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गर्मी से बचने के देसी नुस्खे: शरीर को ठंडा रखती हैं ये 5 पारंपरिक चीजें, लू और डिहाइड्रेशन से मिलेगा बचाव

नई दिल्‍ली । जैसे जैसे गर्मी का मौसम बढ़ता है, वैसे वैसे शरीर पर इसका असर भी साफ दिखाई देने लगता है। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान लोगों को जल्दी थका देता है और लू, डिहाइड्रेशन तथा पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। आज के समय में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए फ्रिज के ठंडे पानी और एसी का सहारा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद और ग्रामीण जीवन में ऐसे कई पारंपरिक उपाय मौजूद हैं जो बिना किसी आधुनिक सुविधा के भी शरीर को ठंडा और स्वस्थ बनाए रखते हैं। सबसे पहले बात करते हैं मिट्टी के घड़े मटका के पानी की। शहरों में भले ही आरओ और फ्रिज का इस्तेमाल बढ़ गया हो, लेकिन मिट्टी के घड़े का पानी आज भी सबसे प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। घड़े की मिट्टी में मौजूद छोटे छोटे छिद्र वाष्पीकरण की प्रक्रिया के जरिए पानी को स्वाभाविक रूप से ठंडा रखते हैं। यह पानी शरीर को धीरे धीरे ठंडक देता है और पाचन तंत्र के लिए भी बेहतर माना जाता है। इसके विपरीत फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी गले और पेट के लिए नुकसानदायक हो सकता है। गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए बेल का शरबत भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में इसे गर्मी का सबसे प्रभावी पेय माना जाता है। बेल में फाइबर और विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाती है और पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाती है। एक गिलास बेल का शरबत न केवल लू के प्रभाव को कम करता है बल्कि पूरे दिन शरीर को तरोताजा बनाए रखता है। इसके अलावा गांवों में खस और जूट के परदे भी प्राकृतिक कूलिंग का एक बेहतरीन तरीका माने जाते हैं। पुराने समय से ही लोग खस या जूट के बोरों को पानी से गीला करके खिड़कियों पर लगाते हैं। जब गर्म हवा इन गीले परदों से होकर गुजरती है तो कमरे का तापमान 5 से 10 डिग्री तक कम हो जाता है। खस की हल्की खुशबू वातावरण को ताजगी से भर देती है और मन को भी शांति देती है। गर्मियों में शरीर को ऊर्जा देने और ठंडा रखने के लिए सत्तू भी बेहद लोकप्रिय है। चना और जौ से बना सत्तू पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसे पानी में घोलकर पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहता है। यही वजह है कि गांवों में किसान चिलचिलाती धूप में काम करने से पहले सत्तू का सेवन करना पसंद करते हैं। वहीं प्याज का देसी नुस्खा भी गर्मी से बचाव के लिए लंबे समय से अपनाया जाता रहा है। ग्रामीण इलाकों में मान्यता है कि जेब में प्याज रखकर बाहर निकलने से लू नहीं लगती। प्याज में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करते हैं। कच्चे प्याज का सलाद या छाछ के साथ इसका सेवन करने से भी शरीर की गर्मी कम होती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो हमारे पारंपरिक और देसी उपाय न केवल सस्ते और आसान हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी हैं। यदि गर्मियों में इन प्राकृतिक तरीकों को अपनाया जाए तो शरीर को ठंडा रखने के साथ साथ कई मौसमी बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

GWALIOR TOLL PLAZA VIVAD: भिंड टोल प्लाजा पर बवाल: टोल मांगने पर स्कॉर्पियो सवार युवकों ने कर्मचारियों से की मारपीट

TOLL PLAZA VIVAD

HIGHLIGHTS: भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे-719 के बरैठा टोल प्लाजा की घटना स्कॉर्पियो सवार युवकों ने बिना टोल दिए बैरियर खोलने का बनाया दबाव टोल कर्मचारियों से कहासुनी के बाद हुई मारपीट पूरी घटना टोल प्लाजा के CCTV कैमरों में कैद थाने पहुंचने के बाद रिश्तेदारी के कारण दोनों पक्षों में समझौता GWALIOR TOLL PLAZA VIVAD: ग्वालियर। भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे-719 पर स्थित बरैठा टोल प्लाजा पर टोल टैक्स को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक एक स्कॉर्पियो वाहन में सवार आधा दर्जन से अधिक युवक ग्वालियर की ओर जा रहे थे। जब उनका वाहन टोल प्लाजा पर पहुंचा तो कर्मचारियों ने नियमानुसार टोल टैक्स की मांग की। जंग के डर से शेयर बाजार में भूचाल: सेंसेक्स 1862 अंक टूटा, निफ्टी 582 अंक लुढ़का बिना टोल दिए बैरियर खोलने का दबाव टोल कर्मचारियों के अनुसार वाहन में सवार युवक बिना टोल चुकाए ही बैरियर खोलने का दबाव बनाने लगे। कर्मचारियों ने जब नियम का हवाला देते हुए टोल जमा करने की बात कही तो दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। संसद में ईरान जंग पर विपक्ष का हंगामा, सरकार बहस के लिए तैयार कर्मचारियों से की गई हाथापाई देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और स्कॉर्पियो सवार युवकों ने टोल कर्मचारी आनंद सिंह समेत अन्य कर्मचारियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। टोल प्लाजा परिसर में कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। सोना-चांदी में भारी गिरावट: वैश्विक तनाव और मजबूत डॉलर से कीमतें फिसलीं, निवेशकों को झटका थाने पहुंचा मामला, फिर हुआ समझौता घटना के बाद टोल कर्मचारी शिकायत लेकर महाराजपुरा थाने पहुंचे। थोड़ी देर बाद वाहन सवार युवक भी थाने पहुंच गए। बातचीत के दौरान पता चला कि दोनों पक्षों के बीच आपसी रिश्तेदारी है। इसके बाद आपसी बातचीत से मामला शांत करा दिया गया और दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया। पानी में उगाएं ये 5 इंडोर पौधे, घर और बालकनी बनेगी हरी-भरी मिनी गार्डन टोल प्रबंधन ने दी जानकारी टोल प्लाजा के मैनेजर अमित सिंह राठौड़ ने बताया कि टोल कर्मचारियों और वाहन सवार युवकों के बीच विवाद हुआ था। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाने के कारण पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई।  

पानी में उगाएं ये 5 इंडोर पौधे, घर और बालकनी बनेगी हरी-भरी मिनी गार्डन

नई दिल्ली। घर में हरियाली लाने का शौक आजकल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन शहरों और अपार्टमेंट में जगह की कमी या मिट्टी और खाद की परेशानी के कारण कई लोग गार्डनिंग से दूर रह जाते हैं। ऐसे में पानी में उगने वाले इंडोर पौधे एक शानदार विकल्प साबित हो सकते हैं। ये पौधे कम जगह में भी आसानी से बढ़ते हैं और घर की सजावट में चार चाँद लगाते हैं।  मनी प्लांटमनी प्लांट इंडोर पौधों में सबसे लोकप्रिय है। इसे उगाना बेहद आसान है। बस इसकी एक छोटी बेल काटकर पानी से भरे गिलास या जार में रखें। कुछ ही दिनों में जड़ें उगने लगती हैं। इसे हल्की रोशनी वाली जगह रखें और पानी हर सप्ताह बदलते रहें। यह न सिर्फ घर को सजाता है बल्कि सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ाता है। स्नेक प्लांट स्नेक प्लांट को आमतौर पर मिट्टी में उगाया जाता है, लेकिन इसकी पत्ती की कटिंग को पानी में डालने पर भी यह जड़ें उगाती है। जड़ें निकलने में लगभग डेढ़ से दो महीने लग सकते हैं। यह कम रोशनी में भी बढ़ता है, इसलिए इसे बेडरूम, लिविंग रूम या ऑफिस में रखा जा सकता है। मॉन्स्टेरा मॉन्स्टेरा अपने बड़े और डिजाइनदार पत्तों के लिए जाना जाता है। इसकी कटिंग को पानी में डालें और दो-तीन हफ्तों में जड़ें दिखने लगेंगी। हल्की छनकर आने वाली रोशनी इसे सबसे अच्छा बढ़ने में मदद करती है। यह पौधा घर के इंटीरियर को स्टाइलिश लुक देता है।  सिंगोनियम सिंगोनियम या एरोहेड प्लांट की पत्तियां तीर के आकार की होती हैं। इसे पानी में उगाना आसान है और लगभग दो हफ्तों में जड़ें निकलने लगती हैं। इसे स्टडी टेबल, ऑफिस डेस्क, किचन विंडो या छोटे कोने में रखा जा सकता है। इसकी आकर्षक पत्तियां घर की सजावट में निखार लाती हैं। लकी बैम्बू लकी बैम्बू आमतौर पर पानी में उगाया जाता है और इसकी देखभाल बहुत कम मेहनत में होती है। इसे तेज धूप से दूर, अच्छी रोशनी वाली जगह रखें और जड़ें हमेशा पानी में डूबी रहें। वास्तु और फेंगशुई के अनुसार यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता लाता है। इंडोर पौधों के फायदे पानी में उगने वाले ये पौधे न केवल घर को हरा-भरा बनाते हैं बल्कि हवा को साफ करने और मानसिक तनाव कम करने में भी मदद करते हैं। कम जगह में भी इन्हें सजाकर आप अपने घर या बालकनी को छोटे-छोटे गार्डन में बदल सकते हैं।

प्राचीन ठंडक रहस्य: गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के 5 देसी तरीके…

नई दिल्ली:  गर्मियों का मौसम आते ही शरीर को ठंडा रखना हर किसी के लिए चुनौती बन जाता है। शहरों में लोग अक्सर फ्रिज का ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक और एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं। ये तुरंत राहत तो देते हैं और गर्मी में थोड़ी राहत महसूस कराते हैं, लेकिन लंबे समय में स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर भी पड़ सकता है। अगर हम गांवों की जीवनशैली देखें तो पता चलता है कि वहां लोग सदियों से प्राकृतिक और देसी तरीकों से गर्मी से राहत पाते आए हैं। इन तरीकों में न तो बिजली की जरूरत होती है और न ही महंगे उपकरण। फिर भी ये शरीर को अंदर से ठंडा रखने में बेहद असरदार हैं। हमारे पारंपरिक खान-पान और घरेलू नुस्खों में कई चीजें शामिल हैं जो शरीर का तापमान संतुलित रखने में मदद करती हैं। यही कारण है कि गांवों में लोग तेज गर्मी के बावजूद ज्यादा हेल्दी और एनर्जेटिक रहते हैं। आइए जानते हैं पांच ऐसी देसी चीजों के बारे में जो गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए आज भी अपनाई जाती हैं। 1. मटके का पानी गांवों में ज्यादातर घरों में मिट्टी के मटके में पानी रखा जाता है। मटके का पानी फ्रिज के पानी जितना ठंडा नहीं होता लेकिन धीरे-धीरे शरीर को ठंडक पहुंचाता है। मिट्टी के बर्तन में छोटे-छोटे छिद्र पानी को धीरे-धीरे ठंडा करते हैं। यह पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है और पाचन के लिए भी लाभकारी होता है। 2. सत्तू का शरबत भुने हुए चने से बनने वाला सत्तू का शरबत बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में गर्मियों में बहुत लोकप्रिय है। इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, लंबे समय तक पेट भरा रखता है और लू से बचाव में मदद करता है। 3. बेल का शरबत बेल का फल गर्मियों में बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसका शरबत शरीर को अंदर से ठंडा करता है और पाचन में सुधार लाता है। आयुर्वेद में भी इसे गर्मी से राहत और पाचन के लिए उपयोगी बताया गया है। 4. छाछ (मट्ठा) दही से बनी छाछ गर्मियों में शरीर को हल्का और ठंडा रखने में मदद करती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक तत्व पाचन को मजबूत बनाते हैं और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। छाछ पीने से गर्मी में हल्का महसूस होता है और ऊर्जा बनी रहती है। 5. खस का शरबत खस की जड़ से तैयार शरबत भी गर्मियों में ठंडक देने के लिए काफी प्रभावी है। खस की तासीर ठंडी मानी जाती है और यह शरीर को ठंडक देने के साथ गर्मी से होने वाली थकान को भी कम करता है। इसका सेवन शरीर को तरोताजा महसूस कराता है और लंबे समय तक ठंडक बनाए रखता है। आज के समय में लोग गर्मी से बचने के लिए फ्रिज के ठंडे पानी और कोल्ड ड्रिंक्स पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन हमारे पारंपरिक देसी तरीके आज भी उतने ही असरदार हैं जितने पहले थे और शरीर को अंदर से ठंडा बनाए रखने में मदद करते हैं। गर्मी में स्वास्थ्य और ऊर्जा बनाए रखने के लिए इन प्राकृतिक उपायों को अपनाना सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।

दही: ब्लड प्रेशर कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला सुपरफूड, जानें 12 हेल्थ बेनिफिट्स और सावधानियां

नई दिल्ली । दही सेहत का खजाना है। इसमें प्रोटीन गुड फैट शुगर और प्रोबायोटिक्स की भरपूर मात्रा होती है जो न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि गट हेल्थ इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को भी रीसेट करता है। इतना ही नहीं यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मददगार है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित स्टडी बताती है कि नियमित दही खाने से हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क 16–20% तक कम हो सकता है। हफ्ते में पांच या उससे अधिक बार संतुलित डाइट के साथ दही खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। डॉ. संचयन रॉय सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल दिल्ली के अनुसार दही में मौजूद जिंक सेलेनियम और विटामिन D संक्रमण पैदा करने वाले वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करते हैं। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर में इंफ्लेमेशन कम होता है। नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम से लेकर गंभीर बीमारियों का रिस्क घटता है। हार्ट हेल्थ के लिए भी दही बेहद फायदेमंद है। इसमें पोटेशियम और मैग्नीशियम मौजूद हैं जो शरीर से एक्स्ट्रा सोडियम को बाहर निकालकर ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं। प्रोबायोटिक्स बैड कोलेस्ट्रॉल LDLको कम करने और इंफ्लेमेशन घटाने में मदद करते हैं। इन गुणों के कारण दही हार्ट डिजीज का रिस्क कम कर सकता है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल में दही कैसे मदद करता है? इसमें मौजूद बायोएक्टिव पेप्टाइड्स ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले एंजाइम्स की एक्टिविटी को कम करते हैं और ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करते हैं। इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दबाव संतुलित रहता है। विशेष रूप से मिड एज महिलाओं और अधिक BMI वाले लोगों के लिए दही ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। दही के नियमित सेवन से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। प्रोबायोटिक्स गट माइक्रोबायोम का संतुलन बनाए रखते हैं बैड बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं और IBS कब्ज या ब्लोटिंग जैसी समस्याओं में राहत देते हैं। स्वस्थ गट माइक्रोबायोम मूड और ब्रेन फंक्शनिंग को भी प्रभावित करता है। दही खाने का सही समय दोपहर का माना जाता है क्योंकि इस समय पाचन क्षमता सबसे मजबूत होती है। खाली पेट दही खाने से पेट में एसिड बढ़ सकता है इसलिए इसे हमेशा मेन कोर्स के साथ साइड डिश के रूप में लें। मीठा या फ्लेवर्ड दही एक्स्ट्रा शुगर और प्रिजर्वेटिव्स के कारण नुकसानदेह हो सकता है। साथ ही दही स्किन और बालों के लिए भी लाभकारी है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड और प्रोटीन स्किन की रंगत सुधारते हैं मॉइश्चर बनाए रखते हैं और बालों की जड़ें मजबूत करते हैं।हालांकि कुछ लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। आर्थराइटिस अस्थमा किडनी डिजीज लैक्टोज इनटॉलेरेंस या गंभीर एसिडिटी वाले लोगों को दही सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। दही खाने से ब्लड प्रेशर कम होता है इम्यूनिटी मजबूत होती है और यह शरीर को कई तरह की लाइफस्टाइल डिजीज से बचाने में मदद करता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करना एक छोटी लेकिन असरदार हेल्थ हैबिट है।

सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका

नई दिल्ली । हम अक्सर सुनते हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। हेल्थ एक्सपर्ट इसे साइलेंट हीलर कहते हैं क्योंकि यह छोटी लेकिन असरदार आदत हमारे शरीर को रीस्टार्ट का संदेश देती है। इंग्लैंड की लॉफबोरो यूनिवर्सिटी की स्टडी बताती है कि सुबह उठने के 30 मिनट के अंदर आधा लीटर पानी पीने से ब्रेन की फंक्शनिंग में सुधार आता है। डॉ. रोहित शर्मा कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल जयपुर बताते हैं कि सोते समय शरीर रिकवरी और रिपेयर मोड में चला जाता है। मेटाबॉलिज्म और ऑर्गन्स स्लो हो जाते हैं। ऐसे में सुबह पानी पीना शरीर को धीरे धीरे इस मोड से बाहर निकालता है। मूड संतुलित रहता है फोकस और याददाश्त बढ़ती है और सोचने समझने की क्षमता बेहतर होती है। डाइजेशन पर इसका असर भी महत्वपूर्ण है। खाली पेट पानी पेट में पहुंचकर पाचन तंत्र को सक्रिय करता है पेट और आंतों की मांसपेशियां मूवमेंट शुरू करती हैं। गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स रिलीज होने से खाना पचाने की क्षमता बढ़ती है। कब्ज एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं कम होती हैं। सुबह पानी पीने से कई लाइफस्टाइल डिजीज का जोखिम घट सकता है। हाइड्रेटेड रहने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और टॉक्सिन्स जमा नहीं होते। किडनी स्टोन यूरिन इन्फेक्शन हाई ब्लड प्रेशर और कब्ज जैसी बीमारियों के खतरे कम होते हैं। वजन कम करने में भी यह मददगार है। पानी मेटाबॉलिज्म को 20–30% तक एक्टिव करता है और कैलोरी बर्न में सहायक होता है। पेट थोड़ा भरा महसूस होने से नाश्ते में ओवरईटिंग कम होती है। हालांकि सिर्फ पानी पीने से वजन कम नहीं होता इसे हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ अपनाना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखता है। डिहाइड्रेशन से थकान चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी हो सकती है। सुबह पानी पीने से ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई मिलती है जिससे स्ट्रेस हॉर्मोन बैलेंस होते हैं और दिन की शुरुआत क्लियर और शांत होती है। एनर्जी लेवल और मूड पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। रात भर डिहाइड्रेटेड रहने से शरीर सुस्त रहता है। पानी पीते ही सेल्स सक्रिय हो जाती हैं थकान कम होती है और सिर भारी लगने की समस्या घटती है। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट चाय कॉफी से पहले पानी पीने की सलाह देते हैं। डॉ. शर्मा के मुताबिक गुनगुना या नॉर्मल टेम्परेचर का पानी सुबह के लिए सबसे सही है। ठंडा पानी डाइजेशन धीमा कर सकता है। आमतौर पर 1–2 गिलास 250–500 ml पानी पर्याप्त होता है लेकिन मौसम और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से मात्रा बदल सकती है। कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। किडनी या हार्ट की समस्या लो ब्लड प्रेशर गंभीर गैस्ट्रिक इश्यू वाले लोग थोड़ी सतर्कता बरतें। सुबह खाली पेट पानी पीना एक छोटी लेकिन असरदार आदत है जो डाइजेशन मेटाबॉलिज्म मेंटल हेल्थ और ओवरऑल वेलबीइंग को बेहतर बनाती है।

रोज सुबह पीएं मेथी का पानी: कोलेस्ट्रॉल घटाए, वजन नियंत्रित करे और मेटाबॉलिज्म बढ़ाए

नई दिल्ली । आयुर्वेद में मेथी को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खान-पान के कारण कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जब खून में कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल से ज्यादा हो जाता है तो यह नसों में जमा होकर ब्लॉकेज और दिल पर अतिरिक्त दबाव का कारण बनता है। यूपी के अलीगढ़ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पीयूष माहेश्वरी के अनुसार मेथी के दानों में फाइबर और स्टेरोइडल सैपोनिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीने से खून में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम होता है। यह नसों की दीवारों पर जमा फैट को पिघलाकर शरीर से बाहर निकालता है जिससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दिल पर पड़ने वाला दबाव कम होता है। इसका सेवन आसान है। रात को एक गिलास पानी में एक चम्मच मेथी दाना भिगो दें। सुबह दाने चबाकर खाएं और पानी पी लें। इस सरल उपाय से नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है और दिल की सेहत बेहतर रहती है। डॉ. माहेश्वरी बताते हैं कि डायबिटीज के मरीजों के लिए मेथी का पानी वरदान है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर ब्लड में शुगर के अवशोषण की गति धीमी करता है और इंसुलिन के उत्पादन में मदद करता है। नियमित सेवन से फास्टिंग शुगर लेवल नियंत्रित रहता है और मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है। पाचन के लिए भी मेथी का पानी लाभकारी है। यह गैस एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है आंतों को साफ़ करता है और शरीर से टॉक्सिन्स निकालता है। मेटाबॉलिज्म को तेज करके यह अतिरिक्त चर्बी को बर्न करने में मदद करता है। पेट लंबे समय तक भरा महसूस होने से ओवरईटिंग और अनावश्यक कैलोरी का सेवन भी कम होता है। मेथी की तासीर गर्म होती है जो वात दोष को संतुलित करती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जोड़ों और हड्डियों की सूजन कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में इसे हार्ट डायबिटीज पाचन और वजन कंट्रोल के लिए शक्तिशाली औषधि माना गया है। रोज सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीने से नसों में जमा गंदे कोलेस्ट्रॉल कम होता है ब्लड फ्लो बेहतर होता है मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है वजन नियंत्रित रहता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह दिल पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए एक सरल लेकिन असरदार आयुर्वेदिक उपाय है।

भारतीय पारंपरिक औषधि अमृतधारा सिर दर्द घबराहट और अपच में दे राहत..

नई दिल्ली में स्वास्थ्य और पारंपरिक उपचार के क्षेत्र में अमृतधारा एक ऐसा नाम है जिसे सदियों से भारतीय घरों में प्रयोग किया जाता रहा है। यह औषधि खासतौर पर सिर दर्द, माइग्रेन, अचानक घबराहट, मतली और अपच जैसी समस्याओं में लाभकारी मानी जाती है। हालांकि आधुनिक जीवनशैली में यह पारंपरिक औषधि धीरे-धीरे भूलती जा रही है। अमृतधारा बेहद कम पदार्थों से बनाई जाती है और इसका प्रभाव काफी शक्तिशाली होता है। इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन सत्वों का उपयोग किया जाता है -भीमसेनी कपूर, सत अजवाइन और सत पुदीना। ये तीक्ष्ण और सुगंधित द्रव्य मिलकर शरीर को ठंडक पहुँचाते हैं और सिर दर्द, माइग्रेन, बेचैनी, सर्दी-जुकाम और अपच में राहत देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जब सिर में दर्द या माइग्रेन होता है, तो शरीर कमजोर महसूस करने लगता है और कभी-कभी घबराहट के कारण बीपी गिरने लगता है। ऐसे में अमृतधारा का प्रयोग सभी उम्र के लोगों के लिए लाभकारी है। यह केवल बाहरी उपयोग ही नहीं, बल्कि थोड़ी मात्रा में सेवन करने पर पेट और अपच की समस्या में भी आराम देता है। अमृतधारा बनाने की विधि भी बहुत आसान है। एक कांच की शीशी में कपूर सत्व, अजवाइन सत्व और पुदीना सत्व को मिलाकर शीशी तुरंत बंद कर दें। हल्के हाथ से शीशी को हिलाएं ताकि तीनों तत्व आपस में अच्छी तरह मिल जाएं और औषधि का निर्माण हो। ध्यान रखें कि इसे कान, नाक और आंख में डालने से बचें। इस औषधि का स्वाद तीखा लेकिन सुगंधित होता है। इसे लंबे समय तक खुला न रखें क्योंकि यह द्रव वाष्पित हो जाता है। सिर दर्द होने पर इसे सीधे माथे पर लगाएं। दांत दर्द में रुई की सहायता से प्रभावित जगह पर लगाना लाभकारी होता है। पेट या अपच की समस्या होने पर थोड़ी मात्रा में सेवन करें। साथ ही यदि मुख से दुर्गंध आती है तो पानी में मिलाकर कुल्ला करने से आराम मिलता है। विशेष सावधानी यह है कि गर्भवती महिलाएं और बच्चे इसे सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लें। अगर अमृतधारा लगाने पर जलन महसूस हो, तो इसका उपयोग बंद कर दें। यह पारंपरिक औषधि न केवल शरीर को ठंडक देती है, बल्कि ताजगी और राहत का अनुभव भी कराती है। अमृतधारा के नियमित और सही उपयोग से सिर दर्द, माइग्रेन और घबराहट जैसी परेशानियों में राहत पाई जा सकती है और यह भारतीय घरेलू उपचार की एक बहुमूल्य धरोहर है जिसे नई पीढ़ी को भी जानना और अपनाना चाहिए।

संगीत से मानसिक शांति, चिंता और उदासी दूर करें, म्यूजिक थेरेपी बन रही आसान उपाय

नई दिल्ली में आज के तेज और तनावपूर्ण जीवन में मानसिक स्वास्थ्य का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। अनियमित दिनचर्या, बढ़ता काम का प्रेशर और भावनात्मक उतार-चढ़ाव शरीर के साथ ही मन को भी प्रभावित करते हैं। ऐसे में तनाव, चिंता, चिड़चिड़ापन, उदासी और घबराहट जैसी मानसिक समस्याएं आम हो जाती हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन समस्याओं से निपटने के लिए म्यूजिक थेरेपी (Music Therapy) बेहद कारगर साबित हो रही है। मेंटल हेल्थ के लिए संगीत एक सरल, मुफ्त और असरदार उपाय है। दिनभर की भागदौड़ और काम का तनाव, या भावनात्मक उथल-पुथल के बाद शाम के कुछ मिनटों में अपने पसंदीदा हल्के और शांत संगीत को सुनना दिमाग और मन दोनों को गहरा सुकून देता है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) भी यही सलाह देता है कि रोजाना कुछ समय खुद के लिए निकालें और पसंदीदा गीत-संगीत के माध्यम से मानसिक तनाव दूर करें। एनएचएम के अनुसार संगीत सुनने या बजाने से कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम होता है, जबकि डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे खुशी के हार्मोन बढ़ते हैं। इसका सीधा असर मूड पर पड़ता है, चिंता और डिप्रेशन में कमी आती है। संगीत भावनाओं को व्यक्त करने का एक आसान माध्यम बन जाता है चाहे दुख हो या खुशी, यह उसे बाहर निकालने में मदद करता है। म्यूजिक थेरेपी के फायदे अनेक हैं। मानसिक शांति बढ़ती है, याददाश्त मजबूत होती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है। म्यूजिक थेरेपी न केवल तनाव और चिंता को कम करती है बल्कि मूड को बेहतर और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है। इसका असर भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास पर भी पड़ता है। रोजाना हल्का संगीत सुनने से नकारात्मक विचार कम होते हैं और मन शांत रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूजिक थेरेपी किसी जटिल उपाय की मांग नहीं करती। केवल रोजाना कुछ मिनटों के लिए क्लासिकल, इंस्ट्रुमेंटल, भजन या अपनी पसंद के गाने सुनना पर्याप्त है। अगर तनाव ज्यादा है या मानसिक दबाव गंभीर है तो म्यूजिक थेरेपी विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लेना फायदेमंद हो सकता है। ध्यान रखें कि तेज वॉल्यूम के बजाय कम वॉल्यूम में संगीत सुनें और हेडफोन या ईयरफोन का अधिक इस्तेमाल न करें। आज के दौर में म्यूजिक थेरेपी मानसिक स्वास्थ्य का सरल, प्रभावी और प्राकृतिक उपाय बन चुकी है। नियमित संगीत सुनने से तनाव कम होता है, मूड बेहतर होता है, नींद गहरी आती है और जीवन में खुशियों की वृद्धि होती है। यह साधारण आदत मन को स्थिर और संतुलित बनाए रखने का तरीका है।

औरत को तारीफ नहीं सम्मान चाहिए इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर समाज के आईने में झांकती एक बात

नई दिल्ली:हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में International Women’s Day मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के सम्मान अधिकार और उपलब्धियों की बात की जाती है। लेकिन सच यही है कि हर साल यह दिन हमें यह याद दिला देता है कि समाज अब भी औरत के असली वजूद को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। हम अक्सर कहते हैं कि हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं हैं लेकिन इस वाक्य के भीतर ही एक छिपा हुआ सच है कि कहीं न कहीं हम अभी भी बराबरी को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाए हैं। जब हम कहते हैं कि औरत आजाद है तो इसका मतलब यह भी होता है कि उसकी आजादी अभी अधूरी है। जब हम कहते हैं कि बेटियों को भी पढ़ाना चाहिए उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए तो यह भी इस बात का संकेत है कि इस दिशा में अभी बहुत काम बाकी है। आज की महिला जीवन के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। राजनीति से लेकर विज्ञान खेल से लेकर सेना और कला से लेकर व्यापार तक महिलाएं हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि उसे बार बार खुद को साबित करने की जरूरत क्यों पड़ती है। समाज अक्सर किसी महिला की सफलता को तब स्वीकार करता है जब वह उन सीमाओं को पार कर लेती है जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों ने तय किया था। कई बार तो महिला की कामयाबी को इस तरह देखा जाता है जैसे उसने किसी पुरुष की भूमिका निभाकर यह उपलब्धि हासिल की हो। असल में हमें यह समझना होगा कि औरत केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समाज का ताना बाना है। परिवार रिश्तों और भावनाओं को जोड़कर रखने वाली सबसे मजबूत कड़ी अक्सर वही होती है। बचपन से अपने सपनों को सहेजने वाली और फिर अपनों की खुशियों के लिए उन्हें पीछे छोड़ देने वाली भी अक्सर वही होती है। बेटी के रूप में वह रहमत है मां के रूप में जन्नत है बहन के रूप में इज्जत है और दोस्त के रूप में भरोसा है। लेकिन समाज का दूसरा चेहरा भी उतना ही कड़वा है। महिलाओं के साथ हिंसा और अपमान की घटनाएं समय समय पर सामने आती रहती हैं। देश में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने पूरे समाज को झकझोर दिया। Manipur women parading case 2023 हो या Kanjhawala case 2023 Delhi जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। इसी तरह Bilkis Bano का मामला भी बार बार यह सवाल उठाता है कि न्याय और संवेदनशीलता के मामले में समाज कहां खड़ा है। समस्या की जड़ कहीं और भी है। हम अक्सर महिलाओं का सम्मान उनके रिश्तों के आधार पर करते हैं। हमें लगता है कि हमें अपनी मां बहन बेटी या पत्नी की ही इज्जत करनी चाहिए। लेकिन असली सम्मान तब होगा जब सड़क पर चलने वाली या दफ्तर में काम करने वाली हर महिला को वही सम्मान मिले जो हम अपने घर की महिलाओं को देते हैं। हमारी संस्कृति और साहित्य में भी कई बार औरत की खूबसूरती को केवल उसके चेहरे उसकी आंखों या उसकी जुल्फों तक सीमित कर दिया गया है। शायरियों और कविताओं में उसकी आंखों की गहराई और उसके होंठों की नाजुकी का खूब जिक्र मिलता है। इसमें कोई शक नहीं कि महिला की सुंदरता बेमिसाल होती है लेकिन उसकी असली पहचान केवल उसके रूप में नहीं बल्कि उसके व्यक्तित्व उसकी सोच उसकी मेहनत और उसकी संवेदनशीलता में होती है। आज की महिला शायद केवल तारीफ नहीं चाहती बल्कि सम्मान चाहती है। उसे यह एहसास चाहिए कि समाज उसे बराबरी की नजर से देखता है। क्योंकि सच यही है कि किसी महिला को खूबसूरत कहना अच्छी बात हो सकती है लेकिन उसकी इज्जत करना उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत है।