बाल रस्सी जैसे रूखे? 15 दिन में फर्क दिखाएगा ये नेचुरल अलसी और एलोवेरा हेयर मास्क

नई दिल्ली। मौसम बदलने के साथ ही अक्सर हमारे चेहरे और बालों पर इसका असर दिखाई देता है। जबकि स्किन का ख्याल हम रखते हैं, बालों की देखभाल अक्सर अनदेखी रह जाती है। इसका परिणाम बालों की रूखापन और बेजानपन के रूप में सामने आता है। यदि आपके बाल भी रस्सी या झाड़ू जैसे लग रहे हैं, तो इसका मतलब है कि उन्हें गहराई से पोषण की जरूरत है। महंगे शैम्पू और हेयर प्रोडक्ट्स हर बार कारगर नहीं होते। कई बार ये बालों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। ऐसे में नेचुरल उपाय सबसे सुरक्षित और असरदार होते हैं। इन उपायों में अलसी (flax seeds) का इस्तेमाल बालों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ है। अलसी के बीज में ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व बालों को मुलायम, चमकदार और मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसीलिए आज हम आपको अलसी और एलोवेरा हेयर मास्क बनाने और इस्तेमाल करने की विधि बता रहे हैं। इस्तेमाल के लिए सामग्री:2 बड़े चम्मच अलसी के बीजएलोवेरा जेल (आवश्यक मात्रा) हेयर मास्क बनाने की विधि:एक पैन में थोड़ा पानी लेकर उबालें।जब पानी उबलने लगे, उसमें अलसी के बीज डालें और 10 मिनट तक उबालें।पानी गाढ़ा होने लगे तो गैस बंद करें और इसे छान लें।छने हुए पानी में एलोवेरा जेल मिलाएं और चम्मच की मदद से अच्छी तरह फेंट लें।आपका हेयर मास्क तैयार है। हेयर मास्क का इस्तेमाल:सबसे पहले अपने बालों को धोकर सुलझा लें।तैयार मास्क को बालों की जड़ों से लेकर छोर तक अच्छे से अप्लाई करें।30-40 मिनट तक लगाकर छोड़ दें, फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें। इस मास्क को नियमित रूप से सप्ताह में 2-3 बार लगाने से बालों की रूखापन दूर होगी, नमी लौटेगी और बाल मजबूत बनेंगे। 15 दिन के भीतर फर्क साफ नजर आने लगेगा। नेचुरल और असरदार होने के कारण यह उपाय रसायनों से भरे प्रोडक्ट्स की तुलना में सुरक्षित है। खासकर बदलते मौसम में जब बालों को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है, यह मास्क उन्हें जरूरी पोषण देता है। अपने बालों को स्वस्थ और चमकदार बनाना है तो इस नेचुरल हेयर मास्क को जरूर ट्राई करें। 15 दिन के अंदर ही आप फर्क महसूस करेंगे और बालों की Texture में नर्माई और चमक लौटते देखेंगे।
गर्मी बढ़ते ही बढ़ा हीट स्ट्रोक का खतरा, जानिए कैसे करें बचाव और रखें सेहत सुरक्षित

नई दिल्ली। देशभर के कई राज्यों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्म हवाओं (लू) ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और तेज हो सकती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में लापरवाही भारी पड़ सकती है और सेहत पर गंभीर असर देखने को मिल सकता है। गर्मी का यह मौसम शरीर को तेजी से डिहाइड्रेट करता है, जिससे थकान, कमजोरी और चक्कर जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में सतर्क रहना और समय पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण पहचानना जरूरीहीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉर्शन की स्थिति अचानक गंभीर रूप ले सकती है। इसके शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। इन लक्षणों पर विशेष ध्यान दें-अचानक कमजोरी या अस्वस्थ महसूस होनाचक्कर आनाज्यादा पसीना आना या पसीना अचानक बंद हो जानामांसपेशियों में ऐंठनशरीर का तापमान बढ़ना यदि ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत सावधानी बरतना जरूरी है, वरना स्थिति गंभीर हो सकती है। हीट स्ट्रोक से बचाव के जरूरी उपायगर्मी में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं- ठंडी जगह पर रहेंअगर अस्वस्थ महसूस हो तो तुरंत छायादार या ठंडी जगह पर जाएं।शरीर को हाइड्रेट रखेंभरपूर पानी पिएं और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करें। ORS और घरेलू पेय का सेवन करें नींबू पानी, छाछ, नमक-शक्कर का घोल और ओआरएस शरीर में ऊर्जा और पानी की कमी को पूरा करते हैं। हल्के कपड़े पहनें ढीले और सूती कपड़े शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं। हीट स्ट्रोक होने पर क्या करें?यदि किसी व्यक्ति को हीट स्ट्रोक हो जाए तो तुरंत ये कदम उठाएं- व्यक्ति को ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएंशरीर को ठंडा करने के उपाय करेंतरल पदार्थ पिलाएं (अगर होश में हो)लक्षण गंभीर होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें गर्मी का मौसम जितना सामान्य दिखता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। हीट स्ट्रोक जैसी स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और समय पर सावधानी से इससे बचा जा सकता है। शरीर को हाइड्रेट रखना, धूप से बचाव करना और शुरुआती लक्षणों को पहचानना इस मौसम में सबसे जरूरी कदम हैं।
लू और थकान से बचने के लिए आयुर्वेद ने सुझाया गर्मियों का सबसे बेहतर डाइट प्लान।

नई दिल्ली । भीषण गर्मी के मौसम में अक्सर हमारे खान-पान की आदतों में बड़ा बदलाव आता है। चूंकि बाहरी तापमान बढ़ने से शरीर के भीतर पित्त दोष का स्तर भी बढ़ने लगता है, इसलिए आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा गर्म तासीर वाली चीजों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। इसी संदर्भ में अक्सर शहद के सेवन को लेकर एक दुविधा बनी रहती है। आमतौर पर शहद को गर्म और आर्द्र प्रवृत्ति का माना जाता है, जिससे कई लोग गर्मियों में इसके इस्तेमाल से कतराते हैं। हालांकि, आयुर्वेद का गहरा विज्ञान यह स्पष्ट करता है कि शहद का प्रभाव इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह क्या है, बल्कि इस पर निर्भर करता है कि उसे किसके साथ लिया जा रहा है। आयुर्वेद में शहद को ‘योगवाही’ द्रव्य की श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है एक ऐसा तत्व जो स्वयं के गुणों से अधिक उस पदार्थ के गुणों को अपना लेता है जिसके साथ इसे मिश्रित किया जाता है। यदि गर्मियों के दौरान शहद का सेवन सीधे तौर पर किया जाए, तो यह निश्चित रूप से शरीर में गर्मी और पित्त को बढ़ा सकता है। परंतु, यदि इसे बुद्धिमानी से ठंडी तासीर वाले खाद्यों के साथ मिलाया जाए, तो यह शरीर के लिए एक उत्कृष्ट शीतल पेय और ऊर्जा स्रोत बन जाता है। सुबह के समय मिट्टी के घड़े के ताजे पानी में नींबू और शहद का मिश्रण शरीर के आंतरिक तापमान को संतुलित करने और वजन घटाने में जादुई भूमिका निभाता है। गर्मियों के पारंपरिक आहार जैसे सत्तू और दही में भी शहद का समावेश स्वास्थ्य के लिए क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। सत्तू के शरबत में चीनी के विकल्प के रूप में शहद का उपयोग न केवल शरीर को हाइड्रेटेड रखता है, बल्कि मांसपेशियों की थकान को भी तुरंत मिटाता है। इसी तरह, दोपहर के भोजन में दही के साथ शहद का मेल एक शक्तिशाली प्राकृतिक प्रोबायोटिक तैयार करता है। यह मिश्रण पाचन तंत्र को सुदृढ़ करने के साथ-साथ शरीर को लू के थपेड़ों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है। आयुर्वेद के अनुसार, ये तरीके शहद की उष्णता को शीतलता में बदलने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। शहद के औषधीय लाभों के बीच आयुर्वेद में कुछ कड़े प्रतिबंध भी लगाए गए हैं जिन्हें नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। शहद को कभी भी गर्म पानी में उबालकर या बहुत तेज तापमान वाली चीजों के साथ नहीं लेना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक ताप इसे विषैला बना सकता है। इसके अतिरिक्त, घी और शहद का समान मात्रा में सेवन ‘विरुद्ध आहार’ माना जाता है, जो वात और पित्त के संतुलन को बिगाड़कर त्वचा और पाचन संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। यदि इन बुनियादी नियमों का पालन किया जाए, तो शहद गर्मियों में भी आपकी जीवनशैली का एक अनिवार्य और गुणकारी हिस्सा बना रह सकता है।
पसीना और असहजता से राहत: गर्मी में कूल रहने के 7 स्मार्ट फैशन नियम..

नई दिल्ली । गर्मियों की सुबह अक्सर एक आम उलझन के साथ शुरू होती है कि आखिर आज क्या पहना जाए। कपड़ों से भरी अलमारी होने के बावजूद सही आउटफिट चुनना मुश्किल लगने लगता है। तेज धूप, उमस और पसीना दिनभर की थकान को और बढ़ा देते हैं, जिससे सही कपड़ों का चुनाव और भी जरूरी हो जाता है। लेकिन अगर कुछ सरल और व्यावहारिक फैशन नियमों को समझ लिया जाए, तो यह रोज की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। सही कपड़े न केवल शरीर को आराम देते हैं, बल्कि पूरे दिन आत्मविश्वास और ताजगी भी बनाए रखते हैं। गर्मियों में सबसे पहला ध्यान कपड़े के फैब्रिक पर देना चाहिए। हल्के और हवा को गुजरने देने वाले कपड़े जैसे कॉटन, लिनन और खादी शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं। ये पसीना जल्दी सोखते हैं और त्वचा को सांस लेने का मौका देते हैं, जिससे असहजता कम होती है। इसके विपरीत भारी और सिंथेटिक कपड़े गर्मी को बढ़ा देते हैं, जिससे शरीर जल्दी थक जाता है। इसके बाद रंगों का चुनाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम और हल्के पेस्टल शेड्स गर्मी को कम आकर्षित करते हैं, जिससे शरीर अपेक्षाकृत ठंडा महसूस करता है। वहीं गहरे रंग गर्मी को अधिक सोखते हैं, जिससे असहजता बढ़ सकती है। गर्मियों में ढीले कपड़े पहनना एक और महत्वपूर्ण नियम है। टाइट कपड़े शरीर से चिपककर हवा के प्रवाह को रोकते हैं, जिससे पसीना और जलन बढ़ सकती है। ढीले और आरामदायक कपड़े न केवल शरीर को राहत देते हैं, बल्कि एक सहज और स्टाइलिश लुक भी देते हैं। एक और जरूरी बात यह है कि गर्मियों में लेयरिंग से बचना चाहिए। कई परतों वाले कपड़े शरीर के तापमान को बढ़ा देते हैं, जिससे गर्मी और ज्यादा महसूस होती है। सिंगल और हल्के आउटफिट इस मौसम में सबसे बेहतर विकल्प होते हैं। फुटवियर का सही चयन भी उतना ही जरूरी है। बंद जूते लंबे समय तक पहनने से पैरों में पसीना और बदबू की समस्या हो सकती है। ऐसे में खुले सैंडल, चप्पल या हल्के और सांस लेने वाले शूज बेहतर विकल्प साबित होते हैं। इसके अलावा एक्सेसरीज को भी हल्का रखना चाहिए। भारी गहने या ज्यादा सजावट गर्मी में असुविधा पैदा कर सकती है। मिनिमल एक्सेसरीज न केवल आराम देती हैं बल्कि पूरे लुक को संतुलित और स्टाइलिश बनाए रखती हैं। अंत में, कपड़ों का चुनाव हमेशा दिनचर्या और जरूरत के अनुसार होना चाहिए। अगर दिनभर बाहर रहना है तो हल्के और प्रोटेक्टिव कपड़े पहनना बेहतर होता है, जबकि ऑफिस या घर के लिए आरामदायक और स्मार्ट कैजुअल आउटफिट अधिक उपयुक्त रहते हैं। गर्मियों में सही कपड़े चुनना कोई मुश्किल काम नहीं है। बस थोड़ी समझदारी और सही विकल्पों के साथ न केवल आराम पाया जा सकता है, बल्कि हर दिन एक स्टाइलिश और आत्मविश्वास भरा लुक भी हासिल किया जा सकता है।
Travel Tips: मई की तपती गर्मी से पाएं राहत, इन खूबसूरत ठंडी जगहों पर बनाएं घूमने का प्लान

नई दिल्ली। मई का महीना आते ही देश के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है। तपती धूप और बढ़ते तापमान के बीच राहत की तलाश हर किसी को होती है, खासकर तब जब बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां भी शुरू हो जाती हैं। ऐसे में परिवार के साथ किसी ठंडी और शांत जगह पर घूमने का प्लान सबसे बेहतरीन विकल्प बन जाता है। भारत में कई ऐसे हिल स्टेशन हैं, जहां मई के दौरान मौसम बेहद सुहावना रहता है और प्रकृति अपने पूरे शबाब पर नजर आती है। पूर्वी भारत में बसा दार्जिलिंग इस मौसम में सैर के लिए शानदार विकल्प है। यहां से कंचनजंगा की बर्फीली चोटियों का नजारा मन मोह लेता है। चाय के बागानों की हरियाली और टॉय ट्रेन की सवारी यात्रा को यादगार बना देती है। अगर आप उत्तराखंड की वादियों में सुकून तलाशना चाहते हैं तो औली आपके लिए परफेक्ट जगह है। मखमली घास के मैदान और हिमालय की ठंडी हवाएं यहां एक अलग ही सुकून का एहसास कराती हैं। वहीं मनाली हर साल लाखों पर्यटकों की पहली पसंद बना रहता है। मई में यहां का मौसम ठंडा और खुशनुमा होता है। बर्फ से ढकी पहाड़ियां, हरे-भरे जंगल और बहती नदियां इसे एक ड्रीम डेस्टिनेशन बनाती हैं। पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरती को करीब से देखना हो तो शिलांग जरूर जाएं। झरनों, पहाड़ियों और साफ-सुथरे वातावरण के बीच यहां का कैफे कल्चर भी युवाओं को खूब आकर्षित करता है। ट्रैकिंग और पिकनिक के लिए यह जगह मई में सबसे बेहतर मानी जाती है। अगर आप जन्नत जैसे नजारों का अनुभव करना चाहते हैं तो कश्मीर से बेहतर कुछ नहीं। मई के महीने में यहां के बाग-बगीचे रंग-बिरंगे फूलों से सज जाते हैं। डल झील में शिकारे की सवारी और गुलमर्ग की बर्फीली वादियां हर किसी का दिल जीत लेती हैं। कुल मिलाकर, मई का महीना भले ही गर्मी से भरा हो, लेकिन सही डेस्टिनेशन चुनकर आप इसे यादगार बना सकते हैं। ये सभी जगहें न सिर्फ आपको गर्मी से राहत देंगी बल्कि सुकून, रोमांच और खूबसूरत यादों से भी भर देंगी।
Bhooth Bangla Box Office: अक्षय कुमार की हॉरर-कॉमेडी का जलवा कायम, 13 दिन में 124 करोड़ पार

नई दिल्ली। बॉलीवुड के खिलाड़ी कहे जाने वाले Akshay Kumar एक बार फिर अपनी फिल्म Bhooth Bangla के जरिए सिनेमाघरों में धमाल मचा रहे हैं। 17 अप्रैल को रिलीज हुई इस हॉरर-कॉमेडी फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिल रहा है। रिलीज के बाद से ही फिल्म लगातार चर्चा में बनी हुई है और सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब तारीफ हो रही है। खास बात यह है कि इस फिल्म के जरिए Akshay Kumar और निर्देशक Priyadarshan की जोड़ी करीब 16 साल बाद फिर से साथ नजर आई है, जिसे दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया है। यही वजह है कि फिल्म की कमाई भी लगातार मजबूत बनी हुई है। अगर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने रिलीज के 13वें दिन यानी दूसरे बुधवार को करीब 3.25 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इससे पहले 12वें दिन 4.35 करोड़, 11वें दिन 3.50 करोड़, 10वें दिन 12.50 करोड़, 9वें दिन 10.75 करोड़ और 8वें दिन 5.75 करोड़ की कमाई दर्ज की गई थी। वहीं फिल्म ने पहले हफ्ते में ही 84.40 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार कर लिया था। इन आंकड़ों को जोड़ें तो Bhooth Bangla ने महज 13 दिनों में भारत में 124.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया है। फिल्म की रफ्तार को देखते हुए यह साफ है कि यह जल्द ही 150 करोड़ के आंकड़े को पार कर सकती है। फिल्म की स्टारकास्ट भी इसकी सफलता में अहम भूमिका निभा रही है। Tabu, Paresh Rawal, Rajpal Yadav, Wamiqa Gabbi और Jisshu Sengupta जैसे कलाकारों ने अपने अभिनय से फिल्म को और भी मजबूत बनाया है। कुल मिलाकर, हॉरर और कॉमेडी का यह अनोखा मिश्रण दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि Bhooth Bangla कब 150 करोड़ क्लब में एंट्री करती है और बॉक्स ऑफिस पर कितने नए रिकॉर्ड बनाती है।
भीषण गर्मी में श्रमिकों की सेहत पर खतरा: हीटवेव से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

नई दिल्ली।International Workers’ Day के मौके पर जहां श्रमिकों के अधिकार और सम्मान की बात की जाती है, वहीं उनकी सेहत और सुरक्षा पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है। देश के कई हिस्सों में बढ़ती भीषण गर्मी और Heatwave (लू) के चलते सबसे ज्यादा असर खुले में काम करने वाले मजदूरों पर पड़ रहा है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और जागरूकता बेहद अहम हो जाती है। मेहनतकश हाथों की मेहनत से ही देश की तरक्की होती है, लेकिन तेज धूप और बढ़ते तापमान में काम करना उनकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। निर्माण कार्य में लगे मजदूर, खेतों में काम करने वाले किसान और सड़क किनारे काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं। National Health Mission के अनुसार, लू से बचाव के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले कोशिश करें कि काम के दौरान ज्यादा से ज्यादा समय छाया में बिताया जाए। यदि धूप में काम करना जरूरी हो, तो सिर को टोपी, गमछा या कपड़े से ढककर रखें ताकि सीधे सूरज की किरणों से बचा जा सके। शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे महत्वपूर्ण है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और प्यास लगने का इंतजार न करें। छोटे-छोटे अंतराल में पानी पीना शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। वहीं, ज्यादा चीनी वाले ठंडे पेय, कोल्ड ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स से दूरी बनाना चाहिए, क्योंकि ये शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं। कपड़ों का चुनाव भी गर्मी से बचाव में अहम भूमिका निभाता है। हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनना चाहिए, जो पसीने को सोखते हैं और शरीर को ठंडक देते हैं। इसके अलावा, लगातार धूप में काम करने से बचें और हर 45 से 60 मिनट के बीच 10-15 मिनट का आराम जरूर करें। खानपान का भी ध्यान रखना जरूरी है। गर्मी में हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना शरीर की गर्मी को बढ़ा सकता है, जिससे परेशानी और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसी को लू लग जाए तो चक्कर आना, उल्टी, तेज बुखार और बेहोशी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। ऐसे में तुरंत व्यक्ति को छाया में ले जाकर ठंडे पानी से शरीर को ठंडा करना चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए। इसके साथ ही उद्योग संगठनों और ट्रेड यूनियनों की जिम्मेदारी भी बनती है कि वे श्रमिकों के लिए काम के समय को संतुलित करें, पर्याप्त पानी और छाया की व्यवस्था करें और उन्हें जागरूक बनाएं। कुल मिलाकर, इस भीषण गर्मी में श्रमिकों की सुरक्षा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक जरूरत है। सही सावधानियां अपनाकर और जागरूक रहकर ही Heatwave के खतरे से बचा जा सकता है और श्रमिकों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।
लंच और डिनर का आसान विकल्प: घर पर बनाएं खट्टा-चटपटा लेमन राइस..

नई दिल्ली । रोजाना एक ही तरह का खाना खाते-खाते अगर स्वाद में कुछ नया चाहने लगें, तो लेमन राइस एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। यह साउथ इंडियन रसोई से आने वाली एक ऐसी डिश है जो सरल होने के साथ-साथ बेहद स्वादिष्ट भी होती है। खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और यह हल्का होने के कारण आसानी से पच भी जाता है। व्यस्त जीवनशैली में जब लोग जल्दी बनने वाले और स्वादिष्ट भोजन की तलाश करते हैं, तब लेमन राइस एक आदर्श विकल्प बनकर सामने आता है। इसे मुख्य रूप से पहले से पके हुए चावल के साथ तैयार किया जाता है, जिससे यह और भी जल्दी बन जाता है। इसका खट्टा-तीखा स्वाद इसे अन्य चावल के व्यंजनों से अलग बनाता है। इस स्वादिष्ट व्यंजन की शुरुआत कड़ाही में तेल गर्म करने से होती है। जैसे ही तेल गर्म हो जाता है, उसमें राई डाली जाती है, जो चटकने के साथ ही एक खास सुगंध फैलाती है। इसके बाद चना दाल, उड़द दाल और मूंगफली को हल्का सुनहरा होने तक भुना जाता है, जिससे डिश में कुरकुरापन और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं। इसके बाद इसमें सूखी लाल मिर्च, हरी मिर्च और करी पत्ते डाले जाते हैं, जो इसके स्वाद को और भी गहराई देते हैं। हल्दी पाउडर मिलाने से चावल को एक आकर्षक पीला रंग मिलता है और इसका स्वाद भी संतुलित हो जाता है। अब पहले से पके हुए चावल को धीरे-धीरे कड़ाही में मिलाया जाता है। इस दौरान ध्यान रखा जाता है कि चावल टूटे नहीं और हर दाना अच्छे से मसालों के साथ मिल जाए। इसके बाद स्वाद अनुसार नमक डाला जाता है और पूरी सामग्री को हल्के हाथों से मिलाया जाता है। जब गैस बंद कर दी जाती है, तब इसमें ताजा नींबू का रस डाला जाता है। यही वह चरण है जो इस डिश को उसका खास खट्टा और ताजगी भरा स्वाद देता है। नींबू का रस मिलाने के बाद चावल को हल्के हाथों से दोबारा मिलाया जाता है ताकि स्वाद पूरे मिश्रण में अच्छे से फैल जाए। तैयार लेमन राइस को कुछ देर ढककर रखने के बाद धनिया पत्ती से सजाकर परोसा जाता है। इसे नारियल की चटनी, अचार या दही के साथ खाने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। यह डिश न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि हल्की और पचने में आसान भी होती है, जिससे यह गर्मियों के मौसम के लिए एक आदर्श भोजन बन जाती है। बच्चे हों या बड़े, इसका खट्टा-चटपटा स्वाद सभी को पसंद आता है और यही कारण है कि यह घर-घर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
तेज गर्मी से बचने का आसान तरीका, ये मसाले शरीर को रखते हैं अंदर से ठंडा और हल्का..

नई दिल्ली । जैसे-जैसे गर्मी अपने चरम पर पहुंच रही है, वैसे-वैसे इसका असर लोगों के शरीर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान शरीर को तेजी से थका रहा है। इस मौसम में अक्सर लोग कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर और पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करते हैं। ऐसे हालात में केवल पानी पीना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि खानपान में ऐसे प्राकृतिक तत्वों को शामिल करना जरूरी हो जाता है जो शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान कर सकें। आयुर्वेद और पारंपरिक घरेलू नुस्खों में कुछ ऐसे मसालों का जिक्र मिलता है जो गर्मियों में शरीर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। ये मसाले न केवल पाचन को सुधारते हैं बल्कि शरीर के तापमान को भी नियंत्रित रखते हैं। इनमें सौंफ सबसे प्रमुख मानी जाती है। यह शरीर में ठंडक बनाए रखने में मदद करती है और पेट की गर्मी को कम करने का काम करती है। गर्मी के मौसम में इसका सेवन शरीर को हल्का और तरोताजा महसूस कराता है, साथ ही पाचन तंत्र को भी शांत रखता है। धनिया के बीज भी शरीर को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह शरीर में गर्मी और सूजन को कम करने में मदद करते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं। गर्मी के कारण होने वाली पेट की समस्याओं में यह काफी लाभकारी माना जाता है। इलायची का उपयोग भी गर्मियों में काफी फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को हल्का महसूस कराने के साथ-साथ गैस, एसिडिटी और पेट की जलन जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करती है। इसका सेवन शरीर में ताजगी बनाए रखने में सहायक होता है। पुदीना को तो लंबे समय से प्राकृतिक ठंडक का स्रोत माना जाता रहा है। इसमें मौजूद तत्व शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ पाचन सुधारने में भी मदद करते हैं। गर्मियों में होने वाली पेट की समस्याओं में यह काफी असरदार साबित होता है और शरीर को तुरंत राहत देता है। अमचूर भी इस सूची में शामिल एक महत्वपूर्ण मसाला है। यह पाचन को सक्रिय करने में मदद करता है और शरीर में ताजगी बनाए रखता है। इसके प्राकृतिक गुण गर्मी के असर को कम करने और भूख को संतुलित करने में सहायक होते हैं। अगर गर्मियों में खानपान में इन प्राकृतिक मसालों को शामिल किया जाए तो शरीर को अंदर से ठंडक मिल सकती है और कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव है। यह सरल उपाय बिना किसी दवा के शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद कर सकता है।
गर्मियों में फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ा, ये 13 गलतियां पड़ सकती हैं भारी

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम जहां राहत और ठंडे फलों का आनंद लेकर आता है वहीं यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है तेज गर्मी और बढ़ता तापमान खाने को जल्दी खराब कर देता है जिससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि केवल बाहर का खाना ही नुकसानदायक होता है लेकिन सच यह है कि घर का खाना भी अगर सही तरीके से न संभाला जाए तो वह बीमारी का कारण बन सकता है गर्मी के मौसम में बैक्टीरिया और जर्म्स तेजी से बढ़ते हैं यही कारण है कि थोड़ी सी लापरवाही भी उल्टी दस्त पेट दर्द और डायरिया जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है कई बार यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है और अस्पताल तक जाने की नौबत आ जाती है इसलिए जरूरी है कि खाने से जुड़ी छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा जाए सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं वह है कटे हुए फल को लंबे समय तक रखना कई लोग आधा फल खाकर बाकी फ्रिज में रख देते हैं लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है कटे हुए फल में जल्दी बैक्टीरिया पनपने लगते हैं इसलिए फलों को हमेशा ताजा काटकर तुरंत खाना चाहिए इसी तरह फल और सब्जियों को काटते समय साफ चाकू और साफ हाथों का इस्तेमाल करना जरूरी है गंदे हाथ या गंदे बर्तन से बैक्टीरिया सीधे खाने में पहुंच जाते हैं कटे हुए फलों को नल के पानी से धोना भी सही नहीं माना जाता क्योंकि इससे जर्म्स और बढ़ सकते हैं गर्मी में एक और बड़ी गलती है खाना लंबे समय तक बाहर रखना पका हुआ खाना दो घंटे से ज्यादा बाहर रखने पर खराब होने लगता है इसलिए इसे जल्दी फ्रिज में रखना चाहिए लेकिन ध्यान रहे कि एक बार फ्रिज से निकालकर गर्म किया गया खाना दोबारा फ्रिज में नहीं रखना चाहिए इससे उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं बासी खाना खाना भी फूड प्वाइजनिंग का बड़ा कारण है कई लोग सुबह का बना खाना रात में या रात का खाना अगले दिन खा लेते हैं जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है बार बार खाना गर्म करना भी नुकसानदायक होता है क्योंकि इससे उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है बाजार में खुले में बिकने वाले खाने से भी बचना चाहिए खासकर वह खाना जो लंबे समय से रखा हो ऐसे खाने में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है इसके अलावा अगर खाने में किसी तरह की गंध रंग या स्वाद में बदलाव महसूस हो तो उसे तुरंत फेंक देना ही बेहतर होता है गर्मियों में सुरक्षित रहने के लिए जरूरी है कि हमेशा ताजा और साफ खाना खाएं हाथों की सफाई का ध्यान रखें और खाने को सही तरीके से स्टोर करें छोटी छोटी सावधानियां अपनाकर बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है यह मौसम सतर्क रहने का है ताकि आप और आपका परिवार स्वस्थ रह सके