नींद कम, सिर दर्द ज्यादा: आंखों और भौंहों के बीच दर्द में आयुर्वेद के असरदार नुस्खे

नई दिल्ली। अक्सर लोग लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करने के बाद सिर में दर्द और आंखों में तनाव की शिकायत करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिर दर्द केवल स्क्रीन टाइम की वजह से नहीं होता। कुछ लोगों को सुबह उठते ही भौंहों और आंखों के ऊपर भारीपन और दर्द महसूस होता है। इसका कारण अधूरी नींद और उससे प्रभावित न्यूरो-हॉर्मोनल असंतुलन हो सकता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आंखों के ऊपर भौंहों वाला क्षेत्र frontal sinus और trigeminal nerve से जुड़ा होता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो भौंहों के बीच तेज दर्द होता है। इससे मस्तिष्क में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे सिर दर्द के साथ-साथ आंखों की मांसपेशियों पर भी दबाव बढ़ता है। आयुर्वेद में इस स्थिति को शरीर में वात की वृद्धि और नींद की कमी से जोड़ा गया है। वात बढ़ने पर नींद प्रभावित होती है और पूरे तंत्रिका तंत्र में असंतुलन पैदा होता है। इसके चलते सिर में दर्द, आंखों में भारीपन और मानसिक थकान महसूस होती है। आयुर्वेद में इसके लिए कई सरल और प्रभावकारी उपाय बताए गए हैं। पहला उपाय है नस्य विधि। रात में सोने से पहले नाक में कुछ बूंदें देसी घी की डालने से नाक का रुखापन कम होता है और सांस लेने में आसानी होती है। इससे सिर और आंखों पर दबाव घटता है और नींद भी अच्छी आती है। दूसरा उपाय है तलवों की मालिश। तलवों पर कई प्रेशर पॉइंट्स मौजूद हैं जो शरीर के संतुलन को बनाए रखते हैं और नींद लाने में मदद करते हैं। दिनभर की थकान और शरीर में जमा टॉक्सिन को बाहर निकालने के लिए रात में तलवों की हल्की मालिश लाभकारी है। इसके अलावा, सिर दर्द और मानसिक थकान कम करने के लिए ब्राह्मी और जटामांसी का सेवन आयुर्वेद में बहुत प्रभावी माना गया है। ये हर्ब्स मन को शांत करते हैं, नींद में सुधार लाते हैं और मानसिक तनाव कम करते हैं। आंखों की थकान कम करने के लिए त्रिफला जल से नेत्र प्रक्षालन भी कारगर है। ठंडे जल में त्रिफला पाउडर मिलाकर आंखें धोने से आंखों की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और आंखों की रोशनी में सुधार होता है। रात के समय हल्दी, काली मिर्च और जायफल वाला दूध पीने से भी नींद बेहतर आती है। यह मस्तिष्क को शांत करता है, शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है और नींद की गुणवत्ता बढ़ाता है। इस तरह, आयुर्वेद में सुझाए गए ये उपाय न सिर्फ सिर दर्द और आंखों की थकान को कम करते हैं, बल्कि शरीर और मन दोनों को संतुलित रखते हैं। नियमित रूप से इन विधियों को अपनाकर व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में मानसिक और शारीरिक तनाव को काफी हद तक कम कर सकता है।
Valentine Day 2026: दिल्ली-NCR के इन 7 रोमांटिक ठिकानों पर सजाएं प्यार की शाम, कपल्स के लिए परफेक्ट डेट स्पॉट्स

नई दिल्ली। वैलेंटाइन डे आते ही कपल्स ऐसी जगह की तलाश में रहते हैं, जहां वे भीड़भाड़ से दूर सुकून भरे पल बिता सकें या फिर शानदार डिनर और म्यूजिक के साथ अपनी डेट को खास बना सकें। दिल्ली-एनसीआर में ऐसे कई लोकेशन हैं जो हर तरह के कपलनेचर लवर, हिस्ट्री प्रेमी या पार्टी एंथूज़ियास्टके लिए बेहतरीन विकल्प देते हैं। आइए जानते हैं 7 ऐसी लोकप्रिय जगहों के बारे में, जहां आप इस वैलेंटाइन डे को खास बना सकते हैं। 1. हरियाली के बीच सुकून भरी डेटअगर आप शांत और प्राकृतिक माहौल में समय बिताना चाहते हैं, तो लोधी गार्डन और Garden of Five Senses बेहतरीन विकल्प हैं। ऐतिहासिक मकबरों के बीच फैली हरियाली और खुले लॉन यहां रोमांटिक वॉक और लंबी बातचीत के लिए आदर्श माहौल बनाते हैं। 2. इतिहास की खूबसूरती के साथ रोमांसदिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरें भी डेट के लिए शानदार बैकड्रॉप देती हैं। हुमायूं का मकबरा, कुतुब मीनार और लाल किला जैसी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स पर आप इतिहास और रोमांस का अनोखा संगम महसूस कर सकते हैं। 3. हौज खास विलेज का ट्रेंडी माहौलझील किनारे की शाम और कैफे कल्चर का आनंद लेना हो तो हौज खास विलेज बढ़िया ऑप्शन है। यहां रूफटॉप रेस्टोरेंट, लाइव म्यूजिक और आर्टिस्टिक वाइब्स आपकी डेट को स्टाइलिश टच देते हैं। 4. साइबर हब, गुरुग्राम में मॉडर्न डेटअगर आप इंटरनेशनल फूड, थीम कैफे और हाई-एनर्जी म्यूजिक का मजा लेना चाहते हैं, तो DLF Cyber Hub पर जा सकते हैं। यहां की नाइटलाइफ और प्रीमियम रेस्टोरेंट्स कपल्स के बीच काफी लोकप्रिय हैं। 5. कनॉट प्लेस की क्लासिक रोमांटिक शामदिल्ली का दिल कहे जाने वाला कनॉट प्लेस आज भी कपल्स की पहली पसंद में शामिल है। यहां के कैफे, रेस्टोरेंट और सेंट्रल पार्क का खुला माहौल डेट के लिए शानदार अनुभव देता है। 6. नोएडा का गार्डन गैलेरियानोएडा में रहने वाले कपल्स के लिए गार्डन गैलेरिया मॉल एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। यहां क्लब, लाइव म्यूजिक और मल्टी-क्यूज़ीन रेस्टोरेंट्स के साथ आप डिनर डेट को यादगार बना सकते हैं। 7. गुरुग्राम सेक्टर-29 की पार्टी वाइबअगर आप डांस, म्यूजिक और पार्टी के शौकीन हैं, तो सेक्टर 29 जाएं। यहां कई पॉपुलर क्लब और रेस्टोरेंट एक ही जगह पर मौजूद हैं, जिससे आपकी वैलेंटाइन नाइट और भी खास बन सकती है। दिल्ली-एनसीआर में वैलेंटाइन डे मनाने के लिए विकल्पों की कोई कमी नहीं है। चाहे आप शांत गार्डन में सुकून चाहते हों, ऐतिहासिक इमारतों के बीच यादगार तस्वीरें लेना चाहते हों या फिर मॉडर्न कैफे और क्लब में पार्टी करना चाहते होंहर कपल के लिए यहां एक परफेक्ट स्पॉट मौजूद है। बस अपनी पसंद चुनिए और इस वैलेंटाइन डे को बनाइए बेहद खास।
छात्रों के लिए वरदान उत्थित पद्मासन, मांसपेशियों के साथ मानसिक शक्ति भी बढ़ाए

नई दिल्ली। भागदौड़ और तनाव से भरी आधुनिक जीवनशैली में योग एक ऐसा साधन बनकर उभरा है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने में मदद करता है। अनेक योगासनों में उत्थित पद्मासन को विशेष रूप से शक्तिशाली और प्रभावी माना जाता है। नियमित अभ्यास से यह न केवल शारीरिक मजबूती देता है बल्कि मानसिक एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार योग अनुशासन और शारीरिक मानसिक सामर्थ्य को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उत्थित पद्मासन इसी क्रम में एक उन्नत आसन है जिसमें साधक पद्मासन की स्थिति में बैठकर हाथों के बल पर पूरे शरीर को जमीन से ऊपर उठाता है। यह देखने में सरल लग सकता है लेकिन इसके लिए संतुलन ताकत और नियंत्रित श्वास की आवश्यकता होती है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पद्मासन में बैठें। एक पैर को विपरीत जांघ पर और दूसरा पैर पहली जांघ पर रखें। रीढ़ सीधी रखें और शरीर को स्थिर करें। इसके बाद दोनों हथेलियों को शरीर के पास जमीन पर टिकाएं। गहरी सांस लेते हुए हाथों पर दबाव डालें और पूरे शरीर को धीरे धीरे जमीन से ऊपर उठाएं। इस दौरान गर्दन और सिर सीधा रखें तथा नजर सामने या हल्का नीचे की ओर रखें। सांस सामान्य रखते हुए कुछ सेकंड तक इस स्थिति में बने रहें और फिर धीरे से वापस जमीन पर आ जाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्थित पद्मासन हाथों कलाइयों और कंधों को मजबूती देता है। इसके साथ ही कोर मसल्स यानी पेट और पीठ की मांसपेशियां भी सक्रिय होती हैं जिससे शरीर का संतुलन बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं और पाचन तंत्र मजबूत बनता है। कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में भी लाभ मिल सकता है। यह आसन मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है। संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया दिमाग को केंद्रित करती है और ध्यान की क्षमता को बढ़ाती है। छात्रों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है क्योंकि इससे एकाग्रता और स्मरण शक्ति में सुधार हो सकता है। परीक्षा की तैयारी के दौरान मानसिक स्थिरता बनाए रखने में भी यह सहायक हो सकता है। रक्त संचार को बेहतर बनाने और शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने में भी यह आसन सहायक माना जाता है। छाती कंधों और बाहों में रक्त प्रवाह सुधरता है जिससे शरीर में स्फूर्ति आती है। नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति का अनुभव भी बढ़ता है। हालांकि जिन लोगों को घुटनों कूल्हों या कलाइयों में दर्द या चोट की समस्या हो उन्हें यह आसन करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग गुरु से सलाह लेनी चाहिए। सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास से उत्थित पद्मासन शरीर और मन दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
इनट्यूशन थॉट की ताकत कैसे अंदर की आवाज बदल सकती है आपकी किस्मत और फैसलों की दिशा

नई दिल्ली। जिंदगी में हम अक्सर ऐसे लोगों को देखते हैं जो बिना ज्यादा सोचे समझे भी बिल्कुल सटीक फैसला ले लेते हैं। खेल के मैदान से लेकर बिजनेस और कला की दुनिया तक कई सफल लोग कहते हैं कि वे अपनी अंदर की आवाज यानी इनट्यूशन थॉट पर भरोसा करते हैं। यही इनट्यूशन उन्हें सही समय पर सही निर्णय लेने की ताकत देती है। कई बार फैसले लेने के लिए हमारे पास कुछ सेकंड भी नहीं होते और वही पल हमारी दिशा तय कर देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इनट्यूशन थॉट होता क्या है और यह हमारी जिंदगी को कैसे बदल सकता है। इनट्यूशन थॉट दरअसल दिमाग की वह क्षमता है जो अनुभव और भावनाओं के आधार पर तुरंत निर्णय लेने में मदद करती है। खेल जगत में इसका बेहतरीन उदाहरण बेसबॉल खिलाड़ियों में देखने को मिलता है। मेजर लीग बेसबॉल में गेंद की रफ्तार 90 मील प्रति घंटे से ज्यादा होती है और बल्लेबाज के पास केवल करीब 150 मिलीसेकेंड का समय होता है यह तय करने के लिए कि शॉट खेलना है या नहीं। उस समय सोचने का मौका नहीं होता वहां सिर्फ अनुभव और इनट्यूशन काम करती है। यही वजह है कि टॉप खिलाड़ियों के फैसले हमें सहज और नेचुरल लगते हैं। लेकिन इनट्यूशन कोई जादुई शक्ति नहीं है जो केवल महान खिलाड़ियों या सफल लोगों के पास हो। शोध बताते हैं कि यह क्षमता हर इंसान में मौजूद होती है। 2016 में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार इनट्यूशन को अभ्यास और जागरूकता से मजबूत किया जा सकता है। न्यूरोसाइंस के मुताबिक हमारा दिमाग दो तरह की सोच पर काम करता है एनालिटिकल और इनट्यूटिव। एनालिटिकल सोच तर्क आंकड़ों और योजना पर आधारित होती है जबकि इनट्यूटिव सोच भावनाओं अनुभव और बड़ी तस्वीर को समझने पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति घर खरीदने का फैसला ले रहा है तो एनालिटिकल सोच वाला व्यक्ति बजट स्कूल दूरी और सुविधाओं पर ध्यान देगा जबकि इनट्यूटिव सोच वाला यह महसूस करेगा कि उस जगह पर उसे कैसा लग रहा है क्या वह वहां खुद को सहज और खुश महसूस कर पा रहा है। दोनों सोच जरूरी हैं लेकिन कई बार तेजी से निर्णय लेने के लिए इनट्यूशन अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनट्यूशन को मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी है खुद पर भरोसा। जब हम अपनी अंदर की आवाज को सुनना सीखते हैं और फैसलों के नतीजों पर विचार करते हैं तो हमारी निर्णय क्षमता बेहतर होती जाती है। अक्सर हमारे भीतर दो तरह की आवाजें होती हैं एक डर और घबराहट से जुड़ी और दूसरी शांत और स्थिर। जो आवाज आपको भीतर से शांति देती है वही सच्ची इनट्यूशन होती है। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी कह चुके हैं कि इनट्यूशन हमारे पुराने बौद्धिक अनुभवों का परिणाम होती है। नियमित अभ्यास ध्यान सांस पर फोकस रचनात्मक गतिविधियां और तनाव में भी शांत रहने की आदत इनट्यूशन को मजबूत बनाती हैं। आखिरकार इनट्यूशन थॉट कोई रहस्य नहीं बल्कि हमारे अनुभव और आत्मविश्वास का निचोड़ है। जब हम खुद को समझते हैं और अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेते हैं तो यही अंदर की आवाज हमें सही दिशा में आगे बढ़ने का साहस देती है और यही सफलता की असली कुंजी बन सकती है।
Mahashivratri 2026: दिल्ली का वो चमत्कारी शिवधाम, जहां एक साथ होते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन!

दिल्लीः महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अगर आप दिल्ली में रहकर देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना चाहते हैं, तो चांदनी चौक स्थित प्राचीन गौरी शंकर मंदिर आपके लिए सबसे खास जगह बन सकता है. इस ऐतिहासिक शिवालय में श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूपों के दर्शन का दुर्लभ अवसर मिलता है. महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भक्तों का मेला लगता है. मेट्रो स्टेशन से लेकर मंदिर परिसर तक पैर रखने तक की जगह नहीं होती है. मंदिर को फूलों, बेलपत्र और रोशनी से सजाया जाता है. सुबह से ही जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष आरती का सिलसिला शुरू हो जाता है. देर रात तक ॐ नमः शिवाय और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा चांदनी चौक इलाका शिवमय हो उठता है. एक ही परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन मंदिर परिसर में सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन विधि-विधान के साथ कराए जाते हैं. खास बात यह है कि हर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी मान्यताओं और कथाओं को भी यहां विस्तार से बताया जाता है, जिससे श्रद्धालुओं का आध्यात्मिक अनुभव और गहरा हो जाता है. मंदिर का स्थान और स्थापनामंदिर के पुजारी सुशील शुक्ला जी ने बताया कि इस विशेष 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना 27 जुलाई 2024 को की गई थी. उन्होंने बताया कि देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा हर भक्त के लिए संभव नहीं हो पाती, ऐसे में यह मंदिर श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर महादेव के सभी ज्योतिर्लिंग स्वरूपों के दर्शन का अवसर देता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भारत के विभिन्न ज्योतिर्लिंग स्थलों से लाए गए शिवलिंग विधि-विधान के साथ स्थापित किए गए हैं. जिससे भक्तों को वास्तविक तीर्थ दर्शन जैसा अनुभव मिलता है.इतना ही नहीं है अब मंदिर में 1 जनवरी 2026 से भस्म आरती भी स्टार्ट हो गई है. जहां पर बाबा महाकालेश्वर की भस्म आरती की जाती है, आरती प्रत्येक सोमवार को सुबह 6:00 होती है. दर्शन का समय और सुरक्षा व्यवस्थागौरी शंकर मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए श्रद्धालु सुबह 4:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और इसके बाद शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक मंदिर में दर्शन कर सकते हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में व्यापक इंतजाम किए गए हैं.मंदिर में हर तरफ सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जा रही है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया गया है. दर्शन के लिए बनाए गए बेसमेंट हिस्से में एयर कंडीशनिंग की सुविधा उपलब्ध है, वहीं भव्य झूमरों और आकर्षक सजावट से मंदिर की भव्यता और भी बढ़ जाती है.
UP Medical Negligence: मोतियाबिंद सर्जरी बनी काल! 42 मरीजों में फैला खतरनाक संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग ने सील किया अस्पताल का ओटी

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य मानकों और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में एक और दो फरवरी को मोतियाबिंद की सर्जरी कराने वाले परिवारों के लिए यह ऑपरेशन किसी भयावह दुस्वप्न में बदल गया है। अस्पताल में सर्जरी कराने वाले कुल 42 मरीजों में से 22 की हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें आनन-फानन में दिल्ली के एम्स अस्पताल रेफर करना पड़ा। संक्रमण की तीव्रता इतनी घातक थी कि अब तक चार मरीजों की आंखें सर्जरी कर निकालनी पड़ी हैं, जबकि छह अन्य की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए बुझ चुकी है। यह पूरी घटना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और संक्रमण नियंत्रण की पोल खोलती नजर आ रही है। एम्स के विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहे इस उपचार के दौरान कई दर्दनाक कहानियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि शुरुआत में सात मरीजों को भर्ती कराया गया था, लेकिन संक्रमण की गंभीरता के चलते मंगलवार और बुधवार के बीच 15 और मरीज दिल्ली पहुंच गए। इन सभी की आंखों में संक्रमण फैल चुका है और उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। जिन 12 मरीजों में संक्रमण की स्थिति बेहद गंभीर थी, उनमें से चार की आंखें निकालनी पड़ीं ताकि संक्रमण दिमाग तक न पहुंचे। तीन अन्य मरीजों की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर एक से दो दिन में आगे की सर्जरी या उपचार को लेकर निर्णय लेंगे। बेलघाट क्षेत्र की रहने वाली 60 वर्षीय महिला बहाउद्दीन का इलाज एम्स में चल रहा है। उनकी बेटी के अनुसार संक्रमण के कारण उनकी मां की आंखों की रोशनी चली गई। इसी तरह बारी गांव की देवराजी की आंख में संक्रमण इतना बढ़ गया कि मवाद और खून आने लगा। जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि रोशनी पूरी तरह जा चुकी है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आंख निकालनी पड़ी। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया कि देरी होती तो संक्रमण का असर दिमाग तक पहुंच सकता था। इन्नडीह के अर्जुन सिंह और बेलीपार के रामदरश सहित अन्य मरीजों की भी आंखें निकालनी पड़ी हैं या अतिरिक्त सर्जरी की तैयारी चल रही है। इन घटनाओं ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। मामले की जांच के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम ने अस्पताल पहुंचकर ऑपरेशन थियेटर और अन्य स्थानों से 10 से अधिक सैंपल लिए हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह के अनुसार जांच रिपोर्ट गुरुवार तक आने की संभावना है। रिपोर्ट से संक्रमण के असली कारणों का पता चल सकेगा। अस्पताल संचालक राजेश राय का कहना है कि उनके यहां वर्षों से मोतियाबिंद की सर्जरी की जा रही है और पहली बार इस तरह की घटना सामने आई है। एसीएमओ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर सील कर दिया गया है और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर रखे हुए है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और ऑपरेशन थियेटर की स्वच्छता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। फिलहाल पीड़ित परिवारों की उम्मीद एम्स के डॉक्टरों पर टिकी है।
सब्जियों से पाएं घर पर ही चमकती और स्वस्थ त्वचा, जानिए कैसे करें इस्तेमाल?

नई दिल्ली । आज के समय में बाजार में स्किन केयर के लिए कई महंगे प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं लेकिन असली खूबसूरती आपकी त्वचा को मिलने वाले पोषण पर निर्भर करती है। सब्जियां विटामिन और मिनरल्स का खजाना होती हैं और यही आपकी त्वचा की प्राकृतिक चमक का राज हैं। अपनी डाइट में भरपूर सब्जियों को शामिल करना पहला कदम है लेकिन कुछ सब्जियों का रस सीधे चेहरे पर लगाने से भी अद्भुत परिणाम मिल सकते हैं। त्वचा के लिए विटामिन A C और E बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाते हैं और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं। उदाहरण के तौर पर टमाटर का रस दाग-धब्बों पिगमेंटेशन और सूर्य की वजह से टैनिंग में राहत देता है। टमाटर में लाइकोपीन विटामिन C और अन्य शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो त्वचा को अंदर तक साफ और ताजगी भरी बनाते हैं। आप पके हुए टमाटर का रस निकालकर उसमें दही और शहद मिलाकर चेहरे पर 15–20 मिनट तक लगा सकते हैं। इसके अलावा टमाटर के फ्रीज किए हुए स्लाइस से हल्की मसाज करने पर खुले पोर्स कसने और त्वचा में ताजगी लाने में मदद मिलती है। आलू का रस भी चेहरे की प्राकृतिक चमक के लिए फायदेमंद है। आलू त्वचा को अंदर से पोषण देता है और रंगत को सुधारने में मदद करता है। इसे सीधे चेहरे पर लगाना या चावल का आटा हल्दी टमाटर का रस और गुलाबजल के साथ फेस पैक बनाकर इस्तेमाल करना प्रभावी होता है। हफ्ते में दो बार इसका प्रयोग करने से त्वचा में निखार आता है। बीटरूट यानी चुकंदर त्वचा में गुलाबी और ताजगी भरी चमक लाने में कारगर है। इसके रस को सीधे चेहरे पर हल्की मसाज के लिए लगाया जा सकता है या नारियल तेल के साथ मिलाकर लिप बाम की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। चुकंदर दही बेसन और नींबू के साथ फेस पैक बनाकर 15–20 मिनट तक चेहरे पर लगाने से स्किन रेडिएंट बनती है। खीरा त्वचा को प्राकृतिक हाइड्रेशन देने के लिए अच्छा है। गर्मियों में खीरे का कद्दूकस करके पलकों पर 10–15 मिनट रखने से आंखों के नीचे पफीनेस और थकान कम होती है। खीरे का रस सीधे चेहरे पर लगाने या टमाटर के रस के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से त्वचा क्लीन और ग्लोइंग बनती है। सर्दियों में गाजर का रस भी त्वचा के लिए बेहतरीन है। यह विटामिन A का खजाना है और एक्ने कम करने त्वचा को रेडिएंट बनाने और पोर्स को कसाव देने में मदद करता है। गाजर का रस सीधे चेहरे पर लगाना या बेसन हल्दी और शहद के साथ फेस पैक बनाकर इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।
हल्की खांसी भी हो सकती है फेफड़ों के कैंसर की चेतावनी, आयुष मंत्रालय ने दिए जरूरी लक्षण

नई दिल्ली ।देश में डायबिटीज और थायराइड की बढ़ती समस्या के बाद अब फेफड़ों का कैंसर भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में 81,219 पुरुष और 30,109 महिलाओं में नए फेफड़ों के कैंसर के मामले दर्ज किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि हल्की खांसी और सामान्य श्वसन संबंधी परेशानियां भी कभी-कभार कैंसर का संकेत हो सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आयुष मंत्रालय ने हाल ही में फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया पोस्ट शेयर किया है और इस गंभीर बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय बताए हैं। आयुष मंत्रालय ने बताया कि फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं और इन्हें सामान्य श्वसन संबंधी बीमारियों से मिलाया जा सकता है। लगातार खांसी, थकान, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना जैसे संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। मंत्रालय ने जोर दिया कि सही समय पर लक्षणों को पहचानकर डॉक्टर से सलाह लेना और इलाज शुरू करना कई लोगों की जान बचा सकता है। फेफड़ों के कैंसर के मुख्य कारणों में सिर्फ तंबाकू या धूम्रपान ही शामिल नहीं हैं। इसमें परोक्ष धूम्रपान वायु प्रदूषण और रसायनों या एस्बेस्टस से जुड़े व्यावसायिक उद्योग भी जोखिम बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कारकों के प्रभाव को समझना और बचाव के उपाय अपनाना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है। फेफड़ों का कैंसर मूलतः तब होता है जब फेफड़ों की कोशिकाएं सामान्य विभाजन प्रक्रिया के दौरान अनियमित रूप से बदल जाती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। इस स्थिति में फेफड़े ठीक से काम नहीं कर पाते और समय रहते इलाज न मिलने पर शरीर के अन्य हिस्सों में भी बीमारी फैल सकती है। फेफड़ों में मुख्यतः दो प्रकार के कैंसर पाए जाते हैं। पहला नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर है और दूसरा स्मॉल सेल लंग कैंसर। भारत में नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर के मामले अधिक पाए जाते हैं। यदि इसे शुरुआती दौर में पहचान लिया जाए तो इसका इलाज संभव है और मरीज स्वस्थ हो सकते हैं। वहीं स्मॉल सेल लंग कैंसर अधिक खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह शरीर के अन्य हिस्सों में तेजी से फैलता है और इलाज मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर जांच और उपचार न होने पर दोनों प्रकार के कैंसर गंभीर परिणाम दे सकते हैं। आयुष मंत्रालय ने लोगों से आग्रह किया है कि फेफड़ों से जुड़ी किसी भी असामान्य समस्या को नजरअंदाज न करें। हल्की खांसी को भी गंभीरता से लें और डॉक्टर से जांच कराएं। साथ ही तंबाकू और धूम्रपान से दूर रहें, वायु प्रदूषण से बचाव करें और व्यावसायिक जोखिमों को समझें। यदि समय पर सावधानी और इलाज शुरू कर दिया जाए तो फेफड़ों के कैंसर से बचाव और रोग प्रबंधन दोनों ही संभव हैं। देश में जागरूकता फैलाना और लोगों को लक्षणों की पहचान कराना बेहद महत्वपूर्ण है। आयुष मंत्रालय की पहल इसी दिशा में एक कदम है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर इलाज से फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।
वेलेंटाइन डे पर पार्टनर के साथ रोड ट्रिप के लिए ये जगहें हैं परफेक्ट

नई दिल्ली । वेलेंटाइन डे का नाम आते ही अक्सर हमारे मन में किसी महंगे होटल या कैंडल लाइट डिनर का ख्याल आता है, लेकिन प्यार का असली आनंद तो साथ बिताए गए उन लम्हों में है, जहां शोर कम और सुकून ज्यादा हो. इस 14 फरवरी अगर आप अपनी पार्टनर के साथ भीड़भाड़ से दूर कुछ अलग प्लान करना चाहते हैं, तो रोड ट्रिप से बेहतर कुछ नहीं हो सकता.भारत में कई ऐसे ड्राइविंग रूट्स हैं जहां खिड़की के बाहर बदलते नजारे, हल्का संगीत और पार्टनर का साथ आपके सफर को किसी फिल्म के रोमांटिक सीन जैसा बना देगा. तो चलिए जानते हैं उन खूबसूरत रास्तों के बारे में जहां मंजिल की जल्दबाजी नहीं, बल्कि रास्तों की खूबसूरती आपके प्यार को एक नया अहसास देगी.पहाड़ों की ठंडी हवाओं में घुलेगा रोमांस उत्तर भारत के जोड़ों के लिए हिमालय की गोद में बसी वादियां हमेशा से पहली पसंद रही हैं. दिल्ली से मनाली का सफर हो या मसूरी की धुंध भरी सुबह, इन रास्तों पर बर्फ से ढके पहाड़ और देवदार के पेड़ों के बीच से गुजरना एक जादुई अनुभव होता है. इसके अलावा, दिल्ली से कसौली की घुमावदार सड़कें शिवालिक पहाड़ियों के ऐसे नजारे पेश करती हैं जो आपके सफर को यादगार बना देते हैं. यही नहीं, मसूरी के लाल टिब्बा पर साथ में सूर्यास्त देखना हो या सोलंग वैली की बर्फीली वादियों में हाथ थामकर चलना, पहाड़ों की यह शांति आपके बीच की बातचीत को और भी गहरा और अर्थपूर्ण बना देती है. राजस्थान की सड़कों पर महसूस करें शाही अंदाज अगर आप अपने वेलेंटाइन को थोड़ा राजसी और ऐतिहासिक रंग देना चाहते हैं, तो राजस्थान की सड़कें आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं. जयपुर से उदयपुर की ड्राइव आपको किलों और महलों के बीच से ले जाती है, जहां पहुंचकर पिछोला झील के किनारे शाही डिनर का लुत्फ उठाया जा सकता है. उदयपुर को ‘सिटी ऑफ लेक्स’ के साथ-साथ प्रेम का शहर भी कहा जाता है, जो जोड़ों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है. इसके अलावा, अगर आपको रेगिस्तान की खामोशी पसंद है, तो जैसलमेर के सुनहरे रेत के टीलों पर पार्टनर के साथ डूबते सूरज को देखना एक ऐसा अहसास है जो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. दक्षिण भारत के कॉफी बागानों और समंदर का साथ प्राकृतिक सुंदरता और शांति की तलाश करने वाले कपल्स के लिए दक्षिण भारत के रास्ते किसी जन्नत से कम नहीं हैं. बेंगलुरु से कूर्ग की ड्राइव आपको भारत के ‘स्कॉटलैंड’ तक ले जाती है, जहां कॉफी के बागानों की खुशबू और चारों तरफ फैली हरियाली आपके मन को तरोताजा कर देती है. इसके अलावा, कोच्चि से मुन्नार का रास्ता चाय के बागानों और खूबसूरत झरनों से होकर गुजरता है, जो सफर को बेहद रोमांटिक बना देता है. यही नहीं, चेन्नई से पांडिचेरी का ईस्ट कोस्ट रोड एक तरफ नीला समंदर और दूसरी तरफ खुली सड़क का ऐसा मेल कराता है, जहां गाड़ी चलाना अपने आप में एक उत्सव बन जाता है. बीच वाइब्स और लॉन्ग ड्राइव का बेजोड़ मेल एडवेंचर और मस्ती पसंद करने वाले जोड़ों के लिए पश्चिम भारत की सड़कें सबसे रोमांचक विकल्प पेश करती हैं. मुंबई से गोवा का सफर उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो आजादी और पार्टी वाइब्स को प्यार के साथ जोड़ना चाहते हैं. यहां के नारियल के पेड़ों से घिरी सड़कें और समंदर किनारे के कैफे आपके वेलेंटाइन को जोश से भर देते हैं. इसके अलावा, अगर आपके पास समय कम है, तो मुंबई से लोनावला की छोटी सी ड्राइव भी एक परफेक्ट रोमांटिक गेटअवे साबित हो सकती है. लोनावला की हरी-भरी वादियां और रास्ते में मिलने वाले छोटे-छोटे झरने आपके सफर में प्यार की मिठास घोलने के लिए काफी हैं.
राजा बेटा कहकर पाल रहे हैं तो सावधान भारतीय पेरेंटिंग की यह आदत बहुओं और समाज पर डाल रही बोझ

नई दिल्ली :भारतीय परिवारों में राजा बेटा शब्द अक्सर प्यार और गर्व के साथ बोला जाता है। मां बाप को लगता है कि बेटे को हर सुविधा देना और हर जिम्मेदारी से दूर रखना उनका फर्ज है। लेकिन मनोवैज्ञानिक अब चेतावनी दे रहे हैं कि यही सोच आगे चलकर बच्चों खासकर बेटों के भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस व्यवहार को विशेषज्ञ राजा बेटा सिंड्रोम का नाम दे रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार राजा बेटा सिंड्रोम कोई मेडिकल बीमारी नहीं बल्कि एक व्यवहारिक स्थिति है। यह तब विकसित होती है जब माता पिता बेटे से कभी जवाबदेही की उम्मीद नहीं करते। उसे घर के कामों से दूर रखा जाता है। उसकी गलतियों को यह कहकर टाल दिया जाता है कि वह अभी बच्चा है। नतीजा यह होता है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर तो बड़ा हो जाता है लेकिन मानसिक परिपक्वता विकसित नहीं हो पाती। सोशल मीडिया पर साइकोलॉजिस्ट स्नोई राही का एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है। इस वीडियो में उन्होंने इस सिंड्रोम की जड़ पर सीधा प्रहार किया है। उन्होंने एक असल अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह एक घर में गईं जहां एक पूरी तरह वयस्क बेटा सोफे पर लेटा हुआ था। न उसने मेहमान का अभिवादन किया और न ही अपनी जगह से हिला। मां ने प्यार से उसके सिर को चूमा तो उसका जवाब था कि उसे गेम खेलने दिया जाए। यह दृश्य बताता है कि कैसे जरूरत से ज्यादा लाड़ प्यार सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को खत्म कर देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजा बेटा सिंड्रोम का सबसे गहरा असर शादी के बाद सामने आता है। ऐसे पुरुष शादी के बाद भी अपने रोजमर्रा के कामों के लिए पत्नी पर निर्भर रहते हैं। खाना बनाना हो घर संभालना हो या छोटी छोटी जिम्मेदारियां निभानी हों वे अक्सर यह कहकर बच निकलते हैं कि उन्हें यह सब नहीं आता। समस्या यह नहीं कि वे सीख नहीं सकते बल्कि यह है कि उनसे कभी सीखने की उम्मीद ही नहीं की गई। इस विषय पर इंटरनेट पर तीखी बहस छिड़ गई है। कई लोग अपनी निजी कहानियां साझा कर रहे हैं। किसी ने लिखा कि उनके भाई की परवरिश भी बिल्कुल इसी पैटर्न पर हुई है। एक यूजर ने बताया कि एक कामकाजी व्यक्ति हर पंद्रह दिन में अपने गंदे कपड़ों का सूटकेस मां के पास धुलवाने के लिए लेकर आता है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कई बार माता पिता अपनी निजी जिंदगी के खालीपन को भरने के लिए बेटे को जरूरत से ज्यादा केंद्र में रख लेते हैं जिससे आगे चलकर बहू के प्रति असंतोष और टकराव पैदा होता है। मनोवैज्ञानिक साफ कहते हैं कि प्यार जरूरी है लेकिन बिना जिम्मेदारी के प्यार नुकसानदेह है। अगर बेटे को हर चीज तैयार मिलती रही तो वह एक सक्षम वयस्क नहीं बन पाएगा। जिम्मेदारी उठाना सीखना आत्मनिर्भर बनने की पहली सीढ़ी है। सही परवरिश वही है जिसमें प्यार और अनुशासन के बीच संतुलन हो ताकि बच्चा सिर्फ राजा बेटा नहीं बल्कि एक जिम्मेदार इंसान बन सके।