर्स डे पर भावुक हुईं दीपिका सिंह, बोलीं- “मां बनना जिंदगी का सबसे खूबसूरत अहसास”

नई दिल्ली। माताओं के सम्मान और प्रेम को समर्पित मदर्स डे (10 मई) को लेकर टीवी अभिनेत्री दीपिका सिंह बेहद उत्साहित नजर आईं। लोकप्रिय शो ‘मंगल लक्ष्मी’ में मंगल का किरदार निभा रहीं दीपिका ने इस खास मौके पर अपने मातृत्व के अनुभवों को खुलकर साझा किया। दीपिका सिंह ने कहा कि मां बनना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा और खूबसूरत बदलाव रहा है। उनके अनुसार, यह एक ऐसा सफर है जो सिर्फ एक किरदार नहीं बल्कि जीवनभर निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा सोहम उनकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर दिन उन्हें जीवन के छोटे-छोटे पलों की अहमियत समझाता है। अभिनेत्री ने भावुक होते हुए कहा कि जब वह शूटिंग के दौरान बच्चों के साथ सीन करती हैं, तो अक्सर उन्हें अपने बेटे की याद आती है। उनके लिए यह अनुभव काफी भावनात्मक होता है, क्योंकि वह हर बच्चे में अपने बेटे की झलक महसूस करती हैं। दीपिका ने यह भी कहा कि मां होने के साथ-साथ वह एक कामकाजी महिला भी हैं और चाहती हैं कि उनका बेटा उन्हें इस रूप में भी देखे। उनके अनुसार, जब बच्चे अपनी मां को काम करते देखते हैं, तो उन्हें मेहनत और सपनों की अहमियत समझ आती है। उन्होंने कहा कि एक महिला की पहचान सिर्फ मां होने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह कई भूमिकाएं एक साथ निभाती है। मदर्स डे पर उन्होंने सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि सभी महिलाओं की सराहना की। दीपिका ने कहा कि हर महिला, जो परिवार की जिम्मेदारियों को प्यार और समर्पण के साथ निभाती है, वह सम्मान की हकदार है। उन्होंने सभी माताओं की मेहनत, त्याग और प्रेम को सलाम किया।