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पंच केदार के दर्शन से मिलता है पुण्य फल, जानिए भगवान शिव के पांच पवित्र धामों की महिमा

नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड को भगवान शिव की भूमि माना जाता है। यहां स्थित चारधाम यात्रा जितनी प्रसिद्ध है, उतनी ही खास मानी जाती है पंच केदार यात्रा। पंच केदार भगवान शिव को समर्पित पांच पवित्र मंदिरों का समूह है, जिनका हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इन मंदिरों के दर्शन करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन धामों की यात्रा कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे। लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे और उनसे मिलने से बचने के लिए बैल का रूप धारण कर उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में चले गए। जब पांडवों ने उनका पीछा किया, तब शिवजी बैल के रूप में धरती में समाने लगे। इसी दौरान उनके शरीर के अलग-अलग अंग पांच स्थानों पर प्रकट हुए। यही पांच स्थान आगे चलकर पंच केदार कहलाए। इनमें सबसे प्रमुख और प्रथम केदार केदारनाथ धाम है, जहां भगवान शिव के पृष्ठ भाग की पूजा की जाती है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। दूसरा केदार मध्यमहेश्वर है, जहां भगवान शिव की नाभि की पूजा होती है। करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर चौखंबा पर्वत की गोद में बसा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां के दर्शन से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। तीसरा केदार तुंगनाथ धाम है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में गिना जाता है। यहां भगवान शिव की भुजाओं और हृदय स्थल की पूजा की जाती है। चोपता के पास स्थित यह धाम प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम माना जाता है। चौथा केदार रुद्रनाथ मंदिर है, जहां भगवान शिव के मुख की पूजा होती है। गुफा के भीतर स्थित यह मंदिर बेहद रहस्यमयी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। यहां शिवजी को नीलकंठ महादेव के रूप में पूजा जाता है। पंचम और अंतिम केदार कल्पेश्वर मंदिर है, जो चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित है। यहां भगवान शिव की जटाओं की पूजा की जाती है। खास बात यह है कि कल्पेश्वर मंदिर के कपाट पूरे साल खुले रहते हैं, जिससे श्रद्धालु किसी भी समय यहां दर्शन कर सकते हैं। पंच केदार यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि हिमालय की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक अनुभव का अनोखा संगम भी है। माना जाता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ इन पांचों धामों के दर्शन करने से व्यक्ति को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

स्वाद के साथ सेहत का भी खास ख्याल, ग्रीन चटनी सैंडविच ढोकला बना लोगों का नया फेवरेट स्नैक

नई दिल्ली। ग्रीन चटनी सैंडविच ढोकला इन दिनों लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पारंपरिक गुजराती ढोकले को नए अंदाज में तैयार कर बनाई गई यह डिश स्वाद के साथ सेहत का भी खास ध्यान रखती है। मुलायम और स्पंजी ढोकले के बीच लगी तीखी हरी चटनी इसकी खासियत मानी जा रही है। इसका चटपटा स्वाद लोगों को काफी पसंद आ रहा है और यही वजह है कि अब यह स्नैक घरों में तेजी से तैयार किया जाने लगा है। हल्के मसालों और कम तेल में बनने वाली यह डिश हर उम्र के लोगों के लिए एक शानदार विकल्प मानी जा रही है। इस खास रेसिपी को तैयार करने के लिए सबसे पहले बेसन, दही और पानी की मदद से स्मूद बैटर बनाया जाता है। इसमें हल्दी, नमक और अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट मिलाकर कुछ समय के लिए रखा जाता है ताकि मिश्रण अच्छी तरह तैयार हो सके। इसके बाद ताजी हरी धनिया पत्ती, पुदीना, हरी मिर्च और नींबू के रस से स्वादिष्ट ग्रीन चटनी तैयार की जाती है। यही चटनी इस डिश को अलग और खास स्वाद देती है। ढोकले को मुलायम और फूला हुआ बनाने के लिए बैटर में फ्रूट सॉल्ट मिलाया जाता है। इसके तुरंत बाद मिश्रण को चिकनाई लगे बर्तन में डालकर भाप में पकाया जाता है। कुछ ही मिनटों में तैयार हुआ ढोकला बेहद सॉफ्ट और स्पंजी बनकर तैयार हो जाता है। ठंडा होने के बाद इसे बीच से काटकर दो हिस्सों में बांटा जाता है और फिर एक हिस्से पर ग्रीन चटनी की मोटी लेयर लगाई जाती है। इसके ऊपर दूसरा हिस्सा रखकर इसे सैंडविच स्टाइल में तैयार किया जाता है। ढोकले का स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से राई, सफेद तिल और करी पत्तों का तड़का डाला जाता है। यह तड़का इसकी खुशबू और स्वाद दोनों को और बेहतर बना देता है। छोटे-छोटे टुकड़ों में कटने के बाद जब इसे सर्व किया जाता है तो इसका आकर्षक लुक भी लोगों को काफी पसंद आता है। कई लोग इसे सुबह के नाश्ते में खाना पसंद करते हैं, वहीं शाम की हल्की भूख के लिए भी यह एक बेहतरीन स्नैक माना जाता है। आजकल लोग ऐसे भोजन को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ हल्का और हेल्दी भी हो। ग्रीन चटनी सैंडविच ढोकला इसी वजह से तेजी से लोगों की पसंद बनता जा रहा है। स्टीम में तैयार होने के कारण इसमें तेल का इस्तेमाल बेहद कम होता है, जिससे यह दूसरी तली हुई चीजों की तुलना में ज्यादा पौष्टिक माना जाता है। कम समय में आसानी से तैयार होने वाली यह रेसिपी अब कई घरों की खास पसंद बन चुकी है।

गर्मी में कैसे बनाए रखें स्किन का नेचुरल ग्लो? अपनाएं ये आसान और असरदार टिप्स

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही सबसे ज्यादा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देने लगता है। तेज धूप, पसीना, धूल और गर्म हवाएं स्किन को डल, ड्राई और ऑयली बना देती हैं। कई लोगों को टैनिंग, पिंपल्स और रैशेज जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम अपने स्किन केयर रूटीन में कुछ खास बदलाव करें, ताकि त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहे। सही देखभाल और कुछ आसान टिप्स अपनाकर गर्मियों में भी चेहरे की प्राकृतिक चमक बरकरार रखी जा सकती है। गर्मी के मौसम में स्किन को अंदर से हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी माना जाता है। शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा बेजान और रूखी दिखाई देने लगती है। इसलिए दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। पानी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे स्किन साफ और चमकदार बनी रहती है। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी और फ्रेश जूस भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मददगार होते हैं। धूप में बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी है। सूरज की तेज यूवी किरणें स्किन को नुकसान पहुंचाकर टैनिंग और समय से पहले एजिंग की समस्या बढ़ा सकती हैं। इसलिए SPF युक्त सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए। रोजाना सनस्क्रीन लगाने से त्वचा सुरक्षित रहती है और उसका नेचुरल ग्लो बना रहता है। गर्मियों में हैवी क्रीम की जगह लाइटवेट और ऑयल-फ्री मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। इससे स्किन चिपचिपी नहीं होती और चेहरे पर फ्रेशनेस बनी रहती है। मॉइस्चराइजर स्किन को हाइड्रेट रखने के साथ उसे मुलायम और हेल्दी बनाए रखने में भी मदद करता है। स्किन को हेल्दी बनाए रखने के लिए खान-पान का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। गर्मियों में तरबूज, खीरा, पपीता और संतरा जैसे सीजनल फलों का सेवन फायदेमंद होता है। इनमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और चेहरे की चमक बढ़ाते हैं। हेल्दी डाइट का असर सीधे स्किन पर दिखाई देता है। गर्मी में त्वचा जल्दी ऑयली हो जाती है, जिससे पिंपल्स और एक्ने की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए दिन में दो से तीन बार माइल्ड फेसवॉश से चेहरा साफ करना चाहिए। इससे चेहरे पर जमा धूल, पसीना और अतिरिक्त ऑयल हट जाता है और स्किन फ्रेश महसूस करती है। इसके अलावा घरेलू और नेचुरल फेस पैक भी गर्मियों में काफी फायदेमंद साबित होते हैं। बेसन, दही, एलोवेरा, गुलाबजल और नींबू जैसी चीजों से बने फेस पैक त्वचा को ठंडक देने के साथ नेचुरल ग्लो भी बढ़ाते हैं। हफ्ते में एक या दो बार फेस पैक लगाने से चेहरे पर निखार आता है और स्किन हेल्दी बनी रहती है। अगर आप भी गर्मियों में अपनी स्किन को चमकदार और फ्रेश बनाए रखना चाहते हैं, तो इन आसान टिप्स को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा जरूर बनाएं।

World Thalassaemia Day: थकान, कमजोरी और एनीमिया को न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली । हर साल 8 मई को मनाया जाने वाला World Thalassemia Day लोगों को एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार Thalassemia के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण अवसर देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार थकान महसूस होना, कमजोरी आना, शरीर में खून की कमी, पीली त्वचा या बार-बार बीमार पड़ना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। कई बार ये संकेत थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं। नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। हीमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर में ऑक्सीजन का संचार प्रभावित होता है, जिससे मरीज को लगातार कमजोरी, थकान और एनीमिया जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में आनुवंशिक रूप से पहुंचती है, इसलिए इसकी समय पर पहचान बेहद जरूरी मानी जाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि थैलेसीमिया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—थैलेसीमिया माइनर और थैलेसीमिया मेजर। थैलेसीमिया माइनर में व्यक्ति बीमारी का वाहक होता है और सामान्य जीवन जी सकता है। कई मामलों में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं या दिखाई ही नहीं देते। वहीं, थैलेसीमिया मेजर इसका गंभीर रूप है, जिसमें मरीज को नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। लगातार इलाज, दवाओं और चिकित्सकीय निगरानी के बिना मरीज के लिए सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो सकता है। विश्व थैलेसीमिया दिवस का सबसे बड़ा उद्देश्य युवाओं को शादी से पहले थैलेसीमिया जांच कराने के लिए प्रेरित करना है। डॉक्टरों के अनुसार अगर पति और पत्नी दोनों थैलेसीमिया माइनर के वाहक हों, तो उनके बच्चे में थैलेसीमिया मेजर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते जांच और जागरूकता इस बीमारी की रोकथाम में अहम भूमिका निभा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से अपील कर रहे हैं कि यदि किसी व्यक्ति में लगातार कमजोरी, भूख कम लगना, थकान, पीली त्वचा या बार-बार संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और आवश्यक रक्त जांच कराएं। सही समय पर पहचान और उचित इलाज से बीमारी की जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। थैलेसीमिया मेजर के मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। यही वजह है कि इस अवसर पर स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि एक यूनिट रक्त किसी मरीज के लिए नई जिंदगी साबित हो सकता है। हालांकि थैलेसीमिया का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन समय पर जांच, नियमित उपचार, संतुलित देखभाल और जागरूकता के जरिए मरीज सामान्य और बेहतर जीवन जी सकते हैं।

मई में पार्टनर संग घूमने के लिए बेस्ट रोमांटिक डेस्टिनेशंस, जहां यादगार बन जाएगा हर पल

नई दिल्ली।  गर्मियों की शुरुआत होते ही लोग छुट्टियों का प्लान बनाने लगते हैं। खासकर कपल्स ऐसी जगहों की तलाश में रहते हैं जहां सुकून भरा माहौल, खूबसूरत नजारे और रोमांटिक पल एक साथ मिल सकें। अगर आप भी मई के महीने में अपने पार्टनर के साथ किसी खास डेस्टिनेशन पर घूमने का सोच रहे हैं, तो देश की कुछ बेहद खूबसूरत जगहें आपके ट्रिप को यादगार बना सकती हैं। यहां आप प्रकृति के बीच क्वालिटी टाइम बिताने के साथ शानदार तस्वीरें भी कैमरे में कैद कर सकते हैं। केरल का अलेप्पी कपल्स के लिए सबसे पसंदीदा रोमांटिक डेस्टिनेशंस में गिना जाता है। समुद्र, बैकवॉटर और हाउस बोट का अनुभव यहां की सबसे बड़ी खासियत है। शांत पानी के बीच तैरती हाउस बोट में पार्टनर के साथ बिताया गया समय किसी फिल्मी सफर से कम नहीं लगता। नारियल के पेड़ों और ठंडी हवाओं के बीच यहां का माहौल बेहद सुकून देने वाला होता है। यही वजह है कि अलेप्पी को “पूरब का वेनिस” भी कहा जाता है।अगर आप पहाड़ों और प्रकृति के करीब समय बिताना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का चोपता आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। बुरांश के फूलों से ढकी घाटियां और तुंगनाथ मंदिर तक का ट्रेक सफर को खास बना देता है। आसपास मौजूद औली की बर्फीली चोटियां और रोप-वे राइड रोमांच के साथ रोमांस का शानदार अनुभव देती हैं। मई के महीने में यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है। हिमाचल प्रदेश का मनाली हमेशा से हनीमून और कपल ट्रिप्स के लिए मशहूर रहा है। मई-जून की गर्मियों में भी यहां हल्की ठंड का एहसास बना रहता है। रोहतांग पास की बर्फ, हरी-भरी वादियां और खूबसूरत कैफे कपल्स को बेहद आकर्षित करते हैं। मनाली के आसपास सोलंग वैली और अटल टनल जैसी जगहें भी घूमने लायक हैं, जहां आप एडवेंचर और रोमांस दोनों का मजा ले सकते हैं। भीड़-भाड़ से दूर शांत माहौल पसंद करने वाले कपल्स के लिए डलहौज़ी एक शानदार विकल्प है। देवदार के जंगल, झरने और ठंडी हवाएं यहां के माहौल को बेहद रोमांटिक बना देती हैं। खज्जियार, पंचपुला और सतधारा जैसी जगहें यहां आने वाले पर्यटकों को खूब पसंद आती हैं। मई में यहां का मौसम बेहद आरामदायक रहता है, जिससे यह कपल्स के लिए परफेक्ट समर डेस्टिनेशन बन जाता है। वहीं जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत यूसमार्ग घाटी भी कपल्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। हरे-भरे मैदान, बर्फ से ढकी चोटियां और शांत वातावरण इस जगह को खास बनाते हैं। यहां ट्रेकिंग और हाइकिंग जैसी एक्टिविटीज का मजा भी लिया जा सकता है। मई में यहां का मौसम काफी खुशनुमा रहता है, जो रोमांटिक ट्रिप के लिए बिल्कुल परफेक्ट माना जाता है। अगर आप इस गर्मी अपने पार्टनर के साथ कुछ खास और यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो ये डेस्टिनेशंस आपके ट्रैवल प्लान को शानदार बना सकते हैं।

धुंधली नजर को न समझें सामान्य, 40 की उम्र के बाद नियमित आंखों की जांच क्यों है बेहद जरूरी

नई दिल्ली। आजकल मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ गया है, जिसका सीधा असर आंखों की सेहत पर पड़ रहा है। खासकर 40 साल की उम्र पार करने के बाद आंखों से जुड़ी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ नियमित आई टेस्ट कराने की सलाह देते हैं ताकि आंखों की रोशनी लंबे समय तक सुरक्षित रह सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, आंखों की सुरक्षा का सबसे आसान और असरदार तरीका समय-समय पर नेत्र जांच कराना है। अक्सर लोग धुंधला दिखने या नजर कमजोर होने जैसी समस्याओं को उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। 40 की उम्र के बाद आंखों में कई प्राकृतिक बदलाव शुरू हो जाते हैं। नजदीक की चीजें साफ न दिखना, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद या डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्याएं धीरे-धीरे विकसित हो सकती हैं। इन बीमारियों की शुरुआत में ज्यादा लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि 40 साल के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार पूरा आई चेकअप जरूर कराना चाहिए। वहीं जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या परिवार में आंखों की बीमारी का इतिहास हो, उन्हें हर छह महीने में जांच करवानी चाहिए। समय पर बीमारी का पता चलने से इलाज आसान हो जाता है और आंखों की रोशनी को नुकसान से बचाया जा सकता है। आई टेस्ट सिर्फ आंखों की कमजोरी पहचानने के लिए ही नहीं बल्कि शरीर की दूसरी बीमारियों के शुरुआती संकेत पकड़ने में भी मदद करता है। कई बार डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का असर सबसे पहले आंखों पर दिखाई देता है। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ जरूरी आदतें अपनाना भी फायदेमंद माना जाता है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचें, अच्छी रोशनी में पढ़ाई करें और बीच-बीच में आंखों को आराम दें। इसके अलावा पौष्टिक भोजन भी आंखों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। डाइट में गाजर, पालक, ब्रोकली, संतरा, कीवी, बादाम और ब्लूबेरी जैसे खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। इनमें मौजूद विटामिन A, C, E, ओमेगा-3 फैटी एसिड और ल्यूटिन आंखों की रोशनी को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित आई टेस्ट और सही लाइफस्टाइल अपनाकर बढ़ती उम्र में भी आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

दही के साथ ये चीजें खाना पड़ सकता है भारी, पेट की गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है

नई दिल्ली। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ आंतों के स्वास्थ्य को भी सुधारता है। लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से और सही खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए। दूध और दही साथ में खाने से बचेंदूध और दही दोनों ही डेयरी उत्पाद हैं, लेकिन इन्हें एक साथ या एक ही समय पर खाने से पाचन पर असर पड़ सकता है। इससे गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं क्योंकि दोनों अलग-अलग तरीके से पचते हैं। मछली और दही का कॉम्बिनेशन भी नुकसानदायकआयुर्वेद और एक्सपर्ट्स के अनुसार मछली और दही को साथ में नहीं खाना चाहिए। दोनों ही प्रोटीन से भरपूर होते हैं और इन्हें एक साथ लेने पर पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे अपच और त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। तला-भुना और ऑयली खाना बढ़ा सकता है परेशानीदही के साथ ज्यादा तला-भुना या ऑयली फूड लेने से पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे पेट में भारीपन, सुस्ती और अपच जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अचार और फर्मेंटेड फूड्स से दूरी रखेंदही को अचार या अन्य फर्मेंटेड फूड्स के साथ खाना भी सही नहीं माना जाता। दोनों में बैक्टीरिया की मात्रा अधिक होती है, जिससे आंतों का संतुलन बिगड़ सकता है और पेट खराब हो सकता है। कुछ फलों के साथ भी न खाएं दहीतरबूज, खरबूजा जैसे अधिक पानी वाले फलों के साथ दही का सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है। इससे डाइजेस्टिव सिस्टम प्रभावित होता है और गैस या फर्मेंटेशन की समस्या हो सकती है। एक्सपर्ट्स की सलाहविशेषज्ञों का कहना है कि दही को हमेशा हल्के और संतुलित भोजन जैसे रोटी, खिचड़ी या सब्जियों के साथ ही खाना चाहिए। सही फूड कॉम्बिनेशन अपनाकर ही दही के पूरे स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।

आंगन की सही दिशा में पौधे लगाने से मिल सकती है सांपों से राहत..

नई दिल्ली। बरसात और गर्मी के मौसम में कई इलाकों में सांपों के घरों की ओर आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। मौसम में बदलाव के कारण जब उनके प्राकृतिक ठिकाने प्रभावित होते हैं, तो वे सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में मानव बस्तियों की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे समय में लोग अक्सर चिंता में आ जाते हैं और सुरक्षा के उपाय ढूंढने लगते हैं। वास्तु शास्त्र में ऐसे कुछ पौधों का उल्लेख मिलता है जिन्हें घर के आसपास लगाने से वातावरण संतुलित रहता है और कई प्रकार के जीवों से दूरी बनाए रखने में मदद मिलती है। इन्हें सही दिशा में लगाने पर घर के चारों ओर एक तरह का प्राकृतिक सुरक्षा घेरा बनने की बात कही जाती है। इनमें एक प्रमुख पौधा स्नेक प्लांट माना जाता है, जो अपने लंबे और नुकीले पत्तों के कारण अलग पहचान रखता है। इसे घर के दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार यह पौधा न केवल वातावरण को शुद्ध करने में मदद करता है, बल्कि घर के आसपास नमी को नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है, जिससे अनचाहे जीवों के आने की संभावना कम मानी जाती है। दूसरा महत्वपूर्ण पौधा गेंदा है, जिसे आमतौर पर सजावट और धार्मिक कार्यों में उपयोग किया जाता है। इसकी तेज सुगंध और रंग-बिरंगे फूल इसे खास बनाते हैं। वास्तु के अनुसार इसे घर की उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना बेहतर माना जाता है। कई लोग इसे घर की सीमा या बाउंड्री पर भी लगाते हैं ताकि इसका प्रभाव पूरे क्षेत्र में बना रहे। मान्यता है कि इन पौधों की गंध और बनावट कुछ जीवों के लिए असहज वातावरण पैदा करती है, जिससे वे उस स्थान से दूर रहना पसंद करते हैं। हालांकि यह पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी पारंपरिक रूप से इसे एक सरल और प्राकृतिक उपाय के रूप में अपनाया जाता रहा है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी जरूरी होती है। पौधों को सही मात्रा में पानी देना, उन्हें साफ-सुथरी और धूप वाली जगह पर रखना आवश्यक माना गया है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि पौधों के आसपास गंदगी, लकड़ियां या कबाड़ जमा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे उनका प्रभाव कम हो सकता है और अनचाहे जीव वहां छिप सकते हैं। यह भी माना जाता है कि सूखे या मुरझाए पौधे घर के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए उन्हें समय पर बदल देना चाहिए। कुल मिलाकर, सही दिशा में लगाए गए ये सामान्य पौधे घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ एक सुरक्षित और संतुलित वातावरण बनाने में भी सहायक माने जाते हैं। हालांकि किसी भी गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ सलाह लेना हमेशा जरूरी होता है।

सुबह की ये ड्रिंक्स कंट्रोल कर सकती हैं हाई BP, दिल की सेहत को मिल सकता है सपोर्ट

नई दिल्ली। हाई ब्लड प्रेशर आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो जीवनशैली और खानपान से सीधे जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति को नियंत्रित रखने में दवाओं के साथ-साथ रोजमर्रा की आदतों का भी बड़ा योगदान होता है। खासकर सुबह की दिनचर्या इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सुबह की शुरुआत अगर सही और संतुलित ड्रिंक के साथ की जाए तो शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। ऐसे में कुछ प्राकृतिक पेय पदार्थों को नियमित रूप से सेवन करने की सलाह दी जाती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं। सुबह हल्का गर्म नींबू पानी एक सरल और उपयोगी विकल्प माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायक हो सकते हैं। यह शरीर को ताजगी देने के साथ दिन की अच्छी शुरुआत करने में मदद करता है। इसके अलावा नारियल पानी को भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। संतुलित इलेक्ट्रोलाइट्स रक्तचाप को स्थिर रखने में सहायक माने जाते हैं। चुकंदर का जूस भी उन ड्रिंक्स में शामिल है, जिन्हें अक्सर हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करने में मदद कर सकते हैं। इसे बिना अतिरिक्त चीनी के सेवन करने की सलाह दी जाती है ताकि इसका प्राकृतिक लाभ बना रहे। ग्रीन टी भी एक लोकप्रिय विकल्प है, जिसे हल्के रूप में सेवन करने पर शरीर को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने और तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। आंवला जूस को भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ हृदय पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इन ड्रिंक्स के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि कुछ आदतों से बचा जाए। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक कैफीन वाले पेय, शुगर युक्त ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस का अधिक सेवन ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है। कुल मिलाकर, सुबह की सही आदतें और प्राकृतिक पेय पदार्थों का संतुलित सेवन जीवनशैली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।

भुजंगासन से पाएं स्ट्रेस और पीठ दर्द से राहत, शरीर बनेगा लचीला

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, गलत बैठने की आदत और अनियमित दिनचर्या के कारण लोग कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में योग एक प्राकृतिक और प्रभावी समाधान के रूप में सामने आता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन यानी कोबरा पोज एक ऐसा सरल योगासन है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित करने में मदद करता है। यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है जो स्ट्रेस, कब्ज, पेट की चर्बी, पीठ दर्द या सांस संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं। नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है और थकान कम महसूस होती है। भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है। यह पीठ की जकड़न को दूर करने में मदद करता है, जिससे लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों को काफी राहत मिलती है। साथ ही यह मुद्रा संबंधी दर्द को भी कम करता है। इस योगासन का पाचन तंत्र पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह आंतों की गतिविधि को सुधारकर कब्ज जैसी समस्या को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा यह पेट की चर्बी घटाने में भी सहायक माना जाता है, जिससे शरीर फिट और संतुलित रहता है।मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी भुजंगासन काफी लाभकारी है। यह तनाव और मानसिक थकान को कम करता है क्योंकि यह श्वास प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है। इससे मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है।सांस संबंधी समस्याओं जैसे ब्रोंकाइटिस में भी यह आसन राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है। छाती खुलने से सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। भुजंगासन करने की प्रक्रिया भी बेहद सरल है। इसके लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। फिर हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और धीरे-धीरे सांस लेते हुए छाती और सिर को ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि कमर पर ज्यादा दबाव न पड़े। इस स्थिति में 15 से 30 सेकंड तक रहें और फिर धीरे-धीरे वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। शुरुआत में इसे 3 से 5 बार करना पर्याप्त होता है। आयुष मंत्रालय का कहना है कि भुजंगासन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन भी बनाए रखता है। यह शरीर की जकड़न को दूर कर उसे अधिक सक्रिय और ऊर्जावान बनाता है। हालांकि, जिन लोगों को गंभीर पीठ दर्द, हाल ही में सर्जरी या कोई पुरानी बीमारी है, उन्हें इस आसन का अभ्यास करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।